जश्न ए उर्दू आज , मगर मुख्यमंत्री जनाब नीतीश कुमार बताएं के यह जश्न विकाश की ख़ुशी में मनाई जा रही या विनाश की ख़ुशी में ?



बिहार के मंत्रिमंडल सचिवालय ( राजभाषा ) विभाग ,उर्दू निदेशालय " जश्न ए उर्दू " के नाम से दो दिवसिये समारोह (4 -5 जनवरी 2014 ) , प्रेमचंद रंगशाला में मनाने जा रह है , जिसमे मुख्य अतिथि खुद सी एम ऑफ़ बिहार होंगे ,सम्मानित अतिथि पदम् श्री डा.कलीम अहमद आजीज होंगे .

सूत्रों की मानें तो इस जश्ने उर्दू पे तकरीबन 40 लाख से ऊपर सरकारी राशी का खर्च हो रहा है .

सवाल उठाना लाजमी है के क्या जो चालीश लाख खर्च करके "जश्न ए उर्दू "जो मनाई जा रही उससे हासिल क्या होने जा रहा ? क्या इस खर्चीली "जश्न ए उर्दू " से उर्दू सवैयं उर्दू का कितना भला होगा ? सवाल यह भी उठ रहा है के जब इस 40 लाखी जश्न से उर्दू को जब भला ही नहीं होगा तब इतना बड़ा और इतना खर्चीला जश्न क्यों ?

मुसलमानों का पुराना आरोप रहा है के बिहार में ऐसे सैकड़ों नहीं हजारों उर्दू स्कूल मौजूद हैं जहां उर्दू शिक्षक के पद रहते हुए भी उर्दू शिक्षकों की बहाली नहीं की जा रही , और ऐसा जान बुझकर किया गया या किया जा रहा , आरोप यह भी है के जिन शिक्षकों की बहाली हुई भी तो उनसे उर्दू जुबान (भाषा ) को पढ़ने पढ़ाने का काम न लेकर उनसे दुसरे काम लिए जा रहे , अगर मुसलमानों का आरोप सही है तो सवाल पैदा होता है के क्या मुख्य मंत्री नीतीश कुमार के पास इस बात का जवाब है के उन्होंने इस समस्या के हल के लिए उन्होंने क्या ठोस उपाए किये ?

मुसलमानों का एक और भी आरोप रहा है एक तरफ उर्दू शिक्षकों की बहाली के लिए विज्ञापन भी बच्चों से मांगती है ,दूसरी तरफ उन बच्चों और अभियार्थियों को बहाली से रोकने के लिए तरह के गैर जरुरी नियम ,काएदा कानून के अलावा साजिश का सहारा लेकर टेट जैसे इम्तिहान में सवालों के गलत जवाब भी कंप्यूटर में फीड करती है ताके यह बहाना हो जाए के हमारी सरकार ने तो उर्दू शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए कोशिश तो बहुत की पर क्या किया जाये उतनी मात्रा में दक्ष और काबिल शिक्षक मुस्लिम समुदाय से मिला ही नहीं तो फिर .........?

सवाल पैदा होता है के क्या मुसलमानों का आरोप बेबुनियाद है ? मुसलमानों के आरोप में कितना दम है और आरोप सच्चा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है के कुछ सालों पहले 34 हजार ट्रेंड शिक्षकों की बहाली हुई ,जिसमे बताया जाता है के 12 हजार उर्दू शिक्षकों के पद थे , मुसलमानों का आरोप यह रहा है जिससे मुख्मंत्री नीतीश कुमार बखूबी वाकिफ भी हैं " उर्दू शिक्षकों के पुरे 12 हजार पद पुरे न हो जाएँ सरकार के विशेष आदेश पर 200 नंबर के साथ इंटर पास होना शर्त लगा दिया गया साथ ही trained होना भी लाजमी था जिससे इस कड़े शर्त को पूरा करने वाले अभियर्थि मिला ही नहीं और सरकार ने उर्दू के पद पर सामान शिक्षकों से भर दी " और यह सब सोंची समझी साजिश और प्लान के तेहत किया गया ,कयोंके इससे पहले उर्दू शिक्षक बन्ने के लिए 200 नंबर के साथ इंटर पास होने की शर्त कभी न रही , जब इससे पहले कभी न थी तो सवाल पैदा होता है के आखिर क्यों ऐसा किया गया ,और यही बातें साबित करती है के मुसलामानों के आरोप नाराधर नहीं ।

