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www.biharbroadcasting.com: अंग्रेजों के जरिये ढाए गए जुल्म को भी फीका कर गए ...:                                 उर्दू दैनिक पिन्दार पटना दिनांक 4/05/2013 ke page 11 से                                       मुझे नंगा क...

अंग्रेजों के जरिये ढाए गए जुल्म को भी फीका कर गए आजाद हिन्दुस्तान के जालिम निगेह्बानों ने ? मुझे नंगा करके मेरे हाँथ पैर जंजीरों में जकड़ दिए गए , विशेष मकोका अदालत के जज के रूबरू आरोपी एहतेशाम सिद्दीकी की गवाही ...

                                उर्दू दैनिक पिन्दार पटना दिनांक 4/05/2013 ke page 11 से

                                      मुझे नंगा करके मेरे हाथ पैर जंजीरों में जकड़ दिए गए
                 विशेष मकोका अदालत के जज के सामने आरोपी एहतेशाम सिद्दीकी की गवाही .
मुंबई 3 मई (एजेंसी )विशेष मकोका अदालत के जज वाई डी शिंदे के रूबरू अपने ही खेलाफ दायर मुक़दमे में बतौर गवाह देफाह पेश हुए ,मुल्जिम एहतेशाम सिद्दीकी ने इन आरोपोयों को मुफ्त कानूनी सहायेता पहुंचाने वाली संस्था जमिअतुल उलुमाये हिन्द महारष्ट्र (अर्शद मदनी )के वकील शरीफ शैख़ की जानिब से आज तीसरे दिन भी सवालों के जवाब देते हुए कहा के मुझे 8 दिसंबर 2006 को बंगलौर के लेडी कर्जन अस्पताल नार्को टेस्ट के लिए ले जाया गया जहाँ मुझे मुझे एक कमरे में उल्टा लेटने के लिए कहा गया .जहाँ कमरे में पहले से ही डी सी पी नवल बजाज मौजूद थे .मुझे वहां सलाइन के जरिये इंजेक्शन भी लगाया गए , जिससे मैं बेहोश हो गया ..जब मुझे होश आया तो मुझे बैंगलोर एयरपोर्ट लेजाया गया मुंबई जाने के लिए ,उस वक़्त मेरे साथ ए सी पी  शिल्के और एक कांस्टेबल थे . सफ़र के दौरान  ए सी पी सालके ने बताया के नार्को टेस्ट के दौरान ये यकीन हो गया के तुमने ब्लास्ट नहीं किये , फिरभी मुझे मुंबई लाकर भुई वाड़ा पुलिस स्टेशन लॉकअप में रख्खा गया और फिर मुझे मज्गाओं कोर्ट में उसी दिन हाजीर किया गया .पुलिसे ऑफिसर शिल्के पी आई तिजने ने मुझे कहा के मई जज के सामने कुछ नहीं कहूँगा  और मैं ने जज के सामने कुछ नहीं कहा और  न ही जज ने मुझसे कोई सवाल पुछा .फिर मुझे पुलिस कस्टडी में दे दिया गया .एक दिन फिर मुझे बजरिये हवाई जहाज बैंगलोर के उसी स्पताल में जहाँ पहले मेरा नार्को टेस्ट कराया जा चुका था ..नार्को टेस्ट की वीडियो रेकोर्डिंग भी की गई ...इस दरमयान मुझसे  बहुत सारे सवाल किये गए लेकिन विशेष तौर पर ये सवाल किया के मैं ने लोकल ट्रेन में बम रखे थे जिसका मैंने नकारात्मक जवाब दिया ...फिरभी मुझे 1 3 दिसंबर 2 0 0 6 को मुंबई वापस लाया गया ...दौराने सफ़र मैंने पुलिस ऑफिसर पी आई खांडेकर से कहा के नार्को टेस्ट में कुछ  नहीं निकला है और क्या मुझे जल्द ही छोड़ दिया जायेगा , लेकिन पुलिस अफसर ने कहा के नार्को टेस्ट में बहुत कुछ निकला है और फिर उसने मुझे सफ़र के दौरान कोई बात नहीं की . मुंबई आने के बाद नागपाड़ा ए टी एस ऑफिस ले जाया गया जहाँ पहले से ही के पी रघुवंशी मौजूद थे जो मुझे अन्दर एक केबिन में ले गये , जहाँ उन्हों ने मुझे तमाम आरोपियों के नाम बताये गए और कहा गया के इन में से तूम किस किस को जानते हो ..मैं ने कहा के मैं डाक्टर तनवीर और साजिद अंसारी को जानता हूँ और बाक्य आरोपियों से कोई जान पहचान नहीं है ..... फिरभी मुझसे के पी रघुवंसी ने कहा के अगर मैं बम धमाकों की जिम्मेदारी कबूल नहीं करूँगा तो मैं तुम्हे encounter में मार दूंगा  , फिर उन्हों ने पी आई खांडेकर और पी आई ताजने को अन्दर केबिन में बुलाया और कहा के रस्सी लेकर आओ उसके हाथ पाऊँ बांधकर इसे बोरीओवेली के नेशनल पार्क में छोड़ दो और जब ये चलने लगे तो इसे पीछे से गोलियों से भून डालो .उसके बाद मुझे काला चौकी में ले जाकर कमरे में छोड़ दिया गया जिसके चारों कोनो में जंजीरे लगी हुई थीं .उसी रात क् additional  ए सी पी जय जीत सिंह . ए पी आई खानोलकर ,पी एस आई सचिन कदम ,कांस्टेबल सालुई ,और दसरे सहायक पुलिस दस्ता के लोग ने  और रस्सी लेकर आये और मेरे हाँथ पाँव बाँध दिए और फिर मुझे जमीन पर बैठने कहा और फिर मेरे दोनों पैरों को दो विपरित दिशाओं में खिंचा गया जिससे मुझे शदीद तकलीफ होने लगी ..इसी दौरान पुलिसे अफसरान मुझसे सिर्फ और सिर्फ एक ही सवाल कर रहे थे के किसने ये बम ब्लास्ट किये हैं और जब मैं ये कहता के मुझे पता नहीं तब वह मेरे दोनों पैरों को और जोर से फैलाते , जिसकी वजह से बहुत जेयादा तकलीफ होने लगी ... इसके बाद उन्होंने मुझे उसी कमरे में बंद कर दिया गया जहां मेरे पास सर्दी से बचने के लिए कम्बल वगैरह कुछ भी नहीं था ...दुसरे रोज जब मैं पेशाब करने बैठा तो पेशाब के साथ खून भी आया मैं ने उनसे कहा के अस्पताल लेक चलो लेकिन पुलिस अफसर ताजने ने कहा के सब खुद ब खुद ठीक हो जायेगा अस्पताल  जाने की जरुरत नहीं है ....लेकिन मेरे कहने के बावजूद कोई भी चिकित्सकिये सहयेता नहीं पहुंचाई , और कहा के इसकी कोई जरुरत नहीं है ,खुद ब खुद ठीक हो जायेगा ......अधिवक्ता शरीफ शैख़ के सवाल पर मुलजिम एहतेशाम ने मजीद ये कहा के इस वाकेया के दुसरे दिन मुझे पी आई ताजने  नागपाड़ा  ए टी एस ऑफिस ले गये जहां पहले से ही के पी रघुवंशी , जय जीत सिंह ,जैसवाल , पी आई  खानोलकर और ए पी आई सचिन कदम मौजूद थे .....ए  पी आई सचिन कदम उन में मिठाई तकसीम कर रहा था ....इसी दरमयान के पी रघुवंशी ने कुछ कागजात मेरे सामने करते हुए कहा के मैं उन कागजात पर दस्तखत करूँ मगर मैं ने दस्तखत करने से इनकार कर दिया .मेरे इनकार करने पर दुबारा मुझे रस्सी से बांध बांधकर कर जद व कोब करना शुरू कर दिया गया ......इसी दौरान मेरे सर पर शदीद जर्ब पहुंचाई गई ,जिसके बेना पर मुझे सांस लेने में दिक्कत पेश आने लगी ,लिहाजा इन लोगों ने मेरा ब्लड प्रेसर खुद ही चेक किया और मुझ से की जाने वाली मार पीट बंद कर दी गई .....उसके दुसरे रोज मेरे कमरे में जहाँ में जेरे तफ्तीश था , पुलिस अफसरान  ताजने , खानोलकर ,सचिन कदम और कुछ कोंस्टेबल आये और नंगा करके मेरे हाँथ पाँव बाँध जंजीर से  बाँध दिए और मेरे जिस्म के ख़ास हिस्से पर पंद्रह मिनटों तक इलेक्ट्रिक शॉक लगाया गया ,जिसकी वजह से मैं कुछ देर तक बेहोशी की हालत में पड़ा रहा , दिन गुजर ने के बाद इसी रोज रात में फिर उपरोक्त अफसरों ने दोबारा मेरे कमरे में आये और मुझे यातनाएं पहुंचाए .......   www.biharbroadcasting.com

