इस देश का निगेहबान क्या -क्या कर और करवा सकता है ? देखिये उदहारण नंबर -2

आई पी सी में धारा 511 तक का ही जिक्र ,पर पुलिस ने लगा दी 566 । जरा देखिये और खुद समझिये मुसलमानों का आरोप पुलिस के विरुद्ध लगता रहा है ,कितना दुरुस्त और सही है ? मुसलान वर्षों से कहता रहा इस्लाम और आतंकवाद दोनों का कोई ताल मेल ही नहीं ,बड़े बड़े दावे होते रहे , इस दावे को जब देश का एक इमानदार चौकीदार आईपीएस अफसर और देश का सच्चा निगेहबान हेमंत करकरे ने , जब देश और हिन्दू मुस्लिम एकता के असल दुश्मन चेहरों पर चढ़ी आतंकवाद के परदे को उठाते हुए मुसलमानों को जैसे ही क्लीन चीट दी , और मुसलमानों के आरोपों को जैसे ही सही साबित की उन्हें शहीद कर दिया गया , जिससे दुनिया खूब अच्छी तरह जानती है ..........।
लीजिये ,देखिये , पढ़िए , समझिये और सोंचिये के हमारे देश की जांच एजेंसियां और पुलिस कौन - कौन सी करतूत कर और करवा कर सकती है ?पेश है मिशाल नंबर -2 (अलोक कुमार ,दैनिक जागरण दिनांक 6/1/14) आई पी सी में धारा 511 पुलिस ने लगाईं 566. अपने कारनामों से हमेशा सुर्खी में रहने वाली पुलिस ने एक नया धमाका किया है । इंडियन पैनल कोड (आई पी सी ) में धारा 511 तक का ही उल्लेख है ,मगर पुलिस न एक मामले में लगा दी धारा 566 । यानी आई पी सी में नई धारा इजाद कर दी । इतना ही नहीं कोर्ट में आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया । आरोप पत्र में आई पी सी से बाहर की धारा देखकर न्यायेधिश परीशान हो गए ,जज साहेब की परिशानी यह है कि वे किस धारा में आरोप गठित करें । पुलिसिया कारनामे से मामला न्यालय में लंबित है ।और आरोपी आर्थिक और मानसिक संकट झेल रहे हैं , 5 साल पूर्व संहौला के महेशपुर गाँव में प्रेमी युगल पकड़ा गया था । लोगों ने युवक का सर मुंडन कर कालिख पोती थी ।इस मामले में किशोर मंडल ने 9 /9/2008 को संहौला थाना में मामला दर्ज कराया था ।महेशपुर पंचायत के सरपंच ब्रजेश महाराज ,गणेश मंडल ,किसन मंडल व अजय मंडल को नामजद किया गया था ।आरोपियों पर तब धारा 341 ,342 ,323,354 ,386 ,387 ,504 ,506 ,34, लगाईं गई थी ,बाद में अनुसंधानकर्ता एस आई घन्शेयाम राय ने इसमें धारा 467 , जोड़ने के लिए सी जे एम् कोर्ट में आवेदन दिया ,न्यालय के आदेश पर राय ने मामले में उपरोक्त धारा जोड़ दी ब्रजेश व अजय को अग्रिम जमानत मिल गई थी । गणेश व किशन जेल भेजे गये थे ,पुलिस ने ब्रजेश ,गणेश ,व किशन के खेलाफ न्यालय में आरोप पत्र दाखिल किया ,ब्रजेश के मुताबिक़ अनुसंधान में आई ओ ने अरुण मंडल ,और शालिग्राम मंडल उर्फ़ शालों के नाम भी जोड़े ,दोनों को अप्राथ्मिकी आरोपी बनाया ,अरुण व सालों भी अग्रिम जमानत मिली थी ,बाद में आई ओ ने दोनों अप्राथ्मिकी आरोपियों समेत प्राथमिकी आरोपी अजय के खेलाफ अन्य धाराओं समेत धारा 566 लगा कर आरोप पत्र दाखिल कर दिया ,ख़ास बात यह है कि आरोप पत्र तभी दाखिल किया जाता है जब उसे देख कर एस एस पी अनुमति प्रदान करते हैं .........................!



