पार्लियामेंट और मुंबई पर हमले हुकूमत ने ही करवाए थे

 पार्लियामेंट और मुंबई पर हमले हुकूमत ने ही करवाए थे
न्यू डेल्ही 1 4  जुलाई ( एजेंसी ) इशरत जहाँ फर्जी एनकाउंटर मामले में सी बी आई और आई बी के दरमयान जारी झगरे के दौरान गृहमंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी ने बेहद चौकाने वाला दावा किया है , अफसर का कहना है के 2 0 0 1 में पार्लियामेंट हिउसे पर 2008 में मुंबई में हुए  आतंकी हमले की साजिश खुद सरकार ने कराये थे , इशरत जहाँ फर्जी एनकाउंटर मामले में अदालत को दिए एक हलफनामे में गृहमंत्रालय में तत्कालीन अंडर सेक्रेटरी आर वी एस मणि ने कहा है के आई पी एस अधिकारी सतीश वर्मा ने कहा था के ये दोनों आतंकी हमले दहशतगर्दी के खेलाफ बनाये जाने वाले कानून को मजबूत आधार प्रदान करने के लिए कराये गए थे , श्री वर्मा कुछ दिन पहले तक सी बी आई ,  एस आई टी की जाच टीम के सदस्य थे , मणि के मुताबिक़ बर्मा ने कहा था के 1 3  दिसंबर 2001 को पार्लियामेंट हाउस पर हमला पोटा कानून को पास कराने से पहले किया गया था , जबके 26/11 /2008 को मुंबई पर हुए हमले दह्शात्गार्दाना हमले के बाद गैर कानूनी रोक थाम अधिनियम में संसोधन
किया गया , गृहमंत्रालय के पूर्व अधिकारी का कहना है के इशरत जहाँ मामले की जाँच कर रही सी बी आई ,एस आई टी के एक सदस्य ने पार्लियामेंट और मुंबई पर 26/11 के दह्शात्गार्दाना हमले के लिए उस वक्त की सरकारों पर साजिश रचने का इल्जाम लगाया था ,एक अंग्रेजी अखबार के रिपोर्ट के मुताबिक़ इशरत जहाँ  एनकाउंटर मामले  की जांच में सरकार के तरफ से अदालत में हलफ़नामे पर दस्तखत करने वाले गृहमंत्रालय के पूर्व अतिरिक्त सचिव आर वी एस मणि ने कहा के हाल तक सी बी आई ,एस आई टी  के सदस्य रहे सतीश वर्मा ने बताया था के दोनों आतंकी घटना की साजिश उस वक्त की सरकार ने रची थी ,श्री मणि ने सतीश के हवाले से कहा के 13/12/2001 को पार्लियामेंट पर हमले के बाद पोटा कानून लागु किया गया ,फिर 26/11/2008 को मुंबई पर हुए आतंकी हमले के बाद गैर कानूनी सरगर्मी रोक थाम सम्बंधित कानून में तबदीली की गई ,याद रहे के दोनों हमलों के वक़्त क्रमशः बी जे पी और कांग्रेस की सरकारें केंद्र में थी . गुजरात कैडर के आई पी एस अधिकारी सतीश वर्मा ने कहा था के मुझे पता नहीं क्या शिकायत है ? किसने की ?और कब की ? न इसे जान्ने में मेरी कोई दिलचश्पी है ,इस तरह के मामलों में मीडिया से बात नहीं कर सकते , आप सी बी आई से पूछिए , इशरत जहाँ मामले में गठित  एस आई टी सदस्य सतीश वर्मा का हाल हे में जुनागर पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में प्रिंसिपल की हैसियत से ट्रान्सफर किया गया है ,हाल ही में शहरी मंत्रालय में डिप्टी ऑफिसर बनाये गए आर वी एस मणि ने अपने आला अधिकारियों को लिखे ख़त में कहा है के सतीश वर्मा वही कह रहे जो पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी आई एस आई कहती है , उनके मुताबिक़ ,बर्मा ने 2 2 जून को अहमदाबाद में उस वक़्त कही थी जब वह एनकाउंटर मामले में गृहमंत्रालय के दो हलफनामे पे उनसे पुच -ताछ कर रहे थे   , मणि ने शहरी विकाश मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी को लिखे ख़त में इल्जाम लगाया है के वर्मा ने उनके एक बयान पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया थे , जिसमें कहा गया था के , एनकाउंटर मामले में पहला हलफनामा आई बी के दो अधिकारी ने तैयार किया था , मणि ने कहा के मै यह जानता था के ऐसा बयान मेरे अपने उस वक्त के सीनियर अधिकारी पर झूठे इल्जाम लगाने जैसा है , इसलिए मैंने इस बयान पर हस्ताषर करने से इनकार कर दिया (उर्दू दैनिक पिन्दार पटना दिनाकं 15/7/2013 से लिया गया है )

