चोरी के सैकड़ों क्विंटल अनाज के खरीदार को पुलिस ने पकड़ा,पुलिस अगर गहराई से पूछ ताछ करेगी तो कई सफ़ेदपोश चेहरे के बेनकाब होने की संभावना जताई जारही,मगर स्थानिये पुलिस ऐसा करने के लिए तैयार है?

बारा चकिया (पूर्बी चंपारण ,बिहार)चकिया पुलिस ने दिनांक 15 .1.2013 को थाना के तेहत आने वाले मनीछपरा पंचायत के वार्ड नंबर निवासी एक वैक्ति को गिरफ्तार  सरकारी चावल खरीदने के आरोप में गिरफ्तार किया,सूत्रों के अनुसार पुलिस ने सैकरों क्विंटल सरकारी अनाज बरामद की,आरोपी के ऊँची पहुँच और कई सफ़ेदपोश से संबंध रहने के कारण स्थानिये पुलिस पुरे मामले को दबाने की कोशिश में लगी है ,सूत्रों के अनुसार आरोपी प्रशाशन की मिलीभगत से सालों से बी पी एल , अन्तयोदय और मिड डे मील के अनाजों को सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से खरीदने का काम करता था ,लोगों का कहना है के  पुलिस अगर कड़ाई से पूछ -ताछ  करे तो सरकारी स्कूलों में होने वाले मीड डे मील चोरी की घटनाओं का प्रदाफ़ाश हो सकता है,पर सूत्रों की माने तो बारा चकिया पुलिस मामले को गंभीरता से लेने के मूड में नहीं,सूत्रों के अनुसार आरोपी वैक्ति के पंचायत में पिछले 10 सालों में मीड डे मील के अनाजों की कई चोरी की घटनाएं घटीं ,पर पुलिस ने गहनता से जांच करने की बजाये मामले को सूत्रहीन जान बुझकर करार देकर मामले की लीपा पोती करदी,वर्ना सूत्रों के अनुसार आरोपी बहूत पहले जेल की सलाखों में होता ....
आरोपी के बगल के एक उर्दू प्राथमिक विद्यालय दो दो बार मीड डे मील की चोरी की घटना बहूत कम अंतराल पे हुआ ,लेकिन स्थानिये पुलिस के मामले में जेयादा रुची न लेने के कारण मामले का खुलासा न हो सका,और आरोपी सालों से पुलिस की आखों से बचता रहा ,सूत्रों के अनुसार आरोपी से उसके पंचायत,और बगल के पंचायत में हुए तमाम मीड डे मील चोरी की घटनाओं के सम्बन्ध में पूछ ताछ करे तो मामले का खुलासा हो सकता है,और क्षेत्र के कई सफ़ेदपोश चेहरे बेनकाब होंगे ,लेकिन क्या पुलिस विभाग के आला अधिकारी ऐसा करने के लिए तैयार हैं



                   Print Article          Bookmark and Share
Roznamasahara e-Paper

Published in 15 Jan-2013 | Print Edition of Roznama Sahara
                   Print Article          Bookmark and Share
Roznamasahara e-Paper

Published in 15 Jan-2013 | Print Edition of Roznama Sahara

दलित के साथ जुल्म और नाइंसाफी की इससे बड़ी और क्या मिशाल हो सकती है ?

