इन्साफ करने वाले लोगों के कारनामे देखिये

इन्साफ करने वाले लोगों के कारनामे देखिये ! अरुण राउत , ग्राम इब्राहिमपुर परसौनी , थाना  फेन्हारा , जिला पुरबी चंपारण ने अपने जिलाधिकारी और एस पी के साथ बिहार के मुख्यमंत्री जनाब नीतीश कुमार के पास 16 /06 /2013  को पत्र  लिख कर सूचना दी के हमारे जमीन  को दबंगों ने बल पूर्वक  कब्ज़ा कर  लिया है , मगर आज तक इन अधिकारीयों ने इस मामले की ओर धेयान नहीं दिया , जरा सोंचिये इस आज़ाद हिन्दुस्तान के अधिकारी क्या करते हैं ? किस बात का पैसा खाते हैं , जब कोई बड़ी घटना घाट जाती है तो बड़े बड़े डायलाग  मारने से बाज भी नहीं आते , अगर अरुण राउत के साथ कुछ हो जाता है , या अरुण राउत जैसे लोग कानून अपने हाथों में लेलें तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा?

संसद हमले पर आज तक कोई रिपोर्ट नहीं

संसद हमले पर आज तक कोई रिपोर्ट नहीं
Posted on: 15-July-2013 Posted by: Afzal Hussain khan  email: afzalhussain05@gmail.com
Posted by: admin July 15, 2013 in Exclusive, Latest News, Lead Leave a comment Afroz Alam Sahil for BeyondHeadlines 13 दिसम्बर, 2001 को संसद और 26 नवम्बर, 2008 को मुम्बई में हुए ‘आतंकी हमला’ पर आरंभ से ही सवालिया निशान लगते रहे हैं. ये दोनों ही घटनाएं शुरु से ही संदिग्ध रही हैं. यही नहीं, देश के तमाम मानवाधिकार संगठनों, प्रतिष्ठत पत्रकारों और यहां तक की कई सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों तक ने भी इन दोनों घटनाओं की सत्यता पर सवाल उठाए हैं. लेकिन अब गृह मंत्रालय के पूर्व अवर सचिव आरवीएस मणी के इस बयान ने कि ‘दोनों आतंकी हमले की साजिश तत्कालीन सरकारों ने रची थी और इसका मकसद था आतंकवाद के खिलाफ कानून को मज़बूत करना…’ ने भारतीय राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है. वहीं वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया को पिछले दिनों आरटीआई से मिले जानकारी और भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं. No any reports on parliament attackवेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. क़ासिम रसूल इलियास ने आरटीआई के ज़रिए गृह मंत्रालय से यह पूछा था कि 13 दिसम्बर, 2001 को संसद पर हुए हमले की जांच के संबंध में क्या कोई जांच टीम/ कमिटी या फिर कमीशन गठित की गई थी. अगर हां! तो फिर उस जांच टीम/ कमिटी या फिर कमीशन में शामिल अफसरों के नाम व पदों की फहरिस्त उपलब्ध कराएं. साथ ही यह भी पूछा कि क्या कोई जांच रिपोर्ट इस जांच टीम/ कमिटी या फिर कमीशन द्वारा तैयार किया गया है. अगर हां! तो इस रिपोर्ट की कॉपी उपवब्ध कराई जाए. इन दोनों ही सवालों के जबाव में बताया गया है कि इस मामले में पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस थाने में एक एफआईआर (एफआईआर सं. 417/2001) दर्ज किया गया है, जिसकी जांच स्पेशल सेल के ज़रिए की जा रही है. अब यह कितना दिलचस्प है इतने गंभीर मामले में अब तक कोई जांच टीम/ कमिटी या फिर कमीशन गठित नहीं किया गया. इससे भी ज़्यादा हैरान कर देने वाली बात यह है कि 12 साल गुज़र जाने के बाद भी आज तक कोई रिपोर्ट पेश नहीं की जा सकी है. आरटीआई में आगे पूछा गया था कि पुलिस या स्पेशल सेल ने इस संबंध में किसी भारतीय नागरिक को गिरफ्तार किया है? अगर हां! तो इन्हें इस क़ानून के तहत गिरफ्तार किया गया है और इनका मामला अभी किस अदालत में चल रहा है? इस सवाल के जवाब में यह कहा गया है कि यह जानकारी आपको नहीं दी जा सकती, क्योंकि यह मामला काफी सेंसीटिव है. आरटीआई में आगे यह भी पूछा गया था कि क्या ज़िम्मेदार पुलिस अफसरों के खिलाफ सेक्यूरिटी के संबंध में कोताही बरतने पर कोई कार्रवाई की गई? इस सवाल के जवाब में अडिश्नल डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस संजय त्यागी लोकसभा सचिवालय दोनों ने यह बताया कि इस सवाल का संबंध हमसे नहीं है. आगे इस आरटीआई में यह भी पूछा गया कि क्या उन सेक्यूरिटी गार्ड्स के विरूद्ध कोई कार्रवाई की गई जिन्होंने संसद के उस एम्बेस्डर कार जाने दिया जिसमें धमाके की सामाग्री व आतंकी मौजूद थे. साथ ही यह भी पूछा कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय की ‘सेक्यूरिटी पास’ इन आतंकियों को किसने जारी किया था? इस संबंध में सारे कागज़ात उपलब्ध कराएं. इन सवालों के जवाब में बताया गया कि एक सेक्यूरिटी अफसर के खिलाफ जांच की गई, लेकिन इल्ज़ाम साबित नहीं हो सका. साथ ही यह भी बताया गया कि पार्लियामेंट सेक्यूरिटी सर्विस की तरफ से कोई पास जारी नहीं किया गया था. ऐसे में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि इन आतंकियों के पास भारत सरकार के गृह मंत्रालय की ‘सेक्यूरिटी पास’ आए कहां से और जारी किसने किया था? इस पूरे मामले में वेलफेयर पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. क़ासिम रसूल इलियास का कहना है कि इस घटना में सरकार व सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से जो कहानी पेश की गई, वो खुद ही कई सवालों का जन्म देने वाली थी. चुंकि मामला देश की सुरक्षा से संबंधित था इसलिए उठने वाले विभिन्न सवालों के बावजूद केन्द्र सरकार व खुफिया एजेंसियों की बातों को तमामतर कमज़ोरियों के वाबजूद क़बूल कर लिया गया. यहां तक कि मीडिया ने भी वही राग अलापा जो सरकार चाहती थी. डॉक्टर इलियास ने यह भी बताया कि 2004 में यूपीए सरकार के समय जब मुस्लिम मजलिस-ए-मशावरात के डेलीगेशन ने मुसलमानों की समस्याओं को लेकर कई केन्द्र मंत्रियों से मुलाकात की थी, इस दौरान एक कैबिनेट मंत्री ने बातचीत में संसद पर हमले को बनावटी व नाटक क़रार दिया था. इस संबध में रिहाई मंच के प्रवक्ता शाहनवाज आलम और राजीव यादव ने कहा कि ये दोनों ही घटनाएं और उनमें आए फैसले सिर्फ मुसलमानों के लिए ही नहीं बल्कि लोकतंत्र के लिए अच्छे संकेत नहीं रहे हैं. क्योंकि इनके बाद मुसलमानों की आतंकी छवि बनाने की कोशिशें लगातार की गयीं खास कर अफजल की फांसी की सजा जिसे ठोस सुबूतों के बजाए सिर्फ देश के एक हिस्से के उग्र हिंदुत्ववादी आकांक्षाओं को संतुष्ट करने के लिए सुनाया गया और अंततः न्यायिक प्रक्रिया को धता बताते हुये उसे फांसी पर भी चढ़ा दिया गया. जिसका न जाने कितने निर्दोषों को जो आतंक के आरोप में फंसाए गये हैं कि मुक़दमों और फैसलों पर गलत असर पड़ा. उन्होंने कहा कि इस खुलासे की जांच से हालांकि अफ़ज़ल वापस जिंदा तो नहीं हो सकता लेकिन इसकी जांच आईबी और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों की आतंकी और देश विरोधी गतिविधियों की पोल खोल देगा जो लोकतंत्र को बचाने के लिए ज़रूरी है.
 
