देश की जनता से 20 सवाल. 1-क्या मोदी जी के आने के बाद से देश में रोजगार बढ़ा है ? 2-नरेंद्र मोदी जी भारत के प्रधानमंत्री है या भाजपा के ? क्यूंकि एक प्रधानमंत्री को निष्पक्ष होना चाहिए क्या वो निष्पक्ष है बिहार चुनाव हो या असम चुनाव उनके भाषण को देख के लगता है आप को ?


सिमरन प्रजापति के फेसबुक वॉल से

देश की जनता से 20 सवाल.

1-क्या मोदी जी के आने के बाद से देश में रोजगार बढ़ा है ?

2-नरेंद्र मोदी जी भारत के प्रधानमंत्री है

या भाजपा के ? क्यूंकि एक प्रधानमंत्री को

निष्पक्ष होना चाहिए क्या वो निष्पक्ष है

बिहार चुनाव हो या असम चुनाव उनके भाषण

को देख के लगता है आप को ?

3-क्या आरएसएस जैसे कट्टर धार्मिक संघटन

देश के लिए सही है ,क्या हम आईएसआईएस की

राह पर नहीं चल रहे ?

4-मोदी सरकार आने के बाद से देश में महंगाई

काफी बढ़ गई है रेल किराया फिर बढ़ाया जा

रहा है लेकिन विपक्ष विरोध क्यों नहीं कर

रहा ?

5-पाकिस्तान को अमेरीका ने फाइटर प्लेन

दिए और भारत के विरोध करने पर भारत को

तोप दिए क्या यह दोनों देशो को गलत नहीं

लगता।

6-विकास दर क्यों निचे गिर रहा है ?

7-जेएनयू कांड से पहले हर दिन दिल्ली हाई

अलर्ट पर रहती थी लेकिन काण्ड के बाद

शांत ? क्या जेएनयू के कुछ कश्मीरी आतंकी को

पकड़ने के बाद देश सुरक्षित है ?

8-मोदी सरकार गरीब किसानो के लिए क्या

कार्य कर रही है ,सरकार ने अभी तक

प्रधानमंत्री बीमा योजना के तहत कितने

लोगो को मरणोपरांत भुगतान किया है ?

9-क्या भारत में मोदी सरकार सिर्फ एक

कटपुतली है ? सारा कंट्रोल आरएसएस के

हाथो में है ?

10-देश के सभी विश्विद्यालयों को क्यों

मोदी सरकार टारगेट कर रही है ?

11-जम्मू कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार

बनाने वाले मोदी जी क्या वजह है जो आतंकी

अफजल के पक्षधरों वाली पार्टी के साथ आप

खड़े है ?

12-abvp स्वामी विवेकानंद को अपना

आदर्श मानती है तो मोदी सरकार आने के बाद

से NCRT के आठवी से बारहवीं कक्षा के बीच

विवेकानंद ,भगत सिंह ,चंद्रशेखर आज़ाद का

नाम 3200 की जगह अभी मात्र 270 जगह

कर दिया गया क्यों ?

13-मोदी सरकार ने जो वादे बिहार चुनाव

में आपने बिहारवासियों के साथ किये क्या वो

वादे आपने पुरे किये ?

14-मोदी सरकार ने आते ही शिक्षा बजट

क्यों कम किया ?

15-आप बताए मोदी सरकार ने बैंकों से

उदयोगपतियों और व्यापारियों का एक लाख

चौदह हजार करोड़ का कर्ज़ माफ़ कर दिया ?

16-यह बताए की भारत सरकार क्या

विश्विद्यालय में ड्रेस कोड लाना चाहती है।

आप इसके पक्ष में है ?

17-मोदी सरकार बताए की रोहित वेमुला

की उत्पीड़न मामले में कितनो की गिरफ्तारी

हुई है ?

18-झारखंड के सत्ताधारी दल भाजपा के ही

विधायक ढुलू महतो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर

चोट पहुंचाने में लगे हुए हैं। बाघमारा के इस

विधायक की बदनामी रूस तक पहुंच गई है।

आईटेक्स-कारटेक्स की शिकायत पर कोलकाता

स्थित रूस के महावाणिज्य दूतावास ने

मुख्यमंत्री रघुवर दास से सुरक्षा की गुहार

लगाई है। अब आपकी ईमानदारी कहा है ?

19-व्यापम घोटाले पर आप शांत क्यों ?

20 -देश की राजधानी में भाजपा विधायक

की गुंडागर्दी और वो भी कोर्ट परीसर में

पत्रकार को क्यों दौड़ा के पिटा महिला

पत्रकार के साथ बदतमीजी क्यों ?

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1695847334020268&id=100007850527547&refid=17&_ft_=top_level_post_id.1695847334020268%3Atl_objid.1695847334020268%3Athid.100007850527547%3A306061129499414%3A2%3A0%3A1456819199%3A-9050517992746594872&__tn__=%2Ashttps://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1695847334020268&id=100007850527547&refid=17&_ft_=top_level_post_id.1695847334020268%3Atl_objid.1695847334020268%3Athid.100007850527547%3A306061129499414%3A2%3A0%3A1456819199%3A-9050517992746594872&__tn__=%2As

भारतीय भ्रष्ट मीडिया की पोल खोलती , जुबैर अहमद की लेख , भारतीय मीडिया कितना निष्पक्ष है? है पढ़ना न भूलें


