कहा है अब वो तथा कथित राजनेतिक पार्टी/ माननीय नेतागण जो सोमनाथ भारती पर चढाई कर रहे थे हे वीर पुरुषों कहा मुहँ छिपाएँ है ..!!!


Sandeep Saxena
Vincent Furtado
Vimal Jha
Amin Ansari
Anil Bajrangi
Arya Vart
Aap Kurla Derrel
Abhay Mishra
Aam Admi Party Agra


दिल्ली पुलिस के खिलाफ हुए एक 'स्टिंग ऑपरेशन' ने केंद्र और दिल्ली सरकार की अदावत को और हवा दे दी है। रुपये लेते कैमरे में कैद किए गए पुलिसकर्मियों के खिलाफ पहले कार्रवाई कौन करेगा इसे लेकर होड़ मची हुई है। मामले में दिल्ली सरकार द्वारा भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई करने संबंधी आदेश के तत्काल बाद मामले की जांच गृह मंत्रालय के अधीन सीबीआइ को सौंप दी गई है। पुलिस ने भी ऐतिहासिक तेजी दिखाते हुए सभी सात पुलिसकर्मियों को निलंबित कर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला भी दर्ज कर लिया।
पढ़े : सच साबित हुई सोमनाथ भारती की शिकायत
महज तीन घंटे में निलंबन, मुकदमा दर्ज होना और जांच सीबीआइ को सौंपे जाने की यह घटना देश ने पहली बार देखी। दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए गृह मंत्रालय से अनुरोध किया गया था। वहीं दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार की तेजी पर सवाल उठाए हैं।
मंगलवार रात को एक समाचार चैनल पर थानों में चल रही रिश्वतखोरी का सच दिखाया गया। कांस्टेबल से इंस्पेक्टर स्तर तक कई कर्मचारी कैमरे पर रुपये लेते कैद हो गए। बिना शिकायत दर्ज किए दूसरे पक्ष से रुपये वापस दिलाने के नाम पर अवैध वसूली चल रही थी। विभिन्न थानों में तैनात पुलिसकर्मी खुफिया कैमरे से अनजान बेबाक होकर लेनदेन करते नजर आए। रिश्वत के तौर पर एक हजार से लेकर पांच हजार रुपये तक लिए गए। समाचार चैनल पर कार्यक्रम अभी चल ही रहा था कि दिल्ली सरकार ने घटना की जांच के आदेश दे दिए। इसके तत्काल बाद मामले ने सियासी रंग लेना शुरू कर लिया।
दिल्ली पुलिस में भ्रष्टाचार को लेकर गत दिनों मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा पुलिस आयुक्त और सीधे गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे पर सवाल उठाए गए थे। मंत्री सोमनाथ प्रकरण में भी सरकार और पुलिस आमने-सामने खड़े हो गए थे। बताया जा रहा है कि दिल्ली सरकार द्वारा मामले की जांच कराए जाने से स्टिंग में फंसे पुलिसकर्मियों की बुधवार को गिरफ्तारी तय मानी जा रही थी। लेकिन गृह मंत्रलय भ्रष्टाचार के खिलाफ इस कार्रवाई का श्रेय किसी भी सूरत में केजरीवाल सरकार को नहीं देना चाहता था। लिहाजा कानूनी दांव पेंच शुरू किए गए। आनन-फानन में दिल्ली पुलिस ने सीबीआइ जांच की सिफारिश की और तत्काल इसे मंजूर भी कर लिया गया। जानकार बताते हैं कि इससे पहले किसी भी मामले में इतनी तेजी नहीं देखी गई। वजह जो भी हो लेकिन आने वाले दिनों में यह मामला केंद्र और दिल्ली सरकार की खटास और बढ़ा सकता है।जिस तरह से पूरा मामला सामने आया और पुलिस द्वारा पुलिस के खिलाफ जांच पर सवाल उठने शुरू हुए उसे देखते हुए सीबीआइ से निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध गृह मंत्रालय से किया गया था। अनुरोध को स्वीकार कर लिया गया है
Timeline PhotosYesterday at 12:20

