Santosh Singh added 3 new photos.
कल देर शाम दिल्ली से हमारे एक पत्रकार मित्र का फोन आया आपके मेल पर एक खबर भेजे हैं देख लिजिएगा,,, खबर से लौटेने के बाद मैंने मेल खोला 9 मिनट का भिजुउल था खुलने में थोड़ा वक्त लगा लेकिन मेल का मजबून मैं खोलते ही समझ गया वीडियो दिल्ली सरकार में मंत्री रहे संदीप कुमार का था,,,,,,
वीडियो देखने के बाद मुझे लगा कि केजरीवाल जल्दबाजी में फैसला ले लिये ,,,,,,, जहां तक मुझे लग रहा है कि वीडियो चार पांच वर्ष पहले का है जब संदीप छात्र रहे होगे।। वीडियों में कही से भी जबरदस्ती या फिर बहला फुसला कर शारीरिक सम्बन्ध स्थापित करने कि बात नही दिख रही थी मुझे नही लगता है कि सहमति से शारीरिक सम्बन्ध बनाना कानून कि तो छोड़िए नैतिकता के कसौटी पर भी खड़ा नही उतरता है वो भी उस देश में जहां शारीरिक सम्बन्ध बनाने से जुड़ी एक से एक तस्वीरें मंदिरों में बनी हुई है।।
कामसूत्रा जैसी पुस्तके इसी देश में लिखी गयी है फिर पता नही सवाल किस आधार पर उठाया जा रहा है।।।
वैसे मैं आपको बता दूं दिल्ली में मुद्रिका,आईआईटी,मुखर्जीनगर,मांडल टाउन,इंदिरा विहार,हटसन लाइन,ख्वाजा सराह जैसे दो दर्जन से अधिक इलाके हैं जहां काफी संख्या में दूसरे राज्यों से आकर छात्र दिल्ली विश्वविधालय के विभिन्न कांलेजों में पढते हैं या फिर प्रतियोगिता परीक्षा कि तैयारी करते हैं,,,,,,,,,, उसका इस तरह का शारीरिक सम्बन्ध मेड सरभेन्ट ,गली में कूड़ा उठाने वाली से बनाते हुए मैंने देखा है 1994----95 कि बात कर रहे हैं उस 30 से 40 प्रतिशत छात्र इस तरह के रिश्ते बनाते थे ,,,गर्लफ्रेंड के साथ लिभिंग रिलेशन तो आम बात हो गया था जरुरी नही था कि उससे शादी करे ही ,,,,,जिस वीडियो पर बबाल कर रहे हैं ना दिल्ली के कई शैक्षणिक संस्थान में किसी भी समय दिख जाता था,, दिल्ली विश्वविधालय और धौला कुंआ के पास स्थिति रिंझ और पार्क में चले जाते तो इससे भी बूरी स्थिति देखने को मिलता था,,,,,,,,
मैं व्यक्तिगत रुप से जानता हूं एक अधिकारी है काफी चर्चित भी है उनका मेड सरभेन्ट से इस तरह का रिश्ता था कौन नही जानता था,,, लेकिन उस वक्त भी बिहार,, बिहारी स्वभिमान और पढाई को लेकर जो कमीटमेन्ट था उससे वो कभी समझौता नही किये और नौकरी में भी उनके बहादूरी और ईमानदारी कि चर्चा होती है,,,,,
बात निकली है तो दूर तलक जाऐगी,,,, रात को 11 बज रहा था एक पुलिस अधिकारी के साथ डिनर चल रहा था तभी फोन आया सर उस मामले का खुलासा हो गया मामला इतना बड़ा था कि डिनर बीच में ही छोड़ कर चलने कि स्थिति बन गयी खैर खाना किसी तरह पूरा किये और फिर साथ चल दिये ,,चलते चलते किसी डबल स्टोरेज बिल्डिंग के अंदर पहुंचे तो वहां पहले से ही कई पुलिसकर्मी मौंजूद थे।।।
जैसे जैसे उस मकान के एक कमरे से दूसरे कमरे में प्रवेश कर रहे थे मैं हैरान था पहली बार देखा कि रिमोट से बल्ब कि रोशनी को कम ज्यादा किया जा रहा है अलमीरा खुला तो एक से एक शराब कि बोतले,सिगरेट के साथ साथ शराब परोसने वाला ग्लास जीवन में पहली बार देख रहे थे,,,,,
पलंग और उस पर बिछा बेडसीट,,,डाईनिंग टेबल,, रसोई घर,, बाथरुम मौर्या होटल के सूट में नही है जिसमें शत्रुघन सिन्हा ठहरते हैं,,एक अलमीरा खुला तो कंडोम इस तरह से सजा कर रखा गया था कि जैसे खुबसूरत गुलाब हो,, ब्लू फिल्म कि सीडी एक से एक था तभी उस अपराध में गिरफ्तार व्यक्ति को अचानक तेज थप्पर लगा और उसके बाद इस घर का दास्तान सुनाया तो मेरे पैर के नीचे से जमीन खिचक गया,,,,,यह घर अधिकारियों का एशगाह था,,,,, जब मीटिंग में आते तो यहां जरुर रुकते थे और उसके बाद जो होता होगा उसका अंदाजा लगाने कि जरुरत नही है,,,,,
