Bihar AG Office का करामात देखिये ,जानकार शर्माजायेंगे आप ।

kaushar2007 Admin • a month ago −
घुस न देने के कारण बुढ़े पेंशन धारी परीशान ? bihar के AG office और arth एवं sankhiki nideshalay vibhaag से जुड़ा हुआ है मामला ....मोहम्मद हसीन अख्तर जो के रिटायर्ड हाई school टीचर हैं , A G office bihar की कार गुजारीयों से परीशान हैं ।
उनका पेंशन के मामले से sambandhit मामले जीसका PPO number 396047 है ,DEO office seohar ने अपने patrank - 940 , दीनांक 30/7/13 को मामले से sambandhit patr भेज दीया मगर लगता है dakshina के िइंतेजा में बैठे हुए AG office bihar के sambandhit adhikariyon और padadhikariyon ने जान बुझ कर मामले को फंसा कर रखे हुए है ,अगर बात dakshina से नहीं जूरी हुई तो सवाल पैदा होता है के लेटर भेजने के चार महीने बाद भी उस sewaniwirt बुढ़े पेंशन धारी का काम अबतक क्यों नहीं हुआ? सवाल sirif मोहम्मद हसीन अख्तर का नहीं है ,बलके ऐसे हजारों पेंशन धारी बूढ़ों की अनावश्यक परीशानी से जुड़ा हुआ है। ...........................केस नंबर 2 भी देखते जायेँ । मामला एक हे तरह का है wibhaag अलग ' लेकीन आज़ाद भारत की ghatiya mentility रखने वाले अफसरों की एक तरह की झलक बयान कर रही है Md.masudur rahmaan , sewaniwirt सहायक sankhyiki padadhikaari के पद से मधुबनी से 31/1/2009 को retired हुए , उनकी शीकायत है के ACP का लाभ साल 2009 से ही नहीं मील रहा , जबके इस संबंध में jila sankhiki padadhikari मधुबनी ने संयुक्त nidehak सह संयुक sacheev को patrank 620,dt.7/8/12 को तथा खुद Md masudur Rahman ने 23/8/12 को letter भेज मामले में कर्रवाई करते हुए ACP के बकाया लाभ देने की गुजारीश की मगर आज तक काम का न होना ये साबीत करता है के dakshina की आस में मामले को जान बुझ कर लटका कर रखा गया है । www.biharbroadcasting.com
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kkaushar2007 Admin kkaushar2007 • a month ago −
कहानी AG office bihar की , जब PPO नंबर 396047 के बाबत पूछी गई औ कहा गया के आवेदक का कहना है के मेरा काम niyam कइ अनुसार 60 दिनों में हो जानी चाहिए थी ,पर नहीं हुआ ?तब AG office के नंबर.-06122225634 पर बात कर रहे adhikaari ने कहा के सभी vibhaago कइ लगभग 10 लाख retired लोगों का मामला देखना पड़ता है ऐसे में 60 दिनों में कैसे sambho है ,जब कहा ग गया के DEO office seohar ने अपने patrank 940 और dinank 30//7/13 को ही भेज दीया इस हीसाब से चार महीने होने जा रहे ऐसे में आप का क्याखेयाल है ? तब जनाब कहने लगे पता है न ये Ag ऑफिस है। ? तो क्या AG ओ office को मनमानी करने की छुट है? नोट . AG office के उपरोक्त नंबर पे आज dt. 25/11/13 को 11.40 AM पर की गई थी।
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दलितों के प्रति कानून का रवैया ? आला जात का अदना अफसर हो या आला सोंच में क्या कोई फर्क आया है दलितों और छोटे जात वालों के प्रति ? उच्च जाती की साजीश के शीकार हुए सुनील कुमार पासवान ने बिहार के DGP से मांग की मामले की आर्थिक अपराध शाखा से जांच के लिए मगर जांच दी गई किसे ? थाना के थानेदार को भी नहीं बलके थाना के जमादार को । पढ़ें पूरी कहानी और जाने इंसाफ का हाल ? जात पात और मजहब से कैसे प्रभावित है हमारे देश का नेजाम ? Read more at http://biharbroadcasting.com/blog.php#gJ6EIbHFbSbZ4Jdd.99 - See more at: http://biharbroadcasting.com/blog.php#sthash.IX2XtIMs.dpuf

Posted on: 31-December-2013
बिहार में दलितों , महादलितों और छोटे जात वालों के साथ इंसाफ का क्या हाल है एक नमूना पेश किया जा रहा ,जो साबित करने के लिए काफी है के देश की आज़ादी के बाद छुआ छूत भले ही शख्त कानून की वजह कर मज़बूरी में कम हो गया हो , मगर ऊँची जात वालों का निचे जात वालों के प्रति दिल अभी भी नहीं बदला ,नफरत जो कभी थी जिसका प्रमाण इतिहास के पन्नों में दर्ज है वह आज भी बरकरार है , बड़े जात वाले अफसर ,नेता ,और मुंसिफ आज भी जहाँ मिलता मौका मिलता है अपने power का दुरुप निचे जात वालों को सताने में प्रयोग कर ही डालते हैं , यानी जुल्म का तरीका बदल गया मगर जुल्म और नाइन्साफियाँ आज भी जरी हैं .........तो लीजिये पेश है एक उदहारण ...................। श्री सुनील कुमार पासवान , उत्तरी बारा परसौनी ,प्रखंड फेनहारा जिला पूर्वी चंपारण में पंचायत टीचर हैं , इनकी बहाली 1500 सौ रूपये पर शिक्षा मित्र के रूप में हुई थी , जब सरकार ने 5000 हजार रूपये पर बहाली की घोषणा जैसे ही की उच्च जाती की मुखिया की नियत बदल गई , उच्च जाती के मुखिया ने बड़े जाती आला अफसरों की मिली भगत से सुनील कुमार पासवान को बाहर का रासता दिखा दिया , मुखिया ने अपने पॉवर का मिसयूज करते हुए अपने बेटे भितिजियों को बहाल कर दिया , फर्जी ढंग से बहाल शिक्षकों को बताया जाता है के वेतन भी मजे में मिलते रहे ,दूसरी तरफ कानूनी ढंग से बहाल श्री सुनील कुमार पासवान को सात सालों से आज तक सात रुपया भी नसीब नहीं हुआ , वजह साफ़ उच्च जाती के बैमानों को उच्च जाती के आला अफसरों का संरक्षण प्राप्त होना ही बताया जाता है । उच्च जाती के भ्रष्ट लोगों ने आला अधिकारिओं की रिपोर्ट को गलत साबित करने के लिए त्रि स्त्रिये कमिटी तक बना डाली यानी के किसी भी हाल में चाहे जैसे भी हो एक गरीब को किसी भी कीमत पर गलत साबित करवा दिया जाए ,बैमान कामयाब भी रहे , मगर निचली जाती से संबंध रखने वाले सुनील कुमार पासवान हार कहाँ मानने वाले थे ,गलत लोगों को सबक सिखाने की पहले से ठान चुके थे .....मगर उन्हें क्या पता था के ऊपर पदों पर बैठे जिन आला अफसरों से इन्साफ पाने की आस लगा बैठे हैं उनके दिलों में भी दलितों , महादलितों और निचे जात वालों के लिए किसी दिल के किसी न किसी कोने में चोर छिपा हुआ है । श्री सुनील कुमार पासवान ने बड़े ही उमीद के साथ उच्च पदों पर बैठे बिहार के इमानदार और तेज़ तर्रार आई पी एस और बिहार पुलिस के मुखिया जनाब अभ्यानंद को दिनांक 4/5/13 को पत्र लिख कर पुरे मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा से की थी , अपने पत्र में श्री सुनील कुमार पासवान ने मांग की थी के एक ही वैक्ति दो दो जगह एक जगह स्कूल में टीचर तो दूसरी तरफ डाकपाल की नौकरी कैसे करता रहा ? सवाल यह भी उठाया था के जाली उपस्थिति दिखा कर वेतन का पाने का दावा करने वाले मुखिया पुत्र और भतीजी के खेलाफ आखिर BEO के अनुशंसा के बावजूद आखिर कार्रवाई क्यों नहीं की गई ? किस आधार पर त्रि स्त्रिये कमिटी ने सारे सबूतों को दर किनार कर फैसले लिए ,और पूर्व के दो जांच रिपोर्टों को पलट दिए ? मगर उन्हें क्या पता था इस हिंदुस्तान में लोग तालीम भले ही ऊँची हासिल कर ले ,ऊँची तालीम की बदौलत इस मुल्क के सबसे बड़े ओहदे पर क्यों न विराजमान हो जाए ,मगर इस मुल्क में दिल नहीं बदलते ...........जनाब सुनील कुमार पासवान ने ने मांग की के मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा से कराई जाए , मगर जांच की जिम्मेदारी दी गई थाना के थाना के छोटा बाबू को .........जरा सोंचिये क्या होता है हमारे हिन्दुस्तान में , एक तरफ उच्च जाती के शराब माफिया के शिकायत पर नीची जाती से संबंध रखने वाले DIG के खेलाफ आर्थिक अपराध शाखा का गठन होने में थोडा भी वक़्त नहीं लगता ,तो दूसरी तरफ बात आई ऊँची जाती से संबंध रखने वालों के विरुद्ध आर्थिक अपराध शाखा के जरिये जांच की तो जांच की जिम्मेदारी दी जा रही है किसे ? एक थाना के थानेदार को भी नहीं बलके थाना के छोटा बाबू को .......ऐसे में यह कहना कतई गलत न होगा के इस मुल्क में इन्साफ का पैमाना जात पात और मजहब के अनुसार बदल जाता है , और इस मुल्क में बड़े जात वाले छोटे जात वालों के प्रति आज छुआ छुत सिर्फ कानून के डर से नहीं करते , मगर कहानी वही पुरानी है..............मगर जनाब सुनील कुमार पासवान भी हार नहीं मानने वाले इसी इन्साफ की लड़ाई के बहाने कथित अच्छी छवी वालों के असली चेहरे से नकाब उतारने में लगे हुए हैं , इसके लिए RTI का सहारा लेते हुए दिनांक 19/12/13 को DGP से पूछा है के 1.क्या इस मामले में बड़े लोगों के शामिल होने के कारण आर्थिक अपराध शाखा को नहीं सोंपा गया ? 2. आर्थिक अपराध शाखा से जांच की हामारे जरिये मांग के बावाजूद दुसरे पुलिस पदाधिकारियों को को दिया गया ,इसके पीछे क्या करण है ? 3. फर्जी उपस्थिति को बुनियाद बनाकर वेतन का दावा करने वालों के विरुद्ध कौन सी कार्रवाई की गई? 4.शिकायत पत्र के बुनियाद पर जो भी कार्रवाई की गई है उसकी छाया प्रति भेजने की मांग DGP बिहार से की है ।


