[सेना पर हमलों को रोक पाना मुश्किल - BBC हिंदी]
रविवार रात बारामूला में सेना के 46 राष्ट्रीय राइफ़ल्स के कैंप के पास इस हमले में अर्ध सैनिक बल के एक जवान की मौत हो गई, जबकि दो जवान घायल हुए हैं. सेना के भी दो जवान घायल हुए हैं.
बीबीसी से बातचीत में भारतीय सेना के पूर्व जनरल बताते हैं कि ऐसे हमलों को रोक पाना मुश्किल है.
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पूर्व मेजर जनरल अशोक मेहता के मुताबिक नियंत्रण रेखा पर हर व़क्त चौक़सी बहुत मुश्किल है.
उन्होंने कहा, "अनिश्चितकालीन समय तक सेना की तैनाती नहीं होनी चाहिए, उससे एक थकान ठहरने लगती है, पिछले कई दशकों से वहां तैनात सेना और सुरक्षा बल 100 प्रतिशत मुस्तैद नहीं हो सकते."
नियंत्रण रेखा पर 13 साल पहले 'बार्ब्ड वायर' लगाई गई थी जो जनरल मेहता के मुताबिक अब उतनी सुरक्षित नहीं रही. हालांकि उसपर सेंसर और रडार लगे हुए हैं.
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