हजरत उमर रजिअल्लहो अन्हो ने एक मर्तबा चोर का हाथ इसलिए नहीं काटा था क्योंके कहत साली का दौर(अकाल का समय )था .......,चोरी न होने के कारण पर जब कंट्रोल नहीं था तो हाथ काटने का हुक्म(आदेश )कैसे दिया जाता .....यहाँ तो हर तरफ बलात्कार होने और करने के कारण का दरवाजा खुला हुआ है .....आस पास हर तरफ कारण खुले हुए है ऐसी सूरत में इस्लामी कानून का पहला काम सजा नहीं ,बलके उसको रोकना है ,इसलिए हिन्दुस्तान के मौजूदा समाज में सिर्फ इस्लामी सजा का मुताल्बा (मांग) करना ना काफी ,हम जब तक उन कारणों पर गौर नहीं करेंगे ,और सिर्फ आँख मुंद कर बे लेबासी ,मर्द की दादा गीरी .पुलिस का रवैया ,सरकारी बे तवज्जहि को सिर्फ जिम्मेदार मानते रहेंगे तो न हालात कंट्रोल होंगे और न रेप का मामला रुकेगा ....
अज़ीमुल्लाह सिद्दीकी
कसाब को फाँसी मोदी को क्यों नहीं ?हिन्दुस्तानी है तो हिन्दुस्तानी के मारने पर देश की गद्दी ,अगर मुल्क में इन्साफ है तो कसाब की तरह मोदी को भी फांसी मिलनी चाहिए।(ऑवैसी )
हैदराबाद ,27 दिसंबर (एजेंसी )आंध्र प्रदेश में मज्लिशे इत्तेहादुल मुस्लेमीन के M.L.A अकबरुद्दिब ओवैसी के जरिये एक सभा में की गई भरकाऊ भाषण पर जबर्दश्त विरोध शुरू हो गया है .ओवैसी ने एक सभा में भाषण देते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंदर मोदी की तुलना मुंबई के दहशतगर्दाना हमला (आतंकी हमला )मामले में फांसी पर चढ़ाये गए अजमल कसाब की थी ,मोदी को तनकीद का निशाना बनाते हुए ओवैसी ने कहा के इस बच्चे अजमल कसाब को फाँसी पर लटका दिया गया ,ठीक किया उसने 200 बेक़सूर लोगों की जान ली थी लेकिन 2000 मुसलामानों के क़त्ल के गुनहगार नरेंदर मोदी को फाँसी क्यों नहीं दी ,अपने भाषण में ओवैसी ने कहा के पाकिस्तानी है तो हिन्दुस्तानी के मारने पर फांसी ,हिन्दुस्तानी है तो हिन्दुस्तानी के मारने पर देश की गद्दी ,अगर मुल्क में इन्साफ है तो कसाब की तरह मोदी को भी फांसी मिलनी चाहिए।
नोट :---उपरोक्त समाचार उर्दू दैनिक पिन्दार के दिनांक 29/12/2012 से ली गई है .
जाफरानी( भगवा )दहशतगर्द की गिरफ्तारी
मंगल 18 दिसंबर 2012
उर्दू दैनिक पिन्दार
नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी( NIA )ने मध्य प्रदेश के नागदा इलाके से समझौता एक्सप्रेस और हैदराबाद की मक्का मस्जिद में बम प्लांट करने वाले भगवा दहशत गर्द राजेंदर उर्फ़ समुन्दर को धर दबोचने में बाला आखिर कामयाबी हासिल करली ,जो एक अरसा से फरार चल रहा था , उपरोक्त एजेंसी के मुताबिक राजेंदर ने शुरूआती पूछ ताछ के दौरान इस हकीक़त का एतराफ किया है ,उसने हिन्द-पाक दरमयान चलने वाली रेल गाड़ी समझौता एक्सप्रेस और मक्का मस्जिद (हैदराबाद )में बम रखे थे जिनके धमाकों से कम से कम सौ आदमी मारे गए थे ,उसने एन आई ए को ये भी बताया के वह मध्य प्रदेश के हातूर इलाके की आर एस एस यूनिट का सरगर्म (एक्टिव)कारकून था और आर एस एस का एक प्रचारक सुनील जोशी उसे दहशत गर्दाना सरगर्मियों की तरबियत (प्रशिक्षण ) के लिए जम्मू ले गया था ,यहाँ पर ये अम्र काबिले गौर है के 18 फ़रवरी 2007 को समझौता एक्सप्रेस में कुल चार बम धमाके हुए थे जिनमे 66 लोग मारे गए थे मरने वालों में औरतों और पाकिस्तानियों की तादाद जेयादा थी ,जबके मक्का मस्जिद में 28 मई 2007 को देसी नौइयत के बमों के धमाके में तक़रीबन एक दर्जन लोग मारे गए थे ........एन आई ए के जांच कर्ताओं को यकीं है के राजेंदर पहलवान से जब गहराई से पुच ताछ की जाए गी तो आर एस एस के उस सीनियर लीडर के गिरेबान तक पहुंचना आसान हो जायेगा जिसके बारे में एजेंसी को शक है के उसका हाथ उस दौरान देश के विभिन मस्जिदों ,दरगाहों ,व खानकाहों में हुए मुसलसल (लगातार)धमाकों में हाथ रहा था ,एन आई ए के ताफ्तिश्कारों की बहरहाल तारीफ़ की जानी चाहिए के देर से सही उसने बाला आखिरअसल मुजरिमों की गर्दन दबोचने में कामयाबी हासिल करली ,वरना आम तौर पर गैर मुस्लिमों से जुरे मामले की लिपा पोती कर दी जाती है ,राजेंदर से इब्तदाई (शुरुआती )पूछ ताछ में ही कई सनसनी खेज सच्चाई सामने आये हैं ,इसके अलावा ये भी हकीक़त भी मंजरे आम पर आ गई है के संघ परिवार की जमातें हजार इनकार करे लेकिन इस बात से इनकार मुम्किन नहीं के मुल्क में भगवा दहशतगर्दी का वजूद है ,आर एस एस समेत दीगर हिन्दू दहशत गर्द जमातों की भरपूर सरपरस्ती (संरक्षण )प्राप्त है ,दूसरी चौंका देने वाले जिस सच्चाई पर से पर्दा उठा है वह ये है के जम्मू में हिन्दू इनतहापशंदों को दहशत गर्दाना सरगर्मियों में हिस्सा लेने के लिए बकायेदा जेहनी (मानसिक)और जिस्मानी (शारीरिक )ट्रेनिंग प्रशिक्षण देने का अड्डा काम कर रहा है ,समझौता एक्सप्रेस ,और मक्का मस्जिद के सिलसिले में ये पहली गिरफ्तारी नहीं है ,इससे पहले भी साध्वी परग्गेया समेत कई अफराद पकड़े जा चुके हैं ,इन लोगों की निशादेही पर ही राजेंदर की गिरफ्तारी अमल में आई है ,अब ये
उर्दू दैनिक पिन्दार
जाफरानी( भगवा )दहशतगर्द की गिरफ्तारी
नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी( NIA )ने मध्य प्रदेश के नागदा इलाके से समझौता एक्सप्रेस और हैदराबाद की मक्का मस्जिद में बम प्लांट करने वाले भगवा दहशत गर्द राजेंदर उर्फ़ समुन्दर को धर दबोचने में बाला आखिर कामयाबी हासिल करली ,जो एक अरसा से फरार चल रहा था , उपरोक्त एजेंसी के मुताबिक राजेंदर ने शुरूआती पूछ ताछ के दौरान इस हकीक़त का एतराफ किया है ,उसने हिन्द-पाक दरमयान चलने वाली रेल गाड़ी समझौता एक्सप्रेस और मक्का मस्जिद (हैदराबाद )में बम रखे थे जिनके धमाकों से कम से कम सौ आदमी मारे गए थे ,उसने एन आई ए को ये भी बताया के वह मध्य प्रदेश के हातूर इलाके की आर एस एस यूनिट का सरगर्म (एक्टिव)कारकून था और आर एस एस का एक प्रचारक सुनील जोशी उसे दहशत गर्दाना सरगर्मियों की तरबियत (प्रशिक्षण ) के लिए जम्मू ले गया था ,यहाँ पर ये अम्र काबिले गौर है के 18 फ़रवरी 2007 को समझौता एक्सप्रेस में कुल चार बम धमाके हुए थे जिनमे 66 लोग मारे गए थे मरने वालों में औरतों और पाकिस्तानियों की तादाद जेयादा थी ,जबके मक्का मस्जिद में 28 मई 2007 को देसी नौइयत के बमों के धमाके में तक़रीबन एक दर्जन लोग मारे गए थे ........एन आई ए के जांच कर्ताओं को यकीं है के राजेंदर पहलवान से जब गहराई से पुच ताछ की जाए गी तो आर एस एस के उस सीनियर लीडर के गिरेबान तक पहुंचना आसान हो जायेगा जिसके बारे में एजेंसी को शक है के उसका हाथ उस दौरान देश के विभिन मस्जिदों ,दरगाहों ,व खानकाहों में हुए मुसलसल (लगातार)धमाकों में हाथ रहा था ,एन आई ए के ताफ्तिश्कारों की बहरहाल तारीफ़ की जानी चाहिए के देर से सही उसने बाला आखिरअसल मुजरिमों की गर्दन दबोचने में कामयाबी हासिल करली ,वरना आम तौर पर गैर मुस्लिमों से जुरे मामले की लिपा पोती कर दी जाती है ,राजेंदर से इब्तदाई (शुरुआती )पूछ ताछ में ही कई सनसनी खेज सच्चाई सामने आये हैं ,इसके अलावा ये भी हकीक़त भी मंजरे आम पर आ गई है के संघ परिवार की जमातें हजार इनकार करे लेकिन इस बात से इनकार मुम्किन नहीं के मुल्क में भगवा दहशतगर्दी का वजूद है ,आर एस एस समेत दीगर हिन्दू दहशत गर्द जमातों की भरपूर सरपरस्ती (संरक्षण )प्राप्त है ,दूसरी चौंका देने वाले जिस सच्चाई पर से पर्दा उठा है वह ये है के जम्मू में हिन्दू इनतहापशंदों को दहशत गर्दाना सरगर्मियों में हिस्सा लेने के लिए बकायेदा जेहनी (मानसिक)और जिस्मानी (शारीरिक )ट्रेनिंग प्रशिक्षण देने का अड्डा काम कर रहा है ,समझौता एक्सप्रेस ,और मक्का मस्जिद के सिलसिले में ये पहली गिरफ्तारी नहीं है ,इससे पहले भी साध्वी परग्गेया समेत कई अफराद पकड़े जा चुके हैं ,इन लोगों की निशादेही पर ही राजेंदर की गिरफ्तारी अमल में आई है ,अब ये
हकीक़त पूरी तरह उजागर हो गई है के देश में भगवा दहशतगर्दों का एक मजबूत और मरबूत नेटवर्क काम कर रहा है जो विभिन स्थानों खासकर मुस्लिम एबादत गाहों (पूजा स्थालों )और आवामी मुकामातों (पब्लिक
प्लेस )बम धमाके कर के कथित तौर पर मुस्लिम संगठनों को बदनाम करने की साजिश में मलौविश (संलिप्त)है इस नेटवर्क में कट्टर हिन्दू संगठनों के अलावा कुछ पुलिस ,सिविल ,और फौजी हुक्काम भी शामिल हैं ,हमारे खेयाल में मरकजी हुकूमत (केंरिये सरकार )बिल खसूस केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंधे की आखें अब पूरी तरह खुल जानी चाहिए ,हम उमीद करते हैं के आगे एन आई ए को आजादाना तौर पर काम करने और तफ्तीश को सही दिशा में आगे बढ़ाने का मौका दिया गया तो भगवा दहशतगर्दी के ढांचें को बाआसानी मुन्हदिम(विध्वंश )किया जा सकेगा
उर्दू हिन्दुस्तान के नजरिये की मोकम्मल तर्जुमान(प्रतिनिधित्व),भोपाल में जस्टिस काटजू की कयादत में उर्दू वेरासत कारवां का इस्तकबाल
भोपाल 23 दिसंबर (यू एन आई )उर्दू न सिर्फ एक खालिस हिदुस्तानी जुबान है जिसने इस मुल्क की सोंधी मिट्टी में जन्म लिया बलके इसने अहद (जमाने )में हिन्दुस्तान की तहजीबी (सांस्कृतिक )विरासत को जला बख्शी और कसरत कशरत में वहदत (अनेकता)में एकता के नजरिये को अमली रूप दिया लेकिन बद्किश्मती से मुल्क के बटवारे के बाद एक साजिश के तहत इसे एक मख्शुश फिरका (एक खास समुदाय से )जोड़ कर इसकी तरक्की की राहें रोकने की कोशिश की गई ,इसलिए अब वक़्त आ गया है के इसके साथ होने वाली नाइन्साफियों का एजाला (दूर )किया जाए ,इन खेयालात का इज़हार मुख्तलिफ मजाहेब (विभिन्व धर्मों )और समाजी व सियासी पसमंजर रखने वाले दानिश्वरों व अहले बशिरत ने किया ......रियासत मध्य प्रदेश की राजधानी और नवाबों की नगरी भोपाल में प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया (PCI )के चेयरमैन और मोह्सिने उर्दू जस्टिस (रिटायर्ड )मारकंडे काटजू की सरबराही (प्रतिनिधितिव )में आने वाले "उर्दू वेरसत कारवां "का इस्तकबाल करते हुए इन अहम् शख्सियतों ने इस बात पर बरमला इज़हार भी किया के इस पुर आशूब दौर में जब बाज ताक़तें (कुछ ताकतें )हिंदुस्तान के ताने बाने को बिखेरने की शाजिशों में मशरूफ (लगे )हुए हुए हैं उर्दू का फरोग लाजमी है ,कयोंके "हिंदुस्तानियत "के नजरिये की मोकम्मल तर्जुमानी (प्रतिनिधितिव )अगर कोई जुबान कर सकती है तो वह है उर्दू रियासत के गवर्नर श्री राम नरेश यादव ने कल से पहर "उर्दू वेरसत कारवां "की आमद पर ख़ुशी का इज़हार करते हुए कहा के उर्दू इस हिन्दुस्तान एक अज़ीम (महान)जुबान (लैंग्वेज)है जो यहीं पैदा हुई और परवान चढ़ी है ,आज़ादी की लड़ाई में इस जुबान की कुर्बानियों को हरगिज फरामोश नहीं किया जा सकता ........हिन्दुस्तान की दो बड़ी कौमों हिन्दुओं और मुसलामानों की तक्शिम करने की साजिश के तहत उस वक़्त मुल्क पर काबिज अंग्रेजों ने लेसनी बुनियादों (जुनान की बुनियादों )झगड़े कराये, पिपुल्ज यूनिवर्सिटी के खचाखच भरे हॉल में कावां के अराकिन, यूनिवर्सिटी के छात्र और मोअज्जज शहर और दीगर सामेइन से खाताब (संबोधित )करते हुए गवर्नर मौसूफ़ ने कहा के दिलों को जोड़ने वाली शिरीं जुबान उर्दू से संबधित गलत फहमियों को दूर करने का जो बीड़ा जस्टिस काटजू और उसके साथियों ने उठाया है वह कबीले तारीफ़ है और मुल्क की वहदत व कौमी एक्जहती की खातिर इस तहरीक में हर हुब्बूल वतन (देश भग्त )हिन्दुस्तान को शामिल होना चाहिए।क़ब्ल अजिं जुमा की शाम को यहाँ उर्दू कारवां का इस्तकबाल करते हुए मध्य प्रदश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बात का यकीन दिलाया के उनकी रियासत में उर्दू के साथ किसी प्रकार का भेद भाव नहीं बरता जायेगा ,उर्दू से सम्बब्धित जो भी मामले उनके सामने लाये जाएँगे वह उन्हें हल करने की हर मुमकिन कोशिश करेंगे .
