क्या इसके बावजूद मोदी को प्रधान मंत्री बनाया जाना चाहिए ?


( Awadhesh Yadav के फेसबुक वाल से )

Yesterday at 22:56 

कई दिनों से सुन रहा हूँ मोदी के लहर के बारे मैं। . आज इस ही सम्बन्ध में लिखरहा हूँ। मोदी समर्थक पोस्ट न पढ़े तो बेहतर होगा

मोदी = ५६ इंची सीने वाला बदमाश , जिसे अर्थशास्त्र का अ भी मालूम नहीं
मोदी = आडवाणी यानि अपने गुरु को धोका दिया , जनता क्या चीज़ हे
मोदी = पत्नी को बिच मँझदार मैं छोड़ा
मोदी = अपने आप को हिन्दू राष्ट्र वादी कहने वाला , किन्तु जब हिंदुत्तव पर सवाल कये गए तो दम दबा कर भगा
मोदी = गुजरात दंगो का अपराधी
मोदी = १२०० से अधिक मुसलमानो का हत्यारा
मोदी = के गुजरात मैं १६ ज़िलों मैं 1.94 लाख कुपोषित बच्चे
मोदी = अहमदाबाद में ४ साल में ८० % लोगों को बार कोडेड राशन कार्ड वितरित नहीं किया गया
मोदी = के गुजरात में कुपोषण दर 44.7 इथोपिया , सोमालिया से कहीं आगे
मोदी = के कथन अनुसार मेरा कोई नहीं। जबकि भाई , माँ , मित्र , बेहेन सभी मौजूद
मोदी = अपनी सभाओं मैं ५ रूपये कि भीख मांगी।
मोदी = भ्रष्ट येदुरप्पा को पार्टी में शामिल किया
मोदी = अपने लिए ज़ीरो रिस्क सिट ढूंढी
मोदी = केजरीवाल के डर से वाराणसी से चुनाव लड़ने का फैसला किया
मोदी = राज ठाकरे जेसे लोगोंसे हिंदुतव के नाम पर समर्थन माँगा
मोदी = मानसिक स्थिति ठीक नहीं। कुछ भी बोल देता हे। जिसका इतिहास से कोई लेना देना नहीं।
मोदी = ट्वीटर पर ८० % से ज़यादह फोल्लोवेर्स जाली। यानि नकली
मोदी = के गुजरात मैं हर तीसरा नेता अपराधी
मोदी = के शासन काल मैं पशु क़त्ल खानो का इज़ाफ़ा , गुजरात मैं
मोदी = सिखों कि ज़मीन पर अव्देध कब्ज़ा। कहा पंजाब वापिस जाओ
मोदी = पकिस्तान से चंदा मांग कर देश को शर्मसार किया
मोदी = के गुजरात मैं प्रथमिक चिकित्सालयों कि दुर्गति
मोदी = के राज मैं गुजरात से ७,२४५ बच्चे लापता
मोदी = सरकार बनाने , मूर्ति बनाने पर २००० करोड़ खर्चे
मोदी = गुजरात मैं कम्पनियों को ३३००० करोड़ कि सहूलीयत दी
मोदी = आयुर्वेद कॉलेज मैं १० साल में एक भी अध्यापक नहीं
मोदी = साबर मति तट पर अवैध रेत खनन
मोदी = गुजरात में पिछले ५ साल में १० लाख गो मांस पकड़ा गया
मोदी = गुजरात मैं प्रति वर्ष २२०० कि दर से बढ़ता क़र्ज़ , जनता पर
मोदी = विक्लिप्स का नाम लेकर झूटे पोस्टर बांटे
मोदी = सिखों से उनकी ज़मीन छिनी
मोदी = सिखों से कहा वापिस पंजाब जाओ
मोदी =सद्भावना उपवास में २५ ज़िलों को 35,453 करोड़ देने का वादा किया। मगर किया कुछ नहीं
मोदी = गुजरात मैं बलात्कार दर बढ़ी
मोदी = गुजरात पर कुल कर्ज़ा। १५३० ,००० ,००० ,००० करोड़ यानि प्रति वयक्ति पर पच्चीस हज़ार चार सो नवासी
मोदी = सबसे महंगे टेंडर के बावजूद अदानी को दिया बिजली कॉन्ट्रेक्ट
मोदी = इशरत जहाँ , सोहराबुद्दीन फ़र्ज़ी मुठभेढ़ करायी
मोदी = दंगो के वक़्त अहमदाबाद में घूम २ कर लोगों का उत्साह बढ़ाय ताके दंगा हो सके
मोदी = गुजरात के हर ३ नेता में से एक पर अपराधिक मामला दर्ज
मोदी = जस्टिस हस्बेट सुरेश के अनुसार गुजरात दंगो का मास्टर माइंड मोदी
मोदी = ३० ००० करोड़ कि आसरम कि संपत्ति का कभी हिसाब नहीं लिया
मोदी = २०१२ मैं ज़बरन धन संगर्ह, मगर हिसाब कोई नहीं
मोदी = राम मंदिर के नाम पर करोडो का चंदा लिया मगर हिसाब नहीं दिया
मोदी = प्रति मेगावाट सोलर बिजली का खर्च १० करोड़ बताया