         दलित जुल्म की एक मिशाल आपके सामने पेश है ,जो अंग्रेजों के जरिये ढाए गए जुल्म को भी फीका करदे
मामला बिहार के पूर्बी चंपारण से ज़ुरा हुआ है
        उपरोक्त जिला के फेन्हरा ब्लॉक के बारा परसौनी पंचायत के एक ऊँची जाति के एक मुखिया ने अपने बेटे और भतीजी को बहाल कराने के लिए पहले एक दलित जाति के एक पंचायत शिक्षक श्री सुनील कुमार पासवान को एक साजिश के तहत शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों से मिलकर हटा दिया,वह भी इस प्रकार से के सुनील कुमार काम भी 6 सालों से उपर से काम भी करते रहे पर वेतन न मिला ,मगर बैक डोर से बहाल उची जाति के मुखिया के जरिये बहाल रिश्तेदारों के वेतन भुगतान में किसी प्रकार की रुकावट न आई ,मगर श्री सुनील कुमार चुके दलित जाति से संबंध था सो इनका वेतन मिलता तो कैसे,सुनील कुमार दौरते रहे मगर न मुखिया ने इनकी सुनी न बिहार के सुशासन बाबू की वह सरकार जो दलितों और अल्पसंख्यकों के कल्याण के नाम पर सालों से हुकूमत स्थापित है ,बात जब न बनी 6 साल से भी जेयदा अर्से बीत गए,तब बिहार के मशहूर सौतंत्र पत्रकार  सह मानवाधिकार कार्यकर्ता  मोहम्मद कौसर नदीम ने दलित सुनील कुमार को इन्साफ दिलाने के खातिर मोर्चा संभाला ,जनाब नदीम ने पुरे मामले को निष्पक्ष जांच कराने हेतु बिहार राज मानवाधिकार के अध्यक्ष श्री एस एन झा  को पत्र  लिखा ,
राज मानवाधिकार आयोग के आदेश के बाद जांच तो हुई ,पर साल बीत  गए ,पर न जाने मावाधिकार आयोग भी आज तक फैसला न ले सका ,शायद ऐसे संस्थानों में भी कहीं बैठे बरी जाति  कहीं सुनील कुमार पासवान के इन्साफ पाने की राह में रुकावट तो नहीं? ,ये सवाल उठने लगे हैं,कयोंके मामला इतना गंभीर ,और इन्साफ होने में इतनी देरी ? सवाल उठे भी क्यों नहीं ,जिस मानवाधिकार आयोग के आदेश के बाद वारिये अधिकारिओं ने जांच की ,गलत ढंग से बहाल लोगों को हटाया ,लेकिन उनके विरूद्ध  आज तक एफ आई आर तक दर्ज न  हुआ ,यानि ऊँची जाति के जालसाजों के साथ मरौअत और इमानदार दलितों के साथ न इंसाफी?अगर ये नाइंसाफी की मिशाल नहीं तो बिहार के सुशासन बाबू  और उनके कर्ता धर्ता बताएं के ये किस बात की निशानी है .......
       बात यहीं पर ख़त्म हो जाती तो कोई बात नहीं थी ,मगर  अंधा  कानून का ही शायद परिणाम था के मुखिया के बेटे ने एक समय में दो स्थानों पर सालों साल नौकरी भी करता रहा यानि के एक ही समय में वह डाक विभाग का मुलाजिम भी रहा और पंचायात शिक्षक भी ,जरा खुद सोंचिये के भला बगैर किसी आला अधिकारिओं की मिली भगत के संभव हो सकता था .........हम को तो कतई मुमकिन नहीं दिखता लेकिन आप  लोग क्या सोंचते हैं?
        मामले का सबसे मजेदार पहलू तो ये है के वारिये पदाधिकारी अपने को इस मामले में फंसता देख मुखिया के बेटे और भतीजी के वेतन भुगतान पर जब रोक लगाईं तो इन लोगों ने मुख्मंत्री के सेवा यात्रा में जाकर नाइंसाफी की गुहार लगाईं ,मगर सच्चाई सामने पहले ही आ चुकी थी सो वारिये पदाधिकारियों ने अब आगे साथ तो जरूर न दी मगर इन जालसाजों को बचाने में कोई कमी नहीं की ,मसलन प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी ने इन जालसाजों के विरुद्ध कार्रवाई की अनुसंसा कर रख्खी है ,शायद  ऊँची जाति और ऊँची पकड़ का ही नतीजा है के प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी के आदेश के बावजूद न तो जाल जालसाजों से रुपया ही वसूला जा सका है और न अब तक एफ आई आर ही दर्ज हो सका ,ऐसी सूरत में अब नीतीश किस मूह से कहते फिरेंगे के मैं दलित और अल्पसंख्यक प्रेमी हूँ?और हमारे प्रदेश में न्याय के साथ विकास भी हो रहा ?



