वाराणसी में बीते दिनों गंगा की लहरों पर भाजपा पार्षद की नाव में चिकन और शराब पार्टी करने वाले पांच आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया, लेकिन उन्हें महज 24 घंटे के भीतर ही जमानत मिल गई। वहीं, मार्च 2026 में गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी और बिरयानी खाने के मामले में 14 मुस्लिम युवकों को दो महीने तक जेल में रहना पड़ा था। #VaranasiNews #UttarPradesh #Varanasi
फैसला बंदूकों से नहीं होता न्यायालय बने हैं जेल बनी है कानून मौजूद है। गलत को गलत सही को सही कहने की आदत डालें। हत्या अपराधी करे या पुलिस वो न्याय की जगह नहीं ले सकता। कौन मारा गया हिन्दू या मुसलमान ? यह इंपार्टेंट नहीं है इंपार्टेंट है कि मनुष्य मरा।
मेरे कुछ मुस्लिम मित्र ऐसे हैं जो किसी हिन्दू की हत्या और इनकाउंटर पर ठीक उसी तरह खुश होते हैं जैसे कोई नफरती हिंदू किसी मुस्लिम के इनकाउंटर पर होता है।गजब यह है कि जिस वक्त किसी मुस्लिम युवक का गलत इनकाउंटर होता है i उनके मुंह पर दही जम जाती है। जो अतीक अहमद की हत्या पर उफ्फ तक नहीं कर सके मैं उनसे उम्मीद नहीं करता कि वो भरत तिवारी की हत्या पर सहानुभूति के दो शब्द बोलेंगे। जब किसी मुस्लिम का इनकाउंटर होता है तो कितने मुसलमान कहते हैं गलत हुआ?मुझे तो कोई नहीं दिखता। इनको इतना कॉमन सेंस नहीं है कि कोई भी मनुष्य जब पुलिस या हत्यारों के बेरहम हाथों से असमय मारा जाता है तो सिर्फ एक व्यक्ति नहीं मरता मनुष्यता मरती है। फैसला बंदूकों से नहीं होता न्यायालय बने हैं जेल बनी है कानून मौजूद है। गलत को गलत सही को सही कहने की आदत डालें। हत्या अपराधी करे या पुलिस वो न्याय की जगह नहीं ले सकता। कौन मारा गया हिन्दू या मुसलमान ? यह इंपार्टेंट नहीं है इंपार्टेंट है कि मनुष्य मरा।