इंडियन यूनियन मुस्लिम (बिहार ) के नए प्रदेश अध्यक्ष ने पुरानी टीम को भंग कर गठित की प्रदेश स्तर की नई टीम लीग . कई नए चेहरे को दी नई जिम्मेदारी .

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (बिहार ) के नए  प्रदेश अध्यक्ष जनाब तारिक मतीन ने बिहार का कामन संभालते ही पूर्व कमिटी को को भंग कर क्रियाशील लोगों को बहाल करने शुरू कर दिए , उनके द्वारा प्रदेश स्तर की जो टीम गठित की गई है कुछ इस प्रकार है .....

      जेनेरल सेक्रेटरी  सैयद अख्तर हुसैन बेगुसराए ,खजांची एस एम सैफुल्लाह ,उपाध्यक्ष की कमान की कमान फिलहाल चार लोगों के हाथों में सोंपी गई है 1. सफ़दर इमाम कादरी (पटना ) 2 .हाजी मोहम्मद असगर  (सिवान ) भगवान् दास (बांका ) हाजी हसिबुर्रहमान ( मुंगेर ) शामिल हैं
 सचिव की कमान जिन लोंगों को सोंपा गया है उनके नाम कुछ इस प्रकार हैं .मोहम्मद मुस्ताक अंसारी (समस्तीपुर ) सुरेन्दर यादव  (औरंगाबाद ) आले खान ( वैसाली)वासिकुर्रहमान (किसनगंज) सरुर आलम दानिश (मधुबनी ) का नाम भी शामिल है .
     
प्रदेश अध्यक्ष का संपर्क  नंबर .07549807809

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पुलिस के पीपुल फ्रेंडली होने पे उठा सवाल , घटना के 2 4 दिन बाद भी नहीं पहुंची पीड़ितों का हाल चाल और अनुसंधान करने, समस्तीपुर के कल्यानपुर थाना के रतवारा की घटना , सूत्रों के अनुसार पुलिस आरोपियों से मिली हुई

अगर आप ये सोंच रहे  कि  आप के साथ किसी भी प्रकार के वारदात होने और  सताए जाने की स्थितिमें पुलिस के  पास इन्साफ पाने और दोषियों को सजा दिलाने के गर्ज से जायेंगे तो  पुलिस अपना फर्ज निभाते हुए आपका साथ देगी और दोषियों को सजा दिलाने में अहम् भूमिका निभाएगी  तो समझ लीजिये आप ग़लतफ़हमी के शिकार हैं , ये हम नहीं बल्कि एक मामले में पुलिस का रवैया शायद  कुछ इसी बात को कह रहा  ....

  दिनांक 17/03/2013  समस्तीपुर जिला के कल्यानपुर थाना के तेहत आने वाले  गाँव रतवारा  के कुछ दबंगों ने मोहम्मद इरशाद 20 वर्ष ,माँ अफसाना खातून,बहन
नाहिद परवीन और भाई आले को इतनी बेरहमी से पिटाई कि के इन सभी को गंभीर अवस्था में हॉस्पिटल में भर्ती होना  पड़ा ,जिसमें मोहम्मद इरशाद को इस कद्र चोट लगी थी के दरभंगा मेडिकल कॉलेज के इलाज कर रहे डॉक्टरों ने   बेहतर इलाज के लिए पी एम् सी एच के लिए रेफर कर दिया ,  जहां गंभीर रूप से जख्मी  इरशाद ने पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के इमरजेंसी वार्ड नंबर 206 और बेड नंबर 15 पर दिनांक 21/03/2013 को  पीरबहोर थाना (पटना ) के  सहायक पुलिस इंस्पेक्टर जनाब आर के चौहान को अपना फर्द बयान दर्ज कराई , जिसे पीरबहोर थाना ने लेटर नंबर DR .254/2013 दिनांक 22/03/2013 के माध्यम से समस्तीपुर जिला के  कल्यानपुर थाना के थाना प्रभारी को केस ट्रांसफर कर दिया , अब घटना के एक माह होने जा रहे , मगर सम्बंधित थाना के अधिकारियों ने आज तक झांकने नहीं आये हैं ... पीड़ितों को  अब पुलिस  के ऊपर से यकीन भी उठता जा रहा और समाज के सामने ये सवाल उठता जा रहा के क्या यही पुलिस के पीपुल फ्रेंडली होने की निशानी है ?
  

      



बिहार में भरष्टाचार के विरुद्ध मुंह देखी कार्रवाई हो रही ?

                                बिहार में भरष्टाचार के विरुद्ध मुंह देखी कार्रवाई हो रही ?
श्री राम असरे  राय,ग्राम माधोपुर दोविन्द ,प्रखंड कल्यानपुर ,जिला पूर्बी चंपारण  ने दिनांक 27/11/2012 को स्पीड पोस्ट से बिहार के मुखमंत्री जनाब नीतीश कुमार के पास विभिन योजनाओं में लाभ के बदले घुस मांगे जाने की शिकायत भेजी थी ,जिसपर आज तक कार्रवाई न हो सकी , अब सवाल उठाना लाजमी है के आखिर सरकार किसी के शिकायत पत्र पर आखिर कितने दिनों में कार्रवाई करती है ? जनता में इस बात की चर्चा जोर शोर से हो रही के घोटाले बाजों के सुसाशन में गहरी पैंठ कारण ही शायद कार्रवाई न हो रही,अब तो बिहार के मुख्यमंत्री जनाब नीतीश कुमार हे बताएँगे के आखिर मामला क्या है ?
          इसी प्रकार का एक और मामला है मुस्मात दुखनी कुंवर,जो उपरोक्त जिला के फेन्हारा प्रखंड गैबन्धी गाँव से जुडा हुआ है,दुखनी कुंवर ने उनके नाम का इंद्रा आवास फर्जी ढंग से निकाल लिए जाने की शिकायत आरक्षी अधीक्षक पुरबी चंपारण के पास दिनांक 29/12/2012 को की जिस पर आज तक कोई कार्रवाई न हुई जिससे ये सवाल उठने लगा है के कहीं सरकार भरष्टाचार के मामले में मुंह देखी कार्रवाई तो नहीं कर रही ?