मानवाधिकार ने लिया संज्ञान , राहुल कुमार के आवेदन पे कार्रवाई।

बिहार मानवाधिकार आयोग ने मेरे द्वारा दायर करवाई गई याचिका पर सुनवाई करते हुए मुजफ्फरपुर SSP से एक महीना के भीतर जवाब मांगा है जिसमें नवोदय के एक पूर्व छात्र रौशन कुमार पर नाबालिग होने के बावजूद बालिग के कोर्ट में केस चलाने का आरोप लगाया गया है।मामला 2009 का ही है,जब वह दसवीं कक्षा में और 18 वर्ष से कम उम्र का थे। 11 दिसंबर 2013 को इन्हें और इनके माता-पिता को प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी के कोर्ट से जमानत करवाना पड़ा है और 7 अप्रैल 2014 से इनके खिलाफ भी इसी कोर्ट में मुकदमा चलेगी।किशोर न्याय कानून,2000 की धारा 15 के अनुसार किशोर न्याय बोर्ड में इनके मामले पर सुनवाई होना चाहिए और किशोर न्याय बोर्ड को इसी धारा के तहत मारपीट जैसे छोटे मामले पर किशोर का Counselling करके या Parents को direction देकर छोड़ देना चाहिए।

आरोप झूठा है क्योंकि पुलिस निरीक्षक के पर्यवेक्षण रिपोर्ट और ग्रामीणों के गवाही के मुताबिक करीब 8 बजे सुबह इनके घर पर कुछ लोगों ने आकर इनके माता-पिता से मारपीट की और वहाँ पर ये भी उपस्थित थे।इनपर और इनके माता-पिता पर भी बगल के किसी दूसरे जगह पर ठीक उसी समय करीब 8 बजे सुबह मारपीट करने का आरोप है।आखिर एक ही व्यक्ति एक ही समय में दो अलग अलग जगह पर कैसे उपस्थित हो सकता है?इनके खिलाफ गवाह भी वही लोग हैं जिनपर इनके घर पर आकर मारपीट करने के आरोप को सही पाया गया है।जब उस समय ये गवाह इनके घर पर मारपीट कर रहे थे तो फिर ये गवाह ठीक उसी समय बगल के उस जगह पर कैसे उपस्थित हो गए?पूर्व डीजीपी और बिहार मानवाधिकार आयोग के कार्यकारी अध्यक्ष नीलमणी इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं और ये उम्मीद की जा सकती है कि लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए नाबालिग का मानवाधिकार का हनन करने में शामिल दोषी पुलिस वाले पर कार्रवाई करेंगे।आखिर दारोगा को क्यों नहीं दिखा कि दसवीं के एक नाबालिग लड़का पर भी आरोप है?( Rahul kumar के फेसबुक वाल से , 4/2/14)

झूठा फंसाना किसी के साथ गुलाम जैसा व्यवहार करना है।




झूठा फंसाना किसी के साथ गुलाम जैसा व्यवहार करना है।इस देश का 70 प्रतिशत मामला झूठा होता है और इतना ही सही मामला को समाज में दबा दिया जाता है।INDIA AGAINST FALSE CASE के नाम से मैं एक LAW FIRM खोलूँगा और गंभीर झूठे मामले के खिलाफ वकील बनूँगा।झूठे फंसाकर मानवाधिकार के साथ साथ कई मौलिक अधिकारों का भी हनन किया जाता है।झूठे फंसाकर अनुच्छेद 21 यानि जीने के अधिकार का हनन किया जाता है।साथ ही,कभी कभी अनुच्छेद 20(3) और 22 का भी हनन कर लिया जाता है।कई बार जाति,धर्म,आर्थिक पिछड़ापन के कारण भी झूठा फंसाया जाता है जो अनुच्छेद 14 और 15 का हनन है और झूठे मामले के कारण कई की रोजगार चली जाती है जो अनुच्छेद 19 और 21 का हनन है।समाज झूठा मामला से सबसे ज्यादा त्रस्त है।महज किसी के बयान के आधार पर कार्यवाही करना बेवकूफी है।आपलोग सुप्रीम कोर्ट में मेरा द्वारा दायर जनहित याचिका को जरुर पढ़ें।

