rajendar chaudhri ne hi samjhauta express mein lagaya tha bom.(NIA) पहचान लीजिये ओरिजिनल दहशत गर्द को ,इसी के कारण हिन्दुस्तान कलंक्कित हुआ था ,और मासूमों की जन्दगियाँ बर्बाद हुई थी,करकरे ने सबसे पहले दहशतगर्दी के असल चेहरे को उजागर किया था ,और साबित किया था के ,भारतीय मुसलमान दहशतगर्द नहीं ,दहशतगर्द कोई और है ,और यही वह चेहरा असला है ,पहचान लीजये दहशतगर्दी के असल चेहरे को।
panchkula/new delhi ,17 december (agency)
bharat ke home minister ke beyan par doctor ahsan ki paratikirya.
मुसलमानों की वैक्तिगत परगति को किसी का एहसान करार देना उनकी काबलियत और योग्यता के खेलाफ है ,भारत के गृहमंत्री का इशारा इतिहास में पहली बार मुस्लिम आईपीएस अफसर जनाब एस एम इब्राहीम को इन्तेलिगेंस ब्यूरो का चीफ बनाये की तरफ था ,इससे इब्राहीम की य्ग्यता पर शिंधे ने सवालिया निशान लगा दिए।इसपर प्रश्न उठाया जा सकता है के क्या अन्य दुसरे धर्म और जाति के लोग अपनी योग्यता के कारण तरक्की नहीं बलके किसी के रहमो करम और चापलुशी के आधार पर ही ऊँचे पदों पर अबतक बैठाया जाता रहा है उनके योग्यता के आधार पर नहीं ?क्या मुसलमानों को उचे पदों को पाने के लिए चापलुशी का सहारा लेना होगा ? ये बातें बिहार के मशहूर समाजी कार्यकर्ता एवं साहित्यकार डॉक्टर कमरुल अहस न एक प्रेस रिलीज़ जारी कर कही ,जिसे उर्दू दैनिक के दिनांक 20/12/2012 के पेज 09 भी देखा जा सकता है
बाबरी मस्जिद विध्वंश 26/11 से भी बाड़ा मामला :( जिलानी)लखनऊ 15 दिसम्बर एजेंसी पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मल्लिक ने जुमा को हिन्दुस्तान में मुंबई हमले ,समझौता एक्सप्रेस धमाका और बाबरी मस्जिद मामले पर बयान दिया उसके बाद बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी के कंवेनर जफ़र याब जिलानी ने कहा के पकिस्तान के वजीर ए दिखिला कौन होते हैं हमारे मामले में interfare करने वाले अगर वह बाबरी मस्जिद पर हुए हमले की तुलना 26/11 या समझौता एक्सप्रेस धमाका मामले से कर रहे हैं तो ये उनकी न समझी है .बाबरी मस्जिद विध्वंस तो इससे भी बार मामला है, इस वाकये ने पूरी भगवा जेहनियत का इस्तेमाल हुआ।मस्जिद पर जो हमला हुआ वह भारतीय संविधान पर हुआ हमला था ,ये हमले इतने खतरनाक नहीं हैं . रहमान मल्लिक या पकिस्तान इस मसले पर क्यों बोल रहे हैं यह हम मसला है .हिन्दुस्तान का मसला है इस्स उनका क्या मतलब ?इस मामले पर बाबरी मस्जिद का मुक़दमा लड़ने वाले हासिम अंसारी का कहना है के पकिस्तान या कोई भी मुल्क मुसलमानों की भलाई के लिए बोले तो इसमें बुराई क्या है ?आल इंडिया मिल्ली कौंसिल के execute मेम्बर खलीक अहमद ने कहा के 29 अक्तूबर 1994 को डॉक्टर एम् इस्माइल बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया के मुक़दमे में सुप्रीम कोर्ट का जिक्र है के बाबरी मस्जिद गिराने का काम विश्व हिन्दू परिषद और आर एस एस जैसी तंजीमो का काम है , जिन लोगों ने मस्जिद गिरे है वह जरयेम पेशा और देश द्रोही हैं , यह देश के साथ धोका है , खलीक अहमद ने कहा के दर असल रहमान मल्लिक ने उसी हिंशा को उठाया है . पिन्दार उर्दू दैनिक दिनांक 16/12/2012 से लिया गया है .लखनऊ 15 दिसम्बर एजेंसी पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मल्लिक ने जुमा को हिन्दुस्तान में मुंबई हमले ,समझौता एक्सप्रेस धमाका और बाबरी मस्जिद मामले पर बयान दिया उसके बाद बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी के कंवेनर जफ़र याब जिलानी ने कहा के पकिस्तान के वजीर ए दिखिला कौन होते हैं हमारे मामले में interfare करने वाले अगर वह बाबरी मस्जिद पर हुए हमले की तुलना 26/11 या समझौता एक्सप्रेस धमाका मामले से कर रहे हैं तो ये उनकी न समझी है .बाबरी मस्जिद विध्वंस तो इससे भी बार मामला है, इस वाकये ने पूरी भगवा जेहनियत का इस्तेमाल हुआ।मस्जिद पर जो हमला हुआ वह भारतीय संविधान पर हुआ हमला था ,ये हमले इतने खतरनाक नहीं हैं . रहमान मल्लिक या पकिस्तान इस मसले पर क्यों बोल रहे हैं यह हम मसला है .हिन्दुस्तान का मसला है इस्स उनका क्या मतलब ?इस मामले पर बाबरी मस्जिद का मुक़दमा लड़ने वाले हासिम अंसारी का कहना है के पकिस्तान या कोई भी मुल्क मुसलमानों की भलाई के लिए बोले तो इसमें बुराई क्या है ?आल इंडिया मिल्ली कौंसिल के execute मेम्बर खलीक अहमद ने कहा के 29 अक्तूबर 1994 को डॉक्टर एम् इस्माइल बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया के मुक़दमे में सुप्रीम कोर्ट का जिक्र है के बाबरी मस्जिद गिराने का काम विश्व हिन्दू परिषद और आर एस एस जैसी तंजीमो का काम है , जिन लोगों ने मस्जिद गिरे है वह जरयेम पेशा और देश द्रोही हैं , यह देश के साथ धोका है , खलीक अहमद ने कहा के दर असल रहमान मल्लिक ने उसी हिंशा को उठाया है . पिन्दार उर्दू दैनिक दिनांक 16/12/2012 से लिया गया है .लखनऊ 15 दिसम्बर एजेंसी पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मल्लिक ने जुमा को हिन्दुस्तान में मुंबई हमले ,समझौता एक्सप्रेस धमाका और बाबरी मस्जिद मामले पर बयान दिया उसके बाद बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी के कंवेनर जफ़र याब जिलानी ने कहा के पकिस्तान के वजीर ए दिखिला कौन होते हैं हमारे मामले में interfare करने वाले अगर वह बाबरी मस्जिद पर हुए हमले की तुलना 26/11 या समझौता एक्सप्रेस धमाका मामले से कर रहे हैं तो ये उनकी न समझी है .बाबरी मस्जिद विध्वंस तो इससे भी बार मामला है, इस वाकये ने पूरी भगवा जेहनियत का इस्तेमाल हुआ।मस्जिद पर जो हमला हुआ वह भारतीय संविधान पर हुआ हमला था ,ये हमले इतने खतरनाक नहीं हैं . रहमान मल्लिक या पकिस्तान इस मसले पर क्यों बोल रहे हैं यह हम मसला है .हिन्दुस्तान का मसला है इस्स उनका क्या मतलब ?इस मामले पर बाबरी मस्जिद का मुक़दमा लड़ने वाले हासिम अंसारी का कहना है के पकिस्तान या कोई भी मुल्क मुसलमानों की भलाई के लिए बोले तो इसमें बुराई क्या है ?आल इंडिया मिल्ली कौंसिल के execute मेम्बर खलीक अहमद ने कहा के 29 अक्तूबर 1994 को डॉक्टर एम् इस्माइल बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया के मुक़दमे में सुप्रीम कोर्ट का जिक्र है के बाबरी मस्जिद गिराने का काम विश्व हिन्दू परिषद और आर एस एस जैसी तंजीमो का काम है , जिन लोगों ने मस्जिद गिरे है वह जरयेम पेशा और देश द्रोही हैं , यह देश के साथ धोका है , खलीक अहमद ने कहा के दर असल रहमान मल्लिक ने उसी हिंशा को उठाया है . पिन्दार उर्दू दैनिक दिनांक 16/12/2012 से लिया गया है .
