खुलने लगा है पोल उतरने लगा चोल , आतंकवाद के नाम पर हो रहा कौन - कौन सा देश में खेला ?

देश में देर से ही सही मुसलमानों से आतंकवाद का लेबल हटने के साथ ही ये लेबल किसी और गिरोह और समुदाय पर लगने शुरू हो गए ?
1993 के सूरत बम धमाका मामले में 11 लोग हुए बरी , दूसरी तरफ खबर है की मक्का मस्जिद धमाका मामले में 4 मुस्लिम नवजवानों को भी बा इज्ज़त रिहा करने का हुआ हुक्म ।।
जब सभी मामलों में मुसलमान नवजवान हो रहे आज़ाद तो इसके क्या मतलब निकलते हैं ? आतंकवाद में मुसलमान हुआ बदनाम तो बुरा है इस देश में कौन ? पेश है आज दिनांक 19/7/14 को बिहार के उर्दू अखबार पिन्दार में प्रकाशित खबर की रिपोर्टिंग .........

1......1993 के सूरत बम धमाका मामले में 11 अफराद बरी ।

नयी दिल्ली 18/7/2014 ( एजेंसी ) सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के सूरत बम धमाका मामले में कसूरवार करार दिए गए 11 अफराद को जुमा को बरी कर दिया ,टाडा अदालत ने उन अफराद को 10 साल से लेकर 20 साल तक की सजा सुनाई थी । धमाका में एक लड़की की मौत हो गयी थी ।और 31 दुसरे जख्मी हो गए थे । जस्टिस टी एस ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने आरोपियों और गुजरात हुकूमत की अर्जियों पर सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया ।आरोपियों ने टाडा अदालत के फैसले को चैलेंज किया था । अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंश किये जाने के बाद हुए फसादात के दौरान जनवरी 1993 में सूरत के वराछा इलाके और सूरत रेलवे स्टेशन के प्लेटफ़ॉर्म नंबर 1 पर बम धमाके हुए थे । वराछा में हुए धमाके में अल्पा पटेल नाम की एक स्कूली छात्रा की मौत हो गयी थी और 11 दुसरे जख्मी हो गए थे । रेलवे स्टेशन पर हुए धमाके में तक़रीबन 20 अफराद जख्मी हो गए थे । अक्तूबर 2008 में सूरत में स्थित  टाडा अदालत ने कांग्रेस के तत्कालीन मंत्री  मोहम्मद सुरती समेत 5 अफराद को 20 साल क़ैद की सजा सुनाई गयी थी , जबकि दुसरे लोगों को 10 साल क़ैद की सजा सुनाई गयी थी । इन सभी को सुप्रीम कोर्ट ने बा इज्ज़त बरी कर दिया ।

2...... मक्का मस्जिद धमाका मामला 4 मुस्लिम नवजवानों को बरी करने का हुक्म ।

हैदराबाद 18 जुलाई 2014 ( यू एन आई ) शहर हैदराबाद की मशहूर मक्का मस्जिद में हुए बम धमाके के सिलसिले में गिरफ्तार 4 मुस्लिम नवजवानों को स्थानिये अदालत ने बरी करने का हुक्म जारी किये हैं । 18 मई 2007 को मक्का मस्जिद में बम धमाकों के बाद सिटी पुलिस ने जालना से सम्बन्ध रखने वाले सोऐब जागीरदार के अलावा शैख़ अब्दुल नईम ,और सैयद इमरान खान और रफ़ी अहमद को गिरफ्तार किया था और उनके खेलाफ कई मामले दर्ज करके उन्हें जेल भेज दिया था । , मुल्जिम शोएब जागीरदार जो की महाराष्ट्रा के जालना में किरोसिन का डीलर था ,उसपे इल्जाम था की उसने लश्करे तैयेबा के कथित सदस्य शैख़ अब्दुल नईम उर्फ़ समीर  को औरंगाबाद में गैरकानूनी तरीके से पासपोर्ट हासिल करने में मदद की थी । इस केस की जांच स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम ( एस आई टी ) की तरफ से की गयी थी । मुकदमा नामपल्ली क्रिमिनल कोर्ट के चौथे मेट्रोपोलिटन मजिस्टेट ने नाकाफी सबूत की बुनियाद पर शोएब जागीरदार ,शैख़ अब्दुल नईम ,इमरान और रफ़ी को बरी करने का हुक्म दिया ।

( उर्दू दैनिक पिन्दार दिनांक 19/7/14 )

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जरा सोंचिये जब मुसलमानों का उपरोक्त घटनाओं में हाथ नहीं तो फिर हाथ किसका ? कहीं मुसलमानों को देश में बदनाम कर राजनितिक उल्लू सीधा करने के लिए कहीं मुस्लिम समुदाय को छोड़ दुसरे समुदाय के आतंकियों ने तो ये घिनौने काम नहीं किये ? इस देश में ऐसा होता रहा है । जिस पर से प्रदा हटाने और हिन्दू चरमपंथियों के चेहरे पर चढ़े नकाब उतारने के एवज में महाराष्ट्रा के इमानदार ATS चीफ को जान तक गवानी पड़ी थी , आतंकवाद के नाम पर देश में जो खेला चल रहा उसे तो देश समझने लगा है , पर क्या गलत लोगों को सजा दिलाने के लिए हमारे हिन्दू भाई आगे आने को तैयार हैं जो धर्म से ऊपर उठ कर मामलों को समझ सकें ?


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