देश में आतंक के लिए जिम्मेदार कौन ?

डाक्टर मोहम्मद आबेदुर्रह्मान (चंद्वार्बस्वाह )उर्दू दैनिक दिनांक 28/8/2012 पिन्दार में प्रकाशित
फसीह महमूद दरभंगा के एक छोटे से गाँव का रहने वाला है ,पेशा से इंजिनियर है और सऊदी अरब में मोलाजेमत करता था,और पिछले कई सालों से वहां रह रहा था,सिर्फ छुटियों में में ही हिंदुस्तान आया करता  था,वह इस साल मई के महीने में लापता हो गया था,उसकी wife का कहना है के सऊदी अरब में कुछ हिन्दुस्तानी और सऊदी पुलिस उसे उसके घर से ले गए थे इसके बाद उसका कोई पता नहीं था यहाँ तक के उसकी wife को अकेले वतन वापस आ जाना पड़ा .उसकी पत्नी ने यहाँ आकर उसकी तलाश के लिए भारतीय वजीर ए खारजा और और दाखेला (home  ministry एंड foreign ministry )में दरखास्त दी .और देश के कई प्रदेशों के मुख्मंत्री और पुलिस प्रमुखों से पुछा के कहीं फसी महमूद किसी जुर्म में संलिप्त तो नहीं ?इसपर तमाम के तमाम ने उसे जवाब दिया के था के न उन्हें फाही का अता पता मालूम है और न ही वह किसी जुर्म में wanted है लेकिन 19 मई 2011 को अरब news ने फसीह महमूद जिस कंपनी में काम करता था उसके मैनेजर के हवाले से खबर दी के सऊदी पुलिस ने फसीह को हेरासत में लेने के बाद हिन्दुस्तान भेज दिया है और उसके जहाज इत्यादि के संबंध में हिन्दुस्तानी सरकार को सूचना दे दी और हिन्दुस्तान पहुचने के बाद फसीह को पाकर लिया गया .इस खबर और सरकार के तरफ से फसीह की मालूमात न के जवाब की वजह से उसकी पत्नी ने फसीह की जानकारी हासिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किये तो सरकार ने सुनवाई के एक दिन पहले ही फसीह की गिरफ़्तारी के लिए रेड कार्नर नोटिस किया के फसीह महमूद दहशतगर्दी हथियारों और धमाकाखेज पदार्थों के मामलों में हिन्दुस्तान को वांटेड है .सुनवाई के पहले फसीह महमूद के अते पते से अज्ञानता जाहिर करने वाली सरकार के प्रतिक्रिया इत्यादि के विशलेसन की तफसील अली सोहराब के ब्लॉग sohrabali1979.2012/blogspot .in /3510_post -.blog html blog पर भी देखी जा सकती है .उसके बाद ये भी खबर आई थी के सऊदी प्रशासन ने हिन्दुस्तानी सरकार को फसीह से पूछ ताछ के लिए इजाजत दी थी लेकिन हवालगी के लिए उसके खेलाफ पुख्ता सबूत मांगे थे .ये खबर भी आई थी के सऊदी प्रशासन हिन्दुस्तान के जरिये उपलब्ध कराइ गई सबूत से सहमत नहीं है (.rediff .com ।september 17)बहर हाल अब कहा जा रहा है के 22 अक्तूबर 2012 को फसीह दिल्ली आया और गिरफ्तार कर लिया गया .मिल्ली गजट ने अपने ताज़ा अंक में( 1 से15 अक्तूबर)में लिखा है के इन पांच महीनो के दौरान भी फसीह के खेलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं उपलब्ध नहीं कराये गए बलके जेयदा अरसा बीत जाने के कारण सऊदी अरब ने हिन्दुस्तान भेज दिया .सऊदी अरब से अबू हमजा की हिन्दुस्तान हवालगी के बाद फसीह महमूद की पहली गिरफ़्तारी है और अपनी नौइयत का पहला केस है .लेकिन इस नौइयत में भी वह अकेला नहीं है . 26 अक्तूबर को NDTV ने अपनी वेबसाइट पर बैंगलोर की रहने वाली फातिमा खान की एक प्रेस कांफ्रेंस की खबर प्रकाशित की थी .जिस में उन्हों ने कहा के सऊदी अरब के मिलिट्री हॉस्पिटल में मुलाजिम उनके बेटे डॉक्टर उस्मान गनी को हिन्दुस्तान पुलिस के आग्रह पर सऊदी अरब में 8 अक्तूबर को गिरफ्तार किया गया है .उन्हों ने माजिद ये भी कहा के 2008 में 