अफजल गुरु बेगुनाह है ?AFJAL GURU BEGUNAH HAI? गयारह साल पूर्व पार्लियामेंट पर आतंकी हमला हुआ था .ये हमला किन लोगों ने किया और उनका संबंध किस मुल्क से था इसका आज तक आज तक पता न चल सका।हारे हुए जूआरि की तरह इल्जाम पाकिस्तान पर लगा दिया गया लेकिन इसका कोई सबूत अबतक न दिया जा सका है .इस सिलसिले में अफजल गुरु को गिरफ्तार किया गया जिसे फांसी की सजा दी गई उनके साथ दिल्ली यूनिवर्सिटी के टीचर गिलानी को भी फांसी की सजा दी गई थी ,जिस की तस्दीक( प्रमाणित )दिल्ली हाई कोर्ट ने भी की थी ,लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जिलानी को बे कसूर समझ कर बा इज्ज़त तौर पर रिहा कर दिया और वह फिर पढा ने का काम करने लगे .गिलानी को गैर मस्देका तौर पर दिल्ली पुलिस ने गोली मार कर क़त्ल (हत्या) करने की कोशिश भी की लेकिन उनकी वकील ने उन्हें फ़ौरन अस्पताल पहुंचाकर बचा लिया .जिलानी के चेहरे पर एक प्रोग्राम में हिन्दू दहशतगर्दों ने थूका और मार पिट की .हिन्दू दहशतगर्दों अपने दहशतगर्दों को हीरो बनाते हैं और मुसलमानों को बेईज्ज़त करते हैं .अटल बिहारी बाजपेई को हिन्दू दहशतगर्दी एतदाल परश्त कहती है लेकिन इस बात को नजर कर दिया जाता है के 5 दिसंबर 1992 को बाजपेई ने लखनऊ में हिन्दुओं को बाबरी मस्जिद को उकसाया था .बाजपेई की तकरीर की सी डी सीबीआई के पास मौजूद है .इसके बुनियाद पर बाजपेई को सजा दी जानी चाहिए .बाजपेई एक हिन्दू फिरका परस्त (सम्प्रादाइक )थे और हैं लेकिन मीडिया ने उन्हें बहूत बड़ा सेक्युलर बना कर पेश किया . अफजल गुरु को फांसी की सजा दी गई लेकिन कैसे दी गई इस पर गौर करने की जरुरत है .अफजल गुरु पहले कश्मीरी दहशतगर्द थे .उनहोंने दहशतगर्दी को छोड़ कर साधारण जिंदगी गुजारने लगे थे .श्रीनगर के एक- डी एस पी तेयागी ने अफजल से कहा के वह कुछ लोगों को दिल्ली ले जाये और वहां उनके रहने का इन्तेजाम करे .DSP तेयागी के कहने पर अफजल गुरु ने वह किया जो एक हिन्दू DSP ने कहा था .हैरत की बात है के अफजल गुरु पर मुक़दमा चला और उसे मौत की सजा दी गई लेकिन हिन्दू DSP तेयागी का कहीं नाम नहीं आया जिस ने दह्सह्त्गार्दों को पार्लियामेंट पर हमला करने के लिए भेजा था .अफजल गुरु के मुक़दमे की कानून के मुताबिक सुनवाई नहीं हुई ,हाई कोर्ट ने गुरु को जो वकील दिया उसने कहा के गुरु को फांसी दी जाए .ये वह वकील कह रहा है जिसकी जिम्मेदारी थी के गुरु का बचाव करे .ये अंदाज और रवैया रहा अदालत का गुरु के मामले में ,अफजल गुरु के खेलाफ कोई जुर्म साबित नहीं हुआ .उसको वकील नहीं दिया गया .उसे गवाहों से जिरह करने की इजाजत नहीं दी गई ,लेकिन फाँसी पर लटकाने का आदेश दे दिया गया .देश के नामवर वकील राम जेठ मालानी ने बयान जारी कर कहा के अफजल गुरु के मामले की सुनवाई कानून के मुताबिक नहीं हुई है और वह खुद उसका मुक़दमा सुप्रीम कोर्ट में लड़ेंगे तब हिन्दू दहशतगर्दों ने उनके मुंबई इस्थित दफ्तर में तोड़ फोड़ की थी .इससे हिन्दू दहशतगर्दी के मिजाज़ का अंदाजा लगाया जा सकता है और फिर BJP ने जेठ मलानी को चुप कराने के लिए उन्हें राज्य सभा का मेम्बर बना दिया . देश में 477 लोग फाँसी का इन्तेजार कर रहे हैं तो फिर गुरु की फाँसी पर ही जिद क्यों ?दर असल इसके पीछे हिन्दू दहशतगर्दाना सोंच काम कर रही .पार्लियामेंट पर हमला हुआ जिसमे 13 लोग मारे गए और हिन्दू दहशतगर्दों ने पाँच हजार मुसलमानों को क़त्ल कराने वाले को गुजरात का मुख्य मंत्री बना रख्खा है ,मालूम नहीं कितने मुसलमानों को क़त्ल कराने वाले का कारण बने लाल कृष्ण आडवाणी को उप प्रधान मंत्री बनाया गया .13 लोग मरे तो अफजल गुरु को फाँसी और हजारों बे गुनाहों को मरवाने वाले अडवाणी और नरेंदर मोदी को बड़े ओहदे .ये कौन सा इन्साफ है ?हम अफजल गुरु को पूरी तरह बे कसूर समझते हैं .अफजल गुरु की फांसी की जिद करने वाले और हिन्दू दहशतगर्द सोंच रखने वालों से मै पूछना चाहता हूँ के देश के बेगुनाह और बेक़सूर मुसलमानों को कत्ल कराने वालों में से क्या किसी एक को भी फाँसी हुई नहीं हुई क्यों के ये सब के सब हिन्दू थे .अफजल गुरु बेगुनाह और बेक़सूर है उसे फ़ौरन रेहा करने की जरुरत है .हिन्दू स्म्प्रदाइक पार्टी ने गुरु की फांसी को एक सियासी मसला बना दिया है ताके इसके जरिये हिन्दू दहशतगर्दाना सोंच रखने वालों का वोट हासिल किया जा सके .हम मांग करते हैं के अफजल गुरु के केस की फिर से सुनवाई की जाये और अगर जरुरत हुआ तो उसे विदेशी वकील उपलब्ध कराइ जाये ताके साबित हो सके गुरु बे गुनाह है .अगर अफजल गुरु को फांसी हुई तो ये इन्साफ का खून होगा .कश्मीर के DSP तेयागी की तलाश करो और उसे सजा दो अफजल गुरु को नहीं . हैरत की बात है के पाकिस्तानी दहशत गर्द कसाब को हर सम्भव सहूलत दी गई ,उसे अच्छे वकील मुहैया कराए गए लेकिन अफजल गुरु को ऐसी सहूलत नहीं दी गई .गुरु के मामले की फिर से सुनवाई हो हम एक बार फिर ये माँग करते हैं .भारतीय पार्लियामेंट और भारतीय जनता को शर्म के समुन्दर में डूब जानी चाहिए के पार्लियामेंट पर हमले में मारे गए 13 मरने वालों की तो गम मनाते हैं लेकिन देश की आजादी के बाद हुए 32 हजार से भी जेयदा फिरकावाराना फसादात(सम्प्रदैक दंगो )में मारे गए बेगुनाहों को याद नहीं करते हो .गुजरात में हजारों औरतों और मुस्लिम लड़कियों की अस्मत दरी (बालात्कार )को तुम क्यों नहीं याद करते ?इसका जवाब दो .तुम बाबरी मस्जिद विध्वंस पर इजहारे शर्म क्यों नहीं करते हो ?इसका क्या जवाब है तुम्हारे पास?हम पार्लियामेंट हमले ही को मशकुक (शंदिग्ध )निगाह से देखते हैं . माफ़ कीजिये उपरोक्त हमले को हम फैब्रिकेटेड कहानी मानते हैं .ऐसा लगता है के जिन लोगों को हलवार कहा जा रहा है वह सब druged थे और किसी और ने गोलियाँ चलाकर सिक्यूरिटी वालों को हालाक (हत्या)किया .हमलावर कौन थे ,कहाँ से आये थे और उनका मकसद क्या था?आज तक उसका पता नहीं चल सका ,सारा मामला रहस्य बना हुआ है ,हाल तो ये है के एक पाकिस्तानी आतंकवादी मारा गया तो दो मिनट के बाद उसका सारा सिजरा अखबारों में आ जाता है के पकिस्तान के फलां शहर की फलां गली और फलां नंबर के मकान में रहता था लेकिन पार्लियामेंट पर हमला करने वालों का कोई अता पता आज तक मालूम न हो सका .अफजल गुरु बेगुनाह है उसे रेहा किया जाना चाहिए या फिर इस मामले की फिर से सुनवाई हो और हिन्दू DSP तेयागी की तलाश करके उसके खेलाफ मुक़दमा चलाना चाहिए . नोट :उपरोक्त आर्टिकल उर्दू दैनिक फारुकी तंजीम पटना से दिनांक15/12/2012 को सम्पदकिये पृष्ठ,पेज नंबर 6 से लिया गया है
गयारह साल पूर्व पार्लियामेंट पर आतंकी हमला हुआ था .ये हमला किन लोगों ने किया और उनका संबंध किस मुल्क से था इसका आज तक आज तक पता न चल सका।हारे हुए जूआरि की तरह इल्जाम पाकिस्तान पर लगा दिया गया लेकिन इसका कोई सबूत अबतक न दिया जा सका है .इस सिलसिले में अफजल गुरु को गिरफ्तार किया गया जिसे फांसी की सजा दी गई उनके साथ दिल्ली यूनिवर्सिटी के टीचर गिलानी को भी फांसी की सजा दी गई थी ,जिस की तस्दीक( प्रमाणित )दिल्ली हाई कोर्ट ने भी की थी ,लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जिलानी को बे कसूर समझ कर बा इज्ज़त तौर पर रिहा कर दिया और वह फिर पढा ने का काम करने लगे .गिलानी को गैर मस्देका तौर पर दिल्ली पुलिस ने गोली मार कर क़त्ल (हत्या) करने की कोशिश भी की लेकिन उनकी वकील ने उन्हें फ़ौरन अस्पताल पहुंचाकर बचा लिया .जिलानी के चेहरे पर एक प्रोग्राम में हिन्दू दहशतगर्दों ने थूका और मार पिट की .हिन्दू दहशतगर्दों अपने दहशतगर्दों को हीरो बनाते हैं और मुसलमानों को बेईज्ज़त करते हैं .अटल बिहारी बाजपेई को हिन्दू दहशतगर्दी एतदाल परश्त कहती है लेकिन इस बात को नजर कर दिया जाता है के 5 दिसंबर 1992 को बाजपेई ने लखनऊ में हिन्दुओं को बाबरी मस्जिद को उकसाया था .बाजपेई की तकरीर की सी डी सीबीआई के पास मौजूद है .इसके बुनियाद पर बाजपेई को सजा दी जानी चाहिए .बाजपेई एक हिन्दू फिरका परस्त (सम्प्रादाइक )थे और हैं लेकिन मीडिया ने उन्हें बहूत बड़ा सेक्युलर बना कर पेश किया .
अफजल गुरु को फांसी की सजा दी गई लेकिन कैसे दी गई इस पर गौर करने की जरुरत है .अफजल गुरु पहले कश्मीरी दहशतगर्द थे .उनहोंने दहशतगर्दी को छोड़ कर साधारण जिंदगी गुजारने लगे थे .श्रीनगर के एक- डी एस पी तेयागी ने अफजल से कहा के वह कुछ लोगों को दिल्ली ले जाये और वहां उनके रहने का इन्तेजाम करे .DSP तेयागी के कहने पर अफजल गुरु ने वह किया जो एक हिन्दू DSP ने कहा था .हैरत की बात है के अफजल गुरु पर मुक़दमा चला और उसे मौत की सजा दी गई लेकिन हिन्दू DSP तेयागी का कहीं नाम नहीं आया जिस ने दह्सह्त्गार्दों को पार्लियामेंट पर हमला करने के लिए भेजा था .अफजल गुरु के मुक़दमे की कानून के मुताबिक सुनवाई नहीं हुई ,हाई कोर्ट ने गुरु को जो वकील दिया उसने कहा के गुरु को फांसी दी जाए .ये वह वकील कह रहा है जिसकी जिम्मेदारी थी के गुरु का बचाव करे .ये अंदाज और रवैया रहा अदालत का गुरु के मामले में ,अफजल गुरु के खेलाफ कोई जुर्म साबित नहीं हुआ .उसको वकील नहीं दिया गया .उसे गवाहों से जिरह करने की इजाजत नहीं दी गई ,लेकिन फाँसी पर लटकाने का आदेश दे दिया गया .देश के नामवर वकील राम जेठ मालानी ने बयान जारी कर कहा के अफजल गुरु के मामले की सुनवाई कानून के मुताबिक नहीं हुई है और वह खुद उसका मुक़दमा सुप्रीम कोर्ट में लड़ेंगे तब हिन्दू दहशतगर्दों ने उनके मुंबई इस्थित दफ्तर में तोड़ फोड़ की थी .इससे हिन्दू दहशतगर्दी के मिजाज़ का अंदाजा लगाया जा सकता है और फिर BJP ने जेठ मलानी को चुप कराने के लिए उन्हें राज्य सभा का मेम्बर बना दिया .