उसी प्रकार उर्दू स्पेशल टेट में किया गया ,जिस पर मुख्मंत्री ने खुद यह आदेश दिया के तिन दिन के भीतर छात्र हीत में फैसले लिए जाएँ ,मगर बताया जा रहा है के तीन दिन के भीतर क्या आज 20 दिन से जेयादः गुजर जाने के बावजूद आज तक छात्र हित में फैसले नहीं लिए गए ।
सवाल पैदा होता है के जब सरकार एक तरफ रवैया उर्दू के साथ भेदभाव से लबरेज रहा है ,उर्दू दुश्मनी का रहा है ,उर्दू को मिटाने वाला रहा है , वहीँ दूसरी तरफ वही सरकार उर्दू के विकाश के नाम पर 40 लाख खर्च करके " जश्न ए उर्दू " मनाने जा रही सवाल पैदा होता है के क्या सरकार और खास कर मुख्मंत्री नीतीश कुमार को जश्न ए उर्दू मनाने का हक है ?बिहार का मुसलमान सवाल कर रहा है के मुख्य मंत्री पहले जनता को इस बात का जवाब दें के यह जश्न उर्दी के विकाश की ख़ुशी में मनाई जा रही या बरबादी की ख़ुशी में ?

Bihar AG Office का करामात देखिये ,जानकार शर्माजायेंगे आप ।

kaushar2007 Admin • a month ago −
घुस न देने के कारण बुढ़े पेंशन धारी परीशान ? bihar के AG office और arth एवं sankhiki nideshalay vibhaag से जुड़ा हुआ है मामला ....मोहम्मद हसीन अख्तर जो के रिटायर्ड हाई school टीचर हैं , A G office bihar की कार गुजारीयों से परीशान हैं ।
उनका पेंशन के मामले से sambandhit मामले जीसका PPO number 396047 है ,DEO office seohar ने अपने patrank - 940 , दीनांक 30/7/13 को मामले से sambandhit patr भेज दीया मगर लगता है dakshina के िइंतेजा में बैठे हुए AG office bihar के sambandhit adhikariyon और padadhikariyon ने जान बुझ कर मामले को फंसा कर रखे हुए है ,अगर बात dakshina से नहीं जूरी हुई तो सवाल पैदा होता है के लेटर भेजने के चार महीने बाद भी उस sewaniwirt बुढ़े पेंशन धारी का काम अबतक क्यों नहीं हुआ? सवाल sirif मोहम्मद हसीन अख्तर का नहीं है ,बलके ऐसे हजारों पेंशन धारी बूढ़ों की अनावश्यक परीशानी से जुड़ा हुआ है। ...........................केस नंबर 2 भी देखते जायेँ । मामला एक हे तरह का है wibhaag अलग ' लेकीन आज़ाद भारत की ghatiya mentility रखने वाले अफसरों की एक तरह की झलक बयान कर रही है Md.masudur rahmaan , sewaniwirt सहायक sankhyiki padadhikaari के पद से मधुबनी से 31/1/2009 को retired हुए , उनकी शीकायत है के ACP का लाभ साल 2009 से ही नहीं मील रहा , जबके इस संबंध में jila sankhiki padadhikari मधुबनी ने संयुक्त nidehak सह संयुक sacheev को patrank 620,dt.7/8/12 को तथा खुद Md masudur Rahman ने 23/8/12 को letter भेज मामले में कर्रवाई करते हुए ACP के बकाया लाभ देने की गुजारीश की मगर आज तक काम का न होना ये साबीत करता है के dakshina की आस में मामले को जान बुझ कर लटका कर रखा गया है । www.biharbroadcasting.com
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kkaushar2007 Admin kkaushar2007 • a month ago −
कहानी AG office bihar की , जब PPO नंबर 396047 के बाबत पूछी गई औ कहा गया के आवेदक का कहना है के मेरा काम niyam कइ अनुसार 60 दिनों में हो जानी चाहिए थी ,पर नहीं हुआ ?तब AG office के नंबर.-06122225634 पर बात कर रहे adhikaari ने कहा के सभी vibhaago कइ लगभग 10 लाख retired लोगों का मामला देखना पड़ता है ऐसे में 60 दिनों में कैसे sambho है ,जब कहा ग गया के DEO office seohar ने अपने patrank 940 और dinank 30//7/13 को ही भेज दीया इस हीसाब से चार महीने होने जा रहे ऐसे में आप का क्याखेयाल है ? तब जनाब कहने लगे पता है न ये Ag ऑफिस है। ? तो क्या AG ओ office को मनमानी करने की छुट है? नोट . AG office के उपरोक्त नंबर पे आज dt. 25/11/13 को 11.40 AM पर की गई थी।
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दलितों के प्रति कानून का रवैया ? आला जात का अदना अफसर हो या आला सोंच में क्या कोई फर्क आया है दलितों और छोटे जात वालों के प्रति ? उच्च जाती की साजीश के शीकार हुए सुनील कुमार पासवान ने बिहार के DGP से मांग की मामले की आर्थिक अपराध शाखा से जांच के लिए मगर जांच दी गई किसे ? थाना के थानेदार को भी नहीं बलके थाना के जमादार को । पढ़ें पूरी कहानी और जाने इंसाफ का हाल ? जात पात और मजहब से कैसे प्रभावित है हमारे देश का नेजाम ? Read more at http://biharbroadcasting.com/blog.php#gJ6EIbHFbSbZ4Jdd.99 - See more at: http://biharbroadcasting.com/blog.php#sthash.IX2XtIMs.dpuf

