बादशाह सदाकत
************* आखिर दोहरा मापदंड क्यूँ *************
बडे-बडे दुर्दान्त अपराधीयों , आततायीयों , अत्याचरीयों को महिमामंडित हुये लोगों ने देखा है। जमानत पर छुटते हुये देखा है। जेल से रिहा होते देखा है। इतना ही नही उसे सत्ता और संगठन के शीर्ष पदों पर आशिन होते हुये देखा है। कोई चर्चा नही । कोई डीबेट नही। कोई खतरा नही। सुप्रिम कोर्ट जाने की माँग नही। यहाँ तक की सामूहिक नरसंहारो के दोषियों के खिलाफ भी शीर्ष न्यायालय मे जाने का सवाल नही । तो फिर कौन सा कारण है कि एक पूर्व सांसद को ग्यारह वर्षों के बाद जेल से बाहर आने पर इतना बबाल हो रहा है
* क्या इसलिये की वह मुसलनान है
* क्या इसलिये की वह राजद से जुडा हुआ है , जो गरीबों , पीछडों , अति पीछडों , दलितों , महादलितों, अकलियतों और समाजिक न्याय मे विश्वास रखने बाले प्रगतिशिल लोगों का प्रतिनिधित्व करने बाली एक मात्र राजनीतिक दल है ।
* क्या इसलिये की वह उस लालू यादव को अपना नेता मानता है , जिसने समाज के अन्तिम पायदान के लोगों को शदियों की मानशिक गुलामी से मुक्ति दिलाने का काम किया । जिसने पीछडों ,अति पीछडों , दलितों , महादलितों , अकलियतों , सभी वर्ग एवं समुदाय के गरीबों और अन्तिम पायदान के लोगों को राजनैतिक और प्रशासनिक भागीदारी , समाजिक सम्मान और आर्थिक हिस्सेदारी देने का काम किया । जिसके कारण उन्हें साम्प्रदायिक और सामंती शक्तियों के साजिश का शिकार बनना पडा और आज भी न केवल वे बल्की उनका परिवार उन लोगों के मुख्य टारगेट पर है ।
कारण स्पष्ट है अन्यथा जमानत मिलना तो एक सामान्य न्याययिक प्रक्रिया है। पर जो हो रहा है वह निश्चित रूप से एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है । जिसका उद्देश्य देश और प्रदेश को विकास से मर्हुम कर सामंतवादी व्यवस्था को पुनर्स्थापित करना है।
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************* आखिर दोहरा मापदंड क्यूँ *************
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