हैदराबाद एनकाउंटर पर CJI का बड़ा बयान- बदले की भावना से किया गया न्याय इंसाफ नहीं



हैदराबाद में गैंगरेप के आरोपियों के एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने गैंगरेप के आरोपियों के एनकाउंटर में मारे जाने की घटना की आलोचना की है. जोधपुर में एक कार्यक्रम में जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने कहा कि न्याय कभी भी आनन-फानन में किया नहीं जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर न्याय बदले की भावना से किया जाए तो अपना मूल चरित्र खो देता है.

न्याय में जल्दबाजी ठीक नहीं

हैदराबाद एनकाउंटर पर बोले CJI

आनन-फानन में हुआ न्याय, इंसाफ नहीं

हैदराबाद में गैंगरेप के आरोपियों के एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने गैंगरेप के आरोपियों के एनकाउंटर में मारे जाने की घटना की आलोचना की है. जोधपुर में एक कार्यक्रम में जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने कहा कि न्याय कभी भी आनन-फानन में किया नहीं जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर न्याय बदले की भावना से किया जाए तो अपना मूल चरित्र खो देता है.
न्याय में जल्दबाजी नहीं
जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट की नई इमारत के उद्घाटन समारोह में जस्टिस एस ए बोबड़े ने कहा, "मैं नहीं समझता हूं कि न्याय कभी भी जल्दबाजी में किया जाना चाहिए, मैं समझता हूं कि अगर न्याय बदले की भावना से किया जाए तो ये अपना मूल स्वरूप खो देता है". उन्होंने कहा कि न्याय को कभी भी बदले का रूप नहीं लेना चाहिए.
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https://m.aajtak.in/news/national/story/supreme-court-cji-sa-bobde-hyderabad-gangrape-encounter-police-justice-revenge-1143837-2019-12-07

उन्नाव रेप केस: दोस्ती, शादी, बलात्कार और जलाकर मार डालने की कहानी- ग्राउंड रिपोर्ट


प्रतीकात्मक तस्वीर

उन्नाव में गैंगरेप पीड़ित लड़की की शुक्रवार देर रात दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल में मौत हो गई.
आग में बुरी तरह झुलसी लड़की को बचाने की कोशिश में उन्नाव से लखनऊ और फिर दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल तक पहुंचाया गया लेकिन लड़की ने दो दिन के भीतर ही दम तोड़ दिया.
लड़की के घर में पहले से ही मातम पसरा हुआ था, मौत के बाद पूरा गांव ग़मगीन है. दूसरी ओर, गांव में ही रहने वाले अभियुक्तों के परिजन उन्हें निर्दोष बता रहे हैं. गांव में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात हैं.
इस बीच, शुक्रवार को इस मामले में नामज़द सभी पांच अभियुक्तों को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
पीड़ित लड़की ने इलाज के दौरान उन्नाव में ही मजिस्ट्रेट के सामने अपने बयान दर्ज कराए थे जिसके आधार पर पुलिस ने महज़ कुछ घंटों के भीतर पांच लोगों को गिरफ़्तार किया था.

गांव का इलाकाइमेज कॉपीरइटSAMEERATMAJ MISHRA/ BBC

पीड़िता के घर का हाल

उन्नाव शहर से क़रीब 50 किमी दूर बिहार थाने के अंतर्गत आता है पीड़िता का गांव. इस गांव के भीतर प्रवेश करने के बाद कुछ ही दूरी पर पीड़ित लड़की का मिट्टी, फूस और खपरैल का बना हुआ कच्चा घर है.
लड़की के बुज़ुर्ग पिता घर के बाहर चुपचाप खड़े हैं. उन्हें इस बात का बेहद अफ़सोस है कि वो अक़्सर लड़की को स्टेशन तक ख़ुद छोड़ने जाते थे लेकिन गुरुवार को न जाने लड़की अकेले ही क्यों चली गई.
हालांकि घर के भीतर मौजूद लड़की की भाभी बताती हैं कि कोर्ट के काम से या फिर अपने और किन्हीं कामों से वो अक़्सर अकेले या फिर अपने भाई या बहन के साथ बाहर जाया करती थी. पीड़ित लड़की पांच बहनों और दो भाइयों में सबसे छोटी थी.