लहर तो वाक़ई मैं चल रही हे। गलती से कुछ छूट गया हो तो माफ़ी चाहता हूँ लहर में आ कर ऐसा हो जाता हे। जो छूट गया हो आप खुद ऐड कर लीजियेगा
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Zeeshan Siddiqui
Iska nam hi faku hai
Like · 1 · Yesterday at 23:15
Sandeep Yadav
Aapane sahi likha hai bhai
Unlike · 3 · Yesterday at 23:19
Pradyumna Yadav
Well done
Like · Today at 08:12
Guddu Roy
good bhai. modi ko desh droh gosit kar dena chiye.
Like · 1 hour ago
Munna Kumar Yadav
very Good bhai
Like · 59 minutes ago

" यू ए पी ए " कानून काला ही नहीं बल्कि अँधा कानून है , इसके तेहत बंद होने वालों को सिर्फ अँधेरा मिलता है , इस कानून को विदेश में बैठे हुए भारत के आकाओं के इशारे पर बनाया गया , हमें ऐसे लोगों को चुनना होगा जो इस अंधे कानून को खतम करा सके (जनाब मुमताज़ आलम , चेयरमैन बिहार मदरसा बोर्ड )

पटना 3 मार्च ।

विभिन संगठनों के बैनर तले सोमवार को यहाँ पटना के इतिहासिक अंजुमन इस्लामिया हॉल में यू ए पी ए कानून की मुखालफत में एक बड़ी कांफ्रेंस आयोजित की गयी । जिस में इस कानून को फ़ौरन ख़त्म करने का लोगों ने एक सुर में मांग की ।कांफ्रेंस की अध्यक्षता बिहार रियासती हज कमिटी के चेयरमैन मौलाना अनिसुर रहमान कासमी ने की । इस कांफ्रेंस में विभिन संगठनों के नेताओं के अलावा बड़ी तादाद में ओलेमा एकराम ,आइमा मसाजिद , दानिश्वर और विशेषज्ञ कानून और विभिन्य सियासी जमातों के लोग शामिल हुए ।

यू ए पी ए कानून के सामने आते ही दानिश्वेरान और समाजी सरोकार के कार्यकर्ताओं ने इस अंधे कानून और इस की शख्ती के सिलसिले में नेहायत परिशानी में पड़ गए । उनका मानना था की  यू ए पी ए  कानून हमारे मुल्क के नेजामे अदल यानी इन्साफ करने के तरीकों के हिसाब से यह कानून एक सियाह धब्बा है । इंसान के तमाम पहलू इसके ख़त्म करने करने की मांग करता है ।हमारा मुतालेबा है कि इस एक्ट को फौरी तौर पर  ख़त्म किया जाए ।कयोंकि अगर यह कानून इसी शक्ल में आगे भी नाफ़िज रहा तो इसके बुड़े परिणाम सामने आयेंगे । कयोंकि  संकीर्ण जेहन और बिमार जेहन के अफसरों को खुला मौका मिल जाएगा की वह किसी ख़ास गिरोह , जमात ,और संगठन के खेलाफ इसका प्रयोग आगे भी करते रहेंगे ।

यह कानून सबसे जेयादः गैर कानूनी है । जिसमे कानूनी चाराजुई की कोई गुंजाइश बाक़ी नहीं रह जाती ।
आज भी हजारों बेक़सूर नौजवान जिनका संबंध मुसलमानों ,सिखों ,दलितों और आदिवासी समुदाय से ,इस कानून के तेहत बेला वजह बंद कर रखे गए हैं । इस कानून के कुछ दफात तो नहायत ही गैर स्वैन्धानिक और गैर इंसानी है । इसी सिलसिले में 3/3/14 को अंजुमन इस्लामिया हॉल में  एक स्पेशल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया ,जिसमें दानिशवरों की बहुत बड़ी तादाद शरीक हुई और उसने यू ए पी ए कानून के मुख्तलिफ पहलुओं पे चर्चा करते हुये अपनी अपनी राये पेश की .........
मदरसा बोर्ड के चेयरमैन मुमताज़ आलम ने कहा कि  ....................................................................

