एक पर एक करामात हैं हमारे निगेह्बानों के , जिनको मिली है वर्दी देश की देश की आंतरिक सूरक्षा की अमन व चैन अस्थापित करने की वे क्या क्या कर रहे खुद देखिये और अल्पसंख्यकों और मुसलमानों को बदनाम करने के खेल पे लगाम लगाईये खुद अपने और अपने समाज को सुधारिए ।कयोंकि एक हाई प्रोफाइल अपहरण में एक सी आर पी एफ के जवान की भूमिका संदेह के दाएरे में क्या आया है सी आर पी ऍफ़ और हमारे नेगेहबान बिरादरी को ही कटघेरे में खरा कर दिया है । इससे पहले भी एक सी आर पी ऍफ़ के एक आलाधिकारी का नाम देश के दुश्मन ताक़तों को सूचना मुहैया कराने के लिए सुर्खी में आया था , इशरत जहाँ प्रकरण को क्या कोई भूल सकता है क्या ? कतई भुलाया नहीं जा सकता किस तरह से मासूमों को बेदर्दी से क़त्ल किया गया ? उसको सही साबित करने के लिए किस तरह से साजिशें रची गयीं ? किस तरह से गैरकानूनी हथियार उपलब्ध करया गया था ,गैरकानूनी और खतरनाक हथियार रखने के लिए एक मुसलमान का नाम आ जाता है तो बेला सोंचे समझे पूरी तहकीकात किये बगैर उसे वतन का गद्दार और देश दुश्मन और पाकिस्तानी एजेंट तक करार देने में हिचक तक महसूस नहीं की जाती , भले ही उस शख्स पर लगा आरोप में दम हों या न हों उनकी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाती है , दुनिया पूछना चाहती है की आई बी के जो लोग इशरत जहाँ पर्करण और इस तरह के घिनौने प्रकरण में शामिल हैं जो झूठी वाह वाही के लिए ,अपनी तरक्की के लिए देश को गुमराह कर रहे माशुमों की हत्याएं कर और करवा रहे आतंकवादी नहीं ? क्या हमारा देश का कानून ,क्या कोई मजहब ऐसा करने की इज़ाज़त देता है ? अभी एक और चर्चित मामला को भी यहाँ चर्चा में लाना जरुरी समझता हूँ ,बिहार के अल्पसंख्यक मंत्री शाहिद अली खान की वतन प्रश्ति देश दुनिया के सामने जग जाहिर है , लेकिन उन जैसे सच्चे हिन्दुस्तानी को बदनाम करने के लिए जो खेल इस देश की जांच एजेंसी में बैठे बैमान और भरष्ट लोगों ने जो चाल चली अब पूरी तरह उजागर हो चुकी है । बिहार पुलिस में बैठे हेमंत करकरे टाइप आला अधिकारियों ने हवा निकाल दी है और दुनिया ने जैसा के अखबारों में निंदा करती रिपोर्टें आरही ऐसे घिनौना हरकत करने वालों को देशद्रोही तक भारत की आम जनता ने करार दे दिया है । देश के बैमानों संभल जाओ वरना तुम्हारी खैरियत नहीं देश जाग चूका है , तुम्हारी काली करतूत की सजा दिलाने के लिए उतावला है तुम्हारी सम्पति की जांच करवा कर जप्त भी करवा सकती है
समाज ,देश और हिन्दू मुस्लिम एकता के दुश्मन बन चुके हैं राजेंदर कुमार टाइप के लोग , और ऐसे लोगों को हिन्दू मुस्लिम एकता से जवाब देना होगा , बीवी से से बेवफाई कर बाजारू लड़कियों के साथ रंगरेलियां मनाने वाले मुंसिफ़ों से अच्छाई की उमीद क्या कीजिएगा? जिसने बीवी के साथ साथ फेरे लेकर क़सम खाने वाले जब बीवी को धोखा दे सकते हैं क्या वह देश समाज और इन्साफ का साथ क्या देंगे ?
झूठों का मुंह काला हो गया है , शाहिद अली खां जैसे लोगों की वतन प्रस्ती पे शक करने वालों की वतन प्रस्ती पे ही प्रश्न चिन्ह लग गया है , कयोंकि एक सच्चा इंसान और देश भक्त ऐसा नहीं कर सकता ।। बहर हाल बिहार पुलिस के ईमान्दार हेमंत करकरे टाइप आलाधिकारियों ने बिमार मानसिकता वालों का अपने इमादाराना जाँच से हवा निकाल दिया है । ..........................................................................
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शाहिद अली खान का आई एस आई से कोई लिंक नहीं ।( बिहार पुलिस ).......................................
पटना 7 फरवरी 2014
बिहार पुलिस ने राज के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जनाब शाहिद अली खान का पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आई एस आई के दो संदिग्ध एजेंटों के साथ किसी तरह का संबंध होने से इंकार किया है ।
राज के अडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (हेड कुवाटर ) रविंदर कुमार ने आज यहाँ पुलिस हेड कुवाटर पर आयोजित अखबारी कोंफेरेंस में बताया की नेपाल से सटे राज के सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात एस एस बी की तरफ से सूचना दी गयी थी के पुरबी चंपारण और सीतामढ़ी के कथित आई एस आई एजेंटों का सम्बन्ध मंत्री से है । सूचना मिलने के फ़ौरन बाद इसकी जांच के लिए चंपारण और सीतामढ़ी के एस पी को खत भेजा गया । मिस्टर कुमार ने बताया की छानबीन में सीतामढ़ी के एस पी ने बताया की जिला के बर्गिनिया के रहने वाले शख्स का पिछले आठ बरसों से साइकल की मरम्मत करने का काम कर रहा है ,उपरोक्त वजीर के साथ किसी भी तरह का कोई सम्बन्ध नहीं है ,जांच में यह भी देखा गया की साइकल की मरम्मत का काम करने वाले शख्स का भी आई एस आई से कोई लेना देना नहीं ।
ए डी जी ने बताया कि इसी प्रकार चंपारण एस पी ने भी जांच की और रिपोर्ट भेजी है ,जिस में बतया गया है की ढाका थाना के फुलवरिया गाँव में रह कर राज मजदूरी का काम करने वाले शख्स का भी मिस्टर खान से कोई संबंध नहीं है ,जांच से ये मालुम हुआ कि उस राज मजदुर का भी आई एस आई से कोई लेना देना नहीं ।
जांच से साफ़ हो गया की मंत्री पर लगाया गया आरोप बेबुनियाद है । ए डी जी ने एक सवाल के जवाब में कहा की नेपाल से सटे सीमा पर तैनात एस एस बी किसी भी तरह की कोई सूचना मिलने पर स्टेट पुलिस को इनफार्मेशन देती है और बिहार पुलिस फ़ौरन उस पर कार्रवाई करती है ।