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Posted on: 13-July
exposed
Posted on: 15-July-2013
लखनऊ : जिस तरह से गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारी आरवीएस मनी ने इशरत जहां मामले की जांच कर रहे सीबीआई और एसआईटी टीम का हिस्सा रहे आईपीएस अधिकारी सतीश वर्मा से हुई बातचीत कर खुलासा करते हुए कहा कि सतीश वर्मा ने उन्हें बताया था कि संसद पर हुआ आतंकी हमला और 26/11 को मुबंई पर हुए हमले दोनों ही आतंकी हमले सरकारों ने आतंकवाद से लड़ने के नाम पर सख्त कानूनों को बनाने के लिए करवाए थे, को माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा तत्तकाल संज्ञान में लेते हुए इन दोनों घटनाओं की जांच कराने की मांग करते हुए रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुएब ने कहा कि ये दोनों ही घटनाएं शुरु से ही संदिग्ध रही हैं और तमाम मानवाधिकार संगठनों, प्रतिष्ठत पत्रकारों और यहां तक की कई सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों तक ने भी इन दोनों घटनाओं की सत्यता पर सवाल उठाए हैं. SC must take cognizense of new revelations regarding Govts role in Parliament attack and 26/11 & order probeमोहम्मद शुऐब ने कहा की यह बात सामने आ रही है कि देश में काले कानूनों को बनाने के लिए देश में आईबी आतंकी वारदातों को अंजाम देती है, और पिछले दिनों इशरत जहां के हत्यारे राजेन्द्र कुमार को बचाने के लिए जिस तरह आईबी प्रमुख आसिफ इब्राहिम और गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया उससे यह आरोप और पुख्ता हो जाते हैं. काले कानूनों का शिकार देश का वंचित तबका मुस्लिम, दलित, आदिवासी ही होते हैं. जिन्हें आतंकवाद के नाम पर तो कभी माओवाद के नाम मारा जा रहा है. पिछले दिनों यूपी में बेगुनाह खालिद मुजाहिद की हत्या भी इसी कड़ी में हुई. ऐसे में हम माननीय सुप्रिम कोर्ट से अपील करते हैं कि वो इस संकटकाल में काले कानूनों की समीक्षा के लिए एक जांच आयोग गठित करे, जिससे इन काले कानूनों का खात्मा हो सके. रिहाई मंच के प्रवक्ताओं शाहनवाज आलम और राजीव यादव ने कहा कि ये दोनों ही घटनाएं और उनमें आए फैसले सिर्फ मुसलमानों के लिए ही नहीं बल्कि लोकतंत्र के लिए अच्छे संकेत नहीं रहे हैं. क्योंकि इनके बाद मुसलमानों की आतंकी छवि बनाने की कोशिशें लगातार की गयीं खास कर अफजल की फांसी की सजा जिसे ठोस सुबूतों के बजाए सिर्फ देश के एक हिस्से के उग्र हिंदुत्ववादी आकांक्षाओं को संतुष्ट करने के लिए सुनाया गया और अंततः न्यायिक प्रक्रिया को धता बताते हुये उसे फांसी पर भी चढ़ा दिया गया. जिसका न जाने कितने निर्दोषों को जो आतंक के आरोप में फंसाए गये हैं कि मुक़दमों और फैसलों पर गलत असर पड़ा. उन्होंने कहा कि इस खुलासे की जांच से हालांकि अफ़ज़ल वापस जिंदा तो नहीं हो सकता लेकिन इसकी जांच आईबी और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों की आतंकी और देश विरोधी गतिविधियों की पोल खोल देगा जो लोकतंत्र को बचाने के लिए ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि रिहाई मंच ने उत्तर प्रदेश की सपा सरकार से भी बार-बार यह मांग की है कि यूपी कचहरी धमाकों, रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर हुए कथित आतंकी हमलों, वाराणसी में हुए धमाकों, गोरखपुर सीरियल ब्लास्ट समेत यूपी में हई सभी आतंकी घटनाओं की एनआईए से जांच कराई जाए. क्योंकि रिहाई मंच का आरोप है कि जिस तरह से आईबी और पुलिस अधिकारियों ने मिलकर मौलाना खालिद की हत्या करवाई ऐसे में देश को तबाह करने में शिद्दत से लगी आईबी ने ही उत्तर प्रदेश समेत देश में आतंकी वारदातों को अंजाम दिया है. हमारा लगातार आरोप है कि इंडियन मुजाहिदीन आईबी द्वारा संचालित संगठन है. ऐसे में प्रदेश में हुई सभी आतंकी घटनाओं की एनआईए से जांच कराई जाए. इस खुलासे पर बात रखते हुये मुस्लिम मजलिस के प्रदेश प्रवक्ता जैद अहमद फारूकी और इंडियन नेशनल लीग के हाजी फहीम सिद्दीकी ने कहा कि जो बात आज गृह मंत्रालय के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी मुम्बई में हुये 26/11 हमलों के संदर्भ में कह रहे हैं उसका खुलासा तो बहुत पहले महाराष्ट्र के सेवानिवृत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एसएम मुशरिफ ने अपनी किताब �हू किल्ड करकरे� में कर दिया था कि 26/11 भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने करवाए थे. लेकिन अब जब सरकारी के ही सीनियर ब्यूरोक्रेट इस बात को कह रहे हैं तो ज़रूरी हो जाता है कि सुप्रीम कोर्ट इसे गम्भीरता से संज्ञान में लेते हुये इसकी पुनः जांच कराए. धरने को संबोधित करते हुए भारतीय एकता पार्टी के सैयद मोईद अहमद ने कहा कि एक के बाद एक घटनाओं में हकीकत सामने आ रही है कि हमारे रहबर ही रहजनी करने लगे हैं. खालिद मुजाहिद की मौत के बाद जिस तरीके से सरकार इस बात को भुलाने की कोशिश कर रही है और अखिलेश यादव ने वादा करके मानसून सत्र नहीं बुलाया और मौलाना खालिद मुजाहिद और तारिक कासमी को बेगुनाह साबित करने वाली आरडी निमेष रिपोर्ट पर एक्शन नहीं किया उससे साफ हो जाता है कि इस सरकार में मुसलमानों की कोई सुनवाई नहीं है. शायर जुबैर जौनपुरी ने शेर के माध्यम से इस बात को कहा कि 2014 में होने वाले चुनाव में खालिद का खून रंग लाएगा और इस कातिल सरकार का खात्मा कर देगा. उन्होंने कहा कि जो सरकार पाक रमजान के महीने में भी हमें सड़क के किनारे बैठने को मजबूर कर रही है ऐसी कातिल सपा सरकार के बुलाने पर कोई मुस्लिम भाई रोजे अफ्तार पार्टियों में न जाए और न ही उन्हें बुलाए. रिहाई मंच के प्रवक्ताओं ने बताया कि कल धरने के 55 वें दिन 15 जुलाई को सीपीएम के महासचिव प्रकाश करान धरने के समर्थन में आएंगे. धरने का संचालन रिहाई मंच के प्रवक्ता राजीव यादव ने किया. इस दौरान हरे राम मिश्र, भारतीय एकता पार्टी के राष्ट्रीय सदर सैयद मोईद अहमद, एएनसी के फरीद खान, मुस्लिम मजलिस के प्रवक्ता जैद अहमद फारूकी, मोहम्मद फैज, शाहनवाज आलम आदि उपस्थित रहे.
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पार्लियामेंट और मुंबई पर हमले हुकूमत ने ही करवाए थे