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BSEB में जबरदस्त भ्रष्टाचार ? मोतिहारी के शमीम अख्तर को 14 दिन बाद भी नहीं मिला अंक पत्र ,शमीम अख्तर ने 16/12/13 को अंक पत्र के लिए किया था आवेदन , बी एस इ बी बोलाकर आवेदक को आज अंक पत्र नहीं दिया , कारण पूछने पर कह रहा शाम 6 बजे आइये ,सवाल पैदा होता है के बिहार widhyalay pariksha samiti ने आवेदक को बुलया क्यों? क्या ये praminit करने के लिए काफी नहीं के बिहार wdhyalay pariksha samiti में सब कुछ ठीक ठाक नहीं , ?जरा सोंचिये शमीम अख्तर 200 km की दुरी तय कर के आये के board मेरा काम करके रख्खा होगा ,जब शमीम को 6 बजे marksheet isue भी करता हई तो शमीम घर लौटेंगे कैसे ? इसके लिए दोषी कौन? www.biharbroadcasting.com

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घोटालेबाजों के बदन पर जमी गंदगी को साफ करने के लिए बिहार के चंपारण में होने लगा इस्तेमाल केजरीवाल झाड़ू ।देश दुनिया को दिया चंपारण के महादलितों ने नया संदेश।

अरबिंद केजरीवाल का झाड़ू बिहार के पुरबी चंपारण में गुल खिलाने लगा । लगता है डेल्ही के बाद बिहार ही वह स्थान साबित होगा जहां पे इस झाड़ू के प्रयोग से आज़ादी के बाद से इकठ्ठा तमाम तरह की गंदागियाँ साफ़ की जाएँगी .

प्राप्त सूचना के अनुसार बिहार के पुरबी चंपारण के कल्याणपुर प्रखंड के एक घोटालेबाज मुखिया के बदन पर वर्षों से घोटालों से जमी गन्दगी को साफ़ करने के लिए वहाँ के महादलितों ने झाड़ू का प्रयोग प्रयोग कर डाला है । सूत्रों के अनुसार चकिया और मेहसी के बीच में स्थित एक पंचायतन जो उपरोक्त ब्लाक के तेहत आता है ,वहाँ के के घोटालेबाज मुखिया ने पीसीसी और सोलिंग के नाम पर मिलने वाली सरकारी राशी को घोटालेबाज और बेशर्म अफसरों की मिली भगत से गबन कर बैठे थे ,biharbroadcasting.com के जरिये घोटालेबाज मुखिया और अफसरों के गठजोर से चल रहे गोरख धंधे को देश दुनिया और आला अफसरों के सामने लाने के बाद जब जांच के आदेश हुए । जाँच में खामी पकड़ी गई रुपया खा चुके अफसरों ने करवाई के बजाये उसे काम मुकम्मल करने के आदेश दिए .मुखिया पहले अधूरे मन से खस्ताहाल और बदहाल सड़क पर रोलर से ऊँचे नीचे रोड को समतल तो जरुर कर दिए वह मगर कानून को अपने पॉकेट में लेकर चलने वाले मुखिया को इतना गरूर था के सोलिंग नहीं भी कराएँगे तो अब मेरा कोई कुछ नहीं बिगार सकता । मुझे वहां के लोगों ने पुनः फ़ोन पर सूचना दी और कहा के नियमानुसार काम नहीं किया अर्थात सोलिंग करने का नाम नहीं ले रहा , इस बात की जानकारी मैं ने DDC पूर्वी चंपारण को उनके सरकारी मोबाइल पे मामले से औगत कराया ,उनके आदेश पे घोटालेबाज पुनः काम तो शुरू किया ,मगर आदत से मजबूर और हराम खाने के आदी हो चुके मुखिया फिर घटिया काम कराकर पैसे को बचा लेना चाहता था , मगर वहाँ उस पंचायत के जागरूक महादलित इस बार मुखिया के बदन पर घोटालों से जमी गंदगी को साफ़ करने का ठीका उठा चुके थे , दलितों ने कहा काम जब भी होगा नियम के अनुसार ही होगा वरना नहीं होगा , मुखिया जैसे तैसे काम करके निकल जाना चाहते थे,सूत्रों के अनुसार इसी तूतू मै मै में कहा सुनी हुई और अरबिंद केजरीवालकी झाड़ू , दिल्ली के बाद बिहार के इतिहासिक जिला चंपारण के एक पंचायत के घोटालेबाज मुखिया के बदन पर जमी गंदगी को साफ़ करने के लिए दनादन प्रयोग होने शुरू हो चुके थे । और ऐसा कर वहां के दलित चंपारण की सरजमीं पर एक अनोखा प्रयोग करने के साथ ही पुरे देश को एक नई दिशा दे रहे थे।

BBC: Rahul Kumar CASE UPDATE1.राष्ट्रीय मानवाधिकार ...