नोट :-उपरोक्त खबर दैनिक पिन्दार के 24/12/2012 से ली गई है
BIHAR HUMAN RIGHTS COMMISSION
9, Bailey Road
File No BHRC/COMP. 552/09
Case of BAL GOVIND PRASAD
This proceeding was initiated on the complaint of Md. Kausar Nadeem,
a human rights activist and member of the Amnesty International of India.
The complaint is about the death of one Bal Govind Prasad of village Bar
within Sherghati P.S. of Gaya district on 10.4.2009 in rather unfortunate
circumstances.
Before adverting to the contents of the complaint it may be mentioned
that copy of the complaint was sent to I.G. Patna who submitted the report of
the D.I.G. of Police Magadh Range dated 23.7.2010. Copy of the said report
was sent to the victim’s son Anugrah Prasad to which he submitted his
response. The matter was then fixed for oral hearing which was held on
27.12.2010. While Anugrah Prasad appeared in person, S.P. (City) Gaya, Shri
Daljeet Singh appeared on behalf of the Administration.
Admitted facts of the case are that on 10.4.2009, Bal Govind Prasad,
who was ill, was being taken to the Clinic of Dr. S.K. Dubey at Gaya on a
tempo BR 2E -9640 for consultation and treatment. When the tempo reached
near Tekna Farm it was stopped by the officials present there as the same
was required for election duty. As per the D.I.G.’s report, the tempo was
released by the Magistrate on the assurance of Anugrah Prasad that after
dropping the patient i.e. Bal Govind Prasad at the doctor’s clinic, the vehicle
would be taken to Sports Ground (in the campus of A.N. College at Gaya), but
on the way Bal Govind Prasad died near the Sports Ground which led to
protests by the public and the vehicle was not seized. As per Anugrah Prasad’s
version, after repeated remonstrations the officials allowed the tempo to
proceed. On their direction a police constable also boarded the tempo with
instructions to park it after dropping Bal Govind Prasad at the clinic. However,
when they reached near the clinic of Dr. S.K. Dubey, the police constable
asked for a sum of Rs. one thousand as consideration for getting the tempo
released and actually took sum of Rs. five hundred from the driver and
another sum of Rs. two hundred from him (Anugrah Prasad). They were taken
to the Sports Ground in the A.N. College campus where the papers including
the driving license of the driver were seized by the Magistrate. The police
constable left the place leaving them high and dry. After sometime Bal Govind
Prasad’s condition deteriorated. They hired a rickshaw for going to the
doctor’s clinic. As soon as they came out of the Sports Ground, Bal Govind
Prasad became critical and died. When the public came to know about it they 2
resorted to agitation. In the process, the crowd damaged the tempo. At that
point of time, the Officer-Incharge of Rampur P.S. came to that place. He
arranged another tempo by which the damaged tempo was also towed and
they reached home. He had to pay sum of Rs. eleven thousand on repairs of
the tempo. Besides he was also made to pay Rs. seven hundred to the
officials there. Another sum of Rs. one thousand was paid as fare for the other
tempo.
S.P. (City) submitted that vehicles were being seized in exigency of
situation, namely, for election duty and the Administration had little choice
but to seize the vehicle in question. He also submitted that the seizures were
being effected on the direction of the Magistrate and the police had no
independent role. It was also submitted that Bal Govind Prasad was an old
man in his eighties. Admittedly, he was ill. He died a natural death and the
Administration can not be held responsible for his death.
It would appear that most of the facts are undisputed. It is not in
dispute that Bal Govind Prasad was ill and being taken to Gaya for check-up
etc. on a tempo. It is also not in dispute that the tempo was intercepted by
the Administration for being seized for election duty. It is also the admitted
position that after remonstrations by Anugrah Prasad and others the vehicle
was allowed to proceed. However, as per the victim’s son, instead of doctor’s
clinic, the vehicle was taken to the Sports Ground (Khel Parisar) in the A.N.
College Gaya campus where the papers including driving license were seized
by the Magistrate. The vehicle, thus, remained stranded. (Meanwhile, the
police constable accompanying them demanded and succeeded in getting
money from the driver as well as Anugrah Prasad.) At this point of time Bal
Govind Prasad developed complications and a rickshaw was hired for taking
him to the doctor’s clinic but no sooner than they came out of the Sports
Ground, he died. It is clear that had the vehicle not been detained at the
Sports Ground and allowed to proceed to the doctor’s clinic, Bal Govind Prasad
could have lived. It is true that at the time of elections it becomes imperative
for the administration to get hold of vehicles for election duty and therefore
the act of the concerned officials in stopping the vehicle near the Tekna Farm
for being seized can not be faulted. But there was no justification for
inordinately detaining the vehicle at the Sports Ground. The concerned
officials had let the vehicle proceed from Tekna Farm to the doctor’s clinic on
the understanding that after dropping Bal Govind Prasad the vehicle would
report at the designated place i.e. the Sports Ground in the A.N. College
campus – for which a police constable was also deputed, but the tempo was
taken to the Sports Ground instead of the doctor’s clinic and detained there.
The action – or want of it – reflects the insensitive attitude of the concerned 3
officials including the Magistrate on duty at the Sports Ground and the
concerned police constable. In the facts and circumstances, it cannot be said
that the administration played no role and was not responsible for the passing
away of Bal Govind Prasad. In the opinion of the Commission, it is a fit case in
which compensation should be awarded and suitable administrative action
should be taken against the concerned officials. It is to be kept in mind that
Anugrah Prasad was made to meet the cost of repairs of the tempo; he also
had to pay bribe to the police constable. Considering the age of the deceased
(he was reportedly 84 years of age) and the attending facts and circumstance,
the Commission is of the view that a monetary compensation of Rs. Seventy
thousand would serve the ends of justice.
In the result, the Commission directs that the State Government do
pay sum of Rs. Seventy thousand to Anugrah Prasad which may be recovered
from the concerned officials in accordance with law. The Commission further
directs that suitable administrative action be taken against the concerned
officials, as above.
Compliance report be submitted within eight weeks.
Copy of the order be sent to the Principal Secretary, Department of
Home, District Magistrate/Senior S.P. Gaya and Anugrah Prasad, the
deceased’s son.
Justice S.N. Jha
Chairperson
अबू जिंदल हिन्दुस्तानी खुफिया एजेंसी का एजेंट था .हिन्दुस्तान और पकिस्तान दुश्मन हैं ,हमें यह नहीं भूलना होगा (रहमान मल्लिक)
न्यू दिल्ली ,16 दिसंबर (एजेंसी)मुंबई हमले का तुलना बाबरी मस्जिद विवाद से करने वाले पकिस्तान के गृह मंत्री ने फिर विवादस्पद बयान दिया है ,उन्हों ने दावा किया है के लश्कर ए तैबा आतंकवादी अबू जिंदल हिन्दुस्तानी खुफिया एजेंसी का एजेंट था ,हिन्दुस्तान ने रहमान मल्लिक के इस दावे इस दावे का खंडन किया है .पकिस्तान के वजीर ए दाखिला ने कहा है के अबू जिंदल हिन्दुस्तानी है .हम भी हैरान हैं के वह और उसके दो साथी पकिस्तान कैसे पहुंचे ,जिंदल मशहूर जराएम्पेशा (अपराधी )था वह हिन्दुस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी के जराए के तौर पर काम कर रहा था ,ऐसा मै नहीं कह रहा हूँ ,बलके खुद उसने कहा है ,हम ने रिकॉर्ड देखें हैं ,रहमान मल्लिक ने ये वाजेह नहीं किया के वह किस बुनियाद पर ये बयान दे रहे हैं ,उनहोंने कहा के पकिस्तान इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहा के क्या दोनों फरीकों की सरकार से अलग किसी तीसरी ताक़त के इशारे पर काम कर रहे थे ,उन्हों ने कहा के आप इस बात से वाकिफ हालात ने खतरनाक मोड़ ले लिया था ......दोनों मुल्कों ने सरहद पर अपनी अपनी फ़ौज को तैनात करना शुरू कर दिया था ,अगर दोनों पक्षों के नेताओं ने पोख्तगी का मुजाहरा न किया होता तो हालात बिगर सकते थे ,रहमान मल्लिक ने कहा के हमें ये न भूलना चाहिए कि हिन्दुस्तान और पकिस्तान हैं ,,,,हम कश्मीर मसले पर मिल रहे हैं
नोट :-उपरोक्त खबर उर्दू दैनिक पिन्दार के 17 दिसंबर 2012 के अंक से लिया गया है .
सरकारी अधिकारिओं और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से हुआ PDS ,सोलर लाइट ,विधवा पेंशन सहित कई योजनाओं में भारी घोटाला,वारिये अधिकारी जान कर भी मामलें में कारवाई से कतरा रहे ?
PDS के फर्जी कुपनों पर गलत ढंग से फायेदा उठाने वाले होशियार हो जाएँ ,पूर्बी चंपारण के जिला अधिकारी ने जिला के कल्यानपुर प्रखंड के मनीछपरा पंचायत में मर चुके लोगों ,फर्जी नामों और इस तरह के गलत नामों के 185 से अधिक PDS कूपन होने और उन फर्जी कूपनों पर स्थानिये जन प्रतिनिधि के जरिये अवैध ढंग से लाभ उठाये जाने का मामला जैसे ही जिला पदाधिकारी पूर्बी चंपारण को जैसे ही पता चला उन्हों ने इसके जाँच के आदेश वारिये अधिकारियों को दिनांक 24/12/2012 को दिए हैं , बताया जाता है के उपरोक्त जिला के मनीछपड़ा पंचायत में सालों साल से फर्जी कूपनों पे सरकार के पदाधिकारियों की मिलीभगत से वर्षों से फ़ायदा उठा रहे ,
पंचायात के कुछ वार्ड सदस्यों की माने तो फर्जी कूपनों पे फ़ायदा उठाने के धंधे में स्थानिये प्रशासन की पूरी छूट इन जनप्रतिनिधियों संरक्षण प्राप्त है ,वार्ड सदस्यों के बातों में दम प्रतीत होता है कयोंके बगैर मिली भगत के वर्षों से फर्जी कूपनों पे फ़ायदा उठाया नहीं जा सकता
पंचायत के कुछ जनप्रतिनिधियों की बातों पे यकीन की जाए तो दर्जनों सोलर लाइट सरकार के अधिकारिओं की मिली भगत से घोटाला हो चुका,मगर सरकार के अधिकारिओं को पता न होना भी जनता को हैरत में डाल दिया है ,उसी प्रकार इंद्रा आवास योजना ,मंरेगा,विरधा पेंशन ,विधवा पेंशन में कड़ोंडों के घोटाले हो चुके हैं .
प्रोफेसर जिलानी पर हमला आर एस एस के इशारे पर हुआ था . तफ्तीश के दौरान समझौता एक्सप्रेस धमाका के मुल्जिम राजेंदर चौधरी का एताराफे जुर्म। माले में दिलचस्पी न लेने कारण दिल्ली पुलिस पर भी उठे सवाल आखिर क्या वजह थी के जिलानी के हमलावरों के बारे में आज तक मुल्जिमों को खोज पाने में नाकाम रही ?
न्यू डेल्ही 26 डिसेम्बर (एजेंसी) समझौता एक्सप्रेस बम धमाका मामले में गिरफ्तार मुल्जिम ने यॆ बात कबूल की है के पार्लियामेंट हमले में मोबैयेना (कथित तौर पर शामील प्रोफेसर एस ए आर जिलानी पर हमले में भी वह शामिल था .राष्ट्रिये जाँच एजेंसी( NIA )के हिरासत में समझौता एक्सप्रेस बम धमाका मामले के मुलजिम राजेंदर चौधरी ने जाँच करने वालों को बताया के उसने और अजमेर दरगाह और मक्का मस्जिद बम धमाका के मुल्जिम लोकेश शर्मा ने मिलकर प्रोफेसर एस ए आर जिलानी को गोली मारी थी .....
उसने ये भी बताया के 8 फ़रवरी 2005 को वसंत विहार इलाके में जब जिलानी अपने वकील से गए थे तब उन्हों ने गोली मारी थी ......इस हमले में जिलानी शदीद तौर (गंभीर रूप )से घायेल हो गए थे इसके साथ ही चौधरी ने ये भी स्वीकार की के आर एस एस प्रचारक सुनील जोशी के कहने पर ये हमला किया गया था ......
वह डेल्ही हाई कोर्ट की तरफ से जिलानी को बड़ी किये जाने के बाद 2003 से हमले की योजना बना रहे थे ..............
इस दौरान प्रोफेसर जिलानी ने कहा है के दिल्ली पुलिस हमले के बाद उनसे कभी संपर्क नहीं किया ...............उन्हों ने कभी ये नहीं बताया के मुश्तबा अफराद (संदिग्ध वैक्ति )कौन थे ?मेरे खानदान को परिशान किया गया .....पुलिस ने मेरी कार और लैप टॉप जब्त कर ली .....सनद रहे के वाकेया के कई साल गुजर जाने के बाद भी पुलिस इस बात का पता नहीं लगा पाई थी के इसके पीछे किसका हाथ था? एन आई ए ने चौधरी के एकरारनामा को लेकर दिल्ली पुलिस को सूचना दी है .....पुलिस अब अजमेर धमाके के सिसिले में जयपुर जेल में बंद लोकेश शर्मा को हिराशत में लेने की कोशिश कर रही है ......चौधरी के मुताबिक़ जोशी और दुसरे साथी प्रोफेसर जिलानी के हाई कोर्ट से बड़ी होने की वजह से काफी गुस्से में थे और उसे क़त्ल करने का मंसूबा बनाया
नोट :- उपरोक्त समाचार उर्दू दैनिक पिन्दार के 27/12/2012 के अंक से ली गई है
गैंग रेप पर इतना बवाल क्यों मचा है दोस्तों ?