मुंबई लोकल ट्रेन धमाका के आरोपियों के खेलाफ सबुत न मिलने के कारण महाराष्ट्र ए टी एस हैरत में

                            (उर्दू दैनिक "पिन्दार "पटना दिनांक 27/04/2013 पृष्ठ नंबर 11 से लिया गया है )

मुंबई 26/4/2013 (press release)7 /11 मुंबई लोकल ट्रेन बम धमाका मामले के आरोपी के फोन रिकॉर्ड (सी डी आर)के मुताबिक़ आरोपीयों  के मौकाए वारदात पर मौजूद न होने के बात सामने आते ही महाराष्ट्र  ए टी एस सकते में है , क्योंके  ए टी एस ने दावा किया था के जिन आरोपियों को उसने इस मामले में गिरफ्तार किया है वह धमाकों के वक़्त मौकाए वारदात पर मौजूद थे ,टेलीफोन कंपनी के इस रिकॉर्ड के बाद ए टी एस  सकते में है और वह आरोपियों के खेलाफ बाकी दुसरे पुख्ता सबुत हासिल करने के चक्कर  लगी है ,सनद  रहे  के गुजिस्ता कल 7 /1 1 मुंबई लोकल ट्रेन धमाका मामले में उस वक़्त एक नया मोड़ आ गया जब मोबाइल कंपनी एयर टेल के नोडल ऑफिसर ने मुल्जेमिन के सी डी आर की बुनियाद पर ये एतराफ (स्वीकार )किया के  चार आरोपियों के इस्तेगासा के दावा के खेलाफ मौकाए वारदात पर मौजूद नहीं थे ,इस हकीक़त के सामने आने के बाद आज आरोपियों ने विशेष मकोका अदालत से दरखास्त की के उन्हें अदालत में अपना बयान दर्ज कराने की इजाजत दी जाए , जिसे आज विशेष मकोका अदालत के जज वाई डी शिंदे ने मंजूर करते हुए मुल्जेमिन से अपना बयान दर्ज करवाने  की  3 0 अप्रैल तारीख मुकर्रर की है , गुजिस्ता कल एयर टेल कंपनी का एक नोडल ऑफिसर विशेष मकोका अदालत में हाजिर हुआ था जिसने फैसल शैख़ , एहतेशाम सिद्दीकी ,मुजम्मिल शैख़  और आसिफ खान के तक़रीबन सात साल पुराने कॉल डिटेल रिकॉर्ड अदालत में पेश किये ,जो ट्रेन बम धमाका के वक़्त अपने मोबाइल फोने में उसी कंपनी का सिम कार्ड इस्तेमाल कर रहे थे ,सी डी आर की तफ्सीलात अदालत में पेश होने के बाद इन आरोपियों को कानूनी मदद पहुंचाने वाली संस्था जमिअतुल उलामाए हिन्द (अरसद मदनी )के देफाई वकील अधिवक्ता शरीफ शैख़ ,अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान , और अधिवक्ता प्रकाश शेठ्ठी के सवालों का जवाब देते हुए इस नोडल ऑफिसर ने स्वीकार किया था के सी डी आर के मुताबिक़ 8 और 9 जुलाई 2006 को ये आरोपी उन स्थानों पर मौजूद थे ,जहां वह काम कर रहे थे ..इसके इलावा 1 1 जुलाई वाले दिन भी ये लोग उन्ही जगहों पर मौजूद थे .....वकील देफा  अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के मुताबिक़ इस केस की तफ्तीश करने वाली ए टी एस के अफ्सरान ने ये दावा किया है के इस मुकदमा के एक मुलजिम मोहम्मद अली के मकान पर बम बनाये गए थे और फिर १ १  जुलाई  को आरोपी बम लेकर चर्च गेट रेलवे स्टेशन गए और  वहाँ विभिन ट्रेनों में चढ़ कर विस्फोटक पदार्थों से भड़े बैग को ट्रेन में छोड़ दिया जिन में बाद में धमाके हुए .ताहम सी डी आर के मुताबिक़ धमाकों वाले दिन भी ये चारों आरोपी मौकाए वारदात पर मौजूद नहीं थे , बलके अपने काम काज के स्थान  पर मौजूद थे ,ए टी एस ने ये दावा किया किया है के आरोपियों ने ये तै किया था के वह धमाकों की साजिश के दौरान अपने मोबाइल फोने इस्तेमाल नहीं करेंगे , लेकिन  इस दौरान भी उनके मोबाइल इस्तेमाल हो रहे थे। इसी तरह आज लूप मोबाइल कम्पनी के नोडल ऑफिसर ने भी अदालत में आरोपियों के सी डी आर पेश किये  जो न मोकम्मल हैं ,इसने खुद स्वीकार किया और कहा के कंपनी ने हर संभव कोशिश की है के मोकम्मल डाटा हासिल कर कर के अदालत में पेश  किया जा सके लेकिन इसमें हम कामयाब न हो सके ..दौराने कार्रवाई अदालत में जमिअतुल उलेमा महाराष्ट्र की जानिब से अधिवक्ता शाहिद नदीम अंसारी , अंसार तम्बोली , और अधिवक्ता अभिषेक पांडे वगैरह मौजूद थे  ....     www.biharbroadcasting.com 