भारतीय मीडिया कितना निष्पक्ष है?
ज़ुबैर अहमद
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
16 फरवरी 2016
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Image copyrightAP
दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पत्रकारों की पिटाई से मुझे मुंबई का एक किस्सा याद आया. कई साल पहले उस समय के मुंबई पुलिस कमिशनर आरएस शर्मा ने एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाई जिसमें उन्होंने दावा किया कि एक युवक पुलिस मुठभेड़ में मारा गया है.
पुलिस की स्टोरी में कई खामियां थीं, उसके बावजूद वहां के स्थानीय पत्रकार खामोश रहे.
Image copyrightAFP
मैंने जब सवाल करना शुरू किया तो कमिशनर शर्मा और उनके साथी सत्यपाल सिंह (इन दिनों वो बीजेपी के सांसद हैं) मुझ पर भड़क गए और अपने दफ़्तर से मुझे निकल जाने का आदेश दिया. मैंने कहा 'मुझे यहाँ बुलाया गया है और मेरे सवालों का जवाब आपको देना चाहिए.'
Image copyrightAFP
बाद में कई पत्रकारों ने मुझ से पूछा कि क्या मेरी शर्मा जी से कोई लड़ाई है? मैंने कहा मैं उनसे पहली बार मिल रहा हूँ. मैंने आगे कहा कि 'जो सवाल आप जैसे स्थानीय पत्रकारों को करना चाहिए था वो मैंने किया. आप से चुनौती नहीं मिलती है, वो चुभते सवालों के आदि नहीं हैं, इसलिए वो मुझ पर भड़के.'
Image copyrightAFP
प्रेस कांफ्रेंस के बाद सत्यपाल सिंह ने कहा, "जुबैर जी नाराज़ मत हो, आओ समोसा खाओ, गर्म है."
पत्रकार बंधु समोसा खाने में लग गए. मैं वहां से तुरंत अपने दफ़्तर लौट गया. मुझे आज भी याद है कि मुझे स्थानीय पत्रकारों की ख़ामोशी पर कितनी मायूसी हुई थी.
बाद में सत्यपाल सिंह कमिश्नर बने. लेकिन मुझे उन्होंने हमेशा सम्मान दिया और मेरे सवालों के जवाब दिए.
Image copyrightReuters
दुर्भाग्य से मीडिया पक्षपात का शिकार होता नज़र आता है. पत्रकारिता का पहला पाठ है निष्पक्षता, खास तौर से रिपोर्टिंग और विश्लेषण में. लेकिन पिछले कुछ सालों में मैंने कई शहरों, बस्तियों और मुहल्लों में लोगों को पत्रकारों के बारे में अपमानजनक बातें कहते सुना है.
मीडिया में मूल्यों की गिरावट आई है जिसके कारण समाज में पत्रकारों को जो मुक़ाम हासिल था अब वो कम होता जा रहा है.
Image copyrightEPA
पटियाला हाउस कोर्ट में पत्रकारों की पिटाई के पीछे जिसका भी हाथ था, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.
लेकिन दिल्ली पुलिस का खामोश तमाशाई बने रहना क्या साबित करता है? दिल्ली पुलिस के प्रमुख भीम सेन बस्सी का बाद में ये कहना कि ये एक मामूली घटना थी किस बात का संकेत है?
बस्सी का बयान जितना पुलिस की कमज़ोर होती साख को दर्शाता है उतना ही पत्रकारों की साख को भी. कई फ़ील्ड पत्रकारों ने अधिकारियों के आगे अपने मानो आत्मसमर्पण कर दिया है.
मैं 1990 के दशक में कुछ सालों के लिए दिल्ली के एक अंग्रेजी अख़बार में क्राइम रिपोर्टर था. मैंने राजा विजय करन से लेकर मुकुंद बिहारी कौशल जैसे दिल्ली पुलिस के कमिश्नर को काम करते क़रीब से देखा. मैंने उन्हें गृह मंत्रालय के दबाव को झेलते हुए भी देखा है. साथ ही मैंने उन्हें पत्रकारों की इज़्ज़त करते भी देखा है.
Image copyrighttimesnow.tv
जवाहर लाल नेहरू विश्विद्यालय में उठा विवाद और पटियाला हाउस कोर्ट में पत्रकारों की पिटाई और पिछले कुछ महीनो में इसी तरह की घटनाएं देश में वामपंथी और दक्षिणपंथी विचारों के बीच चली आ रही टक्कर का हिस्सा हैं. पिछले एक-दो सालों से विचार धारा की लड़ाई तेज़ होती जा रही है.
आपके घर का ड्राइंग-रूम हो या दफ़्तर का बोर्ड रूम, मीडिया वालों का न्यूज़रूम हो या राजनितिक पार्टियों का हेडक्वार्टर, या फिर आपका विश्वविद्यालय हो या समाज, इन दोनो विचारधाराओं में टकराव रोज़ सुनने और देखने को मिल रहा है.
Image copyrightGetty
विवादास्पद मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस का माहौल बने इसका स्वागत होना चाहिए. लेकिन ये बहस और टकराव गैर हिंसक और सभ्य माहौल में हो.
ऐसे में मीडिया की भूमिका अहम हो सकती है. लेकिन हमारे सामने आज मीडिया की जो तस्वीर है वो पक्षपाती है.
एक छोर पर टाइम्स नाउ के संपादक अर्नब गोस्वामी हैं तो दूसरी ओर इंडिया टुडे टीवी के संपादक राजदीप सरदेसाई. सोमवार को राजदीप ने एक ट्वीट में चुटकी लेते हुए कहा कि 'आज के ज़माने में बैलेंस कौन चाहता है? आज हमसे उम्मीद की जाती है कि हम पक्षपाती हों!'
Image copyrightRajeep Sardesai twitter page
राजदीप ने भले ही ट्वीट में अपना ये विचार हलके मूड में रखा हो लेकिन मीडिया ने पक्ष लेना शुरू कर दिया है. आज का भारतीय मीडिया अमरीका के मीडिया की राह पर चल पड़ा है जहाँ मीडिया का एक हिस्सा रिपब्लिकन विचारधारा को बढ़ावा देता है और दूसरा हिस्सा डेमोक्रेटिक विचारधारा को.
संतुलित या बीच की आवाज़ जैसे अमरीका में दब कर रह गयी है, वैसे ही भारत में भी दबती नज़र आ रही है.

मेरे एक वरिष्ठ पत्रकार दोस्त ने आज सोशल मीडिया पर लिखा कि वो
http://www.bbc.com/hindi/india/2016/02/160216_media_balance_za?SThisFB
http://www.bbc.com/hindi/india/2016/02/160216_media_balance_za?SThisFB



JNU में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे ABVP ने लगाए, सुबूत के तौर पर वीडियो जारी