Gang rape par aajkal bawaal macha hua hai.kuch logo ko darama baji karne ka achcha bahana mil geya hai.aakhir mai puchta hoon ke desh me badhti rape ki ghatnao ke liye keya rape karne wale purush he sirf jimmedar hain,keya way larkiyan aur mahilayen kisi had tak jimme dar nahi jinke sath nirmamta aur barbarta purwak samuhik balatkar hoti hain ya shikar banti hain.? keya aaj ki ladkiyo ke rahan sahan ko dekh kar kabhi aapne keya gaur karne ki koshish nahi ki ke ye adhnangi larkiyan aur is tarah ki life style wali besharm mahilaye mard samaj se kis baat ki khahis rakhti hain? paiso ki khatir jism bechne wali mahilayen keya rape ke khelaf protest karengi,aisi mahilaon ko hak kisne de diya? gang rape ke khelaf bolne wali mahilayen pahle khud ka rahan sahan aur bhartiye bane,bhartiye sanskirti ko apnaye tab road par aakar protest karen tab sobha bhi dega,warna unki ye mukhalfat ,wirodh aur protest ko dikhawda aur majak ka naam diya jaye to galat na hoga.jo dardnaak ghatna hui uski mai tahe dilse ninda karta hoon aur is ghatna ki ninda karne ke liye shayad shabd bhi na bane ho,magar mai ek baar fir ek baat kahunga es tarah ki ghatna sirf hangama karne se khatm hone wala nahi,khud mahilaon aur larkiyo ko apne aadat aur rahan sahan me kai parkar ke pariwartan karne honge.jaisa ke islam dharm ne aurto ko rahne ka jo salika aaj se 1400 saal purv bata chuka ke ek mard ko kaise rahna hai,ek aurat ko kaise rahna hai.usse alag hat kar jindagi gujarne wale log chahe kisi dharm ke ho bura hone se aap nahi rok payenge chahe aap kitna bhi sakht kanun aap keyo na banalen.keyon ke khawat hai.. babul ka darakht laga kar aam khane ki tamanna ek bewakuf hee kar sakata hai. गैंग रेप पर इतना बवाल क्यों मचा है दोस्तों ? www.biharbroadcasting.com
अधिवक्ता पटना हाई कोर्ट बिहार एवं पूर्व अध्यक्ष 15 सूत्री कार्यक्रम कमिटी बिहार . भारतीय सविंधान ने देश के हर एक नागरिक को समानता का अधिकार दिया .इसमें हिन्दू ,मुसलमान ,मर्द औरत ,अनुसूचित जाति ,जनजाति के दरमयान किसी प्रकार का भेद भाव नहीं किया गया ,लेकिन क्या हमारे मुल्क में सभो को बराबरी का हक सभो को मिल सका है .जब हम अमली ( व्योहारिक) तौर पर देखते हैं तो मालूम होता है के यहाँ पुरानी संस्कृति व रिवाज आज भी कायेम है ,जो कभी जात पात की बुनियाद पर हुआ करती थी .देश में ब्राह्मणवाद सबसे ऊँची चोटी पर बैठा हुआ है ,मुल्क के कानून बनाने और उसको व्योहारिक (अमली )रूप देने में ब्राहमणों का पूरी तरह दखल है .इस तरह हम कह सकते है के सारे देश में ब्रह्मणवाद पूरी तरह हावी है .चाहे मोगल दौरे हुकूमत हो या अंग्रेजो का ,हर दौर में ब्राह्मण हमेशा ऊँचे ओहदे पर कायेम रहे और हिन्दुओं के अनुसूचित जाती , जनजातियों पर अपनी शासन चलते रहे ,आजादी मिलने के बाद ब्राहमणों (badhamano )ने मुसलमानों पर अपनी शासन करने के लिए कोशिशें शुरू कर दी,जब मुसलमान झुकने के लिए तैयार नहीं हुए तो दंगा कराना शुरू किया ,इसका नतीजा ये हुआ के मुसलमान आर्थिक ,शिक्षा ,राजनितिक ,और सामजिक एतबार से बद से बद तर होते चले गए ,हिन्दुस्तान में ब्राह्मणवाद पूरी तरह हर क्षेत्र में पूरी तरह हावी हो चूका है .देश का प्रधान मंत्री हो या राष्ट्र पति सभी ब्राह्मणों के आगे सर झुकाने को मजबूर है।देश के पहले राष्ट्र पति जनाब राजेंदर प्रसाद जब देश के राष्ट्रपति बने तो पहली फुर्सत में वह बनारस गए और वहां एक हजार ब्राहमणों का अपने हाथों पैर धोया .पैर के धोवन का कुछ पानी पिया और कुछ अपने जिस्म पर मला तब जाकर उनको सकून व इत्मिनान हासिल हुई .,ब्राह्मणों के इशारे पर ही जनाब राजेंदर प्रसाद ने मुसलामान और और ईसाईयों को अनुसूचित जनजाति की सूची से हटाया ,जिसका खामयाजा मुस्लिम और इसाई भुगत रहे हैं .क्या मुल्क के ऐसे प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से देश का मुसलामान कुछ उमीद रख सकता है .जहां का पूरा सिस्टम ही ब्राह्मणों के हाथों में गिरवी रख्खा हुआ हो .ब्राहमणों ने मुल्क पर पकड़ बनाये रखने के लिए एक तंजीम (संगठन )बनाई जो आरएसएस के नाम से मशहूर है .इस से संबध 34 जेली जुडी हुई हैं ,जो हर क्षेत्र पर अपनी पाकर बनाये हुए है .उन्ही में एक भारतीय जनता पार्टी भी है ,जो एक सियासी संगठन है .इसके जेरे निगरानी यानि देख रेख में कई और संगठन काम करते हैं ,और ब्राह्मणवाद के नजरिये को बढ़ावा देते हैं .जब मूल में भारतीय जनता पार्टी की शासन कायेम हुई ,और एल के आडवाणी होम मिनिस्टर बनाये गए उस वक़्त आर एस एस ने खुलकर अपने छुपे हुए एजेंडे को लागू करना शुरू किया .अपने ख़ास आदमियों और अफसरों को देश की IB और इंटेलिजेंस और अन्य दूसरे जांच एजेंसियों में पूरी तरह भर दिया,आई ए एस बनाने का choaching सेंटर शुरू किया,और बहाली में हर तरह की मदद पहुंचाई ,इसी शासन के दौरान मुस्लिम आतंकवाद का शोशा बड़े ही शातिराना अंदाज में छोड़ा गया और हजाड़ो educated बे कसूर और मासूम मुस्लिम नौजवानों को बगैर कोई ख़ास कारण के जेल की सलाखों में बंद कर दिया गया और ऐसे ऐसे धारे लगा दिए गए कि उसमे न कोई अपील और न कोई दलील काम आ सके।आर एस एस के की इस हरकत ने मुसलमानों तालीमी ,और समाजी हालात को बिल्कुल ही कमजोर करके रख दिया और गिरफ्तार नौजवानों के रिश्तेदार इस हालत में पहुँच गए के उनके अपने बेगाने ने भी सलाम व कलाम से कतराने लगे ,इसी बीच गुजरात में मुसलामानों के खेलाफ बड़े पैमाने पर दंगा कराकर दिखा दिया गया के मुसलामानों का कोई भी पुरसाने हाल अथवा हमदर्द नहीं है और हिंदूवादी संगठने जो चाहेंगी करेंगी और उनका कोई भी कुछ नहीं बिगार सकता। इसी बीच महाराष्ट्र ATS प्रमुख स्वर्गिय हेमंत करकरे ने कुछ ऐसे रहस्यों पर से पर्दा उठाने का काम किये के सारा देश हक्का बक्का हो गेया ---इसने माले गाँव ,समझौता एक्सप्रेस और अन्य दूसरे बम ब्लास्टों की कर बताया के इन सारे बम ब्लास्टों में मुस्लिम संगठन नहीं बल्के हिदुत्ववादी संगठने शामिल हैं जो देश में सवैंधानिक पदों पर कब्जा जमाये लोंगों के खेलाफ बगावत कर तख्ता पलट करने की शाजिश कर रहे हैं ताके देश में पूरी तरह बरहमनवादी हिन्दू राष्ट्र कायेम किया जा सके .इस सिलसिले में कई कट्टरवादी हिन्दू आतंकवादिओं की गिरफ्तारियां हुई .......जिनसे मालूम हुआ के भारतीय फ़ौज में भी मुल्क के गद्दार अथवा देश द्रोही शामिल हो चुके हैं ,जो देश में बगावत करने के लिए इसराइल और नेपाल इत्यादि देशों के भी सम्पर्क बनाये हुए थे ....उनके तार मुल्क में भी बरहमनवादी संगठनों से जुरे हुए थे ,जिनके इशारों पर ये सारे दहशतगर्द देश का तख्ता पलटना चाहते थे ....लेकिन हिन्दू दहशतगर्दों को ये कैसे बर्दाशत हो सकता था के कोई भी सख्श उनकी तरफ ऊँगली उठा दे .....इसका नतीजा सामने आया और मुल्क के गद्दारों और बागियों ने हेमत करकरे और अन्य जांबाजों को बड़ी चालाकी से रास्ते से हटा दिया और आनन फानन में ATS chief के ओहदे पर अपने खास चहेते रघुवंसी को बैठा दिया ,जिसने हिन्दू दहशतगर्दों को बचाने की हर मुम्किन प्रयास की . अपने आकाओं पर जाँच न हो इसलिए जाँच जी दिशा ही बदल दी और मुंबई हमलावर हेमंत करकरे ,सालसकर और अन्य दूसरे जाँबाजों की शहादत का ठीकरा पाकिस्तातानी आतंकवादियों के सर डाल दिया .लेकिन आई बी के जरिये बनाई गई मनगढ़ंत कहानी अभी भी किसी को हजम नहीं हो पा रहा है , हमारे देश की सरकार न जाने क्यों मुंबई हमले में मारे गए शहीदों की जाँच कराने से कतरा रही है? हेमंत करकरे ने अपनी जान की बाजी लगा कर जो पर्दाफाश किया है ,हिन्दू दहशतगर्दों का जो खुलासा किया है इस बेना पर केंद्रीय सरकार को हिन्दुस्तानी फ़ौज की कार्किर्दगी (काम काज )अभिनव भारत ,राम सेना ,आर एस एस ,बजरंग दल ,विश्व हिन्दू परिषद ,और दुर्गा वाहिनी जैसे संगठनों पर फ़ौरन पाबन्दी लगाकर आतंकी हरकतों की जाँच करनी चाहिए ,तभी बेक़सूर मुस्लिम नौजवानों की जान बचेगी . मुस्लिम दहशतगर्दी की भूत तो दरअसल बरहमनवादी सोंच और IB ने खड़ा किया किया है ताके इसकी आड़ में वास्तविक बर्हम्नी दहशतगर्दी को छुपाया जा सके ,जो मुल्क भर में कई जगह और कई अस्तर की जा रही हैं .उपरोक्त बातें निम्नलिखित रिपोर्टों से साफ़ (clear )हो जाती है . आर एस एस ,वि एच पी और बजरंग दल की दहशतगर्दाना( आतंकी ) सर्गार्मियाँ : 1. मार्च 2000 बजरंग दल ने अपने कार्यकर्ताओं का एक तरतीबी( ट्रेनिंग) कैंप पूना में लगाया ,जिसमे दूसरी चीजों के अलावा जिलेटिन स्टैटिक्स (gelatin statics )से बम बनाने और उसे धमाका कने का तरीका भी सिखाया गया .इस कैंप में प्रदेश अस्तर के चालीस से पच्चास नामवर बजरंग दल कैडर ने हिस्सा लिया ,इनका ग्रुप लीडर नानडेड (nander )का हिमांसु पांसे था ,जो चार बाद 2006 में बम बनाते हुए मारा गया .....इस कैंप का इन ए काद बजरंग दल के कुल हिन्द के सोबये बराए जिस्मानी (physical education wing )के चीफ मुलंद पराडे( muland parade )ने किया था। ( ये पर्दाफाश nander बम धमाका-2006 की जाँच के दौरान हुआ ) 2. 2001 आर एस एस और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का एक चालीस रोजा ट्रेनिंग कैंप भोंसाला मिलिट्री स्कूल नागपूर में लगाया गया ,जिसमे देश भर से 115 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया ,इसमें महाराष्ट्र के 54 कार्यकर्ता शामिल थे ,इन लोगों को हथियार चलाने ,बम बनाने ,और इनको धमाका करने की ट्रेनिंग दी गई ट्रेनिंग देने वालों में आई बी और फ़ौज के रिटायर्ड सीनियर ऑफिसर के अलावा कुछ ऐसे फौजी भी थे ,जो अभी रिटायर्ड नहीं हुए थे ...(.इन सच्चाइयों का खुलासा nander बम धमाका 2006 और माले गाँव बम धमाका -2008 की जांच के दौरान हुआ ) 3.2003 पुन के नजदीक सिंगाड़ रोड पर स्थित आकांक्षा (aakanksha )रिसोर्ट में एक ट्रेनिंग कैंप का इन ए काद किया गया ,जिसमे बम बनाने और धमाका करने की ट्रेनिंग दी गई ,इसमें तक़रीबन 50 नौजवानों ने हिस्सा लिया इस कैंप का असल सरबराह मिथुन चक्रवर्ती नाम का एक सख्श था जिसने न सिर्फ ये के इन लड़कों को बम बनाने और उनको इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी ,बलके आखरी दिन इस सभों को बड़ी मिकदार (मात्रा )में विस्फोटक पदार्थ देकर रुखसत किया गया ....ट्रेनिंग देने वालों में बरसरे मुलाजिमत और रिटायर्ड फौजी अफसरान के अलावा हथियारों का एक्सपर्ट पुणा का निवासी राकेश धवारे ,चेमेस्ट्री के दो प्रोफसर जिनके नाम शर्द कुंशे और डॉक्टर देवता बताये गए हैं शामिल थे .(ये पर्दा फाश भी nander और माले गाँव बम धमाका की तफ्तीश के दौरान हुआ ) 4. 15 मई 2002 "संघ परिवार के 15 से 45 साल की उम्र के 153 एक्टिव कार्यकर्ता ने पुन शहर में 21 रोजा कैंप में शिर्कित की .खाकी निकर,सफ़ेद कमीज में मलबूस इन कार्यकर्ताओं को लिजम ,लाठी ,योगा ,खोखो ,कबड्डी के साथ साथ संसकृत बोलने की मश्क कराइ गई .और डिटेल के साथ हिन्दू राष्ट्र का नजरयाती सबक पढाया गया .सरमाई तालीमात के दौरान ये कैंप ताला बंद अहाता में मुन अ कीद हुआ ,वहां न किसी को बाहर क़दम निकालने की इजाजत थी और न कोई अचानक अन्दर आ सकता था . इसी मुद्दत के दौरान मुल्क के दुसरे स्थानों पर भी ऐसे ही 71 कैंप लगाये गए ,लातूर (महाराष्ट्र )में 45 से 60 साल की पुख्ता उम्र वालों ने एक ख़ास कैंप लगाया गया( पूना न्यूज़ लाइन ,इंडियन एक्सप्रेस .15मई 2002) 5. 31 मई 2002 बजरंग दल कार्यकर्ताओं का एक हफ्ता का ट्रेनिंग कैंप भोपाल (मध्य प्रदेश )में लगाया गया ,जिसमे 150 एक्टिव कार्यकर्ताओं ने ने हथियार चलाने की ट्रेनिंग हासिल की ...कहा गया के ये कैंप नौजवानों को जंग के गुर सिखाने के लिए लगाया गया था ,ताके पकिस्तान से हमले की सूरत में वह जंग में हिस्सा ले सके . 6.18 मई 2003 विश्व हिन्दू परिषद् की महिला कार्यकर्ताओं के लिए मुंबई में 17 मई 2003 से हर्बी तरबियत कैंप (हथियार चलाने का गुण )जिसमे नौजवान लड़कियों को जुडो कड़ाटा के साथ चाकुओं और तलवारों से जंगी मश्क कराइ गई .सन्डे टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,18 मई 2003 ) 7. 31 मई 2003 महिलाओं को हथियारों को चलाने की ट्रेनिंग देने के तेहत कुल हिन्द प्रोग्राम के तेहत कानपूर में 25 मई से एक ट्रेनिंग कैंप लगाया गया ,जिसमे तक़रीबन 70 लड़कियों ने हिस्सा लिया और फ़ौज के रिटायर्ड अधिकारिओ ने उनको बंदूक लोड करने ,निशाना लगाने ,और गोली चलाने की ट्रेनिंग दी गई ,जबके जुड़ों के शिक्षकों ने उनको मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग दी ,प्रदेश के कई दूसरों शहरों में कैंप लगाये गए (सन्डे एस्प्रेस पुन 1 जून 2003)......... 8.18 मई 2001 औरंगाबाद के नागेश्वर वाड़ी गणेश मंदिर के पास पाइप बम धमाके हुए (लोकमत ,औरंगाबाद 24 मई 2006) 9. 17 नवम्बर 2002 औरंगाबाद में गढ़ गेशवर मंदिर और निराल बाग़ इलाके में VHP के दफ्तर के पास पाइप बम धमाके हुए (लोक सत्ता वेबसाइट .24 मई 2006 और लोक मत औरंगाबाद 17 नवम्बर 2002) (6 अप्रैल 2006 को nander में आर एस एस और बजरंग दल के दो एक्टिव कार्यकर्ता बम बनाते हुए धमाका होने से मारे गए .पुलिस को मौकाये वारदात से ठीक वैसे ही पाइप बम मिले जिसे औरंगाबाद में इस्तेमाल किये गए थे लोकमत 24 मई 2006) 10.एक जून 2006 नागपुर में आर एस एस के सदर दफ्तर क नजदीक कथित एनकाउंटर में एक पाकिस्तानी दहशत गर्द गिरोह के तीन आतंकी मारे गए ,जो रिपोर्ट के मुताबिक दफ्तर पर हमला करने के इरादे से आये थे। (सच्चाई पता करने के गरज से हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज मिस्टर B G kolse patil की सरबराही (नेतृत्त्व ) में एक फैक्ट फाइंडिंग टीम बनाई गई जो छान बीन के बाद इस नतीजे पर पहुंची के एनकाउंटर की कहानी फर्जी है .....