लोकसभा चुनाव 2019 ! इंदौर में मतदान के लिए भारी भीड़ अंतिम चरण के दौरान इंदौर लोकसभा सीट पर भी वोट डाले जा रहे हैं. इस बार बीजेपी ने यहां शंकर लालवानी और कांग्रेस ने पंकज सांघवी को अपना उम्मीदवार बनाया है.


सारांश

  1. सातवें और आख़िरी चरण का मतदान जारी
  2. चंडीगढ़ और सात राज्यों की 59 सीटों पर मतदान
  3. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी सीट शामिल

लाइव रिपोर्टिंग

  1. इंदौर में मतदान के लिए भारी भीड़

    अंतिम चरण के दौरान इंदौर लोकसभा सीट पर भी वोट डाले जा रहे हैं. इस बार बीजेपी ने यहां शंकर लालवानी और कांग्रेस ने पंकज सांघवी को अपना उम्मीदवार बनाया है.
    इंदौर
  2. तमिलनाडु की विधानसभा सीट पर उप-चुनाव भी

    देश में जहां 59 लोकसभा सीटों पर मतदान जारी है. वहीं, तमिलनाडु की सुलूर विधानसभा सीट पर हो रहे उप-चुनाव के लिए भी मतदान जारी है.
    मतदान केंद्र
  3. वोट डालने के लिए लाइन में खड़े हरभजन सिंह

    हरभजन सिंह
    जालंधर के गढ़ी गांव में एक मतदान केंद्र पर वोट डालने के लिए अपनी बारी का इंतज़ार करते क्रिकेटर हरभजन सिंह.
  4. बिहार के उप-मुख्यमंत्री ने डाला वोट

    सुशील कुमार मोदी
    बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने पटना साहिब लोकसभा सीट के पंत नगर के एक मतदान केंद्र पर अपना वोट डाला. पटना साहिब सीट से कांग्रेस उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा और बीजेपी उम्मीदवार रविशंकर प्रसाद के बीच कड़ी टक्कर है.
  5. नीतीश कुमार ने कहा, चुनाव प्रक्रिया लंबी न हो

    पटना में वोट डालने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पत्रकारों से कहा कि चुनाव प्रक्रिया को इतना लंबा नहीं होना चाहिए, हर चरण के मतदान में एक लंबा अंतराल था और इस पर एक राय बनाने के लिए वह सभी पार्टियों के नेताओं को पत्र लिखेंगे.
    नीतीश कुमार
  6. नीतीश कुमार ने पटना में वोट डाला

    नीतीश कुमार वोट डालते हुए
    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना के एक मतदान केंद्र पर अपना वोट डाला.
  7. योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में मत डाला

    योगी आदित्यनाथ
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के एक मतदान केंद्र पर मत डाला. गोरखपुर से बीजेपी की ओर से रवि किशन उम्मीदवार हैं.
  8. पश्चिम बंगाल की नौ सीटों पर मतदान

    आख़िरी चरण में पश्चिम बंगाल की नौ सीटों पर मत डाले जा रहे हैं. कोलकाता के सॉल्ट लेक इलाक़े में एक मतदान केंद्र की तस्वीर.
    एक मतदान केंद्र
  9. लोकसभा चुनाव का अंतिम दौरः 59 सीटों पर मतदान

    एक मतदाता
    लोकसभा चुनाव के सातवें और आखिरी चरण का मतदान शुरू हो चुका है. इस चरण में उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और बिहार सहित सात राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की 59 सीटों पर मतदान हो रहे हैं.

मौत का रहस्य जानना था, जेएनयू छात्र ने दी जान: प्रेस रिव्यू


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नवभारत टाइम्स के मुताबिक़ जेएनयू के अंदर लाइब्रेरी में एक छात्र ने आत्महत्या कर ली. छात्र का शव एक कमरे के पंखे से लटका मिला. मरने से पहले छात्र ने एक प्रोफ़ेसर को ईमेल कर आत्महत्या के बारे में बता दिया था.
पंखे से लटकने के लिए लैंडलाइन टेलीफ़ोन के तार का इस्तेमाल किया गया था. घटना का पता शुक्रवार दोपहर को चला. मृतक छात्र एमए अंतिम वर्ष का छात्र था.
अख़बार ने दक्षिण पश्चिम ज़िले के डीसीपी देवेंद्र आर्य के हवाले से लिखा है कि छात्र का नाम ऋषि जे. थॉमस था. उन्होंने बताया कि मरने से पहले छात्र ने एक प्रोफ़ेसर को स्यूसाइड नोट के रूप में एक ईमेल किया था. मेल में थॉमस ने लिखा था, "बड़े दिनों से चाह है मौत को फिजिकल फ़ॉर्म में देखने की."
अख़बार ने कहा है कि पुलिस को लगता है कि थॉमस मौत के रहस्य को जानने के लिए उत्सुक थे. शायद वह जानना चाहते थे कि आख़िर आदमी कैसे मरता है और मौत कैसे आती है?