 पार्लियामेंट और मुंबई पर हमले हुकूमत ने ही करवाए थे
न्यू डेल्ही 1 4  जुलाई ( एजेंसी ) इशरत जहाँ फर्जी एनकाउंटर मामले में सी बी आई और आई बी के दरमयान जारी झगरे के दौरान गृहमंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी ने बेहद चौकाने वाला दावा किया है , अफसर का कहना है के 2 0 0 1 में पार्लियामेंट हिउसे पर 2008 में मुंबई में हुए  आतंकी हमले की साजिश खुद सरकार ने कराये थे , इशरत जहाँ फर्जी एनकाउंटर मामले में अदालत को दिए एक हलफनामे में गृहमंत्रालय में तत्कालीन अंडर सेक्रेटरी आर वी एस मणि ने कहा है के आई पी एस अधिकारी सतीश वर्मा ने कहा था के ये दोनों आतंकी हमले दहशतगर्दी के खेलाफ बनाये जाने वाले कानून को मजबूत आधार प्रदान करने के लिए कराये गए थे , श्री वर्मा कुछ दिन पहले तक सी बी आई ,  एस आई टी की जाच टीम के सदस्य थे , मणि के मुताबिक़ बर्मा ने कहा था के 1 3  दिसंबर 2001 को पार्लियामेंट हाउस पर हमला पोटा कानून को पास कराने से पहले किया गया था , जबके 26/11 /2008 को मुंबई पर हुए हमले दह्शात्गार्दाना हमले के बाद गैर कानूनी रोक थाम अधिनियम में संसोधन
किया गया , गृहमंत्रालय के पूर्व अधिकारी का कहना है के इशरत जहाँ मामले की जाँच कर रही सी बी आई ,एस आई टी के एक सदस्य ने पार्लियामेंट और मुंबई पर 26/11 के दह्शात्गार्दाना हमले के लिए उस वक्त की सरकारों पर साजिश रचने का इल्जाम लगाया था ,एक अंग्रेजी अखबार के रिपोर्ट के मुताबिक़ इशरत जहाँ  एनकाउंटर मामले  की जांच में सरकार के तरफ से अदालत में हलफ़नामे पर दस्तखत करने वाले गृहमंत्रालय के पूर्व अतिरिक्त सचिव आर वी एस मणि ने कहा के हाल तक सी बी आई ,एस आई टी  के सदस्य रहे सतीश वर्मा ने बताया था के दोनों आतंकी घटना की साजिश उस वक्त की सरकार ने रची थी ,श्री मणि ने सतीश के हवाले से कहा के 13/12/2001 को पार्लियामेंट पर हमले के बाद पोटा कानून लागु किया गया ,फिर 26/11/2008 को मुंबई पर हुए आतंकी हमले के बाद गैर कानूनी सरगर्मी रोक थाम सम्बंधित कानून में तबदीली की गई ,याद रहे के दोनों हमलों के वक़्त क्रमशः बी जे पी और कांग्रेस की सरकारें केंद्र में थी . गुजरात कैडर के आई पी एस अधिकारी सतीश वर्मा ने कहा था के मुझे पता नहीं क्या शिकायत है ? किसने की ?और कब की ? न इसे जान्ने में मेरी कोई दिलचश्पी है ,इस तरह के मामलों में मीडिया से बात नहीं कर सकते , आप सी बी आई से पूछिए , इशरत जहाँ मामले में गठित  एस आई टी सदस्य सतीश वर्मा का हाल हे में जुनागर पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में प्रिंसिपल की हैसियत से ट्रान्सफर किया गया है ,हाल ही में शहरी मंत्रालय में डिप्टी ऑफिसर बनाये गए आर वी एस मणि ने अपने आला अधिकारियों को लिखे ख़त में कहा है के सतीश वर्मा वही कह रहे जो पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी आई एस आई कहती है , उनके मुताबिक़ ,बर्मा ने 2 2 जून को अहमदाबाद में उस वक़्त कही थी जब वह एनकाउंटर मामले में गृहमंत्रालय के दो हलफनामे पे उनसे पुच -ताछ कर रहे थे   , मणि ने शहरी विकाश मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी को लिखे ख़त में इल्जाम लगाया है के वर्मा ने उनके एक बयान पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया थे , जिसमें कहा गया था के , एनकाउंटर मामले में पहला हलफनामा आई बी के दो अधिकारी ने तैयार किया था , मणि ने कहा के मै यह जानता था के ऐसा बयान मेरे अपने उस वक्त के सीनियर अधिकारी पर झूठे इल्जाम लगाने जैसा है , इसलिए मैंने इस बयान पर हस्ताषर करने से इनकार कर दिया (उर्दू दैनिक पिन्दार पटना दिनाकं 15/7/2013 से लिया गया है )