हुबली में कुछ लोगों की गिरफ़्तारी के बाद प्रदेश पुलिस ने उनके बेटे को बुलाया था और उनको धमकी दी थी के  अगर उनहोंने inteligence का साथ नहीं दिया तो उनका कैरियर बर्बाद कर दिया जायेगा .यानी डॉक्टर उस्मान पहले से ही पुलिस की नजर में थे .इस मामले में भारतीय सरकार के तरफ से माकूल जवाब सामने नहीं आया है ,जबके बैंगलोर पुलिस ने इस मामले में भी कोई जानकारी होने से इनकार किया है लेकिन इस खबर के दो दिन बाद 28 अक्तूबर को इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी ऑनलाइन प्रकाशन में एक रिपोर्ट प्रकाशित की है  के बैंगलोर  पुलिस मोहम्मद अब्दुल मजीद ,डॉक्टर  उस्मान गनी खान ,और मोहम्मद शहीद फैसल उर्फ़ जाकिर उर्फ़ ओस्ताद के खेलाफ रेड कार्नर नोटिस जरी करने की तैयारी में है इसके लिए  स्थानिये कोर्ट से इन तीनों के खेलाफ गैर जमानती वारंट भी हासिल कर लिए गए हैं .इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में आगे यह भी कहा है के पुलिस सूत्रों ने डॉक्टर उस्मान गनी  की सऊदी अरब में गिरफ़्तारी पर कमेंट करने से इनकार किया  है लेकिन कहा है के ये केस भी फसीह महमूद के केस से मिलती जुलती है .इसके बाद रोजनाम उर्दू टाइम्स 1 नवम्बर 2012 ने रिपोर्ट दी के सऊदी सरकार ने उस्मान को रिहा कर दिया के उन पर शक बिलकुल गलत निकले फसीह महमूद और डॉक्टर उस्मान दोनों के केस में एक बात मेल खाती है के रेड कार्नर जरी होने से पहले ही सऊदी अरब में गिरफ्तार कर लिया  गया सऊदी अरब में उनकी गिरफ्तारी के बाद रेड कार्नर नोटिस जरी किया गया .इसका मतलब है दाल में कुछ काला है .उपरोक्त तथ्यों के आलोक में दिमाग में सबसे पहला  सवाल ये है के इस बात की क्या गारंटी है के पुलिस के आरोप सही हैं ?अब पुलिस भरोसा के लायेक नहीं रही ,पुलिस कहती कुछ और है और हकीक़त रहता कुछ आयर है।अभी तक पुलिस ने कई मुस्लिम नौजवानों को पक्के और कट्टर खतरनाक दहशतगर्द बना कर पेश किया है लेकिन जब उनपर मुकादमा तो काबिले के एहतराम अदालत ने उन्हें न सिर्फ सबूत  के अभाव में रेहा कर दिया बलके जबरदस्ती इल्जाम लगाने ,मंगढ़ात सबूत पेश करने सबूत बदले के लिए पुलिस की आलोचना भी की .तालीमयाफ्ता मुस्लिम नौजवानों की गिरफ़्तारी हिन्दुस्तान में कोई नई बात नहीं रह गई है,ये सिसिला दरअसल SIMI पर पाबन्दी लगने के बाद से समय समय पर जरी है .शुरू में तालीमयाफ्ता मुस्लिम नौजवानों को सिमी के नाम पर गिरफ्तार किया गया .फिर बम धमाकों के सिलसिले में उनपर देश दरोही के इल्जेमात लगे इसके बाद इंडियन मुजाहेदीन के नाम पर उनकी गिरफ्तारियां की गईं और अब अपने घर वालों की खुशहाली के लिए वतन से कोसों दूर रहने वालों की बारी लाई गई है .दहशत गर्दी के नाम पर मुसलमानों की पढ़ी लिखी नई नस्ल के साथ  जो कुछ हो रहा लगता है के वह बहुत गहरी साजिश के तेहत monazzim तरीके से हो रहा है .

दहशतगर्दी और उसके खेलाफ जंग के पहले ही दिन से मुस्लिम कौम यही कहती रही है के अगर मुस्लिम नौजवान अगर वाकई दहशतगर्द हैं ,दहशतगर्दी की हिमायत करते हैं,दहशतगर्दी की बढ़ावा देते हैं या दहशतगर्दी की किसी भी किस्म की मदद करते हैं तो वह हमदर्दी के काबिल नहीं .और अगर वाकई सम्मिलित हैं तो उन्हें उनके लिए सजा मिलनी चाहिए .हमारा कहना सिर्फ इतना है के उन्हें मुजरिम ठहराने से पहले दुरुस्त और भेदभाव रहित पुरे इन्साफ के साथ ये फैसला होना चाहिए के वाकई वह मुजरिम हैं भी के नहीं .अगर उनपर दहशतगर्दी के इल्जाम सही हैं तो उन्हें अपनी सफाई का पूरा हक मिलना चाहिए .और उनकी हेफजत भी होनी चाहिए .यही नहीं अगर वह अदालत से बेकसूर बरी हो गए तो उन पुलिस वालों और इंटेलिजेंस के अधिकारीयों के खेलाफ़ भी सख्त कारवाई होनी चाहिए जिन्होंने बेगुनाह को गिरफ्तार किया और अगर ये साबित होता है के उन्होंने अपने पॉवर का गलत इस्तेमाल करते  हुए तासुब और साजिश की बुनियाद पर मुस्लिम नौजवानों के खेलाफ झूठे मुक़दमें बनाये तो उनपर कानूनी करवाई भी होनी चाहये।



