बेरोजगार को ठगने का धंधा जारी , शिक्षा विभाग की भी मिलीभगत की आशंका ।

# क्या आप 34540 Trained teachers बहाली के वक़्त 12हजार के आस पास होने वाली उर्दू टीचर के पदों के लिए उमीदवार थे / थीं  ...............?
## क्या आप से किसी वैक्ति  ने इन्साफ दिलाने के नाम पर /कोर्ट से लड़ कर इन्साफ दिलाने के नाम पर सुनहरे और हसीन ख्वाब दिखा कर पैसे लिए थे ..........?

## क्या आप वैसे लोगों के जरिये दिखाए गए सुनहरे और सब्ज ख़्वाबों पर यकीं करते हुए अपने  मेहनत और मुशक्कत की कमाई ऐसे लोगों पर एतमाद करते हुए थमा दिए थे ..........?
## क्या आप को कानून और अदालत से इन्साफ दिलाने वालों ने आपको नौकरी यानी उर्दू टीचर बनाने में कामयाब रहे ............?
क्या उनकी कानूनी लड़ाइयों के नतीजे में 50 नंबर और 100 नंबर से उर्दू पास होने वाले लोगों की बहाली हो सकी ?

अगर ऐसा वे नहीं कर सके तो आपको ऐसे लोगों से पूछना चाहिए की आपने कौन सी लड़ाई और कैसी लड़ाई लड़ी के 1200 से कुछ अधिक पदों में से करीब चार हजार के आस पास ही उर्दू के शिक्षक बहाल हो सके ?
ये भी पूछिए के आखिर ओ कौन सी लड़ाई आप ने लड़ी के 50 /और 100 नंबर से इंटर में उर्दू पढ़ने वालों को नौकरी नहीं मिली ?
जाहिर है वे ऐसा कराने में पूरी तरह नाकाम रहे , और सरकार अपनी हठधर्मी  पे अड़ी रही और अपने पैमाने के हिसाब से 200 नंबर के साथ इंटर और साथ में trained उमीदवारों को ही बहाल की , और जाहिर है ऐसे लोगों की बहाली किसी की कोशिश और काविश के नतीजे में नहीं बलके सरकार के जरिये बनाए गए पैमाना पर खरे उतरने की वजह कर हुई

## इसलिए पैसा लेने वालों को चाहिए की जिन बेरोजगारों से पैसे लिए थे , इंसानियत और मानवता का परिचय देते हुए बेरोजगारों से लिए गए पैसे वापस कर दे ।

## और उन अभियार्थियों से अनुरोध है कि  आप अपने खून पसीने की कमाई मुंगेरी लाल की तरह हसींन सपने दिखाकर जिन लोगों ने पैसे लिए थे डीमांड करें ,न देने की सूरत में हमारे वेबसाइट के पब्लिक पेज पर जिन्होंने आपसे पैसे लिए अथवा जिनको आप दिए उनके नाम व पते के साथ लिख दीजिये . www.biharbroadcasting.com वैसे लोगों को समाज के सामने बेनकाब करेगी और उर्दू मीडिया - कौमी तंजीम , पिन्दार ,फारुकी तंजीम जैसी अखबारें भी आपका साथ बखूबी के साथ अंजाम देगी .............!
## कयोंकि  हद तो तब हो गई , जैसा कुछ Urdu Trained उमिद्वारों ने बताया के कुछ लोग - 34540 बहाली में आवेदक (Applicant)नहीं होने के बावजूद 34540 पदों की हुई बहाली में 12 से कुछ अधिक सीटों पर grade pay टीचर बनाने का सपना दिखा रहे ,कुछ लोगों के जरिये उर्दू अखबारों  में ये प्रसारित कराया जा रहा के 2413 सीट खाली पड़े हुए हैं ,जिन पर जो लोग आवेदक नहीं भी थे उन्हें भी शिक्षक बनवादेंगे जबके सरकार के नियम में ये बात साफ़ तौर से लिखा था के 2006 के बाद जो लोग टीचर ट्रेंनिंग किये हैं वे पात्र नहीं होंगे , मगर कानून का हवाला देकर कुछ लोग लोग बेरोजगारों को सपना दिखा रहे .सरकार को भी चाहिए  के 2413 के आस पास जो सीट बची रह गई है ,साफ़ करे  के उन सीटों पर कौन लोग बहाल  होंगे ? fress application ली  जायेगी  या पुराने application पे ही लोगों  की बहालियाँ होंगी ? कयोंकि कुछ लोग  तरह तरह से भरम फैला रहे ,और बेचारा बेरोजगार वैसे लोगों  के जाल में फंस  जा रहे ।



Rahul Kumar

दहेज प्रताड़ना,रंगदारी के खिलाफ और भरन-पोषण के लिए दायर किए गए एक झूठा मुकदमा का अध्ययन मैंने किया और झूठे
आरोप का शिकार हुए लोगों को सहयोग भी किया।आरोप प्रथम दृष्टया देखने से ही झूठा प्रतीत होता है।