4/1/2013 को जब एस डी ओ बारा चकिया से जब पूछा गया के 20 दिन बीत जाने के बावजूद आगे की कार्रवाई हेतु सम्बंधित अधिकारी के पास नहीं पहुँच पाना कानूनन कितना बिहार के पूर्बी चंपारण के बारा चकिया के एस डी ओ ने ये कह कर सुशासन को कटघेरे में ला दिया है के जनता की फाइल , आवेदन जब तक चाहेगा चांप के और दबा के रखे गा ,यानी काम अपनी मर्जी से करेगा ,कानून के हिसाब से नहीं ,मामले के बारे में बताया जाता है के एक आवेदक  ने जन्म प्रमाण पत्र बनाने हे तू आवेदन दिनांक 13 दिसंबर 2012 को  एस डी ओ कार्यालय बारा चकिया  में किया था , बीस दिनों बाद जब कल्यानपुर बी डीओ से पता किया तो बताया के अब तक उक्त  आवेदन अब तक हमारे कार्यालय में नहीं पहुंचा है ,साथ ही ये भी कहा के हमारे यहाँ जब किसी का आवेदन आता है तो हम उसको नहीं रोकते,उसी दिन उसको पंचायत सचिव के पास आगे की करवाई करने हेतु भेज देते हैं,लेकिन जब उनसे 20 दिन बीत जाने के बाद भी एस  डी  ओ  कार्यालय से अबतक न आना कानून के हिसाब पूछा के कितना उचित है? ,तब बी डीओ ने कहा के जानते नहीं हैं एस डीओ ऑफीस के कर्मचारी कुछ लेन देने के लिए रोके रहता है ,लेकिन  दिनांक उचित है ?तो एस डी साहब ने कहा के कानून हमको मत समझाइये ,जब कहा गया के आप खुद सोंचे 20 दिन तक आवेदन को रोके रखना आपको नहीं लगता के गलत है ?,तब उन्हों ने कहा के बिलकुल उचित है यानी जब तक जितने दिनों तक चाहेंगे जनता का आवेदन रोक के एस डी साहब अपने पास रखेंगे ,शायद लगता है एस  डी ओ  साहेब को कानून की परवाह नहीं।पूर्बी चंपारण के डी डी सी को जब दिनांक 8/1/2013 को पुरे मामले से औगत कराते हुए उनका मंतव लिया गया तो उन्हों ने इस इस पुरे प्रकरण की जांच कर करवाई करने की बात की ......


Md Kaushar Nadeem shared a status.
Sunday
बिहार के पूर्बी चंपारण के बरा चकिया के एस डी ओ ने ये कह कर सुशासन को कटघेरे में ला दिया है के जनता की फाइल , आवेदन जब तक चाहेगा चांप के और दबा के रखे गा ,यानी काम अपनी मर्जी से करेगा ,कानून के हिसाब से नहीं ,मामले के बारे में बताया जाता है के एक आवेदक ने जन्म प्रमाण पत्र बनाने हे तू आवेदन दिनांक 13 दिसंबर 2012 को एस डी ओ कार्यालय बारा चकिया में किया था , बीस दिनों बाद जब कल्यानपुर बी डीओ से पता किया तो बताया के अब तक उक्त आवेदन अब तक हमारे कार्यालय में नहीं पहुंचा है ,साथ ही ये भी कहा के हमारे यहाँ जब किसी का आवेदन आता है तो हम उसको नहीं रोकते,उसी दिन उसको पंचायत सचिव के पास आगे की करवाई करने हेतु भेज देते हैं,लेकिन जब उनसे 20 दिन बीत जाने के बाद भी एस डी ओ कार्यालय से अबतक न आना कानून के हिसाब पूछा के कितना उचित है? ,तब बी डीओ ने कहा के जानते नहीं हैं एस डीओ ऑफीस के कर्मचारी कुछ लेन देने के लिए रोके रहता है ,लेकिन दिनांक 4/1/2013 को जब एस डी ओ बारा चकिया से जब पूछा गया के 20 दिन बीत जाने के बावजूद आगे की कार्रवाई हेतु सम्बंधित अधिकारी के पास नहीं पहुँच पाना कानूनन कितना उचित है ?तो एस डी साहब ने कहा के कानून हमको मत समझाइये ,जब कहा गया के आप खुद सोंचे 20 दिन तक आवेदन को रोके रखना आपको नहीं लगता के गलत है ?,तब उन्हों ने कहा के बिलकुल उचित है यानी जब तक जितने दिनों तक चाहेंगे जनता का आवेदन रोक के एस डी साहब अपने पास रखेंगे ,शायद लगता है एस डी ओ साहेब को कानून की परवाह नहीं।पूर्बी चंपारण के डी डी सी को जब दिनांक 8/1/2013 को पुरे मामले से औगत कराते हुए उनका मंतव लिया गया तो उन्हों ने इस इस पुरे प्रकरण की जांच कर करवाई करने की बात की www.biharbroadcasting.com......
3Like ·  · Promote · 