आदर्नीये
            ADHYAKCH राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग/अध्यक्छ राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग/अध्यक्छ बिहार राज्यामानवाधिकार आयोग
            दिल्ली हाई कोर्ट ब्लास्ट मामले में जाँच एजेंसियां निम्नलिखित कारणों से खुद जाँच के दाएरे में आगई हैं
hindustan times ने दिनांक २२/९/२०११ ख़ुफ़िया bureau के हवाले से खबर परकाशित की थी के हमलावर हुजी थे ,काम को ५ लोगों ने अंजाम दिया ,हमलावर सारे के सारे बंगलादेशी थे,५ में से दो को जाँच एजेंसियां 1.मद alla-ur- rahman 32, एवं मौलाना सैफुल शेख ४० के रूप में पहचान की थी, hindustan times में छापी कबर के अनुसार,खबर में यह भी कहा गया था के हमलावर देश से बहार भागने में भी सफल हो गए,वही दूसरी तरफ ईमेल  को बुनियाद बनाकर कश्मीर के कुछ नौजवानों के गिरफतारी से जूरी खबर दिनांक २३/९/२०११ के hindustan times में खबर छापी थी,वहीँ  तीसरी तरफ २६/११/२०११ को हिंदुस्तान  हिंदी २६/११/२०११ को हिंदी में  दिल्ली हाई कोर्ट  ब्लास्ट मामले में मधुबनी से दो गिरफ्तार सुर्खी से खबर  पर्काशित  थी,उपरोक्त तथ्यों क्र आलोक में बहुत सारे सवाल उठने शुरू हो गए हैं जिसका जवाब पूरा देश जानना चाहता है.
   जब  हमलावर बंगलादेशी थे तो फिर जम्मू कश्मीर के युवको की गिरफ़्तारी क्यों?जब ईमेल ही गिरफ़्तारी का आधार बाकि ईमेल भेजने वालों को किस बुनियाद पर झट पट clean cheat दे दिया गया यहाँ यह भी प्रश्न उठाना सवाभाविक है के दिल्ली ब्लास्ट मामले में कुल कितने ईमेल आये थे अनेक ईमेल आने के बावजूद कश्मीरी नौजवानों में जाँच एजेंसियां ने क्या लिया के कश्मीरी नौजवानों को दिल्ली ब्लास्ट से जोर दिया गया सवाल यहभी उठता है के कश्मीरी नौजवानों को अगर कुछ देर के लिए गुनाहगार मान लेने की esthiti  में बिहार के युवकों की गिरफ़्तारी कहाँ तक जायज है?दिल्ली  ब्लास्ट से जूरी गिरफ्तारियों सम्बंधित एक और मजेदार और हास्यास्पद बात times of  india ने दिनांक ९/१२/२०११ को same पेज पर  दो खबर पर्काशित किये एक खबर जो बिहार से छापी थी दिल्ली ब्लास्ट में गिरफ्तार आफताब आलम को हिन्दुस्तानी बताया वहीँ दूसरी खबर जो दिल्ली से छपी थी आफताब आलम को पाकिस्तानी करार देते हुए भारत में कैसे आफताब आलम ने परवेश किया पूरी दास्ताँ पर्काशित की थी ,अब जरा सोंचा जाये जब एक हिन्दुस्तानी को साजिशपूर्ण तरीके से पाकिस्तानी बनाया जा सकता तो क्या एक सरीफ को सैतान (आतंकवादी)नहीं बनाया जा सकता?
       दैनिक जागरण दिनांक ११.१२.११ ने- मधुबनी से निर्गत हुआ था विवेक का द्रिविंग licence  सुर्खी से एक छोटी सी खबर पर्काशित की थी जिसमे लिखा था के दिल्ली पुलिसे ने विवेक मिश्रा को दिनांक २२/११/११ को  २ लाख  के जली नोट ,फर्जी  DL  जिसपे  किसी कातिल  उर्फ़ सज्जन की फोटो लगी बताई गई है, साथ ही खबर में यह भी लिखा था के दिल्ली पुलिसे ने उसके पास से मोहम्मद seraj  नाम के युवक का पासपोर्ट भी बरामद होने की बात खबर में लिख्खा है अब जरा सोंचिये के आखिर क्यों इस विवेक मिश्रा को मीडिया एवं दिल्ली पुलिसे ने दुनिया छुपा कर रख्खा?आखिर क्यों मीडिया विवेक की कहानी को छुपा कर रख्खा ?सवाल यह भी है के आखिर  विवेक मिश्रा के पहचान से जूरी खबर को दुनिया के सामने  न पेश करने का मकसद क्या था?यह सवाल सबसे महापूर्ण है.विवेक मिश्रा के DL पे किसी मुस्लिम युवक का फोटो होना  और साथ ही मुस्लिम युवक के नाम का ही  बना पासपोर्ट विवेक मिश्रा के पास से बरामद होना साथ उसके पास से जाली नोट का बरामद होने के बावजूद विवेक की कलि करतूत से दुनिया से रूबरू न करना क्या पाप नहीं ?साथ विवेक को हाई लाइट न करने के पीछे विवेक के पास से बरामदमुस्लिम युवको के  कागजात को बुनियाद बनाकर कही दिल्ली पुलिस झूठी क्रेडिट  लेने के चक्कर में जानबूझकर मामले  को कहीं आतंकवाद से तो नहीं न जोर दी,माजी की कहानियां और तजरबे इस मामले में तल्ख़ रहे हैं,इसलिए भरोसा नहीं होता,और सवाल यह भी के दुनिया का ४२०  आदमी किसी माशूम आदमी के नाम पर DL और पासपोर्ट बना ले ऐसी इस्थिति में जो बनाया वह गुनाहगार होगा या वह आदमी जिसने फर्जी तरीके से दुसरे का बना लिया ? अब देखना होगा  कही माशूम मुसलमानों को फँसाने के गरज से तो कही विवेक मिश्रा मुस्लिम युवको के दस्तावेज अपने पास तो नहीं रखते थे , हमारे देश के सविधान  निर्माताओ ने सविधान बनाते समय इस बात का खेयाल रख्खा था के दोषी बच जाये  पर किसी माशूम को सजा न मिल पाए मगर अफ्शोश तब होता है जब दोषी तो बच निकलते हैं लेकिन माशूम बेचारा सूली पे चढ़ जाता है,मनवाधिकार  आयोगों को एक और काम जरुर करना होगा जिस मामले में माशूम लोग  बरी हो गएं हो उन मामलों में उन अफसरों पे उसी धारा के तहत मुकदमा चलवाना चाहिए जिसके के तहत आरोपी आदमी पर दोष साबित होने के बाद चलता,साथ ही उन दागियों का NHRC  के साईट पर दोषियों को बचाने वालों, मशुमों को फँसाने वालों का  उनके पद नाम ,नाम और करतूतों का पूरा बेयोरा डालना होगा,अगर ऐसा होने लगा तो मेरे खेयाल से इस देश में आतंकवादी गतिविधियाँ खुद बा खुद लगाम लग जायेंगी  सवाल पैदा होता है के मशुमो के अधिकारों का हनन देश में और न हो क्या मानवाधिकारों की रक्छा के नाम पर रोटियां तोरने वाले लोग क्या इसके लिए तैयार हैं ?
                                                                                             मोहम्मद  कौशर नदीम
                                                                                 सवतंत्र  पत्रकार  एवं  मानवाधिकार कार्यकर्ता  