1.भरन-पोषण के लिए नियम के विरुध्द आवेदन देना

Hindu ADOPTION AND MAINTENANCE ACT,1956 (हिन्दु दत्तकग्रहण तथा भरन-पोषण
अधिनियम)की धारा 19(1) के तहत एक हिन्दु विधवा महिला अपने ससुर से भरन-पोषण
के लिए कोर्ट में आवेदन कर सकती है बशर्तेँ कि उस विधवा के पास आय का
पर्याप्त स्त्रोत ना हो।इसी कानून का धारा 19(2) के तहत ससुर भरन-पोषण
नहीं देगा जब उसके पास देने के लिए पर्याप्त सहदायिकी संपत्ति (जो संपत्ति
पिता के मरने के बाद वारिसों को बांटी जाती है) नहीं है।मतलब ससुर अपने
मासिक आय से भरन-पोषण देने के लिए बाध्य नहीं है।विधवा रानी देवी ने अपने
जेठ दिलीप ठाकुर और ननद मुनचुन देवी से भी भरन-पोषण लेने के लिए आवेदन दे
दिया है।ससुर के सिवाय किसी दूसरे से भरन-पोषण मांगने का अधिकार विधवा को
नहीं है।
Hindu Minority and Guardianship Act,1956(हिन्दू नाबालिगी तथा संरक्षता अधिनियम) की धारा 9(3) के तहत एक विधवा अपने नाबालिग बच्चे की प्राकृतिक संरक्षक होती है और उसे नाबालिग बच्चे की संपत्ति का रक्षा करने और नाबालिग के हित में संपत्ति का उपयोग करने का अधिकार होता है।विधवा सिर्फ अपने नाबालिग बच्चे के संपत्ति का संरक्षक होती है।नाबालिग बच्चे के संपत्ति पर विधवा का स्वामित्व नहीं होता।हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम,1956 के तहत विधवा की मृत पति के संपत्ति पर उसका और उसके बच्चे यानि सभी का बराबर का हिस्सा होता है।मसलन,यदि एक विधवा और उसके तीन बच्चे हैं तो चारों का 1/4 हिस्सेदारी बनता है।अपने बच्चे के हिस्से का संपत्ति का विधवा सिर्फ संरक्षक होती है।यदि रानी देवी ने भरन-पोषण के लिए CrPC का धारा 125 के तहत आवेदन दिया है तो उसे भरन-पोषण नहीं मिल सकता।क्योंकि CrPC का धारा 125 के तहत सिर्फ पत्नी अपने पति से,बच्चा अपने माता-पिता से और वृध्द माता-पिता अपने संतान से भरन-पोषण मांग सकता है।

2.दहेज प्रताड़ना का झूठा आरोप

(i) मृतक ललित ठाकुर की पत्नी रानी देवी अपने ससुर छेदी ठाकुर और जेठ दिलीप
ठाकुर पर ललित ठाकुर का किडनी का ईलाज कराने के लिए दहेज मांगने का आरोप
लगाया है।रानी देवी का आरोप है कि ससुर छेदी ठाकुर और जेठ दिलीप ठाकुर ने
रानी देवी से ईलाज के लिए दहेज के रुप में मांगी गई कुछ राशि और एक भैंस
नहीं देने के कारण ललित ठाकुर का सही से ईलाज नहीं कराया,जिस कारण से उसकी
मौत हो गई।
(ii) रानी देवी का आरोप स्वतः झूठा प्रतीत होता है।आखिर कोई पिता या सगा भाई
ईलाज कराने के लिए दहेज पर आश्रित कैसे हो सकता है?यदि रानी देवी का ईलाज
कराने की बात होती तो एक ससुर(छेदी ठाकुर) और एक जेठ(दिलीप ठाकुर) ईलाज
कराने के लिए दहेज पर आश्रित हो सकते थे लेकिन ललित ठाकुर का ईलाज कराने के
लिए दहेज पर ये आश्रित नहीं हो सकते।इसलिए आरोप झूठा है
(iii) आरोप के अनुसार,ईलाज के लिए दहेज में भैंस भी मांगी गई।ईलाज के लिए
त्वरित राशि चाहिए ना कि भैंस।पहले भैंस के खरीदार को खोजना पड़ेगा,फिर राशि
मिल पाएगी।तब तक ईलाज में काफी विलंब हो जाएगी।इसलिए भैंस मांगने का सवाल
ही पैदा नहीं होता।
(iv) दहेज के लिए सिर्फ रानी देवी पर ही दवाब बनाया गया।यदि ईलाज कराने जैसे अतिआवश्यक काम के लिए दहेज मांगा जाता तो इसके लिए रानी देवी के परिवार वाले पर भी दवाब बनाया जाता क्योंकि ईलाज के लिए दहेज लेना उस वक्त URGENT होता और रानी देवी के परिवार वाले पर दवाब दिए बगैर दहेज नहीं मिल सकता था और यदि URGENT था तो दहेज लेने के लिए परिवार वाले पर भी दवाब बनाया जाता।URGENT Case में सिर्फ लड़की पर दवाब बनाए जाने की बात कहना झूठा आरोप है।

3.धमकाकर रंगदारी करने का झूठा आरोप

(i)रानी देवी का आरोप है कि उसके पति ललित ठाकुर का मर जाने के बाद उसे ससुराल से भगा दिया गया।उसका भतीजा मुन्ना ठाकुर एक कागज पर रानी देवी का अंगूठा का निशान लेने का कोशिश किया जिसपर लिखा जाता कि रानी देवी स्वेच्छा से ससुराल छोड़कर जा रही है।रानी देवी ने अपने ससुर छेदी ठाकुर पर आरोप लगायी है कि छेदी ठाकुर रानी देवी का बेटा रौशन कुमार का हाथ रानी देवी के सामने पकड़कर उसे चाकू दिखा कर धमका रहा था ताकि रानी देवी अपने बेटा का जान बचाने के डर से अंगूठा का निशान कागज पर लगा दे।

