पैलेट गन का इस्तेमाल महंगा पड़ सकता है देश को ।

पैलेट गन के इस्तेमाल ने बनाया कश्मीर को अंतराष्ट्रीय मुद्दा । कश्मीर मामले पर पाकिस्तान के पक्ष में 57 देश आ गए हैं जो जनमत संग्रह की मांग कर रहे ।

रोहित वेमुला की ख़ुदकुशी हिंदुस्तान के मनुवादी नेजाम का मुँह बोलता सबूत !


रोहित वेमुला की ख़ुदकुशी हिंदुस्तान के मनुवादी नेजाम का मुँह बोलता सबूत !

खुलासा: पिछले हफ़्ते भेष बदलकर मुंबई आया अंडरवर्ल्ड डॉन ‘दाऊद इब्राहिम


 खुलासा: पिछले हफ़्ते भेष बदलकर मुंबई आया अंडरवर्ल्ड डॉन ‘दाऊद इब्राहिम

खुलासा: पिछले हफ़्ते भेष बदलकर मुंबई आया अंडरवर्ल्ड डॉन ‘दाऊद इब्राहिम’

IN देश / ON FEBRUARY 23, 2016 AT 3:57 AM /

मुंबई। भारत समेत दुनियाभर की पुलिस अंडरवर्ल्ड़ डॉन दाऊद इब्राहिम को तलाश रही हैं। दाऊद कहां हैं कोई नहीं जानता, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले हफ्ते दाऊद मुंबई आया था और किसी को कानों-कान खबर नहीं हुई। मुंबई मिरर की खबर के मुताबिक दाऊद पिछले हफ्ते अपने रत्नागिरी वाले बंगले में आया था। कैसे पकड़ा जाएगा डॉन?

मुंबई से सटे रत्नागिरी में दाऊद का पुश्तैनी बंगला हैं, जिसे उसके पिता इब्राहिम कसकर ने 35 साल पहले बनाया था। आज वो बंगला सुनसान पड़ा है। कोई वहां आता-जाता नहीं। लोग कहते हैं कि वहां भूतों का बसेरा है। इसी डर की वजह से उस बंगले के आज भी लोग जाने से कतराते हैं। आम लोगों के साथ-साथ पुलिस भी यहां आने से घबराते हैं।ऐसे में खुफिया एजेंसियों और पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर दाऊद रत्नागिरी के मुम्बके गांव में अपने इस घर पर आया और आस-पास के लोगों से भी मिला। इस बात की खबर ना तो पुलिस को हुई ना खुफिया एजेंसी को। मुंबई मिरर की खबर के मुताबिक दाऊद के एक पड़ोसी ने इस बात की सूचना दी है।

अखबार ने दाऊद के पुश्तैनी घर के पड़ोसी सना मुकद्दम ने इस बात की जानकारी दी कि दाऊद भेष बदलकर मुंबई आया था। उन्होंने कहा कि दाऊद अक्सर आता रहता है। दाऊद ने पड़ोस में रहने वाली एक और महिला ने बताया कि दाऊद यहां आता रहता है, लेकिन उसने ये भी बताया कि उसके घर पर भूतों का कब्ज़ा है। जो भी इस घर की तरफ आता है वो उसे अपने पास खींच लेते हैं।आपको बता दें कि इस जिले में दाऊद की कुल 15 संपत्तियां हैं। जिनकी देखभाल उसके दूर के रिश्तेदार करते हैं। दाऊद की सभी संपत्तियां उसकी मां अमीना इब्राहीम के नाम से हैं। जिन्हें इनकम टेक्स डिपार्टमेंट ने सील कर दिया है।

http://teesrijungnews.com/national/%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%9b%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%9e%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a5%87%e0%a4%b7-%e0%a4%ac%e0%a4%a6/http://teesrijungnews.com/national/%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%9b%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%9e%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a5%87%e0%a4%b7-%e0%a4%ac%e0%a4%a6/ http://teesrijungnews.com/national/%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%9b%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%9e%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a5%87%e0%a4%b7-%e0%a4%ac%e0%a4%a6/http://teesrijungnews.com/national/%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%9b%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%9e%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a5%87%e0%a4%b7-%e0%a4%ac%e0%a4%a6/

حکیم الامت مجدد ملت مفسر قرآن حضرت مولانا ﺍﺷﺮﻑ ﻋﻠﯽ ﺗﮭﺎﻧﻮﯼ رحمہ اللہ مختصر تعارف. . شخصیت اور کارنامے


