दिल्ली अग्निकांड: 'मैंने तीन-चार लोगों को बचाया मगर अपने भाई को नहीं बचा सका'


बबलू के भाई
"कभी नहीं सोचा था कि भाई मुझसे दूर हो जाएगा. हर चीज़ मुझसे पूछता था कि भैया ये कर रहा हूं, वो कर रहा हूं. आग लगी थी तो भी मुझे फ़ोन किया और बोला भैया बचा लो. मगर मैं उसे नहीं बचा पाया."
दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में बैठे एक शख़्स बिलखते हुए फ़ोन पर किसी को ये सब बता रहे थे. दो लोगों ने उन्हें संभाला हुआ था. उनका भाई बबलू भी उसी फ़ैक्ट्री में काम करता था जहां रविवार सुबह आग लग गई.
बबलू के भाई मोहम्मद हैदर को मलाल इस बात का है कि वह समय रहते घटनास्थल पर पहुंच गए थे मगर अपने भाई को बचा नहीं पाए.
हैदर कहते हैं, "मैं पहुंच तो गया था मैं. इस बीच किसी ने कहा कि तुम्हारे भाई को निकाल दिया है. मेरी टेंशन कम हो गई. तीन-चार लोगों को बचाया भी मगर भाई अंदर रह गया. उस तक पहुंच नहीं पाया. जब मिला तो मुर्दाघर में पड़ा हुआ था."
पास ही बैठे एक और शख़्स ने फ़ोन पर भारी आवाज़ में किसी से कहा, "बबलू भी डेड कर गया, राजू भी डेड कर गया. तौक़ीर भी डेड कर गए."
एलएनजेपी अस्पताल में कई लोग ऐसे हैं जो घटना की ख़बर लगने के बाद अपनों की तलाश में यहां आए हैं और बड़ी हिम्मत करके फ़ोन पर घरवालों को यहां का हाल बता रहे हैं.
सूजी हुई लाल आंखें, उतरे हुए चेहरे, सुस्त क़दम, सिसकियां और रह-रहकर उठते दर्द भरी आवाज़ें. जब हम अस्पताल पहुंचे तो यही मंज़र था.
रविवार को दिल्ली की एक अनाज मंडी में लगी आग से मरने वालों और घायल हुए लोगों को यहां लाया गया है. कुछ घायलों को राम मनोहर लोहिया अस्पताल भी ले जाया गया है.
फैक्ट्री में लगी आग में मोहम्मद हैदर के भाई बबलू की मौत हो गई है.

'जिससे काम सीखने आया वही नहीं रहा'

28 साल के मोहम्मद अफसाद फैक्ट्री में जैकेट सिलने का काम करते थे. उनके छोटे भाई उनसे काम सीखने के लिए दिल्ली आए थे.
लेकिन अब उन्हें काम सिखाने वाला कोई नहीं बचा क्योंकि फैक्ट्री में रविवार को लगी आग में अफसाद की मौत हो गई.
मोहम्मद अफसाद के छोटे भाई
Image captionमोहम्मद अफसाद के छोटे भाई दिल्ली में उनसे काम सीखने दिल्ली आए थे. सोमवार को अपने परिवार से मिलने के लिए अफसाद गांव जाने वााले थे.
एलएनजेपी अस्पताल में उनके छोटे भाई उनसे मिलने पहुंचे. उनका कहना है कि "हमसे आधार कार्ड और राशन कार्ड लाने के लिए कहा गया है, हमें घर से मंगाना पड़ेगा."
उन्होंने कहा कि "तीन दिन पहले वो मुझसे मिलने आया था. वो सोमवार को घर जाने वाला था, सोमवार की टिकट थी उसकी. इसके लिए मुझसे कुछ सामान लेने आए थे. मैं रविवार को उसके लिए कुछ सामान खरीदने वाला था."
"उसके घर में मां, पिता हैं, बहन हैं, पत्नी और दो बच्चे हैं. सभी घर चलाने के लिए उन्हीं पर निर्भर हैं."
मोहम्मद सद्दाम
Image captionमोहम्मद सद्दाम
अस्पताल पहुंचे मोहम्मद सद्दाम के चाचा के बेटे के साथ ये हादसा हुआ है. उन्होंने अपने घर पर फ़ोन किया तो उन्हें घटना का पता चला.
सद्दाम ख़ुद चांदनी चौक में चश्मे का काम करते हैं.
उन्होंने कहा कि "कारखाने में पहुंच कर मैंने उनका शव देखा. उनके अभी-अभी एक बच्चा हुआ है जिसकी अब तक उसने शक्ल भी नहीं देखी. वो सोमवार को घर जाने वाला था, लेकिन जा नहीं पाया. घर पर वो अकेला कमाने वाला था."
"हमें राशन कार्ड लाने के कहा जा रहा है. यहां पर आधार कार्ड था जो जल गया, अब घर जा कर देखेंगे कि क्या राशन कार्ड में उनका नाम है."