(ii) रानी देवी से अंगूठा का निशान लेना काफी आसान था क्योंकि वह एक असहाय विधवा महिला थी और उसके ससुराल में सभी उसके
विरोधी थे।उसके बयान के अनुसार यदि मान लिया जाए कि उसे ससुराल से भगा दिया गया तो जब ससुराल से भगाया जा सकता है तो अंगूठा का निशान भी लिया जा सकता
है क्योंकि अंगूठा का निशान लेना ससुराल से भगाने से ज्यादा आसान है।इसलिए यदि अंगूठा का निशान नहीं लिया गया है तो इसका मतलब होता है कि उसे ससुराल
से भी नहीं भगाया गया है।इसलिए रानी देवी द्वारा अपने जेठानी विमला देवी और सास सैलू देवी और अन्य पर लगाया गया यह आरोप झूठा है कि इन लोगों ने
धक्का मारकर उसे ससुराल से भगा दिया।रानी देवी से मुन्ना ठाकुर द्वारा जबरन अंगूठा का निशान लेने की कोशिश करने की जरुरत भी नहीं पड़ती क्योंकि अपने
पुत्र रौशन कुमार का जान बचाने की डर से वह खुद अंगूठे का निशान दे देती।लेकिन मुन्ना ठाकुर द्वारा जबरन निशान लिए जाने की कोशिश करने और छेदी ठाकुर द्वारा उसके बेटे को चाकू दिखाने के बाद भी उससे अंगूठा का निशान नहीं लिया जा सका।ऐसा कैसे हो सकता है?
इससे जाहिर होता है कि रानी देवी से ना ही अंगूठा का निशान लेने का कोशिश किया गया और ना ही रौशन कुमार को चाकू दिखाया गया।

Rahul kumar  के फेसबुक वाल से 

Rahul Kumar

दहेज प्रताड़ना,रंगदारी के खिलाफ और भरन-पोषण के लिए दायर किए गए एक झूठा मुकदमा का अध्ययन मैंने किया और झूठे
आरोप का शिकार हुए लोगों को सहयोग भी किया।आरोप प्रथम दृष्टया देखने से ही झूठा प्रतीत होता है।

1.भरन-पोषण के लिए नियम के विरुध्द आवेदन देना

Hindu ADOPTION AND MAINTENANCE ACT,1956 (हिन्दु दत्तकग्रहण तथा भरन-पोषण
अधिनियम)की धारा 19(1) के तहत एक हिन्दु विधवा महिला अपने ससुर से भरन-पोषण
के लिए कोर्ट में आवेदन कर सकती है बशर्तेँ कि उस विधवा के पास आय का
पर्याप्त स्त्रोत ना हो।इसी कानून का धारा 19(2) के तहत ससुर भरन-पोषण
नहीं देगा जब उसके पास देने के लिए पर्याप्त सहदायिकी संपत्ति (जो संपत्ति
पिता के मरने के बाद वारिसों को बांटी जाती है) नहीं है।मतलब ससुर अपने
मासिक आय से भरन-पोषण देने के लिए बाध्य नहीं है।विधवा रानी देवी ने अपने
जेठ दिलीप ठाकुर और ननद मुनचुन देवी से भी भरन-पोषण लेने के लिए आवेदन दे
दिया है।ससुर के सिवाय किसी दूसरे से भरन-पोषण मांगने का अधिकार विधवा को
नहीं है।
Hindu Minority and Guardianship Act,1956(हिन्दू नाबालिगी तथा संरक्षता अधिनियम) की धारा 9(3) के तहत एक विधवा अपने नाबालिग बच्चे की प्राकृतिक संरक्षक होती है और उसे नाबालिग बच्चे की संपत्ति का रक्षा करने और नाबालिग के हित में संपत्ति का उपयोग करने का अधिकार होता है।विधवा सिर्फ अपने नाबालिग बच्चे के संपत्ति का संरक्षक होती है।नाबालिग बच्चे के संपत्ति पर विधवा का स्वामित्व नहीं होता।हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम,1956 के तहत विधवा की मृत पति के संपत्ति पर उसका और उसके बच्चे यानि सभी का बराबर का हिस्सा होता है।मसलन,यदि एक विधवा और उसके तीन बच्चे हैं तो चारों का 1/4 हिस्सेदारी बनता है।अपने बच्चे के हिस्से का संपत्ति का विधवा सिर्फ संरक्षक होती है।यदि रानी देवी ने भरन-पोषण के लिए CrPC का धारा 125 के तहत आवेदन दिया है तो उसे भरन-पोषण नहीं मिल सकता।क्योंकि CrPC का धारा 125 के तहत सिर्फ पत्नी अपने पति से,बच्चा अपने माता-पिता से और वृध्द माता-पिता अपने संतान से भरन-पोषण मांग सकता है।