          Suprim court ke purwa neyaeyedhish ewam ewam wartaman press council of india ke chairman katju saheb ka  bihar ke sandarbh mein susasan mein sanch ke dawe purntya sach sabit honay lagay hain.
Bihar ke purbi champaran se jo khabray aarahi hai,raj sarkar ki juban band karsakti hai,          Bihar ke purbi chmparan mein BPL & ANTYODAY aur IAY mein bhari garbari ki baat parkash mein aarahi hai,purbi chmparan ke kalyanpur block ke manichapra panchayat ke ek samaj sewi sri ramji bhagat ne kuch BPL &ANTYODAY labharthiyon ke kuch kupan ki chaya parti kuch original copy udaharan sawpup bheje hain jinse pata chalta hai ke purbi champaran ke  kalyanpur parkhand ke tahat aanay walay grampanchyat mein PDS dukandaron aur jila ke aala adhikarion ki mili bhagat se saal 2008 ke 7 maah yani june,july,august,september,octuber,november,december maah ke is baat ki gawahi deraha hai uprokt jila jila code 11 kupan sankheya 0301467 aise yeto sirf udaharan matr hain aise hajaron kupan garibon haathon mein rahgaye aur anaaj uthao hogeya ,usi parkar wars 2009 mein 10 maah yani january,february,march,may,june,july,august,september,octuber,novemb          

क्या कोई आदमी दोनों योजनाओं का लाभ -इन्द्रा आवास  योजना  और diesel  अनुदान का लाभ  ले सकता है ?उपरोक्त  सवालों के जवाब  को जानने को बेताब freelance journalist - कम-

मुल्क के गद्दार ?


मुल्क की रक्षा हो न सकेगी झूठे बोल और नारों से 

इस मुल्क को खतरा लाहक है इस मुल्क के ही गद्दारों से 

दहशतगर्द का झूठा ख़ुफ़िया तंत्र की चाल है ये  

दामन अपना दूर ही रखना इनके तंद शरारों से 

संसद भवन पर हमला होना , इंटेलिजेंस की गफलत है ।

कौन है इसके पीछे , आखिर किन लोंगों की शरारत है ?

इसकी जाँच से अब तक कोई राज  न अफशां हो पाया ।

ऐसा लगता है इसके अन्दर कोई सेयासत है ।

बटला हाउस में मारे जाएँ लोग निहत्ते गोली से।
लुत्फ़ उठाएं वर्दी वाले कब तक खून की होली से ।
काम करे शैतान कोई,इल्जाम आये माशुमों पर ।

जुर्म छुपाया जायेगा कब तक उनकी झूटी बोली से ।

समझौता एक्सप्रेस पर हमला किस ने किया ये बतलाओ ?
मालेगांव,नानडेर पर हमला कैसे हुआ ये बतलाओ ?

मक्का मस्जिद में हमला,अजमेर की घटना याद करो ।

जामे मस्जिद में गर कौन मिला ये बतलाओ । 

कौन वतन का रखवाला है और यहाँ गद्दार है कौन ?

कौन है सच्चाई पे कायेम जालिम बद किरदार है कौन ?
हेमंत करकरे ने दिखला दिया प्रग्या, पुरोहित का चेहरा ।
बात शरीफ समझने की है गुंडों का सरदार है कौन ?

             मोहम्मद शरीफ कुरैशी 

               संपर्क - 9431496545

नोट -उपरोक्त कविता उर्दू दैनिक पिन्दार के दिनांक 24/11/2012 के अंक में पेज no -5 पे प्रकाशित हुई थी 


कसाब को फांसी दी गई या बाहर भेज दिया गेय ?

          पिन्दार  उर्दू अखबार  में दिनांक 26 9.2012 को  प्रकाशित खबर आपके सामने पेश है
करकरे को कसाब ने नहीं हिन्दुत्वादी दहशतगर्दों ने क़त्ल किया ---ब्रिगेडियर सावंत का बयान , 26/11 के दहशतगर्द पे लगा सवालिया निशान
मुंबई 25 नवम्बर( एजेंसी )

