patna blast ka gujrat connection taftish ki darkaar


पटना ब्लास्ट का गुजरात कनेक्शन
पटना के इतिहासिक गाँधी मैदान में भारतीय जनता पार्टी की हुँकार रैली के दौरान होने वाले आठ सिलसिलेवार बम धमाके के बाद इसकी तफ्तीश राष्ट्रीय जांच एजेंसी अथवा एन आई ए के सुपुर्द किये जाने के फैसले को बेला सुबह सही दिशा में उठाया गया एक सही क़दम करार दिया जायेगा । कयोंके एन आई ए इस तरह के मामलात और वक़ेआत की जाँच परताल में काफी महारत और तजरबा रखती है; लेकिन इन बम धमाकों को लेकर जिस तरह की बयानबाजी और सियासी गुटबंदी शुरू हो गई है उसको देखते हुए ये शक पैदा होता है के जाँच एजेंसी शायद ही कीसी सही नतीजे पर पहुच सके । ऐसे तो स्थानिये पुलिस ने ही धमाके के दिन ही यानी इतवार को पटना जंक्शन पर जख्मी हालत में इम्तेयाज अंसारी और tarique को गिरफ्तार करने के बाद इस मामले में संलीप्त कथीत इंडियन मुजाहेदीन के 6 कथित लोगों की निशानदेही करने में कामयाबी हासिल करने का दावा किया है ' लेकिन इन गिरफ्तारियों और बम धमाकों की नौइयत और उद्द्येशों को लेकर विभिन स्थानिये अख्बारात के पन्नो और टेलीविज़न चैनलों पर जो details पेश की जाती रही हैं उनको पढ़ने और सुनने के बाद बिहार पुलिस के दावे में कई तरह के वीरोधाभासी बातों का पता चल रहा है । हालाके मंगल को रांची में एन आई ए के अलावा पटना पुलिस ; बिहार पुलिस और रांची पुलिस की टीम ने तहसीन ; हैदर ; नोमान ; और तौफीक की तलाश में कई जगह छापे मारी लेकिन उसको कोई कामयाबी नहीं मिली। एन आई ए के मुताबिक़ पटना के गाँधी मैदान में हुए बम धमाकों में indian mujahedin के जिस दहशतगर्द का हाथ होने का साबुत मिल रहा है वह बिहार में समस्तीपुर जिला के कल्यानपुर थाना के मन्यारपुर गाँव का रहने वाला तहसीन उर्फ़ मोनू है ' जो आई एम् मास्टरमाइंड यासीन भटकल की गिरफ्तारी के बाद से इस तंजीम को सरगना की हैसियत से चला रहा है । तहसीन की गिरफ्तारी पर एन आई ए ने दस लाख रूपये का नक़द इनाम का एलान कर रख्खा है लेकिन वह अपनी चालाकी से अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बचता रहा है । जांच एजेंसियों का कहना है के tarique और इम्तियाज अंसारी ने अब तक पुलिस को जो सूचना उपलब्ध कराई है उसकी बुनियाद पर ये वाजेह हो गया है के तहसीन ने ही इस बम धमाके का योजना तैयार किया था।