                                उर्दू दैनिक पिन्दार पटना दिनांक 4/05/2013 ke page 11 से
                                      मुझे नंगा करके मेरे हाथ पैर जंजीरों में जकड़ दिए गए
                 विशेष मकोका अदालत के जज के सामने आरोपी एहतेशाम सिद्दीकी की गवाही .
मुंबई 3 मई (एजेंसी )विशेष मकोका अदालत के जज वाई डी शिंदे के रूबरू अपने ही खेलाफ दायर मुक़दमे में बतौर गवाह देफाह पेश हुए ,मुल्जिम एहतेशाम सिद्दीकी ने इन आरोपोयों को मुफ्त कानूनी सहायेता पहुंचाने वाली संस्था जमिअतुल उलुमाये हिन्द महारष्ट्र (अर्शद मदनी )के वकील शरीफ शैख़ की जानिब से आज तीसरे दिन भी सवालों के जवाब देते हुए कहा के मुझे 8 दिसंबर 2006 को बंगलौर के लेडी कर्जन अस्पताल नार्को टेस्ट के लिए ले जाया गया जहाँ मुझे मुझे एक कमरे में उल्टा लेटने के लिए कहा गया .जहाँ कमरे में पहले से ही डी सी पी नवल बजाज मौजूद थे .मुझे वहां सलाइन के जरिये इंजेक्शन भी लगाया गए , जिससे मैं बेहोश हो गया ..जब मुझे होश आया तो मुझे बैंगलोर एयरपोर्ट लेजाया गया मुंबई जाने के लिए ,उस वक़्त मेरे साथ ए सी पी  शिल्के और एक कांस्टेबल थे . सफ़र के दौरान  ए सी पी सालके ने बताया के नार्को टेस्ट के दौरान ये यकीन हो गया के तुमने ब्लास्ट नहीं किये , फिरभी मुझे मुंबई लाकर भुई वाड़ा पुलिस स्टेशन लॉकअप में रख्खा गया और फिर मुझे मज्गाओं कोर्ट में उसी दिन हाजीर किया गया .पुलिसे ऑफिसर शिल्के पी आई तिजने ने मुझे कहा के मई जज के सामने कुछ नहीं कहूँगा  और मैं ने जज के सामने कुछ नहीं कहा और  न ही जज ने मुझसे कोई सवाल पुछा .फिर मुझे पुलिस कस्टडी में दे दिया गया .एक दिन फिर मुझे बजरिये हवाई जहाज बैंगलोर के उसी स्पताल में जहाँ पहले मेरा नार्को टेस्ट कराया जा चुका था ..नार्को टेस्ट की वीडियो रेकोर्डिंग भी की गई ...इस दरमयान मुझसे  बहुत सारे सवाल किये गए लेकिन विशेष तौर पर ये सवाल किया के मैं ने लोकल ट्रेन में बम रखे थे जिसका मैंने नकारात्मक जवाब दिया ...फिरभी मुझे 1 3 दिसंबर 2 0 0 6 को मुंबई वापस लाया गया ...दौराने सफ़र मैंने पुलिस ऑफिसर पी आई खांडेकर से कहा के नार्को टेस्ट में कुछ  नहीं निकला है और क्या मुझे जल्द ही छोड़ दिया जायेगा , लेकिन पुलिस अफसर ने कहा के नार्को टेस्ट में बहुत कुछ निकला है और फिर उसने मुझे सफ़र के दौरान कोई बात नहीं की . मुंबई आने के बाद नागपाड़ा ए टी एस ऑफिस ले जाया गया जहाँ पहले से ही के पी रघुवंशी मौजूद थे जो मुझे अन्दर एक केबिन में ले गये , जहाँ उन्हों ने मुझे तमाम आरोपियों के नाम बताये गए और कहा गया के इन में से तूम किस किस को जानते हो ..मैं ने कहा के मैं डाक्टर तनवीर और साजिद अंसारी को जानता हूँ और बाक्य आरोपियों से कोई जान पहचान नहीं है ..... फिरभी मुझसे के पी रघुवंसी ने कहा के अगर मैं बम धमाकों की जिम्मेदारी कबूल नहीं करूँगा तो मैं तुम्हे encounter में मार दूंगा  , फिर उन्हों ने पी आई खांडेकर और पी आई ताजने को अन्दर केबिन में बुलाया और कहा के रस्सी लेकर आओ उसके हाथ पाऊँ बांधकर इसे बोरीओवेली के नेशनल पार्क में छोड़ दो और जब ये चलने लगे तो इसे पीछे से गोलियों से भून डालो .उसके बाद मुझे काला चौकी में ले जाकर कमरे में छोड़ दिया गया जिसके चारों कोनो में जंजीरे लगी हुई थीं .उसी रात क् additional  ए सी पी जय जीत सिंह . ए पी आई खानोलकर ,पी एस आई सचिन कदम ,कांस्टेबल सालुई ,और दसरे सहायक पुलिस दस्ता के लोग ने  और रस्सी लेकर आये और मेरे हाँथ पाँव बाँध दिए और फिर मुझे जमीन पर बैठने कहा और फिर मेरे दोनों पैरों को दो विपरित दिशाओं में खिंचा गया जिससे मुझे शदीद तकलीफ होने लगी ..इसी दौरान पुलिसे अफसरान मुझसे सिर्फ और सिर्फ एक ही सवाल कर रहे थे के किसने ये बम ब्लास्ट किये हैं और जब मैं ये कहता के मुझे पता नहीं तब वह मेरे दोनों पैरों को और जोर से फैलाते , जिसकी वजह से बहुत जेयादा तकलीफ होने लगी ... इसके बाद उन्होंने मुझे उसी कमरे में बंद कर दिया गया जहां मेरे पास सर्दी से बचने के लिए कम्बल वगैरह कुछ भी नहीं था ...दुसरे रोज जब मैं पेशाब करने बैठा तो पेशाब के साथ खून भी आया मैं ने उनसे कहा के अस्पताल लेक चलो लेकिन पुलिस अफसर ताजने ने कहा के सब खुद ब खुद ठीक हो जायेगा अस्पताल  जाने की जरुरत नहीं है ....लेकिन मेरे कहने के बावजूद कोई भी चिकित्सकिये सहयेता नहीं पहुंचाई , और कहा के इसकी कोई जरुरत नहीं है ,खुद ब खुद ठीक हो जायेगा ......अधिवक्ता शरीफ शैख़ के सवाल पर मुलजिम एहतेशाम ने मजीद ये कहा के इस वाकेया के दुसरे दिन मुझे पी आई ताजने  नागपाड़ा  ए टी एस ऑफिस ले गये जहां पहले से ही के पी रघुवंशी , जय जीत सिंह ,जैसवाल , पी आई  खानोलकर और ए पी आई सचिन कदम मौजूद थे .....ए  पी आई सचिन कदम उन में मिठाई तकसीम कर रहा था ....इसी दरमयान के पी रघुवंशी ने कुछ कागजात मेरे सामने करते हुए कहा के मैं उन कागजात पर दस्तखत करूँ मगर मैं ने दस्तखत करने से इनकार कर दिया .मेरे इनकार करने पर दुबारा मुझे रस्सी से बांध बांधकर कर जद व कोब करना शुरू कर दिया गया ......इसी दौरान मेरे सर पर शदीद जर्ब पहुंचाई गई ,जिसके बेना पर मुझे सांस लेने में दिक्कत पेश आने लगी ,लिहाजा इन लोगों ने मेरा ब्लड प्रेसर खुद ही चेक किया और मुझ से की जाने वाली मार पीट बंद कर दी गई .....उसके दुसरे रोज मेरे कमरे में जहाँ में जेरे तफ्तीश था , पुलिस अफसरान  ताजने , खानोलकर ,सचिन कदम और कुछ कोंस्टेबल आये और नंगा करके मेरे हाँथ पाँव बाँध जंजीर से  बाँध दिए और मेरे जिस्म के ख़ास हिस्से पर पंद्रह मिनटों तक इलेक्ट्रिक शॉक लगाया गया ,जिसकी वजह से मैं कुछ देर तक बेहोशी की हालत में पड़ा रहा , दिन गुजर ने के बाद इसी रोज रात में फिर उपरोक्त अफसरों ने दोबारा मेरे कमरे में आये और मुझे यातनाएं पहुंचाए .......   www.biharbroadcasting.com