(Rahul kumar के फेसबुक वाल से)
Falsely implicate someone like slaves with. This is the case the country 70 percent false and suppressed in society as right case. INDIA called the FALSE CASE AGAINST a LAW FIRM I will be serious and false case against lawyer kholunga. false phansakar human rights abuses of fundamental rights along with. Article 21 false phansakar that live with rights abuses., Sometimes the article 20 (3) and 22 are also abuses. many times due to race, religion, economic pichdapan also falsely implicated which article 14 and 15 of the abuses and false cases because many of the jobs moved to which article 19 and 21 abuses. most of the false case stricken society. based on a mere statement to act stupid. public interest litigation filed by Supreme Court aplog to notice my Read. (Translated by Bing)

एक तो उसने मासूमों को पकड़ कर जिंदगियां तबाह किया , अपने धर्म को दुनिया की नजर में बदनाम किया , मगर मासूमों की जिंदगी बर्बाद करने वालों और अपने धर्म को बदनाम करने वालों को आपने सजा न देकर कौन सा अच्छा काम किया ? पेश है तीन रोजिय उर्दू अखबार " दावत "( 26th -28th) में छपी रिपोर्ट का हिंदी रुपंतार्ण

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बेक़सुरों की गिरफ्तारी पर भी सजा का प्रावधान होना चाहिए ।

21 जनवरी 2013 के अखबार में दहशतगर्दी के इल्जाम में मुसलमानों की गिरफ्तारी ,रिहाई और उन पर मुक़दमों से सम्बंधित चार खबरें आई , पहला मामला था हरयाना के मेवात का जहां राज पुलिस को वहां न तो कोई  दहशतगर्द ,न  ही  माजी (past ) में इस मुस्लिम बहुसंख्यक एलाले या उसके आस पास के क्षेत्रों में दह्शात्गादी का कोई घटना भी नहीं घटी जिससे की इस क्षेत्र पर शक व सुब्हात किया जा सके ,लेकिन देहली पुलिस जिस तरह देश के अन्य मुस्लिम बहुल इलाकों को दहशत गर्दी का अड्डा करार देकर वहाँ से बेक़सुरों को गिरफ्तार करने के दरपे है । उसकी नाक के नीचे और पड़ोस में स्थित मेवात कैसे उनकी गिरफ्त में आने से महफूज रह सकता था । चुनानचे आज कल मेवात के मुस्लिम नौजवान उनकी आखों में खटक रहे हैं । अभी दिसंबर में उसने मेवात से दो मुस्लिम नौजवानों हफीज रशीद और शाहीद को उठा कर देहली की जेल में बंद कर दिया , एक तो वह गिरफ्तारी मशकूक थी और ऊपर से अपने दो मुखबिरों लेयाक़त अली और जमीरुद्दीन के हवाले से ये प्रोपेगंडा कर के मुजफ्फरनगर के फसाद पीड़ित लोगों पर भी दहशतगर्दी का शक जाहिर कर दिया ताकि  कांग्रेस के महासचीव राहुल गाँधी के बयान को प्रमाणित किया जा सके ( टाइम्स ऑफ़ इंडिया , 11/1/2014 )
अब उसने मेवात के ही एक गाँव मांडी खेड़ा के रहने वाले मुबारक नाम के एक नौजवान को उठाने की कोशिश की बल्कि उठाकर फिरोजपुर झ्ड़का थाना ले भी गई थी लेकिन मुबारक के आदात और एखलाक और कैरेक्टर से वाकिफ इलाके के लोगों ने जम कर विरोध किया और सड़क पर धरना देकर आमदो रफ़्त  बंद कर दी तो स्थानिये पुलिस हरकत में आई और चोरी छुपे मोबारक को लेजाने वाली डेल्ही पुलिस के चेंगुल से आज़ाद कराया , सवाल ये है की अगर मुबारक बेक़सूर था तो उसे उठाया क्यों गया ? अगर कसूरवार था तो डेल्ही पुलिस ने उसे  क्यों छोड़ दिया ? जवाब इसके अलावा और कुछ नहीं है कि  आदत ,पोलिसी और मजहबी भेदभाव से मजबूर डेल्ही पुलिस एक और बेक़सूर मुस्लिम नौजवान को दहशतगर्दी के इलज़ाम में बर्बाद करना चाहती थी ये सब उस वक़्त हो रहा है जब डेल्ही पुलिस के पास केंद्रीय गृहमंत्री सुशिल कुमार शिंदे दहशतगर्दी के इलज़ाम में गिरफ्तार अल्पसंख्यक युवकों के मामलों  पर नजर्शानी के लिए एक कमिटी तशकील देने की खातिर रियासतों को मक्तूब ( लैटर )भेजने की बात कह रहे हैं और चिराग तले ही अंधेरा है ,खुद इनके मातेहत पुलिस बेक़सुरों को गिरफ्तार करने का सिल्ल्सिला बंद करने  को तैयार नहीं है ,..............................................................!