Posted on: 31-December-2013
बिहार में दलितों , महादलितों और छोटे जात वालों के साथ इंसाफ का क्या हाल है एक नमूना पेश किया जा रहा ,जो साबित करने के लिए काफी है के देश की आज़ादी के बाद छुआ छूत भले ही शख्त कानून की वजह कर मज़बूरी में कम हो गया हो , मगर ऊँची जात वालों का निचे जात वालों के प्रति दिल अभी भी नहीं बदला ,नफरत जो कभी थी जिसका प्रमाण इतिहास के पन्नों में दर्ज है वह आज भी बरकरार है , बड़े जात वाले अफसर ,नेता ,और मुंसिफ आज भी जहाँ मिलता मौका मिलता है अपने power का दुरुप निचे जात वालों को सताने में प्रयोग कर ही डालते हैं , यानी जुल्म का तरीका बदल गया मगर जुल्म और नाइन्साफियाँ आज भी जरी हैं .........तो लीजिये पेश है एक उदहारण ...................। श्री सुनील कुमार पासवान , उत्तरी बारा परसौनी ,प्रखंड फेनहारा जिला पूर्वी चंपारण में पंचायत टीचर हैं , इनकी बहाली 1500 सौ रूपये पर शिक्षा मित्र के रूप में हुई थी , जब सरकार ने 5000 हजार रूपये पर बहाली की घोषणा जैसे ही की उच्च जाती की मुखिया की नियत बदल गई , उच्च जाती के मुखिया ने बड़े जाती आला अफसरों की मिली भगत से सुनील कुमार पासवान को बाहर का रासता दिखा दिया , मुखिया ने अपने पॉवर का मिसयूज करते हुए अपने बेटे भितिजियों को बहाल कर दिया , फर्जी ढंग से बहाल शिक्षकों को बताया जाता है के वेतन भी मजे में मिलते रहे ,दूसरी तरफ कानूनी ढंग से बहाल श्री सुनील कुमार पासवान को सात सालों से आज तक सात रुपया भी नसीब नहीं हुआ , वजह साफ़ उच्च जाती के बैमानों को उच्च जाती के आला अफसरों का संरक्षण प्राप्त होना ही बताया जाता है । उच्च जाती के भ्रष्ट लोगों ने आला अधिकारिओं की रिपोर्ट को गलत साबित करने के लिए त्रि स्त्रिये कमिटी तक बना डाली यानी के किसी भी हाल में चाहे जैसे भी हो एक गरीब को किसी भी कीमत पर गलत साबित करवा दिया जाए ,बैमान कामयाब भी रहे , मगर निचली जाती से संबंध रखने वाले सुनील कुमार पासवान हार कहाँ मानने वाले थे ,गलत लोगों को सबक सिखाने की पहले से ठान चुके थे .....मगर उन्हें क्या पता था के ऊपर पदों पर बैठे जिन आला अफसरों से इन्साफ पाने की आस लगा बैठे हैं उनके दिलों में भी दलितों , महादलितों और निचे जात वालों के लिए किसी दिल के किसी न किसी कोने में चोर छिपा हुआ है । श्री सुनील कुमार पासवान ने बड़े ही उमीद के साथ उच्च पदों पर बैठे बिहार के इमानदार और तेज़ तर्रार आई पी एस और बिहार पुलिस के मुखिया जनाब अभ्यानंद को दिनांक 4/5/13 को पत्र लिख कर पुरे मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा से की थी , अपने पत्र में श्री सुनील कुमार पासवान ने मांग की थी के एक ही वैक्ति दो दो जगह एक जगह स्कूल में टीचर तो दूसरी तरफ डाकपाल की नौकरी कैसे करता रहा ? सवाल यह भी उठाया था के जाली उपस्थिति दिखा कर वेतन का पाने का दावा करने वाले मुखिया पुत्र और भतीजी के खेलाफ आखिर BEO के अनुशंसा के बावजूद आखिर कार्रवाई क्यों नहीं की गई ? किस आधार पर त्रि स्त्रिये कमिटी ने सारे सबूतों को दर किनार कर फैसले लिए ,और पूर्व के दो जांच रिपोर्टों को पलट दिए ? मगर उन्हें क्या पता था इस हिंदुस्तान में लोग तालीम भले ही ऊँची हासिल कर ले ,ऊँची तालीम की बदौलत इस मुल्क के सबसे बड़े ओहदे पर क्यों न विराजमान हो जाए ,मगर इस मुल्क में दिल नहीं बदलते ...........जनाब सुनील कुमार पासवान ने ने मांग की के मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा से कराई जाए , मगर जांच की जिम्मेदारी दी गई थाना के थाना के छोटा बाबू को .........जरा सोंचिये क्या होता है हमारे हिन्दुस्तान में , एक तरफ उच्च जाती के शराब माफिया के शिकायत पर नीची जाती से संबंध रखने वाले DIG के खेलाफ आर्थिक अपराध शाखा का गठन होने में थोडा भी वक़्त नहीं लगता ,तो दूसरी तरफ बात आई ऊँची जाती से संबंध रखने वालों के विरुद्ध आर्थिक अपराध शाखा के जरिये जांच की तो जांच की जिम्मेदारी दी जा रही है किसे ? एक थाना के थानेदार को भी नहीं बलके थाना के छोटा बाबू को .......ऐसे में यह कहना कतई गलत न होगा के इस मुल्क में इन्साफ का पैमाना जात पात और मजहब के अनुसार बदल जाता है , और इस मुल्क में बड़े जात वाले छोटे जात वालों के प्रति आज छुआ छुत सिर्फ कानून के डर से नहीं करते , मगर कहानी वही पुरानी है..............मगर जनाब सुनील कुमार पासवान भी हार नहीं मानने वाले इसी इन्साफ की लड़ाई के बहाने कथित अच्छी छवी वालों के असली चेहरे से नकाब उतारने में लगे हुए हैं , इसके लिए RTI का सहारा लेते हुए दिनांक 19/12/13 को DGP से पूछा है के 1.क्या इस मामले में बड़े लोगों के शामिल होने के कारण आर्थिक अपराध शाखा को नहीं सोंपा गया ? 2. आर्थिक अपराध शाखा से जांच की हामारे जरिये मांग के बावाजूद दुसरे पुलिस पदाधिकारियों को को दिया गया ,इसके पीछे क्या करण है ? 3. फर्जी उपस्थिति को बुनियाद बनाकर वेतन का दावा करने वालों के विरुद्ध कौन सी कार्रवाई की गई? 4.शिकायत पत्र के बुनियाद पर जो भी कार्रवाई की गई है उसकी छाया प्रति भेजने की मांग DGP बिहार से की है ।