Md Kaushar Nadeem shared a status.
Sunday
बिहार के पूर्बी चंपारण के बरा चकिया के एस डी ओ ने ये कह कर सुशासन को कटघेरे में ला दिया है के जनता की फाइल , आवेदन जब तक चाहेगा चांप के और दबा के रखे गा ,यानी काम अपनी मर्जी से करेगा ,कानून के हिसाब से नहीं ,मामले के बारे में बताया जाता है के एक आवेदक ने जन्म प्रमाण पत्र बनाने हे तू आवेदन दिनांक 13 दिसंबर 2012 को एस डी ओ कार्यालय बारा चकिया में किया था , बीस दिनों बाद जब कल्यानपुर बी डीओ से पता किया तो बताया के अब तक उक्त आवेदन अब तक हमारे कार्यालय में नहीं पहुंचा है ,साथ ही ये भी कहा के हमारे यहाँ जब किसी का आवेदन आता है तो हम उसको नहीं रोकते,उसी दिन उसको पंचायत सचिव के पास आगे की करवाई करने हेतु भेज देते हैं,लेकिन जब उनसे 20 दिन बीत जाने के बाद भी एस डी ओ कार्यालय से अबतक न आना कानून के हिसाब पूछा के कितना उचित है? ,तब बी डीओ ने कहा के जानते नहीं हैं एस डीओ ऑफीस के कर्मचारी कुछ लेन देने के लिए रोके रहता है ,लेकिन दिनांक 4/1/2013 को जब एस डी ओ बारा चकिया से जब पूछा गया के 20 दिन बीत जाने के बावजूद आगे की कार्रवाई हेतु सम्बंधित अधिकारी के पास नहीं पहुँच पाना कानूनन कितना उचित है ?तो एस डी साहब ने कहा के कानून हमको मत समझाइये ,जब कहा गया के आप खुद सोंचे 20 दिन तक आवेदन को रोके रखना आपको नहीं लगता के गलत है ?,तब उन्हों ने कहा के बिलकुल उचित है यानी जब तक जितने दिनों तक चाहेंगे जनता का आवेदन रोक के एस डी साहब अपने पास रखेंगे ,शायद लगता है एस डी ओ साहेब को कानून की परवाह नहीं।पूर्बी चंपारण के डी डी सी को जब दिनांक 8/1/2013 को पुरे मामले से औगत कराते हुए उनका मंतव लिया गया तो उन्हों ने इस इस पुरे प्रकरण की जांच कर करवाई करने की बात की www.biharbroadcasting.com......
3Like ·  · Promote · 


जालसाजों की चाँदी ? आरक्षी अधीक्षक पूर्बी चंपारण के आदेश देने के चौदह दिन बाद भी जालसाजी के एक मामले में दर्ज न हुई एफ आई आर ...