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (बिहार) का कमान अब मजबूत हाँथों में,पूर्व लोजपा नेता तारिक मतीन बने बिहार के नए प्रदेश अध्यक्ष , जिम्मेदारी मिलते ही कहा आने वाले संसदिये चुनाव में पार्टी बिहार के सभी सीटों पर उतारेगी अपने उमीदवार,दलितों को भी मौका , सभी सूरक्षित सीटों पर दलित ही होंगे उमीदवार

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने 2014 के पार्लियामेंट्री चुनाव के मद्दे नजर रखते हुए अपने संगठन को बिहार में क्रियाशील एवं मजबूत बनाने की गर्ज से एक बहुत बड़ा उलट फेर करते हुए पार्टी का कमान लोजपा के एक पूर्व कद्दावर नेता और बेगुसराए के बलिया विधान (अब साहेबपुर कमाल)विधान सभा क्षेत्र से 2005 में अपनी किश्मत आजमा चुके तारिक मतीन के हाथों में सोंपी है,पार्टी  ने इन्हें बिहार का नया प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी कई  उम्मीदों के साथ सोंपी है , पार्टी आला कमान ने जनाब मतीन को बिहार प्रदेश अध्यक्ष की कमान इस उमीद के साथ दी है के पार्टी को बिहार की सरजमीन पर नए सियासी समीकरण गढ़ने में कामयाब होगी , जनाब मतीन ने प्रदेश की कमान मिलते ही घोसना की है के , आने वाले संसदिये चुनाव में काग्रेस के जीते हुए सीटों को छोड़ कर बाकी सभी सीटों पर जितने की गर्ज से मजबूत उमीदवारों को मैदान में उतारेगी .
       जनाब मतीन  ने आज एक मुलाक़ात के दौरान बिहार में पार्टी के अजेंडे पर चर्चा करते हुए इस बात का खुलासा किया है  के बिहार के सभी सूरक्षित सीटों पर दलित उमीदवारों को भी मैदान में किस्मत उतारने का भरपूर मौका देगी,जनाब मतीन इसके खातिर अभी से ही सभी संसदिये क्षेत्रों से अच्छे और मजबूत उमीदवारों
की तलाश अभी से ही शुरू कर दी है , इसके लिए प्रदेश अध्यक्ष ने अपना मोबाइल नमबर 07549807809 भी जारी किया है ताके संबधित क्षेत्रों के उमीदवार अभी से ही चुनाव लड़ने की गर्ज से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष से सीधे सम्पर्क बना सकें। प्रदेश अध्यक्ष का सम्पर्क नंबर :-07549807809

जनाब ! कथित इंडियन मुजाहेदीन को इस तरह से समझें

                                     