गांधी को बताया पाकिस्तान का राष्ट्रपिता


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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक भोपाल से बीजेपी उम्मीदवार प्रज्ञा सिंह ठाकुर के नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाले बयान के एक दिन बाद ही मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता अनिल सौमित्र ने महात्मा गांधी पर विवादित टिप्पणी कर दी है.
सौमित्र ने अपने फ़ेसबुक पोस्ट के ज़रिये महात्मा गांधी को पाकिस्तान का राष्ट्रपिता बता दिया. साथ ही उन्होंने लिखा कि भारत में उनके जैसे करोड़ों पुत्र हुए, कुछ लायक तो कुछ नालायक.
हालाँकि बीजेपी नेता ने फ़ेसबुक पोस्ट के माध्यम से ये भी कहा कि ये उनके निजी विचार हैं और इनका पार्टी से लेना-देना नहीं है.
इसके बाद, बीजेपी ने सौमित्र को पार्टी की सदस्यता से निलंबित कर दिया और इसे अनुशासनहीनता मानते हुए जवाब मांगा है.

'बसपा, सपा, तृणमूल नहीं जाएंगे बीजेपी के साथ'


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द हिंदू के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि बसपा, सपा, तृणमूल कांग्रेस और तेलुगूदेशम पार्टी जैसी पार्टियां विचारधारा के तौर पर एक साथ हैं और बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन नहीं करेंगी.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने नेतृत्व के सवाल को टाल दिया और कहा कि 23 मई को भारत के लोग तय करेंगे कि कौन देश का नेतृत्व करेगा अभी से धैर्य खोने की कोई ज़रूरत नहीं है.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने विपक्ष की अपनी भूमिका को बख़ूबी निभाया है. उन्होंने चुनाव आयोग पर निष्पक्ष नहीं रहने का आरोप भी लगाया.

एनसीईआरटी करेगा समीक्षा




मुलाक़ात लाहौर के छात्र से जिसने स्कूली किताबें पढ़ते-पढ़ते लिख डाले चार नोवेल.

एनसीईआरटी 14 साल बाद करिकुलम दिशानिर्देशों की समीक्षा करेगा.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक एनसीईआरटी नई ज़रूरतों के मुताबिक कुछ बदलाव कर सकता है.
साल 1975, 1988, 2000 और 2005 में जारी किए गए पिछले चार एनसीएफ में शिक्षकों से छात्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया ताकि 'बिना किसी बोझ के साथ सीखने' को सुनिश्चित किया जा सके.
अख़बार ने एनसीईआरटी निदेशक के हवाले से कहा कि पाठ्यपुस्तकों के युक्तिकरण पर जो काम किया है, वह 2005 NCF की समीक्षा का आधार बनेगा. साथ ही कहा कि उनका फ़ोकस 'एक्सपेरिमेंटल लर्निंग' पर है.
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तबलीगी इज्तिमा की कैसे हुई शुरुआत? तबलीगी इज्तिमा की शुरुआत आजादी से पहले साल 1927 में उस वक्त हुई थी, जब देशभर में आर्य समाज की ओर से घर वापसी का अभियान चलाया जा रहा था. दरअसल, मुगल काल में कई लोगों ने इस्लाम धर्म कबूल किया था. लेकिन फिर भी वो लोग हिंदू परंपरा और रीति-रिवाज मान रहे थे. जिसके बाद आर्य समाज ने उन्हें दोबारा से हिंदू बनाने का शुद्धीकरण अभियान शुरू किया था. ये देखने के बाद साल 1927 में मोहम्मद इलियास अल कांधलवी ने भारत में आलमी तबलीगी इज्तिमा के जरिए इस्लाम धर्म फैलाने का आंदोलन शुरू किया. इसमें उन्होंने मुसलमानों को अपने धर्म में बनाए रखने के लिए इस्लाम धर्म का प्रचार कर जानकारी दी और उन्हें इस्लाम धर्म का महत्व बताया. बता दें, तबलीगी इज्तिमा का उद्देश्य आध्यात्मिक इस्लाम को मुसलमानों तक पहुंचाना और फैलाना है. इस जमात के मुख्य उद्देश्य "छ: उसूल" जैसे-कलिमा, सलात, इल्म, इक्राम-ए-मुस्लिम, इख्लास-ए-निय्यत, दावत-ओ-तबलीग थे. यह एक धर्म प्रचार आंदोलन है और अब यह आंदोलन दुनियाभर के लगभग 213 देशों तक फैल चुका है.