पहले प्रेम विवाह और फिर गैंगरेप की रिपोर्ट

लड़की की पड़ोस के ही एक लड़के से जान-पहचान थी. उन दोनों ने प्रेम विवाह भी किया था लेकिन बाद में रिश्ते ख़राब हो गए.
लड़की ने इसी साल मार्च में उस लड़के और उसके एक दोस्त के ख़िलाफ़ गैंगरेप की रिपोर्ट दर्ज कराई थी जिनमें से मुख्य अभियुक्त जेल गया था और कुछ दिन पहले ही ज़मानत पर छूटकर आया था.
लड़की की भाभी बताती हैं कि दोनों ने कब शादी की थी, इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी. वह कहती हैं, "हमें तो शादी का तब पता चला जब लड़के ने और उसके घरवालों ने आकर यहां लड़ाई-झगड़ा किया, हमसे मार-पीट की. तब लड़की ने बताया कि उसने कोर्ट में शादी की है लेकिन अब वह उसे मानने से इनकार कर रहा है."

पीड़िता की भाभीइमेज कॉपीरइटSAMEERATMAJ MISHRA/BBC
Image captionपीड़िता की भाभी

अभियुक्तों के घर का माहौल

लड़की के घर से क़रीब आधे किलोमीटर की ही दूरी पर मुख्य अभियुक्त और इस मामले में पकड़े गए अन्य अभियुक्तों के घर हैं.
एक मंदिर के बाहर कई महिलाएं जुटी हुई थीं और बुरी तरह से रो रही थीं. इनमें से ज़्यादातर महिलाएं वो थीं जिनका पकड़े गए अभियुक्तों से कोई न कोई रिश्ता है. इनका आरोप है कि सभी को इस मामले में साज़िश के तहत फँसाया गया है.
मुख्य अभियुक्त की मां कहती हैं कि उनके बेटे ने न तो शादी की थी और न ही इस घटना में शामिल था. मुख्य अभियुक्त की मां पीड़ित परिवार और पुलिस वालों के इस दावे को भी नकारती हैं कि उनका बेटा लड़की के साथ रायबरेली में एक महीने तक रह चुका है.
इस मामले में एक अन्य रसूखदार महिला के पति और उनके बेटे को भी गिरफ़्तार किया गया है. वह कहती हैं, "सुबह-सुबह पुलिस आई और मेरे बेटे और पति को उठाकर ले गई. दूसरे लड़कों को भी ले गई. मैं पूछती हूं कि इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देने के बाद क्या कोई घर में आकर आराम से सो सकता है? हमारे बच्चों को बिना कुछ सोचे-समझे अपराधी बना दिया गया."
इसी साल में मार्च महीने में पीड़ित लड़की ने अपने साथ हुए गैंगरेप की जो एफ़आईआर दर्ज कराई थी, उसमें मुख्य अभियुक्त के साथ इस महिला के बेटे को भी अभियुक्त बनाया गया था.
हालांकि इस मामले में गिरफ़्तारी सिर्फ़ मुख्य अभियुक्त की ही हुई थी. सभी अभियुक्तों के परिवार वालों की मांग है कि पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके.

पीड़ित और अभियुक्त दोनों परिवारों के थे अच्छे संबंध

लड़की को आग से जलाने वाली घटना गुरुवार सुबह क़रीब चार बजे की है. पीड़ित लड़की रायबरेली जाने वाली पैसेंजर ट्रेन पकड़ने जा रही थी जो सुबह पांच बजे स्टेशन पर आती है.
पीड़ित लड़की के घर से स्टेशन की दूरी क़रीब दो किलोमीटर है और रास्ता दिन में भी बहुत गुलज़ार नहीं रहता है. गांव के एक व्यक्ति राम किशोर बताते हैं कि इसी वजह से जब लड़की को जलाया गया तो काफ़ी दूर तक भागने के बावजूद उसे मदद नहीं मिल सकी.
गांववालों की मानें तो दोनों परिवारों में दो साल पहले तक काफ़ी अच्छे संबंध थे. पीड़ित परिवार के संबंध गांव की रसूखदार महिला के परिवार से भी बहुत अच्छे थे और ख़ुद पीड़ित लड़की के पिता इस बात को स्वीकार करते हैं कि वह परिवार उनकी काफ़ी मदद करता था और बेहद ग़रीब होने के चलते सरकारी योजनाओं का लाभ भी इसी वजह से उन्हें आसानी से मिल जाता था.
लेकिन जब लड़की और लड़के के बीच रिश्ते ख़राब हुए तो दोनों परिवारों के रसूखदार महिला के परिवार से भी 'दुश्मनी' हो गई.
पीड़ित लड़की के पिता के मुताबिक़, "हमें कई बार धमकाया गया. मेरे घर पर आकर मुझे इन लोगों ने मारा-पीटा और गांव छोड़ देने की धमकी दी. मैंने कई बार पुलिस में शिकायत की लेकिन हमारी सुनी नहीं गई."