न्यू डेल्ही 1 4  जुलाई (एजेंसी) गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंदर मोदी की हत्या से सम्बंधित इशरत जहाँ फर्जी एनकाउंटर मामले में फंसे आई बी के जॉइंट डायरेक्टर राजेंदर कुमार के ख़ुफ़िया जानकारी पर संगीन सवाल उठने लगे हैं , इशरत जहाँ फर्जी एनकाउंटर के साथ सादिक जमाल एनकाउंटर मामले की जाँच कर रही सी बी आई को ऐसे पुख्ता सुराग मिले हैं .जिससे राजेंदर कुमार की यह जानकारी ,किसी खास मकसद के तेहत दी गई मालुम हो रही है , सरकार के आला सूत्रों के मुताबिक़ सादिक के फर्जी एनकाउंटर के तार अंडरवर्ल्ड से जुड़े है , राजेंदर कुमार ने ही गुजरात की आई बी ब्रांच के नेत्रित्व के दौरान 1 अक्तूबर 2002  को ख़ुफ़िया कानकारी मुहैया कराइ थी के सादिक जमाल लश्कर - ए -तैयेबा का दहशतगर्द है और मुख्य मंत्री नरेंदर मोदी की हत्या के लए तैयार बैठा है , सी बी आई के मुताबिक़ यही जानकारी 3 जनवरी 2003 को सादिक के कथित हरता की वजह बनी थी , वजेह रहे के इसके एक साल बाद राजेंदर कुमार ने इशरत जहाँ और इसके तीन दोस्तों के बारे में ठीक इसी तरह ख़ुफ़िया जानकारी उपलब्ध कराइ थी , आला सरकारी सूत्रों ने बताया के सादिक 1 9 दिसंबर 2002 को अपनी गिरफ्तारी से तक़रीबन आठ माह पहले दुबई से नौकरी कर के वापस आया था , वह दुबई में अंडर वर्ल्ड  दाउद इब्राहिम के करीबी छोटा शकील के रिश्तेदार के यहाँ काम करता था , इस मामले में दायर चार्जशीट में कहा है के वहां सादिक का शमीम चक्लूं नाम के दाउद के गुर्गे से झगडा हो गया था , सूत्रों के मुताबिक यह बात भी सामने आई के सादिक ने इस खानदान की किसी औरत के साथ बदसलूकी की थी , सी बी आई ने इस बात को रिकॉर्ड नहीं किया है , झगडे की सुलह सफाई के बाद सादिक हिन्दुस्तान वापस आ गया , सूत्रों के मुताबिक़ इस झड़े के बाद से ही दाउद के लोगों ने सादिक को मारने का फैसला कर लिया था , दुबई की शख्त कानून की वजह से वहां छोड़ दिया गया , सी बी आई इस बात की भी जांच कर रही है के इस मामले से राजेंदर की ख़ुफ़िया जानकारी की किस हद तक सम्बन्ध है ?(उर्दू दैनिक पिन्दार पटना दिनाकं 15/7/2013 से लिया गया है )

Aakhir samaj kalyan vibhag itna meharban keyon hai?

Aakhir samaj kalyan vibhag itna meharban keyon hai? PANCHAYAT MANICHAPRA,BLOCK KALYANPUR,JILA PURBI CHAMPARAN,KE WARD NO 1 ME CHALNE WALE ANGAN BARI KENRA KI BAHALE MEIN BARAY PAMANAY PAR DHANDHLI HUI THI, YE AB PURI TARAH PRAMANIT HOTA DIKH RAHA,KYON K RTI SE SUCHNA 2 BAR YANI 27.5.08, AWEDAK MD.KAUSAR NADEEM,AUR ALI NAWAJ K DAWARA MANGI GAYI SUCHNA DT.14.9.9 KA JAWAB ADHIKARIYON NE TAMAM KOSHISO K BAWAJUD NA DEKAR ADHIKARIYO NE KHUDKO SANDEH K GHERE ME GHER LIYA,MAGAR MANTRAY KI SPECIAL KIRPA KE KARAN DOSHIYON PAR SHIKANJA ABTAK NAHI KASA JA SAKA,SUTRON K ANUSAR BHARASHTACHARIYO KI PAKAR UPAR TAK HAI?

Gunjan patel&uske dosto ko chode jane par hangama keyon hai?

Gunjan patel&uske dosto ko chode jane par hangama keyon hai?Dunia wishwas par tiki hai,samaj ka smamaj aur qanun par se wishwash se khatm hona achchi bat nahi,mahabodhi mandir mandir me huye dhamake ki janch desh ki sabse wishwashniye agency kar rahi,agency ne abtak ki puch-tach se saticefied hone k bad he choda hoga,aisi halat me,ek wishesh political party k jariye mudda banate huye wirodh kiya jana kitna uchit tha,kisi ko aropy,kisi ghatna me mahaj kisi party & samudaye wishesh se sambadh rahne k karan nahi banaya jana chahiye.aisa dharm aur qanun dono lehaj se galat hai. www.biharbroadcasting.com
DM & SP motihari ke pas,Arun Raut(vill.ibrahimpur parsauni,p.s. fenhara,dist.motihari) ne gair qanuni dhang se sudi karobar karne wale dabang k jariye taqat ke balpar jamin qabja kiye jane ki shikayat dt. 27.6.13 ko ki thi,suchna k mutabik,victim ko insaf dene hetu koi karwai nahi ki gai ha.