उपरोक कहानी और खबर से स्पष्ट हो गया होगा कि ............ वर्दी पहनते वक़्त जो कसमें खाई जाती हैं , वो कसमें शायद याद रहते तो शायद ये नौबत न आती । मालेगांव ,मक्का मस्जिद ,हैदराबाद समझौत एक्सप्रेस और न जाने कौन कौन से एक्सप्रेस में हेमंत करकरे से खुलासे से पहले जिन अधिकारिओं ने जो कारनामे किये ,देश को गुमराह किये ,हिन्दू मुसलमानों में गलत जांच रिपोर्ट के आधार पर जो भ्रम फैलाई गई थी , इस बात की इजाज़त कौन धर्म देता है ? जब धर्म देता ही नहीं तो फिर ऐसे लोगों के विरुद्ध करवाई में कौन सी बाधाएं सामने आजाती हैं ।

Blog - देश की जाँच एजेंसी और पुलिस क्या- क्या कर सकती है ? देखिये ...स्टोरी नंबर.1

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कोर्ट कहता है - साक्ष में बहुत गड़बड़ी है ।इस आधार पर न तो किसी को आजीवन कारावास और न ही किसी को मृत्युदंड की सजा दी सकती है । ' हाई कोर्ट के सतहत्तर पन्नों के फैसले में पुलिसिया गड़बड़ी का विस्तार से जिक्र है । इसमें आरोपियों का नाम बदलने से , उनकी संख्या बढ़ाने ,गवाही में भिन्नता आदि बातें दर्ज हैं ,जिससे आरोपियों को संदेह का लाभ मिल गया । पुलिस ने ऐसा क्यों किया ? ऐसा करने वाले पुलिसकर्मियों के खेलाफ कभी कुछ हुआ है , जो होगा ? क्यों नहीं होता है ? कौन जिम्मेदार है ? कौन किसको रोकता है ? यह राज सत्ता और सिस्टम का गुण है ? ये सवाल भी पूछे जा सकते हैं कि इन तमाम विसंगतियों या गड़बड़ियों के मौजूद रहते निचली अदालत ने कैसे अमौसी नरसंहार के दस आरोपियों को फांसी और चार को आजीवन कारावास की सजा सुना दी थी ? हाई कोर्ट के मुताबिक़ निचली निचली अदालत का फैसला गलत था । तो क्या ऐसी गलतियों के खेलाफ कुछ होता है क्या ? क्यों नहीं होता ? आखिर जब अमौसी के सभी आरोपी बेकसूर थे , तो फिजूल में उनको जेल क्यों भेजा गया ? जेल में गुजारा गया उनका समय उनकी सामाजिक - आर्थिक - मानसिक क्षति जानलेवा प्रताड़ना ........., इन सबका कसूरवार किसको माना जाएगा ? बेक़सूर को जेल भेजने से भी बड़ा अपराध कुछ होता है क्या ? ऐसे ढेर सारे सवाल हैं । लेकिन सबसे खतरनाक बात यह है कि सिस्टम के सभी जिम्मेदार तंत्र इन सवालों से अपने को किनारे रखे हुए है । कोई कुछ नहीं बोल रहा है । निचली अदालत इस तर्क पर चुप है कि हाई कोर्ट पर टिप्पणी उसके बूते की नहीं है । पुलिस , न्यायिक मामला बता कर बिलकुल चुप है । हाँ ,महाधिवक्ता रामबालक महतो ऐसे मौकों पर कही जाने वाली एक बात जरुर कहते हैं - हम हाई कोर्ट के फैसले का अध्यन करेंगे । जरुरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट में अपील होगी ।' और सुप्रीम कोर्ट में ......? पता नहीं ऐसे तमाम कब तक जिन्दा रहेंगे ? शायद पीढियां गुजर जाएँ । एक उदाहरण से जानिये - ----------- 1/12/1997 की रात लक्ष्मणपुर बाथे में 58 लोग मारे गए ।पिछले साल 9/ 10/13 को पटना हाई कोर्ट ने इस काण्ड के सभी 26 आरोपियों को बड़ी कर दिया । राज सरकार , इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई है । 16 साल बीत चुके हैं । और आज भी ;वही सवाल जिन्दा है के आखिर हत्यारा कौन था ?

अमौसी या लक्ष्मणपुर बाथे की यह दास्तान पहली और आखरी नहीं है । इधर ,नरसंहारों के आरोपी लगातार बड़ी होते जा रहे हैं ।  मियांपुर ( औरंगाबाद ) 'जहीरबिगहा (गया ) नरसंहार ........,सबकुछ सामने है । सिस्टम अपना भरोसा बचाएगा ?