Monday, April 29, 2013
वर्चस्व की लड़ाई में स्कूल की मान्यता खतरे में
पटना के बी एम् दास रोड स्थित पटना मुस्लिम हाई स्कूल +2 (सी बी एस इ बोर्ड ) इन दिनों अपने शिक्षण कार्य के लिए चर्चा में कम , आपसी रस्सा कसी के लिए चर्चा में जेयदा है , सूत्रों के अनुसार ये रस्सा कसी नए प्रिंसिपल के चार्ज संभालते ही शुरू हो चुका था , मगर दिनांक 27/04/2013 अपने सतह पर पहुँच कर रोड पे आते आते बच गई , सूत्रों के अनुसार नए प्रिंसिपल स्थितियों को स्कूल के नियमों के अनुसार नहीं अपने अनुसार चलाना चाहते हैं , जिसे स्कूल के बहुत सारे स्टाफ विरोध कर रहे , जिससे स्कूल दो खेमों में बट गया है . एक पक्ष प्रिंसिपल के पक्ष में तो दूसरा विरोध में .....


दिनांक 27/04/2012 की सुबह,नए प्रिंसिपल एक पुराने टीचर से सिर्फ इस लिए भीर गए के वह टीचर स्कूल के कैंपस में अपनी अल्टो कार को पार्क ज़माने से करते आ रहा और ये चीजें प्रिंसिपल को नागवार लग रहा , प्रिंसिपल साहेब का कहना है के गारी कैंपस में नहीं लगेगी , जबके उस पुराने कंप्यूटर शिक्षक का कहना है के हमारे गारी लगाने और न लगाने से बच्चों के पढाई पे कौन सा बुरा प्रभाव पर रहा ? शिक्षक का तर्क है के ,एक तो हमारे कार पार्किंग करने से बच्चों के पढ़ाई पे किसी प्रकार का बुरा असर नहीं पड़ता , और मैं स्कूल नहीं बल्के , मगध विश्विद्यालय से मान्यता प्राप्त कॉलेज का टीचर हूँ , ऐसे में स्कूल के प्रिंसिपल का आदेश मानने के लिए मैं बाध्य कहाँ हूँ ? यहाँ ये बात काबिले जिक्र है के सी बी एस ई बोर्ड की मिली भगत से और बिहार के शिक्षा विभाग के घुसखोर अफसरों की ख़ास मेहरबानी के कारण यह स्कूल 1/04/1999 से चल रहा है ....
सी बी एस ई बोर्ड ने एक पत्रकार के सूचना अधिकार के जरिये मांगे गए जवाब में दिनांक 29/1/2011 को पत्र भेज कर ये स्पष्ट किया था के उक्त स्कूल के कैंपस में दुसरे किसी बोर्ड और यूनिवर्सिटी से मान्यताप्राप्त कॉलेज नहीं चलेगा , मगर चल कैसे रहा ? ये अलग जाच का विषय है , क्या बोर्ड को नजर नहीं आ रही, या जान कर भी अनजान क्यों बनी हुई ? अपने ही आदेशों की धज्जियां किस लालच में उड़ा रही ? यहाँ ये भी उल्लेख करना जरुरी है के, मगध यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त स्कूल से पहले से 1935 से बी एस ई बी से मान्यता प्राप्त स्कूल चल रहा था , मगर जैसे ही c.b.s.e. board का फरमान जारी हुआ ,उसका कैंपस अवैध ढंग से बदल कर अशोक राज पथ के पास शिफ्ट कर दिया गया .....जानकारों का कहना है के ये नियम के विरुद्ध है .....मगर कार्रवाई कौन करे , इसके लिए अधिकृत कौन है , और वह कार्राई क्यों नहीं का रहा ? इस पर एक बार फिर सवाल उठने लगा है . जानकारों की माने तो इस वर्चस्व की लड़ाई में सी बी एस ई से 10वीं क्लास की मान्यता पर भी गाज गिरना तय है .
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वर्चस्व की लड़ाई में स्कूल की मान्यता खतरे में

 पटना के बी एम् दास रोड स्थित पटना मुस्लिम हाई स्कूल +2 (सी बी एस इ बोर्ड ) इन दिनों अपने शिक्षण कार्य के लिए चर्चा में कम , आपसी रस्सा कसी  के लिए चर्चा में जेयदा है , सूत्रों के अनुसार ये रस्सा कसी नए प्रिंसिपल के चार्ज संभालते ही शुरू हो चुका था , मगर दिनांक 27/04/2013 अपने सतह पर पहुँच कर रोड पे आते आते बच गई , सूत्रों के अनुसार नए प्रिंसिपल स्थितियों को स्कूल के नियमों के अनुसार नहीं अपने अनुसार चलाना चाहते हैं , जिसे स्कूल के बहुत सारे स्टाफ विरोध कर रहे , जिससे स्कूल दो खेमों में बट गया है . एक पक्ष प्रिंसिपल के पक्ष में तो दूसरा विरोध में .....