पूर्व मेम्बर पार्लियामेंट और सवराज्य पुक्श के राष्ट्रीय ADHYAKCH ब्रिगेडिअर सुधीर सावंत ने कहा है के अजमल कसाब को फांसी  देकर सरकार ने कोई बरा कारनामा अंजाम नहीं दिया है .इस केस के असल मुजरेमिन मास्टरमाइंड और और COSPIRATOR डेविड HEADLY और THAUAR  HUSAIN  RANA  अमेरिका में हैं ,जब तक उनको हिंदुस्तान लाकर उनके खेलाफ करवाई नहीं की जाती उस वक़्त तक 26/11 के प्रभावितों को इंसाफ नहीं मिलेगा न ही इन्साफ के तकाजे पूरे होंगे .सुधीर सावंत ने मुंबई से प्रकाशित होने वाले दैनिक उर्दू टाइम्स से बातें करते हुए कहा के जिस ख़ुफ़िया ढंग से कसाब को फांसी दी गई उस से शक व शुबा पैदा होता है के क्या वाकई कसाब को फांसी दी गई है या फिर उसको कहीं भेज दिया गया।उनहोंने कहा के अगर कसाब को फांसी दी गई है तो उसकी लाश कहाँ है .सरकार जिस तरह से राजदारी बरत रही है उससे अन्दाजा होता है के कुछ छुपाने की कोशिश की जारही है .ब्रिगेडिअर सुधीर सावंत ने कहा के 26/11 वारदात की आर में ATS के तत्कालीन प्रमुख हेमंत करकरे को शहीद कर दिया गया और आज तक सरकार ने यह बताया के उनकी  हत्या कैसे हुई ?उनको कौन सी गोली लगी ?उनहोंने कहा के हेमंत करकरे को 26/11 की आर में बकायेदा क़त्ल कराया गया था।उनको कसाब ने नहीं बलके हिन्दुत्ववादी आतंकवादियों ने हत्या की जिन्हें इसबात का पूरा मौका उपलब्ध कराया गया था .ब्रिगेडियर सुधीर सावंत मजीद बताया के  बिहार के भुतपूर्व MLA राम बाला ने 26/11 हमलों के सिलसिले में  हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में PETITION दाखिल की लेकिन सरकार के तरफ से आज तक जवाब नहीं दिया गया .ब्रिगेडियर सुधीर सावंत ने  मजीद ये भी कहा के कामा हॉस्पिटल में जो आतंकवादी फंस गए थे उसको भागने का मौका एक पुलिस अफसर सदानंद दाते ने उपलब्ध कराइ जो उसवक्त कामा हॉस्पिटल में मौजूद थे और अभी जॉइंट पुलिस COMMISSIONER  लॉ एंड ऑर्डर हैं .सुधीर सावंत ने माजिद ये भी कहा के शहीद हेमंत करकरे ने हिंदुत्ववादी दहशतगर्दों के कब्जे से जो दस्तावेज बरामद की थी जो वीडियो क्लिप्स वगैरा जमा की थी वह कहाँ है ? आखिर उनकी जाँच क्यों नहीं हो रही ?सुधीर  सावंत ने मजीद ये भी कहा है के उन्हों ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट PETITION दायर कर के इल्जाम लगाया है के आठ आतंकी वारदातों की IB ने गलत जाँच की है .इसकी सही तरीके से जाँच कराइ जाये .उन्हों ने दावा किया के ताज, ओब्राए, और नरीमन हाउस पर हमला करने वालों की संख्या 10 नहीं 25 थी .उन्हों ने मांग कि है के सरकार 26/11के आतंकी हमलों  से सम्बंधित असल हकीक़त मंजरे आम पर लाये और इस मामले में जो अस्थानिये लोग शामिल थे उसकी जाँच कराइ जाये .उन्हों ने कहा के लोकल माफिया के शामिल हुए बगैर आतंकी वारदात की कोई घटना नहीं हो सकती . 26/11 वारदात के COSPIRATOR DAVID HEADLY  को मुंबई  का दौरा कराने वाला चाँद मदार नामी एक सख्श था जिसे बाद में मार दिया गया .सावंत ने कहा के साबिक पुलिस अधिकारी SM मुसर्रफ ने अपनी किताब  WHO KILLED KARKARE यानि करकरे को किसने मारा में जी सवाल उठाये थे सरकार ने उसका जवाब अभी तक नहीं दिया है .उन्हों ने कहा के वह 26 जनवरी 2013 को मुंबई में एक महा पंचायत करेंगे और 26/11 हमलों की जाँच अपने तौर पर खुद करेंगे .

बदले बदले से सरकार नजर आते हैं

मालूम नहीं किस फिल्म का गाना है : बदले बदले से सरकार नजर आते हैं,हम को बर्बादी के आसार नजर आते हैं ,आज के परिद्रिश्य में ये गाना नरेंदर मोदी , और भाजपा ,और RSS के रवैए पर पूरी तरह फिट और हीट मालूम परते हैं,3 अक्टूबर के दैनिक पिन्दार के पहले पेज पर गुजरात के मुख्यमंत्री से सम्बंधित दो प्रमुख खबरें प्रकाशित हुई थी जिस में पहली खबर थी  मोदी ने सोनिया गाँधी से माफी मांगी और दूसरी खबर थी के इसी गाँधी के कातिल के गिरोह का सरगना ये कहता है के गान्धियाई  नजरिये से फ़ायदा उठाना जरुरी है .कहीं ऐसा तो नहीं के 2 अक्तूबर को सूरज पशचिम से उगा था।कयोंके मोदी जैसे मगरूर और गंधियाई नजरियात का विरोधी इन्सान कहता है के गंधियाई आइडियोलोजी के जरिये आज भी संसार दहशतगर्दी ,और ग्लोबलवार्मिंग  का मुकाबला किया जा सकता है .फिर वह सख्स  कहता है के आलमी दहशतगर्दी से बचाने  के लिए   आज भी गंधियाई राह हमवार हैं .नरेंदर मोदी जैसे सफाक कुरुर जालिम सम्प्रदाईक ,भाईचारा  और अमन के दुश्मन की जुबान से ऐसे शब्दों का निकलना न सिर्फ हैरत अंगेज है बल्कि अपनी अजुबियत में सातों अजूबे कमतर नजर आते हैं .पहली खबर के मोदी ने सोनिया से माफ़ी मांगी पढने और सुनने में अजूबा लगा .ये माफ़ी किसलिए मांगी कयोंके उसने सोनिया गाँधी पर इल्जाम लगाया था के वह अपने इलाज के लिए अमेरिका गईं थी तो उनके इलाज पर  सरकारी खजाने से अठारा सौ अठासी करोर रूपये खर्च हुए  थे जो कहीं से भी न इखलाकी और न सवैंधानिक तौर पर दुरुस्त था।  उस  सख्स  ने 

