बत्तियां दिमाग की ,अब तो जला लो यारो, मौका अब मिला , तो जिंदगी को सजा लो यारो!


Ðeepak Parsad
बत्तियां दिमाग की ,अब तो जला लो यारो, मौका अब मिला , तो जिंदगी को सजा लो यारो, तुम नहीं भेड़ या बकरी, जो कोई हांक सके, अपना सोया विवेक, अब तो जगाओ यारो ! गर नहीं आज ,जो चेते , तो बहुत पछताओगे, भ्रस्ट तंत्र का हिस्सा, तुम भी बन जाओगे ! आज का अखबार उठाओ, हर पेज पर मोदी को पाओ, सोचो इतना पैसा कहाँ से आया अरे अब तो दिमाग की बत्ती जलाओ !

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