ए टी एस और सी बी आई के खेलाफ़ जाँच की संभावना , पूर्व ए टी एस प्रमुख के पी रघुवंसी , राज वर्धन और सुबोध जैसवाल के रोल की जांच हो सकती है , सी बी आई के ए डी जी कुमार को भी जवाब देना पर सकता है .

ए टी एस और सी बी आई के खेलाफ़ जाँच की संभावना , पूर्व  ए टी एस प्रमुख के पी रघुवंसी , राज वर्धन और सुबोध जैसवाल के रोल की जांच हो सकती है  , सी  बी आई के ए डी जी कुमार को भी जवाब देना पर सकता है .

न्यू दिल्ली ,2 5  मई 2013(एजेंसी ): माले  गाँव 2006 के बम ब्लास्ट में बेकसूर मुस्लिम नौजवानों को फंसाने वाले महाराष्ट्र  ए टी एस के अफसरानों और उनकी जांच को सही मानते हुए उन्ही दृष्टिकोण से मामले को आगे बढ़ाने वाले सी बी आई के अफसरों को अब अपनी इस हरकत (प्रथम दृष्टि  में भेदभावपूर्ण सोंच को साबीत करती है )पर जवाब देना पर सकता है , के  जानकारों में मुताबिक़ केंद्र ने इस इल्जाम को गंभीरता से लिया है के 9 बेकसूर मुसलमानों को बुरे नियत और बैमानी के तेहत फसाया गया था ..दिल्चश्प बात ये है के केंद्रीय सरकार की जानिब से ए टी एस और सी बी आई के खेलाफ जाँच के इशारे ऐसे वक़्त में मिल रहे , जब एक खोजी पत्रकार  आशीष  खेतान ने मुस्लिम नौजवानों के दहशतगर्दी के झूटे इल्जाम में फंसाए जाने से संबंधित हाई कोर्ट में लैटर पेटिसन  दाखिल किया है , केयाश लगाया जा रहा है के उपरोक्त petition पर अदालत के जरिये किसी आदेश की हालत में संभावित बेइज्जती से बचने के लिए सरकार  ने ये कार्रवाई कर रही है , सनद रहे के 2006 में शबेबारात के मौका पे मालेगांव में हुए धमाकों के बाद ए टी एस ने 9 मुस्लिम नौजवानों को उपरोक्त ब्लास्ट को अंजाम देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था .मुसलमानों और इन्साफ पशंद हिन्दुओं की तरफ से साफ सुथरी जांच की    अपील  के बाद भी ए टी एस ने कोई धेयान नहीं दिया तो जाँच की जिम्मेदारी सी बी आई को सोंपी गई थी , मगर सी बी आई के बैमान अफसरों ने भी वही काम किया था ,जो काम उसके पूर्व के संविधान और कानून के खेलाफ़ काम करने वाले अफसरों ने किया था , और देश को गुमराह किया था .लेकिन बाद में असीमानंद के इकबालिया जुर्म और एन आई ए  की जाँच ने उपरोक्त धमाकों में भगवा आतंकवाद की पुष्टि कर दी थी , उपरोक्त ब्लास्ट में चार भगवा आतंकवादियों के खेलाफ़ चार्जशीत  फाइल की है जबके 3 को फरार घोषित किये हुए है। केंद्रीय गृहमंत्रालय के एक आला अफसर ने पी टी आई को बताया  है के  महाराष्ट्र सरकार को ये  "सलाह" दी  जा सकती है के वह ए टी एस  के उन अफसरान के रोल की जांच करे  जिन्होंने कथित तौर पर 9 बेकसूर मुस्लिम नौजवानों को फंसाया था .मालेगांव बम धमाका की शुरूआती जांच नासिक (देहाती क्षेत्र )के एडिशनल suprintendent  ऑफ़ पुलिस राज वर्धन  ने की थी , बाद में केस ए  टी एस  के हवाले कर दिया गया था . अबरार अहमद जिसे ए  टी एस ने बम धमाकों का मुल्जिम बनाया था  का इल्जाम है के  उस वक़्त के ए  टी एस  के डी आई जी  सुबोध जैसवाल और ए टी एस चीफ के पी रघुवंशी ने अबरार की जानिब से मनगढंत इकबालिया बयान तैयार किया था . सुबोध जैसवाल खुफिया विभाग में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग RAW में तैनात हैं , जबके के पी रघुवंशी थाणे के पुलिस कमिशनर हैं . केस जब सी  बी आई के हवाले किया गया तो जांच की जिम्मेदारी जॉइंट डायरेक्टर अरुण कुमार के हवाले की गई थी जो  अब उत्तर प्रदेश के अडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस हैं , आरोपियों के घर वालों ने अरुण कुमार के जाँच के  तरीके पर एतराज  करते हुए इल्जाम लगाया था के सी बी आई की किसी टीम ने जाँच के लिए मालेगांव का दौरा तक नहीं किया और न उनके घरवालों से बात कर उनके पक्ष जानने की कोशिश की थी (पिंदार पटना dt.26/05/2013 page 6.) www.biharbroadcasting.com