दूसरी खबर ये थी के  मुरादाबाद की पोटा अदालत ने 11 साल और सात माह बाद तीन मुस्लीम नौजवानों 1. जावेद  उर्फ़ गुड्डू  2. ताज मोहम्मद  3. मकसूद  को  बेक़सूर  साबीत होने के बाद बाइज्ज़त बड़ी कर दिया  , जबकि  चौथे मुल्जीम मुमताज़ मिया के खेलाफ मुक़दमे की सुनवाई  उसी अदालत में अभी जारी है , इन चारों को STF इंस्पेक्टर " के बाल्यान "  ने 13/8/2002 को रामपुर से गिरफ्तार किया था , इन्हें गिरफ्तारी का क्रेडिट तो मिल गया और ये चीज इनके कार्किर्दगी में शामील हो कर इनके प्रमोशन का जरिया भी बन गयी होगी  लेकिन बेक़सुरों को क्या मिला ? इनका करियर और जिंदगी तो तबाह हो गयी ,साढ़े ग्गेयारह साल बाद जो इन्साफ मिला है वह इनके नुक्सान की भरपाई नहीं कर सकता जब किसी को नाक़र्दा  गुनाहों की सजा साढ़े गयारह साल मिल सकती है जिस इंस्पेक्टर ने गैर कानूनी काम किया है किसी के करियर और  जिंदगी से खेलवाड़ किया है उसे इस किये की सजा उसे इसके .........दुगुनी  क्यों नहीं दी जा सकती  ? बेला वजह लम्बी गिरफ्तारी और दहशतगर्दी में फर्क क्या है ? दोनों में जिंदगियां तबाह की जाती हैं , क्या देश का सविंधान और अदालतें सिर्फ आम लोगों को  सजा देने के लिए है ? चाहे  वह गलती करे  या न करे जब आम  आदमी जुर्म करता है उसे सजा दी जा सकती है तो पुलिस अहलकारों के जुर्म करने पर या वर्दी के गलत इस्तेमाल पर सजा क्यों नहीं दी जा सकती ? कसूरवार पुलिस वालों को सजा न देने का नतीजा ये है  कि  ओ बेक़सुरों पर जेयाद्ती कर  के अपना उल्लू सीधा करते रहते हैं ...............................................!