N.a. Saadiq shared Politics in India's photo to the group: Overseas Indian Forum (OIF) - प्रवासी भारतीय फोरम.
JNU में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे ABVP ने लगाए, सुबूत के तौर पर वीडियो जारी
Congress Leader Anand Sharma Alleges ABVP Members in JNU.
Theconspiracy - A student's description of the ABVP plan to frame JNU students and shift attention from Rohith to more divisive issues.
Politics in India
JNU में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे ABVP ने लगाए, सुबूत के तौर पर वीडियो जारी
Congress Leader Anand Sharma Alleges ABVP Members in JNU.
Theconspiracy - A student's description of the ABVP plan to frame JNU students and shift attention from Rohith to more divisive issues.
“Afzal Guru event was not anti-social activity.”Why did JNU find itself at centre of controversy?
--------------------------------------
वायरल हुआ यह VIDEO: ABVP पर लगे JNU में षड्यंत्र के आरोप
http://www.tahlkanews.com/archives/41895
JNU में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे ABVP ने लगाए, सुबूत के तौर पर वीडियो जारी
http://www.kohraam.com/national/in-jnu-abvp-did-anti-national-activity-50853.html
JNU में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे ABVP ने लगाए, सुबूत के तौर पर वीडियो जारी
http://liveindiahindi.com/in-jnu-abvp-did-anti-national-activity#sthash.KWh7dutF.dpuf
Theconspiracy - A student's description of the ABVP plan to frame JNU students and shift attention from Rohith to more divisive issues.
https://www.youtube.com/watch?v=Xs1sCRVxoHY
Live: Congress Leader Anand Sharma Alleges ABVP Members in JNU
http://www.thequint.com/india/2016/02/13/jnu-afzal-row-left-jdu-leaders-meet-rajnath-bassi-next
Afzal Guru event: Anti-India slogans at JNU campus, varsity orders probe
http://m.indiatvnews.com/news/india/afzal-guru-event-jnu-orders-disciplinary-enquiry-57561.html
“Afzal Guru event was not anti-social activity.”Why did JNU find itself at centre of controversy?
http://www.iamin.in/en/south-delhi/news/%E2%80%9Cafzal-guru-event-was-not-anti-social-activity%E2%80%9Dwhy-did-jnu-find-itself-centre-controversy-85003
Afzal Guru event: Anti-India slogans at JNU campus; ‘disciplinary’ enquiry ordered
http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/afzal-guru-event-anti-india-slogan-at-jnu-campus-disciplinary-enquiry-ordered/
Kejriwal orders probe into JNU-Afzal Guru row, says guilty should be punished
http://www.ibnlive.com/news/india/jnu-afzal-guru-row-left-met-kejriwal-for-fair-probe-rahul-shown-black-flag-1202723.html
JNU students union president arrested over Afzal Guru event, sent to 3-day police custody
http://indiatoday.intoday.in/story/jnu-students-union-president-arrested-over-afzal-guru-event/1/594164.html
‪#‎ABVPExposed‬, #ABVPExposed
--------------------------------------
JNU में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे ABVP ने लगाए, सुबूत के तौर पर वीडियो जारी
लाइव इंडिया डिजिटल | Feb 13, 2016, 02:35 PM IST
9 फरवरी की शाम अफज़ल गुरू की याद में हुए प्रोग्राम के बाद प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय सुर्खियों में है। देश में राष्ट्रीय समाचार चैनलों का एक गुट जेएनयू और वहां पर सक्रिय वामपंथी संगठनों पर हमलावर है। समाचार चैनलों के कुछ एंकर इस विश्वविद्यालय को खुलेतौर पर देशद्रोहियों का गढ़ कह रहे हैं। जेएनयूएसयू के मौजूदा प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी के बाद ऐसे चैनलों को अपने अजेंडा में कामयाबी भी मिल रही है।
ये भी पढ़ें- पाक जिंदाबाद कहने वालों की जबान क्यों न काट दी जाए?
हालांकि इसी दौरान सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में ऐसे न्यूज़ चैनलों को एक्सपोज़ करने के अलावा एबीवीपी पर भी सनसनीखेज़ आरोप लगाए गए हैं। वायरल वीडियों में दावा किया गया है कि 9 फरवरी की रात जेएनयू कैंपस में वामपंथी छात्रों को फंसाने के मकसद से एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए थे।
'द कंस्प्रेसी' नाम से जारी इस वीडियो के मुताबिक 'जेएनयू के बारे में मीडिया जो दिखा रहा है, वह पूरी तरह से बायस्ड, अधूरा और सनसनीखेज है। वीडियो में जब पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे सुनाई दे रहे हैं, उस वक्त स्क्रीन पर एबीवीपी के कार्यकर्ता दिख रहे हैं। इसके बाद जब पीछे से पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारों की आवाज़ आ रही है तो वीडियो में दिख रहे एबीवीपी कार्यकर्ता जवाब में ज़िंदाबाद जिंदाबाद बोल रहे हैं।
ये भी

JNU में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे ABVP ने लगाए, सुबूत के तौर पर वीडियो जारी


N.a. Saadiq shared Politics in India's photo to the group: Overseas Indian Forum (OIF) - प्रवासी भारतीय फोरम.
JNU में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे ABVP ने लगाए, सुबूत के तौर पर वीडियो जारी
Congress Leader Anand Sharma Alleges ABVP Members in JNU.
Theconspiracy - A student's description of the ABVP plan to frame JNU students and shift attention from Rohith to more divisive issues.
Politics in India
JNU में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे ABVP ने लगाए, सुबूत के तौर पर वीडियो जारी
Congress Leader Anand Sharma Alleges ABVP Members in JNU.
Theconspiracy - A student's description of the ABVP plan to frame JNU students and shift attention from Rohith to more divisive issues.
“Afzal Guru event was not anti-social activity.”Why did JNU find itself at centre of controversy?
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वायरल हुआ यह VIDEO: ABVP पर लगे JNU में षड्यंत्र के आरोप
http://www.tahlkanews.com/archives/41895
JNU में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे ABVP ने लगाए, सुबूत के तौर पर वीडियो जारी
http://www.kohraam.com/national/in-jnu-abvp-did-anti-national-activity-50853.html
JNU में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे ABVP ने लगाए, सुबूत के तौर पर वीडियो जारी
http://liveindiahindi.com/in-jnu-abvp-did-anti-national-activity#sthash.KWh7dutF.dpuf
Theconspiracy - A student's description of the ABVP plan to frame JNU students and shift attention from Rohith to more divisive issues.
https://www.youtube.com/watch?v=Xs1sCRVxoHY
Live: Congress Leader Anand Sharma Alleges ABVP Members in JNU
http://www.thequint.com/india/2016/02/13/jnu-afzal-row-left-jdu-leaders-meet-rajnath-bassi-next
Afzal Guru event: Anti-India slogans at JNU campus, varsity orders probe
http://m.indiatvnews.com/news/india/afzal-guru-event-jnu-orders-disciplinary-enquiry-57561.html
“Afzal Guru event was not anti-social activity.”Why did JNU find itself at centre of controversy?
http://www.iamin.in/en/south-delhi/news/%E2%80%9Cafzal-guru-event-was-not-anti-social-activity%E2%80%9Dwhy-did-jnu-find-itself-centre-controversy-85003
Afzal Guru event: Anti-India slogans at JNU campus; ‘disciplinary’ enquiry ordered
http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/afzal-guru-event-anti-india-slogan-at-jnu-campus-disciplinary-enquiry-ordered/
Kejriwal orders probe into JNU-Afzal Guru row, says guilty should be punished
http://www.ibnlive.com/news/india/jnu-afzal-guru-row-left-met-kejriwal-for-fair-probe-rahul-shown-black-flag-1202723.html
JNU students union president arrested over Afzal Guru event, sent to 3-day police custody
http://indiatoday.intoday.in/story/jnu-students-union-president-arrested-over-afzal-guru-event/1/594164.html
‪#‎ABVPExposed‬, #ABVPExposed
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JNU में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे ABVP ने लगाए, सुबूत के तौर पर वीडियो जारी
लाइव इंडिया डिजिटल | Feb 13, 2016, 02:35 PM IST
9 फरवरी की शाम अफज़ल गुरू की याद में हुए प्रोग्राम के बाद प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय सुर्खियों में है। देश में राष्ट्रीय समाचार चैनलों का एक गुट जेएनयू और वहां पर सक्रिय वामपंथी संगठनों पर हमलावर है। समाचार चैनलों के कुछ एंकर इस विश्वविद्यालय को खुलेतौर पर देशद्रोहियों का गढ़ कह रहे हैं। जेएनयूएसयू के मौजूदा प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी के बाद ऐसे चैनलों को अपने अजेंडा में कामयाबी भी मिल रही है।
ये भी पढ़ें- पाक जिंदाबाद कहने वालों की जबान क्यों न काट दी जाए?
हालांकि इसी दौरान सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में ऐसे न्यूज़ चैनलों को एक्सपोज़ करने के अलावा एबीवीपी पर भी सनसनीखेज़ आरोप लगाए गए हैं। वायरल वीडियों में दावा किया गया है कि 9 फरवरी की रात जेएनयू कैंपस में वामपंथी छात्रों को फंसाने के मकसद से एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए थे।
'द कंस्प्रेसी' नाम से जारी इस वीडियो के मुताबिक 'जेएनयू के बारे में मीडिया जो दिखा रहा है, वह पूरी तरह से बायस्ड, अधूरा और सनसनीखेज है। वीडियो में जब पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे सुनाई दे रहे हैं, उस वक्त स्क्रीन पर एबीवीपी के कार्यकर्ता दिख रहे हैं। इसके बाद जब पीछे से पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारों की आवाज़ आ रही है तो वीडियो में दिख रहे एबीवीपी कार्यकर्ता जवाब में ज़िंदाबाद जिंदाबाद बोल रहे हैं।
ये भी

