हम सब कितने समझदार हैं अंदाजा लगा सकते हैं
प्रशाशन का कसूर केवल इतना था की कानून का पालन न करने की स्थिति और कुछ अनहोनी के आशंकाओं के मद्देनजर समाज में शांति बनाये रखने के उद्देश्य से डी जे बजाने से रोका ,साथ ही प्रशासनिक आदेशानुसार रात में मूर्ति विसर्जन न कर पाने की हालत में मूर्ति विसर्जन का रूट बदल दिया , बस इतने के बाद क्या हुआ छपरा में , दिनांक 7/10/14 को एक अखबार में प्रकाशित को आपके सामने अवलोकन हेतु दिया जा रहा पढ़ कर अंदाजा लगा सकते हैं ।
रूट बदल देने , और डी जे पे अश्लील गानों के बजाने के पाबंदी से क्या आस्था पे आंच आ जाती ?
प्रशाशन का कसूर केवल इतना था की कानून का पालन न करने की स्थिति और कुछ अनहोनी के आशंकाओं के मद्देनजर समाज में शांति बनाये रखने के उद्देश्य से डी जे बजाने से रोका ,साथ ही प्रशासनिक आदेशानुसार रात में मूर्ति विसर्जन न कर पाने की हालत में मूर्ति विसर्जन का रूट बदल दिया , बस इतने के बाद क्या हुआ छपरा में , दिनांक 7/10/14 को एक अखबार में प्रकाशित को आपके सामने अवलोकन हेतु दिया जा रहा पढ़ कर अंदाजा लगा सकते हैं ।
रूट बदल देने , और डी जे पे अश्लील गानों के बजाने के पाबंदी से क्या आस्था पे आंच आ जाती ?


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