तीसरी खबर ये थी कि उत्तर प्रदेश के अलग अलग जेलों में बंद बेक़सूर नौजवानों पर से मुक़द्मात वापस लेने के मामले की सुनवाई मुल्तवी करने की दरखास्त राज सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच से उत्तर प्रदेश सरकार ने ये क़दम उस वक़्त उठाया जब बेंच ने सरकार से कहा था ओ कथित दहशत गर्दी के इलज़ाम में जेलों में बंद नौजवानों पर से मुक़दमों को नहीं उठा सकते कयोंकि वह मुक़द्मात मरकजी हुकूमत (केंद्र सरकार के कानून के तेहत दर्ज किये गए हैं इसलिए इन्हें वापस लेने के लिए केद्र की इजाजत लेनी जरुरी है , एक तरफ तो केंद्रीय गृहमंत्री राज सरकारों से अल्पसंख्यक नौजवानों के खेलाफ मुक़द्मात पर विचार के लिए मक्तूब (पत्र) भेजने की बात कह रहे और दूसरी  तरफ रेयास्ति हुकूमत रेहायाई के लिए कुछ करना चाहती है तो केंद्र का कानून रुकावट बन रहा है ,तीसरी तरफ मिस्टर शिंदे की रियासत महाराष्ट्रा में इन्ही की पार्टी कांग्रेस की हुकूमत के सरकारी वकील राजा ठाकरे माले गाँव बम धमाके  के नौ मुस्लिम आरोपियों की रिहाई में रुकावट खड़ी कर रहे हैं जिनको  " एन आई ए " ने क्लीन चीट दे दी  है ....................................................................!सरकारी वकील का सनसनी खेज दावा तो और भी गौर तलब है कि इस मामले की  enquiry  पहले महाराष्ट्र A T S और CBI ने की थी  और इनकी तफ्तीश में इन नौ आरोपियों पर इलज़ाम सही था बाद में सियासी दबाव और  सियासी मकसद के तेहत मामले को एन आई ए के सुपुर्द कर दिया गया जिसने इन्हें क्लीन  चीट दे दी , सवाल  ये है की ATS और सी बी आई ने किसी के इशारे पर या किसी  की मर्ज़ी के खेलाफ enquiry की थी और एन आई ए को मामला सोंपने के लिए किसका और  क्या सेयासी दबाव था ? और इसमें सेयासी मकसद क्या था ? फिर  ये भी सवाल  पैदा  होता है की क्या एन आई ए को अब  तक तमाम मामले किसी सियासी दबाव या किस मकसद  के तेहत सोंपे गए हैं , और अब तक जिन जिन मामलों की enquiry  की है ओ गलत  है । फिर जिस ATS और इसकी enquiry को विश्वस्निये कहा जा रहा है इसकी असलियत भी औरंगाबाद हथियार जब्ती मामले में सामने आ चुकी है जब इसके दो गवाहों ने इनके हवाले से अदालत में दाखिल बयान को गलत बताते हुए अदालत को बतया कि न तो उनहोंने कोई बयान दिया था और न ATS  ने इनके हवाले  से दाखिल बयान  को पढ़ कर सुनाया था ..........................................................................!

एक दुसरे मामले में समाजी कार्यकर्ता नरेंदर दाभोलकर के कतल के मामले में भी गिरफ्तार मनीष नागौरी ने अदालत के सामने ये सनसनी खेज खुलासा किया है कि एक तो इसे सियासी दबाव के तेहत गिरफ्तार किया गया दुसरे महाराष्ट्र ATS राकेश मारिया ने इकबाले जुर्म के लिए मजबूर किया था और इसके एवज में 25 लाख रूपये की पेशकश की थी , गर्ज ये कि दहशत गर्दी के मामलों में अब तक जितने बेक़सूर व बाइज्ज़त बड़ी हो चुके  हैं ,पोटा के मामलों के जायेजे में भी ये हकीकत सामने आ चुकी है कि  बेक़सूर को ही सजा मिलती है खाह वो टार्चर की सकल में हो  या क़ैद  की सूरत में कसूरवार पुलिस वालों को नहीं जबकि  इनकी दोहरी गलती होती है एक  तो  ओ  लॉ एंड आर्डर  की सूरतेहाल को बेहतर नहीं रखते उनकी लापरवाही और गफलत की वजह से सरपशंद अनासीर ( (असामाजिक तत्य ) अपने मकसद  में कामयाब हो जाते हैं दुसरे अगर ओ हरकत  में  भी  आते हैं तो सिर्फ बेक़सुरों को गिरफ्तार करते हैं ,आज तक किसी भी हुकूमत और अदालत  ने नोटिस नहीं लिया  कि आम लोगों को इनकी नाक़रदा गुनाहों की  सजा 10 -10 साल  , और 15 -15  साल कैद के तौर पर क्यों मिल जाती है ? और  पुलिस को उसकी गलतियों की सजा क्यों नहीं होती ?

महज़ 1 महीना पुरानी दिल्ली आम आदमी सरकार से आप और क्या चाहते हैं ?