देश में 477 लोग फाँसी का इन्तेजार कर रहे हैं तो फिर गुरु की फाँसी पर ही जिद क्यों ?दर असल इसके पीछे हिन्दू दहशतगर्दाना सोंच काम कर रही .पार्लियामेंट पर हमला हुआ जिसमे 13 लोग मारे गए और हिन्दू दहशतगर्दों ने पाँच हजार मुसलमानों को क़त्ल कराने वाले को गुजरात का मुख्य मंत्री बना रख्खा है ,मालूम नहीं कितने मुसलमानों को क़त्ल कराने वाले का कारण बने लाल कृष्ण आडवाणी को उप प्रधान मंत्री बनाया गया .13 लोग मरे तो अफजल गुरु को फाँसी और हजारों बे गुनाहों को मरवाने वाले अडवाणी और नरेंदर मोदी को बड़े ओहदे .ये कौन सा इन्साफ है ?हम अफजल गुरु को पूरी तरह बे कसूर समझते हैं .अफजल गुरु की फांसी की जिद करने वाले और हिन्दू दहशतगर्द सोंच रखने वालों से मै पूछना चाहता हूँ के देश के बेगुनाह और बेक़सूर मुसलमानों को कत्ल कराने वालों में से क्या किसी एक को भी फाँसी हुई नहीं हुई क्यों के ये सब के सब हिन्दू थे .अफजल गुरु बेगुनाह और बेक़सूर है उसे फ़ौरन रेहा करने की जरुरत है .हिन्दू स्म्प्रदाइक पार्टी ने गुरु की फांसी को एक सियासी मसला बना दिया है ताके इसके जरिये हिन्दू दहशतगर्दाना सोंच रखने वालों का वोट हासिल किया जा सके .हम मांग करते हैं के अफजल गुरु के केस की फिर से सुनवाई की जाये और अगर जरुरत हुआ तो उसे विदेशी वकील उपलब्ध कराइ जाये ताके साबित हो सके गुरु बे गुनाह है .अगर अफजल गुरु को फांसी हुई तो ये इन्साफ का खून होगा .कश्मीर के DSP तेयागी की तलाश करो और उसे सजा दो अफजल गुरु को नहीं .
हैरत की बात है के पाकिस्तानी दहशत गर्द कसाब को हर सम्भव सहूलत दी गई ,उसे अच्छे वकील मुहैया कराए गए लेकिन अफजल गुरु को ऐसी सहूलत नहीं दी गई .गुरु के मामले की फिर से सुनवाई हो हम एक बार फिर ये माँग करते हैं .भारतीय पार्लियामेंट और भारतीय जनता को शर्म के समुन्दर में डूब जानी चाहिए के पार्लियामेंट पर हमले में मारे गए 13 मरने वालों की तो गम मनाते हैं लेकिन देश की आजादी के बाद हुए 32 हजार से भी जेयदा फिरकावाराना फसादात(सम्प्रदैक दंगो )में मारे गए बेगुनाहों को याद नहीं करते हो .गुजरात में हजारों औरतों और मुस्लिम लड़कियों की अस्मत दरी (बालात्कार )को तुम क्यों नहीं याद करते ?इसका जवाब दो .तुम बाबरी मस्जिद विध्वंस पर इजहारे शर्म क्यों नहीं करते हो ?इसका क्या जवाब है तुम्हारे पास?हम पार्लियामेंट हमले ही को मशकुक (शंदिग्ध )निगाह से देखते हैं .
माफ़ कीजिये उपरोक्त हमले को हम फैब्रिकेटेड कहानी मानते हैं .ऐसा लगता है के जिन लोगों को हलवार कहा जा रहा है वह सब druged थे और किसी और ने गोलियाँ चलाकर सिक्यूरिटी वालों को हालाक (हत्या)किया .हमलावर कौन थे ,कहाँ से आये थे और उनका मकसद क्या था?आज तक उसका पता नहीं चल सका ,सारा मामला रहस्य बना हुआ है ,हाल तो ये है के एक पाकिस्तानी आतंकवादी मारा गया तो दो मिनट के बाद उसका सारा सिजरा अखबारों में आ जाता है के पकिस्तान के फलां शहर की फलां गली और फलां नंबर के मकान में रहता था लेकिन पार्लियामेंट पर हमला करने वालों का कोई अता पता आज तक मालूम न हो सका .अफजल गुरु बेगुनाह है उसे रेहा किया जाना चाहिए या फिर इस मामले की फिर से सुनवाई हो और हिन्दू DSP तेयागी की तलाश करके उसके खेलाफ मुक़दमा चलाना चाहिए .
नोट :उपरोक्त आर्टिकल उर्दू दैनिक फारुकी तंजीम पटना से दिनांक15/12/2012 को सम्पदकिये पृष्ठ,पेज नंबर 6 से लिया गया है
सैयद आसिफ इब्राहीम की नियुक्ति पर चेमेगोइयाँ क्यों?syed aasif ibrahim ki niyukti par chemigoiyan keyon? डॉक्टर मुश्ताक अहमद rm .meezan @gmail.com सैयद आसिफ इब्राहीम की नियुक्ति पर चेमेगोइयाँ क्यों? हमारा मुल्क हिन्दुस्तान एक बहूत बरा लोकतांत्रिक देश है और हमारा सविंधान का आधार secularism है .यही वजह है के मुल्क के अन्दर अनेक धर्मों और संस्कृति क्र लोग रहते हैं और उनके अलंबरदारों को ये हक हासिल है के वह अपने मजहब और कर कल्चर के तहफ्फुज के लिए कोई भी क़दम उठा सकते हैं शर्त ये है के उनके क़दम से दुसरे मजहब के लोगों के दिल को ठेस न पहुंचे .कयोंके हमारा सविंधान इसकी इजाजत नहीं देता इसी तरह सविंधान में बराबरी के हक़ की वकालत की गई है .गर्ज के तमाम शहरी को को जिंदगी के विभिन छेत्रों में oportunity हासिल करने का सवैंधानिक अधिकार अधिकार प्राप्त है .लेकिन सच्चाई ये है के आजादी के बाद देश में जिस तरह की फेजा बनी हुई है और खास कर तीन दहाई में जिस तरह भेद भाव करने वाले सोंच के लोगों की वर्चश कायेम हुई तो मुल्क के ख़ास तबके को नजर अंदाज किया जाने लगा .खास कर मुसलमानों के साथ जिस तरह का भेदभाव वाला रवैया अपनाया जाने लगा वह न सिर्फ गैर अखलाकी था बलके सवैधानिक भी .नतीजा ये हुआ के मुल्क का मुसलमान जिन्दगी के विभिन छेत्रों में दिनों दिन पिछरता चला गया गया और आज खुद सरकार की रिपोर्टसच्चर कमिटी ,रंगनाथ मिश्रा कमीशन की रिपोर्ट ने इस हकीकत को जाहिर कर दिया है के मुल्क का मुसलमान दलित से भी बदतर है .दलित से भी बदतर कहने का मतलब साफ़ है के इस मुल्क में दलित समाज की हालत भी बेहतर नहीं है और इससे भी बदतर हालत मुसलमानों की है .जबके हमारा सविंधान मुल्क के तमाम शहरी को जिंदगी जीने के बराबरी के अधिकार की वकालत करता है तो फिर आजादी के 66 सालों बाद भी अगर मुसलमान दलीत समाज से भी तरक्की के मामलों में कोसों दूर हैं तो सवाल पैदा होता है के इसके लिए जिम्मेदार कौन है ?और आखिर कब मुसलमानों की पिछड़ापन दूर होगी ? कयोंके इस मुल्क में मुसलमानों की आबादी 20 प्रतिशत है और जब तक 20 प्रतिशत आबादी पिछड़ा है तो उस वक़्त तक ये देश तरक्की कर सकता है ?इस पर उन लोगों को गौर करने की जरुरत है जो मुसलमानों या दलितों के बारे में भेदभावपूर्ण रवैये का प्रदर्शन करते हैं .आखिर क्या वजह रही के देश के ख़ुफ़िया एजेंसियों के प्रमुख के पद पर अब तक किसी मुसलमान को नियुक्त नहीं किया गया ?और अब के सरकार ने असुली तौर पर आईपीएस कैडर के इमान्दार और फआल ऑफिसर सैयेद आसिफ इब्राहिम को इंटेलीजेंस ब्यूरो( IB )का चीफ बनाने का फैसला किया है तो न सिर्फ सियासी गलियारों में बलके इस मुल्क के इलीट तबकों में भी चेमेंगोइंयाँ शुरू हो गईहैं .खास कर फिरका परश्त संगठन के लोगों ने एक तरह की गलत फहमी फ़ैलाने के साजिश शुरू कर दी है .सियासी तबके में इस नियुक्ति को मुसलमानों को खुश करने वाला क़दम बताया जा रहा है ,जबके सच्चाई ये है के जनाब इब्राहीम को उनके ओहदे पर उनके काबिले फ़ख्र peformance और सेनिओरिटी के आधार पर नियुक्ति की गई है .मुसलमानों को खुश करने वाली बात तब होती जब किसी जूनियर मुस्लिम ऑफिसरको ये ओहदा दिया जाता .इस तरह की चेमेगोइयाँ ये साबित करती है के बा सलाहियत और इमानदारी से आला ओहदे पर काम करने वाले मुस्लिम तबके के अफसरों को किस तरह नजर अंदाज़ करने की साजिशें होती रही हैं .यही वजह है के तिन दशक से मुल्क में IB और रॉ जैसी ख़ुफ़िया एजेंसियां हैं लेकिन मुल्क अब तक किसी मुस्लिम अफसरान को उन एजेंसियों का चीफ होने का मौका नसीब नहीं हुआ .अमर भूसन तत्कालीन स्पेशल सेक्रेटरी RAW ने इस वजह का खुलासा किया है के अब तक अगर किसी मुसलमान को ये ओहदा नहीं दिया गया तो उसके तईं मनफ़ी रवैया( negativ attitude)रहा है .उनका ये भी कहना है के जरुरत इस बात की है के खुफिया एजेंसियों में जेयदा से जेयदा मुस्लिम अधिकारिओं की नियुक्ति होनी चाहिए .सच्चाई भी यही है के मुल्क के मुख्तलिफ रियासतों की police विभाग का मामला हो या राष्ट्रीय अस्तर पर फ़ौज व दिगर हेफाजती दस्ता का मामला।मुसलमानों के बारे में कहीं न कहीं नेगेटिव attitude काम करता रहा है .जिसका सबूत ये है के पुरे मुल्क की आबादी तक़रीबन 20 प्रतिशत लेकिन मज्मुइ तौर पर पुलिस व फ़ौज में मुसलमानों की हिस्सेदारी सिर्फ 6 प्रतिशत .जैसा के सच्चर कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में साबित किया है और अगर जम्मू कश्मीर रियासत के 47000 हजार पुलिस अम्लों को अलग कर दे तो ये सिर्फ 4 प्रतिशतपर पहूच जाती है . सारांस ये के दीगर सरकारी विभागों की तरह सुरक्षा विभाग में भी मुसलमानों की प्रतिनिधित्व बहुत कम हयानि निराशाजनक है जो न सिर्फ मुसलामनों के साथ नाइंसाफी है बल्के हमारे सविंधान के तकाजों के भी खेलाफ है ,क्योंके हमारा सविंधान जात,पात और मजहब से ऊपर उठकर तमाम शहरी को उसकी सलाहियत के मुताबिक सरकारी और गैर सरकारी ओहदों की रिकवरी की गारंटी देता है ,लेकिन अब जबके मुख्तलिफ रिपोर्टों से ये हकीकत उजागर हो रही है के के मुसलमानों को सरकारी विभागों में हिस्सेदारी देने के मामले में किसी भी सरकार की नियत साफ़ नहीं रही है क्योंके रियासत बंगाल में तीन दहाइयों से ऐसी सियासी पार्टी हुक्मरां जमात के तौर पर विराजमान रही जिसके बारे में कहा जता है के इस सियासी पार्टी की बुनियाद सेकुलरिज्म है .लेकिन इस रियासत में भी आजादी से पहले 12 प्रतिशत मुसलमान नौकरियों में थे और आज एक फिसद से भी कम है ,इसलिए किसी एक पार्टी को मुसलमानों की बदहाली के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता .मुल्क में दो तरह की ताक़तें काम कर रहीं हैं .