                       मुदाखेलत (हस्तकक्षेप) सेराज अनवर 

                       उर्दू दैनिक पटना दिनांक 27/0 2 /2013

                      जनाब ! कथित इंडियन मुजाहेदीन को इस तरह से समझें

पटना : "अंजुमन फर्जन्दाने हिन्द" इस नाम से आप किस तरह के संगठन की कल्पना करेंगे ? यही न के ये शुद्ध मुसलमानों पे आधारित संगठन होगी ,अगर आप ऐसा सोंच रहे तो बिलकुल गलत हैं .........इस संगठन के चीफ का नाम है गिरीश जोयाल .......गिरीश जोयाल मुसलमान तो हैं नहीं , लेकिन अंजुमन फर्जन्दाने हिन्द के नाम से संगठन चलाकर देश के लोगों में ग़लतफ़हमी पैदा करते हैं ......गिरीश जोयाल चाहते तो अंजुमन (संगठन का नाम किसी हिन्दू तंजीम पर रख सकते थे ....दिल्चश्प  बात ये  है के अंजुमन फर्जन्दाने हिन्द के बैनर तले "भारत माँ के बेटों का संगठन "  तहरीर है .....इसी तरह की एक संगठन है राष्ट्रीय ओलेमा  कौंसिल ....ओलेमा के नाम से मजहबी पेशवाओं (धार्मिक गुरुओं ) का गुमान होता है ....मजहबी मिल्ली तंजीमों के रहबरों का नाम जब लिया जाता है तो ओलेमा  विशेष रूप से इस्तेमाल किया जाता है .....इस संगठन में आला पदों पर हिन्दू बेरादर बरी तादाद  में विराजमान हैं  तो कथित इंडियन मुजाहेदीन की कमान हिन्दू भाइयों के हाथ में क्यों नहीं हो सकती ? इस मामले में संघ परिवार और आर एस एस काफी शातिर है .....वह खुद तो अपनी संगठन फ्रंट पर चलाते हैं और कई फर्जी संगठनों का बैनर बखूबी इस्तेमाल करते हैं .....जहाँ जिस बैनर की जरुरत हुई उसके नाम से मीडिया को बयान जारी कर दिए .......इंडियन मुजाहेदीन के बैनर से किसी फर्जी मुस्लिम नौजवानों का नाम इस्तेमाल कर बयान जारी कर दी जाये तो क्या ताज्जुब की बात है  ?   यहाँ की ख़ुफ़िया एजेंसी तो गैर जानिबदार और इमानदार तो है नहीं ?  इसकी मोकम्मल तहकीकात कीजाये के इंडियन मुजाहेदीन के नाम से जारी  बयान कहाँ से और किसने भेजे ? अब तो मुस्लिम रहनुमाओं के मूह में भी जुबान आ गई है और वह दिलेरी से पुछ रहे हैं के बताएं के इंडियन मुजाहेदीन का भारत में दफ्तर कहाँ है ?  हैरत वाली बात है के मिनटों बम धमाकों में फलां फलां नाम लेने वाली  एन  आई  ए   की टीम इस चैलेंज से को कबूल करने से कतरा क्यों रही है ?क्यों नहीं बताती के हाँ जनाब इंडियन मुजाहेदीन का दफ्तर भारत के फलाँ शहर में है और उसके रहबर यानी कर्ताधर्ता फलां हैं .....दर असल ,बम धमाकों में मीडिया ,ख़ुफ़िया एजेंसियां और सरकार इतनी जल्दीबाजी में है के वह 2२ कड़ोड़ मुसलामानों को कटहरे में खड़ा करना चाहते हैं ........ एक वाकया देखिये ! इंडिया टी वी  ने हैदराबाद धमाकों से  जुड़े   अपनीक प्रोग्राम में पकिस्तान मुत्तहिदा कौमी मोमेंट के रहनुमा मंजर इमाम की तशवीर दिखाते हुए उन्हें संदेहास्पद दहशतगर्द के तौर पर पेश किया ...... दिल्चश्प बात ये है के इमाम का १ ७  जनवरी को तालेबान हमलावरों ने करांची में गोली मार कर क़त्ल कर दिया था ......पकिस्तान में इस खबर की काफी थू  थू  हप रही है ......पकिस्तान के वजीर ए  दाखेला  के . रहमान मल्लिक ने भारत से इस मुद्दे पर माफ़ी मांगने को कहा है ....इसी तरह से मुस्लिम नौजवानों के नाम गिनाये जा रहे हैं ,हिन्दुस्तानी चैनलों के पास दहशतगर्दी पर कोई ठोस वर्क नहीं है , जो मुह में आया उगलते चले गए , लेकिन इससे हिन्दुस्तान के 2 २  कड़ोड़ मुसलमानों के माथे पर दहशतगर्दी का जो कलंक चश्पा होता है ,जिंदगी भर वह धुलता नहीं .....मगर मुल्क के अन्दर आज कई ऐसे घराने हैं जो इस टीस से रु ब रु हैं .....इसी तरह का एक वाकेया हैदराबाद का भी है ,दिलसुखनगर बम धमाका में पुछ -ताछ के लिए रईसुद्दीन को पुलिस ने हिरासत में लिया ......पुलिस ने कुछ नहीं कहा लेकिन स्थानिये चैनलों पर दिन भर यही खबर चलती रही के बम धमाकों का जिम्मेदार एक सख्श पकरा गया है .....रईसुद्दीन उन २ ६  अफराद में से एक थे जिन्हें

२ ० ० ७ के मक्का मस्जिद बलास्ट में पकरा गया था और उनपर दहशतगर्दी से जुड़े मामले दर्ज किये गए थे ,लेकिन बाद में अदालत नें उन्हें बेकसूर बाइज्ज़त बड़ी कर दिया था  अब धर पकर करने के दौरान पुलिस ने मका मस्जिद में बेकसूर पाए गए ७ नौजवानों समेत कोई ५०  लोगों को हिरासत में लिया .....हलाके उनमें से जेयादातर को छोड दिया लेकिन उन नौजवानों के घरवाले और नगर के मुस्लिम समाज में खौफ की लहर दौर गई है ,रईश ने बताया के मेरी माँ जाहेदा बेगम की तबियत बिगर गई है ....वह डर रहीं हैं जिस तरह पहले मुझे मुझे पुलिस ने जिस्मानी यातनाएं दी थीं और डेढ़ साल तक जेल में मेरा लड़का  था अब फिर वही कुछ होने वाला है .....जब मैंने पुलिस कहा है  के मक्का मस्जिद मामले में हिन्दू दहशतगर्द पकडे गए थे और वह उनकी कार्रवाई थी तो उनहोंने  ने मुझसे कहा के वह जानते हैं किससे क्या पूछना है? मैंने पुलिस वालों से यही पूछा के मुझे यहाँ क्यों लाया गया? जबके मैं मक्का मस्जिद मुकदमा में बकासुर शाबित हो चुका  हूँ ,और सरकार ने मुझसे माफ़ी मांगी है और एक सर्टिफिकेट दी है .......पुलिस वालों का जवाब था के मक्का मस्जिद मामले में जितने लोगों का नाम आय था उन सभी लोगों से पूछ ताछ होगी ,कयोंके पुलिस के काम करने का तरीका यही है , रईश कहते हैं के आप भले ही बेकसूर हैं ,एक बार आप पर दहशतगर्दी का कलंक लग गया तो जिंदगी भर नहीं धुलेगा .रईश की तरह ही सैयद मकबूल ,डॉक्टर इब्राहीम जुनैद भी खुद को खतरे में पा रहे हैं