Aam Aadmi Party Banswara

महज़ 1 महीना पुरानी दिल्ली आम आदमी सरकार से आप और क्या
चाहते हैं ?

✪लालबत्ती और VIP कल्चर समाप्त !
✪400 युनिट से कम पर बिजली के बिल आधे !
✪20,000 लीटर पानी, प्रत्येक कनेक्शन परप्रतिमाह मुफ्त !
✪दिल्ली से रिटेल में एफडीआई (FDI) समाप्त !
✪ठण्ड से परेशान गरीब असहाय लोगों के लिए 300 रैनबसेरे !
✪बिजली कंपनियों के लेखे जोखे की CAG द्वारा जाँच के आदेश !
✪दिल्ली जलबोर्ड में 800 कर्मचारियों का तबादला, 3 सस्पेंड !
✪दिल्ली जलबोर्ड जलबोर्ड घोटाला में 56 अधिकारी फंसे !
✪भ्रष्टाचार से लडने के लिए एंटी-करप्शन 1031 और 25356971 नंबर जारी !
✪नर्सरी एडमिशन हेल्‍पलाइन नंबर, 011-27352525 नंबर जारी !
✪डोनेशन के नाम पर स्कुलों में सरेआम होनेवाली सौदेबाजी बन्द !
✪भ्रष्टाचार पर की जा रही है लगातार सटीक कार्यवाही !
✪दिल्ली से दलाली प्रथा समाप्त !
✪पुलिसवालें अपने घरखर्च के लिए अपनी सेलरी इस्तेमाल करने लगे हैं !
✪राशन माफियाओं की नाक में नकेल ।
✪शराब माफियाओ के खिलाफ लडते हुए शहीद होने वाले दिल्ली पुलिस के जवान के परिवार को एक करोड रूपये का मुवायजा !
✪संगम विहार, देवली गाँव जैसे इलाको में पानी माफियाओ पर शिकंजा...बौरवेल लिए सरकारी कब्जे में !
✪दिल्ली में मोजूद बंग्लादेशी घुसपैठिए शॉर्टलिस्ट !
✪तेजी से बनाई जा रही हैं मोहल्ला सभाएँ !
✪दिल्ली जनलोकपाल बिल का फाइनल ड्राफ्ट तैयार !
✪सवराज बिल पर काम चल रहा है !
✪महिला सुरक्षा दल बनाने पर काम जारी !
✪दिल्ली सरकार के अंतर्गत ठेकों पर काम करने वाले लगभग एक लाख कर्मचारियों को स्थायी करने का ऐलान !
✪दिल्ली में कम से कम 20 से 30 फीसदी भ्रष्टाचार कम हुआ !
✪दिल्‍ली के लोधी कॉलोनी इलाके में एक रिक्‍शावाला ने किया एनडीएमएसी के अस्‍पताल का उद्घाटन !
✪दिल्ली आम आदमी सरकार ने तेज भागते बिजली मीटरों की जांच कराने का फैसला !
✪दिल्ली सरकारी स्कूलों में सुधार लाने पर काम जारी !
✪स्कूलों के अध्यापकों का काम करने का समय बढ़ा कर 45 घंटे/हफ़्ता किया !
✪दिल्ली में एक महीने में बदलाव आया !
✪जनता पर हुए अत्याचारों के लिए धरना !
✪दिल्ली सरकार में 8000 से ज्यादा भर्तियां !
✪दिल्ली में 83% लोग आम आदमी की सरकार के काम से संतुष्ट - TOI (The Times of India) सर्वे !
✪दिल्ली में 76% लोग दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के काम से संतुष्ट - CNN-IBN-CSDS POLL !

दिल्ली आम आदमी सरकार ने एक महीने में मध्य प्रदेश बीजेपी की, राजस्थान बीजेपी की, छत्तीसगढ़ बीजेपी की और मणिपुर कांग्रेस की चुनी हुई सरकार से ज्यादा काम किया...यही सच्चाई है...कोई भी तुलना करके देख ले !
कांग्रेस बीजेपी के हाथों बिका हुआ मीडिया दिल्ली आम आदमी सरकार इन कामों पर कुछ नहीं बोल रहा...इन सब कामों को दबाने के लिए सोमनाथ भारती और धरने वाला मुद्दा उछाला जा रहा है !!! जागो जनता जागो !!!