बाक़ी हैं कई सवाल

गांव में लोग इस घटना को लेकर कई तरह के सवाल उठा रहे हैं. गिरफ़्तार किए गए किसी भी अभियुक्त पर कोई भी मामला पुलिस में दर्ज नहीं है.
थाने की पुलिस इस बात की पुष्टि करती है. यही नहीं, घटना के तत्काल बाद जब अभियुक्तों के घर पर पुलिस ने दबिश दी तो लगभग सभी अभियुक्त अपने घर पर ही मिले.
गांव के एक बुज़ुर्ग सीताराम कहते हैं, "इन लड़कों को हम लोग बचपन से ही जानते हैं. गांव में कभी ऐसा कुछ इन्होंने नहीं किया कि किसी को कोई शिकायत होती. समझ में नहीं आ रहा है कि इतनी जघन्य वारदात को इन्होंने कैसे अंजाम दिया. हमारे गांव में इस तरह की कोई घटना आज तक नहीं हुई है और न ही हमें लगता है कि हमारे गांव का कोई व्यक्ति इतना बड़ा अपराधी है कि किसी को ज़िंदा जला देगा."
उन्नाव में इस घटना को शुरू से देख रहे कई पुलिस अधिकारी भी सीताराम की आशंकाओं से सहमति जताते हैं लेकिन इस बारे में वो आधिकारिक रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं. गांव में कुछ लोगों को इस बात पर भी आपत्ति है कि अन्य लोगों के अलावा मीडिया भी पीड़ित पक्ष के प्रति ज़्यादा हमदर्दी दिखा रहा है.

ग्रामीणइमेज कॉपीरइटSAMEERATMAJ MISHRA/BBC

वहीं पुलिस का कहना है कि घटना के हर पहलू की जांच की जा रही है. आईजी क़ानून व्यवस्था प्रवीण कुमार कहते हैं, "पीड़िता के बयान के आधार पर सभी पांच अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया गया है. सारे साक्ष्य इकट्ठा किए गए हैं. हमारी ये प्राथमिकता है कि जल्दी से जल्दी इस बात का पता लगाएं कि वास्तविक दोषी कौन हैं. दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलाना भी हमारी प्राथमिकता है."
बहरहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है. लेकिन गांव में लगभग हर व्यक्ति इसलिए दुखी है क्योंकि दोनों ही पक्ष उनके अपने हैं, दुनिया को छोड़ चुकी लड़की भी और सलाख़ों के पीछे पहुंचने वाले अभियुक्त भी.

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हैदराबाद एनकाउंटर: 'क्या हमारे पास ऐसे पर्याप्त प्रमाण थे कि ये अपराध उन्होंने ही किया?'