حکیم الامت مجدد ملت مفسر قرآن حضرت مولانا ﺍﺷﺮﻑ ﻋﻠﯽ ﺗﮭﺎﻧﻮﯼ رحمہ اللہ

        مختصر تعارف. .
                   شخصیت اور کارنامے

تحریر......ریان مسعود سلطانپوریوپی
متعلم دارالعلوم وقف دیوبند

نام . شاہ اشرف علی تهانوی
ﭘﯿﺪﺍﺋﺶ 19 ﺍﮔﺴﺖ 1863 ﺀ
ﻭﻓﺎﺕ 4 ﺟﻮﻻﺋﯽ 1943 ‏( ﻋﻤﺮ 79 ﺳﺎﻝ ‏)
ﺭﮨﺎﺋﺶ ﺗﮭﺎﻧﮧ ﺑﮭﻮﻥ
ﻗﻮﻣﯿﺖ Indian (British subject ‏)
ﻧﺴﻞ ﮨﻨﺪﻭﺳﺘﺎﻧﯽ
ﻭﺩﺭ ﺩﻭﺭ ﺟﺪﯾﺪ
ﭘﯿﺸﮧ ﻋﺎﻟﻢ ﺩﯾﻦ
ﻣﺬﮨﺐ ﺍﺳﻼﻡ
ﺗﺤﺮﯾﮏ ﺩﯾﻮﺑﻨﺪﯼ
ﺷﻌﺒۂ ﻋﻤﻞ ﻓﻘﮧ
ﻣﺎﺩﺭ ﻋﻠﻤﯽ ﺩﺍﺭﺍﻟﻌﻠﻮﻡ ﺩﯾﻮﺑﻨﺪ
ﭘﯿﺮ / ﺷﯿﺦ ﺍﻣﺪﺍﺩ ﺍﻟﻠﮧ ﻣﮩﺎﺟﺮ ﻣﮑﯽ
ﻣﺘﺎﺛﺮ
ﻋﺒﺪﺍﻟﻤﺎﺟﺪ ﺩﺭﯾﺎ ﺑﺎﺩﯼ
ﻣﻮﻻﻧﺎ ﻣﺤﻤﺪ ﺍﺷﺮﻑ ﻋﻠﯽ ﺗﮭﺎﻧﻮﯼ
ﻭﻻﺩﺕ
ﺁﭖ ﮐﮯ ﻭﺍﻟﺪ ﺷﯿﺦ ﻋﺒﺪﺍﻟﺤﻖ ﺍﯾﮏ ﻣﻘﺘﺪﺭ ﺭﺋﯿﺲ ﺻﺎﺣﺐ ﻧﻘﺪ ﻭﺟﺎﺋﯿﺪﺍﺩ ﺍﻭﺭ ﺍﯾﮏ ﮐﺸﺎﺩﮦ ﺩﺳﺖ ﺍﻧﺴﺎﻥ ﺗﮭﮯ۔ ﻓﺎﺭﺳﯽ ﻣﯿﮟ ﺍﻋﻠﯽ ﺍﺳﺘﻌﺪﺍﺩ ﮐﮯ ﻣﺎﻟﮏ ﺍﻭﺭ ﺑﮩﺖ ﺍﭼﮭﮯ ﺍﻧﺸﺎﺀ ﭘﺮﺩﺍﺯ ﺗﮭﮯ۔ﺍﯾﺴﮯ ﻋﺎﻟﯽ ﺧﺎﻧﺪﺍﻥ ﻣﯿﮟ ﺟﮩﺎﮞ ﺩﻭﻟﺖ ﻭﺣﺸﻤﺖ ﺍﻭﺭ ﺯﮨﺪ ﻭﺗﻘﻮﯼ ﺑﻐﻞ ﮔﯿﺮ ﮨﻮﺗﮯ ﺗﮭﮯ۔
5 ﺭﺑﯿﻊ ﺍﻟﺜﺎﻧﯽ 1280 ﮪ ﺑﻤﻄﺎﺑﻖ 9 ﺳﺘﻤﺒﺮ ، 1863 ﺀ ﺗﺎﺭﯾﺦ ﻭﻻﺩﺕ ﮨﮯ۔
ﻭﺍﻟﺪ ﻧﮯ ﺁﭖ ﮐﯽ ﺗﺮﺑﯿﺖ ﺑﮍﮮ ﮨﯽ ﭘﯿﺎﺭ ﻭﻣﺤﺒﺖ ﺳﮯ ﮐﯽ۔ﺗﺮﺑﯿﺖ ﻣﯿﮟ ﺍﺱ ﺑﺎﺕ ﮐﻮ ﺧﺎﺹ ﺍﮨﻤﯿﺖ ﺩﯼ ﮐﮧ ﺑﺮﮮ ﺩﻭﺳﺘﻮﮞ ﺍﻭﺭ ﻏﻠﻂ ﻣﺠﺎﻟﺲ ﺳﮯ ﺁﭖ ﺩﻭﺭ ﺭﮨﮯ ۔ﺁﭖ ﮐﯽ ﻃﺒﯿﻌﺖ ﺧﻮﺩ ﺑﮭﯽ ﺍﯾﺴﯽ ﻭﺍﻗﻊ ﮨﻮﺋﯽ ﺗﮭﯽ ﮐﮧ ﮐﺒﮭﯽ ﺑﺎﺯﺍﺭﯼ ﻟﮍﮐﻮﮞ ﮐﮯ ﺳﺎﺗﮫ ﻧﮩﯿﮟ ﮐﮭﯿﻠﮯ ﺑﭽﭙﻦ ﺳﮯ ﻣﺰﺍﺝ ﺩﯾﻨﯽ ﺗﮭﺎ۔
12 ﺳﺎﻝ ﮐﯽ ﻋﻤﺮ ﻣﯿﮟ ﭘﺎﺑﻨﺪﯼ ﺳﮯ ﻧﻤﺎﺯ ﺗﮩﺠﺪ ﭘﮍﮬﻨﮯ ﻟﮓ ﮔﺌﮯ ﺗﮭﮯ۔