उन्होंने एक दुसरे सवाल के जवाब में कहा कि ये मामला पुलिस की जाकारी में आया था और उसकी फ़ौरन जांच करवाई गई ।
(उर्दू दैनिक पिन्दार दिनांक 8/2/14 )
पटना 7 फरवरी 2014
बिहार पुलिस ने राज के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जनाब शाहिद अली खान का पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आई एस आई के दो संदिग्ध एजेंटों के साथ किसी तरह का संबंध होने से इंकार किया है ।
राज के अडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (हेड कुवाटर ) रविंदर कुमार ने आज यहाँ पुलिस हेड कुवाटर पर आयोजित अखबारी कोंफेरेंस में बताया की नेपाल से सटे राज के सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात एस एस बी की तरफ से सूचना दी गयी थी के पुरबी चंपारण और सीतामढ़ी के कथित आई एस आई एजेंटों का सम्बन्ध मंत्री से है । सूचना मिलने के फ़ौरन बाद इसकी जांच के लिए चंपारण और सीतामढ़ी के एस पी को खत भेजा गया । मिस्टर कुमार ने बताया की छानबीन में सीतामढ़ी के एस पी ने बताया की जिला के बर्गिनिया के रहने वाले शख्स का पिछले आठ बरसों से साइकल की मरम्मत करने का काम कर रहा है ,उपरोक्त वजीर के साथ किसी भी तरह का कोई सम्बन्ध नहीं है ,जांच में यह भी देखा गया की साइकल की मरम्मत का काम करने वाले शख्स का भी आई एस आई से कोई लेना देना नहीं ।
ए डी जी ने बताया कि इसी प्रकार चंपारण एस पी ने भी जांच की और रिपोर्ट भेजी है ,जिस में बतया गया है की ढाका थाना के फुलवरिया गाँव में रह कर राज मजदूरी का काम करने वाले शख्स का भी मिस्टर खान से कोई संबंध नहीं है ,जांच से ये मालुम हुआ कि उस राज मजदुर का भी आई एस आई से कोई लेना देना नहीं ।
जांच से साफ़ हो गया की मंत्री पर लगाया गया आरोप बेबुनियाद है । ए डी जी ने एक सवाल के जवाब में कहा की नेपाल से सटे सीमा पर तैनात एस एस बी किसी भी तरह की कोई सूचना मिलने पर स्टेट पुलिस को इनफार्मेशन देती है और बिहार पुलिस फ़ौरन उस पर कार्रवाई करती है ।
उन्होंने एक दुसरे सवाल के जवाब में कहा कि ये मामला पुलिस की जाकारी में आया था और उसकी फ़ौरन जांच करवाई गई ।
(उर्दू दैनिक पिन्दार दिनांक 8/2/14 )
सभय समाज की स्थापना हो न सकेगी झूठे बोल व नारों से , इस देश को खतरा लाहक है धर्म के गद्दारों से
ज्ञान की देवी सरसौती देवी की पूजा न करके भी इस दुनिया में कड़ोड़ो लोगों ने ऊँची तालीम और ऊँचे मुकाम पर पहुँच चुके यह एक सच्चाई है इस सच्चाई से कोई भी इनकार नहीं कर सकता , मगर जो लोग या जिनकी आस्था कि बगैर सरसौती माता के ज्ञान नहीं और हर साल एक निश्चित तिथि को मनाते हैं और उनका आस्था है इसको हम गलत भी नहीं ठहरा सकते और उनकी आस्था का कद्र कद्र करते हुए उन तत्यों से सवाल पूछा जाना जरुरी हो गया है जिनकी वजह से समाज का सुख चैन , अमन व शान्ति को खतरा जिन सरसौती माँ के झूठे भगतों के कारण उत्पन्न होने लगा है , क्या सरसौती माँ इस बात की इजाज़त देती है की उनकी पूजा के लिए चंदा के नाम पर गलत तरीके से पैसे इकठ्ठे करो ? लोगों के दिलों को ठेस पहुँचाओ , उनसे बल पूर्वक धन की उगाही करो और उन पैसों से हमारी पूजा करो , चढ़ावा चढ़ाओ और उन गलत पैसों के चढ़ावा से मुझे खुश करो ताके मैं तुम सभों को बदले में ज्ञान दे सकूँ , मैं तो हिन्दू नहीं , हिन्दू धर्म का बहुत ज्ञान नहीं लेकिन फिर भी मैं दावे के साथ कह सकता हूँ की वो ऐसा और इस घिनौनी बात की इजाजत कतई नहीं दे सकती ..................!
बात जब जबरदस्ती चंदा वसूली पर चल पड़ी है तो यहाँ एक मशहूर वाकेया इसी बिहार में एक जिला के जज के परिवार के साथ घटी , उनके परिवार के लोगों को चंदा नहीं देने के कारण असामाजिक तत्यों ने बुरी तरह से परीशान किया नतीजतन उन्हें एफ आई आर उनके ड्राईवर के तरफ से करवानी पड़ी , मामला हाई फाई होने के कारण पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए किसी एक उत्पाती को गिरफ्तार भी कर लिया , लेकिन एक चीज जो सबसे सोंचने वाली बात है आस्था के नाम पर धंधा और गुंडागर्दी करने वालों का मनोबल इतना बढ़ा हुआ की ऐसे - ऐसे लोग भी सुरक्षित नहीं ..................जब ऐसे लोग इन उत्पातियों से सुरक्षित नहीं जरा सोंचिये इस मुल्क का अल्पसंख्यक ख़ास कर मुसलमान कितना सुरक्षित होगा अंदाजा लगाया जा सकता है ?
अभी बात सरसौती माँ को खुश रखने और उनके नाम पर बलपूर्वक पैसा जुटाने की चल रही तो ये बात भी किसी से ढकी छिपी हुई नहीं के चंदा के नाम पर पटना जैसे शहर में असामाजिक तत्य केवल सरसौती पूजा ही नहीं ,दुर्गा पूजा और जितनी तरह की पूजा होती है ,उसमे पटना जहाँ पुलिस हमेशा चाक और चौबंद मोड में होती है दुकानदारों ,कोचिंग संस्थानों और बाकी कोम्मेर्सियल संस्थानों के लोगों को कितनी परिशानी और कितने तनाव से गुजरना परता है ये बात भी बताने की जरुरत नहीं .............
सरसौती पूजा के बाद का मामला क्या क्या होता है कुछ अखबारों की रिपोर्ट आपके सामने उसकी रिपोर्टिंग पेश है ...............देखिये तश्वीर और सोंचिये क्या यही धार्मिक कार्य और आस्था है क्या आस्था इन सभी चीजों की इजाज़त देता है ? जब ऐसे लोग धर्म से उठ कर काम कर रहे धर्म को बदनाम कर रहे मासूम पीस रहे तो हमारा नेयालय और हमारा सिस्टम इसके खेलाफ कोई करवाई क्यों नहीं कर रहा ? खामोश क्यों है ? सभ्य समाज ? क्या ये खामोशी सभ्य समाज और देश के लिए खतरनाक नहीं ?