2.दहेज प्रताड़ना का झूठा आरोप

(i) मृतक ललित ठाकुर की पत्नी रानी देवी अपने ससुर छेदी ठाकुर और जेठ दिलीप
ठाकुर पर ललित ठाकुर का किडनी का ईलाज कराने के लिए दहेज मांगने का आरोप
लगाया है।रानी देवी का आरोप है कि ससुर छेदी ठाकुर और जेठ दिलीप ठाकुर ने
रानी देवी से ईलाज के लिए दहेज के रुप में मांगी गई कुछ राशि और एक भैंस
नहीं देने के कारण ललित ठाकुर का सही से ईलाज नहीं कराया,जिस कारण से उसकी
मौत हो गई।
(ii) रानी देवी का आरोप स्वतः झूठा प्रतीत होता है।आखिर कोई पिता या सगा भाई
ईलाज कराने के लिए दहेज पर आश्रित कैसे हो सकता है?यदि रानी देवी का ईलाज
कराने की बात होती तो एक ससुर(छेदी ठाकुर) और एक जेठ(दिलीप ठाकुर) ईलाज
कराने के लिए दहेज पर आश्रित हो सकते थे लेकिन ललित ठाकुर का ईलाज कराने के
लिए दहेज पर ये आश्रित नहीं हो सकते।इसलिए आरोप झूठा है
(iii) आरोप के अनुसार,ईलाज के लिए दहेज में भैंस भी मांगी गई।ईलाज के लिए
त्वरित राशि चाहिए ना कि भैंस।पहले भैंस के खरीदार को खोजना पड़ेगा,फिर राशि
मिल पाएगी।तब तक ईलाज में काफी विलंब हो जाएगी।इसलिए भैंस मांगने का सवाल
ही पैदा नहीं होता।
(iv) दहेज के लिए सिर्फ रानी देवी पर ही दवाब बनाया गया।यदि ईलाज कराने जैसे अतिआवश्यक काम के लिए दहेज मांगा जाता तो इसके लिए रानी देवी के परिवार वाले पर भी दवाब बनाया जाता क्योंकि ईलाज के लिए दहेज लेना उस वक्त URGENT होता और रानी देवी के परिवार वाले पर दवाब दिए बगैर दहेज नहीं मिल सकता था और यदि URGENT था तो दहेज लेने के लिए परिवार वाले पर भी दवाब बनाया जाता।URGENT Case में सिर्फ लड़की पर दवाब बनाए जाने की बात कहना झूठा आरोप है।

3.धमकाकर रंगदारी करने का झूठा आरोप

(i)रानी देवी का आरोप है कि उसके पति ललित ठाकुर का मर जाने के बाद उसे ससुराल से भगा दिया गया।उसका भतीजा मुन्ना ठाकुर एक कागज पर रानी देवी का अंगूठा का निशान लेने का कोशिश किया जिसपर लिखा जाता कि रानी देवी स्वेच्छा से ससुराल छोड़कर जा रही है।रानी देवी ने अपने ससुर छेदी ठाकुर पर आरोप लगायी है कि छेदी ठाकुर रानी देवी का बेटा रौशन कुमार का हाथ रानी देवी के सामने पकड़कर उसे चाकू दिखा कर धमका रहा था ताकि रानी देवी अपने बेटा का जान बचाने के डर से अंगूठा का निशान कागज पर लगा दे।

(ii) रानी देवी से अंगूठा का निशान लेना काफी आसान था क्योंकि वह एक असहाय विधवा महिला थी और उसके ससुराल में सभी उसके
विरोधी थे।उसके बयान के अनुसार यदि मान लिया जाए कि उसे ससुराल से भगा दिया गया तो जब ससुराल से भगाया जा सकता है तो अंगूठा का निशान भी लिया जा सकता
है क्योंकि अंगूठा का निशान लेना ससुराल से भगाने से ज्यादा आसान है।इसलिए यदि अंगूठा का निशान नहीं लिया गया है तो इसका मतलब होता है कि उसे ससुराल
से भी नहीं भगाया गया है।इसलिए रानी देवी द्वारा अपने जेठानी विमला देवी और सास सैलू देवी और अन्य पर लगाया गया यह आरोप झूठा है कि इन लोगों ने
धक्का मारकर उसे ससुराल से भगा दिया।रानी देवी से मुन्ना ठाकुर द्वारा जबरन अंगूठा का निशान लेने की कोशिश करने की जरुरत भी नहीं पड़ती क्योंकि अपने
पुत्र रौशन कुमार का जान बचाने की डर से वह खुद अंगूठे का निशान दे देती।लेकिन मुन्ना ठाकुर द्वारा जबरन निशान लिए जाने की कोशिश करने और छेदी ठाकुर द्वारा उसके बेटे को चाकू दिखाने के बाद भी उससे अंगूठा का निशान नहीं लिया जा सका।ऐसा कैसे हो सकता है?
इससे जाहिर होता है कि रानी देवी से ना ही अंगूठा का निशान लेने का कोशिश किया गया और ना ही रौशन कुमार को चाकू दिखाया गया।

Rahul kumar  के फेसबुक वाल से 

BBC: बिहार के मोतिहारी जिला में मनरेगा के नाम पर भारी घ...

BBC: बिहार के मोतिहारी जिला में मनरेगा के नाम पर भारी घ...: मनरेगा में भारी गड़बड़ी की संभावना , फर्जी मजदूरों और फर्जी कामों को दिखलाकर करोड़ों के घपले की आशंका । मामले का संबंध पूर्वी चंपारण के कल्याण...

बिहार के मोतिहारी जिला में मनरेगा के नाम पर भारी घोटाला , फर्जी काम और फर्जी नाम पर करोड़ों का घोटाला ,ऊँची पहुँच और रुतबा के कारण नहीं हो रही कार्रवाई


मनरेगा में भारी गड़बड़ी की संभावना , फर्जी मजदूरों और फर्जी कामों को दिखलाकर करोड़ों के घपले की आशंका । मामले का संबंध पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर प्रखंड के मनिचाप्रा पंचायत से , इस घटना ने न केवल पुरबी चंपारण में चल रहे मनरेगा के काम और उसकी इमानदारी पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है बलके पुरे बिहार का मनरेगा के तेहत चल रहा काम जाँच के दाएरे में आ गया है .............!