न्यू डेल्ही 1 4  जुलाई (एजेंसी) गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंदर मोदी की हत्या से सम्बंधित इशरत जहाँ फर्जी एनकाउंटर मामले में फंसे आई बी के जॉइंट डायरेक्टर राजेंदर कुमार के ख़ुफ़िया जानकारी पर संगीन सवाल उठने लगे हैं , इशरत जहाँ फर्जी एनकाउंटर के साथ सादिक जमाल एनकाउंटर मामले की जाँच कर रही सी बी आई को ऐसे पुख्ता सुराग मिले हैं .जिससे राजेंदर कुमार की यह जानकारी ,किसी खास मकसद के तेहत दी गई मालुम हो रही है , सरकार के आला सूत्रों के मुताबिक़ सादिक के फर्जी एनकाउंटर के तार अंडरवर्ल्ड से जुड़े है , राजेंदर कुमार ने ही गुजरात की आई बी ब्रांच के नेत्रित्व के दौरान 1 अक्तूबर 2002  को ख़ुफ़िया कानकारी मुहैया कराइ थी के सादिक जमाल लश्कर - ए -तैयेबा का दहशतगर्द है और मुख्य मंत्री नरेंदर मोदी की हत्या के लए तैयार बैठा है , सी बी आई के मुताबिक़ यही जानकारी 3 जनवरी 2003 को सादिक के कथित हरता की वजह बनी थी , वजेह रहे के इसके एक साल बाद राजेंदर कुमार ने इशरत जहाँ और इसके तीन दोस्तों के बारे में ठीक इसी तरह ख़ुफ़िया जानकारी उपलब्ध कराइ थी , आला सरकारी सूत्रों ने बताया के सादिक 1 9 दिसंबर 2002 को अपनी गिरफ्तारी से तक़रीबन आठ माह पहले दुबई से नौकरी कर के वापस आया था , वह दुबई में अंडर वर्ल्ड  दाउद इब्राहिम के करीबी छोटा शकील के रिश्तेदार के यहाँ काम करता था , इस मामले में दायर चार्जशीट में कहा है के वहां सादिक का शमीम चक्लूं नाम के दाउद के गुर्गे से झगडा हो गया था , सूत्रों के मुताबिक यह बात भी सामने आई के सादिक ने इस खानदान की किसी औरत के साथ बदसलूकी की थी , सी बी आई ने इस बात को रिकॉर्ड नहीं किया है , झगडे की सुलह सफाई के बाद सादिक हिन्दुस्तान वापस आ गया , सूत्रों के मुताबिक़ इस झड़े के बाद से ही दाउद के लोगों ने सादिक को मारने का फैसला कर लिया था , दुबई की शख्त कानून की वजह से वहां छोड़ दिया गया , सी बी आई इस बात की भी जांच कर रही है के इस मामले से राजेंदर की ख़ुफ़िया जानकारी की किस हद तक सम्बन्ध है ?(उर्दू दैनिक पिन्दार पटना दिनाकं 15/7/2013 से लिया गया है )

Aakhir samaj kalyan vibhag itna meharban keyon hai?