एक वह ताक़त है जो जाहिरन सियासी पार्टी के चोलों में काम कर रही है और दूसरी ताक़त वह है के ख्वाह वह किसी पार्टी का चोला ओढ़ रख्खा हो लेकिन मुसलमानों के मामले में भेदभावपूर्ण और क़दम क़दम पर मुसलमानों के लिए रोड़े खरे करते रहे हैं .बहर कैफ syed aasif ibrahim की नियुक्ति और उनकी मेहनत और मुशक्कत और इमानदारी का फल है किसी सियासी पार्टी का तोहफा नहीं ,लेकिन मौजूदा मरकजी हुकूमत के इस एकदाम को काबिले तहसीन इसलिए करार दिया जा सकता है के इस हुकुमत ने इस नियुक्ति में किसी प्रकार की भेदभावपूर्ण रवैया नहीं अपनाया है और सविंधान के तकाजों को की पासेदारी करते हुए हक ब हक दार रसीद को सच साबित किया है .वाजेह हो के जनाब सैयद आसिफ इब्राहीम 1977 बैच के IPS हिं और उनका कैडर मध्य प्रदेश रहा है और उन्हों ने कश्मीर में बरसों काम किया है और उनकी सेवा काबिले तहसीन रही है लिहाजा हुकूमत हिन्द ने अपनी ख़ुफ़िया एजेंसी IB के मौजूदा चीफ निहचल सिन्धु के सबक्दोसी के बाद जनाब इब्राहीम को इस ओहदे से सरफराज किया है .वाजेह हो के सिन्धु 31.12. 12 को रिटायर्ड हो रहे हैं और 1 जनवरी 2013 को जनाब इब्राहीम इस ओहदे पर फाएज होंगे .इस नियुक्ति से मुस्लिम तबके के उन अफसरों की भी होसला अफजाई हुई है जो ईमानदारी के साथ अपने काम को अंजाम देते रहे हैं .इसमें कोई शक नहीं के अगर इंसान के अन्दर खिदमते खल्क का इमानदाराना जज्बा हो और सालेह फ़िक्र रखता हो तो उसे कामयाबी जरुर मिलती है . हकिमुल्लाह हाली ने ठीक ही कहा है .............परे है चरख नील फाम से मंजिल मुसलमाँ की , सितारे जिसकी गर्दे राह हों ,वह कारवां तो है पिन्दार उर्दू दैनिक 4/12/12 में प्रकाशित rm .meezan @gmail.com सैयद आसिफ इब्राहीम की नियुक्ति पर चेमेगोइयाँ क्यों? हमारा मुल्क हिन्दुस्तान एक बहूत बरा लोकतांत्रिक देश है और हमारा सविंधान का आधार secularism है .यही वजह है के मुल्क के अन्दर अनेक धर्मों और संस्कृति क्र लोग रहते हैं और उनके अलंबरदारों को ये हक हासिल है के वह अपने मजहब और कर कल्चर के तहफ्फुज के लिए कोई भी क़दम उठा सकते हैं शर्त ये है के उनके क़दम से दुसरे मजहब के लोगों के दिल को ठेस न पहुंचे .कयोंके हमारा सविंधान इसकी इजाजत नहीं देता इसी तरह सविंधान में बराबरी के हक़ की वकालत की गई है .गर्ज के तमाम शहरी को को जिंदगी के विभिन छेत्रों में oportunity हासिल करने का सवैंधानिक अधिकार अधिकार प्राप्त है .लेकिन सच्चाई ये है के आजादी के बाद देश में जिस तरह की फेजा बनी हुई है और खास कर तीन दहाई में जिस तरह भेद भाव करने वाले सोंच के लोगों की वर्चश कायेम हुई तो मुल्क के ख़ास तबके को नजर अंदाज किया जाने लगा .खास कर मुसलमानों के साथ जिस तरह का भेदभाव वाला रवैया अपनाया जाने लगा वह न सिर्फ गैर अखलाकी था बलके सवैधानिक भी .नतीजा ये हुआ के मुल्क का मुसलमान जिन्दगी के विभिन छेत्रों में दिनों दिन पिछरता चला गया गया और आज खुद सरकार की रिपोर्टसच्चर कमिटी ,रंगनाथ मिश्रा कमीशन की रिपोर्ट ने इस हकीकत को जाहिर कर दिया है के मुल्क का मुसलमान दलित से भी बदतर है .दलित से भी बदतर कहने का मतलब साफ़ है के इस मुल्क में दलित समाज की हालत भी बेहतर नहीं है और इससे भी बदतर हालत मुसलमानों की है .जबके हमारा सविंधान मुल्क के तमाम शहरी को जिंदगी जीने के बराबरी के अधिकार की वकालत करता है तो फिर आजादी के 66 सालों बाद भी अगर मुसलमान दलीत समाज से भी तरक्की के मामलों में कोसों दूर हैं तो सवाल पैदा होता है के इसके लिए जिम्मेदार कौन है ?और आखिर कब मुसलमानों की पिछड़ापन दूर होगी ? कयोंके इस मुल्क में मुसलमानों की आबादी 20 प्रतिशत है और जब तक 20 प्रतिशत आबादी पिछड़ा है तो उस वक़्त तक ये देश तरक्की कर सकता है ?इस पर उन लोगों को गौर करने की जरुरत है जो मुसलमानों या दलितों के बारे में भेदभावपूर्ण रवैये का प्रदर्शन करते हैं .आखिर क्या वजह रही के देश के ख़ुफ़िया एजेंसियों के प्रमुख के पद पर अब तक किसी मुसलमान को नियुक्त नहीं किया गया ?और अब के सरकार ने असुली तौर पर आईपीएस कैडर के इमान्दार और फआल ऑफिसर सैयेद आसिफ इब्राहिम को इंटेलीजेंस ब्यूरो( IB )का चीफ बनाने का फैसला किया है तो न सिर्फ सियासी गलियारों में बलके इस मुल्क के इलीट तबकों में भी चेमेंगोइंयाँ शुरू हो गईहैं .खास कर फिरका परश्त संगठन के लोगों ने एक तरह की गलत फहमी फ़ैलाने के साजिश शुरू कर दी है .सियासी तबके में इस नियुक्ति को मुसलमानों को खुश करने वाला क़दम बताया जा रहा है ,जबके सच्चाई ये है के जनाब इब्राहीम को उनके ओहदे पर उनके काबिले फ़ख्र peformance और सेनिओरिटी के आधार पर नियुक्ति की गई है .मुसलमानों को खुश करने वाली बात तब होती जब किसी जूनियर मुस्लिम ऑफिसरको ये ओहदा दिया जाता .इस तरह की चेमेगोइयाँ ये साबित करती है के बा सलाहियत और इमानदारी से आला ओहदे पर काम करने वाले मुस्लिम तबके के अफसरों को किस तरह नजर अंदाज़ करने की साजिशें होती रही हैं .यही वजह है के तिन दशक से मुल्क में IB और रॉ जैसी ख़ुफ़िया एजेंसियां हैं लेकिन मुल्क अब तक किसी मुस्लिम अफसरान को उन एजेंसियों का चीफ होने का मौका नसीब नहीं हुआ .अमर भूसन तत्कालीन स्पेशल सेक्रेटरी RAW ने इस वजह का खुलासा किया है के अब तक अगर किसी मुसलमान को ये ओहदा नहीं दिया गया तो उसके तईं मनफ़ी रवैया( negativ attitude)रहा है .उनका ये भी कहना है के जरुरत इस बात की है के खुफिया एजेंसियों में जेयदा से जेयदा मुस्लिम अधिकारिओं की नियुक्ति होनी चाहिए .सच्चाई भी यही है के मुल्क के मुख्तलिफ रियासतों की police विभाग का मामला हो या राष्ट्रीय अस्तर पर फ़ौज व दिगर हेफाजती दस्ता का मामला।मुसलमानों के बारे में कहीं न कहीं नेगेटिव attitude काम करता रहा है .जिसका सबूत ये है के पुरे मुल्क की आबादी तक़रीबन 20 प्रतिशत लेकिन मज्मुइ तौर पर पुलिस व फ़ौज में मुसलमानों की हिस्सेदारी सिर्फ 6 प्रतिशत .जैसा के सच्चर कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में साबित किया है और अगर जम्मू कश्मीर रियासत के 47000 हजार पुलिस अम्लों को अलग कर दे तो ये सिर्फ 4 प्रतिशतपर पहूच जाती है . सारांस ये के दीगर सरकारी विभागों की तरह सुरक्षा विभाग में भी मुसलमानों की प्रतिनिधित्व बहुत कम हयानि निराशाजनक है जो न सिर्फ मुसलामनों के साथ नाइंसाफी है बल्के हमारे सविंधान के तकाजों के भी खेलाफ है ,क्योंके हमारा सविंधान जात,पात और मजहब से ऊपर उठकर तमाम शहरी को उसकी सलाहियत के मुताबिक सरकारी और गैर सरकारी ओहदों की रिकवरी की गारंटी देता है ,लेकिन अब जबके मुख्तलिफ रिपोर्टों से ये हकीकत उजागर हो रही है के के मुसलमानों को सरकारी विभागों में हिस्सेदारी देने के मामले में किसी भी सरकार की नियत साफ़ नहीं रही है क्योंके रियासत बंगाल में तीन दहाइयों से ऐसी सियासी पार्टी हुक्मरां जमात के तौर पर विराजमान रही जिसके बारे में कहा जता है के इस सियासी पार्टी की बुनियाद सेकुलरिज्म है .लेकिन इस रियासत में भी आजादी से पहले 12 प्रतिशत मुसलमान नौकरियों में थे और आज एक फिसद से भी कम है ,इसलिए किसी एक पार्टी को मुसलमानों की बदहाली के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता .मुल्क में दो तरह की ताक़तें काम कर रहीं हैं .एक वह ताक़त है जो जाहिरन सियासी पार्टी के चोलों में काम कर रही है और दूसरी ताक़त वह है के ख्वाह वह किसी पार्टी का चोला ओढ़ रख्खा हो लेकिन मुसलमानों के मामले में भेदभावपूर्ण और क़दम क़दम पर मुसलमानों के लिए रोड़े खरे करते रहे हैं .बहर कैफ syed aasif ibrahim की नियुक्ति और उनकी मेहनत और मुशक्कत और इमानदारी का फल है किसी सियासी पार्टी का तोहफा नहीं ,लेकिन मौजूदा मरकजी हुकूमत के इस एकदाम को काबिले तहसीन इसलिए करार दिया जा सकता है के इस हुकुमत ने इस नियुक्ति में किसी प्रकार की भेदभावपूर्ण रवैया नहीं अपनाया है और सविंधान के तकाजों को की पासेदारी करते हुए हक ब हक दार रसीद को सच साबित किया है .वाजेह हो के जनाब सैयद आसिफ इब्राहीम 1977 बैच के IPS हिं और उनका कैडर मध्य प्रदेश रहा है और उन्हों ने कश्मीर में बरसों काम किया है और उनकी सेवा काबिले तहसीन रही है लिहाजा हुकूमत हिन्द ने अपनी ख़ुफ़िया एजेंसी IB के मौजूदा चीफ निहचल सिन्धु के सबक्दोसी के बाद जनाब इब्राहीम को इस ओहदे से सरफराज किया है .वाजेह हो के सिन्धु 31.12. 12 को रिटायर्ड हो रहे हैं और 1 जनवरी 2013 को जनाब इब्राहीम इस ओहदे पर फाएज होंगे .इस नियुक्ति से मुस्लिम तबके के उन अफसरों की भी होसला अफजाई हुई है जो ईमानदारी के साथ अपने काम को अंजाम देते रहे हैं .इसमें कोई शक नहीं के अगर इंसान के अन्दर खिदमते खल्क का इमानदाराना जज्बा हो और सालेह फ़िक्र रखता हो तो उसे कामयाबी जरुर मिलती है . हकिमुल्लाह हाली ने ठीक ही कहा है .............परे है चरख नील फाम से मंजिल मुसलमाँ की , सितारे जिसकी गर्दे राह हों ,वह कारवां तो है पिन्दार उर्दू दैनिक 4/12/12 में प्रकाशित
डॉक्टर मुश्ताक अहमद
rm .meezan @gmail.com
सैयद आसिफ इब्राहीम की नियुक्ति पर चेमेगोइयाँ क्यों?