जवाब मांगते सवाल

# क्या इस स्थिति को अपनों को खो चुके लोगों के लिए सिस्टम का यह सुझाव माना जाए कि तुम उनकी शरण में जाओ , जो फटाफट न्याय करता है ? यह क्या नक्सलियों को अपनी जमीन को और मजबूत करने देने की खुली छुट नहीं है क्या ?

# क्या यह सच्चाई नहीं है कि ऐसे मसले अराजक तत्यों को हमेशा ताक़त देते हैं ,उत्प्रेरित करते हैं ? हत्याएं इसलिए भी होती कि हत्यारे बचे रह जाते हैं ?

# जब कोर्ट मानता है कि पुलिस ने मुनासिब तरीके से अनुसंधान (जाँच)नहीं किया है ,तो उसके खेलाफ कार्रवाई का आदेश क्यों नहीं होता है ? फिर क्या , कोर्ट के आदेश के आलोक में ऐसा पुलिस मुख्यालय की जिम्मेदारी नहीं है ? ऐसी कार्रवाई का एक भी उदाहरण है क्या ?



# लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार के 11 वर्ष बाद 46 लोगों के खिलाफ चार्जशीत हुई । इतना विलम्ब क्यों ?
(मधुरेश , जागरण पटना ,पटना ,दिनांक - 6/1 14)

सेयासी आतंक , जुल्म व जेयाद्ती के खेलाफ SDPI ने छेड़ा जंग ,देश की आम जनता से माँगा इसमें सहयोग ।

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) ने सेयासी आतंकवाद , जुल्म , जेयाद्ती एवं सामाजिक नाइंसाफी के खेलाफ छेड़ा जंग , इसके नेताओं ने आम देश वासियों से माँगा सहयोग ,कहा जनता दे साथ तो बनायेंगे भूक और खौफ से आजाद हिन्दुस्तान , जनसभा 9 जनवरी 2014 , दिन 11 बजे , स्थान इंद्रा गाँधी स्टेडियम ,पूर्णिया (बिहार)
प्रोग्राम को सफल बनाने के लिए पार्टी बड़े पैमाने पर प्रचार प्रसार में भी लगी है , पार्टी इसके लिए लाखों हैंड्स बिल और पोस्टर का सहारा लेकर आम जनता में अपनी पकड़ मजबूत करने के साथ अपनी बात और पार्टी के अच्छे उद्देश्यों को पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही । ........... पेश है SDPI के एक हैंड्स बिल में उल्लेखित मैसेज का नमूना .............
आज देश सम्प्रदैक एवं फासिज्म के खतरे से गुजर रहा है । गुजरात ,आसाम ,और मुज़फ्फरनगर की तरह सारे देश को सम्प्रदायिक दंगे की आग में झोंक देने की खुफिया साजिश रची जा रही । सम्प्रदैकता , भ्रष्टाचार ,महंगाई , गरीबी , और घोटाले की मार गरीब जनता झेलने को मजबूर है । लेकिन गरीब जनता को आतंकवाद के नाम से गुमराह किया जा रहा है

नीतीश कुमार बिहार में भाजपा और सांप्रदायिक तत्यों को शाशन तक पहुंचाने के अपराध से बच नहीं सकते । इनका हौसला लगातार बढ़ाने के कारण ही आज यह संप्रदायिक तत्य बिहार को गुजरात बना देने की कोशीश कर रहा है .................।

बोद्ध गया और पटना धमाकों के दौरान पकड़े गए मुल्जिमों को गहराई से पूछ - ताछ किये बिना छोड़
कर ,खुफिया एजेंडे के तेहत दुसरे राज्यों की तरह बिहार में भी निर्दोष मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया गया जिसका सिलसिला आज तक जारी है , जबकि हैदराबाद , मालेगांव , और बाकी दूसरी जगहों पर हुए बम धमाकों में गिरफ्तार मुस्लिम युवकों को अदालत बेक़सूर मानते हुए जेल से बाइज्जत बाहर निकाल रही है ...................।

ऐसे तमाम पुलिस व जांच एजेंसी के ऑफिसरों को कठोर सजा दिया जाए जो बेक़सूर मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार कर वर्षों जेल में बंद रखने के जिम्मेदार हैं ...............।

केंद्र व राज सरकार के द्वारा आतंकवाद के नाम पर गिरफ्तार मुस्लिम युवकों को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिये छः माह के अन्दर फैसला सुनाया जाए न कि वर्षों जेल में बंद रख कर उनकी जिंदगी और उनके खानदान वालों की इज्ज़त व आबरू को बर्बाद किया जाए ...............।