आज़ाद भारत में में इंसाफ का दास्तान पढ़ना और शेयर करना न भूलें ......? एक गरीब घर बर्बाद हो गया , कंगाल हो गया पर नहीं मिल रही जमानत..... मगर उसी मामले में बाक़ी लोग आज़ाद .....? क्या है हमारे न्यायतंत्र का हाल ---? जानिए इस स्टोरी में आप ......


मामला जान कर शायद आप कहेंगे ऐसी नाइंसाफी तो गुलाम भारत में भी न हुआ होगा ....?
मामला पटना हाई कॉर्ट से जुड़ा है ।
मामले की चर्चा करने से पहले यहाँ बता देना उचित है कि मैं कोई क़ानून का जानकार नहीं लेकिन ..... ऊपर वाले ने इतना सलाहियत हर इंसान को दिया है कि गलत क्या है और सही क्या है ......?
अब आते हैं असल मुद्दे पर .......
पुर्बी चंपारण में एक जगह है बिजई जो घोड़ासहन प्रखंड के तहत आता है । उपरोक्त बिजई गाँव के असदुल्लाह साहब जो कि पेशे से शिक्षक हैं और अपने ही इलाके के किसी प्राथमिक विध्यालय में पदस्थापित हैं ।
असदुल्लाह साहब की अशिक्षित बेगम की बातों पे यकीन किया जाये तो उनके पति की गिरफ़्तारी कंफ्यूजन में हाफ दर्जन लोगों के साथ तक़रीबन 7-8 महीने पहले हो गई ।
जानकारी में कमी और कानूनी दावपेच से अनजान घरवालों के कारण जिस असदुल्लाह की जमानत मोतिहारी के सिविल कॉर्ट से ही हो जानी चाहिए थी वहां से न हो सकी ।
सूत्रों की मानें तो उनके साथ बहुत सारे लोगों को उसी मामले में मोतिहारी के निचली अदालत से ही मिल गई ।
उसी मामले में जिन चंद लोगों को मोतिहारी की निचली अदालत से जमानत न मिली थी पटना हाई कॉर्ट से ले लिए । लेकिन असदुल्लाह को जमानत आज तक नहीं मिली ।
असदुल्लाह की अनपढ़ और घरेलु पत्नी ने बात चीत करने पर सवाल उठाया है कि क्या हमारा पति हत्यारा है , डाकू है , अपहरण कर्ता है कि उसे आज तक जमानत नहीं मिली और बाकी हाफ दर्जन लोगों को उसी मामले में मिल गई ..... ? आखिर वह कौन सा क़ानून था और कौन सा इन्साफ की न्याय के एक ही चौखट पे जितने लोग उतने ही तरह की एक ही मामले में अलग - अलग बात .......?
जब पूछा गया कि आप के घर वाले ने आपके पति की जमानत के लिए क्या किया तो कहा की वकील को फी देते देते कंगाल हो गए । कौन दो पटना हाई कॉर्ट में एक ठो सबसे बड़का जज है , जउन वकील मुक़दमा के पैरवी करै है कहलईं कि उ बड़का जज हफ्ता एक ही दिन बुध के ही बइठल है ।
वकील से दो महीना से पूछते पूछते थक गेली है हमनी के , पूछे पर वकील साहब कह लइ कि अभी तक ले सबसे बड़का जज अभी तक नहीं बैठें है कि जमानत मिले ।
मामला क्या है अब तो पटना हाई कॉर्ट ही जाने कि एक ही मामले में सभी लोगों को जमानत सिविल कॉर्ट से लेकर पटना हाई कॉर्ट तक ने दे दी मगर एक असदुल्लाह पर देश का क़ानून इस क़दर भारी और कुरुर हो गया है कि जमानत तक देने के मूड में नहीं वह भी उस देश में जहाँ दर्जनों मामलों और जघन अपराधियों को एक झटके में जमानत दे देती है । वह चुनाव भी लड़ता है जीत भी जाता है मंत्री भी बनता है उसे लोग सलामी भी ठोकते हैं । किसी सीसी को वाई श्रेणी का सुरक्षा तक मिल जाता है । मगर एक असदुल्लाह के लिए देश का क़ानून --------?
जब असदुल्लाह की अनपढ़ और घरेलु पत्नी से पूछा गया कि आपके हस्बैंड का कसूर क्या है कुछ पता है ------?
तब उसने कहा कि गाँव के एक आदमी से जमीन का झगड़ा चल रहा था । पति को टीचर होने के कारण छुट्टी नहीं मिल रही थी । एक रोज अंचल ऑफिस के कर्मचारी से बात की तो सन्डे को बुलाया चले गए । वहां ऑफिस में बैठ कर कर्मचारी से मिलकर कागज की तलाशी कर रहे थे इसी बीच पुलिस की छापेमारी हो गई । पहले से ऑफिस में कर्मचारी के साथ बैठे लोगों के साथ हमारे पति को भी पुलिस ले गई ।पति अपनी बेगुनाह होने की बात करते रहे , गिर्गिराते रहे मगर पुलिस ने एक न सुनी तब से आज तक ...........
घर के इकलौते कमाऊ पति के जेल में 7-8 महीने से रहने के कारण उनकी पत्नी और घर की हालत क्या हो गई होगी .....समझा जा सकता है ।
जब भी बुध का दिन आता है पटना हाई कॉर्ट के बड़े जज साहब के बैठने की उम्मीद और जमानत की उम्मीद लिए न जाने और कितने माह बीतेंगे .........
‪#‎justice‬ , ‪#‎patnaHighCourt‬

असम: मुसलमान-हिन्दू में ज़हर घोलने की कोशिश करने वाला अफ़सर बर्ख़ास्त


                                                       The siasat Daily
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असम: मुसलमान-हिन्दू में ज़हर घोलने की कोशिश करने वाला अफ़सर बर्ख़ास्त
February 14, 2016 Assam / West Bengal, Khaas Khabar 0 Comments

गुवाहाटी: असम के एक सीनियर पुलिस अफ़सर अंजन बोरा को मुसलमान विरोधी बयान देने के कारण बर्ख़ास्त कर दिया गया, फेसबुक पर मुस्लिम कम्युनिटी के ख़िलाफ़ ग़ैर ज़िम्मेदाराना बयानबाज़ी करते हुए बयान दिए जिसके बाद सरकार ने उन्हें बर्ख़ास्त कर दिया.