हमारा मुल्क हिन्दुस्तान एक बहूत बरा लोकतांत्रिक देश है और हमारा सविंधान का आधार secularism है .यही वजह है के मुल्क के अन्दर अनेक धर्मों और संस्कृति क्र लोग रहते हैं और उनके अलंबरदारों को ये हक हासिल है के वह अपने मजहब और कर कल्चर के तहफ्फुज के लिए कोई भी क़दम उठा सकते हैं शर्त ये है के उनके क़दम से दुसरे मजहब के लोगों के दिल को ठेस न पहुंचे .कयोंके हमारा सविंधान इसकी इजाजत नहीं देता इसी तरह सविंधान में बराबरी के हक़ की वकालत की गई है .गर्ज के तमाम शहरी को को जिंदगी के विभिन छेत्रों में oportunity हासिल करने का सवैंधानिक अधिकार अधिकार प्राप्त है .लेकिन सच्चाई ये है के आजादी के बाद देश में जिस तरह की फेजा बनी हुई है और खास कर तीन दहाई में जिस तरह भेद भाव करने वाले सोंच के लोगों की वर्चश कायेम हुई तो मुल्क के ख़ास तबके को नजर अंदाज किया जाने लगा .खास कर मुसलमानों के साथ जिस तरह का भेदभाव वाला रवैया अपनाया जाने लगा वह न सिर्फ गैर अखलाकी था बलके सवैधानिक भी .नतीजा ये हुआ के मुल्क का मुसलमान जिन्दगी के विभिन छेत्रों में दिनों दिन पिछरता चला गया गया और आज खुद सरकार की रिपोर्टसच्चर कमिटी ,रंगनाथ मिश्रा कमीशन की रिपोर्ट ने इस हकीकत को जाहिर कर दिया है के मुल्क का मुसलमान दलित से भी बदतर है .दलित से भी बदतर कहने का मतलब साफ़ है के इस मुल्क में दलित समाज की हालत भी बेहतर नहीं है और इससे भी बदतर हालत मुसलमानों की है .जबके हमारा सविंधान मुल्क के तमाम शहरी को जिंदगी जीने के बराबरी के अधिकार की वकालत करता है तो फिर आजादी के 66 सालों बाद भी अगर मुसलमान दलीत समाज से भी तरक्की के मामलों में कोसों दूर हैं तो सवाल पैदा होता है के इसके लिए जिम्मेदार कौन है ?और आखिर कब मुसलमानों की पिछड़ापन दूर होगी ? कयोंके इस मुल्क में मुसलमानों की आबादी 20 प्रतिशत है और जब तक 20 प्रतिशत आबादी पिछड़ा है तो उस वक़्त तक ये देश तरक्की कर सकता है ?इस पर उन लोगों को गौर करने की जरुरत है जो मुसलमानों या दलितों के बारे में भेदभावपूर्ण रवैये का प्रदर्शन करते हैं .आखिर क्या वजह रही के देश के ख़ुफ़िया एजेंसियों के प्रमुख के पद पर अब तक किसी मुसलमान को नियुक्त नहीं किया गया ?और अब के सरकार ने असुली तौर पर आईपीएस कैडर के इमान्दार और फआल ऑफिसर सैयेद आसिफ इब्राहिम को इंटेलीजेंस ब्यूरो( IB )का चीफ बनाने का फैसला किया है तो न सिर्फ सियासी गलियारों में बलके इस मुल्क के इलीट तबकों में भी चेमेंगोइंयाँ शुरू हो गईहैं .खास कर फिरका परश्त संगठन के लोगों ने एक तरह की गलत फहमी फ़ैलाने के साजिश शुरू कर दी है .सियासी तबके में इस नियुक्ति को मुसलमानों को खुश करने वाला क़दम बताया जा रहा है ,जबके सच्चाई ये है के जनाब इब्राहीम को उनके ओहदे पर उनके काबिले फ़ख्र peformance और सेनिओरिटी के आधार पर नियुक्ति की गई है .मुसलमानों को खुश करने वाली बात तब होती जब किसी जूनियर मुस्लिम ऑफिसरको ये ओहदा दिया जाता .इस तरह की चेमेगोइयाँ ये साबित करती है के बा सलाहियत और इमानदारी से आला ओहदे पर काम करने वाले मुस्लिम तबके के अफसरों को किस तरह नजर अंदाज़ करने की साजिशें होती रही हैं .यही वजह है के तिन दशक से मुल्क में IB और रॉ जैसी ख़ुफ़िया एजेंसियां हैं लेकिन मुल्क अब तक किसी मुस्लिम अफसरान को उन एजेंसियों का चीफ होने का मौका नसीब नहीं हुआ .अमर भूसन तत्कालीन स्पेशल सेक्रेटरी RAW ने इस वजह का खुलासा किया है के अब तक अगर किसी मुसलमान को ये ओहदा नहीं दिया गया तो उसके तईं मनफ़ी रवैया( negativ attitude)रहा है .उनका ये भी कहना है के जरुरत इस बात की है के खुफिया एजेंसियों में जेयदा से जेयदा मुस्लिम अधिकारिओं की नियुक्ति होनी चाहिए .सच्चाई भी यही है के मुल्क के मुख्तलिफ रियासतों की police विभाग का मामला हो या राष्ट्रीय अस्तर पर फ़ौज व दिगर हेफाजती दस्ता का मामला।मुसलमानों के बारे में कहीं न कहीं नेगेटिव attitude काम करता रहा है .जिसका सबूत ये है के पुरे मुल्क की आबादी तक़रीबन 20 प्रतिशत लेकिन मज्मुइ तौर पर पुलिस व फ़ौज में मुसलमानों की हिस्सेदारी सिर्फ 6 प्रतिशत .जैसा के सच्चर कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में साबित किया है और अगर जम्मू कश्मीर रियासत के 47000 हजार पुलिस अम्लों को अलग कर दे तो ये सिर्फ 4 प्रतिशतपर पहूच जाती है .
सारांस ये के दीगर सरकारी विभागों की तरह सुरक्षा विभाग में भी मुसलमानों की प्रतिनिधित्व बहुत कम हयानि निराशाजनक है जो न सिर्फ मुसलामनों के साथ नाइंसाफी है बल्के हमारे सविंधान के तकाजों के भी खेलाफ है ,क्योंके हमारा सविंधान जात,पात और मजहब से ऊपर उठकर तमाम शहरी को उसकी सलाहियत के मुताबिक सरकारी और गैर सरकारी ओहदों की रिकवरी की गारंटी देता है ,लेकिन अब जबके मुख्तलिफ रिपोर्टों से ये हकीकत उजागर हो रही है के के मुसलमानों को सरकारी विभागों में हिस्सेदारी देने के मामले में किसी भी सरकार की नियत साफ़ नहीं रही है क्योंके रियासत बंगाल में तीन दहाइयों से ऐसी सियासी पार्टी हुक्मरां जमात के तौर पर विराजमान रही जिसके बारे में कहा जता है के इस सियासी पार्टी की बुनियाद सेकुलरिज्म है .लेकिन इस रियासत में भी आजादी से पहले 12 प्रतिशत मुसलमान नौकरियों में थे और आज एक फिसद से भी कम है ,इसलिए किसी एक पार्टी को मुसलमानों की बदहाली के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता .मुल्क में दो तरह की ताक़तें काम कर रहीं हैं .एक वह ताक़त है जो जाहिरन सियासी पार्टी के चोलों में काम कर रही है और दूसरी ताक़त वह है के ख्वाह वह किसी पार्टी का चोला ओढ़ रख्खा हो लेकिन मुसलमानों के मामले में भेदभावपूर्ण और क़दम क़दम पर मुसलमानों के लिए रोड़े खरे करते रहे हैं .बहर कैफ syed aasif ibrahim की नियुक्ति और उनकी मेहनत और मुशक्कत और इमानदारी का फल है किसी सियासी पार्टी का तोहफा नहीं ,लेकिन मौजूदा मरकजी हुकूमत के इस एकदाम को काबिले तहसीन इसलिए करार दिया जा सकता है के इस हुकुमत ने इस नियुक्ति में किसी प्रकार की भेदभावपूर्ण रवैया नहीं अपनाया है और सविंधान के तकाजों को की पासेदारी करते हुए हक ब हक दार रसीद को सच साबित किया है .वाजेह हो के जनाब सैयद आसिफ इब्राहीम 1977 बैच के IPS हिं और उनका कैडर मध्य प्रदेश रहा है और उन्हों ने कश्मीर में बरसों काम किया है और उनकी सेवा काबिले तहसीन रही है लिहाजा हुकूमत हिन्द ने अपनी ख़ुफ़िया एजेंसी IB के मौजूदा चीफ निहचल सिन्धु के सबक्दोसी के बाद जनाब इब्राहीम को इस ओहदे से सरफराज किया है .वाजेह हो के सिन्धु 31.12. 12 को रिटायर्ड हो रहे हैं और 1 जनवरी 2013 को जनाब इब्राहीम इस ओहदे पर फाएज होंगे .इस नियुक्ति से मुस्लिम तबके के उन अफसरों की भी होसला अफजाई हुई है जो ईमानदारी के साथ अपने काम को अंजाम देते रहे हैं .इसमें कोई शक नहीं के अगर इंसान के अन्दर खिदमते खल्क का इमानदाराना जज्बा हो और सालेह फ़िक्र रखता हो तो उसे कामयाबी जरुर मिलती है .
हकिमुल्लाह हाली ने ठीक ही कहा है .............परे है चरख नील फाम से मंजिल मुसलमाँ की , सितारे जिसकी गर्दे राह हों ,वह कारवां तो है
पिन्दार उर्दू दैनिक 4/12/12 में प्रकाशित
बिहार के भ्रष्ट कृषि पदाधिकारी अपने विभाग के अधिकारिओ तक को नहीं बख्शते ?
बिहार के कृषि विभाग के अधिकारी किस प्रकार से किसानों की सेवा करते होंगे वह इस बात से समझा जा सकता है के जब वह अपने विभाग के अफसरों को सताने से नहीं चुकते तो भला वह बिहार राज के किसानो की सेवा क्या करते होंगे अंदाजा लगाया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार बेतिया जिला के मझौलिया प्रखंड के B.A .O को वहां के D.A.O चेक बुक जांच के नाम पर परीशान महीनो से कर रहे।बताया जाता सूत्रों ने बताया के DAO की मंशा परीशान कर पैशा उतारना .मजे की बात है के वारिये अधिकारीयों को इस बात की पूरी जानकारी होने के बावजूद परीशान BAO की समाया दूर करने की दिशा में अब तक कोई कदम नहीं उठाया है और सम्बंधित DAO के खेलाफ कोई अब तक कार्रवाई की कोई खबर है।जबके बताया जाता है के मामले की जानकारी विभाग के निदेशक,के साथ साथ प्रधान सचिव तक को है।सूत्रों की माने तो चेक बुक जाँच के नाम पर पर्खंड कृषि पदाधिकारों को परीशान करने का मामला सिर्फ पशिचम चंपारण में है बलके ये मामला पुरे बिहार के BAO के साथ हो रहा जिससे परीशान BAO सही से न विभाग का काम देख रहे और न अपने घर और जनत का .