बटराहा गाँव जिला अररिया में "एस एस बी " के द्वारा एक महिला समेत चार मुसलमानों को गोली मार कर हत्या कर दिया गया , भजनपुरा फोर्बिस्गंज में एक मासूम बच्चे और गर्भवती महिला समेत चार मुसलमानों को संप्रदायिक तत्यों के इशारे पर पुलिस ने गोली मार दी , पुलिस फायरिंग से पीड़ित लोगों को आज तक इन्साफ नहीं मिला , इसके उलट स्थानिये प्रशाशन भजनपुर के लोगों पर मुक़दमा वापस लेने के लगातार दबाव बनाए हुए है , जमुई में भी स्थानिये शासन और पुलिस की लाप्रवाही के कारण बेगुनाह सात मुसलमानों का क़त्ल हुआ और कातिल अब तक आज़ाद है ,नीतीश कुमार जो सेक्युलर और सामाजिक न्याय का खोखला दावा करते हैं ,इनके शासन में मुसलमानों के साथ निम्नांकित जुल्म लगातार हो रही है ...........।


# अरबी और फ़ारसी जो हमारी धार्मिक व सांस्कृतिक भाषा है इसे मैट्रिक के सिलेबस से 2006 से ही लगातार अलग करने का सफल प्रयास किया जा रहा ..................
#12862 उर्दू टीचर के स्थाई पोस्ट (परमानेंट पोस्ट ) पर गैर जरुरी शर्तें लगाने के कारण लगभग 3,500 उर्दू टीचर की बहाली ही हो सकी ,बाकी बचे लगभग 9000 उर्दू टीचर के पोस्ट पर गैरउर्दूदां को बहाल कर दिया गया जो बिलकुल अन्याय और अत्याचार है ...........................।

# TET उर्दू टीचर के 27,000 पोस्ट के लिए बेतरतीब तरीके से परीक्षा लेने के कारण 12,000उर्दू टीचर की जगह खाली रह गई जिससे पूरा करने में अब तक टाल मटोल स काम लिया जा रहा है ...........।

# 2459 मदरसे जिनमे पिछले 27 सालों से बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से हो रही है ,इन मदरसों को अबतक स्थाई नहीं करने के कारण इनमें पढ़ने वाले हजारों बच्चों को सरकारी कल्याणकारी स्किम का लाभ नहीं मिल रहा है ,और यहाँ पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी वेतन नहीं मिलने की वजह कर दय्निये जीवन गुजारने पर मजबूर हैं ............।

" एस डी पी आई " देश की राजनीति को एक नया राज्नितिक्व विकल्प देने के लिए वजूद में आई , " एस डी पी आई " एक देश वेयापी राजनितिक पार्टी है जो देश के 22 राज्यों में सक्रिय है , " एस डी पी आई " शासन से वंचित दलित आदिवाशी और पिछड़े को एक साझा प्लेटफ़ॉर्म दे रही है ताकि गरीब जनता को राजनितिक शक्ति प्राप्त हो सके , आप सभी से अनुरोध है की इस अत्याचार ,अन्याय को समाप्त करने के लिए एक जनसभा 9 जनवरी 2014 दिन के 11 बजे इंद्रा गाँधी स्टेडियम पुरनिया में होने जा रही है ,जिसमे शामिल हो कर एस डी पी आई को बज्बुत करें

# सम्पर्क :-Social Democratic Front of India (SDPI) रहमत मंजिल शरीफ कॉलोनी ,पटना :- 800006 .................।

# मोबाइल :- 08002836301 , 08228094490 , 08084037460

Blog - इस दुकान में इतनी भीड़ क्यों है भाई ?

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Blog - सेयासी आतंक , जुल्म जेयाद्ती एवं नाइंसाफी के खेलाफ एस डी पी आई ने छेड़ा जंग

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Blog - दलितों के प्रति कानून का रवैया ?

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Blog - जेल जाने के बाद लालू जी का नाम बदल गया है ?

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जश्न ए उर्दू आज , मगर मुख्यमंत्री जनाब नीतीश कुमार बताएं के यह जश्न विकाश की ख़ुशी में मनाई जा रही या विनाश की ख़ुशी में ?