आरक्षी अधीक्षक पूर्बी चंपारण के आदेश के बावजूद जालसाजी के एक मामले में जालसाजों के खेलाफ अब तक कार्रवाई नहीं हुई है,सूत्रों के अनुसार उपरोक्त जिला के फेन्हरा थाना के गैबन्धी निवासी मुस्मात दुखनी कुंवर ने आरक्षी अधीक्षक पूर्बी चंपारण को लिखित शिकायत दिनांक 29/12/2012 को की थी के उसके नाम पर जारी इंद्रा आवास का रुपया फेन्हारा ब्लॉक के बारा परसौनी उतरी पंचायत के मुखिया और पंचायत सचिव ने जालसाजी कर रुपया गबन कर लिया है,सूत्रों के अनुसार मामला आरक्षी अधीक्षक पूर्बी चंपारण के संज्ञान में दिनांक 4/01/2012 को आया  तो एफ आई आर के आदेश भी दिए,मगर न जाने अंदर की बात क्या है,के आज चौदह (14)दिन बीत जाने के बावजूद अब तक एफ आई आर  न होने से कई तरह के सवाल पैदा होने लगा है .........यहाँ बता ते चले के दुखनी कुंवर के पत्र के अनुसार साल 2003-2004 में इंदरा आवास देने हेतु सरकार ने पैसा जारी किया पर उसे एक अठन्नी तक हाथ न लगी,सरकारी रिकॉर्ड में दिनांक 18/05/2004 को अंतिम भुगतान भी दिखाया गया है।


Published in 14 Jan-2013 | Print Edition of Roznama Sahara

                   Print Article          Bookmark and Share
Roznamasahara e-Paper

Published in 12 Jan-2013 | Print Edition of Roznama Sahara

मुस्लिम नौजवानों के खेलाफ आतंकवाद का झूठा मुक़दमा

                    मुस्लिम नौजवानों के खेलाफ आतंकवाद का झूठा मुक़दमा 

       औरंगाबाद 9,जनवरी (यू एन आई ) रेयासत महाराष्ट्र के नांदेड जिला से दहशत गर्दी  क्व इल्जामात के तेहत गिरफ्तार चार मुस्लिम नौजवानों की रिहाई को लेकर आज यहाँ जमिअत -उल -ओलेम (अरशद मदनी)के वकील ने सेसन कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के नक़ल पेश किया और कहा के पुलिस ने उन नौजवानों के खेलाफ दहशत गर्दी का झूठा मुक़दमा दर्ज किया है,जिसके बाद शेसन अदालत ने इस्तेगासा (अभियोजन)की भी बहस सुनी और जमनत के दरखास्त पर फैसला लेने की तारीख ..............तय की ,आरोपियों की पैरवी करने वाले वकील अधिवक्ता खिज्र पटेल ने अदालत के रूबरू सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया और कहा के प्रदेश की आतंकवाद निरोधक दस्ता ने कल आरोपियों के खेलाफ जो चार नये इल्जेमात (आरोप) लगाये हैं वह उनपर कानूनन लागु नहीं ही सकते ,कयोंके जांच एजेंसियों ने जिन धाराओं को आयेद (लागू) किया है उसका कोई सबूत नहीं है ........
       उन्होंने अदालत को बताया के जांच एजेंसियों  ने आरोपियों पे .... यू ए पी ए   एक्ट की जो धारा लगाए हैं उसके मुताबिक़ आरोपियों का किसी संदिग्ध और प्रतिबंधित संगठन की सरगर्मी और कारवाईयों में भाग लेना जरुरी है लेकिन उपरोक्त मामलों में आरोपियों के खेलाफ ऐसा कोई पुख्ता सबूत नहीं है जिससे की ये साबित हो सके की आरोपियों का संबंध किसी संदिग्ध और प्रतिबंधित संगठन के कारवाईओं में भाग लिया हो ......सुप्रीम कोर्ट के दो मशहूर फैसलों बिनायेक सेन ,और डॉक्टर रमीज का जिक्र करते हुए बचाओ पक्ष के वकील ने अदालत को बताया के उन फैसलों में सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ शब्दों में कहा के किसी संदिग्ध संगठन का कार्यकर्ता होना इस बात का सबूत नहीं के आरोपियों उसके सरगर्मियों ,और कारवाईयों में भी शामील हों .....बचाओ पक्ष के दलील सुनने के बाद सरकारी वकील ने भी कुछ जवाज पेश किये और कहा के आरोपियों को अगर जमानत पर रिहा किया जाता है तो वह फरार हो सकते हैं या फिर उनकी रिहाई गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं .......वाजेह रहे के गुजिस्ता दिनों प्रदेश .... ए टी एस  ने महाराष्ट्र के नांदेड (nander )जिला से चार मुस्लिम नौजवान आरोपियों में मुजम्मिल सादिक ,इरफ़ान ,और इल्यास को गैर कानूनी करवाई  रोक थाम से सम्बंधित कानून के दफात 5,और खतरनाक हथियार रखने वाले कानून की धारा 5 के तहत गिरफ्तार किया था ,और उनपर इल्जाम लगाया था के विदेश से सम्बंधित लश्करे तैबा और हर्कतुल मुजाहेदीन नामी संगठनों से ईमेल और टेलीफोन  के जरिये सम्पर्क बनाये हुए था .......और उनके पास से पुलिस ने दो रिवाल्वर भी जब्त किये थे ........