एक घंटे तक पुंछताछ के बाद फिर वो मुझे मेरे घर तक छोड़ने आये रास्ते में हम दोनों चुप थे फिर मैंने ही कहा लोगों का विश्वास पूरी व्यवस्था पर से उठ जायेगा हमारे लिए बड़ी खबर है लेकिन जिन अधिकारियों का नाम आ रहा है वो किस परिस्थिति में यहां आते है पता नही लेकिन इन आदतों का असर उनके काम पर नही दिखता है,,,,,
वो खुब जोड़ से हंसे तब तक मेरा घर आ चुंका था फिर उन्होनें हाथ मिलाते हुए कहा चलिए बाई गुड नाईट।।।
मनुष्य कि ये प्रवृति सभ्यता के शुरुआत से चली आ रही है इसके नैतिक पंक्ष को लेकर डिवेट हो सकता है लेकिन मनुष्य के इस प्रवृति कि वजह से उसे कठघरे में खड़े कर दे मुझे लगता है ये सही नही है,,,,,,,इस तरह के रिश्ते पूरी तौर पर व्यक्तिगत है,, है इस प्रवृति का असर परिवार पर, समाज पर और जहां आप काम करते हैं उस पर पड़ता है तो फिर सवाल लाजमी है,,,, लेकिन इस तरह के रिश्ते को चरित्र से जोड़ने कि प्रवृति पर जो लोग मजा ले रहे हैं सोच लिए अपना कुंआ आप खुद खोद रहे हैं,,,,,
, रही बात मीडिया कि तो बड़ी चीख चीख कर नैतिकता का पाठ पढा रहे हैं स्टूडिओ और एडिटर के कमरे में क्या होता है कब से कब हमलोगों को तो पता ही है,,इसलिए इस तरह किसी के निजी जिंदगी में ताक झाकर से परहेज करिए,,, वो दिन दूर नही है सोशल मीडिया पर भिजुउल आ जाये तो कोई बड़ी बात नही होगी,,,चलते चलते बस इतना ही कह देते हैं कि श्री मान व्यक्तिगत चरित्र पर हमला करने से परहेज करिए,,,,,,,,,
ये सही है कि इस तरह के हमले को व्यक्ति फेस नही कर पाता है और आप अपनी रणनीति को सफल मानते हैं ये प्रवृति वैसे ही है जिस पेड़ पर आप बैंठे हैं उसी पेड़ को काट रहे हैं सोच लिजिए ज्यादा दिनों तक ये खुशी नही रहेगी,,,,, विकेट गिरना शुरु हुआ तो फिर पाकिस्तान के खेलाड़ी से भी बुरा हाल होगा ।।।।
स्टूडिओ और एडिटर के कमरे में क्या होता है कब से कब हमलोगों को तो पता ही है,
यहाँ ईमानदार वही बचा जिसको मौका नहीं मिला (रेयाज़ आतिश )
Reyaz Aatish
IS bharat me,
1---police qanoon bech rahi hai
2----wakeel criminals ke liye wakalat bech raha hai
3----lower court ka judge faisla bech raha hai
4---neta bhashan bech raha hai
5---IAS file me recommendations bech raha hai
6---Mantri order bechraha hai
7---chalti train me TTE berth bech raha hai
8-----Schol teacher copy me number bech raha hai.
9--- engineer cement bech raha hai
10--- Dctor sarkari hospital ka dawa bech raha hai,
11---Voter apna vote bech raha hai
12----bharashtachar ke virodh me 1977 me jitne wale LALU ne chara bech diya
YAHAN IMANDAR WOHI BACHA JISKO MAUQA NAHI MILA
https://mobile.facebook.com/story.php?story_fbid=1445362688813775&id=100000201743085&refid=8&_ft_=qid.6325972410655121110%3Amf_story_key.1230843388019862800&__tn__=%2As
https://mobile.facebook.com/story.php?story_fbid=10205537823524211&id=1810754538&refid=8&_ft_=qid.6325704112447378277%3Amf_story_key.-4482738577231635046&__tn__=%2As
[Comments] is good,have a look at it! https://mobile.facebook.com/story.php?story_fbid=10205537823524211&id=1810754538&refid=8&_ft_=qid.6325704112447378277%3Amf_story_key.-4482738577231635046&__tn__=%2As
बुश, जूता, कुत्ता और तनाव!
Shahid Sayyidain
बुश, जूता, कुत्ता और तनाव!