कारबी ज़िले में डिप्टी सुपरिन्टेन्डेन्ट बोरा ने मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़हर घोलने वाली बातें कीं, DSP बोरा ने अज़ान तक को बंद करने की बात कर डाली और अपनी पोस्ट में “जय जय श्री राम जन्म भूमि, हम चाहते हैं मुस्लिम फ़्री हिन्दुस्तान” की बात करते हुए हिन्दू और मुसलमान में नफ़रत फैलाने की और देश तोड़ने की कोशिश की.

इसका आम लोगों ने सख्त विरोध किया और बोरा को हटाने की मांग की, असम की सरकार ने तुरंत कार्यवाही करते हुए उन्हें बर्ख़ास्त किया, हालांकि बाद में बोरा ने कहा कि उनका अकाउंट हैक हुआ था लेकिन शुरुवाती जांच में ऐसा नहीं पाया गया.

आतंकवाद के आड़ में फंसने ,फंसाने का खेल चल रहा । इस मुल्क मुसलमान मासूम । पढ़ें एक और घिनौना खेल जो आतंकवाद के नाम पर और एक मासूम मुसलमान को फंसाने के लिए कैसे खेला गया .....?

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आगरा: एक बड़े ही बेतुके से वाकये में एक लड़के को आतंकवाद के इलज़ाम में फसाने की साज़िश का पर्दाफ़ाश हुआ है. एक औरत से बदला लेने के इरादे से एक वकील जिसका नाम मुकेश कुमार निम् है ने उसके दामाद को आतंकवाद के इलज़ाम में फसाने की कोशिश की, इस घिनौने काम के लिए उसने अपने भतीजे का सहयोग लिया और पूरी कोशिश की कि किसी भी तरह से एक निर्दोष को आतंक के इलज़ाम में फंसा ले.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़,40 वर्षीय कुमार जो बसपा का नेता भी है, ने गीता और उसकी दो बेटियों की मदद एक ऐसे वक़्त पे की थी जब वो काफ़ी परेशान थी. गीता की बड़ी बेटी मीनाक्षी ने बाद में ख़ालिद से शादी कर ली. किसी बात से नाराज़ मुकेश ने गीता और उसके ख़ानदान को सबक़ सिखाने के लिए एक घिनौना प्लान बनाया, मुकेश का भतीजा जो साइबर कैफ़े चलाता है से मिलकर उसने ख़ालिद की आईडी पर सिम कार्ड निकलवा लिया, उस सिम से उन लोगों ने बम की धमकिया देते हुए आगरा पुलिस को फ़ोन किया और तमाम इस तरह के फ़ोन किये
पहले तो एटीएस ने ख़ालिद और उसके दोस्त आरिफ़ को सिम कार्ड की वजह से गिरफ़्तार कर लिया लेकिन बाद में जब सच्चाई सामने आई तो वो एक चौंकाने वाली बात थी, पुलिस ने बाद में मुकेश और आकाश को गिरफ़्तार कर लिया.
आगरा पुलिस सुपरिन्टेन्डेन्ट ने बताया कि “वकील और उसके भतीजे ने एक मासूम मुसलमान को आतंकवाद के इलज़ाम में फंसाने की कोशिश की और उसकी वजह सिर्फ़ अपनी जाति दुश्मनी थी”.https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=978340158908551&substory_index=0&id=792864197456149&refid=17&_ft_=top_level_post_id.978340158908551%3Atl_objid.978340158908551%3Athid.792864197456149%3A306061129499414%3A69%3A0%3A1456819199%3A-5388601706353602549&__tn__=%2As

दलित - मुस्लिम गठबंधन की दिशा में अहम पहल (Dalit -Muslim ittehad ki semat pesh ruft.)


दलित - मुस्लिम गठबंधन की दिशा में अहम पहल
(Dalit -Muslim ittehad ki semat pesh ruft.)
Iss haqiqat se inkar nahi kia jaa sakta k hydrabad central university k ek hostel mein dalit research scholer rohit vemula ki khudkushi k waqeya ( ghatna ) ne mulk k dalit , aqliyat aur kamjor tabqe ko ye sonchne par mazboor kar dia hai k oon logon ne mut_tahid aur monazaam ( aapas mein sangathit) ho kar apne aaini aur samaji ( sawaindhanik aur samaji )  haqooq ( Adhikar) k tahaffuz ( suraksha) k liye jamhuri ladai ( loktantrik ladai) jald shuru nahi to mulk mein nihayat tezi se sar ubharne wali firqaparast taqaten ( sampardaik taqatein ) unhe hashiye ( sunya , Zero ) par dhakelne se baaz nahi aayengi.....