ﺗﻌﻠﯿﻢ ﻭﺗﺮﺑﯿﺖ :
ﺍﺑﺘﺪﺍﺋﯽ ﺗﻌﻠﯿﻢ ﻣﯿﺮﭨﮫ ﻣﯿﮟ ﮨﻮﺋﯽ ﻓﺎﺭﺳﯽ ﮐﯽ ﺍﺑﺘﺪﺍﺋﯽ ﮐﺘﺎﺑﯿﮟ ﯾﮩﯿﮟ ﭘﮍﮬﯿﮟ ﺍﻭﺭ ﺣﺎﻓﻆ ﺣﺴﯿﻦ ﻣﺮﺣﻮﻡ ﺩﮨﻠﻮﯼ ﺳﮯ ﮐﻼﻡ ﭘﺎﮎ ﺣﻔﻆ ﮐﯿﺎ ﭘﮭﺮ ﺗﮭﺎﻧﮧ ﺑﮭﻮﻥ ﺁﮐﺮ ﺣﻀﺮﺕ ﻣﻮﻻﻧﺎ ﻓﺘﺢ ﻣﺤﻤﺪ ﺻﺎﺣﺐ ﺳﮯ ﻋﺮﺑﯽ ﮐﯽ ﺍﺑﺘﺪﺍﺋﯽ ﺍﻭﺭ ﻓﺎﺭﺳﯽ ﮐﯽ ﺍﮐﺜﺮ ﮐﺘﺎﺑﯿﮟ ﭘﮍﮬﯿﮟ ﺫﻭﺍﻟﻘﻌﺪﮦ 1295 ﮪ ﻣﯿﮟ ﺁﭖ ﺑﻐﺮﺽ ﺗﺤﺼﯿﻞ ﻭﺗﮑﻤﯿﻞ ﻋﻠﻮﻡ ﺩﯾﻨﯿﮧ ﺩﺍﺭﺍﻟﻌﻠﻮﻡ ﺩﯾﻮﺑﻨﺪ ﺗﺸﺮﯾﻒ ﻟﮯ ﮔﺌﮯ ﺍﻭﺭ ﭘﺎﻧﭻ ﺳﺎﻝ ﺗﮏ ﯾﮩﺎﮞ ﻣﺸﻐﻮﻝ ﺗﻌﻠﯿﻢ ﺭﮦ ﮐﺮ 1301 ﮪ ﻣﯿﮟ ﻓﺮﺍﻏﺖ ﺣﺎﺻﻞ ﮐﯽ ﺍﺱ ﻭﻗﺖ ﺁﭖ ﮐﯽ ﻋﻤﺮ ﺗﻘﺮﯾﺒﺎً 19 ﺳﺎﻝ ﺗﮭﯽ ﺯﻣﺎﻧﮧ ﻃﺎﻟﺒﻌﻠﻤﯽ ﻣﯿﮟ ﺣﻀﺮﺕ ﻣﯿﻞ ﺟﻮﻝ ﺳﮯ ﺍﻟﮓ ﺗﮭﻠﮓ ﺭﮨﺘﮯ ﺍﮔﺮ ﮐﺘﺎﺑﻮﮞ ﺳﮯ ﮐﭽﮫ ﻓﺮﺻﺖ ﻣﻠﺘﯽ ﺗﻮ ﺍﭘﻨﮯ ﺍﺳﺘﺎﺩ ﺧﺎﺹ ﺣﻀﺮﺕ ﻣﻮﻻﻧﺎ ﻣﺤﻤﺪ ﯾﻌﻘﻮﺏ ﮐﯽ ﺧﺪﻣﺖ ﻣﯿﮟ ﺟﺎﺑﯿﭩﮭﺘﮯ۔
ﺩﺭﺱ ﻭﺗﺪﺭﯾﺲ :
ﺗﮑﻤﯿﻞ ﺗﻌﻠﯿﻢ ﮐﮯ ﺑﻌﺪ ﻭﺍﻟﺪ ﺍﻭﺭ ﺍﺳﺎﺗﺬﮦ ﮐﺮﺍﻡ ﮐﯽ ﺍﺟﺎﺯﺕ ﺳﮯ ﺁﭖ
ﮐﺎﻧﭙﻮﺭ ﺗﺸﺮﯾﻒ ﻟﮯ ﮔﺌﮯ ﺍﻭﺭ ﻣﺪﺭﺳﮧ ﻓﯿﺾ ﻋﺎﻡ ﻣﯿﮟ ﭘﮍﮬﺎﻧﺎ ﺷﺮﻭﻉ ﮐﺮﺩﯾﺎ ﭼﻮﺩﮦ ﺳﺎﻝ ﺗﮏ ﻭﮨﺎﮞ ﭘﺮﻓﯿﺾ ﮐﻮ ﻋﺎﻡ ﮐﺮﺗﮯ ﺭﮨﮯ، 1315 ﮪ ﻣﯿﮟ ﮐﺎﻧﭙﻮﺭ ﭼﮭﻮﮌﮐﺮ ﺁﭖ ﺁﺑﺎﺋﯽ ﻭﻃﻦ ﺗﮭﺎﻧﮧ ﺑﮭﻮﻥ ﺗﺸﺮﯾﻒ ﻻﺋﮯ ﺍﻭﺭ ﯾﮩﺎﮞ ﺣﻀﺮﺕ ﺣﺎﺟﯽ ﺍﻣﺪﺍﺩ ﺍﻟﻠﮧ ﻣﮩﺎﺟﺮ ﻣﮑﯽ ﮐﯽ ﺧﺎﻧﻘﺎﮦ ﮐﻮ ﻧﺌﮯ ﺳﺮﮮ ﺳﮯ ﺁﺑﺎﺩ ﮐﯿﺎ ﺍﻭﺭ ﻣﺪﺭﺳﮧ ﺍﺷﺮﻓﯿﮧ ﮐﮯ ﻧﺎﻡ ﺳﮯ ﺍﯾﮏ ﺩﺭﺳﮕﺎﮦ ﮐﯽ ﺑﻨﯿﺎﺩ ﺭﮐﮭﯽ ﺟﮩﺎﮞ ﺁﺧﺮ ﺩﻡ ﺗﮏ ﺗﺪﺭﯾﺲ،ﺗﺰﮐﯿﮧ ﻧﻔﻮﺱ ﺍﻭﺭ ﺍﺻﻼﺡ ﻣﻌﺎﺷﺮﮦ ﺟﯿﺴﯽ ﺧﺪﻣﺎﺕ ﺳﺮﺍﻧﺠﺎﻡ ﺩﯾﺘﮯ ﺭﮨﮯ ،