यू ए पी ए कानून एक अँधा कानून है ,कयोंकि  इस कानून के तेहत गिरफ्तार लोगों को सिर्फ और सिर्फ अँधेरा मिलता है .....................................................।

इस कानून को विदेशों में बैठे हुए आकाओं के इशारे पर संपर्दायिक ताक़तों ने बनवाया है ।।।।।।।
आपको समझना होगा कि हमें ऐसे लोगों का आने वाले इन्तिखाब में इस अंधे कानून के बारे में बात करना होगा ,जिसमें बेक़सुरों को बंद किया जा रहा है .........................................................

मौलाना सैयद निजामुद्दीन अमीरे शरियत ,इमारते शरिया ने ख़त के जरिये कहा कि ................................

पहले टाडा और पोटा लाया गया -और अब यू ए पी ए लाई गयी है । इमारते शरिया इस कानून के खेलाफ पहले से ही तहरीक चला रख्खी है । इस कानून में बेक़सूर पिसे जा रहे हैं ..............इस कानून को जल्द से जल्द खत्म करना होगा ...............

मौलाना वली रहमानी अपने न आने के लिए मा'जरत का इज़हार किया और अपने भेजे गया लिखित संदेश के जरिये कहा कि  मुझे अफ़सोस है कि हम इस कांफ्रेंस में शरीक नहीं हो रहे हैं । इस लोकतांत्रिक  देश में ऐसा  कानून जिस में  बेक़सूर लोगों पर जुल्म यू ए पी ए कानून के जरिये किया जा रहा है , इस कानून से विशेष कर मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है । ये कानून असल में टाडा और पोटा से भी जेयादा खतरनाक है । इसे जल्द से जल्द वापस लिया जाना चाहिए ताकि बेक़सूर लोगों को इसका शिकार न होना पड़े .........................................................................................।

इमारते शरिया के नाजिमुल आला मौलाना अनिसुर रहमान काश्मी ने कहा कि जुल्म के खेलाफ आवाज उठाने के लिए हम यहाँ पर जमा हुए हैं , दुनिया में हमेशा संच की जीत हुई  है । हमारे देश की सरकार यू ए पी ए के जरिये लोगों पर जुल्म ढा रही है ।इस मुल्क में टाडा और पोटा और अब यू ए पी ए के जरिये 76 हजार लोगों को बंद किया जा चूका है , इसमें जेयादा तर मुसलमान हैं । यह भी कहने की जरुरत नहीं है गुजरात में किस समुदाय के लोगों को बंद किया गया ,और आसाम में किसे । सबसे जेयादा मुसलमान इस कानून के शिकार  हुए हैं ।इस कानून को बनाने में कथित सेक्युलर पार्टियां बराबर की शरीक हैं , जो पार्लियामेंट के  बाहर मुसलमानों की हिफाज़त की  बात करती है और पार्लियामेंट के अन्दर ऐसे कानून बनवाने में सहयेता करती है जो इस देश के मासूमों  को कुचल सके ।
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लोकसभा चुनाव 2014 के लिए भाजपा की पहली सूची जारी :

लोकसभा चुनाव 2014 के लिए भाजपा की पहली सूची जारी :
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नरेंद्र मोदी - वाराणसी
राजनाथ सिंह - लखनऊ 
डॉ. मुरली मनोहर जोशी - कानपुर 
कलराज मिश्र - श्रावस्ती 
उमा भारती - झांसी 
कल्याण सिंह - एटा 

योगी आदित्यनाथ - गोरखपुर

देश की बटवारा के लिए सरदार बल्लभ भाई पटेल के किरदार (भूमिका ) से संघ परिवार की अनदेखी !