सिस्टम की खराबी की वजह से इन्साफ मिलने में हो रही देर (सलमान खुर्शीद)

सिस्टम की खराबी की वजह से इन्साफ मिलने में हो रही देर  (सलमान खुर्शीद)

 नै दिल्ली ,कांग्रेस के सिनिअर लीडर 2 3 मई 2013 (यू एन आई) कांग्रेस के सिनिअर नेता और केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने आज स्वीकार किया है के सिस्टम में ऐसी  खराबी  मौजूद है जिसके कारण आतंकी वारदातों  को अंजाम देने के नाम पर जेलों में बंद बेगुनाहों को इन्साफ मिलने में दिक्क़त हो रही ,ताहम उन्होंने दावा  किया है के उनकी सरकार हर आदमी को इन्साफ दिलाने के ओने अहद पर कायम है और इसके लिए हर मुमकिन कोशिश भी कर रही है . जनाब खुर्शीद पुलिस की हेरासत में खालिद मुजाहिद की मौत और उससे पूर्व के दुसरे मामलों के हवाले स्व पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे  , उन्होंने कहा के   एन आई ए  की स्थापना इसी मकसद के तेहत किया गया है ताके बेगुनाहों को इन्साफ मिल सके ,उन्होंने दवा किया है के इसके अच्छे रिजल्ट भी सामने आने भी लगे हैं . जिनका इससे पहले नोकसान हो चुका उनपर अब वह सिर्फ अफ़सोस ही कर   सकते  हैं  . खालिद के  के हवाले से जनाब खुर्शीद ने कहा के इस मामले को मुसलामानों के नजरिये से नहीं बलके मानवाधिकार के हवाले से उठाने की जरुरत है .उनहोंने यह भी कहा के इस मामले पर तमाम सियासी पार्टियों को पार्टी स्तर  से ऊपर उठ करसोंचना चाहिए .एक सवाल के जवाब में जनाब खुर्शीद ने कहा के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में किसी मामले को जिस तरह बढ़ा चढ़ा कर पेश किया जाता है वह बेलासुबहा  एक संगीन और खतरनाक मसला है लेकिन सरकार के पास इस पर लगाम लगाने के लए फिलहाल कोई मैकेनिज्म अथवा तरीका मौजूद नहीं . जानाब खुर्शीद  उर्दू पत्रकारों के साथ विशेष भेंट वार्ता में उपरोक्त बातें कही।  (पिन्दार उर्दू पटना दिनांक 24/05/2013 page number .7)  www.biharbroadcasting.com

भेद भाव के कारण मुसलमानों में बढ़ रही असुरक्षा की भावना (काटजू) मुसलामानों को बदनाम करनेवालों क्व खेलाफ जस्टिस काटजू ने की बेबाक आलोचना सहारनपुर 1 7 मई (एजेंसी प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन मारकंडे काटजू ने गुजिस्ता दिनों एक सिम्पोजियम को खेताब करते हुए खुले तौर पर इस बात और इस सच्चाई को स्वीकार किया था के मुसलामानों के खेलाफ इम्तेयाजी सलूक अथवा भेदभावपूर्ण रवैया के कारण मुसलामानों में असुरक्षा की भावना बढ़ा है और इसी के साथ उनहोंने मीडिया को लताड़ा भी था के वह मुस्लिम कम्युनिटी के खेलाफ बेहूदा रिपोर्टिंग करके उनके किरदार अथवा छवी को संदेहास्पद बना रहा और वह अपनी गैर जिम्मेदाराना से पूर्ण पत्रकारिता के जरिये उनके हौसले को पस्त भी कर रहा है . जनाब जस्टिस काटजू ने कहा है के ये एक ऐसी हरकत है के जिसके खेलाफ आवाज उठाने की असल जरुरत है .


भेद भाव  के कारण मुसलमानों में बढ़ रही असुरक्षा की भावना (काटजू)
मुसलामानों को बदनाम करनेवालों क्व खेलाफ जस्टिस काटजू ने की बेबाक आलोचना
सहारनपुर 1 7  मई (एजेंसी
प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन मारकंडे काटजू ने गुजिस्ता दिनों एक सिम्पोजियम को खेताब करते हुए खुले तौर पर इस बात और इस सच्चाई को स्वीकार किया था के मुसलामानों के खेलाफ इम्तेयाजी सलूक अथवा भेदभावपूर्ण रवैया के कारण मुसलामानों में असुरक्षा की भावना बढ़ा है और इसी के साथ उनहोंने मीडिया को लताड़ा भी था के वह मुस्लिम कम्युनिटी के खेलाफ बेहूदा रिपोर्टिंग करके उनके किरदार अथवा छवी को संदेहास्पद बना रहा और वह अपनी गैर जिम्मेदाराना से पूर्ण पत्रकारिता के जरिये उनके हौसले को पस्त भी कर रहा है . जनाब जस्टिस काटजू ने कहा है के  ये एक ऐसी हरकत है के जिसके खेलाफ आवाज उठाने की असल जरुरत है .
   