ऐसे तो एन आई ए ,एन एस जी और बिहार पुलिस के अनेकों branch जैसे civil पुलिस के अलावा रेलवे पुलिस वगैरह भी इस सनसनीखेज वाकेया की तफ्तीश में शुरू दिन से ही लगी हुई है और कई कथित दहशतगर्दों की गिरफ्तारी का दावा भी किया जा रहा है और इन जेरे हिरासत दहशतगर्दों की तरफ से किये गए खुलासे के बुनियाद पर पुरे मामले की जांच में काबिले लिहाज पेश्रफ्त का एलान भी सामने आ रहा है लेकिन हैरत की बात ये है के बिहार का कोई भी आला पुलिस अफ़सर या एन आई ए का कोई जिम्मेदार इस बारे में खुल कर बात करने के लिए तैयार नहीं देखाई दे रहा है । आखीर इसकी वजह क्या है ?क्या इन तमाम जाँच एजेंसियों में कोई ताल मेल नहीं है? या फिर साड़ी एजेंसियां महज पुराने रेकॉर्डों के बुनियाद पर कुछ लीगों को पकड़ने में कामयाब हो गई हैं ?लेकिन उनको इस संगीन जुर्म से जोड़ने के लिए कोई ठोस बुनियाद या कोई ठोस साबुत तलाश करने में नाकाम रहीं हैं ? जैसा के मैंने पहले ही कहा के जांच agensiyon की अबतक की हसुल्याबिओन की बाबत मीडिया में जो खबर आई हैं उसमें बहुत ही वीरोधाभास पाया जा रहा है । पटना के एस एस पी ने दावा किया था के इन बम धमाकों का मकसद खुद नरेंदर मोदी को निशाना बनाना नहीं था कयोंके सारे के सारे बम स्टेज से काफी दूर फीट किये गए थे , लेकिन कुछ अख्बारात में इंटेलीजेंस या जांच एजेंसियों के हवाले से खबर पेश की गई है के हमलावरों का असल मकसद नरेंदर मोदी को ही निशाना बना था और इन्तेहपशंदों ने इसके लिए काफी दिनों से प्लानींग कर रख्खी थी । report के मुताबीक इम्तियाज अंसारी ने जो जो इन्कसफात किये हैं उसके मुताबीक इन्तेहपशंदों ने मोदी के लिए मछली नंबर 5 का कोड फीक्स कर रख्खा था जबके शिवसेना के पूर्व chief बाल ठाकड़े के लिए मछली नंबर 1 कोड तैय कर रख्खा था । सवाल ये है के क्या इंडियन मुजाहेदीन के ये कथीत दहशतगर्द hindustaan में रहते हुए इस हकीक़त से अनजान हैं के बाल ठाकड़े दुनिया से कब के वीदा हो चुके हैं? इसी तरह की खामियां हर report में नजर आये गी जिससे पता चलता है के ये सारी की सारी report फर्जी और मनगढ़ंत हैं जिसको प्रकाशित करने का मकसद एक विशेष समुदाय के खेलाफ गलतफहमियां फैलाना और समाज में सम्पर्दैकता की हवा देना है । वैसे मेरा खेयाल है के रा सरकार को कोंग्रेस के उन दो बड़े leaders दीग वीजय सींह और सुबोध कांत सहाए के उस बयान पर धेयान केंद्रीत करनी चाहीए ,जिसमे ये दावा किया गया है के भारतीय जनता पार्टी ने नरेंदर मोदी को हीरो बनाने के लिए ये धमाके कराये हैं । इस बयान का आधार क्या है ? इसकी गहराई से छानबीन होनी चाहिए ,हालाके अफ़सोस का मोकाम ये है के खुद जनता दल (यू )