काबिले गौर बात ये है के तेहाड़ जेल में बंद मकबूल हैदराबाद से नांदेड चला गया और इस वक़्त वह डेल्ही की जेल में बंद है .....डेल्ही पुलिस का कहना है के वह इंडियन मुजाहेदीन का आदमी है और उसने दिलसुखनगर  इलाके का मुआयेना करने की बात कबूल  की है    ......काबुल किया है या नहीं ये पुलिस कह रही है .....इसी तरह पुलिस कितने कबूलनामें पुलिस सामने लाती है और मुसलमानों को जलील करती है ....इंडियन मुजाहेदीन भी मुसलामानों को जलील कराने का हथियार है ......जिस तरह से दुनिया के मुसलामानों पर सिकंजा कसने के लिए अमेरिका अल्कयेदा का गाहे बगाहे इस्तेमाल करता रहता है इसी तरह हिन्दुस्तानी मुसलामानों को नफ्सेयाती दबाव बनाये रखने के लिए इंडियन मुजाहेदीन के नाम से संगठन कोई न  कोई चला रहा है ,जिससे यक़ीनन मुसलामानों का कोई संबंध नहीं है ......मुसलमान अपनी रजिस्टर्ड संगठन नहीं चला रहे हैं तो भला फर्जी तंजीमों में वह इतना    मुशक्कत  और माथा पेची क्यों करें?

           

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जब आतंकवादियों का कोई जात -पात और धर्म नहीं,तो शक के बुनियाद पर भगवा दहशतगर्दों से पूछ ताछ क्यों नहीं?

इस देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है के इस देश का होम मिनिस्टर दहशतगर्दी जैसे मामले पर पहले पक्के सबूत के बुनियाद पर देश की जनता के सामने सच्चाई रखते हुए बयान देता है ,फिर उस बयान के लिए माफ़ी भी उसी संगठन से मांगता है जिसके बारे में मुल्क में दहशतगर्दी के कैंप चलाने ,और आतंकी वारदातों में शामील होने के पुख्ता सबूत पास में होते हैं ,उनके माफ़ी मांगने के अंदाज ने दुनिया के सामने कई गलत पैगाम दिए,पहला ये के हिन्दुस्तान सिर्फ मुस्लिम आतंक के मामले में ही शख्त रवैया रखती है ,हिदुत्व और भगवा आतंकवाद के मामले में रवैया ढुलमुल और बराए नाम है .......क्या मुसलमानों के जरिय इस तरह की मोखालेफत दहशतगर्दी के मामले में की जाती तो हिन्दुस्तान का कोई भी होम मिनिस्टर इतने पुख्ता सबूत रखने बाद अपने बयान को वापस लेते हुए मुसलमानों से माफ़ी मांग लेती?आज मीडिया हैदराबाद ब्लास्ट को अफजल गुरु की फांसी से जोर कर देख  रही ,बलास्ट को बी जे पी और आर एस एस दबाव और होम मिनिस्टर  के जरिये माफ़ी मांगने के बाद हिंदुत्व दहशतगर्द अपनी छवि सुधारने और अल्पसंख्यकों को बदनाम करने के खेयाल क्या नहीं कर सकती ?क्या ये महज इत्तेफाक थी के होम मिनिस्टर शिंदे के जरिये माफ़ी मांगने के दुसरे दिन ही बलास्ट होना ?क्या ये हिन्दुत्त्व और भगवा दहशतगर्दों के जरिये तैयार किसी बड़ी साजिश का हिस्सा नहीं हो सकती ?क्या अब हिंदुत्व दहशतगर्दों के नाम हैदराबाद के दोहरे बलास्ट में आने के बाद क्या शिंदे कारवाई करने की हिम्मत जुटा पाएंगे ?देश के अक्सर लोगों का खेयाल है के भगवा दहशतगर्दी का  नए मामले में आने के बाद शिंदे के रहते किसी कीमत में संभव नहीं ,शायद इसी कमजोरी का फायेदा कुछ हिन्दुत्ववादी ताकतें उठा सकतीं हैं .....जिस प्रकार से शिंदे ने हिन्दुत्ववादी कुवतों के सामने घुटने टेक दिए,मेरे खेयाल से शिंदे साहेब को अपने ओहदे पर बने रहने का कोई हक़ नहीं .....अभी इस देश को मजबूत वजीरे आजम के साथ साथ एक मजबूत होम मिनिस्टर की शख्त जरुरत है ......मगर ये तब तक मुमकिन नहीं जब तक इस देश की जनता जात पात और मजहब के दाएरे से देश के हालात को देखना नहीं छोड़ेगी ओवैसी का नाम जिस तरह सुषमा सौराज ने महज कयास आराई की बुनियाद पर हैदराबाद के दोहरे बम धमाके में घसीटने की कोशिश की वह दुर्भाग्पूर्ण मालूम परता है,कयोंके कयासआराई ही किसी वारदात में ओवैसी  के संलिप्तता का आधार हो सकता है तो ओवैसी से पहले तोगड़िया के खेलाफ कारवाई और जांच के आधार बनते है कयोंके हैदराबाद के सम्बन्ध में तोगड़िया के कई खतरनाक बयान दुनिया ने सुना है ......साइकल और टिफिन को बुनियाद बनाकर जिस तरह इंडियन मुजाहेदीन का नाम घसीटा जा रहा शायद वह लोग असल मुजरिम को पहले की तरह जांच के दाएरे से बचाने की कोशिश कर रहे या सच्चाई से मुह मोरने की कोशिश में लगे हैं ताके जांच एजेंसियों का धेयान भगवा दहशतगर्दी की तरफ जाने से रोका जा सके ......अगर ऐसा नहीं तो फिर मालेगांव ,अजमेर दरगाह और अन्य धमाकों में भगवा दहशतगर्दों के जरिये साइकल और टिफिन बम इस्तेमाल किये जाने के पुख्ता सबूत होने के बावजूद भगवा आतंवाद के रट्टे क्यों नहीं लगाये जा रहे ?जब आतंकवादियों का कोई जात -पात और धर्म नहीं,तो शक के बुनियाद पर भगवा दहशतगर्दों से पूछ ताछ क्यों नहीं?