BBC: Rahul Kumar CASE UPDATE 1.राष्ट्रीय मानवाधिकार ...: Rahul Kumar CASE UPDATE 1.राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मेरी याचिका पर सुनवाई करते हुए कुछ दिन पहले केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्राल...


Rahul Kumar

CASE UPDATE

1.राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मेरी याचिका पर सुनवाई करते हुए कुछ दिन पहले
केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को आवश्यक कार्रवाई करने का आदेश
दिया है।मैंने याचिका में उस प्रिंसिपल पर कई लड़के-लड़कियों के मानवाधिकार
के हनन का आरोप लगाया है।मुझे खुद ऐसे कई लड़के-लड़कियों ने उन्हें प्रताड़ित
किए जाने के बारे में सूचित किया था।
वैसे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को खुद मानवाधिकार से मतलब नहीं है।आज से
दो साल पहले जब अपना व्यक्तिगत मामला लेकर यहाँ पहुँचा था तब भी मंत्रालय
को मामला भेजकर खुद सुनवाई नहीं किया।मंत्रालय ने नवोदय विद्यालय समिति को
भेज दिया और समिति का एक अधिकारी समस्तीपुर नवोदय जाकर प्रिंसिपल के पक्ष
में जांच करके अपना रिपोर्ट दे दिया।राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को इस मामले
की सुनवाई खुद करना चाहिए था लेकिन मंत्रालय को मामला भेज दिया।

2.नरेश कुमार,संयुक्त आयुक्त,NVS HEADQUARTER एक IFS अधिकारी होने के बाद भी काफी भ्रष्ट हैं।NVS का एक सहायक संयुक्त S Chandrasekaran ने मेरा 13 सवाल का जवाब एक साथ एक ही लाइन में दे दिया जबकि सूचना का अधिकार कानून के तहत हरेक सवाल का जवाब दिया जाना चाहिए।चूँकि मेरे सवालों का जवाब इनके पास था ही नहीं इसलिए सारे सवाल का जवाब एक साथ ही दे दिया।समिति ने प्रिंसिपल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किया और इसी से जुड़ा 13 सवाल था।मामले की अपील केन्द्रीय सूचना आयोग में की गई और आयोग ने संयुक्त आयुक्त को जांच करने कहा।संयुक्त आयुक्त ने मुझे और सहायक आयुक्त दोनों को उपस्थित होने कहा।मैंने उपस्थित ना होकर पत्र के द्वारा जवाब भेजा।संयुक्त आयुक्त ने ये कहकर मामले का निस्तारण कर दिया गया कि मुझे वांछित सूचना उपलब्ध करा दिया गया है।लेकिन अपर्याप्त सूचना उपलब्ध कराई गई थी जिसके लिए सूचना का अधिकार कानून की धारा 20(1) के तहत जुर्माना और धारा 20(2) के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकता है।मैंने अपना विरोध पत्र भेज दिया है कि सहायक आयुक्त दोषी है,इसलिए पुनः सुनवाई करे।

3.एम आर चक्रवती,उपायुक्त,NVS PATNA की
धूर्तता देखिए।प्रिंसिपल ने सूचना का अधिकार के तहत मेरा कई सवाल का जवाब
नहीं दिया कि 6 महीने बाद और मेरे द्वारा उसके खिलाफ शिकायत करने के बाद
मेरे खिलाफ किस आधार पर शिकायत की गई,मेडिकल रिपोर्ट से क्या पता चला
आदि।केन्द्रीय सूचना आयोग में मैंने अपील किया और आयोग ने एम आर
चक्रवती,उपायुक्त,NVS PATNA को जांच करने कहा।चक्रवती के द्वारा 26 नवंबर
की लिफाफा वाली मुझे एक पत्र भेजा गया जिसमें 6 दिसंबर को उनके कार्यालय
में सुनवाई के लिए उपस्थित होने की बात कही गई और प्रिंसिपल को भी
उपस्थित रहने के लिए कहा गया।लेकिन ये पत्र मेरे घर पर 6 दिसंबर के बाद
पहुँची।चक्रवती ने 10 दिन बाद ही सुनवाई का तिथि कैसे निर्धारित कर दिया
क्योंकि इतने कम दिन में कई बार पत्र पहुँचती ही नहीं।इतनी जल्दीबाजी इसलिए
दिखाई गई ताकि मैं सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हो सकूँ।अन्यथा कम से कम 20
दिन बाद का तारीख निर्धारित किया जाता।मैंने अपना जवाब भेज दिया है और
यदि मेरी अनुपस्थिति में इन्होंने मामला का निस्तारण कर दिया है तो पुनः
इन्हें सुनवाई करना पड़ेगा।

4.R.K JAIN,जो एक वकील और EXCISE AND CUSTOMS
BAR ASSOCIATION का अध्यक्ष हैं,के द्वारा मुझे एक पत्र भेजी गई है।ये RTI
legal-aid society का संयोजक हैं और RTI Act,2005 (सूचना का अधिकार
कानून) और RTI Rules,2012 का हनन खुद केन्द्रीय सूचना आयोग कर रही है,इसकी
जानकारी इन्होंने मुझे दी है।केन्द्रीय सूचना आयोग के पास दर्ज की गई
शिकायत/अपील का निस्तारण आयोग अपने मेरिट पर सुनवाई किए बगैर और
शिकायत/अपील को संबंधित अधिकारी या उसके वरीय अधिकारियों के पास भेजकर कर
देती है।6 जून 2013 से 3 अक्टूबर 2013 तक केन्द्रीय सूचना आयुक्त राजीव
माथुर ने मेरा पाँच शिकायत का निस्तारण जिसके खिलाफ शिकायत की गई,उसके वरीय
अधिकारी को भेज कर कर दिया।R.K JAIN ने मुझे इस बात की जानकारी दी है कि
28 अक्टूबर 2013 को दिल्ली हाईकोर्ट ने JK MITTAL बनाम Central Information
Commission की सुनवाई करते हुए केन्द्रीय सूचना आयोग को आदेश दिया कि वह
संबंधित विभाग को शिकायत भेजने के बजाय मामले की सुनवाई खुद करे।अब मैं
मामले की सुनवाई खुद आयोग द्वारा की जाने के लिए आवेदन दे सकता हूँ कि वह
अपने आदेश में RECTIFICATION करे और खुद सुनवाई करे।RK JAIN को धन्यवाद।
फ्रॉम राहुल कुमार के fasebook वाल से dt.(26/12/13 )

सुशासन में उंची पकड़ रखने वाले एक घोटालेबाज जनप्रतिनिधि की महादलितों ने की पिटाई ,घोटालेबाज घोटालों के खुलासे के डर से पीटने के बावजूद भी थाने में मामला दर्ज नहीं कराया , मामला पुरबी चंपारण के कल्यानपुर ब्लाक के मनिचाप्रा पंचायत से जुड़ा हुआ , प्रशाशन को मामले की जानकारी मगर मामले में किसी भी प्रकार की कोई करवाई नहीं


पूर्वी चंपारण जिला के कल्याणपुर प्रखंड के मनिचाप्रा पंचायत से आज दिनांक 25/12/13 को ये खबर आई के सत्ताधारी पार्टी समर्थित घोटालेबाज एक जनप्रतिनिधि की पिटाई उस पंचायत के महादलित लोगों के लोगों ने कर दी । यहाँ बताते चले की दलितों के हाथों पिटाई खाया जनप्रतिनिधि कई घोटालों का मास्टरमाइंड है । पिटा गया घोटालेबाज सिर्फ इसलिए बच रहा के उसका संबंध सत्ताधारी पार्टी के नेताओं से है इसी वजह कर कई घोटाला करने के बावजूद किसी भी प्रकार की कानूनी करवाई आज तक नहीं हुई।