 आरिफ अजीज ( भोपाल )

संघ परिवार और हिन्दुस्तान की तकसीम (बंटवारा )का जिम्मेदार मोहम्मद अली जिन्नाह और मुसलमानों को करार देता रहा है , हालाकि  हकीकत ये है कि  जिन्नाह की की जिंदगी का बड़ा हिस्सा कौम परस्तों (देश भगतों ) के साथ गुजरा , अगर कांग्रेस  की कयादत , उनके साथ बराबरी की सलूक करती तो वह कभी देश की बंटवारा का नारा नहीं लगाते

जिन्नाह की 1947 में की गई जिस तकरीर ( भाषण ) का आज हवाला दिया जाता है ।उससे तीस साल पहले 1917  में उन्होंने अपना नोक्ताए नजरिया ( स्टैंड ) क्लियर कर दिया था , वह ब्रिटिश पार्लियामेंट की मोकर्र  ( नियुक्त )की गयी पारलिमानी कमिटी  (सेंट्रल कमिटी ) के सामने गवाही दे रहे थे , एक सवाल के जवाब में उन्होंने  वाजेह अल्फाज अथवा साफ़ लफ्जों था कि  " मैं एक हिंदुस्तानी कौम परस्त (  देश भक्त ) की हैसियत से कहना चाहूँगा के जितनी जल्द मुमकिन हो उतनी सर'अत से हमें हिन्दू और मुसलमानों के बीच इख्तेलाफ ( मतभेद ) ख़त्म करना चाहिए , वह दिन जब आएगा तो मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहेगा "  । जिन्नाह की सेक्युलर फ़िक्र व नजर ( सेक्युलर सोंच ) की इससे बेहतर मिशाल और क्या हो सकती है

     जो अनासिर ( तत्य ) मुल्क की तक्सीम  का मुजरीम मुसलमानों और जिन्नाह को साबीत करते रहे हैं , उन्हें मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की खुद्नोश्त सेवांह " इंडिया विन्स फ्रीडम " के गैर्मत्बुआ  औराक़ में जाहिर की गई उस राय पर भी तवज्जो ( ध्यान ) देना चाहिए जिस में दो टूक अलफ़ाज़ में उन्होंने बतया था कि  हिंदुस्तान की बंटवारा के लिए जिन्नाह से जेयादा सरदार पटेल और जवाहर लाल नेहरु जिम्मेदार थे ,  संघ परिवार और बाज नाम नेहाद तरक्की पशंदों ( कथित प्रगतिशील लोगों ) जिन्नाह और मुसलमानों के मफ्रुजा जुर्म मबनी (आधारित ) जो चार्जशीट तैयार कर रख्खी थी मौलाना आज़ाद की कलम ने धज्जियां उड़ा दी , संघ लोगों का ये भी कहना है कि  मुसलामानों ने दो कौमी नजरिया ( two nation policy ) को कबूल करके अपने लिए जिस जुदागाना वतन का मुतालेबा किया था , वह उन्हें पाकिस्तान की हैसियत से मिल गया , अब आज़ाद हिन्दुस्तान में उनका न कोई हक है और न हिस्सा , लिहाज़ा मुसलमानों को यहाँ उनके रहमों करम पर रह कर दुसरे दर्ज़ा की शहरी की जिंदगी गुजारनी चाहिए