I have read the speech of honorable president of India "Pranav Mukherjee

Rajnesh Kumar Pandey ( from Facebook)

I have read the speech of honorable president of India "Pranav Mukherjee," which he had delivered in the pre-eve of 26 January. This time the speech was not looks like the speech of president. If you analyze than I am confident that one common man also understands that what actually he wants to say. His total focus was on the movement of ‘AAM AADMI PARTY.’ He called is as a whimsical, catastrophe for the society. One thing I would like to add here. He is the President of this country. Everyone knows that if President speaks than he give a concrete, meaningful and visionary points in his/her lecture. Might be he/she is a political person but at least he/she has to maintain the dignity of the post. There are 28 states in our country and union territory also. If a chief of a country speaks than he/she must give a concrete which touches the whole. In our country everyday there are numerous organizations and political parties who are doing strike, demonstration and many other way of protest. It is not an area where a man with greater post and dignity should focus always. People have respect and expectations with President, Prime Minister and higher authorities. It is their responsibility to show a greater development model and a vision to the countrymen. But unfortunately, it was lacking.
Banani Supriya Das
According to various news channels.. Honb'l President Dr. Mukherjee is maintaining the tradition of previous presidents like Sir Radhakrishnan, Dr. KR Narayanan...
1Sunday at 20:23
Madhuchhanda Das
Gud analysis...i also gone through his lecture..i too found it ws not up 2 the mark.. He should learn lesson from kalam saab..for me he is da ultimate...
Edited2Yesterday at 21:31
Lalit Kuchalia
president ka kahna ye bilkul sahi hai ki lokubhavan arajakta kabhi bhi shasan ka option nahi ho skti
Sunday at 22:02
Ambarish Pathak
We are suffering from the political systems of our country.our President is also part politics.when the common man vote for president then the system will change.the president should be non political person. president ka control 10 janpath se hota hai.this should be stop.
1Yesterday at 02:26
Rajnesh Kumar Pandey
Lalit Kuchalia प्रेसिडेंट पूरे देश को एक विजन दिखा सकते हैं अपने भाषण में, न कि किसी एक पार्टी पर बोल कर अफनी छवि को नुकसान पहुँचाएं। पार्टियों पर बात करने को राजनीतिक पार्टियां पहले से मौजूद हैं। ये कांग्रेस पार्टी का लिखा भाषण पढ़ रहे थे, लगता है।
Today at 01:21
Rajnesh Kumar Pandey
Madhuchhanda Das I am totally agree with u. He is congress president. not the president of India.
1Today at 01:22
Rajnesh Kumar Pandey
Ambarish Pathak आपने सही कहा अम्ब्रीश भाई।
Today at 01:23