पंचायत के वार्ड एक में सर्कार ने सॉलिङ्ग एवं पीसीसी के तेहत रोड बनाने हेतु सरकार ने लाखों रूपये दिए थे , सरकारी रूपये को अपनी बपौती समझ घोटाले बाज हजम कर बैठा ,मामले को www.biharbroadcasting.com ने गंभीरता से उठाया ,आला अफसरों खास तौर से मोतिहारी के DDC को पुरे मामले से रूबरू कराया , तब जाकर DDC के आदेश पर बड़ी मशक्कत के बाद रोड बनी ,बार बार हमारे जरिये मामले को उठाने से आहत घोटालेबाज ने धमकी भी दिए पर धमकी के बावजूद मामला www.biharbroadcasting.com जरिये लगातार उठाया जाता रहा जिसका नतीजा यह हुआ के घोटालेबाज को काम करना पड़ा, घोटालेबाज आखिर आखिर तक यह कोशिश में लगा रहा के कैसे अधिकारियों को मैनेज करके बच जाएँ मगर उसकी एक न चली ,काम के आखरी दिन उपरोक्त पंचायत के वार्ड एक के कुछ महादलितों से टकराव हो गेया ,बताया जाता है के घोटालेबाज जैसे तैसे काम कराकर निकल जाना चाहता था मगर वार्ड एक के कुछ महादलित इस बात पे अड़ गए कि काम जब भी होगा नियम के अनुसार ही होगा वरना नहीं। सूत्रों के अनुसार इसी तूतू मै मै में मार पीट शुरू हो गई ।घोटालेबाज इस लिए पीछे हो गया कयोंके उसे पता था के बात अगर केस मुक़दमा बाजी तक पहुँच गई तो कहीं लेने के देने न पड़ जाएँ । इस लिए पिटाई खाने के बाद आराम से देह हाथ पोंछ कर वहाँ से पुलिस के पास न जाकर घर खिसकने में ही अपने को बेहतर समझा। घोटालेबाज कितना बड़ा मास्टरमाइंड है और उसका सुशासन में किस कदर पकड़ है के उसने सरकारी योजनाओं ,मनरेगा जैसे योजनाओं को लूट खसोट कर इंट की चिमनी ,कई वाहन तक खरीद डाले पर सरकार की मेहरबानी का नतीजा है के उसके खेलाफ आज तक कुछ न हुआ , जो कई प्रश्न खड़े करते हैं ।
नोट : यहाँ बताते चलें की कितनी मोशक्कत और दिक्कत के बाद घोटाला और गबन कर हज्म कर गए रूपये को हम ने www.biharbroadcasting.com के जरिये मामले को हाईलाइट करने के बाद उपरोक्त पंचायत के वरद एक में काम हुआ पुरे मामले से सम्बंधित रिपोर्ट www.biharbroadcasting.com और www.biharbroadcasting.blogspot. com पे देखा जा सकता है और समझा जा सकता है के हमारे देश में कितना मुश्किल है भ्रष्टाचार के खेलाफ लड़ाई और आम जनता को कितनी परिशानी उठानी परती है ,इसलिए मेरा निवेदन है के पुरे मामले को समझने के लिए उपरोक्त साईट पे खबर को पढ़ना न भूलेंगे .


पहले से ही कुछ मामलों को लेकर विवाद में चल रहा अयूब उर्दू गर्ल्स हाई स्कूल इन दिनों फिर चर्चे में है , इस बार जो वजह बनी है और समाज में चर्चा का जो विषय बना हुआ है वह है , स्कूल की ऑफिसियल सीक्रेट बातें बाहर समाज तक इललीगल /अवैध ढंग से लोगों के बीच पहुँच जाना ,समाज में ये बात भी जोर सोर से हो रही के आखीर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी बातें लीक कौन कर रहा ? इसके पीछे सोंच क्या है ? सूत्रों कि मानें तो इसी मामले को लेकर कल दिनांक 24/12/13 को ऑफिस के दो सीनियर स्टाफ उलझ बैठे , बात भले ही मार पीट में तब्दील न हुई ,मगर बात क़सम और पवित्र कुरान उठाने तक पहुँच गई .सूत्रों की मानें तो ये नौबत एक सीनियर स्टाफ एक दुसरे सीनियर स्टाफ पर स्कूल के ऑफिसियल बातों को अवैध ढंग से पास अपने मिलने जुलने वालों खास तौर से स्कूल की कमजोरी पर नजर रखने वालों तक सूचना पहुँचाने का इलज़ाम लगा देने के कारण पैदा हुई . जिस सीनियर सटाफ पर इल्जाम लगा वह इस इल्जाम को झूठ का पुलिंदा और बकवास करार देते हुए अपने को मासूम करार दिया , और अपने को पाक सफ दिखाने के लिए यहाँ तक पवित्र कुरान की क़सम खाने को भी तैयार हो गया . लेकिन सीनियर स्टाफ के इस सफाई और दलील के बाद ये सवाल अब भी अपने जगह कायम है के आखिर स्कूल में चल रही शिक्षकों ,चपरासियों की बहाली से सम्बंधित आंतरिक ऑफिसियल सूचना जैसे- कौन एक्सपर्ट्स ने किस उमीदवार से क्या क्या सवाल पूछे ,किस उमीदवार ने किन सवालों के जवाब आसानी दिए ,किस उमीदवार को किस सवाल पर परिशानी उठानी पड़ी ? किस कैंडिडेट का डेमो क्लास अच्छा गया और किसका बुरा ? बहर हाल confidential इनफार्मेशन कौन पास कर रहा ? लोग अपने अपने तरीके दिमाग लगा रहे और तरह की बातें सोंच रहे और लोग नतीजे भी निकाल रहे , लोगों के इसी माथा पच्ची और उधेर बुन के बाद लोग इस नतीजे पे पहुँच रहे के इस सूचना लीक के पीछे कहीं मैनेजिंग कमिटी के मेम्बरों में से किसी मेम्बर का हाथ तो नहीं ? कहीं ऐसा तो नहीं के ऐसा करके सेक्रेटरी को बदनाम तो दूसरी तरफ अपने कुछ ख़ास चहेतों को खुश करने का प्रयास किया जा रहा हो ? किसी की कृपा से मिली कुर्सी का बदला confidential इनफार्मेशन अपने ख़ास चहेतों को उपलब्ध कराकर चुकाने की कोशिश मैनेजिंग कमिटी का ही कोई सदस्य ऐसा कर रहा हो ? लेकिन इस मामले में सेक्रेटरी को ऑफिसियल स्टाफ से जेयादः कुछ मेम्बरों पर भी विशेष नजर रखनी होगी । WWW.biharbroadcasting.com
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पहले से ही कुछ मामलों को लेकर विवाद में चल रहा अयूब उर्दू गर्ल्स हाई स्कूल इन दिनों फिर चर्चे में है , इस बार जो वजह बनी है और समाज में चर्चा का जो विषय बना हुआ है वह है , स्कूल की ऑफिसियल सीक्रेट बातें बाहर समाज तक इललीगल /अवैध ढंग से लोगों के बीच पहुँच जाना ,समाज में ये बात भी जोर सोर से हो रही के आखीर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी बातें लीक कौन कर रहा ? इसके पीछे सोंच क्या है ? सूत्रों कि मानें तो इसी मामले को लेकर कल दिनांक 24/12/13 को ऑफिस के दो सीनियर स्टाफ उलझ बैठे , बात भले ही मार पीट में तब्दील न हुई ,मगर बात क़सम और पवित्र कुरान उठाने तक पहुँच गई .सूत्रों की मानें तो ये नौबत एक सीनियर स्टाफ एक दुसरे सीनियर स्टाफ पर स्कूल के ऑफिसियल बातों को अवैध ढंग से पास अपने मिलने जुलने वालों खास तौर से स्कूल की कमजोरी पर नजर रखने वालों तक सूचना पहुँचाने का इलज़ाम लगा देने के कारण पैदा हुई . जिस सीनियर सटाफ पर इल्जाम लगा वह इस इल्जाम को झूठ का पुलिंदा और बकवास करार देते हुए अपने को मासूम करार दिया , और अपने को पाक सफ दिखाने के लिए यहाँ तक पवित्र कुरान की क़सम खाने को भी तैयार हो गया . लेकिन सीनियर स्टाफ के इस सफाई और दलील के बाद ये सवाल अब भी अपने जगह कायम है के आखिर स्कूल में चल रही शिक्षकों ,चपरासियों की बहाली से सम्बंधित आंतरिक ऑफिसियल सूचना जैसे- कौन एक्सपर्ट्स ने किस उमीदवार से क्या क्या सवाल पूछे ,किस उमीदवार ने किन सवालों के जवाब आसानी दिए ,किस उमीदवार को किस सवाल पर परिशानी उठानी पड़ी ? किस कैंडिडेट का डेमो क्लास अच्छा गया और किसका बुरा ? बहर हाल confidential इनफार्मेशन कौन पास कर रहा ? लोग अपने अपने तरीके दिमाग लगा रहे और तरह की बातें सोंच रहे और लोग नतीजे भी निकाल रहे , लोगों के इसी माथा पच्ची और उधेर बुन के बाद लोग इस नतीजे पे पहुँच रहे के इस सूचना लीक के पीछे कहीं मैनेजिंग कमिटी के मेम्बरों में से किसी मेम्बर का हाथ तो नहीं ? कहीं ऐसा तो नहीं के ऐसा करके सेक्रेटरी को बदनाम तो दूसरी तरफ अपने कुछ ख़ास चहेतों को खुश करने का प्रयास किया जा रहा हो ? किसी की कृपा से मिली कुर्सी का बदला confidential इनफार्मेशन अपने ख़ास चहेतों को उपलब्ध कराकर चुकाने की कोशिश मैनेजिंग कमिटी का ही कोई सदस्य ऐसा कर रहा हो ? लेकिन इस मामले में सेक्रेटरी को ऑफिसियल स्टाफ से जेयादः कुछ मेम्बरों पर भी विशेष नजर रखनी होगी । WWW.biharbroadcasting.com