सूत्रों के अनुसार बेतिया जिला के मझौलिया प्रखंड के B.A .O को वहां के D.A.O चेक बुक जांच के नाम पर परीशान महीनो से कर रहे।बताया जाता सूत्रों ने बताया के DAO की मंशा परीशान कर पैशा उतारना .मजे की बात है के वारिये अधिकारीयों को इस बात की पूरी जानकारी होने के बावजूद परीशान BAO की समाया दूर करने की दिशा में अब तक कोई कदम नहीं उठाया है और सम्बंधित DAO के खेलाफ कोई अब तक कार्रवाई की कोई खबर है।जबके बताया जाता है के मामले की जानकारी विभाग के निदेशक,के साथ साथ प्रधान सचिव तक को है।सूत्रों की माने तो चेक बुक जाँच के नाम पर पर्खंड कृषि पदाधिकारों को परीशान करने का मामला सिर्फ पशिचम चंपारण में है बलके ये मामला पुरे बिहार के BAO के साथ हो रहा जिससे परीशान BAO सही से न विभाग का काम देख रहे और न अपने घर और जनत का .
जो वाकई मोमीन हैं वह ऐसा नहीं करते दुनिया के लिए दीन का सौदा नहीं करते
गजल
रशीद आरिफ
संपर्क :09801264891
जो वाकई मोमीन हैं वह ऐसा नहीं करते
दुनिया के लिए दीन का सौदा नहीं करते
खाए हैं कई तीर कलेजे पे ख़ुशी से
दुश्मन को कभी पीठ दिखाया नहीं करते
हर शख्स परीशां हैं बीमारी दिल से
तुम कैसे मसीहा हो के अच्छा नहीं करते।
कमजर्फों की महफिल में कभी जाते नहीं हम
तौकीर को खुद अपनी घटाया नहीं करते
क्या फुले फलेंगे वह कभी इल्म ओ हुनर में
ओस्ताद को खातिर में जो लाया नहीं करते
क्या शै है शुखन गोई ये मालूम है लेकिन
हम ताक़ हैं इस फन में ये दावा नहीं करते
अल्लाह रख्खे मस्त फकीरी में आरिफ
हम तख्ते सुलेमाँ की तमन्ना नहीं करते।
(दैनिक पिन्दार दिनांक 2/12/2012 को प्रकाशित )
एजुकेशन माफियाओं को बचा रही बिहार का एजुकेशन डिपार्टमेंट ?
बिहार के शिक्छा (SHIKCHA )विभाग और SHIKCHA मंत्री के कार्यालय को एक RTI आवेदन ने नंगा कर दिया है ,बड़े- बड़े अधिकारिओ को बचाने के लिए सूचना ,आवेदक को 14/02/2011 को पूछे गए सवालों का जवाब न शिक्छा (SIKCHA )मंत्री ने दिया और न कार्यालय ने और न उनके विभाग के अधिकारियों ने ,यहीं से सवाल उठने शुरू हो गएँ हैं के आखिर जब आवेदक ने सीधे बिहार के SIKCHA मंत्री को RTI का आवेदन भेज कर आवेदक ने जब सूचना मांगी तो SHIKCHA मंत्री / कार्यालय और उनके विभाग ने आखिर किन लोगों की खाल बचाने के लिए आवेदक को सूचना देने से परहेज किया ?
क्या है मामला ?
सवतंत्र पत्रकार सह मानवाधिकार कार्यकर्ता मोहम्मद कौसर नदीम ने 1. SHIKCHA मंत्री से RTI के जरिये पूछा था के राज्य सरकार ने BSEB /BIEC से मान्यता प्राप्त हाई स्कूल +2 BM दास रोड को आखिर किस आधार पर उसी कैंपस पर CBSE BOARD से स्कूल खोलने के लिए राज्य सरकार ने NOC प्रदान की थी .?
2.उपरोक्त प्रकरण को आप किस रूप में देखते हैं ?BSEB / BIEC से मान्यता प्राप्त SHIKCHAN संस्थान उसी परिसर में खोले जाने को ?3.आप पुरे मामले को उच्च स्तारिये जांच कराने /निगरानी ब्यूरो द्वारा जाँच कराने हेतु कौन सा कदम उठाने जा रहे हैं ?4.इस मामले की लिपा पोती न हो पाए इसके लिए कितना जल्द और कब तक कठोरे आप उठाने जा रहे ?5.सीबीएसई बोर्ड द्वारा पटना मुस्लिम हाई स्कूल +2 को मान्यता देने में सीबीएसई बोर्ड के खेलाफ कोई मामला बनता है या नहीं ?लेकिन 2 साल बीत जाने के बावजूद SHIKCHA मंत्री और उनके विभाग ने उपरोक्त सवालों का जवाब न देकर कई तरह के सवालों के घेरे में खुद को घेर लिए हैं।और ये सवाल जनता के बीच उठने लगा है के कहीं शिक्छा (SIKCHA )मंत्री का कार्यालय और उनका विभाग कहीं अपने चहेतों को बचाने की खातिर तो जवाब देने से परहेज कर रहे ?खैर मामला जो भी हो विभाग और मंत्रालय भले ही जवाब न दे पाए हों ,लेकिन माना जा रहा है के आवेदक इस मामले के दोषियों का पता करने और सजा दिलाने हेतु निगरानी और CVC में मामला दर्ज दर्ज कराने की मुहीम में जुट गया है .
यहाँ बताते चलें कि आवेदक ने सीबीएसई बोर्ड से भी कई जानकारियां हासिल करने हेतु आवेदन दिए थे ,कई सूचनाओं को CBSE BOARD ने नहीं दिए थे,जो दिए थे उस सुचना से खुद CBSE बोर्ड के साथ साथ स्कूल प्रसाशन की गर्दन पूरी तरह फंस गई है,सीबीएसई बोर्ड ने खुद तो फंस ही गई है अपने खुद के द्वारा अधूरी सुचना में ही मगर उस अधूरी सूचना के जरिये बिहार सरकार के एजुकेशन डिपार्टमेंट को भी बुरी तरह फंसा दी है।जब आवेदक ने सीबीएसई बोर्ड से सूचना मांगी तो सीबीएसई बोर्ड ने साफ़ लिखा है के जिस कैंपस पर सीबीएसई बोर्ड मान्यता प्रदान करती है उस जगह पे दूसरी बोर्ड की पढाई नहीं चल सकती है ,स्कूल प्रशासन ने गला फंसते देख बिहार से मान्यता प्राप्त स्कूल को आनन् फानन में अशोक राज पथ (साइंस कॉलेज )के सामने दूसरी जगह स्थापित कर दिया गया .सवाल ये भी पैदा होने लगा है के आखिर किस बुनियाद पर BSEB /BIEC से मान्यता प्राप्त उस स्कूल को जो आजादी के पूर्व से ही चली आरही हो किस की मिली भगत से ट्रान्सफर किया गया ?क्या कानून इस बात की इजाजत देती है ?जिस तरह सीबीएसई बोर्ड का कहने है के हम जिस कैंपस पर मंजूरी देते हैं वहां से ट्रान्सफर कर दुसरे जगह ले जाने की इजाजत नहीं है .जानकारों का कहना है है स्कूल प्रबंधन ने या तो अवैध ढंग से ट्रान्सफर कर लिया होगा या तो BSEB के अधिकारिओं की मिली भगत से ऐसा किया गया हो गा।बिहार बोर्ड BIEC भी इस तरह से ट्रांसफ़र की इजाजत नहीं देती सूत्रों के अनुसार .बिहार बोर्ड और सीबीएसई बोर्ड की मिली भगत से कई तरह के गैर क़ानूनी काम किये जा रहे .जिससे पूरा शिक्छा(SIKCHA) विभाग जाँच के दाएरे में आ गया है .सूत्रों का कहना है के आवेदक के RTI के आवेदन का परिणाम था के पटना मुस्लिम हाई स्कूल+2 (सीबीएसई ) बोर्ड की मान्यता सीबीएसई बोर्ड ने अपनी गर्दन बचाने के लिए 2011 कुछ दिनों पहले चीन ली थी .एक और महत्व पूर्ण सूचना को सीबीएसई बोर्ड देने में असफल रहा था ,आवेदक ने CIC में दूसरी अपील भी की वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिये सुनवाई की तारीख भी तै हो गई थी,मगर आवेदक को सुवाई की तारीख दिमाग में न रहने के कारण उपस्थित न हो सका था .जिसे CIC केस को DEPOSE कर दिया ,मगर आवेदक पुनः मामले की सुनवाई हेतु पत्र लिखने की तैयारी में है
कौसर नदीम की रिपोर्ट .सपर्क 9852508777
कानून या मजाक ?
कानून या मजाक ?