के लीडर इस मामले में मुद्दई सुस्त और गवाह चुस्त वाली policy पर अमल कर रहे हैं । नरेंदर मोदी की हिफाजत के मामले में कोताही और लापरवाही बरतने का इल्जाम वजीरे आला नीतीश कुमार पर लगाया जा रहा है लेकिन सवाल ये है के मोदी की आमद से पहले गुजरात के कई आला पुलिस अफसर सारे हिफजती बंदोबस्त का खुद जाएजा लेने के लिए दो दिन पहले से ही पटना आये हुए थे और उसे ए टू जेड इन्तेजामात की निगरानी से मोकम्मल तौर पर वाबस्ता रहे थे , आखीर उनहोंने कहाँ कोताही बरती या उनसे कहाँ चुक हुई ? कहीं गुजरात के उन पुलिस अफ्सरोंने ही अपने सियासी आका के इशारे पर कुछ इस तरह की गड़बड़ तो नहीं करवादी थी ताके बी जे पी को नितीश कुमार और उनकी हुकूमत के खेलाफ प्रोपेगंडा करने के साथ साथ रियासत के अल्पसंख्यकों को बदनाम करने का एक अछ्छा हथीयार हाथ आ जाए ? गुजरात पुलिस वैसे भी फर्जी एनकाउंटर ,सम्पर्दाइक दंगों में अपनी संलिप्तता के लिए कुख्यात रही है । इसे महज इत्तेफाक नहीं करार दिया जा सकता के इस वक़्त गुजरात पुलिस के 30 छोटे बड़े अफसर विभिन तरह के दंगों के मामले में खुद अपने ही राज के विभिन जेलों में बंद हैं । फर्जी एनकाउंटर में मोदी के सियासी विरोधियों का सफाया करने और मासूम लोगों को कसूरवार और दहशतगर्द साबित करने के लिए नाजायेज हथियार और गोला बारूद उनके करीब प्लांट कर देने के अनेकों मामले में गुजरात पुलिस की संलिप्तता की बात प्रकाश में आ चुकी है ।वैसे भी मोदी ने नितीश कुमार को अपना सबसे बड़ा सियासी दुश्मन समझते हुए उनके खेलाफ जिस तरह की मोकम्मल सियासी जंग छेड़ रख्खी है इसमें वह किसी भी हद तक जा सकते है । काबिले गौर बात ये है के मोदी पार्टी सतह पर तो नीतीश कुमार के खेलाफ कट्टर विरोधी हैं ही ,उनसे उनकी दुश्मनी जाती नौइयत की भी हो गई है कयोंके मोदी की उमिद्वारी को लेकर नितीश कुमार ने ही बी जी पी से अपना नाता तोडा है ।नरेंदर मोदी पर इक्तेसादी और पुर तसद्दुद सेयासत करने का इल्जाम भी लगता रहा है , चुनान्चे मेरा खेयाल है के पटना बम धमाकों के गुजरात कनेक्शन की भी पूरी पारदर्शिता और गहराई के साथ छान बीन की जानी चाहीये । यहाँ पर ये बात भी गौर करने के काबिल है के पटना पुलिस के मुताबीक गाँधी मैदान में जो कई बम मीले हैं उस पोलीथीन पर गुजरात का पता लीखा हुआ है ।जांच एजेंसियां अभी तक वही पुरानी घिसी पीटी डगर पर अपनी तफ्तीश को आगे बढाने की कोशिश में लगीं हुई हैं जबके उन्हें गुजरात के उन तमाम पुलिस अफसरों से जो पटना आये थे सख्ती के साथ पूछ ताछ करनी चाहिए और ये पता लगानी चाहिए के गुजरात से कुछ दुसरे लोग भी किसी ख़ास मकसद के लिए पटना तो नहीं बोलाए गए थे ।मेरे खेयाल में जब तक इस मामले की हर पहलु से जांच नहीं की जायेगी उस वक़्त तक किसी सही नतीजे पर पहुंचना बहुत ही मुश्कुल होगा ।आम तौर पर देखा गया है के जब भी और जहां भी बम धमाके होते हैं जांच एजेंसियां एक ख़ास फ्रेम और सीमीत फ्रेम वर्क करके छोड़ देती है जिसके नतीजे में जेयादा तर मामले में बेक़सूर नौजवान ही कानून के शिकंजे में फंसते हैं और आरोपी साफ़ तौर से बच जाते हैं। (मसुदुल रब -urdu dainik pindaar पटना दीनांक 1/11/2013)