    पंजाब बिजली विभाग के भ्रष्ट J.E. प्रेम जैन को बरखास्त करो



    Mukesh Thakur
    पंजाब बिजली विभाग के भ्रष्ट J.E. प्रेम जैन को बरखास्त करो
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    "जनलोकपाल" भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ आपका हथियार है...

    हमारे देश में हर जगह ऐसे दबंग उपलब्ध है जो क्षेत्र के सरकारी अधिकारियों और पुलिस महकमे को अपने पांव की जूती समझते हुये उनका उपयोग करते हुये क्षेत्र में दबदबा व आतंक कायम करते हैं| संगठन के पास आये इस मामले में क्षेत्र के दबंग बिजली चोर(जो पिछले 5-6 वर्षों से बिजली चोरी कर रहे हैं) वे अपने ऊपर ऊँगली उठाने वालों को प्रताड़ित व आतंकित करने के लिये सरेआम पीड़ित चन्दन के खिलाफ झूठी F.I.R. करने के साथ-साथ बिजली विभाग के भ्रष्ट अधिकारी J.E. प्रेम जैन व उनके साथियों के साथ मिलकर बिजली चोरी के झूठे मामले में पीड़ित चन्दन फँसाया| जिसके परिणामस्वरूप पीड़ित दर-बदर की ठोकरें खा रहा है|
    संगठन ने मामले की पूरी विवेचना व विश्लेषण करने के बाद संबंधित विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजकर भ्रष्ट J.E. प्रेम जैन को बर्खास्त करने और उसके खिलाफ F.I.R. दर्ज करने की शिकायत की है| साथ ही दबंग द्वारा पीड़ित पर झूठी F.I.R. दर्ज करने के खिलाफ, F.I.R. दर्ज करने के लिये भी पत्र भेजा है| आज हम सब को चाहिये कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करते हुये उन्हें सज़ा दिलवाई जाये| अगर संबंधित अधिकारी साफ-साफ सबूत होने के बाद भी उचित कार्यवाही नहीं करेंगे तो संगठन जरूरत पड़ने पर लोकपाल में शिकायत भेजेगा जिससे ऐसे अधिकारियों को सज़ा मिल सके| आज हम सब के लिये, भ्रष्टाचार मिटाने के लिये लोकपाल के पास ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों की शिकायत करना अति आवश्यक है|

    हमारे देश में सरकारी अधिकारी इस कदर बेईमान और भ्रष्ट हो चुके हैं कि उनकी गलती को सबूतों के साथ दिखाने के बावजूद न तो पुलिस विभाग उनके खिलाफ कार्यवाही करता है और न ही संबंधित विभाग के अधिकारी उन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने की हिम्मत करते हैं|

    यह मामला केवल संगठन के पास आये पीड़ित चंदन कुमार पुत्र श्री. जगन्नाथ झा(मकान नं 101 बी, स्वाती नगर, जस्सियाँ रोड़, लुधियाना, पंजाब - 141005) व्यक्ति का ही नहीं है बल्कि देश में मौजूद हर क्षेत्र के उस व्यक्ति से जुड़ा है जो कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में इन भ्रष्ट अधिकारियों से शोषित हुये हैं या शोषित हो रहे हैं| यह भ्रष्ट अधिकारी हालात ऐसे पैदा कर रहे हैं कि पीड़ित व्यक्ति उधम सिंह बनकर इन्हें दफ्तर से खींच कर लातघूसों की बरसात तो करें ही साथ में जूतों की माला पहनाकर गधे पर बैठाकर पूरे गली मौहल्ले की सैर भी करायें| वह तो भला हो कि शरीफ व्यक्ति के पास आसानी से मौत रूपी हथियार(गन आदि) वगैरह नहीं मिल पाते अगर मिल जाते तो हर गली-मौहल्ले में हमें उधम सिंह नजर आता और भ्रष्ट अधिकारियों का दूर-दूर तक नामोनिशान नहीं रहता, जबकि यह मौत के हथियार बदमाशों को बड़ी आसानी से उपलब्ध होते हैं और वे उनका उपयोग खुलेआम डराने-धमकाने का तो करते ही हैं साथ में गुंडा-गर्दी और दादागिरी करते नजर आते हैं|