बिहार के मंत्रिमंडल सचिवालय ( राजभाषा ) विभाग ,उर्दू निदेशालय " जश्न ए उर्दू " के नाम से दो दिवसिये समारोह (4 -5 जनवरी 2014 ) , प्रेमचंद रंगशाला में मनाने जा रह है , जिसमे मुख्य अतिथि खुद सी एम ऑफ़ बिहार होंगे ,सम्मानित अतिथि पदम् श्री डा.कलीम अहमद आजीज होंगे .

सूत्रों की मानें तो इस जश्ने उर्दू पे तकरीबन 40 लाख से ऊपर सरकारी राशी का खर्च हो रहा है .

सवाल उठाना लाजमी है के क्या जो चालीश लाख खर्च करके "जश्न ए उर्दू "जो मनाई जा रही उससे हासिल क्या होने जा रहा ? क्या इस खर्चीली "जश्न ए उर्दू " से उर्दू सवैयं उर्दू का कितना भला होगा ? सवाल यह भी उठ रहा है के जब इस 40 लाखी जश्न से उर्दू को जब भला ही नहीं होगा तब इतना बड़ा और इतना खर्चीला जश्न क्यों ?

मुसलमानों का पुराना आरोप रहा है के बिहार में ऐसे सैकड़ों नहीं हजारों उर्दू स्कूल मौजूद हैं जहां उर्दू शिक्षक के पद रहते हुए भी उर्दू शिक्षकों की बहाली नहीं की जा रही , और ऐसा जान बुझकर किया गया या किया जा रहा , आरोप यह भी है के जिन शिक्षकों की बहाली हुई भी तो उनसे उर्दू जुबान (भाषा ) को पढ़ने पढ़ाने का काम न लेकर उनसे दुसरे काम लिए जा रहे , अगर मुसलमानों का आरोप सही है तो सवाल पैदा होता है के क्या मुख्य मंत्री नीतीश कुमार के पास इस बात का जवाब है के उन्होंने इस समस्या के हल के लिए उन्होंने क्या ठोस उपाए किये ?

मुसलमानों का एक और भी आरोप रहा है एक तरफ उर्दू शिक्षकों की बहाली के लिए विज्ञापन भी बच्चों से मांगती है ,दूसरी तरफ उन बच्चों और अभियार्थियों को बहाली से रोकने के लिए तरह के गैर जरुरी नियम ,काएदा कानून के अलावा साजिश का सहारा लेकर टेट जैसे इम्तिहान में सवालों के गलत जवाब भी कंप्यूटर में फीड करती है ताके यह बहाना हो जाए के हमारी सरकार ने तो उर्दू शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए कोशिश तो बहुत की पर क्या किया जाये उतनी मात्रा में दक्ष और काबिल शिक्षक मुस्लिम समुदाय से मिला ही नहीं तो फिर .........?

सवाल पैदा होता है के क्या मुसलमानों का आरोप बेबुनियाद है ? मुसलमानों के आरोप में कितना दम है और आरोप सच्चा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है के कुछ सालों पहले 34 हजार ट्रेंड शिक्षकों की बहाली हुई ,जिसमे बताया जाता है के 12 हजार उर्दू शिक्षकों के पद थे , मुसलमानों का आरोप यह रहा है जिससे मुख्मंत्री नीतीश कुमार बखूबी वाकिफ भी हैं " उर्दू शिक्षकों के पुरे 12 हजार पद पुरे न हो जाएँ सरकार के विशेष आदेश पर 200 नंबर के साथ इंटर पास होना शर्त लगा दिया गया साथ ही trained होना भी लाजमी था जिससे इस कड़े शर्त को पूरा करने वाले अभियर्थि मिला ही नहीं और सरकार ने उर्दू के पद पर सामान शिक्षकों से भर दी " और यह सब सोंची समझी साजिश और प्लान के तेहत किया गया ,कयोंके इससे पहले उर्दू शिक्षक बन्ने के लिए 200 नंबर के साथ इंटर पास होने की शर्त कभी न रही , जब इससे पहले कभी न थी तो सवाल पैदा होता है के आखिर क्यों ऐसा किया गया ,और यही बातें साबित करती है के मुसलामानों के आरोप नाराधर नहीं ।