मौलाना अबूल कलाम आज़ाद 1940 से 1947 तक  कांग्रेस अध्यक्ष के ओहदे पर रहे ,इस पुरे दौर के हालात और शवाहिद पर उनसे जेयादा मा'तबर और मुस्तनद शहादत आखिर किसकी हो सकती हैं?
मौलाना आज़ाद की इस राये से जिन लोगों के मफ्रुजात पर चोट लगी वह भी यह नहीं कह सकते कि मौलाना कहीं गलत बेयानी  के मर्तकब हुए हैं ,हकीकत यह कि  जवाहर लाल नेहरु से एक के बाद एक गलतियां सरजद हुईं , जिस पर अफ़सोस का इज़हार करते हुए मौलाना आज़ाद ने गैर मत्बुआ औराक़ में लिखा था के एक फैसलाकुन मोड़ पर कांग्रेस की अध्यक्षता से हटने का फैसला उनकी सियासी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती साबीत हुआ , आल इंडिया कांग्रेस कमिटी कैबिनेट मिशन प्लान मंजूर कर चुकी थी ,अगर मौलाना सदर ( अध्यक्ष ) के ओहदे पर होते तो जवाहर लाल नेहरु और उनके साथियों को वह सब करने का मौका जो बहैसियत कांग्रेस अध्यक्ष उन्होंने किया । मौलाना आज़ाद का बस चलता तो वह आज़ादी मिलने में कुछ साल की ताखीर (देर ) गवारह कर लेते लेकिन देश  की बंटवारा को हरगिज कबूल नहीं करते , इसके  बर'अक्स ( उलट ) जवाहर लाल नेहरु और सरदार पटेल जेहनी तौर पर ( यानी  मानसिक तौर पर ) बंटवारा के लिए राजी हो गए और गांधी जी की कुवते मजाहेमत ( विरोध करने की शक्ति )  जवाब दे चुकी थी तो मजबूरन मौलाना आज़ाद  ने भी एक सानेहा ( घटना) के तौर पर तकसीम ( बंटवारा को कबूल करने  का फैसला कर लिया , ताहम इस का  मलाल उनको हमेशा  रहा , तारीख के सफ्हात में ये हकीकत महफूज है कि कांग्रेस के सदर (अध्यक्ष )की हैसियत से कैबिनेट मिशन प्लान की तैयारी और अपने कांग्रेसी साथियों को उसका हमनवा बनाने  में मौलाना आज़ाद ने बड़ी मेहनत की और उस वक्त जबकि कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने इस पर अपनी मंजूरी की मोहर लगा  दी तो जवाहर लाल  नेहरु के एक ब्यान ने सारी मेहनत पर पानी फेर दी , लिहाज़ा मुल्क के बंटवारे  के लिए सिर्फ जिन्नाह या मुसलमानों को जिम्मेदार करार देना सच्चाई से मुंह चुराना है , इसमें जवाहर लाल नेहरु और सरदार पटेल का भी बड़ा योगदान रहा  है , संघ परिवार देश की  बंटवारे को मुसलमानों का सबसे बड़ा जुर्म करार देता है ,इसी लिए वह सरदार पटेल की भूमिका से अनदेखी करता रहा है , और  बीजेपी अध्यक्ष लाल कृष्ण अडवाणी के बयान पर आगबगुला है
( उर्दू दैनिक पिन्दार पटना दिनांक 27/2/14 )

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3 QUESTIONS AGAINST MODI ..............................

3 QUESTIONS AGAINST MODI
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1.NO CLEAN CHIT TO NAREDRA MODI

What we understand clean chit is not actually the clean chit.The Metropolitan Magistrate Of Ahmedabad has acquitted Modi on the ground of the lack of evidences.Many Judgements have been delivered by the Supreme Court and the High Courts which clearly state that one who is acquitted on the ground of the lack of evidences is not clean.
You ought to observe the Section 3 of the Indian Evidence Act,1872 which defines Proved,Unproved and Disproved Facts.Proved Fact is that which is found true.Disproved fact is that which is found false.Unproved fact is that which is neither found true,nor found false due to the lack of evidences.The allegation imposed against Modi was unproved and when the fact remains unproved then the accused is acquitted but not given clean chit.Actually Clean Chit is that condition of judgement where the evidences and witnesses are proved false after trial or investigation.The SIT never told that the evidences and witnesses are false.The SIT only told that there is no competent evidences to further proceed in the case.If there is lack of evidences then a lot of reasons can be counted for the lack of evidences .As Modi was the CM,so not a single independent witness dared to speak against him.

2.The Case was Disposed Of Ex Parte

Zakia Zafri had filed Protest Petition against the Investigation Report Of SIT.There are some legal procedures to deal with the Protest Petition in exercise of the power to a Magistrate conferred under sections 190,200 and 202 of the CrPC.A Magistrate can take cognizance of a complaint under section 190 of the CrPC.Protest Petition is also a complaint filed by the informant against the Charge Sheet Of the Investigating Agency.Under section 200 of the CrPC,the Magistrate has to examine the complainant and its witnesses if the complaint and statements of the witnesses would not have been filed in written with Affidavit.Zakia Zafri would have filed Protest Petition alongwith Statements of the witnesses with affidavits,so there would be no need to examine the complainant and its witnesses in exercise of the power conferred under section 200 of the CrPC.Modi was accused of one of the Conspirator Of Gulbarg Society Riot where murder had occured.The allegation was exclusively triable by the Court Of Session.Under section 202(2) of the CrPC,the Magistrate shall examine the complainant and its witnesses if the allegation appears to be Exclusively Triable by the Court Of Session.So ,the Metropolitan Magistrate ought to have examined the complainant and witnesses which the learned Magistrate didn't because the allegation against Modi was Exclusively Triable by the Court Of Session.