इस committee ने सारे मामले को जुडिसियल इन्क्वारी की सिफारिश की ......बजाहीर एनकाउंटर की ये करवाई आर एस एस के इमां पर आई बी ने अंजाम दी थी ).......... 11.21 नवम्बर 2003 परभनी के मोहम्मदया मस्जिद पर उस वक़्त वैसी सनाखत के बम फेके गए ,जब नमाजी जुमा की नमाज अदा करके निकल रहे थे ,तीन हमलावर मोटर साइकिल पर सवार होकर आये थे और बम फेंक कर फरार हो गए .(पीटीआई .21 नवम्बर शाम 5:11मिनट .....) 12. 27 अगस्त 2004 मस्जिद मेराजुल ओलुम पूना (परभणी )पर बम हमला हुआ ...... 13. 27 अगस्त 2004 कादरिया मस्जिद जालना पर हमला हुआ .. 14.6 अप्रैल 2006 रात के डेढ़ बजे नांदेड़ में एक रिटायर्ड इंजिनियर और आर एस एस के कार्यकर्ता "लक्छ्मन राज कोंडआवर "के घर पर एक जबरदस्त धमाका हुआ ,जिसमे उसके 29 साला बेटे नरेश और बज्रंग्दाली हिमांशु पांसे हालाक हुए और बाकी तीन साथी जख्मी हुए ,जबके राहुल पांडे बच गया ,जिसको बाद मे पुलिस ने पकड़ा ,ये धमाका उस वक़्त हुआ जबके ये लोग घर पर बम बना रहे थे . 15.10 फरवरी 2007 एक पुरएसरार (रहश्यमय )बम धमाके में nander में 28 वर्षीय पांडुरंग भगवान उमल कन्थुवान मारा गया और उसका साथी दानेश्वर मानक राव गोनिवार उम्र 40 साल बुरी तरह जख्मी हो गया .दोनों का सम्बन्ध बजरंग दल से समझा जाता है .(टाइम्स ऑफ़ इंडिया पूना 11 फरवरी 2007) 16. सितेम्बर 2007 राम पुर उत्तर प्रदेश में तीन लड़के जो खुदको" जिहादे इस्लामी " ग्रुप का कार्यकर्ता बताकर लोगों को धमकी भरे खत भेजते थे ,गिरफ्तार कर लिए गए ,ये तीनों गैर मुस्लिम यानी हिदू निकले और उनके नाम राज पाल शर्मा ,दौरी लाल ,और धर्म पाल हैं (मिल्ली गजट 1-15 अक्टूबर 2007) 17.26 दिसंबर 2007 क्रिकेट खिलाड़ियों की आमद से पहले पुलिस ने 6 बमों के साथ दो नौजवानों राजीव गोविन्द सिंह ,और सुमित्रा बादल राय को गिरफ्तार किया ,ये देसी किस्म के बम भीड़ में कम से कम आधा दर्जन लोगों को हालाक कर सकते थे .,ये गिरफ्तारियाँ वर्ल्ड कप में फातेह क्रिकेट टीम (विजेता टीम )के इस्तकबालिया जुलुस (विजय जुलूस )से ठीक पहले हुई .(टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,पूना 27 सितम्बर 2007) (ये सोंच कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं के अगर ये गिरफ्तारियाँ न होंतीं और साजसी तौर पर जुलूस के दौरान बम धमाके करने में कामयाब हो जाते तो किस कद्र भयानक नतीजे सामने आते और अगर कहीं इन दोनों का संबंध मुसलमान से होते तो पुलिस और मीडिया और भारतीय जनता की प्रतिक्रया कितना जोरदार होता?) 18. 12 दिसंबर 2006 : को नासिक पुलिस ने शहर के पास एक गाड़ी से 50 detonator ,जेलाटीन स्टैटिक्स के 11 बॉक्स और पांच टन अमोनिअम नाइट्रेट जब्त किये ,इनका ताल्लूक (संबंध )बजरंगदल से समझा जा रहा है (मदाठी वीकली सुधान मुंबई 4 -10 जुलाई 2008 )........ 19. 2006 जिला अहमद नगर के एक गाँव मव एक शख्स शंकर सेल्के के घर से 15 किलो आर डी एक्स जब्त किया ,शंकर बाद में रहस्यमय हालत में मरा हुआ पाया गया।(मराठी वीकली शुधान मुंबई 4-10 जुलाई 2008 ) 20. 2006 पुलिस ने पथारी जिला अहमद नगर के एक चीनी कारखाने से बड़ी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ जब्त किये थे।(मराठी वीकली सुधान मुंबई ,4-10 जुलाई 2008) 21. 14 अक्टूबर 2006 पुलिस ने जिला के औरंगबाद के चकाल थाना के गाँव के सरपंच के घर से साढ़े चार किलो ग्राम अमोनियम नाइट्रेट , 18 छड़ें जिलेटिन की बरामद की (मराठी वीकली सुधान मुंबई 4 - 10 जुलाई 2008) 22. 2006 औरंगाबाद ....मुंबई हाई वे पर एक क्लब में पुलिस ने एक शख्स लक्ष्मण जीवंत के कब्जे से 20 किलो ग्राम अमोनियम नाइट्रेट और 18 छड़ी जिलेटिन बरामद की (मराठी वीकली सुधान मुंबई 4-10 जुलाई 2008) 23. 11 अक्तूबर 2007 : एक ताक़तवर बम धमाके में जिला युत महल के क गाँव में आर एस एस का संदिग्ध कार्यकर्ता डॉक्टर बाफ्ता माड़ा गया (वीकली शुधान मुंबई ,4-10 जुलाई 2008) 24. 2007 लातूर जिला में पुलिस ने सात नौजवानों के कब्जे से 14 लाख 72 हजार के आस पास कीमत का अमोनियम नाइट्रेट और जिलेटिन छड़ी बरामद की ......उनके नाम विकाश मवाड, कैलास ,विनोद , धनन जय , नितीश , महेश और गणेश हैं . वीकली सुधान मुंबई ,4 - 10 जुलाई 2008) 25. 15 अक्टूबर 2007 : वार्धान में दिवाली के मौका पर कुछ लोगों को गिफ्ट के पैकटों में बम भेजे गए ,इस सिलसिले में पुलिस चार वैक्ति को गिरफ्तार किया .उनके नाम चिंटू उर्फ़ महेश थाडवाणी, जितेश प्रधान , प्रकाश बावले ,और अजय जेव तोडे हैं . उनका सरगना baandu tel (बंडू तेल )गोटे उर्फ़ लादन अभी तक फरार है , (दैनिक भास्कर 3 नवम्बर 2007) 26. 20 फरवरी 2008 : मुंबई से तक़रीबन 50 मीटर के दूर क़स्बा पनुवेल के साईन राज सिनेमा हॉल में फिल्म जोधा अकबर की नुमाइश के दौरान एक बम फिट किया गया .(.कोमुनिलिज्म कॉम्बैट मुंबई :जुलाई -अगस्त 2008) 27. 31 अक्टूबर 2008 पुलिस के बम तलाश करने और नाकारा करने वाले दस्ते ने नवी मुंबई के वाशी ऑडिटोरियम में एक बम का पता चलाकर नकारा किया ,बाद में मालुम हुआ के बम एक बर्हम्नी संगठन ने नस्ब (फिट) किया था (कोमुनिलिज्म कॉम्बैट ,जुलाई -अगस्त 2008) 28. 4जून 2008 : ठाणे के गदकारी रंग्याथन थिएटर में 4 जून एक बम धमाका हुआ ,जिसमे मराठी ड्रामा "आम्ही पाँच पोते "दिखाया जाने वाला था ,इसमें सात वैक्ति जख्मी हुए थे ,पुलिस को पता चला के इस साजिश में हिन्दू barhamni संगठनों के गोरु कृपा partistha ,संस्था समिति का हाथ था .उन्हों ने हे साइन राज सिनेमा हॉल और वाशी ऑडिटोरियम में बम रखवाए थे। ATS ने उपरोक्त संगठनों के 6 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करके अहम् जानकारी ली ,जिनकी बुनियाद पर सितारह में एक नौजवान मंगेश निगम के घर से और पीन में दरयाये बाल गंगा के नजदीक छुपाया हुआ बहुत सा गोला बारूद बरामद किया।(इंडियन एक्सप्रेस की तहकीक से पता चलता है के महाराष्ट्र और गोवा के इन दहशत गार्डों के सम्बन्ध आस्ट्रेलिया ,अमेरिका ,और कूछ अन्य देशों तक फैले हुए हैं . बहवाला :(कोमुनालिज्म कॉम्बैट ,मुंबई ,जुलाई - अगस्त 2008) 29. 24 जनवरी 2008: तमिल नाडू के क़स्बा तिन्कासी जिला तर्विनल रेड्डी में स्थित आर एस एस के दफ्तर में एक जबरदस्त धमाका हुआ ....गहराई से जाँच परताल के बाद तमिल नाडू पुलिस ने संघ परिवार की विभिन्व संगठनों से सम्बन्ध आठ आदमी को गिरफ्तार किया गया .पुलिस ने बताया के आरोपी ने 14 पाइप बम बना लिए थे और वह इस साजिश में 2007 से लगे थे ......गिरफ्तार लोगों ने स्वीकार किया कि उनका संगठन प्रदेश में बड़े पैमाने पर संप्रादाइक नफरत फैलाना चाहते थे।(मिल्ली गजट न्यू डेल्ही ,16-29 फरवरी 2008) 30. अप्रैल 2008: एक मामूली से फसादात की जाँच के दौरान पुलिस को पता चला के जिला जलगाँव के ताल्लुका चोप्रा के एक छोटे से गाँव अमिरती (amirti)में खतरनाक हथियार मसलन पिस्तौल ,तलवार,चापड़ा वगैरा बड़ी मात्रा में बनाये जारहे हैं ,जाँच परताल के दौरान ये भी मालूम हुआ के एक शख्स "सिटी फेटने वाला " ने जो के संतज नगर का बाशिंदा है और एक फिरका परस्त पार्टी( साम्पर्दैक पार्टी )का सरगरम मेम्बर है ,नौजवानों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी और उनको sampardaik नजरिये से इन्तहाई इस्त आल अंगेज (अग्रेसिव) फ़िल्में और CD भी दिखाई (मिल्ली गजट 16-31 मई 2008) 31. अप्रैल 2008: माले गाँव पुलिस ने 17 अप्रैल को एक ईमारत के बेसमेंट में स्थित एक टिब्बी लैब पर छापा मारा और वहां से 5 कार आमद (जिन्दा ) आर डी एक्स तीन इस्तेमाल शुदा बमों के खोल ,एक पिस्तौल ,एक लैप टॉप एक सकिज दो मोबाइल फोन ,एक हजार रूपये चार जाली नोट ,और पाँच हजार रूपये नकद जब्त किये और तीन आदमी नीतेश आमरे ,साहब राव धरवे और जीतेन्दर खेमा को गिरफ्तार किया ,जिनका सम्बन्ध अज्ञात संगठनों से था .( मिल्ली गजट न्यू डेल्ही 1-15 मई 2008) 32. जून-जुलाई 2008 बारा बंकी उत्तर प्रदेश : पुलिस ने आर एस एस के एक स्वंसेवक सूरज नारायण टंडन को गिरफ्तार किया ,जो शहर के ठाकुरद्वारा मंदिर में को तबाह करके दंगा फ़ैलाने की साजिश रच रहा था .(मिल्ली गजट न्यू डेल्ही 16-31 जुलाई 2008)
असली आतंकियों को बचाकर और मासूमों को फंसाकर क्या हम आतंकवाद पे काबू पा लेंगे ?
अधिवक्ता पटना हाई कोर्ट बिहार एवं पूर्व अध्यक्ष 15 सूत्री कार्यक्रम कमिटी बिहार .
भारतीय सविंधान ने देश के हर एक नागरिक को समानता का अधिकार दिया .इसमें हिन्दू ,मुसलमान ,मर्द औरत ,अनुसूचित जाति ,जनजाति के दरमयान किसी प्रकार का भेद भाव नहीं किया गया ,लेकिन क्या हमारे मुल्क में सभो को बराबरी का हक सभो को मिल सका है .जब हम अमली ( व्योहारिक) तौर पर देखते हैं तो मालूम होता है के यहाँ पुरानी संस्कृति व रिवाज आज भी कायेम है ,जो कभी जात पात की बुनियाद पर हुआ करती थी .देश में ब्राह्मणवाद सबसे ऊँची चोटी पर बैठा हुआ है ,मुल्क के कानून बनाने और उसको व्योहारिक (अमली )रूप देने में ब्राहमणों का पूरी तरह दखल है .इस तरह हम कह सकते है के सारे देश में ब्रह्मणवाद पूरी तरह हावी है .चाहे मोगल दौरे हुकूमत हो या अंग्रेजो का ,हर दौर में ब्राह्मण हमेशा ऊँचे ओहदे पर कायेम रहे और हिन्दुओं के अनुसूचित जाती , जनजातियों पर अपनी शासन चलते रहे ,आजादी मिलने के बाद ब्राहमणों (badhamano )ने मुसलमानों पर अपनी शासन करने के लिए कोशिशें शुरू कर दी,जब मुसलमान झुकने के लिए तैयार नहीं हुए तो दंगा कराना शुरू किया ,इसका नतीजा ये हुआ के मुसलमान आर्थिक ,शिक्षा ,राजनितिक ,और सामजिक एतबार से बद से बद तर होते चले गए ,हिन्दुस्तान में ब्राह्मणवाद पूरी तरह हर क्षेत्र में पूरी तरह हावी हो चूका है .देश का प्रधान मंत्री हो या राष्ट्र पति सभी ब्राह्मणों के आगे सर झुकाने को मजबूर है।देश के पहले राष्ट्र पति जनाब राजेंदर प्रसाद जब देश के राष्ट्रपति बने तो पहली फुर्सत में वह बनारस गए और वहां एक हजार ब्राहमणों का अपने हाथों पैर धोया .पैर के धोवन का कुछ पानी पिया और कुछ अपने जिस्म पर मला तब जाकर उनको सकून व इत्मिनान हासिल हुई .,ब्राह्मणों के इशारे पर ही जनाब राजेंदर प्रसाद ने मुसलामान और और ईसाईयों को अनुसूचित जनजाति की सूची से हटाया ,जिसका खामयाजा मुस्लिम और इसाई भुगत रहे हैं .क्या मुल्क के ऐसे प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से देश का मुसलामान कुछ उमीद रख सकता है .जहां का पूरा सिस्टम ही ब्राह्मणों के हाथों में गिरवी रख्खा हुआ हो .ब्राहमणों ने मुल्क पर पकड़ बनाये रखने के लिए एक तंजीम (संगठन )बनाई जो आरएसएस के नाम से मशहूर है .इस से संबध 34 जेली जुडी हुई हैं ,जो हर क्षेत्र पर अपनी पाकर बनाये हुए है .उन्ही में एक भारतीय जनता पार्टी भी है ,जो एक सियासी संगठन है .इसके जेरे निगरानी यानि देख रेख में कई और संगठन काम करते हैं ,और ब्राह्मणवाद के नजरिये को बढ़ावा देते हैं .जब मूल में भारतीय जनता पार्टी की शासन कायेम हुई ,और एल के आडवाणी होम मिनिस्टर बनाये गए उस वक़्त आर एस एस ने खुलकर अपने छुपे हुए एजेंडे को लागू करना शुरू किया .अपने ख़ास आदमियों और अफसरों को देश की IB और इंटेलिजेंस और अन्य दूसरे जांच एजेंसियों में पूरी तरह भर दिया,आई ए एस बनाने का choaching सेंटर शुरू किया,और बहाली में हर तरह की मदद पहुंचाई ,इसी शासन के दौरान मुस्लिम आतंकवाद का शोशा बड़े ही शातिराना अंदाज में छोड़ा गया और हजाड़ो educated बे कसूर और मासूम मुस्लिम नौजवानों को बगैर कोई ख़ास कारण के जेल की सलाखों में बंद कर दिया गया और ऐसे ऐसे धारे लगा दिए गए कि उसमे न कोई अपील और न कोई दलील काम आ सके।आर एस एस के की इस हरकत ने मुसलमानों तालीमी ,और समाजी हालात को बिल्कुल ही कमजोर करके रख दिया और गिरफ्तार नौजवानों के रिश्तेदार इस हालत में पहुँच गए के उनके अपने बेगाने ने भी सलाम व कलाम से कतराने लगे ,इसी बीच गुजरात में मुसलामानों के खेलाफ बड़े पैमाने पर दंगा कराकर दिखा दिया गया के मुसलामानों का कोई भी पुरसाने हाल अथवा हमदर्द नहीं है और हिंदूवादी संगठने जो चाहेंगी करेंगी और उनका कोई भी कुछ नहीं बिगार सकता।
इसी बीच महाराष्ट्र ATS प्रमुख स्वर्गिय हेमंत करकरे ने कुछ ऐसे रहस्यों पर से पर्दा उठाने का काम किये के सारा देश हक्का बक्का हो गेया ---इसने माले गाँव ,समझौता एक्सप्रेस और अन्य दूसरे बम ब्लास्टों की कर बताया के इन सारे बम ब्लास्टों में मुस्लिम संगठन नहीं बल्के हिदुत्ववादी संगठने शामिल हैं जो देश में सवैंधानिक पदों पर कब्जा जमाये लोंगों के खेलाफ बगावत कर तख्ता पलट करने की शाजिश कर रहे हैं ताके देश में पूरी तरह बरहमनवादी हिन्दू राष्ट्र कायेम किया जा सके .इस सिलसिले में कई कट्टरवादी हिन्दू आतंकवादिओं की गिरफ्तारियां हुई .......जिनसे मालूम हुआ के भारतीय फ़ौज में भी मुल्क के गद्दार अथवा देश द्रोही शामिल हो चुके हैं ,जो देश में बगावत करने के लिए इसराइल और नेपाल इत्यादि देशों के भी सम्पर्क बनाये हुए थे ....उनके तार मुल्क में भी बरहमनवादी संगठनों से जुरे हुए थे ,जिनके इशारों पर ये सारे दहशतगर्द देश का तख्ता पलटना चाहते थे ....लेकिन हिन्दू दहशतगर्दों को ये कैसे बर्दाशत हो सकता था के कोई भी सख्श उनकी तरफ ऊँगली उठा दे .....इसका नतीजा सामने आया और मुल्क के गद्दारों और बागियों ने हेमत करकरे और अन्य जांबाजों को बड़ी चालाकी से रास्ते से हटा दिया और आनन फानन में ATS chief के ओहदे पर अपने खास चहेते रघुवंसी को बैठा दिया ,जिसने हिन्दू दहशतगर्दों को बचाने की हर मुम्किन प्रयास की . अपने आकाओं पर जाँच न हो इसलिए जाँच जी दिशा ही बदल दी और मुंबई हमलावर हेमंत करकरे ,सालसकर और अन्य दूसरे जाँबाजों की शहादत का ठीकरा पाकिस्तातानी आतंकवादियों के सर डाल दिया .लेकिन आई बी के जरिये बनाई गई मनगढ़ंत कहानी अभी भी किसी को हजम नहीं हो पा रहा है , हमारे देश की सरकार न जाने क्यों मुंबई हमले में मारे गए शहीदों की जाँच कराने से कतरा रही है?