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ऐसे में अब संघ किस बुनियाद पर कहेगा के मैं ही असल देश भग्त हूँ ?

संघ के नेता अब और जेयदा दिन तक हमारे मुल्क के लोगों को बुरबक और बेवकूफ बनाकर अपनी उल्लू सीधा नहीं कर सकते ,क्योंके केंद्रीय गृहमंत्री के बाद केंद्रीय गृहसचिव ने संघ के दस लोगों के आतंकी कार्यों में संलिप्ता के प्रमाणों के साथ पुष्टि ने देश के जाली वफादारों की कलई खोलकर देश के सामने नंगा कर दिया  अब ऐसे में अब संघ किस बुनियाद पर कहेगा के मैं ही असल देश भग्त हूँ ?
अब देखिये  दैनिक हिन्दुस्तान दिनांक 23/01/2013 की विशेष संवादाता की रिपोर्ट से रूबरू कराता हूँ
 (नई दिल्ली )
  केंद्रीय गृहमंत्री  सुशील कुमार सिंधे की बयान से भले ही कांग्रेस पल्ला झाड़  लिया हो लेकिन उसे गृह सचिव  श्री आर के सिंह का समर्थन मील गया है /
         सिंह ने मंगलवार को कहा के आतंकवादी वारदातों में आर एस एस के दस नेताओं के खेलाफ पुख्ता सबूत और गवाह हैं . यहाँ संवाददाताओं से बात चीत में सिंह ने कहा के समझौता एक्सप्रेस में विस्फोट,मक्का मस्जिद विस्फोट एवं दरगाह शरीफ विस्फोट  की घटनाओं में आर एस एस से जुड़े लोग थे .इनमें जेयादातर गिरफ्तार हो चुके हैं ,गृहमंत्री शुशील कुमार शिंदे के ब्यान पर भाजपा -आर एस एस  ने उनके खेलाफ मोर्चा खोल रखा है ,वहीँ सिंह  ने यह बयान दो मामलों में सरकारी पक्ष को रखने की कोशिश की है .सिंह का बयान जाँच एजेंसियों की रिपोर्ट पर आधारित है , इसमें चौंकाने वाली बात नहीं हैं .


       
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Roznamasahara e-Paper

Published in 21 Jan-2013 | Print Edition of Roznama Sahara

मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार का सुशासन एक बार फिर कटघेरे में खरा होता मालुम दिखाई पर रहा,वजह बना है, इस बार बिहार का education department ,बतायाजाताहै के पूर्बी चंपारणके फेन्हारा पर्खंड के श्री सुनील कुमार पासवान जो एक गरीब और अनुसूचित जाती से सम्बन्ध रखते हैं,इनसे सरकार ने 6 सालो से भी जेयदा समय तक पंचायत शिक्चक (shikchak ) के रूप में काम कराया जब बात वेतन भुगतान की आई तो उन्हें अवैध करार दिया जा रहा श्री सुनील कुमार उपरोक्त जिला एवं पर्खंड के बारा परसौनी में 2003 से ही लगातार काम करते आ रहे,इनके वेतन पे रोक साल 2006 में लगा दी गई ये कहते हु के इनका तीसरा पुनर्नियोजन नहीं हुआ इसलिए इनकी बहाली अवैध है

मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार का सुशासन एक बार फिर कटघेरे में खरा होता मालुम दिखाई पर रहा,वजह बना    है,    इस     बार बिहार का education department ,बतायाजाताहै के पूर्बी चंपारणके फेन्हारा पर्खंड के श्री सुनील कुमार पासवान जो एक  गरीब और अनुसूचित जाती से सम्बन्ध रखते हैं,इनसे सरकार ने 6   सालो से भी जेयदा समय तक पंचायत शिक्चक   (shikchak )   के रूप में काम कराया  जब बात वेतन  भुगतान  की आई     तो       उन्हें अवैध करार दिया जा रहा श्री सुनील कुमार उपरोक्त जिला एवं पर्खंड के बारा परसौनी में 2003 से ही लगातार काम करते आ रहे,इनके वेतन पे रोक साल 2006 में  लगा दी      गई ये   कहते हु के  इनका तीसरा पुनर्नियोजन नहीं हुआ इसलिए इनकी बहाली अवैध है 