Aakhir samaj kalyan vibhag itna meharban keyon hai? PANCHAYAT MANICHAPRA,BLOCK KALYANPUR,JILA PURBI CHAMPARAN,KE WARD NO 1 ME CHALNE WALE ANGAN BARI KENRA KI BAHALE MEIN BARAY PAMANAY PAR DHANDHLI HUI THI, YE AB PURI TARAH PRAMANIT HOTA DIKH RAHA,KYON K RTI SE SUCHNA 2 BAR YANI 27.5.08, AWEDAK MD.KAUSAR NADEEM,AUR ALI NAWAJ K DAWARA MANGI GAYI SUCHNA DT.14.9.9 KA JAWAB ADHIKARIYON NE TAMAM KOSHISO K BAWAJUD NA DEKAR ADHIKARIYO NE KHUDKO SANDEH K GHERE ME GHER LIYA,MAGAR MANTRAY KI SPECIAL KIRPA KE KARAN DOSHIYON PAR SHIKANJA ABTAK NAHI KASA JA SAKA,SUTRON K ANUSAR BHARASHTACHARIYO KI PAKAR UPAR TAK HAI?

Gunjan patel&uske dosto ko chode jane par hangama keyon hai?

Gunjan patel&uske dosto ko chode jane par hangama keyon hai?Dunia wishwas par tiki hai,samaj ka smamaj aur qanun par se wishwash se khatm hona achchi bat nahi,mahabodhi mandir mandir me huye dhamake ki janch desh ki sabse wishwashniye agency kar rahi,agency ne abtak ki puch-tach se saticefied hone k bad he choda hoga,aisi halat me,ek wishesh political party k jariye mudda banate huye wirodh kiya jana kitna uchit tha,kisi ko aropy,kisi ghatna me mahaj kisi party & samudaye wishesh se sambadh rahne k karan nahi banaya jana chahiye.aisa dharm aur qanun dono lehaj se galat hai. www.biharbroadcasting.com
DM & SP motihari ke pas,Arun Raut(vill.ibrahimpur parsauni,p.s. fenhara,dist.motihari) ne gair qanuni dhang se sudi karobar karne wale dabang k jariye taqat ke balpar jamin qabja kiye jane ki shikayat dt. 27.6.13 ko ki thi,suchna k mutabik,victim ko insaf dene hetu koi karwai nahi ki gai ha.

ए टी एस और सी बी आई के खेलाफ़ जाँच की संभावना , पूर्व ए टी एस प्रमुख के पी रघुवंसी , राज वर्धन और सुबोध जैसवाल के रोल की जांच हो सकती है , सी बी आई के ए डी जी कुमार को भी जवाब देना पर सकता है .

ए टी एस और सी बी आई के खेलाफ़ जाँच की संभावना , पूर्व  ए टी एस प्रमुख के पी रघुवंसी , राज वर्धन और सुबोध जैसवाल के रोल की जांच हो सकती है  , सी  बी आई के ए डी जी कुमार को भी जवाब देना पर सकता है .