उर्दू दैनिक पिन्दार में दिनांक 10/01/2013 को प्रकाशित .........

एस डी ओ साहेब को कानून की परवाह नहीं?.डी डी सी मोतिहारी ने दिए जाँच के आदेश

4/1/2013 को जब एस डी ओ बारा चकिया से जब पूछा गया के 20 दिन बीत जाने के बावजूद आगे की कार्रवाई हेतु सम्बंधित अधिकारी के पास नहीं पहुँच पाना कानूनन कितना बिहार के पूर्बी चंपारण के बारा चकिया के एस डी ओ ने ये कह कर सुशासन को कटघेरे में ला दिया है के जनता की फाइल , आवेदन जब तक चाहेगा चांप के और दबा के रखे गा ,यानी काम अपनी मर्जी से करेगा ,कानून के हिसाब से नहीं ,मामले के बारे में बताया जाता है के एक आवेदक  ने जन्म प्रमाण पत्र बनाने हे तू आवेदन दिनांक 13 दिसंबर 2012 को  एस डी ओ कार्यालय बारा चकिया  में किया था , बीस दिनों बाद जब कल्यानपुर बी डीओ से पता किया तो बताया के अब तक उक्त  आवेदन अब तक हमारे कार्यालय में नहीं पहुंचा है ,साथ ही ये भी कहा के हमारे यहाँ जब किसी का आवेदन आता है तो हम उसको नहीं रोकते,उसी दिन उसको पंचायत सचिव के पास आगे की करवाई करने हेतु भेज देते हैं,लेकिन जब उनसे 20 दिन बीत जाने के बाद भी एस  डी  ओ  कार्यालय से अबतक न आना कानून के हिसाब पूछा के कितना उचित है? ,तब बी डीओ ने कहा के जानते नहीं हैं एस डीओ ऑफीस के कर्मचारी कुछ लेन देने के लिए रोके रहता है ,लेकिन  दिनांक उचित है ?तो एस डी साहब ने कहा के कानून हमको मत समझाइये ,जब कहा गया के आप खुद सोंचे 20 दिन तक आवेदन को रोके रखना आपको नहीं लगता के गलत है ?,तब उन्हों ने कहा के बिलकुल उचित है यानी जब तक जितने दिनों तक चाहेंगे जनता का आवेदन रोक के एस डी साहब अपने पास रखेंगे ,शायद लगता है एस  डी ओ  साहेब को कानून की परवाह नहीं।पूर्बी चंपारण के डी डी सी को जब दिनांक 8/1/2013 को पुरे मामले से औगत कराते हुए उनका मंतव लिया गया तो उन्हों ने इस इस पुरे प्रकरण की जांच कर करवाई करने की बात की ......