Rohit vemula k mamle ko lekar mulk_dir tahrik ( desh bhar mein Aandolan )chalane mein sirf dalit toloba wa talebat ( chhtr aur chhatrayen) he aage aage nahi nahi hain balki bayen baju najaryat k alambardar toloba wa talebat aur har tabqa k insaaf aur aman pasand toloba bhi badi tadad mein shamil hain jo ek achchi Alamat hai aur iss se saaf pata chalta hai k hamare mulk mein amand aur insaaf pasand navjawanon ki bhari aksariyat ( bahulyata, bhari tadad) hai jo samaj ko majhab aur jaat _paat ki buniyad par mulk ko taqseem ( bantne) karne ki sangh parivar ki sajish k sakht khilaf hai .........iss tanazur mein ( sambandh mein) mumbai k azad maidan mein mun,Aqid jalsaye aam se dalit leader #PrakashAmbedkar ka ye khitaab behad #manikhez aur aham qarar diya jayega jis mein unhone markaji hukumat ko dalit aur aqliyat mokhalif hukumat  qarar detey huye iss baat ka dawa kiya k samaj k dabe kuchle aur insaf pasand afraad agar mut_tahid ho jayen to markazi hukumat ko hum iqtadaar se bedakhal kar denge.....unhone rohit vemula ki khudkushi ko afsosnaak qaraar dete huye markazi wajiron bandaroo datatray aur smriti irani k alawah hydrabad university k vice chancelor Aalok panday k khilasf baza taur par shakht karwai ka mutalba kiya jin k dalit mokhalif nazria ki wajah se he rohit ko apni jindagi khatm karne par mazboor hona pada hai ......
Haliya chand mahino k andar sangh parivar ki shar-pasandi k natize mein 2  aise afsosnak waqeyaat ronuma huye hain jin ko le kar na sirf aqliyaton aur daliton mein khauf wa haras ka mahaul paida ho geya hai balki oon dono tabqon k andar ab apne samaji wa aaini haqooq( samaji aur sanwaidhanik adhikar) aur apni izzat wa aabroo k tahaffuz ( suraksha) k liye ooth khade hone jajba bhi paida ho gaya hai .....
Pahla waqeya ( pahli ghatna)  dadri noida mein beef khori k farzi ilzam mein ek muslim shakhs Akhlaque ahmad k bahimana qatal(bedardi se hatya ) se juda hai jabki dusra waqeya rohit vemula ki khudkushi se wabista ( sambandhit) hai.....in dono he waqeyat mein sangh parivar k inteha pasand anasir (asamajik aur ugarwadi tatv ) k malauvis ( sanlipta) ki haqeeqat logon k samne aa chuki hai ....qabile gaur nokta ye bhi hai k  dadri waqeya k baad se hee mulk mein narendar modi hukumat ki sarparasti mein parvan chadhaye jane wale adam rawadari aur adam tahammul k khatarnak rujhan ko le kar qaumi satah par ( rashtriye astar par )  jordar bahas bhi shuru ho gai hai jis k natije mein modi hukumat katghere mein khadi kar di gai hai ......jahan tak mumbai k mut_jakkerah jalsa ka ta_alluk hai oos mein bohra muslim firqa ki burqa_posh khawateen bhi badi tadaad mein maujood thin ......jo rohit vemula se hamdardi ka izhar karte huye pur-josh andaz mein naare laga rahin thin .....hum esey apne haqooq ko lekar muslim firqa mein paida hone wali nai bedari ka mamla samajhte hain aur umid karte hain k agar dalit- muslim ittehad ( gathbandhan) ki taraf soojh boojh aur danish-mandi k sath pesh qadmi ki gai to mulk mein firqa parast taqaton k khaufnak azayem aur Eradon ko khak mein milaya ja sakta hai .....mulk k seyasi halaat mein jo parishan-koon tab-diliyan dekhne mein aa rahi hain oos k pasmanzar mein mulk mein naye nauiyat ki ( nai tarah ki ) samaji aur siyasi gathjor ko nahi kiya ja sakta

(Editorial page , Urdu dainik pindar dt. 4.2.2016

ब्रिटेन: मुस्लिम समझा रहे हैं गैर मुस्लिमो को इस्लाम का सही अर्थ


ब्रिटेन: मुस्लिम समझा रहे हैं गैर मुस्लिमो को इस्लाम का सही अर्थ
POSTED BY TEAM DIGITAL ON FEBRUARY 8, 2016 IN विदेश | VIEWS
लंदन । समूचे यूरोप और ब्रिटेन में इस्लाम को लेकर फैलते डर को दूर करने के उद्देश्य से ब्रिटेन की लगभग 90 मस्जिदों ने एक खुले सत्र का आयोजन किया ताकि नकारात्मक खबरों से परे जाकर इस्लाम के अर्थ को सही मायनों में समझाया जा सके।
इस पहल को पिछले साल मुस्लिम काउंसिल ऑफ ब्रिटेन ने शुरू किया था। इस साल इस पहल में लगभग दोगुनी मस्जिदों ने शिरकत की। लंदन, बर्मिंघम, मैनचेस्टर, लीडस, ग्लासगो, कार्डिफ, बेलफास्ट, प्लेमाउथ और कैंटरबरी की मस्जिदों ने हैशटैग विजिट माई मॉस्क कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
एमसीबी ने एक बयान में कहा, इन खुले सत्रों के द्वारा मुस्लिमों को एक मंच मुहैया कराया गया कि वे अपने साथी ब्रितानी नागरिकों को नकारात्मक सुर्खियों से परे जाकर अपने धर्म और समुदाय के बारे में सही जानकारी दे सकें।
इसने पिछले महीने के एक बयान में कहा था, स्थानीय मस्जिदें अंतर-धार्मिक नेताओं को भी इन सत्रों में आमंत्रित करेंगी और उन सभी से कहा जाएगा कि वह अपनी एकता और अखंडता को प्रदर्शित करने के लिए साथ आएं।
इन खुले सत्रों के दौरान इस्लाम से परिचय, मुस्लिम समुदाय के बारे में व्याख्या की गईं और साथ ही लोगों को प्राथनायें देखने एवं भ्रमण का भी अवसर दिया गया। नवीनतम जनगणना के मुताबिक ब्रिटेन में लगभग 27 करोड़ मुस्लिम हैं जो कुल आबादी का लगभग साढ़े चार प्रतिशत हैं।
गौरतलब है कि फ़्रांस में पेरिस हमले के बाद समूचे यूरोप में मुसलमानो के खिलाफ बने माहौल से यूरोप के मुसलमानो में भी का माहौल है । वहीँ सीरिया शरणार्थियों को यूरोपीय देशो द्वारा शरण देने से नाराज़ हुए बहुसंख्यक समुदाय ने भी मुसलमानो के खिलाफ एक मुहीम शुरू कर दी थी । ऐसी परिस्थतियों में गैर मुस्लिमो को इस्लाम को सही से समझाना एक मुश्किल काम ज़रूर है लेकिन ब्रिटेन के मुस्लिम इस काम में जुट गए हैं ।

ब्रिटेन: मुस्लिम समझा रहे हैं गैर मुस्लिमो को इस्लाम का सही अर्थ


ब्रिटेन: मुस्लिम समझा रहे हैं गैर मुस्लिमो को इस्लाम का सही अर्थ
POSTED BY TEAM DIGITAL ON FEBRUARY 8, 2016 IN विदेश | VIEWS
लंदन । समूचे यूरोप और ब्रिटेन में इस्लाम को लेकर फैलते डर को दूर करने के उद्देश्य से ब्रिटेन की लगभग 90 मस्जिदों ने एक खुले सत्र का आयोजन किया ताकि नकारात्मक खबरों से परे जाकर इस्लाम के अर्थ को सही मायनों में समझाया जा सके।
इस पहल को पिछले साल मुस्लिम काउंसिल ऑफ ब्रिटेन ने शुरू किया था। इस साल इस पहल में लगभग दोगुनी मस्जिदों ने शिरकत की। लंदन, बर्मिंघम, मैनचेस्टर, लीडस, ग्लासगो, कार्डिफ, बेलफास्ट, प्लेमाउथ और कैंटरबरी की मस्जिदों ने हैशटैग विजिट माई मॉस्क कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
एमसीबी ने एक बयान में कहा, इन खुले सत्रों के द्वारा मुस्लिमों को एक मंच मुहैया कराया गया कि वे अपने साथी ब्रितानी नागरिकों को नकारात्मक सुर्खियों से परे जाकर अपने धर्म और समुदाय के बारे में सही जानकारी दे सकें।
इसने पिछले महीने के एक बयान में कहा था, स्थानीय मस्जिदें अंतर-धार्मिक नेताओं को भी इन सत्रों में आमंत्रित करेंगी और उन सभी से कहा जाएगा कि वह अपनी एकता और अखंडता को प्रदर्शित करने के लिए साथ आएं।
इन खुले सत्रों के दौरान इस्लाम से परिचय, मुस्लिम समुदाय के बारे में व्याख्या की गईं और साथ ही लोगों को प्राथनायें देखने एवं भ्रमण का भी अवसर दिया गया। नवीनतम जनगणना के मुताबिक ब्रिटेन में लगभग 27 करोड़ मुस्लिम हैं जो कुल आबादी का लगभग साढ़े चार प्रतिशत हैं।
गौरतलब है कि फ़्रांस में पेरिस हमले के बाद समूचे यूरोप में मुसलमानो के खिलाफ बने माहौल से यूरोप के मुसलमानो में भी का माहौल है । वहीँ सीरिया शरणार्थियों को यूरोपीय देशो द्वारा शरण देने से नाराज़ हुए बहुसंख्यक समुदाय ने भी मुसलमानो के खिलाफ एक मुहीम शुरू कर दी थी । ऐसी परिस्थतियों में गैर मुस्लिमो को इस्लाम को सही से समझाना एक मुश्किल काम ज़रूर है लेकिन ब्रिटेन के मुस्लिम इस काम में जुट गए हैं ।