 

       

दिनांक 27/04/2012 की सुबह,नए प्रिंसिपल एक पुराने टीचर  से सिर्फ इस लिए भीर गए के वह टीचर स्कूल के कैंपस में अपनी अल्टो कार को पार्क ज़माने से करते आ रहा और ये चीजें प्रिंसिपल को नागवार लग रहा , प्रिंसिपल साहेब का कहना है के गारी कैंपस में नहीं लगेगी , जबके उस पुराने कंप्यूटर शिक्षक का कहना है के हमारे गारी लगाने और न लगाने से बच्चों के पढाई पे कौन सा बुरा प्रभाव पर रहा ? शिक्षक का  तर्क है के ,एक तो हमारे कार पार्किंग करने  से बच्चों के पढ़ाई पे किसी प्रकार का बुरा असर नहीं पड़ता , और मैं स्कूल नहीं बल्के , मगध विश्विद्यालय से मान्यता प्राप्त कॉलेज का टीचर हूँ , ऐसे में स्कूल के प्रिंसिपल का आदेश मानने के लिए मैं बाध्य कहाँ हूँ ? यहाँ ये बात काबिले जिक्र है के सी बी एस ई  बोर्ड की मिली भगत से और बिहार के शिक्षा विभाग के घुसखोर अफसरों की ख़ास मेहरबानी के कारण यह स्कूल 1/04/1999 से चल रहा है ....

सी बी एस ई  बोर्ड ने एक पत्रकार के सूचना अधिकार के जरिये मांगे गए जवाब में दिनांक 29/1/2011 को पत्र भेज कर ये स्पष्ट किया था के उक्त स्कूल के कैंपस में दुसरे किसी बोर्ड और यूनिवर्सिटी से मान्यताप्राप्त कॉलेज नहीं चलेगा , मगर चल कैसे रहा ? ये अलग जाच का विषय है , क्या बोर्ड को नजर नहीं आ रही, या जान कर भी अनजान क्यों बनी हुई ? अपने ही आदेशों की धज्जियां किस लालच में उड़ा रही ? यहाँ ये भी उल्लेख करना जरुरी है के, मगध यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त स्कूल से पहले से 1935 से बी एस ई बी से मान्यता प्राप्त स्कूल चल रहा था , मगर जैसे ही c.b.s.e. board का फरमान जारी हुआ ,उसका कैंपस अवैध ढंग से बदल कर अशोक  राज पथ  के पास शिफ्ट कर दिया गया .....जानकारों  का कहना है के ये नियम के विरुद्ध है .....मगर कार्रवाई कौन करे , इसके लिए अधिकृत कौन है , और वह कार्राई क्यों  नहीं का रहा ? इस पर एक बार फिर सवाल उठने लगा है . जानकारों की माने तो इस वर्चस्व की लड़ाई में सी बी एस ई से 10वीं क्लास की मान्यता पर भी गाज गिरना तय  है . 


 

मगर ऊँची पहुँच रखने वाले घोटाले बाजों के कारण क्या वाकई पुलिस ऐसा कर पायेगी ?

सोलर लाइट के घोटाले बाजों के विरद्ध सिकंजा कसने वाला है .बिहार के पुरबी चंपारण के manichapra  पंचायत जो जिला के कल्यानपुर ब्लाक के तेहत आता है ,सूत्रों के अनुसार वहां सोलर लाइट लगान में बड़े पैमाने पर  घोटाले किये गए थे ,गाँव के रामजी भगत ने मोतिहारी आरक्षी अधीक्षक के पास लिखित शिकायत ३ जनुअरी २ ० १ ३  को की थी ,मगर ऊँची पकड़ रखने वाले घोटाले बाज मामले को दबाये हुए थे, जब इस सम्बन्ध में थाना प्रभारी और डी एस पी  से बात की गई तो कहा के मामले की जांच निष्पक्षता पूर्वक कराइ जाएगी और दोषियों पे कार्रवाई जरुर की जाएगी , मगर ऊँची पहुँच रखने वाले घोटाले बाजों के कारण क्या वाकई  पुलिस ऐसा कर पायेगी ?

ऐसे में समाज के लोग पुलिस पर कैसे करेंगे विश्वाश , बिहार पुलिसे के मुखिया ही बताएं ?

घटना घटे एक माह और सात दिन गुजर चुके हैं पर अब तक आरोपियों के खेलाफ कार्रवाई न होने से आरोपियों और पुलिस मिलीभगत के आशंकाएं अब यकीन में बदने लगीं हैं, मामला समस्तीपुर जिला के रतवारा गाँव से जुड़ा हुआ है , जो के जिला के कल्यानपुर थाना के तेहत आता है,


       उपरोक्त गाँव के मोहम्मद इरशाद और बाकी 5 दुसरे लोगों  को गाँव के ही दबंगों ने बीते १ ७  मार्च को इतनी पिटाई की के उन लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ा था , घर  के लोगों ने पुलिस के पास फर्द बयान भी दर्ज कराये  पर कोई फायेदा न हुआ , आज गह्तना के घटे एक माह सात दिन होगये लेकिन दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू तक न हुई ,ऐसे में समाज के लोग पुलिस पर कैसे करेंगे विश्वाश , बिहार पुलिसे के मुखिया ही  बताएं ?

इंडियन यूनियन मुस्लिम (बिहार ) के नए प्रदेश अध्यक्ष ने पुरानी टीम को भंग कर गठित की प्रदेश स्तर की नई टीम लीग . कई नए चेहरे को दी नई जिम्मेदारी .

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (बिहार ) के नए  प्रदेश अध्यक्ष जनाब तारिक मतीन ने बिहार का कामन संभालते ही पूर्व कमिटी को को भंग कर क्रियाशील लोगों को बहाल करने शुरू कर दिए , उनके द्वारा प्रदेश स्तर की जो टीम गठित की गई है कुछ इस प्रकार है .....

      जेनेरल सेक्रेटरी  सैयद अख्तर हुसैन बेगुसराए ,खजांची एस एम सैफुल्लाह ,उपाध्यक्ष की कमान की कमान फिलहाल चार लोगों के हाथों में सोंपी गई है 1. सफ़दर इमाम कादरी (पटना ) 2 .हाजी मोहम्मद असगर  (सिवान ) भगवान् दास (बांका ) हाजी हसिबुर्रहमान ( मुंगेर ) शामिल हैं
 सचिव की कमान जिन लोंगों को सोंपा गया है उनके नाम कुछ इस प्रकार हैं .मोहम्मद मुस्ताक अंसारी (समस्तीपुर ) सुरेन्दर यादव  (औरंगाबाद ) आले खान ( वैसाली)वासिकुर्रहमान (किसनगंज) सरुर आलम दानिश (मधुबनी ) का नाम भी शामिल है .
     