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BSEB में जबरदस्त भ्रष्टाचार ? मोतिहारी के शमीम अख्तर को 14 दिन बाद भी नहीं मिला अंक पत्र ,शमीम अख्तर ने 16/12/13 को अंक पत्र के लिए किया था आवेदन , बी एस इ बी बोलाकर आवेदक को आज अंक पत्र नहीं दिया , कारण पूछने पर कह रहा शाम 6 बजे आइये ,सवाल पैदा होता है के बिहार widhyalay pariksha samiti ने आवेदक को बुलया क्यों? क्या ये praminit करने के लिए काफी नहीं के बिहार wdhyalay pariksha samiti में सब कुछ ठीक ठाक नहीं , ?जरा सोंचिये शमीम अख्तर 200 km की दुरी तय कर के आये के board मेरा काम करके रख्खा होगा ,जब शमीम को 6 बजे marksheet isue भी करता हई तो शमीम घर लौटेंगे कैसे ? इसके लिए दोषी कौन? www.biharbroadcasting.com

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घोटालेबाजों के बदन पर जमी गंदगी को साफ करने के लिए बिहार के चंपारण में होने लगा इस्तेमाल केजरीवाल झाड़ू ।देश दुनिया को दिया चंपारण के महादलितों ने नया संदेश।

अरबिंद केजरीवाल का झाड़ू बिहार के पुरबी चंपारण में गुल खिलाने लगा । लगता है डेल्ही के बाद बिहार ही वह स्थान साबित होगा जहां पे इस झाड़ू के प्रयोग से आज़ादी के बाद से इकठ्ठा तमाम तरह की गंदागियाँ साफ़ की जाएँगी .

प्राप्त सूचना के अनुसार बिहार के पुरबी चंपारण के कल्याणपुर प्रखंड के एक घोटालेबाज मुखिया के बदन पर वर्षों से घोटालों से जमी गन्दगी को साफ़ करने के लिए वहाँ के महादलितों ने झाड़ू का प्रयोग प्रयोग कर डाला है । सूत्रों के अनुसार चकिया और मेहसी के बीच में स्थित एक पंचायतन जो उपरोक्त ब्लाक के तेहत आता है ,वहाँ के के घोटालेबाज मुखिया ने पीसीसी और सोलिंग के नाम पर मिलने वाली सरकारी राशी को घोटालेबाज और बेशर्म अफसरों की मिली भगत से गबन कर बैठे थे ,biharbroadcasting.com के जरिये घोटालेबाज मुखिया और अफसरों के गठजोर से चल रहे गोरख धंधे को देश दुनिया और आला अफसरों के सामने लाने के बाद जब जांच के आदेश हुए । जाँच में खामी पकड़ी गई रुपया खा चुके अफसरों ने करवाई के बजाये उसे काम मुकम्मल करने के आदेश दिए .मुखिया पहले अधूरे मन से खस्ताहाल और बदहाल सड़क पर रोलर से ऊँचे नीचे रोड को समतल तो जरुर कर दिए वह मगर कानून को अपने पॉकेट में लेकर चलने वाले मुखिया को इतना गरूर था के सोलिंग नहीं भी कराएँगे तो अब मेरा कोई कुछ नहीं बिगार सकता । मुझे वहां के लोगों ने पुनः फ़ोन पर सूचना दी और कहा के नियमानुसार काम नहीं किया अर्थात सोलिंग करने का नाम नहीं ले रहा , इस बात की जानकारी मैं ने DDC पूर्वी चंपारण को उनके सरकारी मोबाइल पे मामले से औगत कराया ,उनके आदेश पे घोटालेबाज पुनः काम तो शुरू किया ,मगर आदत से मजबूर और हराम खाने के आदी हो चुके मुखिया फिर घटिया काम कराकर पैसे को बचा लेना चाहता था , मगर वहाँ उस पंचायत के जागरूक महादलित इस बार मुखिया के बदन पर घोटालों से जमी गंदगी को साफ़ करने का ठीका उठा चुके थे , दलितों ने कहा काम जब भी होगा नियम के अनुसार ही होगा वरना नहीं होगा , मुखिया जैसे तैसे काम करके निकल जाना चाहते थे,सूत्रों के अनुसार इसी तूतू मै मै में कहा सुनी हुई और अरबिंद केजरीवालकी झाड़ू , दिल्ली के बाद बिहार के इतिहासिक जिला चंपारण के एक पंचायत के घोटालेबाज मुखिया के बदन पर जमी गंदगी को साफ़ करने के लिए दनादन प्रयोग होने शुरू हो चुके थे । और ऐसा कर वहां के दलित चंपारण की सरजमीं पर एक अनोखा प्रयोग करने के साथ ही पुरे देश को एक नई दिशा दे रहे थे।

