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लोकसभा चुनाव 2019: क्या मुस्लिम मतदाताओं ने बीजेपी के लिए वोट डाले?


मुस्लिम वोटर्सइमेज कॉपीरइटREUTERS
जब किसी चुनाव में एक पार्टी को बड़ी जीत मिलती है, जैसा कि बीजेपी लोकसभा चुनाव 2019 में दर्ज़ करने में कामयाब हुई, तो यह माना जाता है कि सभी वर्गों के वोट जीतने वाली पार्टी के पक्ष में गए हैं, और हारने वाली पार्टी के पक्ष में सब कुछ नकारात्मक गया.
यह विश्वास इतना मजबूत है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन के बावजूद बीजेपी को मिली बड़ी जीत के बाद इस समझा गया कि वहां मुसलमानों ने भी बीजेपी के पक्ष में वोट डाले हैं.
इसके लिए तर्क दिया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी का वोट शेयर जो 2014 में 40 फ़ीसदी था वो 2019 में बढ़कर 49 फ़ीसदी हो गया. माना गया कि इन चुनावों में मुसलमानों के वोटिंग पैटर्न में बदलाव हुआ है और उन्होंने बीजेपी के हक में वोट डाले हैं.
यह माना गया कि हो सकता है मुस्लिम पुरुष मतदाताओं ने वोट न दिये हों लेकिन मुस्लिम महिला मतदाताओं ने उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में बीजेपी को वोट दिया है.
तर्क ये दिया गया कि ऐसा इसलिए संभव हुआ क्योंकि मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक़ क़ानून से बहुत खुश हैं. बीजेपी ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान इसे पारित किया था.
उन लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक है, वहां बीजेपी के वोट शेयर में बढ़ोतरी देखी गई, तो इस तर्क को और भी बल मिला.
क्या मुस्लिम मतदाताओं ने बीजेपी के लिए वोट डाले
10 प्रतिशत से कम मुस्लिम मतदाताओं वाले निर्वाचन क्षेत्रों में बीजेपी को 34.9 प्रतिशत वोट पड़े, जबकि 10 से 20% मुस्लिम मतदाताओं वाले निर्वाचन क्षेत्रों में बीजेपी को 39.2% वोट डाले गये.
यह भी महत्वपूर्ण है कि जहां मुस्लिम वोटों का अनुपात बहुत अधिक है (20 से 40 फ़ीसदी), वहां बीजेपी के वोटों की हिस्सेदारी बढ़ कर 43.8% हो गई.
क्या मुस्लिम मतदाताओं ने बीजेपी के लिए वोट डालेइमेज कॉपीरइटREUTERS
लेकिन यह मानना बेहद आसान होगा कि जिन लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में मुसलमानों की संख्या अधिक है और वहां बीजेपी के वोट शेयर बढ़े हैं तो इसका मतलब यह है कि मुसलमानों ने बीजेपी प्रत्याशी को वोट दिये हैं.
आम तौर पर यह माना जाता है कि तीन तलाक़ के ख़िलाफ़ क़ानून की वजह से ख़ास तौर पर मुस्लिम महिलाओं के बीच बीजेपी को समर्थन प्राप्त है, लेकिन सबूत के तौर पर 2019 के चुनाव नतीजों में मिले मुस्लिम वोट शेयर इसकी ताक़ीद नहीं करते क्योंकि इस समुदाय के वोट शेयर बीजेपी के पक्ष में बढ़े ही नहीं.
चुनाव बाद के सर्वेक्षण के अनुमान बताते हैं कि 8% मुस्लिमों ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया जबकि 33% ने कांग्रेस को वोट दिया, जबकि अलग-अलग राज्यों में मुस्लिम मतदाताओं के एक बड़े हिस्से ने क्षेत्रीय दलों को वोट दिया है.
2014 में भी क़रीब 8% मुस्लिम मतदाताओं ने ही बीजेपी को वोट दिया था. यह प्रतिशत क़रीब दो दशकों से यूं ही बना हुआ है. यदि 1996, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों को देखें तो बीजेपी को 7 से 8% मुसलमानों के वोट मिलते रहे हैं. इस मामले में अपवाद 2004 का लोकसभा चुनाव था. तब केवल 4 से 5% मुसलमानों ने ही बीजेपी के पक्ष में वोट डाले थे.
क्या मुस्लिम मतदाताओं ने बीजेपी के लिए वोट डाले
इन चुनावों में यह दावा किया गया था कि बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं ने बीजेपी के लिए वोट किया है. लेकिन चुनाव के बाद सर्वेक्षण में मिले आंकड़े इसकी गवाही नहीं देते. इन आंकड़ों में बीजेपी को पड़े मुस्लिम पुरुष और महिलाओं के वोटों में शायद ही कोई बदलाव देखने को मिला.
हां, केवल एक बदलाव ज़रूर दिया ग्रामीण मुसलमानों और शहरी मुसलमानों के वोटिंग पैटर्न में. शहरी मतदाताओं ने बड़ी संख्या में बीजेपी और कांग्रेस दोनों को वोट दिये हैं, स्पष्ट तौर पर उनमें से कुछ ने क्षेत्रीय पार्टियों को भी वोट दिये हैं.
क्या मुस्लिम मतदाताओं ने बीजेपी के लिए वोट डालेइमेज कॉपीरइटREUTERS
जिन राज्यों में बीजेपी और कांग्रेस की बीच सीधा मुक़ाबला था वहां मुसलमानों ने बीजेपी को अधिक वोट दिये हैं. ये राज्य हैं मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और कुछ अन्य राज्य. यहां 15 से 20 प्रतिशत मुस्लिम वोट बीजेपी को मिले.
लेकिन जहां पिछले कुछ दशकों के दौरान क्षेत्रीय दल बहुत मजबूत हुए हैं जैसे कि पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, यहां मुस्लिम मतदाताओं का वोट क्षेत्रीय पार्टियों को गया है.
बिहार में कांग्रेस-आरजेडी, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, आंध्र प्रदेश में टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस को मुस्लिम वोट मिला (यहां क़रीब-क़रीब शून्य फ़ीसदी मुस्लिम वोट कांग्रेस के पक्ष में गये).
क्या मुस्लिम मतदाताओं ने बीजेपी के लिए वोट डाले
(प्रोफ़ेसर संजय कुमार सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ़ डेवलपिंग सोसाइटीज के निदेशक है.)
(इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं. इसमें शामिल तथ्य और विचार बीबीसी के नहीं हैं और बीबीसी इसकी कोई ज़िम्मेदारी या जवाबदेही नहीं लेती है)

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