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अच्छे दिन आये अच्छी बात है । हर इंसान अच्छे दिन की तलाश में रहता है । अच्छे दिन किसी के लिए तो किसी के लिए बुरे दिन भी । कोई 27 मई 2014 को खुशियों में चूर था तो सैकड़ों घर इस देश में ऐसे थे जहाँ मातमी सन्नाटा पसरा था । खुशियों में सब शामिल होना पशंद करते हैं मगर किसी के ग़मों में भी शामिल हो लीजिये । यही दुनिया और यही इंसानियत है । ख़ुशी में ऐसे न चूर हो जाएँ की अपनी मौत को भी भूल जाएं । देखिये दुनिया का इंसान अपनी मर्ज़ी से चलाता है मगर दुनिया का बादशाह जिसे हम सुपर पॉवर कह सकते हैं अपने हिसाब से चलाता है ।और कौन जानता है अबकी बार किस की जिंदगी होगी पार।।

सुसाशन या कुसाशन ? शिकायत दर्ज होने के पांच सालों बाद भी कार्रवाई नहीं ।

भारत के प्रथम प्रधान मंत्री की प्रेम कहानी ।

बेशर्म मीडिया के सम्पादको सुनो

मुस्लिम नवजवानों की रिहाई के बाद गुजरात सरकार और नरेंदर मोदी कट घेरे में हैं , इस मामले में जांच एजेंसी और अमित शाह को दोषी मानते हुए जांच बैठा कर निर्दोष लोगों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई होनी चाहिए ।( के .सी तेयागी )

24 मार्च 1971 से पूर्व आये तमाम बांग्लादेशी हिन्दुस्तानी शहरी ।

मोदी के P M पद पर बैठने के साथ ही बारी मस्जिद की जगह राम मंदिर बनाने , धारा 370 ,समान्य नागरिकता कानून को लागू किये जाने की चर्चा के ठीक एक रोज पहले आई देश के कई राज्यों में आई जलजलों के झटके ने न केवल सनसनी फैला दिया है बल्कि ये सोंचने पर मजबूर कर दिया है की क्या ताक़त के नशे में चूर अगर सरकार कुछ करती है तो क्या देश में प्राकृतिक तबाही से पूरा देश हिलने वाला है ? क्या केंद्र की मजबूत सरकार इन तबाहियों से भी भारत की लाखों जनता को बचा लेगी ? कहते हैं ऊपर वाला जागाने घर घर नहीं जाता । जलजले की झटके को चेतावनी समझिये ।

केंद्र सरकार की भ्रष्टाचार से जुड़ी खबर अब नहीं चलेगी ।