3.Witnesses were Declared Prejudiced without the reasonable Ground

Section 155 of the Indian Evidence Act,1872 provides in what conditions the witnesses can be impeached or stated false.Those who were Witnesses against Modi were declared prejudiced and old enemy of Modi by the SIT and the same logic was accepted by the Metropolitan Magistrate.Firstly,it should be noted that those who were witnesses against Modi were exploited/victimized by Modi. Sanjeev Bhatt and such other exploited people/victims were witnesses.How an exploited people /victim can be stated enemy? If this logic is accepted throughout the country then all accused will be acquitted because each exploited people/victim is stated enemy of the accused or at least prejudiced. Secondly,it should be noted that there is no provision in section 155 of the Indian Evidence Act,1872 or any other sections where the witnesses can be impeached on the ground of the old enemity or without proving the reason of prejudices.Old Enemity and otherwise prejudices can be a ground for the acquittal of the accused if the witnesses are challenged and proved false.Witnesses against Modi were not challenged and proved false,so there was the reasonable ground to proceed further and exercise trial against the said accused i.e.Modi.
(From Rahul kumar facebook wall )

अगर नितीश कुमार सी एम ऑफ़ बिहार की मानें तो एक तरह से स्वीकार कर लिया है कि बिहार में आर्य भट यूनिवर्सिटी के अलावा कोई ज्ञान नहीं बांटती , केवल आर्य भट यूनिवेर्सिटी है जो ज्ञान बाँटती है , बाकी सब ज्ञान नहीं डिग्री ।

राष्ट्रीय सहारा उर्दू  दिनांक 25/2/14

कांग्रेस को इस बार सबक सिखा दो ।

कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी राहुल गाँधी ने कुछ अरसा पहले बीजेपी की तरफ से वेजराते उज्मा के उमीदवार नरेंदर मोदी के खेलाफ आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए कहा था कि मोदी गुजरात फसाद के लिए जिम्मेदार है . राहुल गाँधी ने 2002 के गुजरात फसाद और 1984 के सीख फसाद के त'अल्लुक से ये वाजेह भी की थी के औवल अल्जिक्र में रियासती हुकूमत और उसके अहलकार खुद मलौविस थे  ( यानी दंगा में खुद मोदी और उनकी सरकारी मशीनरी की संलिप्तता थी ) जबकि  आखिर अल्जिक्र यानी 1984 के फसाद को  रोकने के लिए कांग्रेस हुकूमत ने  कोशिशें की थीं .......।