हेमंत करकरे ने अपनी जान की बाजी लगा कर जो पर्दाफाश किया है ,हिन्दू दहशतगर्दों का जो खुलासा किया है इस बेना पर केंद्रीय सरकार को हिन्दुस्तानी फ़ौज की कार्किर्दगी (काम काज )अभिनव भारत ,राम सेना ,आर एस एस ,बजरंग दल ,विश्व हिन्दू परिषद ,और दुर्गा वाहिनी जैसे संगठनों पर फ़ौरन पाबन्दी लगाकर आतंकी हरकतों की जाँच करनी चाहिए ,तभी बेक़सूर मुस्लिम नौजवानों की जान बचेगी .
मुस्लिम दहशतगर्दी की भूत तो दरअसल बरहमनवादी सोंच और IB ने खड़ा किया किया है ताके इसकी आड़ में वास्तविक बर्हम्नी दहशतगर्दी को छुपाया जा सके ,जो मुल्क भर में कई जगह और कई अस्तर की जा रही हैं .उपरोक्त बातें निम्नलिखित रिपोर्टों से साफ़ (clear )हो जाती है .
आर एस एस ,वि एच पी और बजरंग दल की दहशतगर्दाना( आतंकी ) सर्गार्मियाँ :
1. मार्च 2000 बजरंग दल ने अपने कार्यकर्ताओं का एक तरतीबी( ट्रेनिंग) कैंप पूना में लगाया ,जिसमे दूसरी चीजों के अलावा जिलेटिन स्टैटिक्स (gelatin statics )से बम बनाने और उसे धमाका कने का तरीका भी सिखाया गया .इस कैंप में प्रदेश अस्तर के चालीस से पच्चास नामवर बजरंग दल कैडर ने हिस्सा लिया ,इनका ग्रुप लीडर नानडेड (nander )का हिमांसु पांसे था ,जो चार बाद 2006 में बम बनाते हुए मारा गया .....इस कैंप का इन ए काद बजरंग दल के कुल हिन्द के सोबये बराए जिस्मानी (physical education wing )के चीफ मुलंद पराडे( muland parade )ने किया था। ( ये पर्दाफाश nander बम धमाका-2006 की जाँच के दौरान हुआ )
2. 2001 आर एस एस और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का एक चालीस रोजा ट्रेनिंग कैंप भोंसाला मिलिट्री स्कूल नागपूर में लगाया गया ,जिसमे देश भर से 115 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया ,इसमें महाराष्ट्र के 54 कार्यकर्ता शामिल थे ,इन लोगों को हथियार चलाने ,बम बनाने ,और इनको धमाका करने की ट्रेनिंग दी गई
ट्रेनिंग देने वालों में आई बी और फ़ौज के रिटायर्ड सीनियर ऑफिसर के अलावा कुछ ऐसे फौजी भी थे ,जो अभी रिटायर्ड नहीं हुए थे ...(.इन सच्चाइयों का खुलासा nander बम धमाका 2006 और माले गाँव बम धमाका -2008 की जांच के दौरान हुआ )
3.2003 पुन के नजदीक सिंगाड़ रोड पर स्थित आकांक्षा (aakanksha )रिसोर्ट में एक ट्रेनिंग कैंप का इन ए काद किया गया ,जिसमे बम बनाने और धमाका करने की ट्रेनिंग दी गई ,इसमें तक़रीबन 50 नौजवानों ने हिस्सा लिया इस कैंप का असल सरबराह मिथुन चक्रवर्ती नाम का एक सख्श था जिसने न सिर्फ ये के इन लड़कों को बम बनाने और उनको इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी ,बलके आखरी दिन इस सभों को बड़ी मिकदार (मात्रा )में विस्फोटक पदार्थ देकर रुखसत किया गया ....ट्रेनिंग देने वालों में बरसरे मुलाजिमत और रिटायर्ड फौजी अफसरान के अलावा हथियारों का एक्सपर्ट पुणा का निवासी राकेश धवारे ,चेमेस्ट्री के दो प्रोफसर जिनके नाम शर्द कुंशे और डॉक्टर देवता बताये गए हैं शामिल थे .(ये पर्दा फाश भी nander और माले गाँव बम धमाका की तफ्तीश के दौरान हुआ )
4. 15 मई 2002 "संघ परिवार के 15 से 45 साल की उम्र के 153 एक्टिव कार्यकर्ता ने पुन शहर में 21 रोजा कैंप में शिर्कित की .खाकी निकर,सफ़ेद कमीज में मलबूस इन कार्यकर्ताओं को लिजम ,लाठी ,योगा ,खोखो ,कबड्डी के साथ साथ संसकृत बोलने की मश्क कराइ गई .और डिटेल के साथ हिन्दू राष्ट्र का नजरयाती सबक पढाया गया .सरमाई तालीमात के दौरान ये कैंप ताला बंद अहाता में मुन अ कीद हुआ ,वहां न किसी को बाहर क़दम निकालने की इजाजत थी और न कोई अचानक अन्दर आ सकता था .
इसी मुद्दत के दौरान मुल्क के दुसरे स्थानों पर भी ऐसे ही 71 कैंप लगाये गए ,लातूर (महाराष्ट्र )में 45 से 60 साल की पुख्ता उम्र वालों ने एक ख़ास कैंप लगाया गया( पूना न्यूज़ लाइन ,इंडियन एक्सप्रेस .15मई 2002)
5. 31 मई 2002 बजरंग दल कार्यकर्ताओं का एक हफ्ता का ट्रेनिंग कैंप भोपाल (मध्य प्रदेश )में लगाया गया ,जिसमे 150 एक्टिव कार्यकर्ताओं ने ने हथियार चलाने की ट्रेनिंग हासिल की ...कहा गया के ये कैंप नौजवानों को जंग के गुर सिखाने के लिए लगाया गया था ,ताके पकिस्तान से हमले की सूरत में वह जंग में हिस्सा ले सके .
6.18 मई 2003 विश्व हिन्दू परिषद् की महिला कार्यकर्ताओं के लिए मुंबई में 17 मई 2003 से हर्बी तरबियत कैंप (हथियार चलाने का गुण )जिसमे नौजवान लड़कियों को जुडो कड़ाटा के साथ चाकुओं और तलवारों से जंगी मश्क कराइ गई .सन्डे टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,18 मई 2003 )
7. 31 मई 2003 महिलाओं को हथियारों को चलाने की ट्रेनिंग देने के तेहत कुल हिन्द प्रोग्राम के तेहत कानपूर में 25 मई से एक ट्रेनिंग कैंप लगाया गया ,जिसमे तक़रीबन 70 लड़कियों ने हिस्सा लिया और फ़ौज के रिटायर्ड अधिकारिओ ने उनको बंदूक लोड करने ,निशाना लगाने ,और गोली चलाने की ट्रेनिंग दी गई ,जबके जुड़ों के शिक्षकों ने उनको मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग दी ,प्रदेश के कई दूसरों शहरों में कैंप लगाये गए (सन्डे एस्प्रेस पुन 1 जून 2003).........
8.18 मई 2001 औरंगाबाद के नागेश्वर वाड़ी गणेश मंदिर के पास पाइप बम धमाके हुए (लोकमत ,औरंगाबाद 24 मई 2006)
9. 17 नवम्बर 2002 औरंगाबाद में गढ़ गेशवर मंदिर और निराल बाग़ इलाके में VHP के दफ्तर के पास पाइप बम धमाके हुए (लोक सत्ता वेबसाइट .24 मई 2006 और लोक मत औरंगाबाद 17 नवम्बर 2002)
(6 अप्रैल 2006 को nander में आर एस एस और बजरंग दल के दो एक्टिव कार्यकर्ता बम बनाते हुए धमाका होने से मारे गए .पुलिस को मौकाये वारदात से ठीक वैसे ही पाइप बम मिले जिसे औरंगाबाद में इस्तेमाल किये गए थे लोकमत 24 मई 2006)
10.एक जून 2006 नागपुर में आर एस एस के सदर दफ्तर क नजदीक कथित एनकाउंटर में एक पाकिस्तानी दहशत गर्द गिरोह के तीन आतंकी मारे गए ,जो रिपोर्ट के मुताबिक दफ्तर पर हमला करने के इरादे से आये थे।
(सच्चाई पता करने के गरज से हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज मिस्टर B G kolse patil की सरबराही (नेतृत्त्व ) में एक फैक्ट फाइंडिंग टीम बनाई गई जो छान बीन के बाद इस नतीजे पर पहुंची के एनकाउंटर की कहानी फर्जी है .....इस committee ने सारे मामले को जुडिसियल इन्क्वारी की सिफारिश की ......बजाहीर एनकाउंटर की ये करवाई आर एस एस के इमां पर आई बी ने अंजाम दी थी )..........
11.21 नवम्बर 2003 परभनी के मोहम्मदया मस्जिद पर उस वक़्त वैसी सनाखत के बम फेके गए ,जब नमाजी जुमा की नमाज अदा करके निकल रहे थे ,तीन हमलावर मोटर साइकिल पर सवार होकर आये थे और बम फेंक कर फरार हो गए .(पीटीआई .21 नवम्बर शाम 5:11मिनट .....)
12. 27 अगस्त 2004 मस्जिद मेराजुल ओलुम पूना (परभणी )पर बम हमला हुआ ......
13. 27 अगस्त 2004 कादरिया मस्जिद जालना पर हमला हुआ ..
14.6 अप्रैल 2006 रात के डेढ़ बजे नांदेड़ में एक रिटायर्ड इंजिनियर और आर एस एस के कार्यकर्ता "लक्छ्मन राज कोंडआवर "के घर पर एक जबरदस्त धमाका हुआ ,जिसमे उसके 29 साला बेटे नरेश और बज्रंग्दाली हिमांशु पांसे हालाक हुए और बाकी तीन साथी जख्मी हुए ,जबके राहुल पांडे बच गया ,जिसको बाद मे पुलिस ने पकड़ा ,ये धमाका उस वक़्त हुआ जबके ये लोग घर पर बम बना रहे थे .
15.10 फरवरी 2007 एक पुरएसरार (रहश्यमय )बम धमाके में nander में 28 वर्षीय पांडुरंग भगवान उमल कन्थुवान मारा गया और उसका साथी दानेश्वर मानक राव गोनिवार उम्र 40 साल बुरी तरह जख्मी हो गया .दोनों का सम्बन्ध बजरंग दल से समझा जाता है .(टाइम्स ऑफ़ इंडिया पूना 11 फरवरी 2007)
16. सितेम्बर 2007 राम पुर उत्तर प्रदेश में तीन लड़के जो खुदको" जिहादे इस्लामी " ग्रुप का कार्यकर्ता बताकर लोगों को धमकी भरे खत भेजते थे ,गिरफ्तार कर लिए गए ,ये तीनों गैर मुस्लिम यानी हिदू निकले और उनके नाम राज पाल शर्मा ,दौरी लाल ,और धर्म पाल हैं (मिल्ली गजट 1-15 अक्टूबर 2007)
17.26 दिसंबर 2007 क्रिकेट खिलाड़ियों की आमद से पहले पुलिस ने 6 बमों के साथ दो नौजवानों राजीव गोविन्द सिंह ,और सुमित्रा बादल राय को गिरफ्तार किया ,ये देसी किस्म के बम भीड़ में कम से कम आधा दर्जन लोगों को हालाक कर सकते थे .,ये गिरफ्तारियाँ वर्ल्ड कप में फातेह क्रिकेट टीम (विजेता टीम )के इस्तकबालिया जुलुस (विजय जुलूस )से ठीक पहले हुई .(टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,पूना 27 सितम्बर 2007)
(ये सोंच कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं के अगर ये गिरफ्तारियाँ न होंतीं और साजसी तौर पर जुलूस के दौरान बम धमाके करने में कामयाब हो जाते तो किस कद्र भयानक नतीजे सामने आते और अगर कहीं इन दोनों का संबंध मुसलमान से होते तो पुलिस और मीडिया और भारतीय जनता की प्रतिक्रया कितना जोरदार होता?)
18. 12 दिसंबर 2006 : को नासिक पुलिस ने शहर के पास एक गाड़ी से 50 detonator ,जेलाटीन स्टैटिक्स के 11 बॉक्स और पांच टन अमोनिअम नाइट्रेट जब्त किये ,इनका ताल्लूक (संबंध )बजरंगदल से समझा जा रहा है (मदाठी वीकली सुधान मुंबई 4 -10 जुलाई 2008 )........