बात जब जबरदस्ती चंदा वसूली पर चल पड़ी है तो यहाँ एक मशहूर वाकेया इसी बिहार में एक जिला के जज के परिवार के साथ घटी , उनके परिवार के लोगों को चंदा नहीं देने के कारण असामाजिक तत्यों ने बुरी तरह से परीशान किया नतीजतन उन्हें एफ आई आर उनके ड्राईवर के तरफ से करवानी पड़ी , मामला हाई फाई होने के कारण पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए किसी एक उत्पाती को गिरफ्तार भी कर लिया , लेकिन एक चीज जो सबसे सोंचने वाली बात है आस्था के नाम पर धंधा और गुंडागर्दी करने वालों का मनोबल इतना बढ़ा हुआ की ऐसे - ऐसे लोग भी सुरक्षित नहीं ..................जब ऐसे लोग इन उत्पातियों से सुरक्षित नहीं जरा सोंचिये इस मुल्क का अल्पसंख्यक ख़ास कर मुसलमान कितना सुरक्षित होगा अंदाजा लगाया जा सकता है ?
अभी बात सरसौती माँ को खुश रखने और उनके नाम पर बलपूर्वक पैसा जुटाने की चल रही तो ये बात भी किसी से ढकी छिपी हुई नहीं के चंदा के नाम पर पटना जैसे शहर में असामाजिक तत्य केवल सरसौती पूजा ही नहीं ,दुर्गा पूजा और जितनी तरह की पूजा होती है ,उसमे पटना जहाँ पुलिस हमेशा चाक और चौबंद मोड में होती है दुकानदारों ,कोचिंग संस्थानों और बाकी कोम्मेर्सियल संस्थानों के लोगों को कितनी परिशानी और कितने तनाव से गुजरना परता है ये बात भी बताने की जरुरत नहीं .............
सरसौती पूजा के बाद का मामला क्या क्या होता है कुछ अखबारों की रिपोर्ट आपके सामने उसकी रिपोर्टिंग पेश है ...............देखिये तश्वीर और सोंचिये क्या यही धार्मिक कार्य और आस्था है क्या आस्था इन सभी चीजों की इजाज़त देता है ? जब ऐसे लोग धर्म से उठ कर काम कर रहे धर्म को बदनाम कर रहे मासूम पीस रहे तो हमारा नेयालय और हमारा सिस्टम इसके खेलाफ कोई करवाई क्यों नहीं कर रहा ? खामोश क्यों है ? सभ्य समाज ? क्या ये खामोशी सभ्य समाज और देश के लिए खतरनाक नहीं ?
QUANTUM OF LOSS=QUANTUM OF PUNISHMENT
IPC में जिस दंड-व्यवस्था का प्रावधान किया गया है,उसे मैं लोगों के लिए दमनकारी और जजोँ के विवेकाधिकार पर छोड़े गए मनमानी मानता हूँ।किस अपराध को लेकर कितना सजा होना चाहिए,उसका सीधा संबंध पीड़ित,समाज या राष्ट्र को हुए हानि से होना चाहिए।इसलिए मैंने QUANTUM OF LOSS=QUANTUM OF PUNISHMENT कहा है।हम इसका निर्णय लेने के लिए जजों के विवेकाधिकार पर नहीं छोड़ सकते कि कितना सजा देना है।धनंजय चट्टर्जी के केस में एक घड़ी की चोरी के लिए धारा 380 के तहत 7 साल की सजा को सुप्रीम कोर्ट तक ने बरकरार रखा।क्या एक घड़ी की चोरी से इतना ज्यादा हानि हो गया कि सात साल की सजा दिया जाए?किसी को किसी ने एक थप्पड़ लगा दिया और 1 साल का जेल।क्या एक थप्पड़ से इतनी हानि हो गई कि 1 साल का जेल आरोपी को मिलना चाहिए? सजा का निर्धारण के पीछे सामाजिक पूर्वाग्रह,प्रतिष्ठा की अवधारणा,लोगों का प्रचलित नजरिया आदि कार्य करती है,ना कि Quantum of loss।आरोप सिध्द हो जाने के बाद इस बात के लिए बहस होना चाहिए कि कितनी हानि हुई।फिर Quantum of loss के अनुसार ही quantum of punishment होना चाहिए।
भ्रष्टाचार के मामले में,Whistle blower (आवाज उठाने वाले) को झूठा फंसाने या प्रताड़ित करने के मामले में quantum of loss सबसे ज्यादा होता है।भ्रष्टाचार के कारण ही सिस्टम गड़बड़ है और इस कारण से ना सिर्फ गरीबी,बेरोजगारी,महंगाई जैसी समस्या बढ़ती है बल्कि सिस्टम गड़बड़ रहने से बलात्कार,हत्या,अपहरण,रंगदारी आदि जैसे सारे अपराध भी बढ़ते हैं।इसलिए सारी समस्या और अपराध का जड़ भ्रष्टाचार है।इसलिए भ्रष्टाचार में उम्रकैद की सजा होना चाहिए।लेकिन सात साल से ज्यादा सजा देने का कानूनी प्रावधान ही नहीं है और जमानत देकर अपराधियों को सुप्रीम कोर्ट तक छोड़ देती है।Whistle blower को झूठा फंसाने वाले या प्रताड़ित करने वाले को फाँसी होना चाहिए।एक तो झूठा फंसाने वाला या प्रताड़ित करने वाला व्यक्ति काफी भ्रष्ट है,जिसके खिलाफ एक Whistle blower बोलता है।ऊपर से आवाज को दबाने के लिए फंसाया या प्रताड़ित किया जाता है।Whistle blower को फंसाने वाला या प्रताड़ित करने वाला भ्रष्टाचार में लिप्त होने के साथ साथ समाज में एक दहशत पैदा करता है कि उसके खिलाफ कोई बोले नहीं और झूठे फंसाए जाने या प्रताड़ित किए जाने के डर से ही लोग किसी भी अपराध या भ्रष्टाचार के खिलाफ आगे नहीं आना चाहते।
कहा है अब वो तथा कथित राजनेतिक पार्टी/ माननीय नेतागण जो सोमनाथ भारती पर चढाई कर रहे थे हे वीर पुरुषों कहा मुहँ छिपाएँ है ..!!!