मामला क्या है ................? पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर प्रखंड के मनीछपरा पंचायत में जिन मनरेगा मजदूरों के नाम पर पैसा की निकासी दिखलाई गई है , उन मजदूरों का सम्बन्ध उक्त पंचायत से है ही नहीं , काम भी जिन जगहों का होते रिकॉर्ड में दर्ज हैं उसका भी संबंध उपरोक्त पंचायत से नहीं । जैसे 1.एक संजय यादव - ग्राम मधुछपरा , मस्टर रोल नंबर - 662 इनके नाम पर 2070 , A/C - 90403084 , 2. दुसरे संजय यादव - -- -- मस्टर रोल नंबर 601 दिनांक 1/4/13 से 15/4/13 तक कुल 12 दिन का 1656 रुपया का भुगतान होते दिखाया गया है । मजे की बात ये है कि एक तीसरे संजय यादव भी हैं ,जिनका मस्टर रोल नंबर 483 है मजे की एक और बात है कि सम्बंधित पंचायत के लोगों से पुछ ताछ के बाद इन तीनों संजय यादव के बारे में पता नहीं चल पा रहा ? यानी जिन तीनों संजय यादव के नाम पर पैसा उठा पहली ही नजर में फर्जी साबित हो गया है , सवाल पैदा हो रहा है के आखिर जिन तीनों संजय यादव के नाम पर पैसा उठा वह आखिर कहाँ के निवासी थे ? किस जिला ,किस ब्लॉक ,और किस पंचायत के निवासी हैं ? सवाल यह भी है कि जब इन तीनों का सम्बन्ध उपरोक्त पंचायत से था ही नहीं तो फिर काम किस ने और कैसे दिया ? क्या इन तीनों संजय यादव का अपना कोई पंचायत ही नहीं था ? क्या ये तीनों संजय यादव बगैर पंचायत के निवासी थे के उनसे मनी छपरा पंचायत में काम कराया गया ? बात यहीं पे ख़त्म नहीं है दो संजय यादव मस्टर रोल 483 , दुसरे संजय यादव जिनका मस्टर रोल नंबर 602 है से same डेट में काम लेते दिखाया गया है ( 16/4/ 13 से 30 4/ 2013 )और कुल 15 दिन की मजदूरी 2070 रुपया देते हुए दिखाया गया है ! दोनों संजय यादव को काम भी same place पर करते हुए हुए दिखाया गया है यानी गोपाल छपरा ,और जानकारों की मानें तो गोपाल छपरा मनी छपरा में पंचायत में आता ही नहीं ,जानकारों ने इस बात की पुष्टी की है । ये तो मात्र उदाहरण हैं ऐसे सैकड़ो नाम और इन फर्जी नामों पर सैकड़ों फर्जी काम काम को होते हुए दिखाया गया है । सवाल पैदा होने लगा है कि आखिर इन फर्जी नामों को दिखलाकर करोड़ों रूपये की नकासी किसने की ? कौन - कौन लोग इसमें हिस्सेदार बने ? सूत्रों की मानें तो मनरेगा के घपले के पैसे से एक घोटाले बाज़ ने इतनी कमाई की के इंट निर्माण कराने की चिमनी तक खोल दी ।और ऐसा नहीं है के बिहार सरकार के आला अधिकारी नहीं जानते , तो सवाल उठना लाजमी है कि , क्या बड़े लोगों और अधिकारियों को मिली हिस्सेदारी कार्रवाई करने से रोक रही ? अगर ऐसा नहीं तो फिर इतनी देरी क्यों ?

Share0 Share0 Tweet0 0 Em

Read more at http://www.biharbroadcasting.com/blog/viewpost.php?id=30#6p3G8lRGs3JoxYw1.99

Biharbroadcasting.com - डी डी सी और डी एम मोतिहारी , ग्रामीण विकाश मंत्री और सी ऑफ़ बिहार ,एक मिनट....... प्लीज ।

Biharbroadcasting.com - डी डी सी और डी एम मोतिहारी , ग्रामीण विकाश मंत्री और सी ऑफ़ बिहार ,एक मिनट....... प्लीज ।