उर्दू दैनिक पिन्दार में दिनांक 30.11.2012 को सम्पादकिये पृष्ठ पर प्रकाशित
महाराष्ट्रा सरकार को एक एक बार फिर शर्मिंदगी उठानी पढ़ी और कानून के गलत इस्तेमाल पर वह आज फिर से कटघेरे में लडिया फिर घिर गई है .facebook विवाद के सिलसिले में सरकार ने ठाणे के दो पुलिस अधिकारीयों SP ठाणे ग्रामीण rawindar sen gaonkar और सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर srikant pingle को सस्पेंड कर दिया गया है सनद रहे के उपरोक्त दोनों पुलिस अधिकारी ने शिव सेना के kaarjkartaon का दबाओं में 18 नवम्बर को शाहीन dhadha और रेनू श्रीनिवासन के खेलाफ न सिर्फ मुकदमा दर्ज किया गया था बलके उन्हें गिरफ्तार करते हुए अदालत मर पेश कर दिया ,जबके ये मामला इस कद्र संवेदनशील न था .जब इस गिरफ़्तारी पर जनता ने गुस्से का इज़हार किया तो सरकार को जाँच करवानी पड़ी .और जाँच रिपोर्ट आने के बाद उपरोक्त दोनों पुलिस अधिकारीयों को दोषी पाया गया .साथ ही हाई कोर्ट ने भी इस मामले में सख्त क़दम उठाते हुए पाल घर के judicial magistate R B bagade का तबादला कर दिया .बेला शुबा किसी भी मुल्क के लिए उसका कानून हर फर्द और समाज से ऊपर होता है और हर हर शहरी के लिए लाजमी है के उसका एहतराम करे .उसके तक़द्दूस और उसके वक़ार को हर हाल में बरकरार रख्खे .लेकिन गुजिस्ता चाँद महीनो से हमारे मुल्क की पुलिस खास कर maharastra पुलिस हिन्दुस्तानी कानून को के वक़ार को मजरुह करने पर तुली हुई है .कई बार प्रशासन को शर्मिंदगी उठानी परी .कुछ माह पहले कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के खेलाफ दुसरे अधिकारियों (उसमे maharastra सरकार भी शामिल थी )ने गलत धारा का इस्तेमाल करते हुए मुक़दमा दर्ज किया था ,लेकिन अदालत में वह उसे शाबित न कर सकी ..और आखिर कार शर्मिंदगी उठानी परी क्यों के आदालत के जरिये फटकारे जाने के बाद संबधित अधिकारीयों के पास इल्जाम वापस लेते हुए केस से दस्तबरदारी इख्तेयार करने के सेवा कोई चारा न था .अगर इस घटना पर बारीकी से गौर किया जाये तो किसी फर्द या अधिकारी की बे इज्ज़ती नहीं बलके हिदुस्तानी कानून की और सविंधान की की तौहीन है जिसके लिए सम्बंधित लोगों को कभी माफ़ नहीं किया जा सकता ,लेकिन अफ़सोस के इस सिलसिले में दोषी अधिकारीयों के खेलाफ कोई ठोस करवाई नहीं की गई और इससे भी जेयदा अफ़सोस की बात ये है के सरकार और पुलिस प्रशासन ने इस घटना से सबक भी हासिल नहीं किया असुली तौर पर तो ये होना चाहिय था के वह आइन्दा के लिए संभल जाते और किसी भी मामले में बेला सोंचे समझे या किसी के दबाव में आकर कानून का गलत इस्तेमाल नहीं करते लेकिन ऐसा हुआ नहीं .असीम त्रिवेदी की घटना के चंद माह बाद ही maharastra जिला के ठाणे में पुलिस ने एक मर्तबा फिर ऐसी गलती गई दोहराई गई .और दो मासूम लड़कियों शाहीन और रेनू के खेलाफ शिव सेना के दबाव में आकर धरा 295A और 505 आईटी एक्ट के तेहत मुक़दमा दायर कर दिया गया और स्थानिये अदालत में पेश भी किया गया और मोकामी अदालत ने भी कानून की धजयां उड़ाते हुए इन दोनों लड़कियों के खेलाफ फरदे जुर्म भी दाखिल करदी और उन्हें 15 हजार रूपये की अदाएगी के मुच्कले के बाद जमानत मंजूर की .ये पूरा मामला हिन्दुस्तानी सविंधान और कानून की सरीह खेलाफवर्जी था और अवाम ने उसके खेलाफ आवाज बुलंद करते हुए अपनी जिमेदारी निभाई के आज के दोषी अधिकारीयों को निलंबन का सामना करना परा इस घटना के बाद शायद सियासी पार्टियों और कायेदीन के दबाव में काम करने वाले पुलिस मुलाजेमिन संभल जाएँ और अपने फरायेज की तकमील के दौरान कानून की बाला दस्ती को बचाकर रखें .कानून की बाला दस्ती को कायेम करने के लिए वेजारते दाखेला और बॉम्बे हाई कोर्ट ने जो फैसले किये हैं उसकी अवामी हलकों में प्रशंशा हो रही .यही वजह है के पुलिस मुलाजेमीन के निलंबन के खेलाफ शिव सेना की जानिब से पाल घर बंद मनाया गोया के शिव सेना खुद को हिन्दुस्तानी कानून से ऊपर समझ रही है .शिव सेना का ये काम यक़ीनन दस्तुरे हिन्द की तौहीन के बराबर है और इस पर पार्टी के जिम्मेदरान से पूछ ताछ की जनि चाहिए .अगर ये गलत सोच आम हो गई तो फिर मुल्क का शिराजा बिखर जायेगा,ऐसा फहली बार नहीं हो रहा है ,सेना ने इससे पहले भी कई बार दस्तुरे हिन्द व कानून का खुला मजाक उड़ाया है बलके कुल शिव सेना कायेद रावत ने बाल ठाकरे की यादगार कायेम करने से संबधित जो बयान दिया था वह भी तो हिन्दुस्तानी कानून और अदालत के अहानत के हे मुत्रादीफ है,रावत ने कहा था "बाल ठाकरे पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए भगवान का दर्जा रखते हैं और उनकी आखरी रस्म जिस जगह अंजाम दी गई वह जगह हमारे लिए अयोध्या से कम नहीं इसलिए अदालत और हुकूमत शिवा जी पार्क में बाला साहेब की याद गार के केयाम में रुकावट न डाले .रावत ढके छुपे अल्फाज में अदालत और हुकूमत को वार्निंग दे रहे हैं और इसी सोच को सख्ती से कुचलने की जरुरत है कयोंके अगर ये आम हो जाये तो लोकतंत्र के लिए बहुत नुकसानदेह होगी .मुल्क की शांति और मजबूती के लिए दस्तूर और कानून की बालादस्ती जरुरी है ,इससे इनकार नहीं किया जा सकता .अब ये अदालत और कानून के रखवालों की जिम्मेदारी बनती है के वह कानून को अपने घर की बांदी समझने वालों से किस तरह निपटते हैं .?
देश में आतंक के लिए जिम्मेदार कौन ?
डाक्टर मोहम्मद आबेदुर्रह्मान (चंद्वार्बस्वाह )उर्दू दैनिक दिनांक 28/8/2012 पिन्दार में प्रकाशित
फसीह महमूद दरभंगा के एक छोटे से गाँव का रहने वाला है ,पेशा से इंजिनियर है और सऊदी अरब में मोलाजेमत करता था,और पिछले कई सालों से वहां रह रहा था,सिर्फ छुटियों में में ही हिंदुस्तान आया करता था,वह इस साल मई के महीने में लापता हो गया था,उसकी wife का कहना है के सऊदी अरब में कुछ हिन्दुस्तानी और सऊदी पुलिस उसे उसके घर से ले गए थे इसके बाद उसका कोई पता नहीं था यहाँ तक के उसकी wife को अकेले वतन वापस आ जाना पड़ा .उसकी पत्नी ने यहाँ आकर उसकी तलाश के लिए भारतीय वजीर ए खारजा और और दाखेला (home ministry एंड foreign ministry )में दरखास्त दी .और देश के कई प्रदेशों के मुख्मंत्री और पुलिस प्रमुखों से पुछा के कहीं फसी महमूद किसी जुर्म में संलिप्त तो नहीं ?इसपर तमाम के तमाम ने उसे जवाब दिया के था के न उन्हें फाही का अता पता मालूम है और न ही वह किसी जुर्म में wanted है लेकिन 19 मई 2011 को अरब news ने फसीह महमूद जिस कंपनी में काम करता था उसके मैनेजर के हवाले से खबर दी के सऊदी पुलिस ने फसीह को हेरासत में लेने के बाद हिन्दुस्तान भेज दिया है और उसके जहाज इत्यादि के संबंध में हिन्दुस्तानी सरकार को सूचना दे दी और हिन्दुस्तान पहुचने के बाद फसीह को पाकर लिया गया .इस खबर और सरकार के तरफ से फसीह की मालूमात न के जवाब की वजह से उसकी पत्नी ने फसीह की जानकारी हासिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किये तो सरकार ने सुनवाई के एक दिन पहले ही फसीह की गिरफ़्तारी के लिए रेड कार्नर नोटिस किया के फसीह महमूद दहशतगर्दी हथियारों और धमाकाखेज पदार्थों के मामलों में हिन्दुस्तान को वांटेड है .सुनवाई के पहले फसीह महमूद के अते पते से अज्ञानता जाहिर करने वाली सरकार के प्रतिक्रिया इत्यादि के विशलेसन की तफसील अली सोहराब के ब्लॉग sohrabali1979.2012/blogspot .in /3510_post -.blog html blog पर भी देखी जा सकती है .उसके बाद ये भी खबर आई थी के सऊदी प्रशासन ने हिन्दुस्तानी सरकार को फसीह से पूछ ताछ के लिए इजाजत दी थी लेकिन हवालगी के लिए उसके खेलाफ पुख्ता सबूत मांगे थे .ये खबर भी आई थी के सऊदी प्रशासन हिन्दुस्तान के जरिये उपलब्ध कराइ गई सबूत से सहमत नहीं है (.rediff .com ।september 17)बहर हाल अब कहा जा रहा है के 22 अक्तूबर 2012 को फसीह दिल्ली आया और गिरफ्तार कर लिया गया .मिल्ली गजट ने अपने ताज़ा अंक में( 1 से15 अक्तूबर)में लिखा है के इन पांच महीनो के दौरान भी फसीह के खेलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं उपलब्ध नहीं कराये गए बलके जेयदा अरसा बीत जाने के कारण सऊदी अरब ने हिन्दुस्तान भेज दिया .सऊदी अरब से अबू हमजा की हिन्दुस्तान हवालगी के बाद फसीह महमूद की पहली गिरफ़्तारी है और अपनी नौइयत का पहला केस है .लेकिन इस नौइयत में भी वह अकेला नहीं है . 26 अक्तूबर को NDTV ने अपनी वेबसाइट पर बैंगलोर की रहने वाली फातिमा खान की एक प्रेस कांफ्रेंस की खबर प्रकाशित की थी .जिस में उन्हों ने कहा के सऊदी अरब के मिलिट्री हॉस्पिटल में मुलाजिम उनके बेटे डॉक्टर उस्मान गनी को हिन्दुस्तान पुलिस के आग्रह पर सऊदी अरब में 8 अक्तूबर को गिरफ्तार किया गया है .उन्हों ने माजिद ये भी कहा के 2008 में
हुबली में कुछ लोगों की गिरफ़्तारी के बाद प्रदेश पुलिस ने उनके बेटे को बुलाया था और उनको धमकी दी थी के अगर उनहोंने inteligence का साथ नहीं दिया तो उनका कैरियर बर्बाद कर दिया जायेगा .यानी डॉक्टर उस्मान पहले से ही पुलिस की नजर में थे .इस मामले में भारतीय सरकार के तरफ से माकूल जवाब सामने नहीं आया है ,जबके बैंगलोर पुलिस ने इस मामले में भी कोई जानकारी होने से इनकार किया है लेकिन इस खबर के दो दिन बाद 28 अक्तूबर को इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी ऑनलाइन प्रकाशन में एक रिपोर्ट प्रकाशित की है के बैंगलोर पुलिस मोहम्मद अब्दुल मजीद ,डॉक्टर उस्मान गनी खान ,और मोहम्मद शहीद फैसल उर्फ़ जाकिर उर्फ़ ओस्ताद के खेलाफ रेड कार्नर नोटिस जरी करने की तैयारी में है इसके लिए स्थानिये कोर्ट से इन तीनों के खेलाफ गैर जमानती वारंट भी हासिल कर लिए गए हैं .इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में आगे यह भी कहा है के पुलिस सूत्रों ने डॉक्टर उस्मान गनी की सऊदी अरब में गिरफ़्तारी पर कमेंट करने से इनकार किया है लेकिन कहा है के ये केस भी फसीह महमूद के केस से मिलती जुलती है .इसके बाद रोजनाम उर्दू टाइम्स 1 नवम्बर 2012 ने रिपोर्ट दी के सऊदी सरकार ने उस्मान को रिहा कर दिया के उन पर शक बिलकुल गलत निकले फसीह महमूद और डॉक्टर उस्मान दोनों के केस में एक बात मेल खाती है के रेड कार्नर जरी होने से पहले ही सऊदी अरब में गिरफ्तार कर लिया गया सऊदी अरब में उनकी गिरफ्तारी के बाद रेड कार्नर नोटिस जरी किया गया .इसका मतलब है दाल में कुछ काला है .उपरोक्त तथ्यों के आलोक में दिमाग में सबसे पहला सवाल ये है के इस बात की क्या गारंटी है के पुलिस के आरोप सही हैं ?अब पुलिस भरोसा के लायेक नहीं रही ,पुलिस कहती कुछ और है और हकीक़त रहता कुछ आयर है।अभी तक पुलिस ने कई मुस्लिम नौजवानों को पक्के और कट्टर खतरनाक दहशतगर्द बना कर पेश किया है लेकिन जब उनपर मुकादमा तो काबिले के एहतराम अदालत ने उन्हें न सिर्फ सबूत के अभाव में रेहा कर दिया बलके जबरदस्ती इल्जाम लगाने ,मंगढ़ात सबूत पेश करने सबूत बदले के लिए पुलिस की आलोचना भी की .तालीमयाफ्ता मुस्लिम नौजवानों की गिरफ़्तारी हिन्दुस्तान में कोई नई बात नहीं रह गई है,ये सिसिला दरअसल SIMI पर पाबन्दी लगने के बाद से समय समय पर जरी है .शुरू में तालीमयाफ्ता मुस्लिम नौजवानों को सिमी के नाम पर गिरफ्तार किया गया .फिर बम धमाकों के सिलसिले में उनपर देश दरोही के इल्जेमात लगे इसके बाद इंडियन मुजाहेदीन के नाम पर उनकी गिरफ्तारियां की गईं और अब अपने घर वालों की खुशहाली के लिए वतन से कोसों दूर रहने वालों की बारी लाई गई है .दहशत गर्दी के नाम पर मुसलमानों की पढ़ी लिखी नई नस्ल के साथ जो कुछ हो रहा लगता है के वह बहुत गहरी साजिश के तेहत monazzim तरीके से हो रहा है .