Sandeep Saxena
Vincent Furtado
Vimal Jha
Amin Ansari
Anil Bajrangi
Arya Vart
Aap Kurla Derrel
Abhay Mishra
Aam Admi Party Agra
दिल्ली पुलिस के खिलाफ हुए एक 'स्टिंग ऑपरेशन' ने केंद्र और दिल्ली सरकार की अदावत को और हवा दे दी है। रुपये लेते कैमरे में कैद किए गए पुलिसकर्मियों के खिलाफ पहले कार्रवाई कौन करेगा इसे लेकर होड़ मची हुई है। मामले में दिल्ली सरकार द्वारा भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई करने संबंधी आदेश के तत्काल बाद मामले की जांच गृह मंत्रालय के अधीन सीबीआइ को सौंप दी गई है। पुलिस ने भी ऐतिहासिक तेजी दिखाते हुए सभी सात पुलिसकर्मियों को निलंबित कर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला भी दर्ज कर लिया।
पढ़े : सच साबित हुई सोमनाथ भारती की शिकायत
महज तीन घंटे में निलंबन, मुकदमा दर्ज होना और जांच सीबीआइ को सौंपे जाने की यह घटना देश ने पहली बार देखी। दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए गृह मंत्रालय से अनुरोध किया गया था। वहीं दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार की तेजी पर सवाल उठाए हैं।
मंगलवार रात को एक समाचार चैनल पर थानों में चल रही रिश्वतखोरी का सच दिखाया गया। कांस्टेबल से इंस्पेक्टर स्तर तक कई कर्मचारी कैमरे पर रुपये लेते कैद हो गए। बिना शिकायत दर्ज किए दूसरे पक्ष से रुपये वापस दिलाने के नाम पर अवैध वसूली चल रही थी। विभिन्न थानों में तैनात पुलिसकर्मी खुफिया कैमरे से अनजान बेबाक होकर लेनदेन करते नजर आए। रिश्वत के तौर पर एक हजार से लेकर पांच हजार रुपये तक लिए गए। समाचार चैनल पर कार्यक्रम अभी चल ही रहा था कि दिल्ली सरकार ने घटना की जांच के आदेश दे दिए। इसके तत्काल बाद मामले ने सियासी रंग लेना शुरू कर लिया।
दिल्ली पुलिस में भ्रष्टाचार को लेकर गत दिनों मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा पुलिस आयुक्त और सीधे गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे पर सवाल उठाए गए थे। मंत्री सोमनाथ प्रकरण में भी सरकार और पुलिस आमने-सामने खड़े हो गए थे। बताया जा रहा है कि दिल्ली सरकार द्वारा मामले की जांच कराए जाने से स्टिंग में फंसे पुलिसकर्मियों की बुधवार को गिरफ्तारी तय मानी जा रही थी। लेकिन गृह मंत्रलय भ्रष्टाचार के खिलाफ इस कार्रवाई का श्रेय किसी भी सूरत में केजरीवाल सरकार को नहीं देना चाहता था। लिहाजा कानूनी दांव पेंच शुरू किए गए। आनन-फानन में दिल्ली पुलिस ने सीबीआइ जांच की सिफारिश की और तत्काल इसे मंजूर भी कर लिया गया। जानकार बताते हैं कि इससे पहले किसी भी मामले में इतनी तेजी नहीं देखी गई। वजह जो भी हो लेकिन आने वाले दिनों में यह मामला केंद्र और दिल्ली सरकार की खटास और बढ़ा सकता है।जिस तरह से पूरा मामला सामने आया और पुलिस द्वारा पुलिस के खिलाफ जांच पर सवाल उठने शुरू हुए उसे देखते हुए सीबीआइ से निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध गृह मंत्रालय से किया गया था। अनुरोध को स्वीकार कर लिया गया है
दिल्ली पुलिस के खिलाफ हुए एक 'स्टिंग ऑपरेशन' ने केंद्र और दिल्ली सरकार की अदावत को और हवा दे दी है। रुपये लेते कैमरे में कैद किए गए पुलिसकर्मियों के खिलाफ पहले कार्रवाई कौन करेगा इसे लेकर होड़ मची हुई है। मामले में दिल्ली सरकार द्वारा भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई करने संबंधी आदेश के तत्काल बाद मामले की जांच गृह मंत्रालय के अधीन सीबीआइ को सौंप दी गई है। पुलिस ने भी ऐतिहासिक तेजी दिखाते हुए सभी सात पुलिसकर्मियों को निलंबित कर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला भी दर्ज कर लिया।
पढ़े : सच साबित हुई सोमनाथ भारती की शिकायत
महज तीन घंटे में निलंबन, मुकदमा दर्ज होना और जांच सीबीआइ को सौंपे जाने की यह घटना देश ने पहली बार देखी। दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए गृह मंत्रालय से अनुरोध किया गया था। वहीं दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार की तेजी पर सवाल उठाए हैं।
मंगलवार रात को एक समाचार चैनल पर थानों में चल रही रिश्वतखोरी का सच दिखाया गया। कांस्टेबल से इंस्पेक्टर स्तर तक कई कर्मचारी कैमरे पर रुपये लेते कैद हो गए। बिना शिकायत दर्ज किए दूसरे पक्ष से रुपये वापस दिलाने के नाम पर अवैध वसूली चल रही थी। विभिन्न थानों में तैनात पुलिसकर्मी खुफिया कैमरे से अनजान बेबाक होकर लेनदेन करते नजर आए। रिश्वत के तौर पर एक हजार से लेकर पांच हजार रुपये तक लिए गए। समाचार चैनल पर कार्यक्रम अभी चल ही रहा था कि दिल्ली सरकार ने घटना की जांच के आदेश दे दिए। इसके तत्काल बाद मामले ने सियासी रंग लेना शुरू कर लिया।
दिल्ली पुलिस में भ्रष्टाचार को लेकर गत दिनों मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा पुलिस आयुक्त और सीधे गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे पर सवाल उठाए गए थे। मंत्री सोमनाथ प्रकरण में भी सरकार और पुलिस आमने-सामने खड़े हो गए थे। बताया जा रहा है कि दिल्ली सरकार द्वारा मामले की जांच कराए जाने से स्टिंग में फंसे पुलिसकर्मियों की बुधवार को गिरफ्तारी तय मानी जा रही थी। लेकिन गृह मंत्रलय भ्रष्टाचार के खिलाफ इस कार्रवाई का श्रेय किसी भी सूरत में केजरीवाल सरकार को नहीं देना चाहता था। लिहाजा कानूनी दांव पेंच शुरू किए गए। आनन-फानन में दिल्ली पुलिस ने सीबीआइ जांच की सिफारिश की और तत्काल इसे मंजूर भी कर लिया गया। जानकार बताते हैं कि इससे पहले किसी भी मामले में इतनी तेजी नहीं देखी गई। वजह जो भी हो लेकिन आने वाले दिनों में यह मामला केंद्र और दिल्ली सरकार की खटास और बढ़ा सकता है।जिस तरह से पूरा मामला सामने आया और पुलिस द्वारा पुलिस के खिलाफ जांच पर सवाल उठने शुरू हुए उसे देखते हुए सीबीआइ से निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध गृह मंत्रालय से किया गया था। अनुरोध को स्वीकार कर लिया गया है
मानवाधिकार ने लिया संज्ञान , राहुल कुमार के आवेदन पे कार्रवाई।
बिहार मानवाधिकार आयोग ने मेरे द्वारा दायर करवाई गई याचिका पर सुनवाई करते हुए मुजफ्फरपुर SSP से एक महीना के भीतर जवाब मांगा है जिसमें नवोदय के एक पूर्व छात्र रौशन कुमार पर नाबालिग होने के बावजूद बालिग के कोर्ट में केस चलाने का आरोप लगाया गया है।मामला 2009 का ही है,जब वह दसवीं कक्षा में और 18 वर्ष से कम उम्र का थे। 11 दिसंबर 2013 को इन्हें और इनके माता-पिता को प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी के कोर्ट से जमानत करवाना पड़ा है और 7 अप्रैल 2014 से इनके खिलाफ भी इसी कोर्ट में मुकदमा चलेगी।किशोर न्याय कानून,2000 की धारा 15 के अनुसार किशोर न्याय बोर्ड में इनके मामले पर सुनवाई होना चाहिए और किशोर न्याय बोर्ड को इसी धारा के तहत मारपीट जैसे छोटे मामले पर किशोर का Counselling करके या Parents को direction देकर छोड़ देना चाहिए।