बगदाद में बुश पर जूता चला। बुश मुस्करा रहा है। वह इसे मजाक मान रहा है। पर अमेरिका और पूरी दुनिया के बुद्धिजीवी और पत्रकार तनाव में हैं। बुश तनाव में होता है तो दुनिया में तनाव बढ़ता है। बुश जब मुस्कराता है तब भी तनाव बढ़ता है। जूता चलाने वाले पत्रकार मुंतदेर-अल-जैदी ने जो कहा वह मजाक नहीं था। पर दुनिया देख रही है कि बुश को ऐसे मजाक पसंद हैं। इस मजाक को हम इस क्रम देखते हैं- जैदी ने पहला जूता फेंकते वक्त यह कहा-"कुत्ते, ये लो इराक़ी लोगों की ओर से आपको आख़िरी सलाम है." और जब दूसरा जूता फेंका-"ये इराक़ की विधवाओं, अनाथों और मारे गए सभी लोगों के लिए है. इसके बाद बुश ने कहा- "मैंने अपने कार्यकाल में कई बार इस तरह की अजीब घटनाएँ देखी हैं. ये महज ध्यान आकर्षित करने का तरीक़ा था. इससे इराक़ी पत्रकार भी दुखी हैं." इस पर अब एक इराकी की प्रतिक्रिया- "जॉर्ज बुश को एक या दो नहीं 100 जूते मारने चाहिए. कोई नहीं चाहता है कि वे यहाँ आएँ." द न्यूयार्क टाइम्स यह कहता है- एक इराकी टीवी के पत्रकार मुंतदेर-अल- जैदी द्वारा रविवार को इराकी प्रधानमंत्री के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में बुश पर जूते चलाने की घटना ने इराक में अमेरिकी सेना की उपस्थिति पर बहस छेड़ दी है। इस घटना की त्वरित सुनवाई होनी चाहिए। जैदी के लिए सक्षम वकील किया जाना चाहिए। बुश को इस घटना को अंतहीन जूतों के स्रोत के मजाक के तौर पर नहीं देखना चाहिए। युद्ध उन्मादी बुश के लिए दुनिया का संघर्ष और तनाव ही मजाक है। उनका मनोरंजन इसीसे होता रहा है। इराक और अफगानिस्तान में लड़ी गई लड़ाइयां उनके लिए शायद एक कंप्यूटर गेम जैसी ही रोचक होंगी। अमेरिका पर आतंकी हमला हुआ दुनिया तनाव में थी, मगर बुश को लगा अब अपना खेल खेलने का वक्त शुरू हुआ। इसके बाद जो खेल खेला गया वह अभी तक जारी है। एक वाक्या है, जो बताता है कि दुनिया का सारा तनाव अंततः कुत्तो को ही झेलना पड़ता है। बॉस का तनाव अपने अधिनस्थ कर्मचारी पर उतरता है। तनाव में आया कर्मचारी घर जाकर खाना फेंक देता है कि सब्जी ठीक नहीं बनी। बीवी को खरी-खोटी सुनाता है। तनाव में आई बीवी अपना गुस्सा रोटी मांगने आए बच्चे पर निकालती है। दो झापड़ खाकर रोता हुआ बच्चा घर से निकलता है और बाहर बैठे कुत्ते को पत्थर मारता है। इस तरह सारा तनाव अंततः कुत्तों को ही झेलना पड़ता है। यह परिस्थितियां तय करती हैं कि अगर आप बॉस की हैसीयत में हैं तो कल को कुत्ते की हैसीयत तक पहुंच सकते हैं। इसलिए कभी इन्सानीयत को नहीं भूलना चाहिए। इन्सान बने रहोगे तो दुनिया का तनाव कम होगा। -सुधीर राघव ( Sunday, November 30, 2008)
https://mobile.facebook.com/story.php?story_fbid=10205537823524211&id=1810754538&refid=8&_ft_=qid.6325704112447378277%3Amf_story_key.-4482738577231635046&__tn__=%2As
यहाँ देखिये पंडित आचार्य संजय दिवेदी का इस्लाम अपनाने की वजह
यहाँ देखिये पंडित आचार्य संजय दिवेदी का इस्लाम अपनाने की वजह
By :- Zaina Disuza
नई दिल्ली। कभी भी छिपाया नहीं जा सकता, कभी भी मिटाया नहीं जा सकता, अल्लाह ने अपने महबूब हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सअव के ज़रिये तमाम कायनात की कामयाबी के लिए दीन-ए-इस्लाम को कायम किया और अपना कलाम क़ुरआन भेजा ताकि इन्सान हिदायत पा सकें और उससे क़यामत तक फायदा उठा सकें। इस्लाम मज़हब हक़ है, लोगों के गुमान और इलज़ाम कि इस्लाम तलवार या ताक़त से फैला है उनकी ही तरह झूठ और सरासर झूठ है। भारत में सबसे ज़्यादा ऊँची ज़ात के लोगों ने इस्लाम क़ुबूल किया अगर ताकत से फैला होता तो कमज़ोर, ग़रीब और पिछड़े समाज के लोगों की संख्या अधिक होना चाहिए थी। यहाँ देखिये पंडित आचार्य संजय दिवेदी का इस्लाम अपनाने का किस्सा http://www.upuklive.com/2016/08/acharya-sanjay-dwiwedi-accept-islam.html
[यहाँ देखिये पंडित आचार्य संजय दिवेदी का इस्लाम अपनाने की वजह - DELHI UP LIVE] is good,have a look at it! http://www.delhiuplive.com/2016/08/blog-post_540.html?m=1