    संगठन के पास चन्दन का मामला आया था जिसकी पूरी कहानी पिछले जिसमें चन्दन पर बिजली चोरी का झूठा मामला बनाते हुये 28000/- का चालान बनाया गया था जिसकी शिकायत विश्लेषणों के साथ संगठन के द्वारा करने के बावजूद चालान की रकम को घटाकर 15460/- रु. ही किया गया मगर मामले में पूरे सबूत भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ होने के बावजूद भी उनके खिलाफ कोई कड़ी कार्यवाही नहीं की गई बल्कि रकम कम करके वापस चालान दिया गया, साथ ही तरह-तरह से डराया जा रहा है SHO, SDO व हवलदार द्वारा की "चाहे आप कुछ भी कर लो SDO इतने ताकतवर है, कि अगर साफ भी दिखाई देगा और आप सबूत भी लाकर दे देंगे जिससे यह साफ पता चल जाये कि SDO या J.E. प्रेम जैन झूठ बोलकर गलत तरीके से पीड़ित को फँसा रहे हैं तो भी उनके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं हो सकेगी" और हवलदार द्वारा यह कहा जा रहा है कि अगर पैसा नहीं भरोगे तो F.I.R. दर्ज होगी और आपको 10000/- से 15000/- रु. अलग से ज़मानत के लिये भी खर्चा करना पड़ जायेगा| इस प्रकार से घेर कर पंजाब बिजली विभाग का कर्मचारियों व अधिकारियों का गिरोह बेकुसूरों को भी कुसूरवार सिद्ध करने पर तुल जाता है जिसकी वजह से मजबूर व्यक्ति कहीं से भी कर्जा लेकर इनका भुगतान बिना किसी विरोध के आत्मसमर्पण करते हुये कर देता है| यह बिलकुल वही बात हुई जैसे किसी बेकुसूर गरीब व्यक्ति पर चोरी का इल्जाम लगाकर जेल में बन्द कर दिया और जमानत का खर्चा न होने की वजह से वह डेढ वर्ष तक जेल में बंद रहा जबकि चोरी की सज़ा अगर 1 वर्ष की है तो उस बेचारे को बेगुनाह होते हुये भी लगाया गया गुनाह कबूल करना फायदे का सौदा नज़र आयेगा और मजबूरन समाधान का रास्ता निकालने के लिये और खुद को और अधिक शोषित होने से बचाने के लिये यह सौदा करते हुये झूठे आरोप को कबूल करना पड़ेगा| बिलकुल यही हालात हमारे देश के सरकारी विभागों के भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से देश में व्याप्त है|

    इस मामले में भी यह भ्रष्ट अधिकारी J.E. प्रेम जैन जो दिये सबूतों की घटनाओं के आधार पर पूरी तरीके से चोर व कमीना नज़र आ रहा है मगर इसके विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है जैसे कि यह पिछले कई वर्षों से इसी क्षेत्र में तैनात है| इसका मतलब है कि इसे इस क्षेत्र की एक-एक बिजली कनेक्शन की पूरी-पूरी जानकारी अवश्य होगी जैसे बिजली बिल न भरे होने की वजह से किस मकान की लाईन कटी(जैसे दिलवारा उर्फ काका और प्रवीन(मकान नं. 102, मनोज कॉलोनी, जस्सियाँ रोड़, लुधियाना, पंजाब)) हुई है और इस क्षेत्र के हर परिवार को मालूम भी है कि इस मकान में पिछले 4-5 वर्षों से बिजली चोरी करके उपयोग की जा रही है मगर क्या इस कमीने भ्रष्ट J.E. प्रेम जैन को पता नहीं होगा? दूसरी बात पीड़ित चन्दन के द्वारा तीन वर्ष पहले कॉमिर्शियल मीटर के लिये आवेदन किया गया था क्या यह बात इस कमीने J.E. प्रेम जैन को पता नहीं थी?
    यह मालूम होने के बाद भी इस भ्रष्ट कमीने J.E. प्रेम जैन ने कार्यवाही नहीं की तो साफ है कि वह ऊपर से लेकर नीचे तक रिश्वत की दलदल में डूबा हुआ है जिसकी संपत्ति(उसके व उसके रिश्तेदारों की) जाँच कराई जाये तो पूरी कहानी खुल कर सामने आ जायेगी|

    इस भ्रष्ट कमीने(यह कमीने शब्द हमें ना चाहते हुये भी बार-बार इसलिये लिखना पड़ रहा है क्योंकि सारी भ्रष्ट हरकतें प्रेम जैन की खुलेआम बेखौफ होकर की जा रही हैं, कानून नाम का डर इस इंसान को है ही नहीं) की हालत यह है कि जब दिलवारा और प्रवीन बिजली चोरी करते हैं, से संबंधित पत्र-विभाग में भेजा गया तो जाँच करने के लिये आई टीम के आने से एक दिन पहले इस भ्रष्ट कमीने J.E. प्रेम जैन ने दिलवारा को आगाह करने के लिये 23.09.2013 की शाम 7.00 से 8.00 बजे के आसपास अपने दो साथियों के साथ "छापा मारने के लिये बिजली विभाग की टीम आने वाली है" की जानकारी दिलवारा को दी जिसके परिणामस्वरूप दूसरे दिन सुबह दिलवारा के यहाँ Direct Line हटाकर पड़ोसी के घर से Line लगाई गई| इसका मतलब साफ है कि कॉमिर्शियल मामले में पीड़ित चन्दन को जानबूझ कर फँसाया जा रहा है|

    अब बात करते हैं बिजली चोरी से संबंधित मामला पीड़ित के ऊपर बनाने के बारे में :
    संबंधित चालान में साफ-साफ लिखा है कि ऊपर बिजली की कुंडी लगा कर Main Switch Off करके मीटर से पहले जोड़ बना कर सीधे तार लगाकर बिजली उपयोग कर रहा था और एक बात यह भी लिखी है कि जब Meter Check किया तब Meter की Pulse Blink कर रही थी|

    यहाँ पर इन्ही अधिकारियों के शब्दों का अगर विश्लेषण करें तो पता चलेगा कि एक तरफ तो यह कह रहे हैं कि "Main Switch Off था और बिजली Direct तार लगाकर उपयोग की जा रही थी" जबकि दूसरी तरफ कह रहे हैं कि "मीटर Blink कर रहा था" इसका मतलब साफ है कि मकान के अन्दर जो भी बिजली उपयोग की जा रही है वह मीटर के द्वारा ही की जा रही है| अगर ऐसा नहीं होता तो Meter Blink बिलकुल भी नहीं करता, हाँ यह आरोप लगा सकते हैं कि बेवकूफ बनाने के लिये मीटर में अलग से उपयोग किये जाने वाले किसी बल्ब या छोटे यंत्र को लगा दिया गया होगा जिससे मीटर Blink करता रहे लेकिन यह अधिकारी कोई दूध पीते बच्चे नहीं है जो ऐसा कोई भी कारस्तानी को अनदेखा कर दे, जिसका मतलब साफ है कि यह अधिकारी पीड़ित को फँसाने के लिये साफ-साफ झूठ बोल रहे हैं|

    इन अधिकारियों ने Main Switch की फोटो भी मोबाईल द्वारा ली थी| यह हम सब और साधारण इन्सान आसानी से समझ सकता है कि अगर कोई भी सुबह-सुबह छः बजे के आसपास बिना किसी पूर्व सूचना(वैसे भी छापा मारते समय कोई भी पूर्व सूचना नहीं दी जाती) के छापा मारने पहुँचे तो सबूत के साथ पकड़ने के लिये कोई भी अधिकारी सबसे पहले उस जगह की फोटो या वीडियो लेगा जहाँ से कुंडी लगाई जाने का अन्देशा हो| क्या इन अधिकारियों ने ऐसा कुछ किया? अगर नहीं तो इसका साफ मतलब है कि वहाँ कोई कुंडी लगी हुई नहीं थी क्योंकि अगर होती तो यह अधिकारी जरूर उसकी फोटो या वीडियो जरूर लेते, इसी प्रकार बिजली का मीटर जो पीड़ित के मकान के बाहर लगा है जिसे एक आम इन्सान भी बिना घरवाले को बताये आसानी से देख सकता है और वीडियो ले सकता है|