आरोप झूठा है क्योंकि पुलिस निरीक्षक के पर्यवेक्षण रिपोर्ट और ग्रामीणों के गवाही के मुताबिक करीब 8 बजे सुबह इनके घर पर कुछ लोगों ने आकर इनके माता-पिता से मारपीट की और वहाँ पर ये भी उपस्थित थे।इनपर और इनके माता-पिता पर भी बगल के किसी दूसरे जगह पर ठीक उसी समय करीब 8 बजे सुबह मारपीट करने का आरोप है।आखिर एक ही व्यक्ति एक ही समय में दो अलग अलग जगह पर कैसे उपस्थित हो सकता है?इनके खिलाफ गवाह भी वही लोग हैं जिनपर इनके घर पर आकर मारपीट करने के आरोप को सही पाया गया है।जब उस समय ये गवाह इनके घर पर मारपीट कर रहे थे तो फिर ये गवाह ठीक उसी समय बगल के उस जगह पर कैसे उपस्थित हो गए?पूर्व डीजीपी और बिहार मानवाधिकार आयोग के कार्यकारी अध्यक्ष नीलमणी इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं और ये उम्मीद की जा सकती है कि लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए नाबालिग का मानवाधिकार का हनन करने में शामिल दोषी पुलिस वाले पर कार्रवाई करेंगे।आखिर दारोगा को क्यों नहीं दिखा कि दसवीं के एक नाबालिग लड़का पर भी आरोप है?( Rahul kumar के फेसबुक वाल से , 4/2/14)
झूठा फंसाना किसी के साथ गुलाम जैसा व्यवहार करना है।
झूठा फंसाना किसी के साथ गुलाम जैसा व्यवहार करना है।इस देश का 70 प्रतिशत मामला झूठा होता है और इतना ही सही मामला को समाज में दबा दिया जाता है।INDIA AGAINST FALSE CASE के नाम से मैं एक LAW FIRM खोलूँगा और गंभीर झूठे मामले के खिलाफ वकील बनूँगा।झूठे फंसाकर मानवाधिकार के साथ साथ कई मौलिक अधिकारों का भी हनन किया जाता है।झूठे फंसाकर अनुच्छेद 21 यानि जीने के अधिकार का हनन किया जाता है।साथ ही,कभी कभी अनुच्छेद 20(3) और 22 का भी हनन कर लिया जाता है।कई बार जाति,धर्म,आर्थिक पिछड़ापन के कारण भी झूठा फंसाया जाता है जो अनुच्छेद 14 और 15 का हनन है और झूठे मामले के कारण कई की रोजगार चली जाती है जो अनुच्छेद 19 और 21 का हनन है।समाज झूठा मामला से सबसे ज्यादा त्रस्त है।महज किसी के बयान के आधार पर कार्यवाही करना बेवकूफी है।आपलोग सुप्रीम कोर्ट में मेरा द्वारा दायर जनहित याचिका को जरुर पढ़ें।
(Rahul kumar के फेसबुक वाल से)
Falsely implicate someone like slaves with. This is the case the country 70 percent false and suppressed in society as right case. INDIA called the FALSE CASE AGAINST a LAW FIRM I will be serious and false case against lawyer kholunga. false phansakar human rights abuses of fundamental rights along with. Article 21 false phansakar that live with rights abuses., Sometimes the article 20 (3) and 22 are also abuses. many times due to race, religion, economic pichdapan also falsely implicated which article 14 and 15 of the abuses and false cases because many of the jobs moved to which article 19 and 21 abuses. most of the false case stricken society. based on a mere statement to act stupid. public interest litigation filed by Supreme Court aplog to notice my Read. (Translated by Bing)
एक तो उसने मासूमों को पकड़ कर जिंदगियां तबाह किया , अपने धर्म को दुनिया की नजर में बदनाम किया , मगर मासूमों की जिंदगी बर्बाद करने वालों और अपने धर्म को बदनाम करने वालों को आपने सजा न देकर कौन सा अच्छा काम किया ? पेश है तीन रोजिय उर्दू अखबार " दावत "( 26th -28th) में छपी रिपोर्ट का हिंदी रुपंतार्ण
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बेक़सुरों की गिरफ्तारी पर भी सजा का प्रावधान होना चाहिए ।
21 जनवरी 2013 के अखबार में दहशतगर्दी के इल्जाम में मुसलमानों की गिरफ्तारी ,रिहाई और उन पर मुक़दमों से सम्बंधित चार खबरें आई , पहला मामला था हरयाना के मेवात का जहां राज पुलिस को वहां न तो कोई दहशतगर्द ,न ही माजी (past ) में इस मुस्लिम बहुसंख्यक एलाले या उसके आस पास के क्षेत्रों में दह्शात्गादी का कोई घटना भी नहीं घटी जिससे की इस क्षेत्र पर शक व सुब्हात किया जा सके ,लेकिन देहली पुलिस जिस तरह देश के अन्य मुस्लिम बहुल इलाकों को दहशत गर्दी का अड्डा करार देकर वहाँ से बेक़सुरों को गिरफ्तार करने के दरपे है । उसकी नाक के नीचे और पड़ोस में स्थित मेवात कैसे उनकी गिरफ्त में आने से महफूज रह सकता था । चुनानचे आज कल मेवात के मुस्लिम नौजवान उनकी आखों में खटक रहे हैं । अभी दिसंबर में उसने मेवात से दो मुस्लिम नौजवानों हफीज रशीद और शाहीद को उठा कर देहली की जेल में बंद कर दिया , एक तो वह गिरफ्तारी मशकूक थी और ऊपर से अपने दो मुखबिरों लेयाक़त अली और जमीरुद्दीन के हवाले से ये प्रोपेगंडा कर के मुजफ्फरनगर के फसाद पीड़ित लोगों पर भी दहशतगर्दी का शक जाहिर कर दिया ताकि कांग्रेस के महासचीव राहुल गाँधी के बयान को प्रमाणित किया जा सके ( टाइम्स ऑफ़ इंडिया , 11/1/2014 )
अब उसने मेवात के ही एक गाँव मांडी खेड़ा के रहने वाले मुबारक नाम के एक नौजवान को उठाने की कोशिश की बल्कि उठाकर फिरोजपुर झ्ड़का थाना ले भी गई थी लेकिन मुबारक के आदात और एखलाक और कैरेक्टर से वाकिफ इलाके के लोगों ने जम कर विरोध किया और सड़क पर धरना देकर आमदो रफ़्त बंद कर दी तो स्थानिये पुलिस हरकत में आई और चोरी छुपे मोबारक को लेजाने वाली डेल्ही पुलिस के चेंगुल से आज़ाद कराया , सवाल ये है की अगर मुबारक बेक़सूर था तो उसे उठाया क्यों गया ? अगर कसूरवार था तो डेल्ही पुलिस ने उसे क्यों छोड़ दिया ? जवाब इसके अलावा और कुछ नहीं है कि आदत ,पोलिसी और मजहबी भेदभाव से मजबूर डेल्ही पुलिस एक और बेक़सूर मुस्लिम नौजवान को दहशतगर्दी के इलज़ाम में बर्बाद करना चाहती थी ये सब उस वक़्त हो रहा है जब डेल्ही पुलिस के पास केंद्रीय गृहमंत्री सुशिल कुमार शिंदे दहशतगर्दी के इलज़ाम में गिरफ्तार अल्पसंख्यक युवकों के मामलों पर नजर्शानी के लिए एक कमिटी तशकील देने की खातिर रियासतों को मक्तूब ( लैटर )भेजने की बात कह रहे हैं और चिराग तले ही अंधेरा है ,खुद इनके मातेहत पुलिस बेक़सुरों को गिरफ्तार करने का सिल्ल्सिला बंद करने को तैयार नहीं है ,..............................................................!