न्यू दिल्ली ,2 5  मई 2013(एजेंसी ): माले  गाँव 2006 के बम ब्लास्ट में बेकसूर मुस्लिम नौजवानों को फंसाने वाले महाराष्ट्र  ए टी एस के अफसरानों और उनकी जांच को सही मानते हुए उन्ही दृष्टिकोण से मामले को आगे बढ़ाने वाले सी बी आई के अफसरों को अब अपनी इस हरकत (प्रथम दृष्टि  में भेदभावपूर्ण सोंच को साबीत करती है )पर जवाब देना पर सकता है , के  जानकारों में मुताबिक़ केंद्र ने इस इल्जाम को गंभीरता से लिया है के 9 बेकसूर मुसलमानों को बुरे नियत और बैमानी के तेहत फसाया गया था ..दिल्चश्प बात ये है के केंद्रीय सरकार की जानिब से ए टी एस और सी बी आई के खेलाफ जाँच के इशारे ऐसे वक़्त में मिल रहे , जब एक खोजी पत्रकार  आशीष  खेतान ने मुस्लिम नौजवानों के दहशतगर्दी के झूटे इल्जाम में फंसाए जाने से संबंधित हाई कोर्ट में लैटर पेटिसन  दाखिल किया है , केयाश लगाया जा रहा है के उपरोक्त petition पर अदालत के जरिये किसी आदेश की हालत में संभावित बेइज्जती से बचने के लिए सरकार  ने ये कार्रवाई कर रही है , सनद रहे के 2006 में शबेबारात के मौका पे मालेगांव में हुए धमाकों के बाद ए टी एस ने 9 मुस्लिम नौजवानों को उपरोक्त ब्लास्ट को अंजाम देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था .मुसलमानों और इन्साफ पशंद हिन्दुओं की तरफ से साफ सुथरी जांच की    अपील  के बाद भी ए टी एस ने कोई धेयान नहीं दिया तो जाँच की जिम्मेदारी सी बी आई को सोंपी गई थी , मगर सी बी आई के बैमान अफसरों ने भी वही काम किया था ,जो काम उसके पूर्व के संविधान और कानून के खेलाफ़ काम करने वाले अफसरों ने किया था , और देश को गुमराह किया था .लेकिन बाद में असीमानंद के इकबालिया जुर्म और एन आई ए  की जाँच ने उपरोक्त धमाकों में भगवा आतंकवाद की पुष्टि कर दी थी , उपरोक्त ब्लास्ट में चार भगवा आतंकवादियों के खेलाफ़ चार्जशीत  फाइल की है जबके 3 को फरार घोषित किये हुए है। केंद्रीय गृहमंत्रालय के एक आला अफसर ने पी टी आई को बताया  है के  महाराष्ट्र सरकार को ये  "सलाह" दी  जा सकती है के वह ए टी एस  के उन अफसरान के रोल की जांच करे  जिन्होंने कथित तौर पर 9 बेकसूर मुस्लिम नौजवानों को फंसाया था .मालेगांव बम धमाका की शुरूआती जांच नासिक (देहाती क्षेत्र )के एडिशनल suprintendent  ऑफ़ पुलिस राज वर्धन  ने की थी , बाद में केस ए  टी एस  के हवाले कर दिया गया था . अबरार अहमद जिसे ए  टी एस ने बम धमाकों का मुल्जिम बनाया था  का इल्जाम है के  उस वक़्त के ए  टी एस  के डी आई जी  सुबोध जैसवाल और ए टी एस चीफ के पी रघुवंशी ने अबरार की जानिब से मनगढंत इकबालिया बयान तैयार किया था . सुबोध जैसवाल खुफिया विभाग में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग RAW में तैनात हैं , जबके के पी रघुवंशी थाणे के पुलिस कमिशनर हैं . केस जब सी  बी आई के हवाले किया गया तो जांच की जिम्मेदारी जॉइंट डायरेक्टर अरुण कुमार के हवाले की गई थी जो  अब उत्तर प्रदेश के अडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस हैं , आरोपियों के घर वालों ने अरुण कुमार के जाँच के  तरीके पर एतराज  करते हुए इल्जाम लगाया था के सी बी आई की किसी टीम ने जाँच के लिए मालेगांव का दौरा तक नहीं किया और न उनके घरवालों से बात कर उनके पक्ष जानने की कोशिश की थी (पिंदार पटना dt.26/05/2013 page 6.) www.biharbroadcasting.com

सिस्टम की खराबी की वजह से इन्साफ मिलने में हो रही देर (सलमान खुर्शीद)

सिस्टम की खराबी की वजह से इन्साफ मिलने में हो रही देर  (सलमान खुर्शीद)

 नै दिल्ली ,कांग्रेस के सिनिअर लीडर 2 3 मई 2013 (यू एन आई) कांग्रेस के सिनिअर नेता और केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने आज स्वीकार किया है के सिस्टम में ऐसी  खराबी  मौजूद है जिसके कारण आतंकी वारदातों  को अंजाम देने के नाम पर जेलों में बंद बेगुनाहों को इन्साफ मिलने में दिक्क़त हो रही ,ताहम उन्होंने दावा  किया है के उनकी सरकार हर आदमी को इन्साफ दिलाने के ओने अहद पर कायम है और इसके लिए हर मुमकिन कोशिश भी कर रही है . जनाब खुर्शीद पुलिस की हेरासत में खालिद मुजाहिद की मौत और उससे पूर्व के दुसरे मामलों के हवाले स्व पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे  , उन्होंने कहा के   एन आई ए  की स्थापना इसी मकसद के तेहत किया गया है ताके बेगुनाहों को इन्साफ मिल सके ,उन्होंने दवा किया है के इसके अच्छे रिजल्ट भी सामने आने भी लगे हैं . जिनका इससे पहले नोकसान हो चुका उनपर अब वह सिर्फ अफ़सोस ही कर   सकते  हैं  . खालिद के  के हवाले से जनाब खुर्शीद ने कहा के इस मामले को मुसलामानों के नजरिये से नहीं बलके मानवाधिकार के हवाले से उठाने की जरुरत है .उनहोंने यह भी कहा के इस मामले पर तमाम सियासी पार्टियों को पार्टी स्तर  से ऊपर उठ करसोंचना चाहिए .एक सवाल के जवाब में जनाब खुर्शीद ने कहा के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में किसी मामले को जिस तरह बढ़ा चढ़ा कर पेश किया जाता है वह बेलासुबहा  एक संगीन और खतरनाक मसला है लेकिन सरकार के पास इस पर लगाम लगाने के लए फिलहाल कोई मैकेनिज्म अथवा तरीका मौजूद नहीं . जानाब खुर्शीद  उर्दू पत्रकारों के साथ विशेष भेंट वार्ता में उपरोक्त बातें कही।  (पिन्दार उर्दू पटना दिनांक 24/05/2013 page number .7)  www.biharbroadcasting.com

भेद भाव के कारण मुसलमानों में बढ़ रही असुरक्षा की भावना (काटजू) मुसलामानों को बदनाम करनेवालों क्व खेलाफ जस्टिस काटजू ने की बेबाक आलोचना सहारनपुर 1 7 मई (एजेंसी प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन मारकंडे काटजू ने गुजिस्ता दिनों एक सिम्पोजियम को खेताब करते हुए खुले तौर पर इस बात और इस सच्चाई को स्वीकार किया था के मुसलामानों के खेलाफ इम्तेयाजी सलूक अथवा भेदभावपूर्ण रवैया के कारण मुसलामानों में असुरक्षा की भावना बढ़ा है और इसी के साथ उनहोंने मीडिया को लताड़ा भी था के वह मुस्लिम कम्युनिटी के खेलाफ बेहूदा रिपोर्टिंग करके उनके किरदार अथवा छवी को संदेहास्पद बना रहा और वह अपनी गैर जिम्मेदाराना से पूर्ण पत्रकारिता के जरिये उनके हौसले को पस्त भी कर रहा है . जनाब जस्टिस काटजू ने कहा है के ये एक ऐसी हरकत है के जिसके खेलाफ आवाज उठाने की असल जरुरत है .