    यह हम सब जानते हैं कि रात के समय बिजली का कोई न कोई सा उपकरण(बल्ब, पंखे या कूलर) चलते रहते हैं इसका मतलब साफ है कि मीटर भी लगातार Blinking करता रहेगा जबकि अगर बिजली चोरी की जा रही होगी तो मीटर Blink नहीं करेगा| क्या इन अधिकारियों ने ऐसा कोई वीडियो Blink करते या न करते हुये लिया? यह सब नहीं किया इसका साफ-साफ मतलब है कि इन अधिकारियों को पीड़ित के खिलाफ बिजली चोरी से संबंधित किसी भी प्रकार का कोई भी सबूत नहीं मिल पाया| इसलिये यह अधिकारी भ्रष्ट व चोर साफ नजर आ रहे हैं क्योंकि सबूत नहीं मिलने के बावजूद इस पीड़ित पर बिजली चोरी का आरोप लगाते हुये व कागजात(चालान) में तकनीकी(चालान में 2KW की जगह 200KW लिखा गया) गलती करते हुये अपनी तानाशाही के साथ चालान बनाने का कार्य किया है जो यह साफ दर्शाता है कि यह भ्रष्ट अधिकारी साफ-साफ झूठे साबित होने के बावजूद अपने पद पर कार्यरत हैं, जिन्हें फौरन बरखास्त करना अति-आवश्यक है|

    एक तकनीकी तरीका है बिजली चोरी का पता लगाने के लिये जैसे, पुराने बिजली बिलों का विश्लेषण करके| जिनका विश्लेषण करने पर कहीं से भी यह पता नहीं चल रहा कि यह परिवार बिजली चोरी कर रहा होगा(विश्लेषण का पूरा विवरण पूरानी पोस्ट पर मौजूद है)|
    यह मामला सामने आने के काफी समय पहले से यह भ्रष्ट अधिकारी J.E. प्रेम जैन पीड़ित को डरा-धमकाकर पैसा वसूल करने की कोशिश करता रहा है, जिसका सबूत है 08.06.2013 को भ्रष्ट J.E. प्रेम जैन अपने तीन साथियों के साथ चन्दन की दुकान पर दोपहर में अवैध वसूली करने के लिये आया था(जिसकी Mobile Location की जानकारी के लिये R.T.I. Cyber Crime में दे दी गई है)| इसी प्रकार 07.08.2013 को भी भ्रष्ट J.E. प्रेम जैन अपने इन्हीं तीन साथियों के साथ 2.00pm से 4.00pm बजे के बीच चन्दन की दुकान पर अवैध वसूली के लिये आया था(जिसकी Mobile Location की जानकारी के लिये R.T.I. Cyber Crime में दे दी गई है) और इस वक्त चन्दन की माँ ने रोज़-रोज़ की अवैध वसूली से तंग आकर भ्रष्ट J.E. प्रेम जैन को सुनाते हुये कहा कि "दिलवारा सिंह जैसे बिजली चोरों को आप जैसे लोग कुछ नहीं कहते और हमसे पैसा माँगने और धमकी देने चले आते हो" जिसकी भ्रष्ट J.E. प्रेम जैन ने उन्हें देख लेने की धमकी दी और परिणाम यह हुआ कि दिलवारा सिंह जो चन्दन की दुकान पर उससे उधारी में सामान लिया करता था उसने चन्दन से झगड़ा किया और मारपीट की साथ ही चन्दन के खिलाफ ही झूठी F.I.R. भी दर्ज कर दी जिसका सबूत उसके Medical Legal Report से एक बच्चे को भी समझ आ जायेगा कि यह F.I.R. झूठी है जिसका अदालत में मामला शुरू हो गया है| इसी समय भ्रष्ट J.E. प्रेम जैन के तीनों साथियों ने चन्दन के घर व दुकान का बिजली का Load की जाँच करने के लिये घर के अन्दर जाकर एक-एक बटन व बल्ब का Load की जाँच की, यह कार्य क्यूँ किया और इसकी रिपोर्ट कहाँ है? इसकी जानकारी भी नहीं दी गई|

    इसके बाद जब संगठन की तरफ से बिजली चोरी से संबंधित पत्र बिजली विभाग में गया तो दिलवारा सिंह और प्रवीन के यहाँ छापा मारने से एक दिन पहले भ्रष्ट J.E. प्रेम जैन अपने इन्हीं तीन साथियों के साथ दिलवारा और प्रवीन को आगाह करने गया(जिसकी Mobile Location की जानकारी के लिये R.T.I. Cyber Crime में दे दी गई है) अब अगर यह सबूत यह दर्शाते हैं कि प्रेम जैन दिये गये समय व तारीख पर चन्दन की दुकान पर या दिलवारा और प्रवीन के मकान पर मौजूद था तो उसका कारण क्या था? अगर भ्रष्ट J.E. प्रेम जैन अपने तीन साथियों के साथ चन्दन की दुकान पर मौजूद था तो क्या उस समय चन्दन की दुकान नहीं चलाया करता था? अगर चलाया करता था तो इस भ्रष्ट J.E. प्रेम जैन ने उस समय उसके ऊपर चालान क्यूँ नहीं बनाया? इसी प्रकार वह दिलवारा और प्रवीन के यहाँ मौजूद था तो क्या उसे वहाँ बिजली चोरी करते या दूसरे मकान से बिजली का कनेक्शन लेते हुये तार दिखाई नहीं दिये? इस सब सवालों का जवाब हमें अपने आप बता देगा कि यह भ्रष्ट अधिकारी कितने ऊपर से लेकर नीचे तक भ्रष्टाचार में डूबे हुये हैं और जनता के पैसों का किस प्रकार अपने फायदे के लिये गलत उपयोग कर रहे हैं यह इस विभाग में रहने के काबिल नहीं हैं अतः जब यह अधिकारी ही भ्रष्ट हैं तो वे किस प्रकार ईमानदारी से किसी कार्य को अन्जाम दे सकेंगे जिसका मतलब साफ है कि चन्दन के ऊपर लगाया गया बिजली चोरी का इल्जाम पूरी तरीके से झूठा है और व्यवसायिक मीटर के नाम पर उसे गुमराह करके उसका शोषण करने की कोशिश की जा रही है| जरूरत है उचित इंसाफ की!

    आज जरूरत है, ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को बरखास्त करने की इन्साफ की जबान में कहा जाता है कि "दस चोरों को बाद में पकड़ो मगर ऐसे भ्रष्ट व कमीने अधिकारियों को पहले पकड़ो व बरखास्त करो साथ में जूतों की माला पहना कर, मूँह काला करके, गधे पर बैठाकर पूरे मौहल्ले में घुमाओ"|

    संगठन संबंधित मामले में जाँच करने के लिये संबंधित विभागों में पत्र भेज रहा है, अगर उचित कार्यवाही नहीं हुई तो संगठन बिजली विभाग के दफ्तर के सामने भ्रष्ट अधिकारियों J.E. प्रेम जैन और दूसरे जाँच अधिकारियों की पूरी रिपोर्ट बाँटने का कार्य तब तक जारी रखेगा जब तक इन्हें बरखास्त करके इनके खिलाफ कार्यवाही नहीं की जायेगी|
    संगठन की सदस्यों व पाठकों से अपील है कि पंजाब बिजली विभाग के Chief Engineer Mob. 75895-11502 और Commissioner of Police(Ludhiana) Shri Nirmal Singh Dhillon Mob. 98141-14787 को फोन या SMS करें|

    SMS में लिखें :
    Plz. visit "http://www.14122013.bvbja.com/" pidit ko nyay dilaye aur koshish kare ki pidit ko lokpal ke paas na jana pade.