ﺍﺱ ﻣﺮﺍﺟﻌﺖ ﭘﺮ ﺣﻀﺮﺕ ﺣﺎﺟﯽ ﺻﺎﺣﺐ ﻧﮯ ﺁﭖ ﮐﻮ ﺍﯾﮏ ﺧﻂ ﺑﮭﯿﺠﺎ ﺟﺲ ﻣﯿﮟ ﻟﮑﮭﺎ ﺗﮭﺎ " ﺑﮩﺘﺮ ﮨﻮﺍ ﮐﮧ ﺁﭖ ﺗﮭﺎﻧﮧ ﺑﮭﻮﻥ ﺗﺸﺮﯾﻒ ﻟﮯ ﮔﺌﮯ ﺍﻣﯿﺪ ﮨﮯ ﮐﮧ ﺧﻼﺋﻖ ﮐﺜﯿﺮ ﮐﻮ ﺁﭖ ﺳﮯ ﻓﺎﺋﺪﮦ ﻇﺎﮨﺮﯼ ﻭﺑﺎﻃﻨﯽ ﮨﻮﮔﺎ،ﺍﻭﺭ ﺁﭖ ﮨﻤﺎﺭﮮ ﻣﺪﺭﺳﮧ ﻭﻣﺴﺠﺪ ﮐﻮ ﺍﺯﺳﺮﻧﻮ ﺁﺑﺎﺩ ﮐﺮﯾﮟ ﮔﮯ،ﻣﯿﮟ ﮨﺮ ﻭﻗﺖ ﺁﭖ ﮐﮯ ﺣﺎﻝ ﻣﯿﮟ ﺩﻋﺎ ﮐﺮﺗﺎ ﮨﻮﮞ "
ﺳﻠﻮﮎ ﻭﻣﻌﺮﻓﺖ :
ﻇﺎﮨﺮﯼ ﻋﻠﻮﻡ ﮐﯽ ﺗﮑﻤﯿﻞ ﮐﮯ ﺑﻌﺪﺩﻝ ﻣﯿﮟ ﺗﺰﮐﯿﮧ ﺑﺎﻃﻦ ﮐﺎ ﺩﺍﻋﯿﮧ ﭘﯿﺪﺍ ﮨﻮﺍ ، ﭼﻨﺎﻧﭽﮧ ﺷﻮﺍﻝ 1201 ﮪ ﻣﯿﮟ ﺟﺐ ﮐﮧ ﺁﭖ ﻃﺎﻟﺐ ﻋﻠﻤﯽ ﮐﯽ ﺯﻧﺪﮔﯽ ﺧﺘﻢ ﻓﺮﻣﺎﮐﺮ ﮐﺎﻧﭙﻮﺭ ﻣﯿﮟ ﺍﺷﺎﻋﺖ ﻋﻠﻮﻡ ﻣﯿﮟ ﻣﺼﺮﻭﻑ ﺗﮭﮯ۔ ﺳﻔﺮ ﺣﺞ ﮐﯽ ﺗﻮ ﻓﯿﻖ ﮨﻮﺋﯽ،ﺣﻀﺮﺕ ﻭﺍﻻ ﺍﭘﻨﮯ ﻭﺍﻟﺪ ﻣﺎﺟﺪ ﮐﯽ ﻣﻌﯿﺖ ﻣﯿﮟ ﺯﯾﺎﺭﺕ ﺣﺮﻣﯿﻦ ﺷﺮﯾﻔﯿﻦ ﮐﮯ ﻟﯿﮯ ﺭﻭﺍﻧﮧ ﮨﻮﺋﮯ ﻣﮑﮧ ﻣﻌﻈﻤﮧ ﭘﮩﻨﭻ ﮐﺮ ﺣﺎﺟﯽ ﺍﻣﺪﺍﺩ ﺍﻟﻠﮧ ﻣﮩﺎﺟﺮ ﻣﮑﯽ ﮐﯽ ﺧﺪﻣﺖ ﻣﯿﮟ ﺣﺎﺿﺮ ﮨﻮﺋﮯ ﺣﺎﺟﯽ ﺻﺎﺣﺐ ﻣﺠﺪﺩ ﺍﻟﻤﻠۃ ﮐﮯ ﺁﻧﮯ ﺳﮯ ﺑﮩﺖ ﺧﻮﺵ ﮨﻮﺋﮯ ﺍﻭﺭ ﺩﺳﺖ ﺑﺪﺳﺖ ﺑﯿﻌﺖ ﮐﯽ ﻧﻌﻤﺖ ﺳﮯ ﺳﺮﻓﺮﺍﺯ ﮐﯿﺎ ﺍﻭﺭ ﻓﺮﻣﺎﯾﺎ ﺗﻢ ﻣﯿﺮﮮ ﭘﺎﺱ ﭼﮫ ﻣﮩﯿﻨﮯ ﺭﮦ ﺟﺎﺅﻟﯿﮑﻦ ﺣﻀﺮﺕ ﻭﺍﻟﺪ ﻣﺎﺟﺪ ﻧﮯ ﻣﻔﺎﺭﻗﺖ ﮐﻮ ﮔﻮﺍﺭﺍ ﻧﮧ ﮐﯿﺎ۔ ﺍﺱ ﭘﺮ ﺣﺎﺟﯽ ﺻﺎﺣﺐ ﻧﮯ ﻓﺮﻣﺎﯾﺎ ﮐﮧ ﻭﺍﻟﺪ ﮐﯽ ﺍﻃﺎﻋﺖ ﻣﻘﺪﻡ ﮨﮯ ﺍﺱ ﻭﻗﺖ ﭼﻠﮯ ﺟﺎﺅﭘﮭﺮ ﺩﯾﮑﮭﺎ ﺟﺎﺋﮯ ﮔﺎ، 1310 ﮪ ﻣﯿﮟ ﺁﭖ ﺩﻭﺑﺎﺭﮦ ﻣﮑﮧ ﻣﮑﺮﻣﮧ ﺗﺸﺮﯾﻒ ﻟﮯ ﮔﺌﮯ ﺍﻭﺭ ﭼﮫ ﻣﺎﮦ ﺣﺎﺟﯽ ﺻﺎﺣﺐ ﮐﯽ ﺧﺪﻣﺖ ﻣﯿﮟ ﺭﮨﮯ۔
ﺍﺱ ﺩﻭﺭﺍﻥ ﺣﺎﺟﯽ ﻧﮯ ﺁﭖ ﮐﻮ ﺷﺮﻑ ﺧﻼﻓﺖ ﺳﮯ ﻧﻮﺍﺯﺍ ﺍﻭﺭ ﺳﺎﺗﮫ ﯾﮧ ﻓﺮﻣﺎﯾﺎ ﻣﯿﺎﮞ ﺍﺷﺮﻑ،ﺗﻮﮐﻞ ﺑﺨﺪﺍ ﺗﮭﺎﻧﮧ ﺑﮭﻮﻥ ﺟﺎﮐﺮ ﺑﯿﭩﮫ ﺟﺎﻧﺎ ﺍﮔﺮ ﺳﺨﺖ ﺣﺎﻻﺕ ﭘﯿﺶ ﺁﺋﯿﮟ ﺗﻮ ﻋﺠﻠﺖ ﻣﺖ ﮐﺮﻧﺎ،ﺍﻥ ﻭﺻﯿﺘﻮﮞ ﺍﻭﺭ ﺑﺎﻃﻨﯽ ﺩﻭﻟﺖ ﮐﻮ ﻟﮯ ﮐﺮ ﺁﭖ 1311 ﮪ ﻣﯿﮟ ﻭﻃﻦ ﻭﺍﭘﺲ ﻟﻮﭦ ﺁﺋﮯ ﺍﻭﺭ ﺣﻀﺮﺕ ﺣﺎﺟﯽ ﺻﺎﺣﺐ ﮐﯽ ﻭﺻﯿﺖ ﮐﮯ ﻣﻄﺎﺑﻖ ﺗﮭﺎﻧﮧ ﺑﮭﻮﻥ ﻣﯿﮟ ﺭﺷﺪ ﻭﺍﺻﻼﺡ ﺑﺎﻃﻨﯽ ﮐﺎ ﻡ ﺷﺮﻭﻉ ﮐﺮﺩﯾﺎ۔ ﮨﻨﺪﻭﺳﺘﺎﻥ ﮐﮯ ﻃﻮﻝ ﻭﻋﺮﺽ ﺳﮯ ﻟﻮﮒ ﭘﺮﻭﺍﻧﮧ ﻭﺍﺭ ﺁﺗﮯ ﺭﮨﮯ ﺍﻭﺭ ﺩﯾﻦ ﺍﺳﻼﻡ ﮐﺎ ﮐﺎﻡ ﮐﺮﺗﮯ ﺭﮨﮯ۔