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हैदराबाद में एक महिला डॉक्टर की हत्या के आरोप में पकड़े गए चार अभियुक्तों के पुलिस कार्रवाई में मारे जाने की घटना पर क़ानून के कई जानकार सवाल उठा रहे हैं.
दिल्ली हाईकोर्ट में क्रिमिनल मामलों की वकील रेबेका मेमन जॉन और हैदराबाद स्थित क़ानून की प्रोफ़ेसर और मानवाधिकार कार्यकर्ता कल्पना कन्नाबिरन ने सवाल उठाते हुए फ़ेसबुक पर पोस्ट लिखे हैं.
वहीं ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वूमेन्स एसोसिएशन ने इस घटना की जाँच की माँग करते हुए कहा है कि ज़िम्मेदार पुलिसकर्मियों को गिरफ़्तार कर उनपर मुक़दमा चलाया जाना चाहिए.
पढ़िए उनकी प्रतिक्रियाएँ -
रेबेका मेमन जॉन की पोस्टः
"कितनी आसानी से हम भीड़ के हाथों इंसाफ़ का जश्न मनाने लगते हैं. वो पुलिस जिस पर कोई कभी भरोसा नहीं करता, वो भरी रात में चार निहत्थे लोगों को मार डालती है. क्यों? क्योंकि ऐसे लोग रहें या ना रहें किसी को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.
क्या दिल्ली पुलिस ऐसे लोगों को साथ भी ऐसा सुलूक करती जिनकी पहुँच ऊपर तक होती और जो जोर बाग़ और महारानी बाग़ में रहते हों? क्या हमारे पास ऐसे पर्याप्त प्रमाण थे कि ये अपराध उन्होंने ही किया? क्या किसी अदालत ने उन्हें देखा था उन्हें अपराधी क़रार दिया था
और मान लें कि उन्होंने ऐसा किया भी हो, तो एक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए. अगर वो ना रही, तो आपकी भी बारी आ सकती है. आप सारे निर्वाचित प्रतिनिधि, राजनीतिक दल और कार्यकर्ता न्याय का माहौल बना रहे थे...आपको न्याय मिल गया है. आप अब घर जाइए. जूस गटकिए. आपका जाली अनशन ख़त्म हो गया. आपको कभी कोई परवाह ही नहीं थी. क्योंकि अगर आपको परवाह होती, तो उन्नाव में एक महिला शिकायतकर्ता पर खुलेआम ऐसे हमला नहीं होता.
रेबेका मेमन जॉन की पोस्टइमेज कॉपीरइटFACEBOOK
बलात्कार की शिकार महिलाओं की मदद करना एक बहुत लंबा और थका देने वाला काम है. आप कभी उनसे नहीं मिले, किसी एक से भी कभी बात नहीं की. आपको ज़रा भी अंदाज़ा नहीं कि उनके ऊपर क्या बीत रही है और वो क्या चाहते हैं.
अपना सिर शर्म से झुका लीजिए. और डरिए. ये घटना आपको डराएगी. मगर याद रखिए महिलाएँ ये नहीं चाहतीं. हमारे नाम पर ऐसा मत करिए."
मानवाधिकार कार्यकर्ता कल्पना कन्नाबिरन की पोस्टः
क्या हम चाहते हैं कि अदालत बंद कर हम इस तमाशे को देखें?
"चार लोगों को मार डाला गया. क्या यही न्याय है? क्या हम चाहते हैं कि अदालतें अपना काम बंद कर दें और इस तमाशे को देखें? तेलंगाना में.
ऐसे में जब आदित्यनाथ एक प्रदेश चला रहे हैं, नित्यानंद एक राजशाही स्थापित कर रहे हैं, उन्नाव की पीड़िता को जला दिया जाता है! और अनगिनत परिवार न्याय का इंतज़ार करते रह जाते हैं.
एनकाउंटर से न्याय नहीं होता. हमें खून का प्यासा होने का समर्थन नहीं होना चाहिए. एक पुलिसया मुल्क में हमारा कोई भविष्य नहीं.
माननीय उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से मेरा एक सवाल है - आप क्या कहेंगे माननीय न्यायाधीश?"

महिला संगठन ने की जाँच की माँग

महिलाओं के एक संगठन ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वूमेन्स एसोसिएशन ने इस घटना की जाँच की माँग करते हुए कहा है कि ज़िम्मेदार पुलिसकर्मियों को गिरफ़्तार कर उनपर मुक़दमा चलाया जाना चाहिए.
संगठन ने एक बयान में कहा है कि इन पुलिस वालों से अदालत में यह साबित करने के लिए कहा जाना चाहिए कि वो सभी चार लोग आत्मरक्षा में मारे गए.
उन्होंने कहा,"यह केवल मानवाधिकारों के लिए ही नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों के लिए भी क्यों महत्वपूर्ण है? क्योंकि एक पुलिस बल जो हत्या कर सकता है, जिससे कोई भी प्रश्न नहीं पूछा जा सकता, वह महिलाओं का बलात्कार और उनकी हत्या भी कर सकता है - यह जानते हुए कि उससे कोई प्रश्न नहीं पूछा जाएगा."