यहाँ बताते चले के जो भी शिक्चक (shikchak )para teacher  के रूप में कार्ज कर रहे थे सरकार ने अपने एक आदेश
 के जरिये उन्हें पंचायत shikchak मान चुकी ऐसी हालत में श्री सुनील कुमार पासवान और बाकी पंचायत shikchak      अवैध किस कानून के तेहत हुए?एजुकेशन डिपार्टमेंट के अधिकारीयों को इसबात का जवाब देना होगा अगर कोई कहे के इन सभी को बहुत पहले ही हटा दिया गया था उन्हें  ये साबित करना होगा के किस बुनियाद पर और हटाने का आधार क्या     था? यहाँ बताते चले की पूर्व  एवं वर्तमान BEO      के      रिपोर्ट    ने  साबित  कर दिया है के   साल 2003से 2012तक इनका  काम   संतोष
जनक रहा है इसकी पूष्टि स्कूल adhyakch ने भी की है ,यही रिपोर्ट  त्रिअस्तरिये जाँच टीम जिसे तत्कालीन जिला पदाधिकारी ने गठित
की  थी      टीम    के   रिपोर्ट    पर  सवलिया    निशान  लगाने    के  साथ ही team के लोगों को भी जाँच के दाएरे में लाती है   और    अगर
 मामले की निगरानी जाँच हुई तो टीम के  लोगों को कई  कारणों   से
जेल जाने की नौबत तक आ सकती है ,पहली वजह तो  ये  है  के  जब  DM ने जाँच टीम गठित की   तो  रिपोर्ट   DM  को   ही    आगे की करवाई हेतु सोंपा जाना था,मगर बताया जाता है के इस मामले में  ऐसा नहीं किया गया,क्यों नहीं  किया  गया? मामले की जाँच कर रहे  BIHAR HUMAN RIGHTS COMMISSION    में उठने वाला है,जानकारों की माने तो रिपोर्ट इसलिए नहीं   सोंपी  गई  क्योंके के जाँच team को इस बात का  दर था के जाँच  में   ऐसा    कुछ भी ठोस सबूत  नहींमिल पारही थी  जिससे की श्री सुनील कुमार पासवान और बाकी
पंचायतshikchako को हटाया जा सके,मगर मुखिया चुनाव 2006 की घोसना हो जाने के कारन आचार संहिता औधि में मुखिया पुत्र
और उनकी भतीजी की बहाली रद्द होने की पूरी खतरा थी ,जानकारों  का मानना है के त्रिअस्तारिये जाँच टीम मिली भगत पहले से थी इसी वजह कर मुखिया और उसके रिश्तेदारों को बचाने के लिए रिपोर्ट को दबा  दिया  गया,अब जबके के मामले की जाँच बिहार मानवाधिकार आयोग कर रहा त्रिअस्तारिये
जाँच रिपोर्ट का  समाप्त हो चूका , बिहार मानवाधिकार आयोग के
आदेश के आलोक में होरहे जाँच के बाद अपना गला फंसता देख वरिये पदाधिकारियों ने  मुखिया के   रिश्तेदारों की  बहालियों को  रद्द   कर दिया है,सवाल यहाँ ये पैदा होता है के जब पूर्व BEO ने बहाली को गलत
साबित  कर चुकी थी  उस  समय  बहाली  क्यों  नहीं रद्द की गई ?जिस अवैध बहाली को 2007और उससे पहले रद्द होनी चाहिए  थी  वह
2012में क्यों हो रही ? अब जबके बहाली  रद्द हो चुकी ऐसी  हालत  में मुखिया  पर FIR  दर्ज क्यों  नहीं  हो  रही    यहाँ    बताते    चले    की
त्रिअस्तारिये जाँच टीम को और कुछ न मिला तो श्री सुनील कुमार
पासवान  को  मुखिया के जरिये  स्कूल  के  प्रधानाचार्ज   के   जाली
hastakchar को आधार बनाकर हटाने सही साबित करना भी मुखिया
और जाँच टीम की मिली भगत को दरसा रहा,चुके संबधित  HM   ने
अपने      hastakchar          को      जाली       करार       देते         हुए
कानूनी करवाई की मांग भी की है  इसके   बावजूद       जालसाजों   पे
कारवाई का नहोना  DEO ऑफिस के कारनामों को उजागर करती है
के पुरबी चम्पारण के deo ऑफिस गरीब और इमानदारों के लिए किस तरह दुश्मन की भुमिका निभाती तो दूसरी तरफ अमीर और पैसा वालों
के लिए किस तरह  दोस्त की भूमिका में खरी रहती है?

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Roznamasahara e-Paper

Published in 15 Jan-2013 | Print Edition of Roznama Sahara

सूत्रों के अनुसार अगर पुलिस गहराई से पूछ ताछ करे तो चकिया के आस पास सरकारी स्कूलों में में पिछले 7 से आठ साल में हुए तमाम मिड डे मिल की चोरी की घटनाओं पर से प्रदा उठ जाएगा,मगर ऊँची पहुँच रखने वालों पे क्या पुलिस हाथ डाल पाए गी ,ये सबसे बड़ा सवाल है ,एक RTI के आवेदन पे दिए गए जानकारी के अनुसार 10 सालों में सिर्फ मिड डे मिल की सैकरों चोरी की घटनाएं हुईं पूर्बी चंपारण में ,गिरफ्तारी सिर्फ 2 मामलों में ,इससे अंदाजा लगाया जा सकता है के इस मामले में क्या होगा?

 सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चकिया पुलिस(पूर्बी चंपारण)  ने जिन शातिरों,जो सकारी अनाज अवैध ढंग से खरीद बिक्री करते थे ,गरीबों के बच्चों के मिड डे मिल,अन्त्योदय ,बी पी एल धारकों के अनाजों को सरकारी अधिकारियों की मिली भगत से अंजाम देते थे ,जब मामले को www .biharbroadcasting .com ने खुलासा किया तो छोड़ दिए गए लोगों को पुनः गिरफ्तार कर लिए जाने की सूचना है ,सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस ने चकिया थाना के मनीछपरा  पंचायात के वार्ड नंबर एक के एक प्रभावसाली  वैक्ति को दिनांक 15.01/2013 को गिरफ्तार किया ,बाद में पता नहीं क्या हुआ उसे छोड़ दिया ,इससे इलाके के लोगों में हैरत होने लगी लोग सोचने लगे की जिस आदमी के घर से जिस पुलिस ने सैकड़ों तन अनाज बरामद करती है ,और ऐसे लोगों को छोड़ देती  है .तब मैंने 17.1.2013 को सोशल मीडिया पे खबर अपडेट की गई ,उसके बाद आरोपी पुनः पकर लिए गए।यहाँ बताते चले कि जब 16.01.2013 को जब थाना प्रभारी बारा चकिया से बात करने के तीन बार कोशिश की और आरोपियों के सम्बन्ध में जानने की कोशिश की ,बार बार ,दो दो घंटे का मोहलत लेते रहे,तब मुझे दाल में कुछ काला नजर आया .छेत्र  के लोगों को फोन लगाकर पूछा तो पता चला के  पूरा दाल ही काला है,और समझ में सारी कहानी आ चुकी थी के चकिया पुलिस बार बार दो दो घंटे के मोहलत क्यों मांग रहे? सूत्रों के अनुसार अगर पुलिस गहराई से पूछ ताछ करे तो चकिया के आस पास सरकारी स्कूलों में में पिछले 7 से आठ साल में हुए तमाम मिड डे मिल की चोरी की घटनाओं पर से प्रदा उठ जाएगा,मगर ऊँची पहुँच रखने वालों पे क्या पुलिस हाथ डाल पाए गी ,ये सबसे बड़ा सवाल है ,एक RTI  के आवेदन पे दिए गए जानकारी के अनुसार 10 सालों में सिर्फ मिड डे मिल की सैकरों चोरी  की घटनाएं हुईं पूर्बी चंपारण में ,गिरफ्तारी सिर्फ 2 मामलों में ,इससे अंदाजा लगाया जा सकता है के इस मामले में क्या होगा?
 www.biharbroadcasting.com 

शातिरों को बचाने की शाजिश ?



SUTRO KE ANUSAR,CHAKIA POLICE(MOTIHARI)NE MANICHAPRA VILL. ME DT.15.1.13 KO CHAPEMARI KR SAIKRO TAN SARKARI CHAWAL JIS AADMI KE YAHAN SE BARAMAD KI THI,SARKARI ADHIKARIYO AUR LAMBI SEYASI PAHUCH RAKHNE WALE SAFEDPOSHO KI SANLIPTA KE KARAN MAMLE KI LIPA POTI KE PARYASH TEZ HO GAYE HAIN.SUTRO KE ANUSAR JISWAIKTI K YHAN SE SARKARI CHAWAL BARAMAD KI GAI HAI US GAO K SCHOOL ME KAI BAR CHORO NE MDM KE ANAJO PR HATH SAF KARNE KI GHATNA BHI HO CHUKI HAI JISKI FIR CHAKIA THANA, se साससससससस क्यू ME DARJ BATAI JATI HAI.POLICE KI SITHIL RAWAIYA K KARAN MAMLE KA KHULASA ABTK NA HO SAKA HAI.AB UMID JAGI THI PR PANI FIRTA DIKH RAHA HAI

पंथनिरपेक्षता का धुंधला पथ

                                                                 कुलदीप नैयर
                                                      पंथनिरपेक्षता का धुंधला पथ
मुसलामानों के संदर्भ में भाजपा ने इस बार कम आक्रामक रुख अख्तेयार किया है .इसके दो कारण हो सकते हैं ,पहला तो यह के 2014 में होने वाले संसदीय चुनाव के बाद की स्थिति पर पार्टी की नजरें टिकीं हैं ....लोकसभा में बहुमत के  लिए उसे पंथनिरपेक्ष पार्टियों के साथ की जरुरत पड़ेगी ...ऐसे में मुसलामानों के खेलाफ कोई भी प्रतिकूल प्रतिक्रिया पार्टी के लिए महंगी साबित हो सकती है और समर्थ  गठबंधन प्रस्तुत करने के मौके को खतरे में डाल सकती है .दूसरा कारण यह हो सकता है आज जब वामपंथी पार्टियां भी उदार हिंदुत्व अपनाने लगी है ,ऐसे में भाजपा उदार दिखने का साहस कर सकती है .पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस लगातार पंथनिरपेक्ष पहचान खोती जा रही है .अगर किसी प्रमाण की जरुरत है तो गुजरात का ताज़ा विधानसभा चुनाव इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है .2002 में हुए गुजरात दंगों को चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने मुद्दा नहीं बनाया .कांग्रेस ने ऐसा माना के चुनाव प्रचार के दौरान मुसलामानों की हत्या का सवाल उठाने से हिन्दू वोट खिसक जायेंगे .कांग्रेस की इस रणनीति से पुरे देश के मुसलामानों को धक्का लगा ,क्योंके कमोबेश वे कांग्रेस को वोट देते आये हैं .....ऐसे में मुसलमानों के सामने यह तै करना मुश्किल भरा काम था कि कौन सी पार्टी सेक्युलर है ?
       

       हिन्दू आतंकवाद का मुकाबला मुस्लिम आतंकवाद नहीं कर सकती .कयोंके मुसलामानों की संख्या कम है .मई इस बात को महसूस करता हूँ की कुछ मुसलामानों ने हताशा में में हिंसा का सहारा लिया है ,लेकिन बजरंग दल,राम सेना और विश्व हिन्दू परिषद जैसे हिन्दू संगठन चाहते हैं के मुसलमान इस रास्ते को अपनाएं .मालेगांव ,अजमेर और हैदराबाद के बम विस्फोटों में कुछ हिन्दू संगठनों का दोष साबित हो चुका है .जैसा के पुलिस हमेशा किया करती है ,इन विस्फोटों को लेकर भी शुरू में शक मुसलामानों पर ही हुआ था और कुछ मुसलमान युवकों को गिरफ्तार भी किया गया था ....हैदराबाद में पुलिस ने उनकी पिटाई की थी ,लेकिन विस्तार से जांच होने पर खुलासा हुआ के इन विस्फोटों के पीछे हिन्दू संगठनों का हाथ था ........


