सभय समाज की स्थापना हो न सकेगी झूठे बोल व नारों से , इस देश को खतरा लाहक है धर्म के गद्दारों से

ज्ञान की देवी सरसौती देवी की पूजा न करके भी इस दुनिया में कड़ोड़ो लोगों ने ऊँची तालीम और ऊँचे मुकाम पर पहुँच चुके यह एक सच्चाई है इस सच्चाई से कोई भी इनकार नहीं कर सकता , मगर जो लोग या जिनकी आस्था कि  बगैर सरसौती माता के  ज्ञान नहीं और हर साल एक निश्चित तिथि  को मनाते हैं और उनका आस्था है इसको हम गलत भी नहीं ठहरा सकते और उनकी आस्था का कद्र कद्र करते हुए उन तत्यों से सवाल पूछा जाना जरुरी हो गया है जिनकी वजह से समाज का सुख चैन , अमन व शान्ति   को खतरा जिन सरसौती माँ के झूठे भगतों के कारण उत्पन्न होने लगा है , क्या सरसौती माँ इस बात की इजाज़त देती है की उनकी पूजा के लिए चंदा के नाम पर गलत तरीके से पैसे इकठ्ठे करो ? लोगों के दिलों को ठेस पहुँचाओ , उनसे बल पूर्वक धन की उगाही करो और उन पैसों से हमारी पूजा करो , चढ़ावा चढ़ाओ और उन गलत पैसों के चढ़ावा से मुझे खुश करो ताके मैं तुम सभों को बदले में ज्ञान दे सकूँ , मैं तो हिन्दू नहीं , हिन्दू धर्म का बहुत ज्ञान नहीं लेकिन फिर भी मैं दावे के साथ कह सकता हूँ की वो ऐसा और इस घिनौनी बात की इजाजत कतई नहीं दे सकती  ..................!

बात जब जबरदस्ती चंदा वसूली पर चल पड़ी है तो यहाँ एक मशहूर वाकेया इसी बिहार में एक जिला के जज के परिवार के साथ घटी , उनके परिवार के लोगों को चंदा नहीं देने के कारण असामाजिक तत्यों ने बुरी तरह से परीशान किया नतीजतन उन्हें  एफ आई आर उनके ड्राईवर के तरफ से करवानी पड़ी , मामला हाई फाई होने के कारण पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए किसी एक उत्पाती को गिरफ्तार भी कर लिया , लेकिन एक चीज जो सबसे सोंचने वाली बात है आस्था के नाम पर धंधा और गुंडागर्दी  करने वालों का मनोबल इतना बढ़ा हुआ की ऐसे - ऐसे लोग भी सुरक्षित नहीं ..................जब ऐसे लोग इन उत्पातियों से सुरक्षित नहीं जरा सोंचिये इस मुल्क का अल्पसंख्यक ख़ास कर मुसलमान कितना सुरक्षित होगा अंदाजा लगाया जा सकता है ?
अभी बात सरसौती माँ को खुश रखने और उनके नाम पर बलपूर्वक पैसा जुटाने की चल रही तो ये बात भी किसी से ढकी छिपी हुई नहीं के  चंदा के नाम पर पटना जैसे शहर में असामाजिक तत्य केवल सरसौती पूजा ही नहीं ,दुर्गा पूजा और जितनी तरह की पूजा होती है ,उसमे पटना जहाँ पुलिस हमेशा चाक और चौबंद मोड में होती है दुकानदारों ,कोचिंग संस्थानों और बाकी कोम्मेर्सियल संस्थानों के लोगों को कितनी परिशानी और कितने तनाव से गुजरना परता है ये बात भी बताने की जरुरत नहीं .............
सरसौती पूजा के बाद का मामला क्या क्या होता है कुछ अखबारों की रिपोर्ट आपके सामने उसकी रिपोर्टिंग पेश है ...............देखिये तश्वीर और सोंचिये क्या यही धार्मिक कार्य और आस्था है क्या आस्था इन सभी चीजों की इजाज़त देता है ? जब ऐसे लोग धर्म से उठ कर काम कर रहे धर्म को बदनाम कर रहे मासूम पीस रहे तो हमारा नेयालय और हमारा सिस्टम इसके खेलाफ कोई करवाई क्यों नहीं कर रहा ? खामोश क्यों है ? सभ्य समाज ? क्या ये खामोशी सभ्य समाज और देश के लिए खतरनाक नहीं ?









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