भेद भाव  के कारण मुसलमानों में बढ़ रही असुरक्षा की भावना (काटजू)
मुसलामानों को बदनाम करनेवालों क्व खेलाफ जस्टिस काटजू ने की बेबाक आलोचना
सहारनपुर 1 7  मई (एजेंसी
प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन मारकंडे काटजू ने गुजिस्ता दिनों एक सिम्पोजियम को खेताब करते हुए खुले तौर पर इस बात और इस सच्चाई को स्वीकार किया था के मुसलामानों के खेलाफ इम्तेयाजी सलूक अथवा भेदभावपूर्ण रवैया के कारण मुसलामानों में असुरक्षा की भावना बढ़ा है और इसी के साथ उनहोंने मीडिया को लताड़ा भी था के वह मुस्लिम कम्युनिटी के खेलाफ बेहूदा रिपोर्टिंग करके उनके किरदार अथवा छवी को संदेहास्पद बना रहा और वह अपनी गैर जिम्मेदाराना से पूर्ण पत्रकारिता के जरिये उनके हौसले को पस्त भी कर रहा है . जनाब जस्टिस काटजू ने कहा है के  ये एक ऐसी हरकत है के जिसके खेलाफ आवाज उठाने की असल जरुरत है .
   

           
 इससे पूर्व जस्टिस काटजू ने अपने बेबाक बयानात में हर उस हिन्दुस्तानी फिरका की हेमायत में प्रेस की जमकर मुखालेफत की है के जिनको प्रेस अपने मुफाद के लिए और अपनी चटपटी सुर्ख़ियों के लिए इस्तेमाल कर रहा है , उन्होंने कहा के जब कभी भी कोई भी बम धमाका होता है तो एक घंटे के अन्दर हमारे मुल्क के बहुत सारे टी वी चैनेल ये दिखाना शुरू कर देते हैं के इंडियन मुजाहेदीन जैश मोहम्मद  या हरकतुल मुजाहेदीन , हरकते जिहाद इस्लामी या फिर किसी और कथीत मुस्लिम संगठनों ने इस बम धमाके की जम्मेदारी काबुल करने के लिए एस एम् एस भेजा है और इसी एस एम् एस को बुनियाद बनाकर राष्ट्रीय मीडिया अल्पसंख्यक तबका को अपने टी वी चैनलों के जरिये डराना शुरू कर देता है . जस्टिस काटजू ने मज्र्र्द कहा के एक इ मेल या एस एम् एस कोई भी असामाजिक तत्व भेज सकता है ,लेकिन जब आप टी वी पर या फी अगले दिन प्रिंट मीडिया में इसको इस तरह से दिखाना शुरू कर डरते हैं मानो तमाम मुसलमान आतंकवादी होते हैं ,और वह बम फेंकने के अलावा कुछ नहीं करते ?आप पुरे मुस्लिम समाज की हौसले को पस्त और मुस्लिम समाज को अपने इस गलत काम से बदनाम कर देते हैं और देश में समप्रदाइक्ता का जहर घोल देते हैं .जनाब मारकंडे काटजू इंग्लिश दैनिक हिन्दू के बैनर तले  " रिपोर्टिंग टेरर मीडिया किस तरह संजीदा है "पर एक सिम्पोजियम को संबोधित करते हुए पिछले दिनों अपने बेबाक लहजे में ये भी  कहा था के देश की राष्ट्रीय मीडिया का गैर जिम्मेदाराना हरकत मुल्क में फिरकापरस्ती को बढ़ावा दे रहा है ?जनाब काटजू न कहा था के ये नहायत बेहूदा हरकत है मैंने इस हरकत के खेलाफ आवाज़ बुलंद  की है  , लेकिन वह कहते हैं के मई मीडिया को दबा रहा हूँ ये खेयाल जाहिर करते हुए के मीडिया को एख्लाकियात का पाबन्द होना चाहिए और अपनी कौमी अथवा राष्ट्रीय जिम्मेदारी को जेहन नशीं करना चाहिए . जस्टिस काटजू ने आगे कहा था वह देश में अमन व भाई चारा देश की सुरक्षा और मीडिया की आजादी को बेहतर तौर से देखना चाहते हैं ,लेकिन वह ऐसी मीडिया को बिल्कुल पशंद नहीं करते जो देश की सुरक्षा , और देश की भाई चारा के लिए खतरनाक हो .

उर्दू दैनिक पिन्दार पटना दिनांक 18/05/2013 पृष्ट नंबर 6 से लिया गया है .   www.biharbroadcasting.com 

www.biharbroadcasting.com: Afroz Alam Sahilमैं सोच रहा हूं कि सरकार को एक ऐस...

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Afroz Alam Sahilमैं सोच रहा हूं कि सरकार को एक ऐस...
: Afroz Alam Sahil मैं सोच रहा हूं कि सरकार को एक ऐसा कानून बना देना चाहिए कि जो भी मुसलमान आतंकवादी घटनाओं के नाम पर गिरफ्तार हो, उसे ...