        हकीकत में मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी इस समुदाय के लिए सबसे बड़ी चिंता का वषय थी .इसके समाधान के लिए एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिला .इस प्रतिनिधिमंडल में हिन्दू भी  शामिल थे .प्रधानमंत्री ने कार्रवाई का आश्वासन दिया और इसके बाद मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी कम हुई ,लेकिन मुस्लिम समुदाय अभी भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं है .और अभी भी अपने मुकदमों की सुनवाई का इन्तेजार में कई मुस्लिम युवक जेलों में बंद हैं ,जिस समय का इस्तेमाल वे पढाई में या अन्य किसी  उपयोगी
काम में कर सकते थे उनका वह समय जेल में बीत रहा है .अगर जवाबदेही नाम की कोई चीज होती तो पुलिस इस तरह मनमानी नहीं करती .जब कोर्ट ने देख लिया के इनके खेलाफ मामला नहीं बनता ,तब जाकर युवकों की रिहाई हुई .तो फिर आखिर गलती किसने की ?अगर इस धारणा को खात्म्कारना है के मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी बिना किसी अपराध या बेवजह हुई तो दोषियों के खेलाफ कार्रवाई होनी चाहिए .हिन्दू और मुसलामानों के बीच बढ़ती दूरी को लेकर मैं ज्यादा चिंतित हूँ .सच्चाई यह है के इनके बीच सामाजिक लगाव नहीं .साथ ही आपसी समझबूझ की भी कमी ..संतोष की बात बस इतनी है के गुजरात नरसंहार के बाद कोई दूसरा बड़ा दंगा नहीं हुआ है ,लेकिन इसका ये मतलब नहीं के देश साम्प्रदाइक्तता पर काबू पाने में कामयाब हो गया है .असम ताज़ा उदहारण है .पिछले दिनों मैं  केरल में था .वहाँ मैंने वामपंथियों को भी साम्प्रदाइक होते देखा .यह ऐसा राज्य है जहाँ हिन्दू और मुसलमानों की तरह मेलजोल की कीमत पर इसाई भी अपनी बांह फैला रहे हैं .हैरत की बात यह है के मजहबी वर्चस्व बढ़ने पर सर्वश्रेष्ठ आर्थिक विचारधारा भी विफल हो रही है .उत्तर प्रदेश में अनगिनत छोटे मोटे दंगे हुए हैं .मीडिया में इनकी खबरें नहीं आई हैं .सच्चाई यह है के जब तक दंगे का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आ जाता ,मीडिया में खबरें नहीं आती है .

          दूसरी तरफ एक उदाहरण दिल्ली का है ,जहाँ 23 साल की लड़की के साथ हुए सामूहिक बलात्कार के खेलाफ सभी जाति धर्म के छात्र आगे आए बर्बरता का विरोध करने के सवाल पर वे एक हुए .और दूसरी तरफ एक गलत रास्ते से जुलूस निकलने पर तलवारें निकल आईं .सियासी तंजीमों को जब भी लगता है के इससे चुनावी या कोई और लाभ हो सकता है तो वे आग में भी घी डालने का काम करते हैं .बद्किश्मती से आजादी के 65 सालों बाद भी पंथनिरपेक्षता की जड़े मजबूत नहीं ही पाई हैं .इससे भी बड़ी समस्या ये है के समाज में सामंजस्य  की भावना ही खत्म होती जा रही है .पंथनिरपेक्षता को बचाने का एक रास्ता है यह के इसे नुक्सान पहुंचाने वाले हर एक आदमी को सजा दी जाए ....लेकिन विवादित ढांचा गिराने वालों को अबतक सजा नहीं दी गई  है ....इसी तरह मुस्लिम विरोधी दंगों के मामले में नरेंदर मोदी पर हाथ नहीं डाला गया है ....सहूलियत और वेयाओहारिकता आड़े आजाती है और दोषी खुले घूम रहे हैं .लेकिन कल्पना कीजिये मुसलामानों पर इसका क्या असर पड़ा है .भाजपा 1984 के दंगों में सिखों की हत्या के लिए कांग्रेस की आलोचना करती है और इसके जवाब में कांग्रेस गुजरात की घटनाओं की याद दिलाती है .बहस के लिहाज से दोनों घटनाएं अहम हैं ,लेकिन भारत की पंथनिरपेक्षता का क्या होगा ?

        साम्प्रदैकता को वैधता मिलने पर मैं असहज महसूस कर रहा हूँ .अधिक से अधिक लोग उन्मादी बनते जा रहे हैं .यहाँ तक की पुलिस या दुसरे सुरक्षा बल भी इससे मुक्त नहीं हैं ,जबके अगर लोकतंत्र को जिन्दा रखना है तो नफरत आयर तरफदारी को मिटाना होगा .हैदरबाद में माहौल को साम्प्रदाइक बनाने के मकसद से अकबरुद्दीन ओवैसी ने जो भड़काऊ भाषण दिया,उसे सुनकर मई अचंभित हूँ .उसके समर्थन में भीड़ ने जो तालियाँ बजाएँ उससे उतना ही हैरान भी हूँ .भारत जैसे मुल्क में उनके लिए कोई जगह नहीं है ,कयोंके ऐसे लोग पंथनिरपेक्षता की जड़ को काट रहे हैं .सीमाएं चाहे जो भी हों ,भारत पंथनिरपेक्षता के पथ पर आगे बढ़ने को बेताब है इस असल बात से समझौता नहीं हो सकता

उपरोक्त लेख दैनिक जागरण के दिनांक 16.1.2013 में प्रकाशित अंक से लिया गया है