           
 इससे पूर्व जस्टिस काटजू ने अपने बेबाक बयानात में हर उस हिन्दुस्तानी फिरका की हेमायत में प्रेस की जमकर मुखालेफत की है के जिनको प्रेस अपने मुफाद के लिए और अपनी चटपटी सुर्ख़ियों के लिए इस्तेमाल कर रहा है , उन्होंने कहा के जब कभी भी कोई भी बम धमाका होता है तो एक घंटे के अन्दर हमारे मुल्क के बहुत सारे टी वी चैनेल ये दिखाना शुरू कर देते हैं के इंडियन मुजाहेदीन जैश मोहम्मद  या हरकतुल मुजाहेदीन , हरकते जिहाद इस्लामी या फिर किसी और कथीत मुस्लिम संगठनों ने इस बम धमाके की जम्मेदारी काबुल करने के लिए एस एम् एस भेजा है और इसी एस एम् एस को बुनियाद बनाकर राष्ट्रीय मीडिया अल्पसंख्यक तबका को अपने टी वी चैनलों के जरिये डराना शुरू कर देता है . जस्टिस काटजू ने मज्र्र्द कहा के एक इ मेल या एस एम् एस कोई भी असामाजिक तत्व भेज सकता है ,लेकिन जब आप टी वी पर या फी अगले दिन प्रिंट मीडिया में इसको इस तरह से दिखाना शुरू कर डरते हैं मानो तमाम मुसलमान आतंकवादी होते हैं ,और वह बम फेंकने के अलावा कुछ नहीं करते ?आप पुरे मुस्लिम समाज की हौसले को पस्त और मुस्लिम समाज को अपने इस गलत काम से बदनाम कर देते हैं और देश में समप्रदाइक्ता का जहर घोल देते हैं .जनाब मारकंडे काटजू इंग्लिश दैनिक हिन्दू के बैनर तले  " रिपोर्टिंग टेरर मीडिया किस तरह संजीदा है "पर एक सिम्पोजियम को संबोधित करते हुए पिछले दिनों अपने बेबाक लहजे में ये भी  कहा था के देश की राष्ट्रीय मीडिया का गैर जिम्मेदाराना हरकत मुल्क में फिरकापरस्ती को बढ़ावा दे रहा है ?जनाब काटजू न कहा था के ये नहायत बेहूदा हरकत है मैंने इस हरकत के खेलाफ आवाज़ बुलंद  की है  , लेकिन वह कहते हैं के मई मीडिया को दबा रहा हूँ ये खेयाल जाहिर करते हुए के मीडिया को एख्लाकियात का पाबन्द होना चाहिए और अपनी कौमी अथवा राष्ट्रीय जिम्मेदारी को जेहन नशीं करना चाहिए . जस्टिस काटजू ने आगे कहा था वह देश में अमन व भाई चारा देश की सुरक्षा और मीडिया की आजादी को बेहतर तौर से देखना चाहते हैं ,लेकिन वह ऐसी मीडिया को बिल्कुल पशंद नहीं करते जो देश की सुरक्षा , और देश की भाई चारा के लिए खतरनाक हो .

उर्दू दैनिक पिन्दार पटना दिनांक 18/05/2013 पृष्ट नंबर 6 से लिया गया है .   www.biharbroadcasting.com 

www.biharbroadcasting.com: Afroz Alam Sahilमैं सोच रहा हूं कि सरकार को एक ऐस...

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Afroz Alam Sahilमैं सोच रहा हूं कि सरकार को एक ऐस...
: Afroz Alam Sahil मैं सोच रहा हूं कि सरकार को एक ऐसा कानून बना देना चाहिए कि जो भी मुसलमान आतंकवादी घटनाओं के नाम पर गिरफ्तार हो, उसे ...

मैं सोच रहा हूं कि सरकार को एक ऐसा कानून बना देना चाहिए कि जो भी मुसलमान आतंकवादी घटनाओं के नाम पर गिरफ्तार हो, उसे तुरंत फांसी दे दी जाए... आखिर इतने सालों तक किसी को जेल में रखने से फायदा क्या... कोर्ट का महत्वपूर्ण समय भी बर्बाद होता है... और ज़्यादातर मामलों में कोर्ट इन्हें बेगुनाह ही साबित कर देती है... बेचारे हमारे पुलिस वालों को कुछ ज़्यादा ही मेहनत करनी पड़ जाती है... अब किसी को होशियारी के साथ जान से मारना भी तो मेहनत का काम है ना... कितना दिमाग लगाना पड़ता होगा... इन पुलिस वालों को तो अवार्ड दिया जाना चाहिए कि कहीं तो यह अपना दिमाग लगाते हैं...
I am thinking that the Government should make a law that Muslims were arrested in the name of terrorist events, gave him instant executions. ... After all these years in prison up to benefit from ... The Court is also significant time waste ... And in most cases the Court gives them guiltless who misuses the same proven ... Poor have only our policemen more hard work is need ... Now anyone with a life even harder to kill than intelligently work right ... How does the brain will find ... These policemen should the award that it spend your mind ... (Translated by Bing)
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भावनाभेदभाव के कारण मुसलमानों में बढ़ रही असुरक्षा की भावना ,ऐसी मीडिया को बिल्कुल पशंद नहीं करते जो देश की सुरक्षा , और देश की भाई चारा के लिए खतरनाक हो (काटजू)