दूसरी खबर ये थी के मुरादाबाद की पोटा अदालत ने 11 साल और सात माह बाद तीन मुस्लीम नौजवानों 1. जावेद उर्फ़ गुड्डू 2. ताज मोहम्मद 3. मकसूद को बेक़सूर साबीत होने के बाद बाइज्ज़त बड़ी कर दिया , जबकि चौथे मुल्जीम मुमताज़ मिया के खेलाफ मुक़दमे की सुनवाई उसी अदालत में अभी जारी है , इन चारों को STF इंस्पेक्टर " के बाल्यान " ने 13/8/2002 को रामपुर से गिरफ्तार किया था , इन्हें गिरफ्तारी का क्रेडिट तो मिल गया और ये चीज इनके कार्किर्दगी में शामील हो कर इनके प्रमोशन का जरिया भी बन गयी होगी लेकिन बेक़सुरों को क्या मिला ? इनका करियर और जिंदगी तो तबाह हो गयी ,साढ़े ग्गेयारह साल बाद जो इन्साफ मिला है वह इनके नुक्सान की भरपाई नहीं कर सकता जब किसी को नाक़र्दा गुनाहों की सजा साढ़े गयारह साल मिल सकती है जिस इंस्पेक्टर ने गैर कानूनी काम किया है किसी के करियर और जिंदगी से खेलवाड़ किया है उसे इस किये की सजा उसे इसके .........दुगुनी क्यों नहीं दी जा सकती ? बेला वजह लम्बी गिरफ्तारी और दहशतगर्दी में फर्क क्या है ? दोनों में जिंदगियां तबाह की जाती हैं , क्या देश का सविंधान और अदालतें सिर्फ आम लोगों को सजा देने के लिए है ? चाहे वह गलती करे या न करे जब आम आदमी जुर्म करता है उसे सजा दी जा सकती है तो पुलिस अहलकारों के जुर्म करने पर या वर्दी के गलत इस्तेमाल पर सजा क्यों नहीं दी जा सकती ? कसूरवार पुलिस वालों को सजा न देने का नतीजा ये है कि ओ बेक़सुरों पर जेयाद्ती कर के अपना उल्लू सीधा करते रहते हैं ...............................................!
तीसरी खबर ये थी कि उत्तर प्रदेश के अलग अलग जेलों में बंद बेक़सूर नौजवानों पर से मुक़द्मात वापस लेने के मामले की सुनवाई मुल्तवी करने की दरखास्त राज सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच से उत्तर प्रदेश सरकार ने ये क़दम उस वक़्त उठाया जब बेंच ने सरकार से कहा था ओ कथित दहशत गर्दी के इलज़ाम में जेलों में बंद नौजवानों पर से मुक़दमों को नहीं उठा सकते कयोंकि वह मुक़द्मात मरकजी हुकूमत (केंद्र सरकार के कानून के तेहत दर्ज किये गए हैं इसलिए इन्हें वापस लेने के लिए केद्र की इजाजत लेनी जरुरी है , एक तरफ तो केंद्रीय गृहमंत्री राज सरकारों से अल्पसंख्यक नौजवानों के खेलाफ मुक़द्मात पर विचार के लिए मक्तूब (पत्र) भेजने की बात कह रहे और दूसरी तरफ रेयास्ति हुकूमत रेहायाई के लिए कुछ करना चाहती है तो केंद्र का कानून रुकावट बन रहा है ,तीसरी तरफ मिस्टर शिंदे की रियासत महाराष्ट्रा में इन्ही की पार्टी कांग्रेस की हुकूमत के सरकारी वकील राजा ठाकरे माले गाँव बम धमाके के नौ मुस्लिम आरोपियों की रिहाई में रुकावट खड़ी कर रहे हैं जिनको " एन आई ए " ने क्लीन चीट दे दी है ....................................................................!सरकारी वकील का सनसनी खेज दावा तो और भी गौर तलब है कि इस मामले की enquiry पहले महाराष्ट्र A T S और CBI ने की थी और इनकी तफ्तीश में इन नौ आरोपियों पर इलज़ाम सही था बाद में सियासी दबाव और सियासी मकसद के तेहत मामले को एन आई ए के सुपुर्द कर दिया गया जिसने इन्हें क्लीन चीट दे दी , सवाल ये है की ATS और सी बी आई ने किसी के इशारे पर या किसी की मर्ज़ी के खेलाफ enquiry की थी और एन आई ए को मामला सोंपने के लिए किसका और क्या सेयासी दबाव था ? और इसमें सेयासी मकसद क्या था ? फिर ये भी सवाल पैदा होता है की क्या एन आई ए को अब तक तमाम मामले किसी सियासी दबाव या किस मकसद के तेहत सोंपे गए हैं , और अब तक जिन जिन मामलों की enquiry की है ओ गलत है । फिर जिस ATS और इसकी enquiry को विश्वस्निये कहा जा रहा है इसकी असलियत भी औरंगाबाद हथियार जब्ती मामले में सामने आ चुकी है जब इसके दो गवाहों ने इनके हवाले से अदालत में दाखिल बयान को गलत बताते हुए अदालत को बतया कि न तो उनहोंने कोई बयान दिया था और न ATS ने इनके हवाले से दाखिल बयान को पढ़ कर सुनाया था ..........................................................................!