Important links
IMPORTANT LINKS
1. Sarv Shiksha Abhiyan (http://ssa.nic.in/)
2. Education For All In India (http://www.educationforallinindia.com)
3. Registrar General of India (http://censusindia.net/)
4. District Information System for Education (http://dise.in/)
5. National University of Education Planning & Administration (http://nuepa.org/)
6. Website Addresses of States/Union Territories (http://www.schoolreportcards.in/
7. Details of Primary and Upper Primary Schools In Bihar (http://www.schoolreportcards.in)
8. Bihar Madhymik Shiksha Parishad (http://www.bmsprmsa.in)
9. Mid Day Meal (http://mdmsbihar.org/)
10. Bihar Board of Open Schooling and Examination (B.B.O.S.E.)(http://bbose.org/)
11. All India School Education Survey
All India Survey on Higher Education
Bihar Education Quality Misson(http://bihar100years100pledges.sunai.in)
12. Bihar Education Project Council (http://bepcssa.in)
13. Bihar State Educational Infrastructure Development Corporation (www.bseidc.in )
14. Bihar School Examination Board (http://biharboard.net/)
15. Bihar State Text Book Publishing Corporation Limited (http://www.bstbpc.gov.in/)
University
16. Patna University (http://www.puonline.bih.nic.in)
17. Magadh University (http://www.magadhuniversity.org)
18. Lalit Narayan Mithila University (http://www.lnmu.bih.nic.in)
19. Tilka Manjhi Bhagalpur University (http://www.tmbu.org)
20. Babasaheb Bhimrao Ambedkar Bihar University (http://www.brabu.net)
21. Bhupendra Narayan Mandal University (http://www.bnmu.in, http://www.bnmu.bih.nic.in)
22. Jai Prakash Vishwavidyalaya (http://www.jpv.bih.nic.in)
23. Kameshwar Singh Darbangha Sanskrit University (http://www.ksdsu.edu.in)
24. Veer Kunwar Singh University (http://www.vksu-ara.org)
25. Nalanda Open University (http://www.nalandaopenuniversity.com)
26 . Central University of Bihar (http://www.cub.ac.in)
27. Chanakya National Law University (http://www.cnlu.ac.in/index.php)
28. Maulana Mazharul Haque Arabic & Persian University (http://www.mmhapu.bih.nic.in)
29. Rajendra Agricultural University (http://www.pusavarsity.org.in)
30. Bihar Yog Bharati (Deemed University) (http://www.yogavision.net)
31. Rajendra Agriculture University (http://www.pusavarsity.org.in, http://www.rauabm.org.in)
32. Bhavnagar University (http://www.bhavuni.edu)�
College
33. A. N. Sinha Institute (http://www.ansiss.org)
34. National Institute of Technology (http://www.nitp.ac.in)
35. Muzaffarpur Institute of Technology (http://www.mitmuzaffarpur.org)
36. L. N. Mishra Institute, Patna(http://www.lnmipat.ac.in)
37. DNS Regional Institute of Co-operative Management (http://www.ricmpatna.bih.nic.in)
38. College of Arts & Crafts, Patna University (http://www.artcollege.bih.nic.in)
39. Chandragupta Institute of Management, Patna (http://www.cimp.ac.in)
40 . Chanakya National Law University, Patna (http://www.cnlu.ac.in)
41. Bihar National College, Patna (http://www.bncollege.in)
42. Bihar Institute of Public Administration (http://www.bipard.org)
43. Bihar Agricultural Management & Extension Training Institute (BAMETI)
(http://www.bameti.org)
Others
44. Fake University List (as per UGC) (http://www.ugc.ac.in/inside/fakealerts.html)�
जब हमारी रोजमर्रा की ज़िन्दगी में मिलने वाले लोग "हिन्दू" या "मुसलमान" नहीं होते तो फिर क्या वजह है कि "चुनाव" आते ही हम "हिन्दू" या "मुसलमान" हो जाते हैं ?