BBC: Rahul Kumar CASE UPDATE1.राष्ट्रीय मानवाधिकार ...

BBC: Rahul Kumar CASE UPDATE 1.राष्ट्रीय मानवाधिकार ...: Rahul Kumar CASE UPDATE 1.राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मेरी याचिका पर सुनवाई करते हुए कुछ दिन पहले केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्राल...


Rahul Kumar

CASE UPDATE

1.राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मेरी याचिका पर सुनवाई करते हुए कुछ दिन पहले
केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को आवश्यक कार्रवाई करने का आदेश
दिया है।मैंने याचिका में उस प्रिंसिपल पर कई लड़के-लड़कियों के मानवाधिकार
के हनन का आरोप लगाया है।मुझे खुद ऐसे कई लड़के-लड़कियों ने उन्हें प्रताड़ित
किए जाने के बारे में सूचित किया था।
वैसे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को खुद मानवाधिकार से मतलब नहीं है।आज से
दो साल पहले जब अपना व्यक्तिगत मामला लेकर यहाँ पहुँचा था तब भी मंत्रालय
को मामला भेजकर खुद सुनवाई नहीं किया।मंत्रालय ने नवोदय विद्यालय समिति को
भेज दिया और समिति का एक अधिकारी समस्तीपुर नवोदय जाकर प्रिंसिपल के पक्ष
में जांच करके अपना रिपोर्ट दे दिया।राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को इस मामले
की सुनवाई खुद करना चाहिए था लेकिन मंत्रालय को मामला भेज दिया।

2.नरेश कुमार,संयुक्त आयुक्त,NVS HEADQUARTER एक IFS अधिकारी होने के बाद भी काफी भ्रष्ट हैं।NVS का एक सहायक संयुक्त S Chandrasekaran ने मेरा 13 सवाल का जवाब एक साथ एक ही लाइन में दे दिया जबकि सूचना का अधिकार कानून के तहत हरेक सवाल का जवाब दिया जाना चाहिए।चूँकि मेरे सवालों का जवाब इनके पास था ही नहीं इसलिए सारे सवाल का जवाब एक साथ ही दे दिया।समिति ने प्रिंसिपल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किया और इसी से जुड़ा 13 सवाल था।मामले की अपील केन्द्रीय सूचना आयोग में की गई और आयोग ने संयुक्त आयुक्त को जांच करने कहा।संयुक्त आयुक्त ने मुझे और सहायक आयुक्त दोनों को उपस्थित होने कहा।मैंने उपस्थित ना होकर पत्र के द्वारा जवाब भेजा।संयुक्त आयुक्त ने ये कहकर मामले का निस्तारण कर दिया गया कि मुझे वांछित सूचना उपलब्ध करा दिया गया है।लेकिन अपर्याप्त सूचना उपलब्ध कराई गई थी जिसके लिए सूचना का अधिकार कानून की धारा 20(1) के तहत जुर्माना और धारा 20(2) के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकता है।मैंने अपना विरोध पत्र भेज दिया है कि सहायक आयुक्त दोषी है,इसलिए पुनः सुनवाई करे।