‘आतंकी समझकर सिर में डाल दी माइक्रोचिप, निकलवा दो’ – मोहम्मद इकबाल


‘आतंकी समझकर सिर में डाल दी माइक्रोचिप, निकलवा दो’ – मोहम्मद इकबाल





आतंक व देशद्रोह के आरोपों में जेल में बंद अब्दुल रहमान उर्फ मोहम्मद इकबाल उर्फ मौलाना को विशेष न्यायाधीश ने सुबूत के अभाव में बरी कर दिया। जज एसएएच रिजवी ने बृहस्पतिवार को इकबाल की रिहाई का आदेश देते हुए कहा कि उसके खिलाफ जो भी सुबूत पेश किए गए वे नाकाफी हैं।
अदालत के फैसले के बाद इकबाल को जेल से रिहा कर दिया गया। कोर्ट ने कहा कि इकबाल को पुलिस ने किसी घटनास्थल से गिरफ्तार नहीं किया तथा उसके पास से कोई अवैध वस्तु भी बरामद नहीं हुई। अपने 16 पन्नों के आदेश में अदालत ने कहा कि अभियोजन यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी इकबाल किसी आतंकवादी संगठन का सदस्य था अथवा किसी आतंकी गतिविधि में शामिल था।
एसटीएफ को सूचना मिली थी कि कुख्यात आतंकी बाबू व नौशाद, जिनके पास खतरनाक हथियार व विस्फोटक हो सकते हैं। अमीनाबाद के किसी होटल में ठहरा था। इस सूचना पर 22 जून 2007 को एसटीएफ ने आरोपियों की गिरफ्तारी केलिए रेजीडेंसी व हाईकोर्ट तिराहे केपास घेराबंदी की। काफी देर केइंतजार के बाद सीएमओ ऑफिस की तरफ रिक्शे पर दो व्यक्ति जिनकेहाथ में हैंडबैग थे तिराहे पर रुके।
खुफिया एजेंसियों ने जो आरोप इकबाल पर लगाए थे उनके अनुसार लखनऊ में 23 जून 2007 को आतंकियों हुई किसी मुठभेड़ में वह शामिल था, लेकिन गोलीबारी के बीच भाग निकला था। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे 21 मई 2008 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था।
इकबाल का कहना है कि 21 मई 2008 को नई दिल्ली स्टेशन से गिरफ्तारी दिखाने से दो महीने पहले ही 20 मार्च को दिल्ली की स्पेशल सेल ने सीलमपुर से उठाया था। दिल्ली में वह इमामत करता था। उसे दो महीने तक यंत्रणाएं दी गईं और कहा गया कि वह खुद को हूजी का आंतकी बताए। ऐसा करने पर उसे कुछ दिन के लिए जेल में रखकर छोड़ दिया जाएगा। कई दिन तक पिटाई और यंत्रणाएं देने के दौरान कुछ समय के लिए उसे बेहोश कर दिया गया। जब होश आया तो सिर और पीठ के निचले हिस्से में ताजा जख्म व टांके थे।

इकबाल का दावा है कि उसे महसूस हुआ कि उसके शरीर में चिप जैसी कोई वस्तु डाली गई है, जिसकी वजह से कंपन और दर्द महसूस होता है। दर्द कम करने और जख्म सुखाने के लिए उसे जबरन दवाएं खिलाई गईं। 21 मई को उसे जनकपुरी ले जाया गया, जहां आरडीएक्स की बरामदगी दिखाई गई और इसका इल्जाम लेने के लिए कहा गया। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया।
दूसरी ओर उसकी रिहाई के लिए कानूनी जंग लड़ने वाले रिहाई मंच के संस्थापक एडवोकेट मोहम्मद शुऐब ने बताया कि उसके खिलाफ जिन लोगों को पुलिस ने गवाह बनाया था, उन्होंने कोर्ट में कहा कि जिस रात की गोलीबारी की बात पुलिस कर रही है, उस रात तो वे घर से निकले ही नहीं थे। ऐसे में समझा जा सकता है कि खुफिया एजेंसियां किस तरह बेगुनाहों को फंसाने का काम कर रही हैं। उन्हें रोका जाना चाहिए, वरना इसी तरह निर्दोष जेल में डाले जाते रहेंगे।
कभी वो अपने सिर पर हाथ रखकर कुछ महसूस करता है, करीब दो इंच का कट दिखाता है और कभी कहीं एकटक ताकता हुआ चुप हो जाता है। आतंक के आरोपों से गुरुवार को बरी हुए शामली के लीलौन के रहने वाले मोहम्मद इकबाल ने बताया कि उसके सिर में माइक्रो चिप डाली गई है।वह बताता है कि ऐसी ही एक चिप उसके पेट में भी डाली गई है। वह चाहता है चिप को जितनी जल्दी हो, निकाल दिया जाए। रिहाई से खुश इकबाल कहता है कि वह अपने घर जाना चाहता है।
जब वह जेल गया था, उसका दो महीने का बेटा था, जिसे करीब आठ साल से उसने नहीं देखा है। अब वह बड़ा हो गया होगा। दो बड़ी बेटियां भी हैं। जेल में रहने के दौरान उसके परिवार का मकान तक बिक गया। आलिम तक पढ़ चुका इकबाल पेशे से वह इमामत और खेती करता था। जेल में रहने के दौरान मिलीं सजा से कई दफा बोलने में खुद को अक्षम महसूस करता है तो कई दफा इधर उधर की बातें करने लगता है।
Copied from Assam.123.com
http://www.assam123.com/hindi/iqbal-release-from-jail-on-not-finding-proof/

http://www.assam123.com/hindi/iqbal-release-from-jail-on-not-finding-proof/

खामोश मिजाजी तुझे जीने नहीं देगी , इस दौर में जीना है तो कोहराम मचा दो !!