उसी प्रकार उर्दू स्पेशल टेट में किया गया ,जिस पर मुख्मंत्री ने खुद यह आदेश दिया के तिन दिन के भीतर छात्र हीत में फैसले लिए जाएँ ,मगर बताया जा रहा है के तीन दिन के भीतर क्या आज 20 दिन से जेयादः गुजर जाने के बावजूद आज तक छात्र हित में फैसले नहीं लिए गए ।
सवाल पैदा होता है के जब सरकार एक तरफ रवैया उर्दू के साथ भेदभाव से लबरेज रहा है ,उर्दू दुश्मनी का रहा है ,उर्दू को मिटाने वाला रहा है , वहीँ दूसरी तरफ वही सरकार उर्दू के विकाश के नाम पर 40 लाख खर्च करके " जश्न ए उर्दू " मनाने जा रही सवाल पैदा होता है के क्या सरकार और खास कर मुख्मंत्री नीतीश कुमार को जश्न ए उर्दू मनाने का हक है ?बिहार का मुसलमान सवाल कर रहा है के मुख्य मंत्री पहले जनता को इस बात का जवाब दें के यह जश्न उर्दी के विकाश की ख़ुशी में मनाई जा रही या बरबादी की ख़ुशी में ?

Bihar AG Office का करामात देखिये ,जानकार शर्माजायेंगे आप ।

kaushar2007 Admin • a month ago −
घुस न देने के कारण बुढ़े पेंशन धारी परीशान ? bihar के AG office और arth एवं sankhiki nideshalay vibhaag से जुड़ा हुआ है मामला ....मोहम्मद हसीन अख्तर जो के रिटायर्ड हाई school टीचर हैं , A G office bihar की कार गुजारीयों से परीशान हैं ।
उनका पेंशन के मामले से sambandhit मामले जीसका PPO number 396047 है ,DEO office seohar ने अपने patrank - 940 , दीनांक 30/7/13 को मामले से sambandhit patr भेज दीया मगर लगता है dakshina के िइंतेजा में बैठे हुए AG office bihar के sambandhit adhikariyon और padadhikariyon ने जान बुझ कर मामले को फंसा कर रखे हुए है ,अगर बात dakshina से नहीं जूरी हुई तो सवाल पैदा होता है के लेटर भेजने के चार महीने बाद भी उस sewaniwirt बुढ़े पेंशन धारी का काम अबतक क्यों नहीं हुआ? सवाल sirif मोहम्मद हसीन अख्तर का नहीं है ,बलके ऐसे हजारों पेंशन धारी बूढ़ों की अनावश्यक परीशानी से जुड़ा हुआ है। ...........................केस नंबर 2 भी देखते जायेँ । मामला एक हे तरह का है wibhaag अलग ' लेकीन आज़ाद भारत की ghatiya mentility रखने वाले अफसरों की एक तरह की झलक बयान कर रही है Md.masudur rahmaan , sewaniwirt सहायक sankhyiki padadhikaari के पद से मधुबनी से 31/1/2009 को retired हुए , उनकी शीकायत है के ACP का लाभ साल 2009 से ही नहीं मील रहा , जबके इस संबंध में jila sankhiki padadhikari मधुबनी ने संयुक्त nidehak सह संयुक sacheev को patrank 620,dt.7/8/12 को तथा खुद Md masudur Rahman ने 23/8/12 को letter भेज मामले में कर्रवाई करते हुए ACP के बकाया लाभ देने की गुजारीश की मगर आज तक काम का न होना ये साबीत करता है के dakshina की आस में मामले को जान बुझ कर लटका कर रखा गया है । www.biharbroadcasting.com
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kkaushar2007 Admin kkaushar2007 • a month ago −
कहानी AG office bihar की , जब PPO नंबर 396047 के बाबत पूछी गई औ कहा गया के आवेदक का कहना है के मेरा काम niyam कइ अनुसार 60 दिनों में हो जानी चाहिए थी ,पर नहीं हुआ ?तब AG office के नंबर.-06122225634 पर बात कर रहे adhikaari ने कहा के सभी vibhaago कइ लगभग 10 लाख retired लोगों का मामला देखना पड़ता है ऐसे में 60 दिनों में कैसे sambho है ,जब कहा ग गया के DEO office seohar ने अपने patrank 940 और dinank 30//7/13 को ही भेज दीया इस हीसाब से चार महीने होने जा रहे ऐसे में आप का क्याखेयाल है ? तब जनाब कहने लगे पता है न ये Ag ऑफिस है। ? तो क्या AG ओ office को मनमानी करने की छुट है? नोट . AG office के उपरोक्त नंबर पे आज dt. 25/11/13 को 11.40 AM पर की गई थी।
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