Farhad Khan
एक आम आदमी सुबह जागने के बाद सबसे पहले टॉयलेट जाता है, बाहर आ कर साबुन से हाथ धोता है,
दाँत ब्रश करता है,
नहाता है,
कपड़े पहनकर तैयार होता है, अखबार पढता है,
नाश्ता करता है,
घर से काम के लिए निकल जाता है,
बाहर निकल कर रिक्शा करता है, फिर लोकल बस या ट्रेन में या अपनी सवारी से ऑफिस पहुँचता है,
वहाँ पूरा दिन काम करता है, साथियों के साथ चाय पीता है, शाम को वापिस घर के लिए निकलता है,
घर के रास्ते में एक सिगरेट फूँकता है,
बच्चों के लिए टॉफी, बीवी के लिए मिठाई वगैरह लेता है,
मोबाइल में रिचार्ज करवाता है, और अनेक छोटे मोटे काम निपटाते हुए घर पहुँचता है,
अब आप बताइये कि उसे दिन भर में कहीं कोई "हिन्दू" या "मुसलमान" मिला ?
क्या उसने दिन भर में किसी "हिन्दू" या "मुसलमान" पर कोई अत्याचार किया ?
उसको जो दिन भर में मिले वो थे.. अख़बार वाले भैया,
दूध वाले भैया,
रिक्शा वाले भैया,
बस कंडक्टर,
ऑफिस के मित्र,
आंगतुक,
पान वाले भैया,
चाय वाले भैया,
टॉफी की दुकान वाले भैया,
मिठाई की दूकान वाले भैया..
जब ये सब लोग भैया और मित्र हैं तो इनमें "हिन्दू" या "मुसलमान" कहाँ है ?
"क्या दिन भर में उसने किसी से पूछा कि भाई, तू "हिन्दू" है या "मुसलमान" ?
अगर तू "हिन्दू" या "मुसलमान" है तो मैं तेरी बस में सफ़र नहीं करूँगा,
तुझसे सिगरेट नहीं खरीदूंगा,
तेरे हाथ की चाय नहीं पियूँगा,
तेरी दुकान से टॉफी नहीं खरीदूंगा,
क्या उसने साबुन, दूध, आटा, नमक, कपड़े, जूते, अखबार, टॉफी, मिठाई खरीदते समय किसी से ये सवाल किया था कि ये सब बनाने और उगाने वाले "हिन्दू" हैं या "मुसलमान" ?
आम तौर पर हम सबके साथ ऐसा ही है,
शायद ही कोई आज कल के युग में किसी की "जाति" या "धर्म" पूछ कर तय करता है कि फलाँ आदमी से कैसा व्यवहार करना है, हम सबके फ़ोन की लिस्ट में या सोशल मीडिया की फ्रेंड लिस्ट में ना जाने कितने "हिन्दू" या "मुसलमान" होंगे..
क्या आज तक किसी ने कभी भी उनकी पोस्ट लाइक करने से पहले या उस पर कमेन्ट करने से पहले उनकी "जाति" या "धर्म" पुछा ?क्या किसी से कभी कहा कि तुम "हिन्दू" हो या "मुसलमान" हो ?
इसलिए मेरी पोस्ट पर लाइक या कमेन्ट मत करना ?
"जब हमारी रोजमर्रा की ज़िन्दगी में मिलने वाले लोग "हिन्दू" या "मुसलमान" नहीं होते तो फिर क्या वजह है कि "चुनाव" आते ही हम "हिन्दू" या "मुसलमान" हो जाते हैं ?
"क्या वजह है कि हम चुनाव में किसी "हिन्दू" या "मुसलमान" को चुनने की बजाय किसी "अच्छे ईमानदार इंसान" को क्यों नहीं चुनते जो हमारे देश को तरक्की की राह पर आगे ले जाये । इसलिए सभी हिंदुस्तानी भाई अपने कर्तव्य का पालन करते हुए "जाति" और "धर्म" के नाम पर राजनीति करने वालों पहचानें और "जाति" और "धर्म" के नाम पर राजनीति करने वालों को नकारें..
ये "जाति" और "धर्म" के नाम पर राजनीति करने वाले हम सब हिंदुस्तानी भाइयों को "असंगठित" करके हम पर राज करना चाहते हैं सभी "जाति" और "धर्म" के हिन्दुस्तानी भाई मिल कर इन्हें खदेड़ संगठित हो जाएँ..
क्योंकि हम सब भारतीय हैं जयहिंद जय भारत"
March 31 at 10:35am · Doha, Qatar · Public
More
[Comments] is good,have a look at it! https://mobile.facebook.com/story.php?story_fbid=1109355405773053&id=100000958124852&refid=17&_ft_=top_level_post_id.1109355405773053%3Atl_objid.1109355405773053%3Athid.100000958124852%3A306061129499414%3A2%3A0%3A1472713199%3A3029229642663750481&__tn__=%2As
Is any body serious about solution to Kashmir problem...?
Dr M A Ibrahimi, IAS
Is any body serious about solution to Kashmir problem...?
Curfew continues in Kashmir valley. After 68 dead Kashmir remains a hell. The solution to the Kashmir problem is as remote now as it was before imposition of curfew.