                                               Minority Welfare Foundation
                                                ( माइनॉरिटी वेलफेयर फाउंडेशन )

                                               मुसलमान पसमांदा और परीशान हाल
अकलियतों को पसमांदा और परीशान हाल रखने की मुसलसल साजिश की जा रही है । उन्हें न अपने हकूक की खबर है , न अपने दुश्मनों की पहचान , वह नहीं जानते कि हुकूमतें उनके फलाही मंसूबों का एलान तो कर देती हैं , बजट में रकम दिखा कर अकलियतों को खुश भी कर दिया जाता है लेकिन न रुपया दिया जाता है और न उनका कोई काम होता है , तालीम के फरोग , इक्तेसादी तरक्की और समाजी बेहतरी के लिए हुकूमत ने मुख्तलीफ़ मंसूबों के तहत जो अरबों रूपये जारी भी कर दिए उन्हें मुख्तलीफ़ हिले बहाने से मुसलमान तक पहुँचने नहीं दिया जाता है और हमारे अरबों रूपये सरकारी अफसरों की नज़र हो जाते हैं ।

लेकिन ये तब तक होता रहेगा जब तक वह हमारी पूंजी खाते रहेंगे और हम चैन की नींद सोते रहेंगे । अगर हालात बदलना है तो हमें लड़ना होगा और उनकी मुठ्ठी में दबी अपनी रकम छीननी होगी ।अगर छोड़ देंगे तो ये साजशी लोग आप के मुँह से निवाला और तन ढाँकने का कपड़ा भी छीन लेने की कोशीश करेंगे ।

                                           खामोश मिजाजी तुझे जीने नहीं देगी
                                           इस दौर में जीना है तो कोहराम मचा दो !!

आइये मिल कर जद्दोजहद करें और ये जद्दोजहद सिकुड़ कर सिमट कर नहीं मिल जुल कर करना है । और राजधानी से पंचायत तक लड़ना है । क्योंकि हमें एक खानदान की नहीं , एक खेत , एक बाग़ और एक शहर की लड़ाई नहीं लड़नी है ।
हमें हर हिस्सा में अपने हिस्सा की लड़ाई लड़नी है और तब जब तक हमें हमारा हिस्सा मिल नहीं जाता ।

                                                अगराज़ व मक़ासिद

1. अकलियतों की फलाह व बहबूद , तरक्की व बेदारी के लिए मुश्तरका जद्दोजहद

2. बा-सलाहियत तोलोबा , और नवजवानों की हौसला अफज़ाई और जिंदगी के हर शोबा में बेहतर ख्वान्दगी और मौजूदगी के लिए अकलियतों में बेदारी लाना ।

3. तालीम , सेहत , सफाई और तगजिया के शोबा में बेदारी लाने के लिए सेमीनार , मीटिंग , कॉन्फ्रेंस और जलसे जुलूस का एहतमाम और उससे मुतअल्लिक़ मरकज़ी और रियासती हुकूमतों के मंसूबों और स्कीमों से अकलियतों को रोशनास (अवगत) कराना

4. गाँव , देहात , झुग्गी झोंपडी में रहने वाले गरीब बेसहारा , महरूम , जईफ , ख्वातीन , बेवा और माज़ूर अफ़राद की जात पात , उंच नीच , मज़हब पर तवज्जो दिए बगैर उनकी हेमाजोहत तरक्की के लिए काम करना और उनके मसाएल हल करना ।

5. अकलियतों के हकूक दिलाने और उनके मआशी , तालीमी , समाजी तरक्की के लिए हर सतह पर जद्दोजहद करना ।

चेयरमैन :- अनवर अहमद
पाटलिपुत्रा मारकेट , सब्जीबाग
पटना :-800004

कभी कभी "खुदा" अपनी "कुदरत" को खोल-खोल कर दिखा देता है ताकि इंसान उससे "इब्रत" हासिल कर सके, और सही राह पर आ जाये"।


कभी कभी "खुदा" अपनी "कुदरत" को खोल-खोल कर दिखा देता है ताकि इंसान उससे "इब्रत" हासिल कर सके, और सही राह पर आ जाये"।
"इसकी सबसे ताज़ा और ज़िंदा मिसाल कल बुधवार 3, फरवरी 2016 की है।
हुआ यूँ कि "मुरुंड" जोकि मुम्बई के पास एक "समुंद्री बीच" है। वहाँ उस बीच पर मुम्बई के कुछ स्टूडेंट घूमने के लियें गए थे। उन्हीं स्टूडेंट्स में से 14 स्टूडेंट का एक ग्रुप "बोट" की सवारी करने लगा। इसी दौरान एक "ग़ज़बनाक हादसा" हो गया और उनकी "बोट" डूब गयी जिसमे सभी 14 स्टूडेंट भी बोट के साथ डूब गए। आनन् फानन में लोगों ने पुलिस और गोताखोर बुलाये। तब गोताखोरों ने स्टूडेंट्स की लाशों को ढूंढना शुरू किया, 14 स्टूडेंट्स में से 13 स्टूडेंट्स की लाशें तो मिल गयीं थी लेकिन एक लाश नहीं मिल पा रही थी सारी रात कोशिश करने के बाद भी एक लाश का पता नहीं लग पा रहा था। इसी दौरान वहाँ के जो स्थानीय लोग वहाँ जमा थे उनमे से दो लोग, मौलाना लियाक़त, और मौलाना सलमान, आगे आये और पुलिस से दरख्वास्त की कि आप लोगो ने बहुत कोशिश कर ली, अब एक मौका हमें दें, हम समुन्द्र में जाकर अल्लाह से दुआ करेंगे। तब पुलिस ने उन्हें इजाज़त दे दी, और वे दोनों मौलाना लियाक़त, और मौलाना सलमान, एक छोटी "बोट" में सवार होकर उस जगह पर पहुँचे जहाँ "बोट" डूबी थी। और उन्होंने तब वहाँ "अज़ान" देनी शुरू की। एक "अज़ान" मुक़म्मल हुई, उसके बाद दूसरी "अज़ान" मुक़म्मल हुई, जैसे ही तीसरी "अज़ान" मुक़म्मल हुई तो वहाँ पर मौजूद हर शख्श हैरान रह गया क्योंकि वो 14वीं लाश ऊपर आकर पानी पर तैर रही थी, "अल्लाहुअकबर" वहाँ मौजूद सारे पुलिस अधिकारी और गोताखोर ये देख कर दंग रह गए और और उन्होंने माना कि वाकई में "खुदा" की "कुदरत" और "रहमत" बहुत बड़ी है, और वो वक़्त-वक़्त पर अपनी "कुदरत" और "रहमत" लोगों को खोल खोल कर दिखाता रहता है, जिससे कि लोग "इब्रत" हासिल करें और सही रास्ते पर आ जाएँ। अल्लाह हमें और आपको सही मायनों में दीन के रास्ते पर चलने की तौफीफ दे। (आमीन)

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