19. 2006 जिला अहमद नगर के एक गाँव मव एक शख्स शंकर सेल्के के घर से 15 किलो आर डी एक्स जब्त किया ,शंकर बाद में रहस्यमय हालत में मरा हुआ पाया गया।(मराठी वीकली शुधान मुंबई 4-10 जुलाई 2008 )
20. 2006 पुलिस ने पथारी जिला अहमद नगर के एक चीनी कारखाने से बड़ी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ जब्त किये थे।(मराठी वीकली सुधान मुंबई ,4-10 जुलाई 2008)
21. 14 अक्टूबर 2006 पुलिस ने जिला के औरंगबाद के चकाल थाना के गाँव के सरपंच के घर से साढ़े चार किलो ग्राम अमोनियम नाइट्रेट , 18 छड़ें जिलेटिन की बरामद की (मराठी वीकली सुधान मुंबई 4 - 10 जुलाई 2008)
22. 2006 औरंगाबाद ....मुंबई हाई वे पर एक क्लब में पुलिस ने एक शख्स लक्ष्मण जीवंत के कब्जे से 20 किलो ग्राम अमोनियम नाइट्रेट और 18 छड़ी जिलेटिन बरामद की (मराठी वीकली सुधान मुंबई 4-10 जुलाई 2008)
23. 11 अक्तूबर 2007 : एक ताक़तवर बम धमाके में जिला युत महल के क गाँव में आर एस एस का संदिग्ध कार्यकर्ता डॉक्टर बाफ्ता माड़ा गया (वीकली शुधान मुंबई ,4-10 जुलाई 2008)
24. 2007 लातूर जिला में पुलिस ने सात नौजवानों के कब्जे से 14 लाख 72 हजार के आस पास कीमत का अमोनियम नाइट्रेट और जिलेटिन छड़ी बरामद की ......उनके नाम विकाश मवाड, कैलास ,विनोद , धनन जय , नितीश , महेश और गणेश हैं . वीकली सुधान मुंबई ,4 - 10 जुलाई 2008)
25. 15 अक्टूबर 2007 : वार्धान में दिवाली के मौका पर कुछ लोगों को गिफ्ट के पैकटों में बम भेजे गए ,इस सिलसिले में पुलिस चार वैक्ति को गिरफ्तार किया .उनके नाम चिंटू उर्फ़ महेश थाडवाणी, जितेश प्रधान , प्रकाश बावले ,और अजय जेव तोडे हैं . उनका सरगना baandu tel (बंडू तेल )गोटे उर्फ़ लादन अभी तक फरार है , (दैनिक भास्कर 3 नवम्बर 2007)
26. 20 फरवरी 2008 : मुंबई से तक़रीबन 50 मीटर के दूर क़स्बा पनुवेल के साईन राज सिनेमा हॉल में फिल्म जोधा अकबर की नुमाइश के दौरान एक बम फिट किया गया .(.कोमुनिलिज्म कॉम्बैट मुंबई :जुलाई -अगस्त 2008)
27. 31 अक्टूबर 2008 पुलिस के बम तलाश करने और नाकारा करने वाले दस्ते ने नवी मुंबई के वाशी ऑडिटोरियम में एक बम का पता चलाकर नकारा किया ,बाद में मालुम हुआ के बम एक बर्हम्नी संगठन ने नस्ब (फिट) किया था (कोमुनिलिज्म कॉम्बैट ,जुलाई -अगस्त 2008)
28. 4जून 2008 : ठाणे के गदकारी रंग्याथन थिएटर में 4 जून एक बम धमाका हुआ ,जिसमे मराठी
ड्रामा "आम्ही पाँच पोते "दिखाया जाने वाला था ,इसमें सात वैक्ति जख्मी हुए थे ,पुलिस को पता चला के इस साजिश में हिन्दू barhamni संगठनों के गोरु कृपा partistha ,संस्था समिति का हाथ था .उन्हों ने हे साइन राज सिनेमा हॉल और वाशी ऑडिटोरियम में बम रखवाए थे। ATS ने उपरोक्त संगठनों के 6 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करके अहम् जानकारी ली ,जिनकी बुनियाद पर सितारह में एक नौजवान मंगेश निगम के घर से और पीन में दरयाये बाल गंगा के नजदीक छुपाया हुआ बहुत सा गोला बारूद बरामद किया।(इंडियन एक्सप्रेस की तहकीक से पता चलता है के महाराष्ट्र और गोवा के इन दहशत गार्डों के सम्बन्ध आस्ट्रेलिया ,अमेरिका ,और कूछ अन्य देशों तक फैले हुए हैं . बहवाला :(कोमुनालिज्म कॉम्बैट ,मुंबई ,जुलाई - अगस्त 2008)
29. 24 जनवरी 2008: तमिल नाडू के क़स्बा तिन्कासी जिला तर्विनल रेड्डी में स्थित आर एस एस के दफ्तर में एक जबरदस्त धमाका हुआ ....गहराई से जाँच परताल के बाद तमिल नाडू पुलिस ने संघ परिवार की विभिन्व संगठनों से सम्बन्ध आठ आदमी को गिरफ्तार किया गया .पुलिस ने बताया के आरोपी ने 14 पाइप बम बना लिए थे और वह इस साजिश में 2007 से लगे थे ......गिरफ्तार लोगों ने स्वीकार किया कि उनका संगठन प्रदेश में बड़े पैमाने पर संप्रादाइक नफरत फैलाना चाहते थे।(मिल्ली गजट न्यू डेल्ही ,16-29 फरवरी 2008)
30. अप्रैल 2008: एक मामूली से फसादात की जाँच के दौरान पुलिस को पता चला के जिला जलगाँव के ताल्लुका चोप्रा के एक छोटे से गाँव अमिरती (amirti)में खतरनाक हथियार मसलन पिस्तौल ,तलवार,चापड़ा वगैरा बड़ी मात्रा में बनाये जारहे हैं ,जाँच परताल के दौरान ये भी मालूम हुआ के एक शख्स "सिटी फेटने वाला " ने जो के संतज नगर का बाशिंदा है और एक फिरका परस्त पार्टी( साम्पर्दैक पार्टी )का सरगरम मेम्बर है ,नौजवानों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी और उनको sampardaik नजरिये से इन्तहाई इस्त आल अंगेज (अग्रेसिव) फ़िल्में और CD भी दिखाई (मिल्ली गजट 16-31 मई 2008)
31. अप्रैल 2008: माले गाँव पुलिस ने 17 अप्रैल को एक ईमारत के बेसमेंट में स्थित एक टिब्बी लैब पर छापा मारा और वहां से 5 कार आमद (जिन्दा ) आर डी एक्स तीन इस्तेमाल शुदा बमों के खोल ,एक पिस्तौल ,एक लैप टॉप एक सकिज दो मोबाइल फोन ,एक हजार रूपये चार जाली नोट ,और पाँच हजार रूपये नकद जब्त किये और तीन आदमी नीतेश आमरे ,साहब राव धरवे और जीतेन्दर खेमा को गिरफ्तार किया ,जिनका सम्बन्ध अज्ञात संगठनों से था .( मिल्ली गजट न्यू डेल्ही 1-15 मई 2008)
32. जून-जुलाई 2008 बारा बंकी उत्तर प्रदेश : पुलिस ने आर एस एस के एक स्वंसेवक सूरज नारायण टंडन को गिरफ्तार किया ,जो शहर के ठाकुरद्वारा मंदिर में को तबाह करके दंगा फ़ैलाने की साजिश रच रहा था .(मिल्ली गजट न्यू डेल्ही 16-31 जुलाई 2008)
33. अक्टूबर-नवम्बर 2007 :मुंबई के मजाफात वासी और पानुवेल में बमों की तन्सीब और ठाणे में बमों के धमाके की जांच पड़ताल के दौरान ये पर्दाफ़ाश हुआ के इसी गिरोह ने बीते साल दिवाली के मौका पर रतन गिरी -पनुवेल रोड पर स्थित मुलिम कब्रिस्तान में बम रखा था ,खुशकिश्मती थी के के बम फटा नहीं ....(मिल्ली गजट ,न्यू डेल्ही ,16-31 जुलाई 2008)
34. 10 अप्रैल 2008: उजारा जिला कोल्हापुर के पास 10 अप्रैल को पुलिस ने दो नौजवानों ओलिवर ब्रदेश करावर दत्ता और शंकर पचावाडेकर को उस वक़्त गिरफ्तार किया गया जा वह एक मोटर साइकिल पर देशी सनाखत के 35 बम ,एक गन और कुछ कारतूस वगैरह ले जारहे थे .....(रोजनाम पोधारी ,कोल्हापुर 11 अप्रैल 2008)
35. जुलाई -अगस्त 2008 : आर एस एस की एक जैली तंजीम राष्ट्रीय हिन्दू सेना के परमोद मुतालिक ने बैंगलोर में इन्स्दान दहशतगर्दी स्क्वाड (एंटी टेररिस्ट स्क्वाड ) कायेम ,जिसमे बंगलोर से 150 और पुरे रियासत से 700 volunteer भर्ती किये गए हैं ,मुताल्लिक का दावा है के उसने ये गैर सरकारी फ़ौज रियासत से दहशतगर्दी का खात्मा करने के लिए खड़ी की है (पुणे मुरस ,23 अगस्त 2008 )
(परमोद मुतल्लिक श्रीराम सेना का भी मुखिया है .उसका दावा है के उस के खुदकश दश्ते (सुसाइडल स्क्वाड )में अबतक 1132 हिन्दू नौजवानों को खुदकश बम्बार के तौर पर भारती कर चुके हैं ,श्रीराम सेना ने खुदकश दश्ते के इन बमबारों को ट्रेंनिंग देने और मानसिक रूप से तैयार करने (ब्रेन वाशिंग )के लिए मंगलोर ,बेलगाम और शिमोगा में ट्रेनिंग कैंप भी लगाए हैं (मिल्ली गजट ,न्यू डेल्ही ,1-15 नवम्बर 2008)
36. 2 अगस्त 2006 : फैजाबाद (UP) पुलिस ने साधू के भेस में एक आदमी को उस वक़्त गिरफ्तार किया गया जब वह अपनी झोली में कार बमों के साथ अदालत में दाखिल हो रहा था ,मुलजिम का नाम संत "ननकौउ दास "बताया गया है (मिल्ली गजट ,न्यू डेल्ही 15 नवम्बर 2008)
37. 24 अगस्त 2008 : कानपूर (उत्तर प्रदेश ) में 24 अगस्त को 2 बजरंग दली राजीव मिश्रा और भोपेंदर सिंह एक हॉस्टल के कमरे में बम तैयार करते हुए हाद्साती तौर पर मारे गए ,उपरोक्त हॉस्टल के कल्यापुरा इलाका में स्थित मिश्रा के घर का हिस्सा है .कानपुर के आई जी पुलिस ए .के .सिंह ने संवादाताओं को बताया के जाँच से पता चला है के बड़ी तादाद में बम धमाका करने की साजिश थी ...पुलिस को बड़ी तादाद में वस्फोटक के अलावा एक डायरी और मुस्लिम बहुल इलाका कस्बा "फिरोजाबाद का एक हाथ का बनाया हुआ नक्शा भी मिला है (आउट लुक 15 दिसम्बर 2008,कोमुनैलिज्म कॉम्बैट) सितम्बर 2008)
इस मामले की तहकीकात के दौरान ATS (UP) को पता चला के धमाका में मारे गए बजरंग दल के मिश्रा और भूपेंदर ने इस धमाके के दो माह पूर्व मुंबई के दो नम्बरों पर बार बार फोन किया था ....लेकिन जाँच से पता चला के दोनों सिम कार्ड फर्जी नामों पर लिए गए थे ....पुलिस का कहना है के जितनी बड़ी तादाद में गोल बारूद मिश्रा के घर से जब्त किया गया है वह गुजरात और बैंगलोर जैसी तबाही बरपा (मचाने)के लिए काफी था .(टाइम्स ऑफ़ इंडिया 29 अक्तूबर 2008)
38. 21 डिसेम्बर 2008 : दक्षिण कर्नाटक के क्राइम ब्रांच ने 21 अक्टूबर को मंगलोर( कर्नाटक )मेंएक सख्श दुर्रेश कामथ को को गिरफ्तार किया है ,जिसने पत्तौर के एक प्राइवेट तेजारती काम्प्लेक्स (कमर्शियल काम्प्लेक्स ) में बहुत बड़ी तादाद में गैर कानूनी तरीके से जिलेटिन की छड़ें ,डेटोनेटर और दूसरा गोल बारूद जमा कर रख्खा था ...............(मिल्ली गजट ,1-15 अक्टूबर 2008)
39. 3 अक्टूबर 2008 :VHP और बजरंग दल ने टोले गाँव और भरे( जिला पूना )में 2 अक्टूबर को दशहरे के मौका पर एक मुसल्लह रैली निकाली ,जिसमें कम उम्र के लड़के तलवार , लाठियां और झंडे उठाये हुए हुए थे .....(रोजनाम लोकमत ....{हलू }पूना ,4 अक्टूबर 2008)
इस तरह की रैलियाँ महाराष्ट्र में बहुत से जगहों पर निकाली गईं ,जिनमें तलवार ,लाठियों ,भालों और त्रिशूल वगैरा का मुजाहेरा (प्रदर्शन)किया गया और मुसलामानों के खेलाफ इश्तेआल अंगेज (भड़काऊ और उत्तेजक )नारे लगाये गए .....सबसे बड़ी रैली सांगली में निकाली गई ,जिसमे 5000 से जेयादा लोगों ने हिस्सा लिया ....
40. 29 सितम्बर 2008 : बीजेपी की तोल्बा तंजीम (छात्र संगठन)अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से वाबिस्ता (संबध )इन्तहा पशंद ग्रुप "हिन्दू जागरण मंच "ने जिसका सदर मुकाम (मुख्यालय )इंदौर में है ,29 सितम्बर को मालेगांव( महाराष्ट्र )और मोडासा (गुजरात ) में बिल्तार्तिब (क्रमशः ) छे (6) बम धमाके किये गए ,जिनमें एक शख्श की मौत हो गई ,मरने वाले सभी मुसलमान थे ........ (इंडियन एक्सप्रेस ,पूना ,23 अक्टूबर 2008)...........