जाँच पे उठे सवाल ? क्या कोई जांच अधिकारी आरोपी के साथ नाश्ता पानी कर सकता है ?अगर नहीं तो इस मामले के जांचकर्ता के खेलाफ सरकार कौन सी कार्रवाई करने जा रही ?

 जाँच पे उठे सवाल ? क्या कोई जांच अधिकारी आरोपी के साथ नाश्ता पानी कर सकता है ?अगर नहीं तो इस मामले के जांचकर्ता के खेलाफ सरकार कौन सी कार्रवाई करने जा रही ?
क्या जाँच है ?जाँच अधिकारी ने घोटालेबाजो संग  नाश्ता पानी , मेजबानी का स्थल था , घोटाले के आरोप में घीरे मैट्रिक फेल झोला छाप डॉक्टर का दरवाजा. लोगों में चर्चा बन गया है यह नायाब जाँच का तरीका।

क्या है मामला ?पुरबी चंपारण के मनिछाप्रा पंचायत जो पुरबी चंपारण के कल्यानपुर प्रखंड के तेहत आता है। उपरोक्त पंचायत में रोड सोलिंग और पी सी सी के तेहत हुए कामो में भारी अनियेमित्ता की बात प्रकाश में आने के बाद- डी डी सी पुरबी चंपारण ने सीओ को जांच के आदेश 2 माह पूर्व ही दिए थे , तब से सीओ कल्यानपुर डी डी सी के आदेश की खिलली उड़ाते हुए वहां जाने से परहेज कर रहे थे. आशंका जताई जा रही है के जांचकर्ता  आरोपियों संग पहले से ही मिली भगत किये हुए थे,इधर biharbroadcasting.com के जरिये पुरे मामले पर गहराई से नजर रख्खे हुए था ,

जब सीओ को लगा के पानी सर के ऊपर जा रहा , कहीं घोटालेबाजों के साथ देना महंगा न पर जाये , इसी बीच जाँच की जिम्मेदारी , डी डी सी ने दिनांक २३/१०/२०१३ एस डी ओ  चकिया को  थमा दिया . आशंका जताई जा रही के चकिया एस डी ओ ने जाँच खुद न करके  जाँच के नाम पर खानापूर्ति करने हेतु पुनः सी ओ  को ही थमा दिया।  अगर ये सही है तो क्या सी ओ के किरदार को कितना दुरुस्त कहा जायेगा?

 डी डी सी की बात पे यकीन किया जाये तो एस डी ओ  बारा चकिया ने बहुत बड़ा झूठ बोला , कयोंके जब डी डी सी ने 23 /10 /2013  को सी ओ छुब्ध होकर एस डी ओ साहेब को जाँच की जिम्मेदारी जब सोंप चुके थे ,आज जब उनसे डी डी सी के बयान का हवाला देते हुए पूछा गया के डी डी सी  ने उपरोक्त मामले की जाँच का जिम्मा सोंपा है उसका क्या हुआ ? उन्होंने साफ तौर से सफ़ेद झूठ बोलते हुए कह गए के किसी भी प्रकार का आदेश न टेलीफोनिक या पत्र के जरिये ही प्राप्त हुआ है , हाँ ऐंठते हुए इतना सलाह दे दिए की  आर टी आई से सूचना  प्राप्त कर सकतें हैं। जब जवाब में कहा गया के आर टी आई से सूचना तो नहीं मांगुगा  अलबत्ता  आपके कथनी को biharbroadcasting.com  बगैर किसी एडिट के जरुर प्रकाशित करेगा , इतना कहना था के उन्होंने फोने काट दिया www.biharbroadcasting.com

कल्यानपुर (पूर्वी चंपारण ) के अंचलाधिकारी को महंगा पर सकता है डी डी सी के आदेश को न मानने का मामला ,नप सकते हैं कल्यानपुर के अंचलाधिकारी , डी डी सी पुर्वी चंपारण ने दिए कार्रवाई के संकेत , डी डी सी के अनुसार मामले की जांच करेंगे चकिया एस डी ओ।

