Abrar Kazi
मोहिनी जी आपने एकदम सही कहा है लेकिन यही बात कोई मसलमान कह दे तो वो देशद्रोही हो जाता हे अरे भाई जानवर तो पूरे साल हर रोज़ कटते हैं तो फिर मुसलमानों के त्योहारों पर ही जानवर प्रेम क्यों छलकता है सही बात तो यही है जो मैडम आपने खुलासा करके बता दिया है कि यह जानवर प्रेम नहीं मुसलमान के प्रति घ्रणा वनफरत है अगर यह लोग जानवर से प्रेम करते हें तो पूरी साल कहां सो जाते हें जब रोज़ लाखों जानवर काटे जाते हे असल मे यह लोग उस जानवर के कटने का विरोध कभी नहीं करेंगे जो दुकानों पर काटा जाता हे क्यों की उस मांस को केवल मुसलमान ही नहीं खाता हे गैर मुसलमान भी खाता हे और लाखों गैर मुसलमान इस धंधे मे लगे हुये हैं !
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ढोंगी पशु प्रेमियों को मोहिनी का ठोस जवाब , पढ़ना न भूलें ।
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