3.एम आर चक्रवती,उपायुक्त,NVS PATNA की
धूर्तता देखिए।प्रिंसिपल ने सूचना का अधिकार के तहत मेरा कई सवाल का जवाब
नहीं दिया कि 6 महीने बाद और मेरे द्वारा उसके खिलाफ शिकायत करने के बाद
मेरे खिलाफ किस आधार पर शिकायत की गई,मेडिकल रिपोर्ट से क्या पता चला
आदि।केन्द्रीय सूचना आयोग में मैंने अपील किया और आयोग ने एम आर
चक्रवती,उपायुक्त,NVS PATNA को जांच करने कहा।चक्रवती के द्वारा 26 नवंबर
की लिफाफा वाली मुझे एक पत्र भेजा गया जिसमें 6 दिसंबर को उनके कार्यालय
में सुनवाई के लिए उपस्थित होने की बात कही गई और प्रिंसिपल को भी
उपस्थित रहने के लिए कहा गया।लेकिन ये पत्र मेरे घर पर 6 दिसंबर के बाद
पहुँची।चक्रवती ने 10 दिन बाद ही सुनवाई का तिथि कैसे निर्धारित कर दिया
क्योंकि इतने कम दिन में कई बार पत्र पहुँचती ही नहीं।इतनी जल्दीबाजी इसलिए
दिखाई गई ताकि मैं सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हो सकूँ।अन्यथा कम से कम 20
दिन बाद का तारीख निर्धारित किया जाता।मैंने अपना जवाब भेज दिया है और
यदि मेरी अनुपस्थिति में इन्होंने मामला का निस्तारण कर दिया है तो पुनः
इन्हें सुनवाई करना पड़ेगा।

4.R.K JAIN,जो एक वकील और EXCISE AND CUSTOMS
BAR ASSOCIATION का अध्यक्ष हैं,के द्वारा मुझे एक पत्र भेजी गई है।ये RTI
legal-aid society का संयोजक हैं और RTI Act,2005 (सूचना का अधिकार
कानून) और RTI Rules,2012 का हनन खुद केन्द्रीय सूचना आयोग कर रही है,इसकी
जानकारी इन्होंने मुझे दी है।केन्द्रीय सूचना आयोग के पास दर्ज की गई
शिकायत/अपील का निस्तारण आयोग अपने मेरिट पर सुनवाई किए बगैर और
शिकायत/अपील को संबंधित अधिकारी या उसके वरीय अधिकारियों के पास भेजकर कर
देती है।6 जून 2013 से 3 अक्टूबर 2013 तक केन्द्रीय सूचना आयुक्त राजीव
माथुर ने मेरा पाँच शिकायत का निस्तारण जिसके खिलाफ शिकायत की गई,उसके वरीय
अधिकारी को भेज कर कर दिया।R.K JAIN ने मुझे इस बात की जानकारी दी है कि
28 अक्टूबर 2013 को दिल्ली हाईकोर्ट ने JK MITTAL बनाम Central Information
Commission की सुनवाई करते हुए केन्द्रीय सूचना आयोग को आदेश दिया कि वह
संबंधित विभाग को शिकायत भेजने के बजाय मामले की सुनवाई खुद करे।अब मैं
मामले की सुनवाई खुद आयोग द्वारा की जाने के लिए आवेदन दे सकता हूँ कि वह
अपने आदेश में RECTIFICATION करे और खुद सुनवाई करे।RK JAIN को धन्यवाद।
फ्रॉम राहुल कुमार के fasebook वाल से dt.(26/12/13 )

सुशासन में उंची पकड़ रखने वाले एक घोटालेबाज जनप्रतिनिधि की महादलितों ने की पिटाई ,घोटालेबाज घोटालों के खुलासे के डर से पीटने के बावजूद भी थाने में मामला दर्ज नहीं कराया , मामला पुरबी चंपारण के कल्यानपुर ब्लाक के मनिचाप्रा पंचायत से जुड़ा हुआ , प्रशाशन को मामले की जानकारी मगर मामले में किसी भी प्रकार की कोई करवाई नहीं