भावनाभेदभाव के कारण मुसलमानों में बढ़ रही असुरक्षा की भावना (काटजू)
मुसलामानों को बदनाम करनेवालों क्व खेलाफ जस्टिस काटजू ने की बेबाक आलोचना
सहारनपुर 1 7  मई (एजेंसी
प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन मारकंडे काटजू ने गुजिस्ता दिनों एक सिम्पोजियम को खेताब करते हुए खुले तौर पर इस बात और इस सच्चाई को स्वीकार किया था के मुसलामानों के खेलाफ इम्तेयाजी सलूक अथवा भेदभावपूर्ण रवैया के कारण मुसलामानों में असुरक्षा की भावना बढ़ा है और इसी के साथ उनहोंने मीडिया को लताड़ा भी था के वह मुस्लिम कम्युनिटी के खेलाफ बेहूदा रिपोर्टिंग करके उनके किरदार अथवा छवी को संदेहास्पद बना रहा और वह अपनी गैर जिम्मेदाराना से पूर्ण पत्रकारिता के जरिये उनके हौसले को पस्त भी कर रहा है . जनाब जस्टिस काटजू ने कहा है के  ये एक ऐसी हरकत है के जिसके खेलाफ आवाज उठाने की असल जरुरत है .
   
           
 इससे पूर्व जस्टिस काटजू ने अपने बेबाक बयानात में हर उस हिन्दुस्तानी फिरका की हेमायत में प्रेस की जमकर मुखालेफत की है के जिनको प्रेस अपने मुफाद के लिए और अपनी चटपटी सुर्ख़ियों के लिए इस्तेमाल कर रहा है , उन्होंने कहा के जब कभी भी कोई भी बम धमाका होता है तो एक घंटे के अन्दर हमारे मुल्क के बहुत सारे टी वी चैनेल ये दिखाना शुरू कर देते हैं के इंडियन मुजाहेदीन जैश मोहम्मद  या हरकतुल मुजाहेदीन , हरकते जिहाद इस्लामी या फिर किसी और कथीत मुस्लिम संगठनों ने इस बम धमाके की जम्मेदारी काबुल करने के लिए एस एम् एस भेजा है और इसी एस एम् एस को बुनियाद बनाकर राष्ट्रीय मीडिया अल्पसंख्यक तबका को अपने टी वी चैनलों के जरिये डराना शुरू कर देता है . जस्टिस काटजू ने मज्र्र्द कहा के एक इ मेल या एस एम् एस कोई भी असामाजिक तत्व भेज सकता है ,लेकिन जब आप टी वी पर या फी अगले दिन प्रिंट मीडिया में इसको इस तरह से दिखाना शुरू कर डरते हैं मानो तमाम मुसलमान आतंकवादी होते हैं ,और वह बम फेंकने के अलावा कुछ नहीं करते ?आप पुरे मुस्लिम समाज की हौसले को पस्त और मुस्लिम समाज को अपने इस गलत काम से बदनाम कर देते हैं और देश में समप्रदाइक्ता का जहर घोल देते हैं .जनाब मारकंडे काटजू इंग्लिश दैनिक हिन्दू के बैनर तले  " रिपोर्टिंग टेरर मीडिया किस तरह संजीदा है "पर एक सिम्पोजियम को संबोधित करते हुए पिछले दिनों अपने बेबाक लहजे में ये भी  कहा था के देश की राष्ट्रीय मीडिया का गैर जिम्मेदाराना हरकत मुल्क में फिरकापरस्ती को बढ़ावा दे रहा है ?जनाब काटजू न कहा था के ये नहायत बेहूदा हरकत है मैंने इस हरकत के खेलाफ आवाज़ बुलंद  की है  , लेकिन वह कहते हैं के मई मीडिया को दबा रहा हूँ ये खेयाल जाहिर करते हुए के मीडिया को एख्लाकियात का पाबन्द होना चाहिए और अपनी कौमी अथवा राष्ट्रीय जिम्मेदारी को जेहन नशीं करना चाहिए . जस्टिस काटजू ने आगे कहा था वह देश में अमन व भाई चारा देश की सुरक्षा और मीडिया की आजादी को बेहतर तौर से देखना चाहते हैं ,लेकिन वह ऐसी मीडिया को बिल्कुल पशंद नहीं करते जो देश की सुरक्षा , और देश की भाई चारा के लिए खतरनाक हो .
उर्दू दैनिक पिन्दार पटना दिनांक 18/05/2013 पृष्ट नंबर 6 से लिया गया है .   www.biharbroadcasting.com 


Sunday, January 23, 2011

क्या बिहार में सुशासन है ?