एक परिवार के दो बेटे, एक साथ....

मोमिना और रुख़्साना
Image captionमोमिना और रुख़्साना
मोमिना और रुख़्साना के दो रिश्तेदार (दो भाई) इस हादसे का शिकार हो गए हैं.
बिहार के सहरसा जिले के नरियार का ये परिवार दिल्ली में रहता है. उनका कहना है कि एक भाई की मौत हो गई है जबकि एक भाई से अब तक वो मुलाक़ात भी नहीं कर पाई हैं.
वो कहती हैं कि "दोनों भाई जैकेट सिलने का काम करते थे और मिल कर 20-25 हज़ार महीना कमा लेते थे. उन्हीं की कमाई से घर चलता था."
"उनके पिता कमाने लायक स्थिति में नहीं हैं. परिवार में इन दोनों के अलावा चार बहने हैं जो इन्हीं पर निर्भर हैं."
दोनों कहती हैं कि उन्हें अभी शव को बिहार ले कर जाना उनके बस में नहीं है क्योंकि उनके पास पैसे नहीं हैं.
वो कहती हैं कि मदद न मिली तो वो शव लेकर गांव भी नहीं जा सकेंगी.
मोहम्मद मुशर्रफ़
Image captionमोहम्मद मुशर्रफ़

'मेरे परिवार का ध्यान रखना'

एलएनजेपी अस्पताल के पास मौजूद शोभित कुमार नाम के एक व्यक्ति ने बताया कि उनके मित्र मोहम्मद मुशर्रफ़ इसी कारखाने में काम करते थे.
शोभित बताते हैं कि 32 साल के मुशर्रफ की तीन बेटियां और एक बेटा हैं. वो सिलाई का काम करते थे.
सवेरे उनकी बात अपने मित्र से हुई थी जिन्होंने फ़ोन पर उन्हें बताया कि "फैक्ट्री में आग लग गई है, मेरे पीछे मेरे परिवार का ध्यान रखना."
शोभित ने उन्हें फैक्ट्री से कूद कर जान बचाने के लिए कहा लेकिन उनके मित्र ने कहा कि यहां से कूदने की कोई जगह नहीं है.
शोभित कहते हैं कि "अगर कोई बचने का रास्ता होता, कोई दरवाज़ा होता तो बचने की कोशिश तो करते."
मोहम्मद मुशर्रफ़ के फूफा ख़ालिद हुसैन
Image captionमोहम्मद मुशर्रफ़ के फूफा ख़ालिद हुसैन
मोहम्मद मुशर्रफ़ के फूफा ख़ालिद हुसैन ने बताया वो रविवार को ही ख़बर मिलने के बाद दिल्ली पहुंचे हैं.
वो बताते हैं कि मुशर्रफ़ 2007 से दिल्ली में काम करते थे. हालांकि वो इस फैक्ट्री में कब से काम करते थे इसकी उन्हें जानकारी नहीं है.
"वो बेहद ग़रीब परिवार से हैं. उनके सिवा उनके परिवार में कोई और काम करने वाला नहीं है. उनकी छोटी बेटी एक साल की है और बड़ी बेटी केवल चार साल की है."