पूर्वी चंपारण जिला के कल्याणपुर प्रखंड के मनिचाप्रा पंचायत से आज दिनांक 25/12/13 को ये खबर आई के सत्ताधारी पार्टी समर्थित घोटालेबाज एक जनप्रतिनिधि की पिटाई उस पंचायत के महादलित लोगों के लोगों ने कर दी । यहाँ बताते चले की दलितों के हाथों पिटाई खाया जनप्रतिनिधि कई घोटालों का मास्टरमाइंड है । पिटा गया घोटालेबाज सिर्फ इसलिए बच रहा के उसका संबंध सत्ताधारी पार्टी के नेताओं से है इसी वजह कर कई घोटाला करने के बावजूद किसी भी प्रकार की कानूनी करवाई आज तक नहीं हुई।

पंचायत के वार्ड एक में सर्कार ने सॉलिङ्ग एवं पीसीसी के तेहत रोड बनाने हेतु सरकार ने लाखों रूपये दिए थे , सरकारी रूपये को अपनी बपौती समझ घोटाले बाज हजम कर बैठा ,मामले को www.biharbroadcasting.com ने गंभीरता से उठाया ,आला अफसरों खास तौर से मोतिहारी के DDC को पुरे मामले से रूबरू कराया , तब जाकर DDC के आदेश पर बड़ी मशक्कत के बाद रोड बनी ,बार बार हमारे जरिये मामले को उठाने से आहत घोटालेबाज ने धमकी भी दिए पर धमकी के बावजूद मामला www.biharbroadcasting.com जरिये लगातार उठाया जाता रहा जिसका नतीजा यह हुआ के घोटालेबाज को काम करना पड़ा, घोटालेबाज आखिर आखिर तक यह कोशिश में लगा रहा के कैसे अधिकारियों को मैनेज करके बच जाएँ मगर उसकी एक न चली ,काम के आखरी दिन उपरोक्त पंचायत के वार्ड एक के कुछ महादलितों से टकराव हो गेया ,बताया जाता है के घोटालेबाज जैसे तैसे काम कराकर निकल जाना चाहता था मगर वार्ड एक के कुछ महादलित इस बात पे अड़ गए कि काम जब भी होगा नियम के अनुसार ही होगा वरना नहीं। सूत्रों के अनुसार इसी तूतू मै मै में मार पीट शुरू हो गई ।घोटालेबाज इस लिए पीछे हो गया कयोंके उसे पता था के बात अगर केस मुक़दमा बाजी तक पहुँच गई तो कहीं लेने के देने न पड़ जाएँ । इस लिए पिटाई खाने के बाद आराम से देह हाथ पोंछ कर वहाँ से पुलिस के पास न जाकर घर खिसकने में ही अपने को बेहतर समझा। घोटालेबाज कितना बड़ा मास्टरमाइंड है और उसका सुशासन में किस कदर पकड़ है के उसने सरकारी योजनाओं ,मनरेगा जैसे योजनाओं को लूट खसोट कर इंट की चिमनी ,कई वाहन तक खरीद डाले पर सरकार की मेहरबानी का नतीजा है के उसके खेलाफ आज तक कुछ न हुआ , जो कई प्रश्न खड़े करते हैं ।
नोट : यहाँ बताते चलें की कितनी मोशक्कत और दिक्कत के बाद घोटाला और गबन कर हज्म कर गए रूपये को हम ने www.biharbroadcasting.com के जरिये मामले को हाईलाइट करने के बाद उपरोक्त पंचायत के वरद एक में काम हुआ पुरे मामले से सम्बंधित रिपोर्ट www.biharbroadcasting.com और www.biharbroadcasting.blogspot. com पे देखा जा सकता है और समझा जा सकता है के हमारे देश में कितना मुश्किल है भ्रष्टाचार के खेलाफ लड़ाई और आम जनता को कितनी परिशानी उठानी परती है ,इसलिए मेरा निवेदन है के पुरे मामले को समझने के लिए उपरोक्त साईट पे खबर को पढ़ना न भूलेंगे .