कहा जाता है के पिछले ५ सालों में बिहार की कानून वेवस्था बहुत चुस्त और दुरुस्त रही है, मगर १ आर .टी आई आवेदन से जो खुलासा हुआ है वह चौकाने वाली है

की sahi tashwir १.01.2005 से १.01 2009 yaani sirf 4 सालों में वह bhi sirf १ jila में MDM yaani madhyahan भोजन की कुल ६० चोरी की घटना घटित हुई,अब आप समझ सकते हिं के सिर्फ एक तरह की चोरी केवल ४ सालों में सिर्फ एक जिला में ६० है dakaiti ,अपहरण बालात्कार,रंगदारी , जैसे और भी parakaar की घटनाओं को मिलकर कितनी घटायें हुई होंगी, अंदाजा lagaya jasakta है.

Longon ko ab lagne laga hai ke bihar mein hone waali ghatnaaon media ne aawaam ke smne pesh sarad nahi hi, bharashtachat ke barey mein to kahne ki jarurat to kisi ko nahi ,wah to jagjahir hai.

RTI ke aawedan se is baat ka bhi khulasa huaa ke ,mdm ke 60 chori ki ghatnaon me sirf

2maamle mein aarop patra dayar karne mein police ko kamyabi mili .jo bihar ki qabil mani jane wali police ko kaghere mein lakhara karney ke liye kaafi hai.

 

सच बात तो ये है के चाहे वह नीतीश हों या लालू दोनों ने टोपी पहन, मुसलामानों को टोपी पहनाया है।

आज जिन लोगों का पेट भर जा रहा ,वह यही समझ रहे के सारी दिया का पेट भर चूका , यानी वह भूके तो साड़ी दुया भूखी, उनकी भूख ख़त्म तो साड़ी दुनिया का पेट फुल , भले ही ऐसे  लोगों का परोसी भूख से तड़पकर तड़पकर  कर  दम क्यों न  तोड़ दे , इस तरह की सोंच जब  कम पढ़े ,-लिखे लोग जब सोंचे तो कोई ताजुब नहीं होगी मगर यही सोंच जब एक पढ़ा लिखा तबका बोलने लगे तो तब आप क्या कहेंगे ?

                       वर्तमान सरकार में जनता    बदहाली , और बदतर जिंदगी गुजारने पे मजबूर क्यों न  हों ,सरकार के चापलुशों को  ये बदहाली बिलकुल दिखाई नहीं दे रही , वह दलील दे रहे हैं के बिलकुल हक न मिलने से अधुरा हक मिलना अच्छा है , ऐसी दलील  कोई  आम आदमी का नहीं बलके उस उर्दू अखबार के मालिक सह मुख्य  सम्पादक का है , जिसे बिहार सरकार ने मुसलामानों के  बीच सरकार की चाप्लोसी और वोट बैंक बनाने की ठीकेदारी करने के लिए  विज्ञापन के तौर पर कड़ोरों रूपये  दिए थे , आज भी  दे रहे हैं , मगर सवाल पैदा होता है के क्या वाकई में गरीबों को पुरे हक के बदले अधूरे हक भी  बगैर जेबें ढीली किये  और परिशानी उठाये  मिल  रहीं हैं ? या शब्दों से खेलने वाले सरकार के चाप्लुश सरकार के सामने सुरखुरू बनकर गरीब जनता को धोके में डाल अपनी तिजोड़ी भरने के लिए ऐसी बेतुकी दलील पेश कर रहे ?वर्तमान सरकार में  गरीबों का हाल क्या है  चंद उदाहरणों  से अच्छी तरह समझा जा सकता है ,