प्रदेश अध्यक्ष का संपर्क  नंबर .07549807809

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पुलिस के पीपुल फ्रेंडली होने पे उठा सवाल , घटना के 2 4 दिन बाद भी नहीं पहुंची पीड़ितों का हाल चाल और अनुसंधान करने, समस्तीपुर के कल्यानपुर थाना के रतवारा की घटना , सूत्रों के अनुसार पुलिस आरोपियों से मिली हुई

अगर आप ये सोंच रहे  कि  आप के साथ किसी भी प्रकार के वारदात होने और  सताए जाने की स्थितिमें पुलिस के  पास इन्साफ पाने और दोषियों को सजा दिलाने के गर्ज से जायेंगे तो  पुलिस अपना फर्ज निभाते हुए आपका साथ देगी और दोषियों को सजा दिलाने में अहम् भूमिका निभाएगी  तो समझ लीजिये आप ग़लतफ़हमी के शिकार हैं , ये हम नहीं बल्कि एक मामले में पुलिस का रवैया शायद  कुछ इसी बात को कह रहा  ....

  दिनांक 17/03/2013  समस्तीपुर जिला के कल्यानपुर थाना के तेहत आने वाले  गाँव रतवारा  के कुछ दबंगों ने मोहम्मद इरशाद 20 वर्ष ,माँ अफसाना खातून,बहन
नाहिद परवीन और भाई आले को इतनी बेरहमी से पिटाई कि के इन सभी को गंभीर अवस्था में हॉस्पिटल में भर्ती होना  पड़ा ,जिसमें मोहम्मद इरशाद को इस कद्र चोट लगी थी के दरभंगा मेडिकल कॉलेज के इलाज कर रहे डॉक्टरों ने   बेहतर इलाज के लिए पी एम् सी एच के लिए रेफर कर दिया ,  जहां गंभीर रूप से जख्मी  इरशाद ने पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के इमरजेंसी वार्ड नंबर 206 और बेड नंबर 15 पर दिनांक 21/03/2013 को  पीरबहोर थाना (पटना ) के  सहायक पुलिस इंस्पेक्टर जनाब आर के चौहान को अपना फर्द बयान दर्ज कराई , जिसे पीरबहोर थाना ने लेटर नंबर DR .254/2013 दिनांक 22/03/2013 के माध्यम से समस्तीपुर जिला के  कल्यानपुर थाना के थाना प्रभारी को केस ट्रांसफर कर दिया , अब घटना के एक माह होने जा रहे , मगर सम्बंधित थाना के अधिकारियों ने आज तक झांकने नहीं आये हैं ... पीड़ितों को  अब पुलिस  के ऊपर से यकीन भी उठता जा रहा और समाज के सामने ये सवाल उठता जा रहा के क्या यही पुलिस के पीपुल फ्रेंडली होने की निशानी है ?
  

      



बिहार में भरष्टाचार के विरुद्ध मुंह देखी कार्रवाई हो रही ?

                                बिहार में भरष्टाचार के विरुद्ध मुंह देखी कार्रवाई हो रही ?
श्री राम असरे  राय,ग्राम माधोपुर दोविन्द ,प्रखंड कल्यानपुर ,जिला पूर्बी चंपारण  ने दिनांक 27/11/2012 को स्पीड पोस्ट से बिहार के मुखमंत्री जनाब नीतीश कुमार के पास विभिन योजनाओं में लाभ के बदले घुस मांगे जाने की शिकायत भेजी थी ,जिसपर आज तक कार्रवाई न हो सकी , अब सवाल उठाना लाजमी है के आखिर सरकार किसी के शिकायत पत्र पर आखिर कितने दिनों में कार्रवाई करती है ? जनता में इस बात की चर्चा जोर शोर से हो रही के घोटाले बाजों के सुसाशन में गहरी पैंठ कारण ही शायद कार्रवाई न हो रही,अब तो बिहार के मुख्यमंत्री जनाब नीतीश कुमार हे बताएँगे के आखिर मामला क्या है ?
          इसी प्रकार का एक और मामला है मुस्मात दुखनी कुंवर,जो उपरोक्त जिला के फेन्हारा प्रखंड गैबन्धी गाँव से जुडा हुआ है,दुखनी कुंवर ने उनके नाम का इंद्रा आवास फर्जी ढंग से निकाल लिए जाने की शिकायत आरक्षी अधीक्षक पुरबी चंपारण के पास दिनांक 29/12/2012 को की जिस पर आज तक कोई कार्रवाई न हुई जिससे ये सवाल उठने लगा है के कहीं सरकार भरष्टाचार के मामले में मुंह देखी कार्रवाई तो नहीं कर रही ?

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (बिहार) का कमान अब मजबूत हाँथों में,पूर्व लोजपा नेता तारिक मतीन बने बिहार के नए प्रदेश अध्यक्ष , जिम्मेदारी मिलते ही कहा आने वाले संसदिये चुनाव में पार्टी बिहार के सभी सीटों पर उतारेगी अपने उमीदवार,दलितों को भी मौका , सभी सूरक्षित सीटों पर दलित ही होंगे उमीदवार

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने 2014 के पार्लियामेंट्री चुनाव के मद्दे नजर रखते हुए अपने संगठन को बिहार में क्रियाशील एवं मजबूत बनाने की गर्ज से एक बहुत बड़ा उलट फेर करते हुए पार्टी का कमान लोजपा के एक पूर्व कद्दावर नेता और बेगुसराए के बलिया विधान (अब साहेबपुर कमाल)विधान सभा क्षेत्र से 2005 में अपनी किश्मत आजमा चुके तारिक मतीन के हाथों में सोंपी है,पार्टी  ने इन्हें बिहार का नया प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी कई  उम्मीदों के साथ सोंपी है , पार्टी आला कमान ने जनाब मतीन को बिहार प्रदेश अध्यक्ष की कमान इस उमीद के साथ दी है के पार्टी को बिहार की सरजमीन पर नए सियासी समीकरण गढ़ने में कामयाब होगी , जनाब मतीन ने प्रदेश की कमान मिलते ही घोसना की है के , आने वाले संसदिये चुनाव में काग्रेस के जीते हुए सीटों को छोड़ कर बाकी सभी सीटों पर जितने की गर्ज से मजबूत उमीदवारों को मैदान में उतारेगी .
       जनाब मतीन  ने आज एक मुलाक़ात के दौरान बिहार में पार्टी के अजेंडे पर चर्चा करते हुए इस बात का खुलासा किया है  के बिहार के सभी सूरक्षित सीटों पर दलित उमीदवारों को भी मैदान में किस्मत उतारने का भरपूर मौका देगी,जनाब मतीन इसके खातिर अभी से ही सभी संसदिये क्षेत्रों से अच्छे और मजबूत उमीदवारों
की तलाश अभी से ही शुरू कर दी है , इसके लिए प्रदेश अध्यक्ष ने अपना मोबाइल नमबर 07549807809 भी जारी किया है ताके संबधित क्षेत्रों के उमीदवार अभी से ही चुनाव लड़ने की गर्ज से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष से सीधे सम्पर्क बना सकें। प्रदेश अध्यक्ष का सम्पर्क नंबर :-07549807809