एक दुसरे मामले में समाजी कार्यकर्ता नरेंदर दाभोलकर के कतल के मामले में भी गिरफ्तार मनीष नागौरी ने अदालत के सामने ये सनसनी खेज खुलासा किया है कि एक तो इसे सियासी दबाव के तेहत गिरफ्तार किया गया दुसरे महाराष्ट्र ATS राकेश मारिया ने इकबाले जुर्म के लिए मजबूर किया था और इसके एवज में 25 लाख रूपये की पेशकश की थी , गर्ज ये कि दहशत गर्दी के मामलों में अब तक जितने बेक़सूर व बाइज्ज़त बड़ी हो चुके हैं ,पोटा के मामलों के जायेजे में भी ये हकीकत सामने आ चुकी है कि बेक़सूर को ही सजा मिलती है खाह वो टार्चर की सकल में हो या क़ैद की सूरत में कसूरवार पुलिस वालों को नहीं जबकि इनकी दोहरी गलती होती है एक तो ओ लॉ एंड आर्डर की सूरतेहाल को बेहतर नहीं रखते उनकी लापरवाही और गफलत की वजह से सरपशंद अनासीर ( (असामाजिक तत्य ) अपने मकसद में कामयाब हो जाते हैं दुसरे अगर ओ हरकत में भी आते हैं तो सिर्फ बेक़सुरों को गिरफ्तार करते हैं ,आज तक किसी भी हुकूमत और अदालत ने नोटिस नहीं लिया कि आम लोगों को इनकी नाक़रदा गुनाहों की सजा 10 -10 साल , और 15 -15 साल कैद के तौर पर क्यों मिल जाती है ? और पुलिस को उसकी गलतियों की सजा क्यों नहीं होती ?
महज़ 1 महीना पुरानी दिल्ली आम आदमी सरकार से आप और क्या चाहते हैं ?
Aam Aadmi Party Banswara
Tuesday at 14:28
महज़ 1 महीना पुरानी दिल्ली आम आदमी सरकार से आप और क्या
चाहते हैं ?
✪लालबत्ती और VIP कल्चर समाप्त !
✪400 युनिट से कम पर बिजली के बिल आधे !
✪20,000 लीटर पानी, प्रत्येक कनेक्शन परप्रतिमाह मुफ्त !
✪दिल्ली से रिटेल में एफडीआई (FDI) समाप्त !
✪ठण्ड से परेशान गरीब असहाय लोगों के लिए 300 रैनबसेरे !
✪बिजली कंपनियों के लेखे जोखे की CAG द्वारा जाँच के आदेश !
✪दिल्ली जलबोर्ड में 800 कर्मचारियों का तबादला, 3 सस्पेंड !
✪दिल्ली जलबोर्ड जलबोर्ड घोटाला में 56 अधिकारी फंसे !
✪भ्रष्टाचार से लडने के लिए एंटी-करप्शन 1031 और 25356971 नंबर जारी !
✪नर्सरी एडमिशन हेल्पलाइन नंबर, 011-27352525 नंबर जारी !
✪डोनेशन के नाम पर स्कुलों में सरेआम होनेवाली सौदेबाजी बन्द !
✪भ्रष्टाचार पर की जा रही है लगातार सटीक कार्यवाही !
✪दिल्ली से दलाली प्रथा समाप्त !
✪पुलिसवालें अपने घरखर्च के लिए अपनी सेलरी इस्तेमाल करने लगे हैं !
✪राशन माफियाओं की नाक में नकेल ।
✪शराब माफियाओ के खिलाफ लडते हुए शहीद होने वाले दिल्ली पुलिस के जवान के परिवार को एक करोड रूपये का मुवायजा !
✪संगम विहार, देवली गाँव जैसे इलाको में पानी माफियाओ पर शिकंजा...बौरवेल लिए सरकारी कब्जे में !
✪दिल्ली में मोजूद बंग्लादेशी घुसपैठिए शॉर्टलिस्ट !
✪तेजी से बनाई जा रही हैं मोहल्ला सभाएँ !
✪दिल्ली जनलोकपाल बिल का फाइनल ड्राफ्ट तैयार !
✪सवराज बिल पर काम चल रहा है !
✪महिला सुरक्षा दल बनाने पर काम जारी !
✪दिल्ली सरकार के अंतर्गत ठेकों पर काम करने वाले लगभग एक लाख कर्मचारियों को स्थायी करने का ऐलान !
✪दिल्ली में कम से कम 20 से 30 फीसदी भ्रष्टाचार कम हुआ !
✪दिल्ली के लोधी कॉलोनी इलाके में एक रिक्शावाला ने किया एनडीएमएसी के अस्पताल का उद्घाटन !
✪दिल्ली आम आदमी सरकार ने तेज भागते बिजली मीटरों की जांच कराने का फैसला !
✪दिल्ली सरकारी स्कूलों में सुधार लाने पर काम जारी !
✪स्कूलों के अध्यापकों का काम करने का समय बढ़ा कर 45 घंटे/हफ़्ता किया !
✪दिल्ली में एक महीने में बदलाव आया !
✪जनता पर हुए अत्याचारों के लिए धरना !
✪दिल्ली सरकार में 8000 से ज्यादा भर्तियां !
✪दिल्ली में 83% लोग आम आदमी की सरकार के काम से संतुष्ट - TOI (The Times of India) सर्वे !
✪दिल्ली में 76% लोग दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के काम से संतुष्ट - CNN-IBN-CSDS POLL !
दिल्ली आम आदमी सरकार ने एक महीने में मध्य प्रदेश बीजेपी की, राजस्थान बीजेपी की, छत्तीसगढ़ बीजेपी की और मणिपुर कांग्रेस की चुनी हुई सरकार से ज्यादा काम किया...यही सच्चाई है...कोई भी तुलना करके देख ले !
कांग्रेस बीजेपी के हाथों बिका हुआ मीडिया दिल्ली आम आदमी सरकार इन कामों पर कुछ नहीं बोल रहा...इन सब कामों को दबाने के लिए सोमनाथ भारती और धरने वाला मुद्दा उछाला जा रहा है !!! जागो जनता जागो !!!
चाहते हैं ?
✪लालबत्ती और VIP कल्चर समाप्त !
✪400 युनिट से कम पर बिजली के बिल आधे !
✪20,000 लीटर पानी, प्रत्येक कनेक्शन परप्रतिमाह मुफ्त !
✪दिल्ली से रिटेल में एफडीआई (FDI) समाप्त !
✪ठण्ड से परेशान गरीब असहाय लोगों के लिए 300 रैनबसेरे !
✪बिजली कंपनियों के लेखे जोखे की CAG द्वारा जाँच के आदेश !
✪दिल्ली जलबोर्ड में 800 कर्मचारियों का तबादला, 3 सस्पेंड !
✪दिल्ली जलबोर्ड जलबोर्ड घोटाला में 56 अधिकारी फंसे !