            केंद्रीय सरकार और प्रदेश सरकार के जरिये गरबों के उत्थान के लिए लगभग 2 दर्जन से जेयादा कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रहीं मगर भेद भाव , भ्रष्टाचार के कारण हाल ही में पटना के फुलवारी शरीफ में एक गरीब औरत ने अपने 6 माह के दूध पीते  बच्चे को अपने पति के इलाज कराने हेतु बेच दी , जिसे साड़ी दुनिया ने देखा , दर्जानों कल्याणकारी योजनाओं के रहते कोई गरीब भूखे मरने लगे,अपने दूध पीते  बच्चे को बेचने पे मजबूर हो जाए तब ऐसी साकार के बारे में आपका क्या खेयाल रहेगा ?और ऐसी सरकार की चप्लोशी करने वालों के बारे में आप क्या सोंचेंगे ? बिहार के बिहार शरीफ में ,2011 में विभिंव  आँगनबाड़ी  केन्द्रों के लिए  सेविकाओं की  लगभग 9 5  बहालियाँ हुईं , मगर अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है के अकलियतों के मसीहा कहलाने का दावा करने वाली नितीश सरकार ने 9 5  बहालियों में एक भी मुसलमान को बहाल नहीं किया , क्या 9 5  बहालियों में एक भी मुसलमान को बहाल न करना ये कौन सी सामाजिक समरसता की पहचान  है ?  क्या मुस्लिम उमीदवारों में एक भी ऐसा उमीदवार नहीं मिला जो आँगनबाड़ी सेविका बन सकती थी ? बिहार के समझदार लोग और नीतीश सरकार पे बारीकी से नजर रखने वाले लोग तो कह रहे के जब वर्तामान सरकार फोर्थ ग्रेड की नोकड़ी देने में सीन पे सांप लोट रही और कलेजा फट रही तो बी पी एस सी से बहाल होने वाले उच्च पदों की बहालियों में मुस्लिम उमीदवारों के साथ किस हद तक नाइंसाफी होती होगी अंदाजा लगाया जा सकता है। कटिहार जिला से खबर आई थी के वहाँ एक मिडिल स्कूल है , जहां चार सौ उर्दू पढ़ने वाले छात्र हैं  मगर उर्दू पढ़ाने वाले शिक्षक सिर्फ एक , जरा गौर से जात पात और धर्म का चश्मा उतारकर सोंचिये नौ सौ छात्रों  पे जहाँ केवल  एक शिक्षक बहाल हों वहां से पढ़ने  बच्चों का भविष कैसा होगा ? अंदाजा लगाया जा सकता है , जनके  उन्ही का बनाया हुआ  कानून कहता है , 3 0  छात्रों पे एक शिक्षक तो फिर 9 0 0  उर्दू पढ़ने वाले छात्र होने के बावजूद केवल एक शिक्षक क्यों ? जबके आप सभी को पता होगा नीतीश कुमार उर्दू  भाषा की देश की आजादी में योगदान और इस बेश कीमती जुबान की तरक्की की बखान किस तरह से करते रहे हैं ,किसी से छुपी हुई नहीं है , सवाल पैदा होता है के नीतीश कुमार के बयान और उनके काम में इतना बड़ा फर्क क्यों ?क्या राज के एक बहुत बड़े समुदाय को नीतीश सरकार खामोशी के साथ समाज के नीचले  सतह पे पहुंचाने का काम कर रही , और दूसरी तरफ उसी समुदाय के जमीर फरोश लोगों की मुहमांगी मुराद पूरी कर अपना छवी भी बनाये रखना चाह
रही ? चौतिश हाजार पाँच सौ चालीश ट्रेंड शिक्षकों की बहलियाँ कुछ दिनों पहले हुई , जिसमें 1 2 हजार उर्दू शिक्षक के पद थे , कहा जाता है के  मुसलमानों को छांटने के लिए उन्हों ऐसी ऐसी नियमों को जान बुझकर बनाया गया ताके  उन शर्तों को पूरा करने वाले उमीदवार ही उतने संख्या में न मिले .जहाँ तक बात है सम्प्रदाइक सौहार्द की तो आंकड़े यही कह रहे के लालू राबड़ी के पन्द्रह साला हुकूमत में जितने दंगे और तनाव नहीं हुए , उससे दस गुना से भी जेयादा छोटे मोटे दंगे और इन दंगों में मुसलामानों को भाड़ी कीमत चुकानी पड़ी ,शायद ही कोई ऐसा सप्ताह गुजरता होगा के रेयासते बिहार में छोटे मोटे तनाव की खबरे न आती हों .
आज नीतीश कुमार की सरकार ये बात दावे के साथ नहीं कह सकती के बिहार में हुए शिक्षक बहाली चाहे, पहला चरण हो ,या दूसरा किसी मुखिया ने बगैर रिश्वत लिए किसी की बहाली कर दी हो .चाहे मनरेगा में बिहार के अफसर और मुखिया रियासत के गरीबों के हक पे नाजायज तरीके से न लूट रहे हों , क्या बिहार सरकार के मुखिया को पता नहीं ? के हमारे राज में क्या हो रहा ?
            कुछ लोग लालू यादव  के जरिये परिवर्तन रैली में , टोपी पहन कर भाषण देने पर निशाना  साधते हुए जैसा के एक चप्लुश उर्दू मीडिया  के मुख्य संपादक ने दिनांक 17/05/2013 के एक लेख में लिखा के " टोपी पहनने से कोई मुसलामानों का हमदर्द नहीं हो जाता है " उनकी बातें सही हैं लेकिन ये बात और ड्रामा तब क्यों नहीं दीखी या दिखती है जब नीतीश कुमार मुसलमानों को टोपी पहनाने के लिए टोपी और हरी पगरी और मजार का सहारा लिया ? कहाँ थे ऐसे लोग ?नीतीश कुमार ने पिछले आठ सालों में टोपी  पहन कर मुसलमानों को किस तरह टोपी पहनाया क्या नजर नहीं आई ? सच  बात तो ये है के  चाहे वह नीतीश हों या लालू दोनों ने टोपी पहन, मुसलामानों को टोपी पहनाया है।
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