कल्यानपुर (पूर्वी चंपारण ) के अंचलाधिकारी को महंगा पर सकता है डी डी सी के आदेश  को न मानने का मामला ,नप सकते हैं कल्यानपुर के अंचलाधिकारी , डी डी सी पुर्वी चंपारण ने  दिए कार्रवाई के संकेत , डी डी सी के अनुसार मामले की जांच करेंगे चकिया एस डी ओ।

क्या है मामला ? पूर्बी चंपारण के कल्याणपुर प्रखंड के manichapra पंचायत के वार्ड नंबर 1 की रोड सोलिंग में भड़ी गड़बड़ी की बात प्रकाश में आई थी , जिसके बाद DDC  पुर्बी चंपारण ने मामले की जिम्मेदारी अंचलाधिकारी कल्यानपुर को दिए , मगर सीओ कल्यानपुर लगभग 2 माह से ऊपर से टहला रहे थे , कल यानि दिनांक २२/१०/13 को कड़ाई के साथ मामले का भौतिक सत्यापन कर के जांच रिपोर्ट देने को कहा गया था , मगर घोटाले बाजों से मीली भगत जिसकी आशंका जताई जा रही नहीं गए , कल जब सीओ से बात की गई तो बोले आज जरुर जायेंगे पर आज दिनांक २३/१०/2013 को भी नहीं गए , शर्म से पानी पानी डी डी सी ने जाँच के आदेश अब एस डी ओ को देने के साथ ही , सीओ के खेलाफ भी जांच के आदेश देने के संकेत दिए हैं के आखिर क्या वजह हुई के दो माह गुजर जाने के बाद भी आदेश का पालन उनहों ने नहीं किया ? जांच इस बात के भी होने की समभौना जताई जा रही के के उनके मोबाइल के कॉल डिटेल्स की जाँच भी होगी के  इस बीच घोटाले बाजों के संपर्क में थे या नहीं?  www.biharbroadcasting.com

www.biharbroadcasting.com: होशियार दोस्तों होशियार , पटना के महेंरू के गाँधी...

www.biharbroadcasting.com: होशियार दोस्तों होशियार , पटना के महेंरू के गाँधी...:  होशियार दोस्तों होशियार , पटना के महेंरू  के गाँधी चौक के पास एक दूकान में बिक रहा डुप्लीकेट  मोबाइल , टैब , एंड मोबाइल ? Bihar Broadca...

होशियार दोस्तों होशियार , पटना के महेंरू के गाँधी चौक के पास एक दूकान में बिक रहा डुप्लीकेट मोबाइल , टैब , एंड मोबाइल ?

 होशियार दोस्तों होशियार , पटना के महेंरू  के गाँधी चौक के पास एक दूकान में बिक रहा डुप्लीकेट  मोबाइल , टैब , एंड मोबाइल ?
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patna ke mahendru mein isthit gandhi chauk ke paas bik raha naami giraami companies ke duplicate mobile ,tab, yakin na hoto padhein raam kahani............aago dosto jago ! Agar ap Lava ka tab,mob kharidne ka soch rahe to,kharidne ke pahle 100 bar sonchiye.mahendru k gandhi chauk isthit shereya telecome & com.accris naamak dukan se R 8,400 Me 9/9/13 ko kharida geya ek tab sirf 16 din bad khrab ho geya,retlr ne kam dhokha na diya,7.9.13 ko bsnl penta liya,kaha tamam chijen hn,lekar aaye to pta chala,back camera he nhi h, kaha geya bsnl penta ka he both side camera wala dia jaye,kaha company banati he nhi, majburan lava ka liya,natija samne hai,ab hale service centre,2/10/13 ko dia 20 din ho gya pr na bana. www.biharbroadcasting.com
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मोतीहारी जिला कल्याणपुर प्रखंड के अंचलाधिकारी को निगरानी विभाग के अधिकारीयों की प्रवाह नहीं

मोतीहारी जिला  कल्याणपुर  प्रखंड के अंचलाधिकारी को निगरानी विभाग के अधिकारीयों की प्रवाह नहीं