    धन्यवाद
    सोनिका शर्मा
    मोब. 09920913897
    भ्रष्टाचार विरूद्ध भारत जागृति अभियान
    http://www.bvbja.com/

    पोस्ट(http://www[dot]25092013[dot]bvbja[dot]com) पर मौजूद है|

    साथ में संलग्न दस्तावेज़
    • Chief Engineer का जवाब(लगाई गई R.T.I. पर)
    • आरोपी दिलवारा सिंह के खिलाफ F.I.R दर्ज करने से संबंधित पत्र
    • भ्रष्ट पंजाब बिजली विभाग के J.E. प्रेम जैन के खिलाफ जाँच करवाने से संबंधित पत्र

    CC :
    बिजली चोरी से संबंधित मामले में विवेचना के साथ भेजे गये पत्र :
    1. Chief Secretary - Page 1, Page 2 & Page 3
    2. Vigilance Bureau - Page 1, Page 2 & Page 3
    3. Chief Engineer - Page 1, Page 2 & Page 3
    4. Commissioner of Police - Page 1, Page 2 & Page 3
    5. CMD(PB State Power Corporation Ltd.) - Page 1, Page 2 & Page 3
    6. Punjab State Human Rights Commission - Page 1, Page 2 & Page 3
    7. CMD(Punjab State Transmission Corporation Ltd.) - Page 1, Page 2 & Page 3
    8. Anti Power Theft Police Station - Page 1, Page 2 & Page 3
    9. SHO(Salem Tabri) - Page 1, Page 2 & Page 3

    झूठी F.I.R. से संबंधित मामले में विवेचना के साथ भेजे गये पत्र :
    1. Punjab State Human Rights Commission - Page 1, Page 2 & Page 3
    2. Chief Secretary - Page 1, Page 2 & Page 3
    3. Vigilance Bureau - Page 1, Page 2 & Page 3
    4. Commissioner of Police - Page 1, Page 2 & Page 3
    5. SHO(Salem Tabri) - Page 1, Page 2 & Page 3

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    Five mysteries of the brain

    By Paula McGrath Health check, BBC World Service For centuries, the brain was a mystery. Only in the last few decades have scientists begun to unravel its secrets. In recent years, using the latest technology and powerful computers further key discoveries have been made. However, much remains to be understood about how the brain works. Here are five important areas of study attempting to unlock the last secrets of the brain. How to fix it When we think, move, speak, dream and even love - it all happens in the grey matter. But our brains are not simply one colour. White matter matters too. Much of the research into dementia has focused on the tell-tale plaques of beta amyloid and tau protein tangles which occur in the grey matter. But one British scientist, Dr Atticus Hainsworth says the white matter - and its blood supply - may be equally important. The white colour results from fatty sheaths around the axons - which are extensions of the nerve cell bodies and help the cells to communicate. He is using banks of donated brains, in Oxford and Sheffield, to analyse white matter for potential triggers such as leaking blood vessels. "Some of the cases had an MRI or CT scan and that information can help give more clues about whether there was disease in the white matter - and what its basis might be," says Dr Hainsworth. If leaking blood vessels in white matter do play a key role in the development of dementia then it may offer up a another potential route for new drug therapies. How to make us all geniuses For years caffeine was used to enhance alertness. But popping a pill to get straight-A's may soon become the norm. At Cambridge University neuroscientist Barbara Sahakian is investigating cognitive enhancers - drugs which make us smarter. She studies how they can improve the performance of surgeons or pilots and asks if they could even be used to make us more entrepreneurial. But she warns that there is no long-term safety information on these drugs and as a society we need to talk about their use. She says the scientific and ethical challenges created by drugs which affect the production of brain chemicals like dopamine and noradrenaline - which induce pleasurable or "fight or flight" responses - need to be debated in order to decide whether drug-tests become routine before taking an exam. Dr Sahakian adds: "I frequently talk to students about cognitive-enhancing drugs and a lot of students take them for studying and exams. "But other students feel angry about this, they feel those students are cheating." How can we harness our unconscious? People need to be on top of their game when mastering skills like playing a musical instrument or detecting a bomb. But research suggests that our unconscious can be harnessed to help us excel. Repeatedly playing a tricky piece of music obviously helps develop a familiarity with the bits that are most difficult. But cellist Tania Lisboa, who's also a researcher in the Centre for Performance Science at London's Royal College of Music, says it also helps to send the trickier parts of a piece from her conscious to the unconscious part of her brain. After hours of practice, a fluent musician's brain stores how to play the piece in an area at the back of the brain called the cerebellum - literally "the little brain". Neuroscientist Prof Anil Seth, of Sussex University, says: "It has more brain cells than the rest of the brain put together. "It helps to promote fluid movements.. So the conscious effort of learning how to bow a cello is moved from the cortical areas which are involved when it's new or difficult over to the cerebellum, which is very good at producing unconscious fluent behaviour on demand." Music and defence may not appear to have much in common, but the unconscious can also help detect potential threats, whether it's a suspicious person in a crowd or the presence of an improvised explosive device. The unconscious brain is really good at spotting patterns - a skill which Paul Sajda at Colombia University in New York exploits - right at the boundary of the conscious/sub-conscious. "I can flash 10 images a second and if one of those images has something out of the ordinary..that will essentially cause me to re-orient my brain to that image - but I'm not exactly aware of what that is." Brain activity is monitored whilst the analyst looks at images so that researchers can later see which images triggered reactions. What dreams are for It's just 60 years since scientists in Chicago first noted the tell-tale "rapid eye movement" or REM sleep which we now associate with dreaming. But our fascination with dreams dates back at least 5,000 years to ancient Mesopotamia when people believed that the soul moved out of a sleeping body to visit the places they dreamed of. REM sleep - which occurs every 90 minutes or so - begins with signals from the base of the brain which eventually reach the cerebral cortex - the outer layer of the brain which is responsible for learning and thought. These nerve impulses are also directed to the spinal cord, inducing temporary paralysis of the limbs. Prof Robert Stickgold, from the Beth Israel Deaconess Medical Center for Sleep and Cognition in Boston, believes that dreams are vital for processing memory associations. He has asked the subjects of some of his sleep studies to play Tetris - and then noted their descriptions of how they floated amongst geometric shapes in their dreams. He's an admirer of Japanese scanning research where the scientists could "read" the dreams of subjects as they had MRI scans. But he says it's hard to get people to sleep in a noisy, expensive scanner. And the future? "I would like to see research which reveals the rules for dream construction - and how it relates to the larger concept of memory processing during sleep." One even more elusive goal: how to dream just happy dreams and ditch the bad ones, especially nightmares. Can we cure unreachable pain? Excruciating chronic pain is one of medicine's most difficult problems to solve. Untouched by conventional treatments like painkilling drugs, surgeons are now testing their theory that deep brain stimulation could provide relief. It is a brain surgery technique which involves electrodes being inserted to reach targets deep inside the brain. The target areas are stimulated via the electrodes which are connected to a battery-powered pacemaker surgically placed under the patient's collar bone. One of the pioneers of this technique is Prof Tipu Aziz at the John Radcliffe Hospital in Oxford. Deep brain stimulation has been used in the past for Parkinson's disease and depression, and is now being trialled on obsessive compulsive disorder patients as well as those in chronic pain. One of his patients, Clive, has suffered from terrible pain for nearly a decade after an operation to remove a disc in his neck. "Sometimes I thought that if I had an axe, I'd chop my own arm off, if I thought it would get rid of the pain." The doctors explained to him that his brain was getting signals from his arm to his brain confused and that the electrodes could help. In Clive's case this was an area of the brain called the interior singulate. A week after his surgery he was one of the fortunate 70% of patients for whom the deep brain stimulation provides relief. "It's great to be out of that pain now. Since having the implant I can sit down for longer, I am able to walk further, everything is an improvement." Prof Aziz is treating medical conditions. But he is aware of ethical dilemmas which could arise if the technique was applied to other areas. "Putting electrodes in targets to improve memory. "Or you could put electrodes into people to make them indifferent to danger and create the perfect soldier."


    December 22, 2013 08:20

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