The authorities say that it is only 5% of Kashmiri people who are creating trouble.Then does it not indicate that authorities mishandled the situation which has annoyed rest of peace loving 95% people otherwise how the curfew would prolong indefinitely.
One important realisation by authorities is that use of lethal ammunition became counter productive. Even use of pellette ammunition was criticised by several quarters. Now efforts are on to use chilli powder PAVA in grenade and tear gas guns. This will be useful in future.
The problem of Kashmir is not a new phenomenon. It has been there since accesion of Kashmir with Indian Union. Since then there were Central governments of different political parties. Similarly differnt political parties were at the helm of affairs in J&K. Never effective steps were taken to win over confidence of Kashmiri people though Assembly elections are organised successfully. There people want more. Half hearted efforts used to be made to know sentiments of the people. The previous UPA government appointed three members interlocutor group which held several meetings with all sections of society. It gave some useful recommendations. The reports are gathering dust in the office.
Earlier principle was also formulated to achieve goal of permanant solution : Kashmiriat, Insaniat and Jamhuriat. Even this principle was abandoned without achieving its objective.
Now, Kashmir is in turmoil and solution elusive. All authorities are now realising mishandling of law and order in the valley.
The solution to the problem lies in changing mindset of authorities in dealing with hostilities of people of certain regions which includes NE as well.
Nobody should try to teach lessons to the people of any region. After all they also are Indian with some political resentment. With vibrant Constitution and rich cultural heritage of India it is the responsibility of people of rest of India to carry along even angry fellow citizens of some regions. Does it not happen in Indian family system.
Now some specific solution are recommended.
All the authorities should believe in tactful handling of the agitation. They should also deal with people by showing big heart and showing genuine concern for their development. Action speaks louder than the words. Since start of agitation in the valley the statements of important authorities are also not in tune with the resposibilities they hold. Their utterance should help calm the environment.
Secondly every body wants Kashmiri youth to hold computer, pen, books and cricket bat in his hands. This can be achieved if rest of India is sincere and can show magnanimity. Almost all adult youth of Kashmir should be appointed in massive way in government sector of Centre and all States. Here lies test of sincerity of authorities. If Kashmiri youth are employed through special drive there are many benefits. If Kashmiri youth are living in rest of India then who will organise agitation in the valley. These youth will gradually appreciate living in pluralistic society in democracy in rest part of India. Their mindset will change. There is no need to create noise over payment of their salary. There is huge expenditure on maintainance of law and order in Kashmir valley round the year. At the cost of one day expenditure on law and order in the valley the Kashmiri youth would get their job in rest of India. It would thus drastically reduce expenditure on law and order. Keep in mind that there is big poverty in Kashmir valley.
Thirdly an initiative not taken so far. There is strong opinion among Muslims in India that Kashmir is an integral part of India. The concerned authorities of Centre and State should facilitate visit of Muslims from rest of India to Kashmir valley for interaction at various social and cultural fora. These Muslims would convey to Kashmiri people how Kashmir is an integral part of India and how their interests are more protected in India. They would also convince that they should prefer to live in India as Muslims are living in rest of India.
I wish concerned authorities are able to achieve lasting solution to chronic problem of Kashmir.
Dr. MA Ibrahimi
अगर स्कूली शिक्षा में गुणवत्ता लाना है तो सबसे पहले शिक्षा विभाग के अधिकारियों -कर्मचारियों से ले कर शिक्षा मंत्री का वेतन-भत्ता छः महीने के लिए बिलकुल बन्द कर दिया जाय तो फिर देखें ना सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था में कैसे गुणात्मक सुधार होता ह
Deepak Jaiswal
बिहार तेज़ी से सड़ रहा है...
बिहार के सरकारी विद्यालयोंं के नियोजित शिक्षकों का वेतन पिछले छः-छः महीनों तक से नहीं मिला है और ऐसे में सरकार और आम जनता बिहार के सरकारी स्कूलों से शिक्षा में गुणवत्ता की उम्मीद करती है... किसी भी विद्यालय में जरूरत के मुताबिक 40% से ज्यादा शिक्षक हैं ही नहीं..... और गणित-विज्ञान- अंग्रेजी में तो बरसों से नहीं... सरकार शिक्षक नियोजन के नाम पर तमाम नौटंकीबाज़ी कर रही है... पिछले तीन साल से एक भी शिक्षक की बहाली नहीं हुई है... जबकि हर महीने हजारों शिक्षक रिटायर हो रहे हैं....
अब अगर सही तरीके से बोर्ड-इंटर परीक्षा लेने पे सरकारी विद्यालयों के 48% बच्चे फेल कर रहे हैं और राज्य में कोचिंग माफिया का प्रचार-प्रसार हो रहा है तो दोष किसका???