 उसका जवाज  ये   पेश  किया  tha  ke ek shaksh ne RTI se ye malum kiya tha.lekin jab us sakhs se jab media ne malum kiya to usne wajeh taur kah diya ke ye sab narendar modi ke dimag ki upaj hai .hum ne jo RTI ke jariye jo malum karne ki koshish ki narendar modi ke beyan dene tak uska jawab he nahi mila tha .uske baad jo jawab mila esme saaf taur pe kaha geya hai ke sarkar ka ek dhela bhi kharch na hua .uske beyan se narendar modi tilmila uthe .aur ruswaiyon ke khauf se usne soniya gandhi se mafi mangli.ye mafi usne itni assani se nahi mangi hai .
usay bakhubi malum hai sidhe taur pe sonia gandhi se takrane ka anjaam keya ho sakta hai?
gujraat me tarkki ka dhidhora pitne wale narendar modi ke chehre par jitne naqaab chadhe the wah sab dhire dhire sarak rahe hain .wah jis bekhaufi wa ferakhdili se bharashtachar ka jor hai ab wah chupi hui nahi aur na he gujrat qatleaam ki tahqiqaat khatm hui hai,iske alawa abhi unpar muqadma baqi hai aur wah bhi gujrat se bahar maharashtra me.narendar modi ko ye yaqin hia ke ATS ko to kharida ja sakta hai lekin suprim court ko nahi.fir CBI ki specail team ko apna kaam anjaam de rahi .jo barahe rast PM ke daftar se sambandh hai aur suprim court ke parti jawab de hai .in tamam sachchaiyon ne jumla taur pe narendar modi
ke sar se hat dharmi aur garur ke aaseb ko thori der ke liye dur kardiya.
warna koi soch bhi nahi sakta tha ke narendar modi jaisa jaisa tanashah apne kiye par sharminda hokar kisi se mafi bhi mang sakta hai .agar mamla sonia gandhi ke alawa aur kisi ka hota to ye mamla tul pakar kar kahan jata kuch kaha nahi ja sakta tha.keyon ke  narendar modi  ki pust panahi ke liye  RSS iski puri bhagwa toli maidan ne jang me he kud jati  jisme tor for ke liye sansar bhar mein mashur bjrang dal bhi hai
BJP ke karjkarta ka to kuch kahna he nahi.keyonke filhal narendar modi RSS ke chahete hain.saath he bhjpa aur RSS ko ye yaqin hai ke BJP bagair modi ke 2014 ke aam election me kamyaab nahi ho saki. isliye    
RSS ki puri koshish hai ke narendar modi ko PM ke post ke liye dawedar banakar pesh kiya jaye.
lekin bhajpa ke kuch durandesh logon ki nigahein dekh rahi hian ke agar wakai aisa hua to fir jo kasar baki hai wah puri hojayegi.
                                                                                                         (बेनाम गिलानी )
   पिन्दार दिनांक 15.11.2012 पटना में प्रकाशित शेष भाग फिर कभी



जाँच हुई तो फंसे गे कई वरिये अधिकारी?

क्या बिहार सरकार के इस दावे में दम है?के वह नक्सल प्रभावित जिलों में गरीबों को सरकारी योजनाओ लाभ आसानी से मिले सरकार हर संभव प्रयास किये हुए,बिचौलिए 

पर  विशेष नजर rakhkhi जा रही है ,मगर बिहार के नक्सल प्रभावित एक जिला से जो खबर मिल रही है वह सरकारी दावे की पोल खोलने के साथ ही कई वरिये पदाधिकारियों को जाँच के दाएरे में ला दिया है

    पूरबी चंपारण के फेन्हारा   पर्खंड के बार परसौनी पंचायत के रहने वाली 

1.जैलस देवी, पति  राजेन्दर पासवान 2 .रम्भा देवी ,पति सुनील दोनों 

का घर पंचायत के गबन्धी  गाँव से है वित्तिय वर्ष 2005-2006 में सरकार ने बेघर होने के कारण एक एक  अदद  घर बनाने के लिए पैसे 

दिए ,लाभार्थियों ने बताया है के एक  एक  टेलर ईंट देकर ठग दिया गया 

जब इस संबध में तत्कालीन पर्खंड विकास पदाधिकारी से लिखित शिकायत 

करने उनके दफ्तर  करने  गई तो रिसीविंग नहीं दिया गया,रिसीविंग देने के 

नाम पर तत्कालीन BDO बिगर गए जैसा के लाभार्थियों का कहना है,डांट 

डपट करते हुए कहा के करवाई चाहये या रिसीविंग?कारवाई  और आशवासन के बिच 7साल   बीत गए पर आज तक इन्साफ न मिला 

किस अधिकारी ने क्या कहा ?

जब इस संबध में वर्तामान BDO से उनके सरकारी मोबाइल पे दिनांक 

7.11.12 को उनका मंतव जानने की कोशिस की गई तो उनका कहना था के जब तक आज 

की तारीख में लाभार्थी लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराएगा तब तक मै 

करवाई नहीं करूँगा .

डीएम पूर्बी     चंपारण और आयुक्त तिरहुत का भी कुछ इसी प्रकार का बयान था 

जब प्रधान सचिव  से बात की तो उन्होंने एक अधिकारी का मोबाइल नंबर और नाम बताते हुए कहा 

के आप आदित दास नाम के अधिकारी से बात कर लीजिये वे सिर्फ इंद्रा आवास का मामला ही देखते हैं,जब उनसे बात की गई तो कहा  SMS के जरिये मामले के बारे में बताइए कारवाई अवश होगी,sms  कर ने के बाद संपर्क किया तो उन्होंने कहा  के उपविकास आयुक्त को  SMS को forward  करते हुए कारवाई करने को कह दिया है,सूचना है के अबतक किसी पदाधिकारियों ने इन गरीबो का हाल पूछने नहीं गए हैं।

               

पुरबी चंपारण में PDS के लाखों कूपन जाली ?