कल्याणपुर थाना कांड संख्या-261/13 में पुलिस द्वारा की गई मनमानी



FIR दर्ज कराने वाले रामस्नेही शर्मा के आरोपों के अनुसार पुलिस ने धारा नहीं लगाया है।मेरे द्वारा इस कांड का समीक्षा करने के बाद मामला सामने आया है कि पुलिस ने डकैती का धारा 395 लगाने के बजाय चोरी का धारा 380 लगाया है।मारपीट में गंभीर जख्म पहुँचाने का धारा 325 के बजाय साधारण जख्म का धारा 323 लगाया है,हथियार से गंभीर चोट पहुँचाने का धारा 326 के बजाय हथियार से साधारण चोट पहुँचाने का धारा 324 लगाया है।रंगदारी करने के लिए मारपीट कर डराने धमकाने का धारा 387,महिलाओं के साथ बदसलूकी का धारा 509,धमकी देने का धारा 506,गृह-अतिचार का धारा 448,आग लगाकर क्षति पहुँचाने का धारा 435 और 5 या 5 से ज्यादा लोगों द्वारा दंगा फसाद करने का धारा 147,148 और 149 के तहत मामला दर्ज किया ही नहीं गया।अनुसंधानकर्ता द्वारा मामले को भूमि-विवाद बताकर रामस्नेही शर्मा पर समझौता करने का दवाब बनाया जा रहा है।यदि भूमि-विवाद के कारण 11 लोगों द्वारा घर पर हमला करके लूटपाट की जाती है और शरीर को जख्म पहुँचायी जाती है तो क्या वह अपराध नहीं होता?अनुसंधानकर्ता को निलंबित किया जाना चाहिए।
Kalyanpur station scandal-261/13 by police in arbitrary FIR lodging according to the ramasnehi Sharma charges police section is not to review the case of my case unfolded after police robbery section instead of section 395 of the theft 380. abusing co-star in section 325 of the pick instead of simple wound scars of section 323 hasSection 326 of hurting, arms instead of serious weapons to normal section of hurting 324. rearranged to make intimidating bully of abusing co-star section 387, women section of section 509 of the badly handled, threaten 506, House-trespass of section 447, section 435 of harming and torched 5 or 5 section to riot by more than people are anticipating trouble 147148 and not only booked under 149. researcher by the case As a land-dispute should be created to settle on ramasnehi Sharma. if ground-attack at home by 11, due to the controversy by looting and scarred body is what he pahunchayi crime should be suspended? researcher. (Translated by Bing)

दुनिया हैरान है ! परीशान है , नरेंदर मोदी की हुंकार रैली (27/10/13 ) ब्लास्ट के तुरंत बाद " ऑन डी स्पॉट "सबसे पहले पकड़ा जाने वाला ,इस विडियो में दिखने वाले सख्श को जमीन खा खा गया या आसमान , कौन था ...........?

दुनिया हैरान है ! परीशान है , नरेंदर मोदी की हुंकार रैली (27/10/13 ) ब्लास्ट के तुरंत बाद " ऑन डी स्पॉट "सबसे पहले पकड़ा जाने वाला ,इस विडियो में दिखने वाले सख्श को जमीन खा खा गया या आसमान , कौन था ? कहाँ का रहने वाला था ?किस का बेटा था ? बाप का नाम क्या था ? कहाँ से आया था ? किस बुनियाद पर पुलिस ने " ऑन दी स्पॉट " इस को पकड़ा ? किस बुनियाद पर इसे छोड़ दिया गया ? यहाँ काबिले गौर बात ये है कि मीडिया में खबर आई थी के गाँधी मैदान से विडियो में दिख रहे संदिग्ध नौजवान के अलावा कुछ और लोग पकड़े गए थे , मगर न जाने बाद में क्या हुआ इन चेहरों को तुरंत सीन से गायब करते हुए इम्तियाज अंसारी ,(तहसीन समस्तीपुर )और बाकी लोग मास्टरमाइंड हो गए , मगर उपरोक्त सवाल के अलावा इस सवाल का जवाब कौन देगा की करीब 30 cctv कैमरा के रहते हुए बम प्लांट कैसे हुआ ? प्लांट किया तो चेहरा कैद कैमरा में क्यों नहीं हुआ ? बिहार पुलिस के सैकड़ों आला अधिकारी ,हजारों पुलिस सीपाही , सैकड़ों प्राइवेट गार्ड्स ,और बीजेपी के हजारों वालंटियर्स के रहते हुए अमन के दुश्मन ऐसी शरारत करने में कामयाब क्यों हो गए ? इनसे भी बड़ा सवाल ये कि इतने सारे आवश्यक सवालों का जवाब तलाश करने में किसी को इंटरेस्ट क्यों नहीं ? आखिर इन सवालों का जवाब तलाशने से रोक कौन रहा ? कौन है वह सख्श क्या करता है वह सख्श जो इन सवालों को तलाशने नहीं देना चाहता ? क्या वह सख्श आतंकवाद और देश की शांति और उन्नति का दोस्त हो सकता है ?क्या वह सख्श सच्चा देश भग्त हो सकता है ? क्या वह सच्चा हिन्दू या सच्चा मुसलमान हो सकता है ?
http://m.youtube.com/watch?v=W...