अरे अगर स्कूली शिक्षा में गुणवत्ता लाना है तो सबसे पहले शिक्षा विभाग के अधिकारियों -कर्मचारियों से ले कर शिक्षा मंत्री का वेतन-भत्ता छः महीने के लिए बिलकुल बन्द कर दिया जाय तो फिर देखें ना सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था में कैसे गुणात्मक सुधार होता है...
https://mobile.facebook.com/story.php?story_fbid=1165725783498893&id=100001844469703&refid=7&ref=notif_textonly&_ft_=qid.6324523963007451389%3Amf_story_key.-3228091665894040694&__tn__=%2As
1857 जंगे आजादी और उल्मा ए अहले सुन्नत का किरदार जिन्होने अपने खून से हिन्दुस्तान को सींचा और लोगो को गुलामी के जंजीरो से आजाद होने का जज्बा पैदा किया. सुल्तान टीपु ये हिन्दुस्तान के पहले मुजाहीद है जिन्होने अंग्रेजो के खीलाफ अलमे जिहाद को बुलंद किया और सबसे पहले तसव्वरे आजादी का का जेहन दिया.
1857 जंगे आजादी और उल्मा ए अहले
सुन्नत का किरदार जिन्होने अपने खून से
हिन्दुस्तान को सींचा और लोगो को गुलामी
के जंजीरो से आजाद होने का जज्बा पैदा
किया.
सुल्तान टीपु ये हिन्दुस्तान के पहले मुजाहीद है जिन्होने अंग्रेजो के खीलाफ
अलमे जिहाद को बुलंद किया और सबसे
पहले तसव्वरे आजादी का का जेहन दिया.
1857 मे जो जंगे आजादी के सबसे बडे
हिरो थे इसमे उल्मा ए किराम की एक बडी तवील फेहरिस्त है खुसुसन इस
तहरीक के बानी और इस तहरीक को शूरू
करने वाले सबसे पहले जिस शख्शियत
का नाम आता है वो हजरते अल्लामा फजले
हक खैराबादी का आता है.
उसके बाद हजरत सैयद किफायत अली
काफी मुरादाबादी रहम. हैं ये अपने वक्त के
बहोत बडे जंगे आजादी के मुजाहिद है.
मुफ्ती सदरूद्दीन आजरदह देहलवी ये
1857 के जंगे आजादी के वो उल्मा हैं
जिन्होने लोगो मे आजादी का जजबा पैदा
किया और एक नई रूह फूंकी.
इन्ही मे अल्लामा अहमादुल्लाह शाह
मडरासी जो एक बहोत बडे वलिये
कामिल और एक मजजूब बुजुर्ग थे जब
अल्लामा फजले हक खैराबीदी ने अंग्रेजो
के खिलाफ अल्मे जिहाद का फतवा दिया
तो उस फतवे पर इस बुजुर्ग के भी दस्तखत
थे इस बुजुर्ग ने पूरे हिंदुस्तान मे घूम घूम
कर लोगो मे आजादी का एक माहोल पैदा
किया.
इन्ही मे मुफ्ती इनायत अहमद काकोरी.
मौलाना डा. वजीर खां अकबराबादी.
मौलाना वहाजुद्दीन मुरादाबादी.
मौलाना ईमाम बख्श अहबाई.
मजहर करीम दरयाबादी.
ये वो अल्मा ए किराम है जिन्हे आज
हमारे सुन्नी जानते तक नही. इन्ही मे
मुफ्ती रहमातुल्लाह केरालवी.
मौलाना हिदायत रसूल.
मिरजा अस्दुल्लाह खां गालिब.
मौलाना अब्दुल कादिर साहब.
काजी फैजउल्लाह देहलवी.
मौलाना फैज अहमद बदायूनी.
सैयद मुबारक शाह रामपुरी.
मौलाना अब्दुल हक खैराबादी जो अल्लामा
फजले हक खैराबादी के बेटे थे यो तो
इतने बडे मुहिब्बे वतन थे कि इन्होने
वसीयत फरमाई थी की जब अंग्रेज देश
छेडकर चले जाये तो मेरी कब्र पर आकर
ये खुशखबरी सुना दी जाये. चुनान्चे आपके
वसीयत के मुताबिक जब 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ तो उसी दिन
हजरत मौलाना सैयद नजमुल हसन
रजवी खौराबादी ने आपके मदफन दरगाह
मखदूमिया खैराबाद जिला सीतापुर में
एक जम्मे गफीर के साथ पहुंचे और
बुलंद आवाज से फरमाया मौलाना अब्दुल
हक खुश हो जाओ अंग्रेज देश छोडकर चले
गये.
1857 का का पस मंजर ये था कि अंग्रेजो
ने कारतूस तैयार की जिसमे गाय की
चरबी और खंजीर की चरबी को इस्तेमाल
मे लाया गया. गाय हिन्दु के नजदीक
पबित्र थी और खंजीर मुसलमान के नजदीक निहायत नजिस और नापाक था
चुनान्चे अंग्रेजो की फौज मे एक जरनल
जिसका नाम मंगल पांडे था उसने कहा
हम इस कारतूस का इस्तेमाल नही करेंगे.