बिहार के पुरबी चम्पारण के कल्यानपुर ब्लॉक के सिर्फ  manichapra पंचायत में 185 से अधिक PDS कूपन लावारिस अर्थात मिर्तकों ,फर्जी लोगों

 के नाम पर मौजूद होने के बावजूद दोषियों पर करवाई हेतु अबतक कोई प्रयास नहीं की गई है,जबके इस सम्बन्ध में बिहार के खाध  एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री श्री शेयाम रजक सहित विभाग के प्रधान सचिव सहित तमाम वरिए पदाधिकारियों को उनके सरकारी मोबाइल पे SMS भेज सूचित भी कर दी गई है,इसके बावजूद करवाई न होने से जनता में तरह तरह की  बातें  की जाने लगी हैं,और ये सवाल सुरु हो गया है के आखिर विभाग के आला अघिकारी फर्जी कूपनो पर सरकारी अनाजो का उठाओ वर्षो से करने वालों पर कारवाई करने से क्यों कतरा रही ?इन सवालों का जवाब जनता जानने  को बेताब है।

पुरबी चंपारण का DEO office ने नितीश कुमार के सुशासन को किया दागदार ?

मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार का सुशासन एक बार फिर कटघेरे में खरा होता मालुम दिखाई पर रहा,वजह बना    है,    इस     बार बिहार का education department ,बतायाजाताहै के पूर्बी चंपारणके फेन्हारा पर्खंड के श्री सुनील कुमार पासवान जो एक  गरीब और अनुसूचित जाती से सम्बन्ध रखते हैं,इनसे सरकार ने 6   सालो से भी जेयदा समय तक पंचायत शिक्चक   (shikchak )   के रूप में काम कराया  जब बात वेतन  भुगतान  की आई     तो       उन्हें अवैध करार दिया जा रहा श्री सुनील कुमार उपरोक्त जिला एवं पर्खंड के बारा परसौनी में 2003 से ही लगातार काम करते आ रहे,इनके वेतन पे रोक साल 2006 में  लगा दी      गई ये   कहते हु के  इनका तीसरा पुनर्नियोजन नहीं हुआ इसलिए इनकी बहाली अवैध है 

यहाँ बताते चले के जो भी शिक्चक (shikchak )para teacher  के रूप में कार्ज कर रहे थे सरकार ने अपने एक आदेश

 के जरिये उन्हें पंचायत shikchak मान चुकी ऐसी हालत में श्री सुनील कुमार पासवान और बाकी पंचायत shikchak      अवैध किस कानून के तेहत हुए?एजुकेशन डिपार्टमेंट के अधिकारीयों को इसबात का जवाब देना होगा अगर कोई कहे के इन सभी को बहुत पहले ही हटा दिया गया था उन्हें  ये साबित करना होगा के किस बुनियाद पर और हटाने का आधार क्या     था? यहाँ बताते चले की पूर्व  एवं वर्तमान BEO      के      रिपोर्ट    ने  साबित  कर दिया है के   साल 2003से 2012तक इनका  काम   संतोष 

जनक रहा है इसकी पूष्टि स्कूल adhyakch ने भी की है ,यही रिपोर्ट  त्रिअस्तरिये जाँच टीम जिसे तत्कालीन जिला पदाधिकारी ने गठित 

की  थी      टीम    के   रिपोर्ट    पर  सवलिया    निशान  लगाने    के  साथ ही team के लोगों को भी जाँच के दाएरे में लाती है   और    अगर

 मामले की निगरानी जाँच हुई तो टीम के  लोगों को कई  कारणों   से 

जेल जाने की नौबत तक आ सकती है ,पहली वजह तो  ये  है  के  जब  DM ने जाँच टीम गठित की   तो  रिपोर्ट   DM  को   ही    आगे की करवाई हेतु सोंपा जाना था,मगर बताया जाता है के इस मामले में  ऐसा नहीं किया गया,क्यों नहीं  किया  गया? मामले की जाँच कर रहे  BIHAR HUMAN RIGHTS COMMISSION    में उठने वाला है,जानकारों की माने तो रिपोर्ट इसलिए नहीं   सोंपी  गई  क्योंके के जाँच team को इस बात का  दर था के जाँच  में   ऐसा    कुछ भी ठोस सबूत  नहींमिल पारही थी  जिससे की श्री सुनील कुमार पासवान और बाकी 

पंचायतshikchako को हटाया जा सके,मगर मुखिया चुनाव 2006 की घोसना हो जाने के कारन आचार संहिता औधि में मुखिया पुत्र 

और उनकी भतीजी की बहाली रद्द होने की पूरी खतरा थी ,जानकारों  का मानना है के त्रिअस्तारिये जाँच टीम मिली भगत पहले से थी इसी वजह कर मुखिया और उसके रिश्तेदारों को बचाने के लिए रिपोर्ट को दबा  दिया  गया,अब जबके के मामले की जाँच बिहार मानवाधिकार आयोग कर रहा त्रिअस्तारिये 

जाँच रिपोर्ट का  समाप्त हो चूका , बिहार मानवाधिकार आयोग के 

आदेश के आलोक में होरहे जाँच के बाद अपना गला फंसता देख वरिये पदाधिकारियों ने  मुखिया के   रिश्तेदारों की  बहालियों को  रद्द   कर दिया है,सवाल यहाँ ये पैदा होता है के जब पूर्व BEO ने बहाली को गलत

साबित  कर चुकी थी  उस  समय  बहाली  क्यों  नहीं रद्द की गई ?जिस अवैध बहाली को 2007और उससे पहले रद्द होनी चाहिए  थी  वह 

2012में क्यों हो रही ? अब जबके बहाली  रद्द हो चुकी ऐसी  हालत  में मुखिया  पर FIR  दर्ज क्यों  नहीं  हो  रही    यहाँ    बताते    चले    की 

त्रिअस्तारिये जाँच टीम को और कुछ न मिला तो श्री सुनील कुमार 

पासवान  को  मुखिया के जरिये  स्कूल  के  प्रधानाचार्ज   के   जाली 

hastakchar को आधार बनाकर हटाने सही साबित करना भी मुखिया 

और जाँच टीम की मिली भगत को दरसा रहा,चुके संबधित  HM   ने 

अपने      hastakchar          को      जाली       करार       देते         हुए

कानूनी करवाई की मांग भी की है  इसके   बावजूद       जालसाजों   पे 

कारवाई का नहोना  DEO ऑफिस के कारनामों को उजागर करती है 

के पुरबी चम्पारण के deo ऑफिस गरीब और इमानदारों के लिए किस तरह दुश्मन की भुमिका निभाती तो दूसरी तरफ अमीर और पैसा वालों 

के लिए किस तरह  दोस्त की भूमिका में खरी रहती है?