मोतिहारी के उप विकाश आयुक्त ने कल्यानपुर प्रखंड के manichapra  पंचायत में हुए रोड सोलिंग में भरी गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद  ढाई माह पूर्व  अंचलाधिकारी को जांच के आदेश दिए थे , अंचलाधिकारी ने अब तक  जांच के लिए manichapra पंचायत में जाँच हेतु नहीं गए , जब बात कीजिये तो उनका जवाब होता है , फुर्सत मिली तो जाएँगे , जनता पुछ रही के जब ढाई महीने में जब फुर्सत न मिली तो इस बात की क्या गारंटी है के अगले ढाई माह बाद सी ओ  कल्यानपुर को फुरसत मिल ही जाए ? बहर हाल जब उनसे कहा गया के जनता अब निगरानी विभाग की ओर रुख करने की तैयारी कर रही तो उनका जवाब था , तो जनाब का जवाब था , निगरानी विभाग की मुझे प्रवाह नहीं।  www.biharbroadcasting.com  

delhi ki kathit specail cell ne mange 15,0000 lakh, pidit bihar ke siwan jile ka. dinnak 6/10/13 ko uthakar le gaye the gahr se jabardasti, aaye the panjab no ki maruti indica se . patni ne karaye the najdiki thane me mamla darj, magar karwaai se pahle hee kathit special cell ne saudebaazi ki buniyaad par chod diya tha raste mein. Posted on: 07-October-2013


delhi special cell ke naam par chal raha gorakh dhndha????? mashum ho rahe shikaar. bihar ke siwan ke rahne wala zakir khan hua shikaar. shikaari ka sambandh delhi special cell se tha yaa nahi bana rahshya.aazaadi ke 67 saalon baad bhi desh ke kam pardhe likhe maashon ko nahi mili rahat.purwaj pahle wideshi gundon ke hjariye hotey the shikaar to aaz deshi gundon ke jariye, kabhi nakli cbi to kabhi nakli police tio kabhi nakli TTE, to kabhi farzi nigrani bureau. bihar ke siwan jila ke zakir khan jo delhi ke lony gaziabad me rahte hain apne mobile no.08750610894 se 8:17 am par call kar bataya ke dated 6/1013 ko delhi ke special cell se apne ko sambandh kuch jawaano ne achanak ghar par aakar dhawaa bol diya , aarop lagaya ke tum galat visa ka dhandha karte ho , zakir ke anusar usne kathit special cell ke jawaano jo ke maruti indica se aaye they, sath me chal diye , raste bhar kahta raha ke kabhi oos chauki mein sonpenge to kabhi is police chauki mein , elaqa cross kar geya magar sonpa kahin nahi . kuch dur le jakar kaha ke aaj tumhe is shart par choda ja raha ke kal yani dinank 7/10/2013 ko 12:00 baje din tak 15,0000 {dergh lakh}rupya new delhi station pe lekar pahuncho ge. warna ......? call karne waale zakir ko bataya geya ke aap delhi police ke sp.aur usse upar ke adhikarion ke khelaaf jarur shikaayat darj karayein . jakir ke anusar uski patni ne apne qarib ke police station mein kathit special jawano ke karname ke khelaaf mamla bhi dinank 6/10/13 ko darj karai thi . police walon ne koi receiving nahi diya.
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इशरत फर्जी मुठभेर की जाँच , मोदी के दफ्तर तक पहुँच चुकी है।