ﺗﺼﺎﻧﯿﻒ :
ﺁﭖ ﮐﯽ ﺗﺼﺎﻧﯿﻒ ﺍﻭﺭ ﺭﺳﺎﺋﻞ ﮐﯽ ﺗﻌﺪﺍﺩ 800 ﺗﮏ ﮨﮯ ۔ ﺍﻥ ﻣﯿﮟ ﺳﮯ ﭼﻨﺪ ﺍﯾﮏ ﮐﮯ ﻧﺎﻡ ﭘﯿﺶ ﺧﺪﻣﺖ ﮨﯿﮟ۔
ﺗﻔﺴﯿﺮ ﺑﯿﺎﻥ ﺍﻟﻘﺮﺁﻥ ،ﺳﻠﯿﺲ ﺑﺎﻣﺤﺎﻭﺭﮦ ﺗﺮﺟﻤﮧ، ﺗﻔﺴﯿﺮ ﻣﯿﮟ ﺭﻭﺍﯾﺎﺕ ﺻﺤﯿﺤﮧ ﺍﻭﺭ ﺍﮐﺎﺑﺮ ﮐﮯ ﺍﻗﻮﺍﻝ ﮐﺎ ﺍﻟﺘﺰﺍﻡ ﮐﯿﺎ ﮔﯿﺎ ﮨﮯ۔
ﺍﻋﻤﺎﻝ ﻗﺮﺁﻧﯽ ،ﻗﺮﺁﻥ ﻣﺠﯿﺪ ﮐﯽ ﺑﻌﺾ ﺁﯾﺘﻮﮞ ﮐﮯ ﺧﻮﺍﺹ
ﺣﻘﯿﻘۃ ﺍﻟﻄﺮﯾﻘۃ ،ﺳﻠﻮﮎ ﻭﺗﺼﻮﻑ ﮐﮯ ﻣﺴﺎﺋﻞ ﻭﺭﻭﺍﯾﺎﺕ ﭘﺮ ﻣﺸﺘﻤﻞ ﺍﯾﮏ ﺑﮯﻧﻈﯿﺮ ﮐﺘﺎﺏ
ﺍﺣﯿﺎﺀ ﺍﻟﺴﻨﻦ،ﻓﻘﮩﯽ ﺗﺮﺗﯿﺐ ﭘﺮ ﺟﻤﻊ ﮐﯿﮯ ﮔﯿﮯ ﺍﺣﺎﺩﯾﺚ ﮐﺎ ﻣﺠﻤﻮﻋﮧ
ﺍﻣﺪﺍﺩ ﺍﻟﻔﺘﺎﻭﯼ،ﻓﻘﮩﯽ ﻣﺴﺎﺋﻞ ﺍﻭﺭ ﻣﺒﺎﺣﺚ ﮐﺎ ﺍﯾﮏ ﻧﺎﺩﺭ ﻣﺠﻤﻮﻋﮧ
ﺍﻻﻧﺘﺒﺎﮨﺎﺕ ﺍﻟﻤﻔﯿﺪﮦ ،ﺟﺪﯾﺪﺗﻌﻠﯿﻢ ﯾﺎﻓﺘﮧ ﻟﻮﮔﻮﮞ ﮐﮯ ﻣﺬﮨﺒﯽ ﺍﻋﺘﺮﺍﺿﺎﺕ ﮐﮯ ﺟﻮﺍﺑﺎﺕ
ﺍﻋﻼﺀ ﺍﻟﺴﻨﻦ ،ﻣﺬﮨﺐ ﺣﻨﻔﯽ ﮐﯽ ﻣﻮﯾﺪ ﺍﺣﺎﺩﯾﺚ ،ﻣﺤﺪﺛﯿﻦ ﺍﻭﺭ ﺍﮨﻞ ﻓﻦ ﮐﯽ ﺗﺤﻘﯿﻘﺎﺕ ﮐﺎ ﻣﺠﻤﻮﻋﮧ
ﺑﮩﺸﺘﯽ ﺯﯾﻮﺭ،ﺍﺳﻼﻣﯽ ﻣﻌﻠﻮﻣﺎﺕ ﮐﺎ ﻣﮑﻤﻞ ﺫﺧﯿﺮﮦ
  ﺟﻤﺎﻝ ﺍﻟﻘﺮﺁﻥ ،ﺍﺻﻄﻼﺣﺎﺕ ﺗﺠﻮﯾﺪ ﭘﺮ ﻣﺸﺘﻤﻞ ﺍﯾﮏ ﻋﺎﻡ ﻓﮩﻢ ﺭﺳﺎﻟﮧ
ﻧﺸﺮ ﺍﻟﻄﯿﺐ ،ﺁﻧﺤﻀﺮﺕ ﺻﻠﯽ ﺍﻟﻠﮧ ﻋﻠﯿﮧ ﻭﺳﻠﻢ ﮐﯽ ﺳﯿﺮﺕ ﭘﺮ ﻣﺸﺘﻤﻞ ﺟﺎﻣﻊ ﻣﺎﻧﻊ ﮐﺘﺎﺏ
ﻭﻓﺎﺕ :
ﺍﺷﺮﻑ ﻋﻠﯽ ﺗﮭﺎﻧﻮﯼ 83 ﺳﺎﻝ 3 ﻣﺎﮦ 11 ﺩﻥ ﮐﯽ ﺯﻧﺪﮔﯽ ﮔﺰﺍﺭﻧﮯ ﮐﮯ ﺑﻌﺪ 16 ﺭﺟﺐ 1362 ﮪ ﺑﻤﻄﺎﺑﻖ 20 ﺟﻮﻻﺋﯽ ، 1943 ﺀ ﮐﯽ ﺍﻧﺘﻘﺎﻝ ﮐﺮﮔﺌﮯ۔
ﺁﭖ ﮐﯽ ﻧﻤﺎﺯ ﺟﻨﺎﺯﮦ ﻇﻔﺮ ﺍﺣﻤﺪ ﻋﺜﻤﺎﻧﯽ ﻧﮯ ﭘﮍﮬﺎﺋﯽ،ﺗﮭﺎﻧﮧ ﺑﮭﻮﻥ ﮐﮯ ﻗﺒﺮﺳﺘﺎﻥ ﻣﯿﮟ ﺁﭖ ﻣﺪﻓﻮﻥ ﮨﯿﮟ۔