दिल्ली के रानी झांसी रोड स्थित अनाज मंडी में लगी आग, 30 से ज़्यादा मरे


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Image captionघटनास्थल का हाल

दिल्ली के रानी झांसी रोड स्थित अनाज मंडी में आग लगने की वजह से कई लोगों के हताहत होने की आशंका जताई जा रही है.
घायलों को लोक नायक अस्पताल में भर्ती किया गया है. एलएनजेपी अस्पताल की डॉक्टर रितु सक्सेना ने बीबीसी को बताया है कि मरने वालों का आंकड़ा 34 पहुंच गया है.
एक पुलिसकर्मी ने अपना नाम ना प्रकाशित करने की शर्त पर बीबीसी को बताया है कि हताहत होने वालों में अधिकतर लोग 15 से 20 आयुवर्ग के किशोर हैं.
इस पुलिसकर्मी ने यह जानकारी भी दी है कि जिस इमारत में आग लगी उसमें प्लास्टिक के खिलौने बनाने का काम किया जाता था.
फ़ायर ब्रिगेड की करीब 25 गाड़ियां अभी मौके़ पर मौजूद हैं. दिल्ली दमकल विभाग के प्रमुख अतुल गर्ग ने बताया है कि उनकी टीम ने अभी तक 50 से अधिक लोगों को बचाया है.

आग पर काबू पाया गया

दमकल विभाग के प्रमुख अतुल गर्ग ने बताया कि घनी आबादी वाला इलाका होने की वजह से बचाव कार्य में परेशानियां आई हैं. उन्होंने बताया, ''संकरी गली होने की वजह से फ़ायर ब्रिगेड की गाड़ी या एंबुलेंस अंदर तक नहीं जा सकी. इसलिए बचावकर्मी घायलों को अपने कंधों पर उठाकर बाहर लेकर आए.''
अतुल गर्ग ने बताया कि जिस इमारत में आग लगी है उसमें काफी ज़्यादा मात्रा में कागज़ और गत्ते रखे हुए थे जिसके चलते धुआं पैदा हो गया, धुएं की वजह से लोगों को बचाने में और अधिक परेशानी हुई है.
सर्च ऑपरेशन में शामिल एक अधिकारी ने मीडिया को जानकारी दी है कि अब आग पर क़ाबू पा लिया गया है, तलाशी अभियान भी पूरा हो गया है. अधिकारी ने बताया कि अब मदद के लिए एमसीडी को बुलाया गया है.

दमकल विभाग के प्रमुख अतुल गर्गइमेज कॉपीरइटANI
Image captionदिल्ली दमकल विभाग के प्रमुख अतुल गर्ग

नेता और मंत्री मौक़े पर पुहंचे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर दुख जताते हुए ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा है, ''दिल्ली की अनाज मंडी में लगी आग की घटना बहुत भयावह है. मेरी संवेदनाएं उनके साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया. मैं घायलों के जल्दी ठीक होने की आशा करता हूं. प्रशासन की तरफ से हरसंभव मदद पहुंचाई जा रही है.''
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर इस घटना को बहुत दुखद बताया है.

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बल्लीमारान विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के विधायक इमरान हुसैन भी आग लगने वाली जगह पर पहुंच चुके हैं. उन्होंने मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि वो आग लगने की वजहों का पता लगवाएंगे साथ ही उन्होंने इसकी जांच करवाने की बात भी कही है.

बल्लीमारान सीट से विधायक इमरान हुसैनइमेज कॉपीरइटANI
Image captionबल्लीमारान सीट से विधायक इमरान हुसैन

उन्होंने कहा, ''यह पुरानी दिल्ली है जहां बहुत ही संकरी गलियां हैं और मकान भी आपस में जुड़े रहते हैं.'' जब उनसे पुरानी दिल्ली के मकानों में चलने वाली अवैध फ़ैक्ट्रियों के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि इसकी ज़िम्मेदारी एमसीडी की है, जो भी अवैध फैक्ट्रियां होंगी उनके ख़िलाफ़ जांच की जाएगी.
इसके साथ ही दिल्ली सरकार में मंत्री सत्येंद्र जैन भी मौक़े पर पहुंचे हैं.

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