रंग लाया मासूम इशरत जहां का खून , नहीं बच पायेंगे गुनाहगार और
जेयादा दिनों तक। क्योंके इशरत मामले की जांच की आंच गुजरात
दंगों के मास्टरमाइंड के दफ्तर तक पहुँच चुकी है।
Posted on: 22-September-2013
इशरत जहाँ मामले की जांच मोदी के दफ्तर तक पहुंची । अहमदाबाद , 21 सितम्बर (एजेंसी)
इशरत जहाँ फर्जी एनकाउंटर मामले की जांच की आंच मोदी के दफ्तर तक पहुँच गई है ।
सी बी आई ने मामले की जांच तेज़ कर दी है । इस सिलसिले में साबरमती जेल में वंजारा से
गुजिस्ता तीन दिनों से सी बी आई की टीम पूछ ताछ कर रही है । इस टीम ने सनीचर
को मुख्यमंत्री के दफ्तर में aditional चीफ secretary के ओहदे पर बहाल ए के शर्मा और
जी सी मरमु से गाँधी नगर में स्थित बी एस एफ कैंप में पुछ ताछ की गई । दोनों अफसरों से
रिटायर्ड आई पी एस अफसर जी एस सिंघल की दी गई सी डी और पेन ड्राइव के बारे में
सवालात किये गए । बताया जाता है के अमीत शाह को बीबचाने से सम्बंधित ये सी डी और पेन
ड्राइव है जिसे सिंघल ने तैयार किया था ।गुजरात हुकूमत को इस्तीफा के साथ ख़त लीख कर
आड़े हाथों लेने वाले वंजारा सी बी आई के लिए अहम् कड़ी साबीत हो सकते हैं ।इधर इशरत
जहां मामले में जेल की खिचड़ी खा रहे पूर्व aditional director general police पी पी पांडे
की security बढ़ा दी गई है । (pindar उर्दू dainik 22.9.13)

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फंस सकते हैं फंसाने वाले ? कई और वंजारा के खुलासे की संभावना बढ़ी, मील रही कामयाबी से उत्साहीत मुस्लीम संगठन लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी में , गलत अफसरों के virudh अलग से आपराधिक् मुक़दमा चलाने की तैयारी भी चल रही , इस बात की मांग भी कर सकते हैं के क्यों नहीं दागियों के रिटायर्ड फण्ड के रूप में मिलने वाले रूपये से दोषी अधिकारियों को वंचित कर पीड़ितों को मदद की जाए? मोबीन कादीर शैख़ मामले में अदालत ने जाँच एजेंसी को झटका देते हुए आरोपी से सम्बंधित कागजात को नष्ट न करने का फरमान wishesh अदालत ने हुक़म दिया है। यही कागजात गले की हड्डी बन सकती है । मुंबई 16 september (यू एन आई) महाराष्ट्र में इंडियन मुजाहेदीन के दह्शत्गर्दाना मामले में आज यहाँ मुंबई की विशेष अदालत ने अतिरिक्त पुलीस कमिश्नर (crime branch) को हुकम दीया है के आरोपी मोबीन कादीर शैख़ से सम्बंधित जीतने भी जरुरी कागजात हैं को अदालत के हुकम के बगैर नष्ट करने की कोशिश न करे ! वाजेह रहे के आरोपी ने विशेष अदालत में एक अर्जी दाखील कर मांग की थी के वह जाँच एजेंसी को आदेश दे के वह इस मामले में एजेंसी के जरिये इस्तेमाल की गई गाडी की लाग बुक ,स्टेशन डायरी ,मेडिकल पेपर के अलावा बाकि जरुरी दस्तावेज जोकी september 2008 से नवंबर2008 के बीच के हैं नष्ट न करे । मुल्जीम की पैरवी करने वाले अधिवक्ता शरीफ शैख़ ने अदालत को बताया के उपरोक्त दस्तावेज आरोपी को बेगुनाह और अधिकारिओं को दोषी साबित करने में अहम् kirdaar नीभा सकते हैं , लेहाजा उपरोक्त कागजात और रेकॉर्ड को बचाया जाना बहुत जरुरी है , सरकारी वकील की तमाम दलील धरे के धरे रह गए और अदालत ने बचाओ pakch की दलील को तरजीह देते हुए तमाम रिकॉर्ड को बाहीफाजत रखने के आदेश दे दीए (pindaar दीनांक 17/9/2013 )