और इस बात को लेकर सुलतान बहादुर
शाह जफर के पास पहुंचा. बहादुर
शाह जफर ने उल्मा ए किराम को
बुलाया और मसवरा तलब किया कि
अंग्रोजो के खिलाफ जंग क्या मायने रखती
है क्या इन्के इक्तेदार को तसलीम किया जाये या फिर इनसे जंग की जाये.
चुनान्चे हजरते अल्लामा फजले हक खैराबादी ने अंग्रेजो के खिलाफ अल्मे
जिहाद का फतवा दिया और कहा अंग्रेजो
से जिहाद करना जायज है. जब आपने
फतवा दिया तो पूरे हिंदुस्तान मे कोहराम मच गया. फतवा देने के कई महीने बाद
अंग्रेजो ने आपको गिरफ्तार किया अदालत
मे गये जज ने पूछा क्या ये फतवा आपका
है. आपने बडे दिलेराना अंदाज मे फरमाया
हां ये मेरा फतवा है. उल्मा फरमाते हैं
अगर आपने कह दिया होता ये फतवा मेरा
नही है तो अंग्रोजो के पास कोई सुबूत ही
नही था जो आपको गिरीफतार करते.
चुनानचे आप पर मुकदमा चला आपने
ने कोई वकील नही रखा बल्कि खुद
अपने मुकदमे को लडते और ऐसी जिरह
और ऐसी बहस करते की अंग्रेजो को
लगने लगा अगर कुछ दिन और मुकदमा
चला तो फजले हक हमे देश से निकालकर
रहेगा और हमारे वजूद को हिंदुस्तान मे
गलत साबित करके रहेगा.
चुनानचे अग्रेजो ने कहा चुंकि तुमने हमारे
खिलाफ जंग का फतवा दिया है
और हमारे इक्तेदार को तसलीम नही
कीया इसपर हम तुम्हो काले पानी की
सजा देते हैं. चुनानचे आपको काला पानी
अंडमान मे भेज दिया जाता है.
तफसीली वाक्या आप किताब मे पढे.
1861 मे आपका वंही इंतकाल होता है
और वंही मजार शरीफ है.
जितनो के नाम मैने लिखे है अगर सबके
हालात लिखु तो ऐसे दस पोस्ट की
जरूरत पडेगी.
बख्त खां जो बहादुर शाह जफर के सैना के सालार ए आजम थे बहोत बडे सिपहे सालार थे और बहोत बडे जंगे आजादी के
हीरो थे. मुफ्ती सदरूद्दीन आजरदह देहलवी इन्हे भी अंग्रेजो ने काला पानी
की सजा सुनाई थी.
मौलाना हिदायत रसूल जो आला हजरत
के सागिर्दे खास थे. इन्हे भी अंग्रोजो ने
फासी की सजा दे दी थी. बहोत बडे
तकरीर दा थे अंग्रेजो के खिलाफ पूरी
जिंदगी बोलते रहे तकरीर करने मे इन्हे
मलका हासिल था. आला हजरत इन्के
बारे मे फरमाते थे कि अगर मुझ जैसा एक कलम का धनी और हिदायत रसूल
जैसा एक और तकरीर करने वाला मिल
जाता तो हम दोनो मिलकर ही अंग्रेजो को
हिंदुस्तान से निकाल देते.
सैयद किफायत अली काफी मुरादाबादी
इन्को भी फासी दे दी गई थी.
आला हजरत के दादा अल्लामा रजा अली
खां के सर पर अंग्रेजो ने 600 रूपये का
का ईनाम रखा था कि जो रजा अली का
सर लायेगा उसे 600 रूपया ईनाम दिया
जायेगा. जुर्म क्या था जब 1857 मे
गदर का मामला आया था तो ये भी
उसमे सामिल थे.
आला हजरत के वालिद दिन मे लोगो को
पढाते थे और रात मे घौडे खरीद खरीद
कर मुजाहिदो मे तकसीम करते थे.
बख्त खां जब बरेली पहुंचे तो सिर्फ
बरेली से चौदह हजार मुसलमान
जंगे आजादी के लिये निकले ये
उल्माए अहले सुन्नत का किरदार था.
लाल किले पर सात हजार सुन्नी उल्मा ए
किराम को अंग्रेजो ने बर सरे आम फांसी दी.
लेकिन इसके बरअक्स एक जमात
देवबंदियो की थी जो अंग्रेजो के पिठु और
गुलाम बने हुये थे जिसमे इस्माइल देहलवी इन्के पीर सैयद राय बरेली
और इन्के मानने वाले सब सामिल थे.
यंहा तक अशरफ अली थानवी भी अंग्रेजो
के पिठु बने हुये थे.
.........................................