जनाब ! कथित इंडियन मुजाहेदीन को इस तरह से समझें

                                     

                       मुदाखेलत (हस्तकक्षेप) सेराज अनवर 

                       उर्दू दैनिक पटना दिनांक 27/0 2 /2013

                      जनाब ! कथित इंडियन मुजाहेदीन को इस तरह से समझें

पटना : "अंजुमन फर्जन्दाने हिन्द" इस नाम से आप किस तरह के संगठन की कल्पना करेंगे ? यही न के ये शुद्ध मुसलमानों पे आधारित संगठन होगी ,अगर आप ऐसा सोंच रहे तो बिलकुल गलत हैं .........इस संगठन के चीफ का नाम है गिरीश जोयाल .......गिरीश जोयाल मुसलमान तो हैं नहीं , लेकिन अंजुमन फर्जन्दाने हिन्द के नाम से संगठन चलाकर देश के लोगों में ग़लतफ़हमी पैदा करते हैं ......गिरीश जोयाल चाहते तो अंजुमन (संगठन का नाम किसी हिन्दू तंजीम पर रख सकते थे ....दिल्चश्प  बात ये  है के अंजुमन फर्जन्दाने हिन्द के बैनर तले "भारत माँ के बेटों का संगठन "  तहरीर है .....इसी तरह की एक संगठन है राष्ट्रीय ओलेमा  कौंसिल ....ओलेमा के नाम से मजहबी पेशवाओं (धार्मिक गुरुओं ) का गुमान होता है ....मजहबी मिल्ली तंजीमों के रहबरों का नाम जब लिया जाता है तो ओलेमा  विशेष रूप से इस्तेमाल किया जाता है .....इस संगठन में आला पदों पर हिन्दू बेरादर बरी तादाद  में विराजमान हैं  तो कथित इंडियन मुजाहेदीन की कमान हिन्दू भाइयों के हाथ में क्यों नहीं हो सकती ? इस मामले में संघ परिवार और आर एस एस काफी शातिर है .....वह खुद तो अपनी संगठन फ्रंट पर चलाते हैं और कई फर्जी संगठनों का बैनर बखूबी इस्तेमाल करते हैं .....जहाँ जिस बैनर की जरुरत हुई उसके नाम से मीडिया को बयान जारी कर दिए .......इंडियन मुजाहेदीन के बैनर से किसी फर्जी मुस्लिम नौजवानों का नाम इस्तेमाल कर बयान जारी कर दी जाये तो क्या ताज्जुब की बात है  ?   यहाँ की ख़ुफ़िया एजेंसी तो गैर जानिबदार और इमानदार तो है नहीं ?  इसकी मोकम्मल तहकीकात कीजाये के इंडियन मुजाहेदीन के नाम से जारी  बयान कहाँ से और किसने भेजे ? अब तो मुस्लिम रहनुमाओं के मूह में भी जुबान आ गई है और वह दिलेरी से पुछ रहे हैं के बताएं के इंडियन मुजाहेदीन का भारत में दफ्तर कहाँ है ?  हैरत वाली बात है के मिनटों बम धमाकों में फलां फलां नाम लेने वाली  एन  आई  ए   की टीम इस चैलेंज से को कबूल करने से कतरा क्यों रही है ?क्यों नहीं बताती के हाँ जनाब इंडियन मुजाहेदीन का दफ्तर भारत के फलाँ शहर में है और उसके रहबर यानी कर्ताधर्ता फलां हैं .....दर असल ,बम धमाकों में मीडिया ,ख़ुफ़िया एजेंसियां और सरकार इतनी जल्दीबाजी में है के वह 2२ कड़ोड़ मुसलामानों को कटहरे में खड़ा करना चाहते हैं ........ एक वाकया देखिये ! इंडिया टी वी  ने हैदराबाद धमाकों से  जुड़े   अपनीक प्रोग्राम में पकिस्तान मुत्तहिदा कौमी मोमेंट के रहनुमा मंजर इमाम की तशवीर दिखाते हुए उन्हें संदेहास्पद दहशतगर्द के तौर पर पेश किया ...... दिल्चश्प बात ये है के इमाम का १ ७  जनवरी को तालेबान हमलावरों ने करांची में गोली मार कर क़त्ल कर दिया था ......पकिस्तान में इस खबर की काफी थू  थू  हप रही है ......पकिस्तान के वजीर ए  दाखेला  के . रहमान मल्लिक ने भारत से इस मुद्दे पर माफ़ी मांगने को कहा है ....इसी तरह से मुस्लिम नौजवानों के नाम गिनाये जा रहे हैं ,हिन्दुस्तानी चैनलों के पास दहशतगर्दी पर कोई ठोस वर्क नहीं है , जो मुह में आया उगलते चले गए , लेकिन इससे हिन्दुस्तान के 2 २  कड़ोड़ मुसलमानों के माथे पर दहशतगर्दी का जो कलंक चश्पा होता है ,जिंदगी भर वह धुलता नहीं .....मगर मुल्क के अन्दर आज कई ऐसे घराने हैं जो इस टीस से रु ब रु हैं .....इसी तरह का एक वाकेया हैदराबाद का भी है ,दिलसुखनगर बम धमाका में पुछ -ताछ के लिए रईसुद्दीन को पुलिस ने हिरासत में लिया ......पुलिस ने कुछ नहीं कहा लेकिन स्थानिये चैनलों पर दिन भर यही खबर चलती रही के बम धमाकों का जिम्मेदार एक सख्श पकरा गया है .....रईसुद्दीन उन २ ६  अफराद में से एक थे जिन्हें

२ ० ० ७ के मक्का मस्जिद बलास्ट में पकरा गया था और उनपर दहशतगर्दी से जुड़े मामले दर्ज किये गए थे ,लेकिन बाद में अदालत नें उन्हें बेकसूर बाइज्ज़त बड़ी कर दिया था  अब धर पकर करने के दौरान पुलिस ने मका मस्जिद में बेकसूर पाए गए ७ नौजवानों समेत कोई ५०  लोगों को हिरासत में लिया .....हलाके उनमें से जेयादातर को छोड दिया लेकिन उन नौजवानों के घरवाले और नगर के मुस्लिम समाज में खौफ की लहर दौर गई है ,रईश ने बताया के मेरी माँ जाहेदा बेगम की तबियत बिगर गई है ....वह डर रहीं हैं जिस तरह पहले मुझे मुझे पुलिस ने जिस्मानी यातनाएं दी थीं और डेढ़ साल तक जेल में मेरा लड़का  था अब फिर वही कुछ होने वाला है .....जब मैंने पुलिस कहा है  के मक्का मस्जिद मामले में हिन्दू दहशतगर्द पकडे गए थे और वह उनकी कार्रवाई थी तो उनहोंने  ने मुझसे कहा के वह जानते हैं किससे क्या पूछना है? मैंने पुलिस वालों से यही पूछा के मुझे यहाँ क्यों लाया गया? जबके मैं मक्का मस्जिद मुकदमा में बकासुर शाबित हो चुका  हूँ ,और सरकार ने मुझसे माफ़ी मांगी है और एक सर्टिफिकेट दी है .......पुलिस वालों का जवाब था के मक्का मस्जिद मामले में जितने लोगों का नाम आय था उन सभी लोगों से पूछ ताछ होगी ,कयोंके पुलिस के काम करने का तरीका यही है , रईश कहते हैं के आप भले ही बेकसूर हैं ,एक बार आप पर दहशतगर्दी का कलंक लग गया तो जिंदगी भर नहीं धुलेगा .रईश की तरह ही सैयद मकबूल ,डॉक्टर इब्राहीम जुनैद भी खुद को खतरे में पा रहे हैं