✪भ्रष्टाचार से लडने के लिए एंटी-करप्शन 1031 और 25356971 नंबर जारी !
✪नर्सरी एडमिशन हेल्पलाइन नंबर, 011-27352525 नंबर जारी !
✪डोनेशन के नाम पर स्कुलों में सरेआम होनेवाली सौदेबाजी बन्द !
✪भ्रष्टाचार पर की जा रही है लगातार सटीक कार्यवाही !
✪दिल्ली से दलाली प्रथा समाप्त !
✪पुलिसवालें अपने घरखर्च के लिए अपनी सेलरी इस्तेमाल करने लगे हैं !
✪राशन माफियाओं की नाक में नकेल ।
✪शराब माफियाओ के खिलाफ लडते हुए शहीद होने वाले दिल्ली पुलिस के जवान के परिवार को एक करोड रूपये का मुवायजा !
✪संगम विहार, देवली गाँव जैसे इलाको में पानी माफियाओ पर शिकंजा...बौरवेल लिए सरकारी कब्जे में !
✪दिल्ली में मोजूद बंग्लादेशी घुसपैठिए शॉर्टलिस्ट !
✪तेजी से बनाई जा रही हैं मोहल्ला सभाएँ !
✪दिल्ली जनलोकपाल बिल का फाइनल ड्राफ्ट तैयार !
✪सवराज बिल पर काम चल रहा है !
✪महिला सुरक्षा दल बनाने पर काम जारी !
✪दिल्ली सरकार के अंतर्गत ठेकों पर काम करने वाले लगभग एक लाख कर्मचारियों को स्थायी करने का ऐलान !
✪दिल्ली में कम से कम 20 से 30 फीसदी भ्रष्टाचार कम हुआ !
✪दिल्ली के लोधी कॉलोनी इलाके में एक रिक्शावाला ने किया एनडीएमएसी के अस्पताल का उद्घाटन !
✪दिल्ली आम आदमी सरकार ने तेज भागते बिजली मीटरों की जांच कराने का फैसला !
✪दिल्ली सरकारी स्कूलों में सुधार लाने पर काम जारी !
✪स्कूलों के अध्यापकों का काम करने का समय बढ़ा कर 45 घंटे/हफ़्ता किया !
✪दिल्ली में एक महीने में बदलाव आया !
✪जनता पर हुए अत्याचारों के लिए धरना !
✪दिल्ली सरकार में 8000 से ज्यादा भर्तियां !
✪दिल्ली में 83% लोग आम आदमी की सरकार के काम से संतुष्ट - TOI (The Times of India) सर्वे !
✪दिल्ली में 76% लोग दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के काम से संतुष्ट - CNN-IBN-CSDS POLL !
दिल्ली आम आदमी सरकार ने एक महीने में मध्य प्रदेश बीजेपी की, राजस्थान बीजेपी की, छत्तीसगढ़ बीजेपी की और मणिपुर कांग्रेस की चुनी हुई सरकार से ज्यादा काम किया...यही सच्चाई है...कोई भी तुलना करके देख ले !
कांग्रेस बीजेपी के हाथों बिका हुआ मीडिया दिल्ली आम आदमी सरकार इन कामों पर कुछ नहीं बोल रहा...इन सब कामों को दबाने के लिए सोमनाथ भारती और धरने वाला मुद्दा उछाला जा रहा है !!! जागो जनता जागो !!!
I have read the speech of honorable president of India "Pranav Mukherjee
Rajnesh Kumar Pandey ( from Facebook)
Sunday at 19:29 · Edited
I have read the speech of honorable president of India "Pranav Mukherjee," which he had delivered in the pre-eve of 26 January. This time the speech was not looks like the speech of president. If you analyze than I am confident that one common man also understands that what actually he wants to say. His total focus was on the movement of ‘AAM AADMI PARTY.’ He called is as a whimsical, catastrophe for the society. One thing I would like to add here. He is the President of this country. Everyone knows that if President speaks than he give a concrete, meaningful and visionary points in his/her lecture. Might be he/she is a political person but at least he/she has to maintain the dignity of the post. There are 28 states in our country and union territory also. If a chief of a country speaks than he/she must give a concrete which touches the whole. In our country everyday there are numerous organizations and political parties who are doing strike, demonstration and many other way of protest. It is not an area where a man with greater post and dignity should focus always. People have respect and expectations with President, Prime Minister and higher authorities. It is their responsibility to show a greater development model and a vision to the countrymen. But unfortunately, it was lacking.
Rahul Kumar and 11 others like this.
Banani Supriya Das
According to various news channels.. Honb'l President Dr. Mukherjee is maintaining the tradition of previous presidents like Sir Radhakrishnan, Dr. KR Narayanan...
According to various news channels.. Honb'l President Dr. Mukherjee is maintaining the tradition of previous presidents like Sir Radhakrishnan, Dr. KR Narayanan...
1 · Sunday at 20:23
Madhuchhanda Das
Gud analysis...i also gone through his lecture..i too found it ws not up 2 the mark.. He should learn lesson from kalam saab..for me he is da ultimate...
Gud analysis...i also gone through his lecture..i too found it ws not up 2 the mark.. He should learn lesson from kalam saab..for me he is da ultimate...
Lalit Kuchalia
president ka kahna ye bilkul sahi hai ki lokubhavan arajakta kabhi bhi shasan ka option nahi ho skti
president ka kahna ye bilkul sahi hai ki lokubhavan arajakta kabhi bhi shasan ka option nahi ho skti
Sunday at 22:02
Ambarish Pathak
We are suffering from the political systems of our country.our President is also part politics.when the common man vote for president then the system will change.the president should be non political person. president ka control 10 janpath se hota hai.this should be stop.
We are suffering from the political systems of our country.our President is also part politics.when the common man vote for president then the system will change.the president should be non political person. president ka control 10 janpath se hota hai.this should be stop.
1 · Yesterday at 02:26
Rajnesh Kumar Pandey
Lalit Kuchalia प्रेसिडेंट पूरे देश को एक विजन दिखा सकते हैं अपने भाषण में, न कि किसी एक पार्टी पर बोल कर अफनी छवि को नुकसान पहुँचाएं। पार्टियों पर बात करने को राजनीतिक पार्टियां पहले से मौजूद हैं। ये कांग्रेस पार्टी का लिखा भाषण पढ़ रहे थे, लगता है।
Lalit Kuchalia प्रेसिडेंट पूरे देश को एक विजन दिखा सकते हैं अपने भाषण में, न कि किसी एक पार्टी पर बोल कर अफनी छवि को नुकसान पहुँचाएं। पार्टियों पर बात करने को राजनीतिक पार्टियां पहले से मौजूद हैं। ये कांग्रेस पार्टी का लिखा भाषण पढ़ रहे थे, लगता है।
Today at 01:21
Rajnesh Kumar Pandey
Madhuchhanda Das I am totally agree with u. He is congress president. not the president of India.
Madhuchhanda Das I am totally agree with u. He is congress president. not the president of India.
1 · Today at 01:22
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