राहुल गाँधी ने गुजरात फसादात और नरेंदर मोदी के सम्बन्ध से जो कुछ कहा , उससे किसी को इन्कार नहीं और मुख्तलिफ अदालती तब्सेरों से भी ये वाजेह हो गया है की मोदी का उन दंगो में क्या रोल था । जहाँ तक चंद जांच एजेंसियों के जरिये मोदी  के त'अल्लुक  से रियासती हाई कोर्ट को सोंपी गयी रिपोर्ट के बेना पर उन्हें अदालत के जरिये क्लीन चीट दिए जाने का मामला है तो ये क्लीन चीट बहर हाल हर्फ़े आखिर नहीं ........यानी के (अंतिम शब्द नहीं ) जकिया जाफरी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने का फैसला किया है ।गुजरात फसाद के त'अल्लुक से तमाम हकायेक और शवाहिद इस मामले में रियासती सरकार की मुजरिमाना अदम फ़'आलियत और फ़सादियों की किसी न किसी शकल में हिमायत का सबूत भी पेश करते हैं इसी लिए राहुल गांधी ने जो कुछ कहा उसके सियासी मक़ासिद होने के बावजूद सच्चाई से इनकार नहीं किया जा सकता , लेकिन खुद कांग्रेस के दौरे हुकूमत में जो दीगर फसादात हुए ,राहुल गाँधी को उनको भी सामने रखना जरुरी है ।दूसरी सबसे अहम् बात ये  है की गुजरात के उपरोक्त दंगों के तक़रीबन 2 साल बाद ही केंद्र में कांग्रेस की सरकार बन गई थी लेकिन उसके बावजूद मोदी के खेलाफ क्या कार्रवाई की गई ...........? ये सब जानते हैं .......................................
कांग्रेस की कुछ और दोहरी और दोगली पॉलिसियों को  देखिये !......................................................
कांग्रेस के तमाम सेक्युलर दावों के बावजूद मुसलमानों और दीगर अल्पसंख्यकों के दरमियाँ पुर तफरीक रवैया अपनाया है ।।।।।।।।।।।  बात सिर्फ फसादात की नही बल्कि  जब मुल्क के पसमांदा तबकात और दर्ज फेहरिस्त जातों को रिजर्वेशन देने की  बात आती है तो वहाँ भी मुसलामानों को उनके हक से महरूम कर दिया जाता है । हमारा आइन ( संविधान ) मजहबी बुनियाद पर किसी भी शहरी के साथ तफरीक ( भेद भाव ) के खिलाफ है । आइन में दर्ज फेहरिस्त जातों  और पसमांदा तब्कात को समाजी इन्साफ देने के लिए उन्हें रिजर्वेशन दिया गया है लेकिन आइन ( संविधान ) में एक तरमीम (बदलाव ) के जरिये ये शक जोड़ दी गयी कि अगर दर्ज फेहरिस्त जात का कोई भी शख्स तब्दीली मजहब करके इसाई या मुसलमान हो जाता है तो वह रिजर्वेशन के फायेदे से महरूम हो जारेगा । अफ़सोस की बात ये है की उपरोक्त शक को ख़त्म कराने के लिए पसमांदा मस्लिम तबकात लम्बे समय से लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन न सिर्फ ये के कांग्रेस बल्कि सेकुलरिज्म की मुदई दीगर पार्टीयों का रवैया भी इस मामले पुर तफरीक है ।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।। हलाकि सच्चर कमिटी की रिपोर्ट से ये वाजेह हो चूका है की मुल्क में मुसलमान म'आसी और सामाजी पस्मांदगी का शिकार हैं और तालीम के मामले में दीगर अकलियतों ( अल्पसंख्यकों ) से उनकी हालत बदतर है लेकिन इसके  बावजूद पसमांदा मुसलमानों को रिजर्वेशन देने के सवाल पर अभी तक ' यू पी ए 'सरकार ने कोई ठोस क़दम नहीं उठाया ।

(सेराज नकवी ,राष्ट्रीय सहारा उर्दू दैनिक ,दिनांक 25/2/14 से )

देवी हो या कोई सियासत का देवता

देवी हो या कोई सियासत का देवता

पीछे नहीं है इलेक्शन के रेश में

वोटर का खून पीते हैं बनते हैं कुछ वजीर

ऐसे हैं कई भेड़िये इंसान के भेस में.
( असद रजा , राष्ट्रीय सहारा उर्दू दैनिक 25/2/14 )

क्या नीतीश ऐसे लोगों को पुनः टिकट और आप क्या ऐसे लोगों को पुनः वोट देने की सोंच रहे ?

शिवजी राय ( पूर्वी चंपारण के मधुबन विधायक जिनका सम्बन्ध सत्ताधारी पार्टी जदयू से है ) क्षेत्र को देखिये और अंदाजा लगाइए के उनहोंने अपने क्षेत्र की तरक्की इतना ढंग से किया है कि गाड़ी तो गाड़ी पैदल चलना मुश्किल हो गया , लोग  सोंचने पे मजबूर हो गए हैं कि नीतीश कुमार ने लगातार दो बार टिकट दिए ,जनता ने नीतीश कुमार पे विश्वाश कर शिवजी राय को लगातार दो बार मौका दिया , मगर उन्होंने जनता के साथ क्या किया .............?
सिवाए विश्वासघात के ?
उन्हने  क्षेत्र का विकास किया या विनास वहाँ की कुछ तश्विरों को देख कर अंदाजा लगा सकते हैं  अगर इन तश्विरों जो क्षेत्र के हकीकत को बयान कर रही अगर इन तश्विरों पे भी विश्वास न हो तो क्षेत्र के फेन्हारा ब्लाक के वार्ड 13 का दौरा  जरुर कर लीजियेगा , पहले जिन रास्तों से कभी बस चला करता था , बस सेवा पूरी तरह बंद हो चुकी है , बस अब दुसरे रास्ते से गुजर रही  जससे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पर रहा । गाड़ी तो गाड़ी पैदल चलना मुश्किल , हलकी सी बारिश हो गई के छात्र स्कूल नहीं जाने पे मजबूर , क्यों के फिसल कर हाथ पांव टूटने का खतरा इस तरह के और भी दर्ज़नो समस्याएं .