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पेगासस जासूसी पर मोदी सरकार बहस से क्यों बच रही है?

 


  • विनीत खरे
  • बीबीसी संवाददाता
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28 जुलाई बुधवार को शाम चार बजे आईटी (सूचना और तकनीक) पर संसद की स्टैंडिंग कमेटी की दूसरे दिन की बैठक शुरू होनी थी, लेकिन समिति के एक सदस्य पीआर नटराजन के मुताबिक़ बैठक शुरू होने से एक घंटे पहले सूचना आई कि बैठक में शामिल होने आने वाले गृह और आईटी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी नहीं शामिल होंगे.

नटराजन के मुताबिक़ ऐसा पहले नहीं हुआ कि स्टैंडिंग कमेटी के बैठक में शामिल होने वाले मंत्रालय के अधिकारी बिना कुछ बताए न आए हों और इस बारे में लोकसभा स्पीकर से शिकायत दर्ज करा दी गई है.

इस समिति के एक अन्य सदस्य के मुताबिक़ स्टैंडिंग कमेटी के भाजपा सदस्य आए, लेकिन उन्होंने मीटिंग रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया और कोरम पूरा होने की वजह से ये बैठक नहीं हो सकी.

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इस सदस्य के मुताबिक़ मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों का स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में नहीं आ पाना किसी इमरजेंसी या अन्य कारणों से हो सकता है, लेकिन उनका समिति को इस बारे में कोई जानकारी न देना, या उनकी जगह किसी दूसरे अधिकारी को नहीं भेजना, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ.

इस सदस्य ने कहा कि मंत्रालय के अधिकारियों के स्टैंडिंग कमेटी के समक्ष नहीं आने से चेयरमैन शशि थरूर "आश्चर्यचकित थे.

भाजपा सदस्यों ने इस समिति की मंगलवार को पहले दिन की मीटिंग का ये कहते हुए बहिष्कार किया था कि स्टैंडिंग कमेटी के प्रमुख कांग्रेस के शशि थरूर अपना "निजी एजेंडा" चला रहे हैं.

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, "जब संसद चलती है तो हमारा काम लोकसभा और राज्यसभा को चलाना होता है और उसमें ऐसी मीटिंग करना उचित नहीं है."

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तो आख़िर ऐसा क्या है कि भाजपा सांसद नहीं चाहते कि इन्फ़ॉर्मेशन और टेक्नॉलजी की संसदीय स्टैंडिंग समिति की बैठक हो?

अंदरूनी कार्रवाई में गोपनीयता की वजह से इस स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य शक्ति सिंह गोहिल ने इस बैठक में चर्चा का विषय नहीं बताया, लेकिन मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ 31 सदस्यों वाली इस समिति की बैठक का एजेंडा सिनेमैटोग्राफ़ (संशोधन) बिल-2021 के प्रारूप के संदर्भ में भारतीय फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड के कामकाज की समीक्षा करना था.

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पेगासस स्पाईवेयर स्कैंडल पर इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में शशि थरूर ने कहा था कि लोगों के डेटा की सुरक्षा, उनकी निजता और साइबर सिक्योरिटी समिति के एजेंडे पर हैं.

उधर भाजपा सांसद निषिकांत दुबे ने शशि थरूर को समिति से हटाए जाने की मांग की है.

उन्होंने एक ट्वीट में लिखा, "वो संविधान के ख़िलाफ़ जाकर काम कर रहे हैं. कमेटी में चर्चा होने वाली बातें पहले मीडिया में चली जाती हैं. यह सदन उन्हें कमेटी के अध्यक्ष पद से हटाए. और जब तक उन्हें इस पद से न हटाया जाए, इस कमेटी की बैठक न हो."

इस विषय पर शशि थरूर से बातचीत नहीं हो पाई.

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पेगासस पर चर्चा क्यों नहीं?

दुनिया की कई मीडिया संस्थानों ने इसराइल की सर्विलांस कंपनी एनएसओ ग्रुप के साफ़्टवेयर पेगासस पर पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, नेताओं, मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों के फ़ोन की जासूसी करने का दावा किया है.

विपक्ष इस पर बहस और जाँच की मांग कर रहा है और उसने सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि क्या पेगासस साफ़्टवेयर सरकार ने ख़रीदा.

सरकार फ़ोन की जासूसी के आरोपों को ख़ारिज कर रही है और इसे फ़ेक न्यूज़ बता रही है. पेगासस मुद्दे पर विपक्ष ने लगातार संसद की कार्रवाई को बाधित किया है.

वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी के मुताबिक़ भाजपा के नेता मीडिया से कह तो रहे हैं कि वो किसी भी विषय पर बात करने को तैयार हैं, लेकिन दरअसल सरकार पेगासस पर कोई चर्चा नहीं चाहती.