            منجانب
     امن کاپیغام گروپ
رابطہ کرے979370173ﺍﻟﻤﺼﺎﻟﺢ ﺍﻟﻌﻘﻠﯿﮧ،ﺍﺳﻼﻣﯽ ﺍﺣﮑﺎﻡ ﻭﻣﺴﺎﺋﻞ ﮐﮯ ﻣﺼﺎﻟﺢ ﻭﺣﮑﻢ ﮐﺎ ﺑﯿﺎﻥ

देशभक्त बनने के 20 तरीक़े

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देशभक्त बनने के 20 तरीक़े

- ज़ोर-ज़ोर से बोलें, भारत माता की जय।
- बीच-बीच में किसी लेखक या बुद्धिजीवी की पिटाई करते रहें।
- किसी किताब या कलाकृति में आपकी नजर में कुछ राष्ट्रविरोधी हो तो फौरन उसका विरोध करें, उसे जला दें या तोड़फोड़ दें।
- कोई अगर कहे कि देश अपने नागरिकों के साथ नाइंसाफ़ी कर रहा है तो उसे माओवादी बता दें।
- अगर कोई मजदूरों और किसानों की बात उठाए तो उसे विकास विरोधी क़रार दें।
- आरक्षण का सवाल उठे तो योग्यता की बात करें। दलितों, अल्पसंख्यकों और पिछड़ों को बीच-बीच में उनकी औकात बताते रहें।
- सुबह पार्क जाकर ज़ोर-ज़ोर से हंसे, योग करें, बाबा की मैगी खाएं, उनके बताए मुताबिक सांस लें और छोड़ें।
- पाकिस्तान को बार-बार गालियां दें।
- क्रिकेट मैच में भारतीय टीम का झंडा लेकर घूमें, गाल पर तिरंगा छपवा लें।
- लोकतंत्र को कोसते हुए बताएं कि सारी गड़बड़ियां वोट की राजनीति से है।
- नेहरू को गालियां दें और बताएं कि पटेल यह देश अच्छे से चला सकते थे।
- गांधी को महात्मा मानें, लेकिन गोडसे को और महान आत्मा मानें, उनकी मूर्तियां लगवाएं, उनकी फांसी के दिन पर शौर्य दिवस मनाएं।
- अभिव्यक्ति के अधिकार पर भरोसा करें, लेकिन भक्ति के अधिकार को ज़्यादा बड़ा मानें।
- गाय को सड़क पर भटकने दें, पॉलिथीन खाने दें, लेकिन गोकशी और गाय का कारोबार करने वालों की जासूसी करें, ज़रूरत करने पर पिटाई भी।
- महिलाओं का पूरा सम्मान करें, उन्हें भड़काऊ कपड़े न पहनने दें, उन्हें घर के भीतर रखें, उन्हें पतिव्रता और धर्मपरायण होने की शिक्षा दें।
- गीता-वेद, महाभारत-रामायण पढ़ें न पढ़ें, लेकिन रीति-रिवाजों और परंपराओं का हवाला देते हुए सत्यनारायण कथा, तमाम तरह के व्रत-उपवास करते-कराते रहें।
- देश में किसी तानाशाह या सैनिक शासन की ज़रूरत बताएं।
- अखबार न पढ़ें, किताब न पढ़ें, संविधान न पढ़ें, एक फ़र्ज़ी ट्विटर अकाउंट शुरू करें और जो भी देश और समाज को बदलने की सोचें, उसको धमकाएं।
- विचार भी करें और बहस भी, लेकिन जो आपकी न माने या न सुने, उसका मुंह तोड़ दें।
- बस देश के लिए जिएं, देश के लिए सोचें और देश के लिए किसी की जान भी लेने को तैयार रहें।


(प्रियदर्शन एनडीटीवी इंडिया में सीनियर एडिटर हैं)

بدعتیوں کے نام ایک غیر مسلم شاعر کا پیغام


بدعتیوں کے نام ایک غیر مسلم شاعر کا پیغام

ایک  ہی  پربھو  کی  پوجا  ہم  اگر کرتے  نہیں
ایک ہی در پر مگر  سر آپ  بھی  دھرتے  نہیں

اپنی   سجد ہ گاہ  دیوی  کا  اگر  استھان  ہے
آپ کے سجدوں کا مرکز  قبر جو  بے جان  ہے

اپنے معبودوں کی  گنتی  ہم  اگر رکھتے نہیں
آپ کے مشکل کشاؤں کو بھی گن سکتے نہیں

’’جتنے  کنکر  اتنے  شنکر‘‘ یہ اگر مشہور ہے
ساری  درگاہوں  پہ سجدہ  آپ  کا  دستور  ہے

اپنے  دیوی   دیوتاؤں   کو    اگر   ہے   اختیار
آپ  کے  ولیوں  کی  طاقت  کا نہیں  حدوشمار

وقتِ مشکل  ہے  اگر  نعرہ  مرا  ’ بجرنگ بلی
آپ  بھی  وقتِ ضرورت  نعرہ  زن  ہیں  ’یاعلی‘

لیتا  ہے  اوتار   پربھو   جبکہ  اپنے  دیس  میں
آپ کہتے ہیں ’’خدا ہے مصطفٰے کے بھیس میں‘‘

جس  طرح  ہم  ہیں  بجاتے  مندروں  میں گھنٹیاں
تر بتوں  پر   آپ   کو    دیکھا   بجاتے ;   تالیاں

ہم  بھجن  کرتے  ہیں  گا کر  دیوتا  کی  خوبیاں
آپ  بھی  قبروں  پہ   گاتے   جھوم  کر  قوّالیاں

ہم  چڑھاتے ہیں بتوں  پر دودھ  یا پانی کی دھار
آپ  کو   دیکھا  چڑھاتے   مرغ   چادر ،   شاندار