बरमेश्वर मुखिया का कत्ल और सीबीआई जाँच

ranweer sena के चीफ बरमेश्वर मुखिया के क़त्ल को मुद्दा बनाकर इसपर सियासत तेज़ करदी गई है वह लीडर जो बर्मेस्वर मुखिया को कभी अच्छी निगाह से नहीं देखते थे इस कत्ल के बाद अब तो वह भी इसके गम में आंसू बहाने में लगे हैं और यज साबित करना चाहते हैं के इस मुखिया ने अपनी जिंदगी में सैकरों हरिजनों और दलितों का जो सामूहिक कत्लेआम किया और अपनी रणवीर सेना के जरिये उनकी बस्तियों को घेरकर उन में आग लगा दी वह बिलकुल जाएज थी वह रणवीर  सेना जो हरिजनों और दलितों की दुश्मनी में बनायीं गई थी उस के संस्थापक के क़त्ल पे आज खुद उन ही हरिजनों और दलितों के लीडरान आंसू बहा रहे हैं और इसपर अपनी सियासत कररहे हैं .इन सियासी लीडरों की करतब बाजी से ये साबित होता है के यहाँ की सियासत में दोगलापन भरा हुआ है और सियासत दानो की कोई स्थाई सीधी रह नहीं है .सवाल ये पैदा होता  है के बरमेश्वर मुखिया क्या था?उसके जिन्दा रहने से राष्ट्र को क्या फायेदा था?और उसके क़त्ल से राष्ट्र को क्या नुकसान हो गया ?इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं इभी बरमेश्वर मुखिया के क़त्ल के बाद जो उनके हम्दर्स सामने आये हैं वह उनके हमदर्द हरगिज नहीं हैं वह तो उस क़त्ल  पर अपनी सियासत कररहे हैं .बर्मेस्वर मुखिया के बारे में आम खेयाल यही है के इस से बरा कातिल बिहार की तारीख में आज तक नहीं गुजरा है जिसने सौ से जेयादा इंसानों को बे रहमी से क़त्ल किया फिर इतने बरे कातिल से इतनी हमदर्दी क्यों की जा रही है ?इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता के बरमेश्वर मुखिया किसी खास पार्टी खास सदस्य था .लेकिन इस बात को रहस्य रखा गया और किसी भी पार्टी ने उसे अपना नहीं कहा .उसके क़त्ल के बाद इस राज पर से पर्दा नहीं हटा के वह किस पार्टी के लिए काम करता था और रणवीर सेना के बनाने का मकसद क्या था?बरमेश्वर मुखिया का संबध किस पार्टी से था अगर इस राज पर से पर्दा हट जाता तो सी .बी .आई .की जाँच में बहुत जेयदा आसानी ही जाती और इस कटीले आज़म का रिश्ता किन किन लोगों से था और ये के इस इस क़त्ल में कोण ग्रुप सरगरम रहा ये तमाम बातें सामने आजतीं  और बर्मेस्वर मुखिया के हामियों का सुराग मिल जाता .लेकिन अब जबके सी बी आई की जाँच शुरू हो चुकी है तो इसकी उमीद जरूर है के कुछ ऐसी बातें सामने आएँगी जिन्हें लोग अबतक नहीं जानते थे और इसका भी जरुर खुलासा ही जाएगा के उसका किस सियासी पार्टी से संबध था.और वह किन लोगों की सियासत का मोहरा था और आज जो लोग उसके नाम पर मातम कर रहे हैं वह कौन लोग हैं .बमेश्वर मुखिया का क़त्ल तो होना ही था उसे कोई रोक नहीं सकता था .ये तो तै है के हर किर्या की प्र्तीकिर्या होता है जिन सैकरों अफराद का मुखिया ने क़त्ल किया था उसके रद्दे अमल में उसका भी क़त्ल होना था .लेकिन अहम् सवाल ये नहीं है के उसने दूसरों का क़त्ल किया इसलिए उसका भी क़त्ल होगेया सबसे अहम् सवाल ये है के बर्मेस्वर मुखिया किस सियासी ग्रुप  के इशारे पर हरिजनों और दलितों के गाँव के गाँव  जला देता था और बेदर्दी से उनका क़त्ल करता था .सी बी आई पर दोहरी जिम्मेदारी लागु हो गई है के बर्मेस्वर मुखिया के क़त्ल की तहकीकात के साथ साथ ये भी मालुम करे के बर्मेस्वर मुखिया ने जिन तीन सौ लोगो का क़त्ल किया वह किसके हुक्म से और उसका हुक्म देने वाला कौन था अगर ये बात भी खुल कर सामने आ गई तो मुखिया के क़त्ल पर घर्याली आंसू बहाने वालो की साडी सियासत   सामने आजायेगी और किसी भी मामले के बाद ये सियासत करना भूल जायेंगे
note.उर्दू आखबार पिन्दार के सम्पद्किये पेज पे पर्काशित दिनांक।10.06.12 से ली गई है .