इस देश का निगेहबान क्या -क्या कर और करवा सकता है ? देखिये उदहारण नंबर -2

आई पी सी में धारा 511 तक का ही जिक्र ,पर पुलिस ने लगा दी 566 । जरा देखिये और खुद समझिये मुसलमानों का आरोप पुलिस के विरुद्ध लगता रहा है ,कितना दुरुस्त और सही है ? मुसलान वर्षों से कहता रहा इस्लाम और आतंकवाद दोनों का कोई ताल मेल ही नहीं ,बड़े बड़े दावे होते रहे , इस दावे को जब देश का एक इमानदार चौकीदार आईपीएस अफसर और देश का सच्चा निगेहबान हेमंत करकरे ने , जब देश और हिन्दू मुस्लिम एकता के असल दुश्मन चेहरों पर चढ़ी आतंकवाद के परदे को उठाते हुए मुसलमानों को जैसे ही क्लीन चीट दी , और मुसलमानों के आरोपों को जैसे ही सही साबित की उन्हें शहीद कर दिया गया , जिससे दुनिया खूब अच्छी तरह जानती है ..........।
लीजिये ,देखिये , पढ़िए , समझिये और सोंचिये के हमारे देश की जांच एजेंसियां और पुलिस कौन - कौन सी करतूत कर और करवा कर सकती है ?पेश है मिशाल नंबर -2 (अलोक कुमार ,दैनिक जागरण दिनांक 6/1/14) आई पी सी में धारा 511 पुलिस ने लगाईं 566. अपने कारनामों से हमेशा सुर्खी में रहने वाली पुलिस ने एक नया धमाका किया है । इंडियन पैनल कोड (आई पी सी ) में धारा 511 तक का ही उल्लेख है ,मगर पुलिस न एक मामले में लगा दी धारा 566 । यानी आई पी सी में नई धारा इजाद कर दी । इतना ही नहीं कोर्ट में आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया । आरोप पत्र में आई पी सी से बाहर की धारा देखकर न्यायेधिश परीशान हो गए ,जज साहेब की परिशानी यह है कि वे किस धारा में आरोप गठित करें । पुलिसिया कारनामे से मामला न्यालय में लंबित है ।और आरोपी आर्थिक और मानसिक संकट झेल रहे हैं , 5 साल पूर्व संहौला के महेशपुर गाँव में प्रेमी युगल पकड़ा गया था । लोगों ने युवक का सर मुंडन कर कालिख पोती थी ।इस मामले में किशोर मंडल ने 9 /9/2008 को संहौला थाना में मामला दर्ज कराया था ।महेशपुर पंचायत के सरपंच ब्रजेश महाराज ,गणेश मंडल ,किसन मंडल व अजय मंडल को नामजद किया गया था ।आरोपियों पर तब धारा 341 ,342 ,323,354 ,386 ,387 ,504 ,506 ,34, लगाईं गई थी ,बाद में अनुसंधानकर्ता एस आई घन्शेयाम राय ने इसमें धारा 467 , जोड़ने के लिए सी जे एम् कोर्ट में आवेदन दिया ,न्यालय के आदेश पर राय ने मामले में उपरोक्त धारा जोड़ दी ब्रजेश व अजय को अग्रिम जमानत मिल गई थी । गणेश व किशन जेल भेजे गये थे ,पुलिस ने ब्रजेश ,गणेश ,व किशन के खेलाफ न्यालय में आरोप पत्र दाखिल किया ,ब्रजेश के मुताबिक़ अनुसंधान में आई ओ ने अरुण मंडल ,और शालिग्राम मंडल उर्फ़ शालों के नाम भी जोड़े ,दोनों को अप्राथ्मिकी आरोपी बनाया ,अरुण व सालों भी अग्रिम जमानत मिली थी ,बाद में आई ओ ने दोनों अप्राथ्मिकी आरोपियों समेत प्राथमिकी आरोपी अजय के खेलाफ अन्य धाराओं समेत धारा 566 लगा कर आरोप पत्र दाखिल कर दिया ,ख़ास बात यह है कि आरोप पत्र तभी दाखिल किया जाता है जब उसे देख कर एस एस पी अनुमति प्रदान करते हैं .........................!



उपरोक कहानी और खबर से स्पष्ट हो गया होगा कि ............ वर्दी पहनते वक़्त जो कसमें खाई जाती हैं , वो कसमें शायद याद रहते तो शायद ये नौबत न आती । मालेगांव ,मक्का मस्जिद ,हैदराबाद समझौत एक्सप्रेस और न जाने कौन कौन से एक्सप्रेस में हेमंत करकरे से खुलासे से पहले जिन अधिकारिओं ने जो कारनामे किये ,देश को गुमराह किये ,हिन्दू मुसलमानों में गलत जांच रिपोर्ट के आधार पर जो भ्रम फैलाई गई थी , इस बात की इजाज़त कौन धर्म देता है ? जब धर्म देता ही नहीं तो फिर ऐसे लोगों के विरुद्ध करवाई में कौन सी बाधाएं सामने आजाती हैं ।

Blog - देश की जाँच एजेंसी और पुलिस क्या- क्या कर सकती है ? देखिये ...स्टोरी नंबर.1

http://biharbroadcasting.com/viewpost.php?id=24#ewkmcmiuTDHt3p4h.15">Blog - देश की जाँच एजेंसी और पुलिस क्या- क्या कर सकती है ? देखिये ...स्टोरी नंबर.1