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नीरजा कहती हैं, "आईटी की स्टैंडिंग समिति में शांतिपूर्वक बातचीत होती है. कई बार समिति में मामला इसलिए जाता है कि बातचीत से इसे सुलझा लिया जाए. अगर वहाँ से भाजपा के सांसद वॉकआउट करते हैं, इसका मतलब है कि वो (बात के लिए) बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं. न वो स्टैंडिंग कमेटी में तैयार हैं, न संसद में तैयार हैं."

नीरजा कहती हैं किसी विषय पर संसद में चर्चा न होना, स्टैंडिंग कमेटी से वॉकआउट जैसे क़दम चिंताजनक हैं.

वे कहती हैं, "इस तरह तो संसद का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा."

नीरजा चौधरी कहती हैं, "आमतौर पर मैं इस बात को मानती हूँ कि हल्ला-गुल्ला करने की बजाए आपको ज़ोरदार बहस करना है, अपने आँकड़े रखने हैं, अपने तर्क, तथ्य संसद के अंदर रखने हैं. लेकिन इस बार सरकार इतनी अड़ गई है कि विपक्ष के पास हल्ला के अलावा कोई हथियार ही नहीं है ताकि देश में आवाज़ जाए कि ये हो रहा है."

हमने इस रिपोर्ट के लिए समिति के भाजपा सदस्य निशिकांत दुबे और राज्यवर्धन राठौर से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली.

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पेगासस पर सरकार

सरकार के पेगासस मुद्दे पर अपने क़दम पर क़ायम रहने की कई वजहें बताई जा रही हैं.

पहला ये कि सरकार को लगता है कि पेगासस का मामला महंगाई, रोज़ी-रोटी या कोविड जैसा नहीं है, जिससे आम आदमी का जीवन सीधे तौर पर प्रभावित होता है, और ये जल्द ही मीडिया की सुर्खियों से गायब हो जाएगा.

दूसरा, विपक्ष में एकता की कमी है और उसके पास ऐसे धाकड़ नेता नहीं हैं जो आम आदमी तक आसान शब्दों में पेगासस से जुड़े ख़तरे पहुँचा पाएँ. हालांकि पी चिदंबरम जैसे नेता सरकार के लिए मुश्किलें पैदा कर सकते हैं.

विपक्ष सरकार से पूछ रही है कि वो क्यों मामले पर किसी जाँच से कतरा रही है.

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समिति पर सरकार का दबाव

आरोप लग रहे हैं कि स्टैंडिंग कमेटी के भाजपा सदस्य सरकार के इशारे पर कार्रवाई का बायकॉट कर रहे हैं या उसमें कथित तौर पर बाधा डाल रहे हैं.

दरअसल समिति सदस्य और सीपीएम के पीआर नटराजन ने बीबीसी को बताया कि मंगलवार को समिति की पहले दिन के बैठक के क़रीब तीन घंटे पहले दोपहर एक बजे उन्हें केंद्रीय श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव के दफ़्तर से फ़ोन आया कि वो उनसे दो बजे मिलना चाहते हैं, लेकिन जब वो मिलने वाली जगह पहुँचे और भूपेंद्र यादव को बताया कि उनका ताल्लुक सीपीएम पार्टी से है तो उन्हें कहा गया कि मीटिंग आईटी स्टैंडिंग कमेटी में शामिल भाजपा सांसदों के लिए है.

और इस मुलाक़ात के कुछ देर बाद भाजपा सांसदों ने स्टैंडिंग कमेटी की मीटिंग का बहिष्कार किया.

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ये ख़बर सबसे पहले द हिंदू अख़बार में छपी थी और अभी तक भूपेंद्र यादव के दफ़्तर से इस बारे में कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

समिति के एक और सदस्य ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि उन्हें भी श्रम मंत्री के दफ़्तर से ऐसा ही फ़ोन आया था जिस पर वो आश्चर्यचकित रह गए थे लेकिन 15 मिनट बाद आए एक दूसरे फ़ोन कॉल में उनसे कहा गया कि उन्हें नहीं बुलाया गया.

पीआर नटराजन कहते हैं, "भाजपा के सांसदों का फ़ैसला कोई तुरंत लिया गया फ़ैसला नहीं था. उन्हें भाजपा हाईकमान ने ऐसा करने के लिए कहा था."

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अभी ये स्पष्ट नहीं है कि स्टैंडिंग कमेटी की अगली बैठक कब होगी. एक सदस्य के मुताबिक़ ये फ़ैसला चेयरमैन शशि थरूर लेंगे, लेकिन एक अन्य सदस्य के मुताबिक़ ये फ़ैसला स्पीकर लेंगे.

आईटी संसदीय स्टैंडिंग कमेटी के एक अन्य सदस्य और टीआरएस पार्टी के गद्दाम रंजीत रेड्डी कहते हैं, "मेरी सलाह होगी कि एक संयुक्त संसदीय समिति की संरचना हो और उन्हें इस पर (पेगासस) पर बहस करने दें."

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