काबिले गौर बात ये है के तेहाड़ जेल में बंद मकबूल हैदराबाद से नांदेड चला गया और इस वक़्त वह डेल्ही की जेल में बंद है .....डेल्ही पुलिस का कहना है के वह इंडियन मुजाहेदीन का आदमी है और उसने दिलसुखनगर  इलाके का मुआयेना करने की बात कबूल  की है    ......काबुल किया है या नहीं ये पुलिस कह रही है .....इसी तरह पुलिस कितने कबूलनामें पुलिस सामने लाती है और मुसलमानों को जलील करती है ....इंडियन मुजाहेदीन भी मुसलामानों को जलील कराने का हथियार है ......जिस तरह से दुनिया के मुसलामानों पर सिकंजा कसने के लिए अमेरिका अल्कयेदा का गाहे बगाहे इस्तेमाल करता रहता है इसी तरह हिन्दुस्तानी मुसलामानों को नफ्सेयाती दबाव बनाये रखने के लिए इंडियन मुजाहेदीन के नाम से संगठन कोई न  कोई चला रहा है ,जिससे यक़ीनन मुसलामानों का कोई संबंध नहीं है ......मुसलमान अपनी रजिस्टर्ड संगठन नहीं चला रहे हैं तो भला फर्जी तंजीमों में वह इतना    मुशक्कत  और माथा पेची क्यों करें?

           

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जब आतंकवादियों का कोई जात -पात और धर्म नहीं,तो शक के बुनियाद पर भगवा दहशतगर्दों से पूछ ताछ क्यों नहीं?

इस देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है के इस देश का होम मिनिस्टर दहशतगर्दी जैसे मामले पर पहले पक्के सबूत के बुनियाद पर देश की जनता के सामने सच्चाई रखते हुए बयान देता है ,फिर उस बयान के लिए माफ़ी भी उसी संगठन से मांगता है जिसके बारे में मुल्क में दहशतगर्दी के कैंप चलाने ,और आतंकी वारदातों में शामील होने के पुख्ता सबूत पास में होते हैं ,उनके माफ़ी मांगने के अंदाज ने दुनिया के सामने कई गलत पैगाम दिए,पहला ये के हिन्दुस्तान सिर्फ मुस्लिम आतंक के मामले में ही शख्त रवैया रखती है ,हिदुत्व और भगवा आतंकवाद के मामले में रवैया ढुलमुल और बराए नाम है .......क्या मुसलमानों के जरिय इस तरह की मोखालेफत दहशतगर्दी के मामले में की जाती तो हिन्दुस्तान का कोई भी होम मिनिस्टर इतने पुख्ता सबूत रखने बाद अपने बयान को वापस लेते हुए मुसलमानों से माफ़ी मांग लेती?आज मीडिया हैदराबाद ब्लास्ट को अफजल गुरु की फांसी से जोर कर देख  रही ,बलास्ट को बी जे पी और आर एस एस दबाव और होम मिनिस्टर  के जरिये माफ़ी मांगने के बाद हिंदुत्व दहशतगर्द अपनी छवि सुधारने और अल्पसंख्यकों को बदनाम करने के खेयाल क्या नहीं कर सकती ?क्या ये महज इत्तेफाक थी के होम मिनिस्टर शिंदे के जरिये माफ़ी मांगने के दुसरे दिन ही बलास्ट होना ?क्या ये हिन्दुत्त्व और भगवा दहशतगर्दों के जरिये तैयार किसी बड़ी साजिश का हिस्सा नहीं हो सकती ?क्या अब हिंदुत्व दहशतगर्दों के नाम हैदराबाद के दोहरे बलास्ट में आने के बाद क्या शिंदे कारवाई करने की हिम्मत जुटा पाएंगे ?देश के अक्सर लोगों का खेयाल है के भगवा दहशतगर्दी का  नए मामले में आने के बाद शिंदे के रहते किसी कीमत में संभव नहीं ,शायद इसी कमजोरी का फायेदा कुछ हिन्दुत्ववादी ताकतें उठा सकतीं हैं .....जिस प्रकार से शिंदे ने हिन्दुत्ववादी कुवतों के सामने घुटने टेक दिए,मेरे खेयाल से शिंदे साहेब को अपने ओहदे पर बने रहने का कोई हक़ नहीं .....अभी इस देश को मजबूत वजीरे आजम के साथ साथ एक मजबूत होम मिनिस्टर की शख्त जरुरत है ......मगर ये तब तक मुमकिन नहीं जब तक इस देश की जनता जात पात और मजहब के दाएरे से देश के हालात को देखना नहीं छोड़ेगी ओवैसी का नाम जिस तरह सुषमा सौराज ने महज कयास आराई की बुनियाद पर हैदराबाद के दोहरे बम धमाके में घसीटने की कोशिश की वह दुर्भाग्पूर्ण मालूम परता है,कयोंके कयासआराई ही किसी वारदात में ओवैसी  के संलिप्तता का आधार हो सकता है तो ओवैसी से पहले तोगड़िया के खेलाफ कारवाई और जांच के आधार बनते है कयोंके हैदराबाद के सम्बन्ध में तोगड़िया के कई खतरनाक बयान दुनिया ने सुना है ......साइकल और टिफिन को बुनियाद बनाकर जिस तरह इंडियन मुजाहेदीन का नाम घसीटा जा रहा शायद वह लोग असल मुजरिम को पहले की तरह जांच के दाएरे से बचाने की कोशिश कर रहे या सच्चाई से मुह मोरने की कोशिश में लगे हैं ताके जांच एजेंसियों का धेयान भगवा दहशतगर्दी की तरफ जाने से रोका जा सके ......अगर ऐसा नहीं तो फिर मालेगांव ,अजमेर दरगाह और अन्य धमाकों में भगवा दहशतगर्दों के जरिये साइकल और टिफिन बम इस्तेमाल किये जाने के पुख्ता सबूत होने के बावजूद भगवा आतंवाद के रट्टे क्यों नहीं लगाये जा रहे ?जब आतंकवादियों का कोई जात -पात और धर्म नहीं,तो शक के बुनियाद पर भगवा दहशतगर्दों से पूछ ताछ क्यों नहीं?

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