कोर्ट कहता है - साक्ष में बहुत गड़बड़ी है ।इस आधार पर न तो किसी को आजीवन कारावास और न ही किसी को मृत्युदंड की सजा दी सकती है । ' हाई कोर्ट के सतहत्तर पन्नों के फैसले में पुलिसिया गड़बड़ी का विस्तार से जिक्र है । इसमें आरोपियों का नाम बदलने से , उनकी संख्या बढ़ाने ,गवाही में भिन्नता आदि बातें दर्ज हैं ,जिससे आरोपियों को संदेह का लाभ मिल गया । पुलिस ने ऐसा क्यों किया ? ऐसा करने वाले पुलिसकर्मियों के खेलाफ कभी कुछ हुआ है , जो होगा ? क्यों नहीं होता है ? कौन जिम्मेदार है ? कौन किसको रोकता है ? यह राज सत्ता और सिस्टम का गुण है ? ये सवाल भी पूछे जा सकते हैं कि इन तमाम विसंगतियों या गड़बड़ियों के मौजूद रहते निचली अदालत ने कैसे अमौसी नरसंहार के दस आरोपियों को फांसी और चार को आजीवन कारावास की सजा सुना दी थी ? हाई कोर्ट के मुताबिक़ निचली निचली अदालत का फैसला गलत था । तो क्या ऐसी गलतियों के खेलाफ कुछ होता है क्या ? क्यों नहीं होता ? आखिर जब अमौसी के सभी आरोपी बेकसूर थे , तो फिजूल में उनको जेल क्यों भेजा गया ? जेल में गुजारा गया उनका समय उनकी सामाजिक - आर्थिक - मानसिक क्षति जानलेवा प्रताड़ना ........., इन सबका कसूरवार किसको माना जाएगा ? बेक़सूर को जेल भेजने से भी बड़ा अपराध कुछ होता है क्या ? ऐसे ढेर सारे सवाल हैं । लेकिन सबसे खतरनाक बात यह है कि सिस्टम के सभी जिम्मेदार तंत्र इन सवालों से अपने को किनारे रखे हुए है । कोई कुछ नहीं बोल रहा है । निचली अदालत इस तर्क पर चुप है कि हाई कोर्ट पर टिप्पणी उसके बूते की नहीं है । पुलिस , न्यायिक मामला बता कर बिलकुल चुप है । हाँ ,महाधिवक्ता रामबालक महतो ऐसे मौकों पर कही जाने वाली एक बात जरुर कहते हैं - हम हाई कोर्ट के फैसले का अध्यन करेंगे । जरुरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट में अपील होगी ।' और सुप्रीम कोर्ट में ......? पता नहीं ऐसे तमाम कब तक जिन्दा रहेंगे ? शायद पीढियां गुजर जाएँ । एक उदाहरण से जानिये - ----------- 1/12/1997 की रात लक्ष्मणपुर बाथे में 58 लोग मारे गए ।पिछले साल 9/ 10/13 को पटना हाई कोर्ट ने इस काण्ड के सभी 26 आरोपियों को बड़ी कर दिया । राज सरकार , इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई है । 16 साल बीत चुके हैं । और आज भी ;वही सवाल जिन्दा है के आखिर हत्यारा कौन था ?

अमौसी या लक्ष्मणपुर बाथे की यह दास्तान पहली और आखरी नहीं है । इधर ,नरसंहारों के आरोपी लगातार बड़ी होते जा रहे हैं ।  मियांपुर ( औरंगाबाद ) 'जहीरबिगहा (गया ) नरसंहार ........,सबकुछ सामने है । सिस्टम अपना भरोसा बचाएगा ?

जवाब मांगते सवाल

# क्या इस स्थिति को अपनों को खो चुके लोगों के लिए सिस्टम का यह सुझाव माना जाए कि तुम उनकी शरण में जाओ , जो फटाफट न्याय करता है ? यह क्या नक्सलियों को अपनी जमीन को और मजबूत करने देने की खुली छुट नहीं है क्या ?

# क्या यह सच्चाई नहीं है कि ऐसे मसले अराजक तत्यों को हमेशा ताक़त देते हैं ,उत्प्रेरित करते हैं ? हत्याएं इसलिए भी होती कि हत्यारे बचे रह जाते हैं ?

# जब कोर्ट मानता है कि पुलिस ने मुनासिब तरीके से अनुसंधान (जाँच)नहीं किया है ,तो उसके खेलाफ कार्रवाई का आदेश क्यों नहीं होता है ? फिर क्या , कोर्ट के आदेश के आलोक में ऐसा पुलिस मुख्यालय की जिम्मेदारी नहीं है ? ऐसी कार्रवाई का एक भी उदाहरण है क्या ?



# लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार के 11 वर्ष बाद 46 लोगों के खिलाफ चार्जशीत हुई । इतना विलम्ब क्यों ?
(मधुरेश , जागरण पटना ,पटना ,दिनांक - 6/1 14)

सेयासी आतंक , जुल्म व जेयाद्ती के खेलाफ SDPI ने छेड़ा जंग ,देश की आम जनता से माँगा इसमें सहयोग ।

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) ने सेयासी आतंकवाद , जुल्म , जेयाद्ती एवं सामाजिक नाइंसाफी के खेलाफ छेड़ा जंग , इसके नेताओं ने आम देश वासियों से माँगा सहयोग ,कहा जनता दे साथ तो बनायेंगे भूक और खौफ से आजाद हिन्दुस्तान , जनसभा 9 जनवरी 2014 , दिन 11 बजे , स्थान इंद्रा गाँधी स्टेडियम ,पूर्णिया (बिहार)
प्रोग्राम को सफल बनाने के लिए पार्टी बड़े पैमाने पर प्रचार प्रसार में भी लगी है , पार्टी इसके लिए लाखों हैंड्स बिल और पोस्टर का सहारा लेकर आम जनता में अपनी पकड़ मजबूत करने के साथ अपनी बात और पार्टी के अच्छे उद्देश्यों को पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही । ........... पेश है SDPI के एक हैंड्स बिल में उल्लेखित मैसेज का नमूना .............
आज देश सम्प्रदैक एवं फासिज्म के खतरे से गुजर रहा है । गुजरात ,आसाम ,और मुज़फ्फरनगर की तरह सारे देश को सम्प्रदायिक दंगे की आग में झोंक देने की खुफिया साजिश रची जा रही । सम्प्रदैकता , भ्रष्टाचार ,महंगाई , गरीबी , और घोटाले की मार गरीब जनता झेलने को मजबूर है । लेकिन गरीब जनता को आतंकवाद के नाम से गुमराह किया जा रहा है

नीतीश कुमार बिहार में भाजपा और सांप्रदायिक तत्यों को शाशन तक पहुंचाने के अपराध से बच नहीं सकते । इनका हौसला लगातार बढ़ाने के कारण ही आज यह संप्रदायिक तत्य बिहार को गुजरात बना देने की कोशीश कर रहा है .................।