بت  کی  پوجا  ہم  کریں،  ہم  کو  ملے’’نارِ سقر
آپ  پوجیں  قبر  تو  کیونکر  ملے; جنّت میں گھر؟

آپ مشرک، ہم بھی مشرک معاملہ جب صاف ہے
جنّتی  تم ، دوزخی  ہم ، یہ  کوئی  انصاف   ہے

مورتی  پتّھر  کی  پوجیں  گر ! تو  ہم  بدنام ہیں
آپ  :’’سنگِ نقش ِپا‘‘  پوجیں   تو  نیکو  نام  ہیں

کتنا  ملتا   جلتا   اپنا   آپ    سے    ایمان    ہے
آپ کہتے  ہیں مگر  ہم  کو   تو "بے ایمان"  ہے

شرکیہ  اعمال  سے  گر   غیر  مسلم  ہم  ہوئے
پھر  وہی  اعمال  کرکے آپ  کیوں  مسلم ہوئے

ہم  بھی  جنّت  میں  رہیں  گے  تم  اگر  ہو جنّتی
ورنہ  دوزخ  میں  ہمارے  ساتھ  ہوں گے آپ بھی

ہے  یہ  نیّر  کی  صدا سن لو  مسلماں  غور سے
اب  نہ  کہنا  دوزخی  ہم کو کسی بھی طور سے

(اوم پر کاش نیّر، لدھیانوی )

कन्हैया पर हमला असल जंगल राज मोदी हुकूमत जज्बाती मसायल उठाकर अपनी नकामयों पर प्रदा डालना चाहती है ( नीतीश कुमार )


कन्हैया पर हमला असल जंगल राज
मोदी हुकूमत जज्बाती मसायल उठाकर अपनी नकामयों पर प्रदा डालना चाहती है ( नीतीश कुमार )
पटना , 20 फ़रवरी 2016 ( शीश अहमद , उर्दू दैनिक पिन्दार , पटना )
वजीरे आला नीतीश कुमार ने पटियाला हाउस कॉर्ट में #JNU स्टूडेंट्स यूनियन के सदर कन्हैया कुमार पर हमले को असल जंगल राज क़रार दिया है । जुमा को रियासती काबीना की मीटिंग में जराए अब्लाग के नुमाइंदों से बात चीत करते हुए वजीरे आला ने कहा कि कुछ लोग बिहार में जंगल राज होने का दावा करते हैं , पटियाला हाउस में पुलिस की मौजूदगी में हमला होना असल में जंगल राज है ।।
उन्होंने कहा कि वजीरे आज़म नरेंदर मोदी मुल्क के अवाम को बताएं की उनकी नज़र में गद्दारी की तारीफ क्या है ........ ?
अगर किसी पर गद्दारी का इलज़ाम लगाया जाता है तो उसका सबूत भी देना होगा , क्योंकि वह लोग जो भी बोलते हैं , अगले दिन ही झूठ साबित हो जाता है ।।
उन्होंने इल्जाम लगाया के मोदी हुकूमत जज्बाती मसायल उठा कर अपनी नाकामियों पर प्रदा डाल रही है ।।आर्थिक मोर्चे पर अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए ही मोदी हुकूमत , बीजेपी  और आर एस एस ने जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी का मामला उठाया है ।।उन्होंने कहा कि मरकजी हुकूमत ( केंद्र सरकार ) JNU जैसे मेयारी तालीमी अदारे (उच्चय शिक्षण संसथान ) को तबाह करना चाहती है ।।
नीतीश कुमार ने कहा कि दरअसल जे एन यू में उनके नजरयात को नहीं मानने वालों की अक्सरियत ( बाहुल्यता ) है इसलिए बीजेपी और आर एस एस सब को अपने कब्जे करके खतरनाक नजरिया को थोपने के लिए इस अदारे को बदनाम करने की साजिश रच रही है ।।
वजीरे आला ने कहा कि बीजेपी अफज़ल गुरु की रिहाई का मुतालबा करने वालों के साथ मिल कर जम्मू व कश्मीर हुकूमत बनाने की कोशिश कर रही है और लोगों का ध्यान अपनी नाकामियों से हटाने के लिए ऐसा माहौल बना रही है ताकि आवाम इस तरह के मामलों में उलझी रहे ।
वजीरे आला ने कहा कि तिरंगा तो कहीं भी लहराया जायेगा , ये कैसा हुक्म है , तिरंगा लहराने पर रोक है क्या .....? अदालत के हुक्म से अब मुल्क में कहीं भी तिरंगा लहराया जा सकता है , पहले तिरंगा कुछ मोकामात पर ही लहराया जाता था , जे एन यू में भी लहराया जा सकता है ।।

कन्हैया ने सिर्फ एक ही नारा खतरनाक लगा दिया था ‘संघवाद से आज़ादी’ ब्यूरो । भाजपा कुछ भी सफाई दे लेकिन जिस वीडियो को आधार बनाकर जेएनयू अध्यक्ष कन्हैया को निशाना बनाया गया है वह देशद्रोह का आरोप सिद्ध करने के लिए नाकाफी मालूम होता है । जेएनयू प्रकरण में भाजपा ने खुद ही अपनी किरकिरी करा ली । यह मामला इतना पेचीदा नही था जितना इसे पेचीदा बनाकर पेश किया गया ।


कन्हैया ने सिर्फ एक ही नारा खतरनाक लगा दिया था ‘संघवाद से आज़ादी’
ब्यूरो । भाजपा कुछ भी सफाई दे लेकिन जिस वीडियो को आधार बनाकर जेएनयू अध्यक्ष कन्हैया को निशाना बनाया गया है वह देशद्रोह का आरोप सिद्ध करने के लिए नाकाफी मालूम होता है । जेएनयू प्रकरण में भाजपा ने खुद ही अपनी किरकिरी करा ली । यह मामला इतना पेचीदा नही था जितना इसे पेचीदा बनाकर पेश किया गया ।

कन्हैया द्वारा लगाए गए नारो में एक नारा संघवाद से आज़ादी भी था जो न तो विधार्थी परिषद के गले से उतर सकता है और न ही भाजपा के गले उतरा होगा । रही सही कसर भाजपा और सरकार के चापलूस कुछ मीडिया चैनलों ने पूरी कर दी । एक चैनल से वीडियो के पूरे अंश भी नहीं दिखाए और फैसला भी दे दिया कि ये सीधा सीधा देशद्रोह का मामला है ।