दहशतगर्दी और उसके खेलाफ जंग के पहले ही दिन से मुस्लिम कौम यही कहती रही है के अगर मुस्लिम नौजवान अगर वाकई दहशतगर्द हैं ,दहशतगर्दी की हिमायत करते हैं,दहशतगर्दी की बढ़ावा देते हैं या दहशतगर्दी की किसी भी किस्म की मदद करते हैं तो वह हमदर्दी के काबिल नहीं .और अगर वाकई सम्मिलित हैं तो उन्हें उनके लिए सजा मिलनी चाहिए .हमारा कहना सिर्फ इतना है के उन्हें मुजरिम ठहराने से पहले दुरुस्त और भेदभाव रहित पुरे इन्साफ के साथ ये फैसला होना चाहिए के वाकई वह मुजरिम हैं भी के नहीं .अगर उनपर दहशतगर्दी के इल्जाम सही हैं तो उन्हें अपनी सफाई का पूरा हक मिलना चाहिए .और उनकी हेफजत भी होनी चाहिए .यही नहीं अगर वह अदालत से बेकसूर बरी हो गए तो उन पुलिस वालों और इंटेलिजेंस के अधिकारीयों के खेलाफ़ भी सख्त कारवाई होनी चाहिए जिन्होंने बेगुनाह को गिरफ्तार किया और अगर ये साबित होता है के उन्होंने अपने पॉवर का गलत इस्तेमाल करते हुए तासुब और साजिश की बुनियाद पर मुस्लिम नौजवानों के खेलाफ झूठे मुक़दमें बनाये तो उनपर कानूनी करवाई भी होनी चाहये।
आदर्नीये
ADHYAKCH राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग/अध्यक्छ राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग/अध्यक्छ बिहार राज्यामानवाधिकार आयोग
दिल्ली हाई कोर्ट ब्लास्ट मामले में जाँच एजेंसियां निम्नलिखित कारणों से खुद जाँच के दाएरे में आगई हैं
hindustan times ने दिनांक २२/९/२०११ ख़ुफ़िया bureau के हवाले से खबर परकाशित की थी के हमलावर हुजी थे ,काम को ५ लोगों ने अंजाम दिया ,हमलावर सारे के सारे बंगलादेशी थे,५ में से दो को जाँच एजेंसियां 1.मद alla-ur- rahman 32, एवं मौलाना सैफुल शेख ४० के रूप में पहचान की थी, hindustan times में छापी कबर के अनुसार,खबर में यह भी कहा गया था के हमलावर देश से बहार भागने में भी सफल हो गए,वही दूसरी तरफ ईमेल को बुनियाद बनाकर कश्मीर के कुछ नौजवानों के गिरफतारी से जूरी खबर दिनांक २३/९/२०११ के hindustan times में खबर छापी थी,वहीँ तीसरी तरफ २६/११/२०११ को हिंदुस्तान हिंदी २६/११/२०११ को हिंदी में दिल्ली हाई कोर्ट ब्लास्ट मामले में मधुबनी से दो गिरफ्तार सुर्खी से खबर पर्काशित थी,उपरोक्त तथ्यों क्र आलोक में बहुत सारे सवाल उठने शुरू हो गए हैं जिसका जवाब पूरा देश जानना चाहता है.
जब हमलावर बंगलादेशी थे तो फिर जम्मू कश्मीर के युवको की गिरफ़्तारी क्यों?जब ईमेल ही गिरफ़्तारी का आधार बाकि ईमेल भेजने वालों को किस बुनियाद पर झट पट clean cheat दे दिया गया यहाँ यह भी प्रश्न उठाना सवाभाविक है के दिल्ली ब्लास्ट मामले में कुल कितने ईमेल आये थे अनेक ईमेल आने के बावजूद कश्मीरी नौजवानों में जाँच एजेंसियां ने क्या लिया के कश्मीरी नौजवानों को दिल्ली ब्लास्ट से जोर दिया गया सवाल यहभी उठता है के कश्मीरी नौजवानों को अगर कुछ देर के लिए गुनाहगार मान लेने की esthiti में बिहार के युवकों की गिरफ़्तारी कहाँ तक जायज है?दिल्ली ब्लास्ट से जूरी गिरफ्तारियों सम्बंधित एक और मजेदार और हास्यास्पद बात times of india ने दिनांक ९/१२/२०११ को same पेज पर दो खबर पर्काशित किये एक खबर जो बिहार से छापी थी दिल्ली ब्लास्ट में गिरफ्तार आफताब आलम को हिन्दुस्तानी बताया वहीँ दूसरी खबर जो दिल्ली से छपी थी आफताब आलम को पाकिस्तानी करार देते हुए भारत में कैसे आफताब आलम ने परवेश किया पूरी दास्ताँ पर्काशित की थी ,अब जरा सोंचा जाये जब एक हिन्दुस्तानी को साजिशपूर्ण तरीके से पाकिस्तानी बनाया जा सकता तो क्या एक सरीफ को सैतान (आतंकवादी)नहीं बनाया जा सकता?
दैनिक जागरण दिनांक ११.१२.११ ने- मधुबनी से निर्गत हुआ था विवेक का द्रिविंग licence सुर्खी से एक छोटी सी खबर पर्काशित की थी जिसमे लिखा था के दिल्ली पुलिसे ने विवेक मिश्रा को दिनांक २२/११/११ को २ लाख के जली नोट ,फर्जी DL जिसपे किसी कातिल उर्फ़ सज्जन की फोटो लगी बताई गई है, साथ ही खबर में यह भी लिखा था के दिल्ली पुलिसे ने उसके पास से मोहम्मद seraj नाम के युवक का पासपोर्ट भी बरामद होने की बात खबर में लिख्खा है अब जरा सोंचिये के आखिर क्यों इस विवेक मिश्रा को मीडिया एवं दिल्ली पुलिसे ने दुनिया छुपा कर रख्खा?आखिर क्यों मीडिया विवेक की कहानी को छुपा कर रख्खा ?सवाल यह भी है के आखिर विवेक मिश्रा के पहचान से जूरी खबर को दुनिया के सामने न पेश करने का मकसद क्या था?यह सवाल सबसे महापूर्ण है.विवेक मिश्रा के DL पे किसी मुस्लिम युवक का फोटो होना और साथ ही मुस्लिम युवक के नाम का ही बना पासपोर्ट विवेक मिश्रा के पास से बरामद होना साथ उसके पास से जाली नोट का बरामद होने के बावजूद विवेक की कलि करतूत से दुनिया से रूबरू न करना क्या पाप नहीं ?साथ विवेक को हाई लाइट न करने के पीछे विवेक के पास से बरामदमुस्लिम युवको के कागजात को बुनियाद बनाकर कही दिल्ली पुलिस झूठी क्रेडिट लेने के चक्कर में जानबूझकर मामले को कहीं आतंकवाद से तो नहीं न जोर दी,माजी की कहानियां और तजरबे इस मामले में तल्ख़ रहे हैं,इसलिए भरोसा नहीं होता,और सवाल यह भी के दुनिया का ४२० आदमी किसी माशूम आदमी के नाम पर DL और पासपोर्ट बना ले ऐसी इस्थिति में जो बनाया वह गुनाहगार होगा या वह आदमी जिसने फर्जी तरीके से दुसरे का बना लिया ? अब देखना होगा कही माशूम मुसलमानों को फँसाने के गरज से तो कही विवेक मिश्रा मुस्लिम युवको के दस्तावेज अपने पास तो नहीं रखते थे , हमारे देश के सविधान निर्माताओ ने सविधान बनाते समय इस बात का खेयाल रख्खा था के दोषी बच जाये पर किसी माशूम को सजा न मिल पाए मगर अफ्शोश तब होता है जब दोषी तो बच निकलते हैं लेकिन माशूम बेचारा सूली पे चढ़ जाता है,मनवाधिकार आयोगों को एक और काम जरुर करना होगा जिस मामले में माशूम लोग बरी हो गएं हो उन मामलों में उन अफसरों पे उसी धारा के तहत मुकदमा चलवाना चाहिए जिसके के तहत आरोपी आदमी पर दोष साबित होने के बाद चलता,साथ ही उन दागियों का NHRC के साईट पर दोषियों को बचाने वालों, मशुमों को फँसाने वालों का उनके पद नाम ,नाम और करतूतों का पूरा बेयोरा डालना होगा,अगर ऐसा होने लगा तो मेरे खेयाल से इस देश में आतंकवादी गतिविधियाँ खुद बा खुद लगाम लग जायेंगी सवाल पैदा होता है के मशुमो के अधिकारों का हनन देश में और न हो क्या मानवाधिकारों की रक्छा के नाम पर रोटियां तोरने वाले लोग क्या इसके लिए तैयार हैं ?
मोहम्मद कौशर नदीम
सवतंत्र पत्रकार एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता
Suprim court ke purwa neyaeyedhish ewam ewam wartaman press council of india ke chairman katju saheb ka bihar ke sandarbh mein susasan mein sanch ke dawe purntya sach sabit honay lagay hain.
Bihar ke purbi champaran se jo khabray aarahi hai,raj sarkar ki juban band karsakti hai, Bihar ke purbi chmparan mein BPL & ANTYODAY aur IAY mein bhari garbari ki baat parkash mein aarahi hai,purbi chmparan ke kalyanpur block ke manichapra panchayat ke ek samaj sewi sri ramji bhagat ne kuch BPL &ANTYODAY labharthiyon ke kuch kupan ki chaya parti kuch original copy udaharan sawpup bheje hain jinse pata chalta hai ke purbi champaran ke kalyanpur parkhand ke tahat aanay walay grampanchyat mein PDS dukandaron aur jila ke aala adhikarion ki mili bhagat se saal 2008 ke 7 maah yani june,july,august,september,octuber,november,december maah ke is baat ki gawahi deraha hai uprokt jila jila code 11 kupan sankheya 0301467 aise yeto sirf udaharan matr hain aise hajaron kupan garibon haathon mein rahgaye aur anaaj uthao hogeya ,usi parkar wars 2009 mein 10 maah yani january,february,march,may,june,july,august,september,octuber,novemb
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