तबलीगी जमात: जिसके लिए बुलंदशहर में जुटे हैं 10 लाख मुस्लिम

बुलंदशहर में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में देश-दुनिया से लाखों मुस्लिम एकत्र हुए हैं. जानिए क्या है तबलीगी जमात और क्या है इस आयोजन का मकसद.

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aajtak.in [Edited By: नेहा]नई दिल्ली, 03 December 2018
तबलीगी जमात: जिसके लिए बुलंदशहर में जुटे हैं 10 लाख मुस्लिमतबलीगी जमात
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के दरियापुर-अढौली गांव में मुसलमानों का सबसे बड़ा धार्मिक आलमी तबलीगी इज्तिमा जारी है. 3 दिसंबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम का सोमवार यानी आज अंतिम दिन है.
इस इज्तिमा में देश और दुनिया के 10 लाख से ज्यादा मुसलमान शिरकत करने पहुंचे हैं. तीन दिन तक चले इज्तिमा में शामिल होकर लाखों मुसलमान देश और दुनिया में अमन-चैन के लिए दुआ कर रहे हैं. इज्तिमा में शामिल लोगों के लिए 8 लाख वर्गफुट जगह में पंडाल लगाया गया है. 
क्या है तबलीगी जमात?
तबलीगी जमात मुस्लिम समुदाय के लोगों का एक जलसा है, जो हर साल राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होता है, जिसे इज्तिमा कहते हैं. तबलीगी शब्द का मतलब धर्म का प्रचार करना होता है.
बता दें, 20वीं सदी में तबलीगी जमात को इस्लाम का एक बड़ा और अहम आंदोलनमाना गया था. सबसे पहली तबलीगी जमात मेवात में की गई थी. ये जमात आमतौर पर तीन, चालीस, चार महीने या एक साल की होती है. इसमें लोगों को दावत देकर उन्हें इस्लाम धर्म की जानकारी दी जाती है.
तबलीगी इज्तिमा की कैसे हुई शुरुआत?
तबलीगी इज्तिमा की शुरुआत आजादी से पहले साल 1927 में उस वक्त हुई थी, जब देशभर में आर्य समाज की ओर से घर वापसी का अभियान चलाया जा रहा था. दरअसल, मुगल काल में कई लोगों ने इस्लाम धर्म कबूल किया था. लेकिन फिर भी वो लोग हिंदू परंपरा और रीति-रिवाज मान रहे थे.  जिसके बाद आर्य समाज ने उन्हें दोबारा से हिंदू बनाने का शुद्धीकरण अभियान शुरू किया था.
ये देखने के बाद साल 1927 में मोहम्मद इलियास अल कांधलवी ने भारत में आलमी तबलीगी इज्तिमा के जरिए इस्लाम धर्म फैलाने का आंदोलन शुरू किया. इसमें उन्होंने मुसलमानों को अपने धर्म में बनाए रखने के लिए इस्लाम धर्म का प्रचार कर जानकारी दी और उन्हें इस्लाम धर्म का महत्व बताया.
बता दें, तबलीगी इज्तिमा का उद्देश्य आध्यात्मिक इस्लाम को मुसलमानों तक पहुंचाना और फैलाना है. इस जमात के मुख्य उद्देश्य "छ: उसूल" जैसे-कलिमा, सलात, इल्म, इक्राम-ए-मुस्लिम, इख्लास-ए-निय्यत, दावत-ओ-तबलीग थे. यह एक धर्म प्रचार आंदोलन है और अब यह आंदोलन दुनियाभर के लगभग 213 देशों तक फैल चुका है.
https://m.aajtak.in/dharma/religious-news/story/tablighi-jamaat-2018-bulandshahr-significance-and-origin-tpra-1044347-2018-12-03
Aajtak.in से साभार