बाद में तहकीकात बाद पता चला के इन धमाकों में हिंदुत्व (बर्हम्नी ,barhamni )दहशतगर्द ग्रुप अभिनव भारत ,चन्द फैजी अफसरान और कुछ नाम निहाद (कथित )साधू संतों का हाँथ था ......तरीका और धमाकों में इस्तेमाल किये गए सामान और तकनीक को देखते हुए ये समझा जाता है के समझौता एक्सप्रेस ,अजमेर दरगाह के अलावा चंद दीगर धमाके भी इसी गिरोह की साजिश का नतीजा हैं .इस सिलसिले में कुछ बहुत ही चौंकाने वाले हकायेक (सत्य )सामने आये हैं ....मसलन अभिनव भारत नाम का शिद्दत पशन्द गिरोह 2002 से देश भर में दहशत गर्दी फैलाने और बम धमाके तैयारी कर रहा था .....दिसंबर 2002 मध्य प्रदेश ने भोपाल के एक रेलवे स्टेशन से एक खाना साज बम(टिफिन बम)बरामद किया था .ठीक उसके एक साल बाद वैसा ही देशी शनाख्त का एक बम लाम्बा खेरा के मजाफात में मिला .दोनों बम सालाना तबलीगी इज्तेमा के मद्देनजर रख्खे गए थे ,जिसमे कमसे कम पाँच लाख लोंगों ने शिरकत की थी .....मध्य प्रदेश पुलिस ने जल्द हे सुराग लगा लिया के इस शाजिश में स्थानिये हिंदुत्व शिद्दत पशंद राम नारायण कालसांग राम ,और सुनील जोशी माखूज थे .महाराष्ट्र ATS के मुताबिक़ इन दोनों अफराद के साथ पूछ ताछ की गई थी .गुमान है के उनका सम्बन्ध बजरंग दल की सरगर्मियों से है (हिन्दू ,20 नवम्बर 2008)
34. 10 अप्रैल 2008: उजारा जिला कोल्हापुर के पास 10 अप्रैल को पुलिस ने दो नौजवानों ओलिवर ब्रदेश करावर दत्ता और शंकर पचावाडेकर को उस वक़्त गिरफ्तार किया गया जा वह एक मोटर साइकिल पर देशी सनाखत के 35 बम ,एक गन और कुछ कारतूस वगैरह ले जारहे थे .....(रोजनाम पोधारी ,कोल्हापुर 11 अप्रैल 2008)
35. जुलाई -अगस्त 2008 : आर एस एस की एक जैली तंजीम राष्ट्रीय हिन्दू सेना के परमोद मुतालिक ने बैंगलोर में इन्स्दान दहशतगर्दी स्क्वाड (एंटी टेररिस्ट स्क्वाड ) कायेम ,जिसमे बंगलोर से 150 और पुरे रियासत से 700 volunteer भर्ती किये गए हैं ,मुताल्लिक का दावा है के उसने ये गैर सरकारी फ़ौज रियासत से दहशतगर्दी का खात्मा करने के लिए खड़ी की है (पुणे मुरस ,23 अगस्त 2008 )
(परमोद मुतल्लिक श्रीराम सेना का भी मुखिया है .उसका दावा है के उस के खुदकश दश्ते (सुसाइडल स्क्वाड )में अबतक 1132 हिन्दू नौजवानों को खुदकश बम्बार के तौर पर भारती कर चुके हैं ,श्रीराम सेना ने खुदकश दश्ते के इन बमबारों को ट्रेंनिंग देने और मानसिक रूप से तैयार करने (ब्रेन वाशिंग )के लिए मंगलोर ,बेलगाम और शिमोगा में ट्रेनिंग कैंप भी लगाए हैं (मिल्ली गजट ,न्यू डेल्ही ,1-15 नवम्बर 2008)
36. 2 अगस्त 2006 : फैजाबाद (UP) पुलिस ने साधू के भेस में एक आदमी को उस वक़्त गिरफ्तार किया गया जब वह अपनी झोली में कार बमों के साथ अदालत में दाखिल हो रहा था ,मुलजिम का नाम संत "ननकौउ दास "बताया गया है (मिल्ली गजट ,न्यू डेल्ही 15 नवम्बर 2008)
37. 24 अगस्त 2008 : कानपूर (उत्तर प्रदेश ) में 24 अगस्त को 2 बजरंग दली राजीव मिश्रा और भोपेंदर सिंह एक हॉस्टल के कमरे में बम तैयार करते हुए हाद्साती तौर पर मारे गए ,उपरोक्त हॉस्टल के कल्यापुरा इलाका में स्थित मिश्रा के घर का हिस्सा है .कानपुर के आई जी पुलिस ए .के .सिंह ने संवादाताओं को बताया के जाँच से पता चला है के बड़ी तादाद में बम धमाका करने की साजिश थी ...पुलिस को बड़ी तादाद में वस्फोटक के अलावा एक डायरी और मुस्लिम बहुल इलाका कस्बा "फिरोजाबाद का एक हाथ का बनाया हुआ नक्शा भी मिला है (आउट लुक 15 दिसम्बर 2008,कोमुनैलिज्म कॉम्बैट) सितम्बर 2008)
इस मामले की तहकीकात के दौरान ATS (UP) को पता चला के धमाका में मारे गए बजरंग दल के मिश्रा और भूपेंदर ने इस धमाके के दो माह पूर्व मुंबई के दो नम्बरों पर बार बार फोन किया था ....लेकिन जाँच से पता चला के दोनों सिम कार्ड फर्जी नामों पर लिए गए थे ....पुलिस का कहना है के जितनी बड़ी तादाद में गोल बारूद मिश्रा के घर से जब्त किया गया है वह गुजरात और बैंगलोर जैसी तबाही बरपा (मचाने)के लिए काफी था .(टाइम्स ऑफ़ इंडिया 29 अक्तूबर 2008)
38. 21 डिसेम्बर 2008 : दक्षिण कर्नाटक के क्राइम ब्रांच ने 21 अक्टूबर को मंगलोर( कर्नाटक )मेंएक सख्श दुर्रेश कामथ को को गिरफ्तार किया है ,जिसने पत्तौर के एक प्राइवेट तेजारती काम्प्लेक्स (कमर्शियल काम्प्लेक्स ) में बहुत बड़ी तादाद में गैर कानूनी तरीके से जिलेटिन की छड़ें ,डेटोनेटर और दूसरा गोल बारूद जमा कर रख्खा था ...............(मिल्ली गजट ,1-15 अक्टूबर 2008)
39. 3 अक्टूबर 2008 :VHP और बजरंग दल ने टोले गाँव और भरे( जिला पूना )में 2 अक्टूबर को दशहरे के मौका पर एक मुसल्लह रैली निकाली ,जिसमें कम उम्र के लड़के तलवार , लाठियां और झंडे उठाये हुए हुए थे .....(रोजनाम लोकमत ....{हलू }पूना ,4 अक्टूबर 2008)
इस तरह की रैलियाँ महाराष्ट्र में बहुत से जगहों पर निकाली गईं ,जिनमें तलवार ,लाठियों ,भालों और त्रिशूल वगैरा का मुजाहेरा (प्रदर्शन)किया गया और मुसलामानों के खेलाफ इश्तेआल अंगेज (भड़काऊ और उत्तेजक )नारे लगाये गए .....सबसे बड़ी रैली सांगली में निकाली गई ,जिसमे 5000 से जेयादा लोगों ने हिस्सा लिया ....
40. 29 सितम्बर 2008 : बीजेपी की तोल्बा तंजीम (छात्र संगठन)अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से वाबिस्ता (संबध )इन्तहा पशंद ग्रुप "हिन्दू जागरण मंच "ने जिसका सदर मुकाम (मुख्यालय )इंदौर में है ,29 सितम्बर को मालेगांव( महाराष्ट्र )और मोडासा (गुजरात ) में बिल्तार्तिब (क्रमशः ) छे (6) बम धमाके किये गए ,जिनमें एक शख्श की मौत हो गई ,मरने वाले सभी मुसलमान थे ........ (इंडियन एक्सप्रेस ,पूना ,23 अक्टूबर 2008)...........
बाद में तहकीकात बाद पता चला के इन धमाकों में हिंदुत्व (बर्हम्नी ,barhamni )दहशतगर्द ग्रुप अभिनव भारत ,चन्द फैजी अफसरान और कुछ नाम निहाद (कथित )साधू संतों का हाँथ था ......तरीका और धमाकों में इस्तेमाल किये गए सामान और तकनीक को देखते हुए ये समझा जाता है के समझौता एक्सप्रेस ,अजमेर दरगाह के अलावा चंद दीगर धमाके भी इसी गिरोह की साजिश का नतीजा हैं .इस सिलसिले में कुछ बहुत ही चौंकाने वाले हकायेक (सत्य )सामने आये हैं ....मसलन अभिनव भारत नाम का शिद्दत पशन्द गिरोह 2002 से देश भर में दहशत गर्दी फैलाने और बम धमाके तैयारी कर रहा था .....दिसंबर 2002 मध्य प्रदेश ने भोपाल के एक रेलवे स्टेशन से एक खाना साज बम(टिफिन बम)बरामद किया था .ठीक उसके एक साल बाद वैसा ही देशी शनाख्त का एक बम लाम्बा खेरा के मजाफात में मिला .दोनों बम सालाना तबलीगी इज्तेमा के मद्देनजर रख्खे गए थे ,जिसमे कमसे कम पाँच लाख लोंगों ने शिरकत की थी .....मध्य प्रदेश पुलिस ने जल्द हे सुराग लगा लिया के इस शाजिश में स्थानिये हिंदुत्व शिद्दत पशंद राम नारायण कालसांग राम ,और सुनील जोशी माखूज थे .महाराष्ट्र ATS के मुताबिक़ इन दोनों अफराद के साथ पूछ ताछ की गई थी .गुमान है के उनका सम्बन्ध बजरंग दल की सरगर्मियों से है (हिन्दू ,20 नवम्बर 2008)
लेकिन ये मालूम न किया जा सका के इन दोनों दहशत गर्दों के जाँच से क्या हकीक़त सामने आये और उनके खेलाफ क्या करवाई की गई ?......बजाहिर उन्हें आजाद छोड़ दिया गया .....वर्ना ....माले गाँव,मोडासा ,अजमेर ,समझौता एक्सप्रेस ,मक्का मस्जिद और भी अनेक दुसरे जगहों पर बम धमाके न करा सकते थे .
41. 10 नवंबर 2008 : आर एस एस दो कार्यकर्ता 10 नवम्बर को केरला के जिला कनूर में बम बनाते हुए धमाके में मारे गए ......दुसरे दिन इलाके की छानबीन के दौरान पुलिस ने बीजेपी लीडर परकाशन के घर से 18 देशी किस्म के बम बरामद किये .......परकाशन का घर उस जगह से जहाँ ये धमका हुआ ,मुश्किल से 200 मीटर के फासले पर है (इंडियन एक्सप्रेस ,पूना ,11 नवम्बर और टाइम्स ऑफ़ इंडिया पूना 13 नवम्बर 2008)
42. 4 नवंबर 2008 : एक ख़ुफ़िया इत्तेला (गुप्त सूचना ) के बुनियाद पर पुलिस ने 9 नवम्बर को बद्नापुर तहशील ,जिला जालना ,माहाराष्ट्र केएक गाँव "माँजर गाँव "से देशी किस्म के इन्तहाई ताक़तवर 7 बम बरामद किये ,जो एक इबादत गाह (धार्मिक जगह )के पास घास में छुपा कर रख्खे गए थे ......ये बम सौ मीटर तक तबाही मचा सकते थे ..इस सिलसिले में ATS ने पूना के राजेश दत तातारिया दावड़े और नांदेड (naander )के मारुती वाघ को गिरफ्तार किया .....वाघ पर जालना में से एक मुक़दमा दर्ज है ....(इंडियन एक्सप्रेस,पूना ,इंडिया ".कॉम बहवाला PTI ,11 नवम्बर 2008)....
43. 11 नवम्बर 2008 : आसाम की "उल्फा "संगठन के चेयरमैन अरबिंद राज खोवा ने 11 नवम्बर को खुलासा किया के बोड़ो (BODO ) इलाका में एक अक्टूबर में जो धमाका और नस्ली तशद्दूद के वाकेयात पेश हुए थे ,उनमे आर एस एस शामिल थे .....इन वाकेआत में तक़रीबन 140 अफराद मारे गए थे ,जिनमें 85 हलाकतें (हत्याएँ )बम धमाकों में और 55 नस्ली तशद्दूद में में हुई थी .......इन्हों ने दावा किया के उल्फा के पास ये शाबित करने के लिए तशद्दूद के इन वारदातों में आर एस एस शामिल है ,काफी पुख्ता साबुत मौजूद हैं ......उल्फा ने अपने तर्जुमान फ्रीडम में चंद माह पहले ही ये बताया दिया था के आर एस एस ने देश के विभिन्न भागों में बम धमाके कराने की हेदायत की जा रही हैं .......मगर सरकार ने इस दिशा में कोई क़दम नहीं उठाया (डी एन ए ,ऑनलाइन न्यूज़ ,11 नवम्बर 2008)
44. 10 दिसंबर 2008 : शक की बुनिआद पर गुजरात पुलिस ने जाम नगर के पास खाम्बाला से महाराष्ट्र के दो नौजवान इंजिनियर महेश पर्ब और अनिल जगताप को पकड़ा उनके कब्जे से चार मोबाइल ,जाम नगर एयर पोर्ट का नक्शा ,सौ राष्ट्र इलाका का नक्शा ,गुजरात और राजस्थान के सरहदी इलाकों और रिलायंस एवं इसार के कारखानों के नक़्शे बरामद किये ......इनके कार पर जीपीएस डिवाइस फिट था ,जिससे वह इलाके का सर्वे कर रहे थे ......उनको मजीद जाँच परताल के लिए (गहन छान बीन )ATS के हवाले किया गया .......मगर गुजरात ATS ने एक हफ्ता बाद चुपके से छोड़ दिया .......और कहा के वह इजाजत लेकर इलाके का सर्वे कर रहे थे ........(मराठी रोजनामा पोधारी ,10 दिसंबर ,हेड लाइन्स इंडिया ,20 दिसंबर 2008)
45. 27 दिसंबर 2008 : बजरंग दल ने पुलिस की इजाजत लिए बगैर मुंबई के सेवेन कोकिल्वाडा इलाका में 27 से 29 दिसंबर नौजवानों का तीन रोजा कैंप लगाया ,जिसमे मुम्बई के 18 से 35 साल की उम्र के 110 नौजवान शरीक हुए ,उनको दहशत गर्दी से मुकाबके के नाम पर .....लाठी,तलवार,और राइफल चलाने की ट्रेनिंग दी गई ......मुबाहसों,तकरीरों के दौरान नौजवानों को ये बात भी जेहन नशीं (दिमाग में बैठाई गई )कराई गई के दहशत गर्दी के हालिया वाक्य (मामलों)के लिए इस्लामी जेहाद जिम्मेदार है (एशियन एज ,29 दिसंबर 2008 ,मिल्ली गजट ,16-31 जनवरी 2009).....
46. 12 जनवरी 2009 : कर्नाटक के एक डाकू नाग राज जाम बागी ने ,जिसका संबंध हिन्दू ग्रुप से है ,ये स्वीकार किया है के 10 मई 2008 को हुबली जिला अदालत में बम धमाके उसी ने किये थे ,रियासती ख़ुफ़िया जराए के मुताबिक़ जाम बागी और उसके दुसरे गुर्गों रमेश पवार ,और लंराज लालगर उपरोक्त शिद्दत पशंद ग्रुप के मेंबर हैं .....ये धमाका ऐसे मौका पर कराया गया ,जबके कर्नाटक असेम्ली के चुनाव होने का पहला चरण चल रहा था ......ये इस मजिस्ट्रेट की अदालत में हुआ ,जिसमे सफ़दर नागौरी समेत सिमी के कुछ कार्यकता के खेलाफ दो दिन बाद मामले की सुवाई होने वाली थी . ...अगरचे जांच चल रही थी ,मगर आम तौर पे ताशिर पैदा किया गया के इस धमाका में सिमी का हाथ है ...(इंडियन एक्सप्रेस ,पूना ,13 जनवरी 2009)
47. 4 अप्रैल 2009 : महाराष्ट्र के जिला बिड के एक छोटे से गाँव घट सावली में एक बम धमाका हुआ .....इस गाँव की आबादी मुश्किल से एक हाजार है और उसमें 70 से 80 मुसलमान रहते हैं ,धमाके की सूचना मिलने पर पुलिस ने छान बीन की और तीन आदमी अशोक लांडे ,मयूर लांडे और तुलसी राम लांडे को गिरफ्तार किया,पुछ ताछ के दौरान उन्हों जुर्म का एतराफ किया और कहा के वह नहीं चाहते थे कि गाँव में मस्जिद बने ,इसलिए ये धमाका किया गया ......(मराठी वीकली "सुधान "29 मई से जून 2009)
इन धमकों की नफ्सियती (साइको लोजिकल) असरात बहुत खतरनाक साबित हुए ,अगर फरार "मुस्लिम दहशत गर्दी "का हवा खड़ा करने के बजाये IB ने असल बर्हम्नी (BARHAMNI ) दहशत गर्दी पर धेयान दी होती ,जो के हिन्दू राष्ट्र के नाम पर "बर्हम्नी राष्ट्र "कायेम करना चाहती है ,तो बम धामकों के इस सिलसिले को रोका जा सकता था ,जिसकी बदौलत देश के विभिन्व हिस्सों में भाड़ी जान और माली नुक्सान हुआ है लेकिन ऐसा जाहिर हित है के आई बी ने इन मामलों को अपने आकाओं के इशारे पर नजर अंदाज किया ,बर्हम्नी दहशतगर्दी सरगर्मियों में उनकी मदद की और उनके साथ साज बाज की और प्रदेश की सरकारों ने आई बी की हे रिपोर्ट को सही मान कर काम करती गई .जिसका नतीजा हुआ के सिमी,इंडियन मुजाहेदीन,और फौजी वगैरा के नाम पर बेकसूर मुस्लिम नौजवानों को फंसाती चली गई ...........और असल मुजरिमों के हर जुर्म पर पर्दा डालती रही ताके देश में मुसलामानों को बदनाम कर हिन्दू राष्ट्र की बुनियाद डाली जा सके ......गौर करने वाली बात है के देश के इन हिन्दू संगठनों के सारे खुराफात को जानते हुए भी सरकारों ने अपनी आखें इनके तरफ से बंद किये रहे और बेक़सूर मुस्लिम नौजवानों पर जुल्म के पहाड़ तोड़े जा रहे हैं . किसी ने खूब कहा है
हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम
वह क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता .
47. 4 अप्रैल 2009 : महाराष्ट्र के जिला बिड के एक छोटे से गाँव घट सावली में एक बम धमाका हुआ .....इस गाँव की आबादी मुश्किल से एक हाजार है और उसमें 70 से 80 मुसलमान रहते हैं ,धमाके की सूचना मिलने पर पुलिस ने छान बीन की और तीन आदमी अशोक लांडे ,मयूर लांडे और तुलसी राम लांडे को गिरफ्तार किया,पुछ ताछ के दौरान उन्हों जुर्म का एतराफ किया और कहा के वह नहीं चाहते थे कि गाँव में मस्जिद बने ,इसलिए ये धमाका किया गया ......(मराठी वीकली "सुधान "29 मई से जून 2009)
इन धमकों की नफ्सियती (साइको लोजिकल) असरात बहुत खतरनाक साबित हुए ,अगर फरार "मुस्लिम दहशत गर्दी "का हवा खड़ा करने के बजाये IB ने असल बर्हम्नी (BARHAMNI ) दहशत गर्दी पर धेयान दी होती ,जो के हिन्दू राष्ट्र के नाम पर "बर्हम्नी राष्ट्र "कायेम करना चाहती है ,तो बम धामकों के इस सिलसिले को रोका जा सकता था ,जिसकी बदौलत देश के विभिन्व हिस्सों में भाड़ी जान और माली नुक्सान हुआ है लेकिन ऐसा जाहिर हित है के आई बी ने इन मामलों को अपने आकाओं के इशारे पर नजर अंदाज किया ,बर्हम्नी दहशतगर्दी सरगर्मियों में उनकी मदद की और उनके साथ साज बाज की और प्रदेश की सरकारों ने आई बी की हे रिपोर्ट को सही मान कर काम करती गई .जिसका नतीजा हुआ के सिमी,इंडियन मुजाहेदीन,और फौजी वगैरा के नाम पर बेकसूर मुस्लिम नौजवानों को फंसाती चली गई ...........और असल मुजरिमों के हर जुर्म पर पर्दा डालती रही ताके देश में मुसलामानों को बदनाम कर हिन्दू राष्ट्र की बुनियाद डाली जा सके ......गौर करने वाली बात है के देश के इन हिन्दू संगठनों के सारे खुराफात को जानते हुए भी सरकारों ने अपनी आखें इनके तरफ से बंद किये रहे और बेक़सूर मुस्लिम नौजवानों पर जुल्म के पहाड़ तोड़े जा रहे हैं . किसी ने खूब कहा है
हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम
वह क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता .
Desh me musalmano ki haalat daliton se bhi badtar(doctor ahsan)
मशहूर सामाजिक कार्यकता व साहित्यकार डॉक्टर कमरुल अहसान ने एक प्रेस रिलीज़ जरी कर कहा है के राज्य सभा के सरमाई इजलास (शीतकालीन सत्र)में राज्य सभा के मेम्बर मोहम्मद अदीब के जरिये मुसलमानों की बदहाली के बारे में सवाल करने और उसके वाजेह जवाब लिखित रूप में तलब करने से केंद्र सरकार की दावे की हकीकत सामने आ गई ,वरना केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्यान्मंत्री ये दावा रही थी के मुसलमानों की हालत पहले से बेहतर हो रही है ,जबके हकीकत इसके बिलकुल विपरीत है ,बेहतर हिने के बजाये और बाद से बदतर हुई है .देश की तक़रीबन 35%मुस्लिम संख्या खते इफ़्लास यानि गरीबी रेखा से भी निचे की जिंदगी बसर करने पर मजबूर है .प्रधानमंत्री के दफ्तर के वजीर ए ममलेकत जनाब राजीव शिकला ने मजमुई तौर पे मुल्क की BPL और मुसलमानों में BPL आबादी का तनासुब अलग अलग लिखित बयान में बताया है के ,प्लानिंग कमीशन के सैंपल सर्वे के मुताबिक 2009-2010 राष्ट्रीय अस्तर पर गाँव की कुल आबादी का 38.8%और शहर का 20.9% है जो के SC (अनुसूचित जनजाति )से भी जेयदा है .मुसलमानों की बदहाली की तुलना अब दलितों से भी नहीं किया जा सकता है ,इसलिए के मुसलामानों की हालत दलितों यानि अनुसूचित जनजाति से भी बदतर हो चुकी है .मुस्लिम दानिश्वर तबका बीजेपी का खौफ दिखाकर मुसलमानों को बहकाना अब छोड़कर अपना वोट बैंक बनाने कि बजाये मुसलमानों की बदहाली दूर करने के लिए संजीदगी से गौर करे ,कयोंके आंकड़े फाइलों की खूबसूरती बढाने के लिए नहीं बलके,उसके मुताबिक वैहारिक रूप पर्दान करते हुए काम करने के लिए होते हैं . doctor ahsan cotact .09934089849
उर्दू दैनिक पिन्दार के दिनाक 20/12/2012 से ली गई है
सैयद आसिफ इब्राहीम की नियुक्ति पर चेमेगोइयाँ क्यों?
डॉक्टर मुश्ताक अहमद
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सैयद आसिफ इब्राहीम की नियुक्ति पर चेमेगोइयाँ क्यों?
हमारा मुल्क हिन्दुस्तान एक बहूत बरा लोकतांत्रिक देश है और हमारा सविंधान का आधार secularism है .यही वजह है के मुल्क के अन्दर अनेक धर्मों और संस्कृति क्र लोग रहते हैं और उनके अलंबरदारों को ये हक हासिल है के वह अपने मजहब और कर कल्चर के तहफ्फुज के लिए कोई भी क़दम उठा सकते हैं शर्त ये है के उनके क़दम से दुसरे मजहब के लोगों के दिल को ठेस न पहुंचे .कयोंके हमारा सविंधान इसकी इजाजत नहीं देता इसी तरह सविंधान में बराबरी के हक़ की वकालत की गई है .गर्ज के तमाम शहरी को को जिंदगी के विभिन छेत्रों में oportunity हासिल करने का सवैंधानिक अधिकार अधिकार प्राप्त है .लेकिन सच्चाई ये है के आजादी के बाद देश में जिस तरह की फेजा बनी हुई है और खास कर तीन दहाई में जिस तरह भेद भाव करने वाले सोंच के लोगों की वर्चश कायेम हुई तो मुल्क के ख़ास तबके को नजर अंदाज किया जाने लगा .खास कर मुसलमानों के साथ जिस तरह का भेदभाव वाला रवैया अपनाया जाने लगा वह न सिर्फ गैर अखलाकी था बलके सवैधानिक भी .नतीजा ये हुआ के मुल्क का मुसलमान जिन्दगी के विभिन छेत्रों में दिनों दिन पिछरता चला गया गया और आज खुद सरकार की रिपोर्टसच्चर कमिटी ,रंगनाथ मिश्रा कमीशन की रिपोर्ट ने इस हकीकत को जाहिर कर दिया है के मुल्क का मुसलमान दलित से भी बदतर है .दलित से भी बदतर कहने का मतलब साफ़ है के इस मुल्क में दलित समाज की हालत भी बेहतर नहीं है और इससे भी बदतर हालत मुसलमानों की है .जबके हमारा सविंधान मुल्क के तमाम शहरी को जिंदगी जीने के बराबरी के अधिकार की वकालत करता है तो फिर आजादी के 66 सालों बाद भी अगर मुसलमान दलीत समाज से भी तरक्की के मामलों में कोसों दूर हैं तो सवाल पैदा होता है के इसके लिए जिम्मेदार कौन है ?और आखिर कब मुसलमानों की पिछड़ापन दूर होगी ? कयोंके इस मुल्क में मुसलमानों की आबादी 20 प्रतिशत है और जब तक 20 प्रतिशत आबादी पिछड़ा है तो उस वक़्त तक ये देश तरक्की कर सकता है ?इस पर उन लोगों को गौर करने की जरुरत है जो मुसलमानों या दलितों के बारे में भेदभावपूर्ण रवैये का प्रदर्शन करते हैं .आखिर क्या वजह रही के देश के ख़ुफ़िया एजेंसियों के प्रमुख के पद पर अब तक किसी मुसलमान को नियुक्त नहीं किया गया ?और अब के सरकार ने असुली तौर पर आईपीएस कैडर के इमान्दार और फआल ऑफिसर सैयेद आसिफ इब्राहिम को इंटेलीजेंस ब्यूरो( IB )का चीफ बनाने का फैसला किया है तो न सिर्फ सियासी गलियारों में बलके इस मुल्क के इलीट तबकों में भी चेमेंगोइंयाँ शुरू हो गईहैं .खास कर फिरका परश्त संगठन के लोगों ने एक तरह की गलत फहमी फ़ैलाने के साजिश शुरू कर दी है .सियासी तबके में इस नियुक्ति को मुसलमानों को खुश करने वाला क़दम बताया जा रहा है ,जबके सच्चाई ये है के जनाब इब्राहीम को उनके ओहदे पर उनके काबिले फ़ख्र peformance और सेनिओरिटी के आधार पर नियुक्ति की गई है .मुसलमानों को खुश करने वाली बात तब होती जब किसी जूनियर मुस्लिम ऑफिसरको ये ओहदा दिया जाता .इस तरह की चेमेगोइयाँ ये साबित करती है के बा सलाहियत और इमानदारी से आला ओहदे पर काम करने वाले मुस्लिम तबके के अफसरों को किस तरह नजर अंदाज़ करने की साजिशें होती रही हैं .यही वजह है के तिन दशक से मुल्क में IB और रॉ जैसी ख़ुफ़िया एजेंसियां हैं लेकिन मुल्क अब तक किसी मुस्लिम अफसरान को उन एजेंसियों का चीफ होने का मौका नसीब नहीं हुआ .अमर भूसन तत्कालीन स्पेशल सेक्रेटरी RAW ने इस वजह का खुलासा किया है के अब तक अगर किसी मुसलमान को ये ओहदा नहीं दिया गया तो उसके तईं मनफ़ी रवैया( negativ attitude)रहा है .उनका ये भी कहना है के जरुरत इस बात की है के खुफिया एजेंसियों में जेयदा से जेयदा मुस्लिम अधिकारिओं की नियुक्ति होनी चाहिए .सच्चाई भी यही है के मुल्क के मुख्तलिफ रियासतों की police विभाग का मामला हो या राष्ट्रीय अस्तर पर फ़ौज व दिगर हेफाजती दस्ता का मामला।मुसलमानों के बारे में कहीं न कहीं नेगेटिव attitude काम करता रहा है .जिसका सबूत ये है के पुरे मुल्क की आबादी तक़रीबन 20 प्रतिशत लेकिन मज्मुइ तौर पर पुलिस व फ़ौज में मुसलमानों की हिस्सेदारी सिर्फ 6 प्रतिशत .जैसा के सच्चर कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में साबित किया है और अगर जम्मू कश्मीर रियासत के 47000 हजार पुलिस अम्लों को अलग कर दे तो ये सिर्फ 4 प्रतिशतपर पहूच जाती है .
सारांस ये के दीगर सरकारी विभागों की तरह सुरक्षा विभाग में भी मुसलमानों की प्रतिनिधित्व बहुत कम हयानि निराशाजनक है जो न सिर्फ मुसलामनों के साथ नाइंसाफी है बल्के हमारे सविंधान के तकाजों के भी खेलाफ है ,क्योंके हमारा सविंधान जात,पात और मजहब से ऊपर उठकर तमाम शहरी को उसकी सलाहियत के मुताबिक सरकारी और गैर सरकारी ओहदों की रिकवरी की गारंटी देता है ,लेकिन अब जबके मुख्तलिफ रिपोर्टों से ये हकीकत उजागर हो रही है के के मुसलमानों को सरकारी विभागों में हिस्सेदारी देने के मामले में किसी भी सरकार की नियत साफ़ नहीं रही है क्योंके रियासत बंगाल में तीन दहाइयों से ऐसी सियासी पार्टी हुक्मरां जमात के तौर पर विराजमान रही जिसके बारे में कहा जता है के इस सियासी पार्टी की बुनियाद सेकुलरिज्म है .लेकिन इस रियासत में भी आजादी से पहले 12 प्रतिशत मुसलमान नौकरियों में थे और आज एक फिसद से भी कम है ,इसलिए किसी एक पार्टी को मुसलमानों की बदहाली के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता .मुल्क में दो तरह की ताक़तें काम कर रहीं हैं .एक वह ताक़त है जो जाहिरन सियासी पार्टी के चोलों में काम कर रही है और दूसरी ताक़त वह है के ख्वाह वह किसी पार्टी का चोला ओढ़ रख्खा हो लेकिन मुसलमानों के मामले में भेदभावपूर्ण और क़दम क़दम पर मुसलमानों के लिए रोड़े खरे करते रहे हैं .बहर कैफ syed aasif ibrahim की नियुक्ति और उनकी मेहनत और मुशक्कत और इमानदारी का फल है किसी सियासी पार्टी का तोहफा नहीं ,लेकिन मौजूदा मरकजी हुकूमत के इस एकदाम को काबिले तहसीन इसलिए करार दिया जा सकता है के इस हुकुमत ने इस नियुक्ति में किसी प्रकार की भेदभावपूर्ण रवैया नहीं अपनाया है और सविंधान के तकाजों को की पासेदारी करते हुए हक ब हक दार रसीद को सच साबित किया है .वाजेह हो के जनाब सैयद आसिफ इब्राहीम 1977 बैच के IPS हिं और उनका कैडर मध्य प्रदेश रहा है और उन्हों ने कश्मीर में बरसों काम किया है और उनकी सेवा काबिले तहसीन रही है लिहाजा हुकूमत हिन्द ने अपनी ख़ुफ़िया एजेंसी IB के मौजूदा चीफ निहचल सिन्धु के सबक्दोसी के बाद जनाब इब्राहीम को इस ओहदे से सरफराज किया है .वाजेह हो के सिन्धु 31.12. 12 को रिटायर्ड हो रहे हैं और 1 जनवरी 2013 को जनाब इब्राहीम इस ओहदे पर फाएज होंगे .इस नियुक्ति से मुस्लिम तबके के उन अफसरों की भी होसला अफजाई हुई है जो ईमानदारी के साथ अपने काम को अंजाम देते रहे हैं .इसमें कोई शक नहीं के अगर इंसान के अन्दर खिदमते खल्क का इमानदाराना जज्बा हो और सालेह फ़िक्र रखता हो तो उसे कामयाबी जरुर मिलती है .
हकिमुल्लाह हाली ने ठीक ही कहा है .............परे है चरख नील फाम से मंजिल मुसलमाँ की , सितारे जिसकी गर्दे राह हों ,वह कारवां तो है
पिन्दार उर्दू दैनिक 4/12/12 में प्रकाशित
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