मैं सोच रहा हूं कि सरकार को एक ऐसा कानून बना देना चाहिए कि जो भी मुसलमान आतंकवादी घटनाओं के नाम पर गिरफ्तार हो, उसे तुरंत फांसी दे दी जाए... आखिर इतने सालों तक किसी को जेल में रखने से फायदा क्या... कोर्ट का महत्वपूर्ण समय भी बर्बाद होता है... और ज़्यादातर मामलों में कोर्ट इन्हें बेगुनाह ही साबित कर देती है... बेचारे हमारे पुलिस वालों को कुछ ज़्यादा ही मेहनत करनी पड़ जाती है... अब किसी को होशियारी के साथ जान से मारना भी तो मेहनत का काम है ना... कितना दिमाग लगाना पड़ता होगा... इन पुलिस वालों को तो अवार्ड दिया जाना चाहिए कि कहीं तो यह अपना दिमाग लगाते हैं...
I am thinking that the Government should make a law that Muslims were arrested in the name of terrorist events, gave him instant executions. ... After all these years in prison up to benefit from ... The Court is also significant time waste ... And in most cases the Court gives them guiltless who misuses the same proven ... Poor have only our policemen more hard work is need ... Now anyone with a life even harder to kill than intelligently work right ... How does the brain will find ... These policemen should the award that it spend your mind ... (Translated by Bing)
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भावनाभेदभाव के कारण मुसलमानों में बढ़ रही असुरक्षा की भावना ,ऐसी मीडिया को बिल्कुल पशंद नहीं करते जो देश की सुरक्षा , और देश की भाई चारा के लिए खतरनाक हो (काटजू)

भावनाभेदभाव के कारण मुसलमानों में बढ़ रही असुरक्षा की भावना (काटजू)
मुसलामानों को बदनाम करनेवालों क्व खेलाफ जस्टिस काटजू ने की बेबाक आलोचना
सहारनपुर 1 7  मई (एजेंसी
प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन मारकंडे काटजू ने गुजिस्ता दिनों एक सिम्पोजियम को खेताब करते हुए खुले तौर पर इस बात और इस सच्चाई को स्वीकार किया था के मुसलामानों के खेलाफ इम्तेयाजी सलूक अथवा भेदभावपूर्ण रवैया के कारण मुसलामानों में असुरक्षा की भावना बढ़ा है और इसी के साथ उनहोंने मीडिया को लताड़ा भी था के वह मुस्लिम कम्युनिटी के खेलाफ बेहूदा रिपोर्टिंग करके उनके किरदार अथवा छवी को संदेहास्पद बना रहा और वह अपनी गैर जिम्मेदाराना से पूर्ण पत्रकारिता के जरिये उनके हौसले को पस्त भी कर रहा है . जनाब जस्टिस काटजू ने कहा है के  ये एक ऐसी हरकत है के जिसके खेलाफ आवाज उठाने की असल जरुरत है .
   
           
 इससे पूर्व जस्टिस काटजू ने अपने बेबाक बयानात में हर उस हिन्दुस्तानी फिरका की हेमायत में प्रेस की जमकर मुखालेफत की है के जिनको प्रेस अपने मुफाद के लिए और अपनी चटपटी सुर्ख़ियों के लिए इस्तेमाल कर रहा है , उन्होंने कहा के जब कभी भी कोई भी बम धमाका होता है तो एक घंटे के अन्दर हमारे मुल्क के बहुत सारे टी वी चैनेल ये दिखाना शुरू कर देते हैं के इंडियन मुजाहेदीन जैश मोहम्मद  या हरकतुल मुजाहेदीन , हरकते जिहाद इस्लामी या फिर किसी और कथीत मुस्लिम संगठनों ने इस बम धमाके की जम्मेदारी काबुल करने के लिए एस एम् एस भेजा है और इसी एस एम् एस को बुनियाद बनाकर राष्ट्रीय मीडिया अल्पसंख्यक तबका को अपने टी वी चैनलों के जरिये डराना शुरू कर देता है . जस्टिस काटजू ने मज्र्र्द कहा के एक इ मेल या एस एम् एस कोई भी असामाजिक तत्व भेज सकता है ,लेकिन जब आप टी वी पर या फी अगले दिन प्रिंट मीडिया में इसको इस तरह से दिखाना शुरू कर डरते हैं मानो तमाम मुसलमान आतंकवादी होते हैं ,और वह बम फेंकने के अलावा कुछ नहीं करते ?आप पुरे मुस्लिम समाज की हौसले को पस्त और मुस्लिम समाज को अपने इस गलत काम से बदनाम कर देते हैं और देश में समप्रदाइक्ता का जहर घोल देते हैं .जनाब मारकंडे काटजू इंग्लिश दैनिक हिन्दू के बैनर तले  " रिपोर्टिंग टेरर मीडिया किस तरह संजीदा है "पर एक सिम्पोजियम को संबोधित करते हुए पिछले दिनों अपने बेबाक लहजे में ये भी  कहा था के देश की राष्ट्रीय मीडिया का गैर जिम्मेदाराना हरकत मुल्क में फिरकापरस्ती को बढ़ावा दे रहा है ?जनाब काटजू न कहा था के ये नहायत बेहूदा हरकत है मैंने इस हरकत के खेलाफ आवाज़ बुलंद  की है  , लेकिन वह कहते हैं के मई मीडिया को दबा रहा हूँ ये खेयाल जाहिर करते हुए के मीडिया को एख्लाकियात का पाबन्द होना चाहिए और अपनी कौमी अथवा राष्ट्रीय जिम्मेदारी को जेहन नशीं करना चाहिए . जस्टिस काटजू ने आगे कहा था वह देश में अमन व भाई चारा देश की सुरक्षा और मीडिया की आजादी को बेहतर तौर से देखना चाहते हैं ,लेकिन वह ऐसी मीडिया को बिल्कुल पशंद नहीं करते जो देश की सुरक्षा , और देश की भाई चारा के लिए खतरनाक हो .
उर्दू दैनिक पिन्दार पटना दिनांक 18/05/2013 पृष्ट नंबर 6 से लिया गया है .   www.biharbroadcasting.com