फंस सकते हैं फंसाने वाले ? कई और वंजारा के खुलासे की संभावना बढ़ी, मील रही कामयाबी से उत्साहीत मुस्लीम संगठन लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी में , गलत अफसरों के virudh अलग से आपराधिक् मुक़दमा चलाने की तैयारी भी चल रही , इस बात की मांग भी कर सकते हैं के क्यों नहीं दागियों के रिटायर्ड फण्ड के रूप में मिलने वाले रूपये से दोषी अधिकारियों को वंचित कर पीड़ितों को मदद की जाए? मोबीन कादीर शैख़ मामले में अदालत ने जाँच एजेंसी को झटका देते हुए आरोपी से सम्बंधित कागजात को नष्ट न करने का फरमान wishesh अदालत ने हुक़म दिया है। यही कागजात गले की हड्डी बन सकती है ।

मुंबई 16 september (यू एन आई) महाराष्ट्र में इंडियन मुजाहेदीन के दह्शत्गर्दाना मामले में आज यहाँ मुंबई की विशेष अदालत ने अतिरिक्त पुलीस कमिश्नर (crime branch) को हुकम दीया है के आरोपी मोबीन कादीर शैख़ से सम्बंधित जीतने भी जरुरी कागजात हैं को अदालत के हुकम के बगैर नष्ट करने की कश न करे ! वाजेह रहे के आरोपी ने विशेष अदालत में एक अर्जी दाखील कर मांग की थी के वह जाँच एजेंसी को आदेश दे के वह इस मामले में एजेंसी के जरिये इस्तेमाल की गई गाडी की लाग बुक ,स्टेशन डायरी ,मेडिकल पेपर के अलावा बाकि जरुरी दस्तावेज जोकी september 2008 से नवंबर2008 के बीच के हैं नष्ट न करे । मुल्जीम की पैरवी करने वाले अधिवक्ता शरीफ शैख़ ने अदालत को बताया के उपरोक्त दस्तावेज आरोपी को बेगुनाह और अधिकारिओं को दोषी साबित करने में अहम् kirdaar नीभा सकते हैं , लेहाजा उपरोक्त कागजात और रेकॉर्ड को बचाया जाना बहुत जरुरी है , सरकारी वकील की तमाम दलील धरे के धरे रह गए और अदालत ने बचाओ pakch की दलील को तरजीह देते हुए तमाम रिकॉर्ड को बाहीफाजत रखने के आदेश दे दीए
(pindaar दीनांक 17/9/2013 )

aasha raam ki kahaani?

आशा  राम बापू की ऐशगाह  में स्विमिंग पुल भी 
इंदौर ,8 सेपतेम्बर ,एजेंसी , प्रशाशन ने जमीन नापने वाले पैमाने से ,सनीचर को इंदौर के खंडवा रोड में  स्थित आशाराम का आश्रम का चप्पा चप्पा नाप दिया , सरकारी पैमाइश के बहाने पहली बार आशाराम की ऐशगाह का नजारा भी आम हो गया आशाराम और  नारायण    
शाइन की तन्हाई की जगह की गवाह रही ऐशगाह ,अच्छे खासे बंगलों को मात दे रही थी। बापू के ऐशगाह में ऐश व  आराम की तमाम सहुलतें ,और स्विमिंग पुल की मौजूदगी बापू  लगे आरोपी की गवाही दे रही थी ' आम ' के पश्चिमी कोने में बनी उसकी कुटिया की आलिशान इमारत को देख कर अफसरों की आखें  फटी की फटी रह गई। हलाके आशाराम के पालतू चेलों के आगे अफसरों की भी नहीं चली ,आशाराम के बंगलों की चहार दिवारी के बाहर  ही एस डी एम्  और बाकी अफसरों की टीम ने जुते उतार लीए 

(उर्दू दैनिक पिन्दार ,पटना,दिनांक 9 /09/2013 )