इस चैनल का एंकर चटकारे ले लेकर जेएनयू की खबर को मनगढ़ंत तरीके से गलत दिशा में धकेल दिया । इतना ही नही चैनल ने ऐसे फैसला सुना दिया जैसे देश की सबसे बड़ी कोर्ट इसी चैनल पर लगती हो और ये एंकर उस कोर्ट के सबसे बड़े जज हैं । ऐसे चैनलों ने इस मामले में न सिर्फ जेएनयू की साख को बट्टा लगाया बल्कि देश में अराजकता का माहौल पैदा करने की कोशिश भी की ।

मुझे लगता है जेएनयू छात्रों से ज़्यादा दोषी ये भगवा मीडिया है जो हर मामले को हिन्दू मुस्लिम या भारत पाकिस्तान का रूप देने की कोशिश करता है । सबसे ज़्यादा गम्भीर बात यह है कि जो मीडियाकर्मी एक उधोगपति से ब्लेकमेलिंग कर पैसे बसूलने के मामले में जेल गया था वह खुद को पाक साफ़ मान रहा है जबकि वह रंगे हाथो कैमरे में कैद हुआ था और पूरे देश ने देखा था । देश में अमन के लिए ज़रूरी है कि ऐसे चैनलों पर हमेशा के लिए पाबन्दी लगा दी जानी चाहिए । जिनके खुद के दामन साफ़ नही वे पत्रकारिता को एक मज़ाक से ज़्यादा क्या समझेंगे ।

हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के शोध छात्र रोहित द्वारा की गयी आत्म हत्या मामले से ख़राब हुई छवि से अभी भाजपा निकल भी नही पाई थी कि जेएनयू का ताज़ा मामला हो गया । भाजपा शायद भूल रही है कि पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के शासनकाल में मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करने के बाद देशभर में भड़के आरक्षण विरोधी आंदोलन को काबू करना मुश्किल हो गया था । उस समय छात्रों की एकजुटता ने विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार को हिलाकर रख दिया था । जेएनयू मामला भले ही आरक्षण से जुड़ा नही है लेकिन छात्रों से ज़रूर जुड़ा है । इस पर सरकार को सोच विचार कर ही फैसले लेने होंगे ।

(राजाज़ैदखान)
 http://www.lokbharat.com/%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ab-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b0/

कन्हैया ने सिर्फ एक ही नारा खतरनाक लगा दिया था ‘संघवाद से आज़ादी’ ब्यूरो । भाजपा कुछ भी सफाई दे लेकिन जिस वीडियो को आधार बनाकर जेएनयू अध्यक्ष कन्हैया को निशाना बनाया गया है वह देशद्रोह का आरोप सिद्ध करने के लिए नाकाफी मालूम होता है । जेएनयू प्रकरण में भाजपा ने खुद ही अपनी किरकिरी करा ली । यह मामला इतना पेचीदा नही था जितना इसे पेचीदा बनाकर पेश किया गया ।


कन्हैया ने सिर्फ एक ही नारा खतरनाक लगा दिया था ‘संघवाद से आज़ादी’
ब्यूरो । भाजपा कुछ भी सफाई दे लेकिन जिस वीडियो को आधार बनाकर जेएनयू अध्यक्ष कन्हैया को निशाना बनाया गया है वह देशद्रोह का आरोप सिद्ध करने के लिए नाकाफी मालूम होता है । जेएनयू प्रकरण में भाजपा ने खुद ही अपनी किरकिरी करा ली । यह मामला इतना पेचीदा नही था जितना इसे पेचीदा बनाकर पेश किया गया ।

कन्हैया द्वारा लगाए गए नारो में एक नारा संघवाद से आज़ादी भी था जो न तो विधार्थी परिषद के गले से उतर सकता है और न ही भाजपा के गले उतरा होगा । रही सही कसर भाजपा और सरकार के चापलूस कुछ मीडिया चैनलों ने पूरी कर दी । एक चैनल से वीडियो के पूरे अंश भी नहीं दिखाए और फैसला भी दे दिया कि ये सीधा सीधा देशद्रोह का मामला है ।

इस चैनल का एंकर चटकारे ले लेकर जेएनयू की खबर को मनगढ़ंत तरीके से गलत दिशा में धकेल दिया । इतना ही नही चैनल ने ऐसे फैसला सुना दिया जैसे देश की सबसे बड़ी कोर्ट इसी चैनल पर लगती हो और ये एंकर उस कोर्ट के सबसे बड़े जज हैं । ऐसे चैनलों ने इस मामले में न सिर्फ जेएनयू की साख को बट्टा लगाया बल्कि देश में अराजकता का माहौल पैदा करने की कोशिश भी की ।

मुझे लगता है जेएनयू छात्रों से ज़्यादा दोषी ये भगवा मीडिया है जो हर मामले को हिन्दू मुस्लिम या भारत पाकिस्तान का रूप देने की कोशिश करता है । सबसे ज़्यादा गम्भीर बात यह है कि जो मीडियाकर्मी एक उधोगपति से ब्लेकमेलिंग कर पैसे बसूलने के मामले में जेल गया था वह खुद को पाक साफ़ मान रहा है जबकि वह रंगे हाथो कैमरे में कैद हुआ था और पूरे देश ने देखा था । देश में अमन के लिए ज़रूरी है कि ऐसे चैनलों पर हमेशा के लिए पाबन्दी लगा दी जानी चाहिए । जिनके खुद के दामन साफ़ नही वे पत्रकारिता को एक मज़ाक से ज़्यादा क्या समझेंगे ।

हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के शोध छात्र रोहित द्वारा की गयी आत्म हत्या मामले से ख़राब हुई छवि से अभी भाजपा निकल भी नही पाई थी कि जेएनयू का ताज़ा मामला हो गया । भाजपा शायद भूल रही है कि पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के शासनकाल में मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करने के बाद देशभर में भड़के आरक्षण विरोधी आंदोलन को काबू करना मुश्किल हो गया था । उस समय छात्रों की एकजुटता ने विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार को हिलाकर रख दिया था । जेएनयू मामला भले ही आरक्षण से जुड़ा नही है लेकिन छात्रों से ज़रूर जुड़ा है । इस पर सरकार को सोच विचार कर ही फैसले लेने होंगे ।

(राजाज़ैदखान)
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