बोद्ध गया और पटना धमाकों के दौरान पकड़े गए मुल्जिमों को गहराई से पूछ - ताछ किये बिना छोड़
कर ,खुफिया एजेंडे के तेहत दुसरे राज्यों की तरह बिहार में भी निर्दोष मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया गया जिसका सिलसिला आज तक जारी है , जबकि हैदराबाद , मालेगांव , और बाकी दूसरी जगहों पर हुए बम धमाकों में गिरफ्तार मुस्लिम युवकों को अदालत बेक़सूर मानते हुए जेल से बाइज्जत बाहर निकाल रही है ...................।

ऐसे तमाम पुलिस व जांच एजेंसी के ऑफिसरों को कठोर सजा दिया जाए जो बेक़सूर मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार कर वर्षों जेल में बंद रखने के जिम्मेदार हैं ...............।

केंद्र व राज सरकार के द्वारा आतंकवाद के नाम पर गिरफ्तार मुस्लिम युवकों को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिये छः माह के अन्दर फैसला सुनाया जाए न कि वर्षों जेल में बंद रख कर उनकी जिंदगी और उनके खानदान वालों की इज्ज़त व आबरू को बर्बाद किया जाए ...............।

बटराहा गाँव जिला अररिया में "एस एस बी " के द्वारा एक महिला समेत चार मुसलमानों को गोली मार कर हत्या कर दिया गया , भजनपुरा फोर्बिस्गंज में एक मासूम बच्चे और गर्भवती महिला समेत चार मुसलमानों को संप्रदायिक तत्यों के इशारे पर पुलिस ने गोली मार दी , पुलिस फायरिंग से पीड़ित लोगों को आज तक इन्साफ नहीं मिला , इसके उलट स्थानिये प्रशाशन भजनपुर के लोगों पर मुक़दमा वापस लेने के लगातार दबाव बनाए हुए है , जमुई में भी स्थानिये शासन और पुलिस की लाप्रवाही के कारण बेगुनाह सात मुसलमानों का क़त्ल हुआ और कातिल अब तक आज़ाद है ,नीतीश कुमार जो सेक्युलर और सामाजिक न्याय का खोखला दावा करते हैं ,इनके शासन में मुसलमानों के साथ निम्नांकित जुल्म लगातार हो रही है ...........।


# अरबी और फ़ारसी जो हमारी धार्मिक व सांस्कृतिक भाषा है इसे मैट्रिक के सिलेबस से 2006 से ही लगातार अलग करने का सफल प्रयास किया जा रहा ..................
#12862 उर्दू टीचर के स्थाई पोस्ट (परमानेंट पोस्ट ) पर गैर जरुरी शर्तें लगाने के कारण लगभग 3,500 उर्दू टीचर की बहाली ही हो सकी ,बाकी बचे लगभग 9000 उर्दू टीचर के पोस्ट पर गैरउर्दूदां को बहाल कर दिया गया जो बिलकुल अन्याय और अत्याचार है ...........................।

# TET उर्दू टीचर के 27,000 पोस्ट के लिए बेतरतीब तरीके से परीक्षा लेने के कारण 12,000उर्दू टीचर की जगह खाली रह गई जिससे पूरा करने में अब तक टाल मटोल स काम लिया जा रहा है ...........।

# 2459 मदरसे जिनमे पिछले 27 सालों से बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से हो रही है ,इन मदरसों को अबतक स्थाई नहीं करने के कारण इनमें पढ़ने वाले हजारों बच्चों को सरकारी कल्याणकारी स्किम का लाभ नहीं मिल रहा है ,और यहाँ पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी वेतन नहीं मिलने की वजह कर दय्निये जीवन गुजारने पर मजबूर हैं ............।

" एस डी पी आई " देश की राजनीति को एक नया राज्नितिक्व विकल्प देने के लिए वजूद में आई , " एस डी पी आई " एक देश वेयापी राजनितिक पार्टी है जो देश के 22 राज्यों में सक्रिय है , " एस डी पी आई " शासन से वंचित दलित आदिवाशी और पिछड़े को एक साझा प्लेटफ़ॉर्म दे रही है ताकि गरीब जनता को राजनितिक शक्ति प्राप्त हो सके , आप सभी से अनुरोध है की इस अत्याचार ,अन्याय को समाप्त करने के लिए एक जनसभा 9 जनवरी 2014 दिन के 11 बजे इंद्रा गाँधी स्टेडियम पुरनिया में होने जा रही है ,जिसमे शामिल हो कर एस डी पी आई को बज्बुत करें

# सम्पर्क :-Social Democratic Front of India (SDPI) रहमत मंजिल शरीफ कॉलोनी ,पटना :- 800006 .................।

# मोबाइल :- 08002836301 , 08228094490 , 08084037460

Blog - इस दुकान में इतनी भीड़ क्यों है भाई ?

Blog - इस दुकान में इतनी भीड़ क्यों है भाई ?

Blog - सेयासी आतंक , जुल्म जेयाद्ती एवं नाइंसाफी के खेलाफ एस डी पी आई ने छेड़ा जंग

Blog - सेयासी आतंक , जुल्म जेयाद्ती एवं नाइंसाफी के खेलाफ एस डी पी आई ने छेड़ा जंग

Blog - दलितों के प्रति कानून का रवैया ?

Blog - दलितों के प्रति कानून का रवैया ?

Blog - दलितों के प्रति कानून का रवैया ?

Blog - दलितों के प्रति कानून का रवैया ?