मुल्क के गद्दार ?


मुल्क की रक्षा हो न सकेगी झूठे बोल और नारों से 

इस मुल्क को खतरा लाहक है इस मुल्क के ही गद्दारों से 

दहशतगर्द का झूठा ख़ुफ़िया तंत्र की चाल है ये  

दामन अपना दूर ही रखना इनके तंद शरारों से 

संसद भवन पर हमला होना , इंटेलिजेंस की गफलत है ।

कौन है इसके पीछे , आखिर किन लोंगों की शरारत है ?

इसकी जाँच से अब तक कोई राज  न अफशां हो पाया ।

ऐसा लगता है इसके अन्दर कोई सेयासत है ।

बटला हाउस में मारे जाएँ लोग निहत्ते गोली से।
लुत्फ़ उठाएं वर्दी वाले कब तक खून की होली से ।
काम करे शैतान कोई,इल्जाम आये माशुमों पर ।

जुर्म छुपाया जायेगा कब तक उनकी झूटी बोली से ।

समझौता एक्सप्रेस पर हमला किस ने किया ये बतलाओ ?
मालेगांव,नानडेर पर हमला कैसे हुआ ये बतलाओ ?

मक्का मस्जिद में हमला,अजमेर की घटना याद करो ।

जामे मस्जिद में गर कौन मिला ये बतलाओ । 

कौन वतन का रखवाला है और यहाँ गद्दार है कौन ?

कौन है सच्चाई पे कायेम जालिम बद किरदार है कौन ?
हेमंत करकरे ने दिखला दिया प्रग्या, पुरोहित का चेहरा ।
बात शरीफ समझने की है गुंडों का सरदार है कौन ?

             मोहम्मद शरीफ कुरैशी 

               संपर्क - 9431496545

नोट -उपरोक्त कविता उर्दू दैनिक पिन्दार के दिनांक 24/11/2012 के अंक में पेज no -5 पे प्रकाशित हुई थी 


कसाब को फांसी दी गई या बाहर भेज दिया गेय ?

          पिन्दार  उर्दू अखबार  में दिनांक 26 9.2012 को  प्रकाशित खबर आपके सामने पेश है
करकरे को कसाब ने नहीं हिन्दुत्वादी दहशतगर्दों ने क़त्ल किया ---ब्रिगेडियर सावंत का बयान , 26/11 के दहशतगर्द पे लगा सवालिया निशान
मुंबई 25 नवम्बर( एजेंसी )

पूर्व मेम्बर पार्लियामेंट और सवराज्य पुक्श के राष्ट्रीय ADHYAKCH ब्रिगेडिअर सुधीर सावंत ने कहा है के अजमल कसाब को फांसी  देकर सरकार ने कोई बरा कारनामा अंजाम नहीं दिया है .इस केस के असल मुजरेमिन मास्टरमाइंड और और COSPIRATOR डेविड HEADLY और THAUAR  HUSAIN  RANA  अमेरिका में हैं ,जब तक उनको हिंदुस्तान लाकर उनके खेलाफ करवाई नहीं की जाती उस वक़्त तक 26/11 के प्रभावितों को इंसाफ नहीं मिलेगा न ही इन्साफ के तकाजे पूरे होंगे .सुधीर सावंत ने मुंबई से प्रकाशित होने वाले दैनिक उर्दू टाइम्स से बातें करते हुए कहा के जिस ख़ुफ़िया ढंग से कसाब को फांसी दी गई उस से शक व शुबा पैदा होता है के क्या वाकई कसाब को फांसी दी गई है या फिर उसको कहीं भेज दिया गया।उनहोंने कहा के अगर कसाब को फांसी दी गई है तो उसकी लाश कहाँ है .सरकार जिस तरह से राजदारी बरत रही है उससे अन्दाजा होता है के कुछ छुपाने की कोशिश की जारही है .ब्रिगेडिअर सुधीर सावंत ने कहा के 26/11 वारदात की आर में ATS के तत्कालीन प्रमुख हेमंत करकरे को शहीद कर दिया गया और आज तक सरकार ने यह बताया के उनकी  हत्या कैसे हुई ?उनको कौन सी गोली लगी ?उनहोंने कहा के हेमंत करकरे को 26/11 की आर में बकायेदा क़त्ल कराया गया था।उनको कसाब ने नहीं बलके हिन्दुत्ववादी आतंकवादियों ने हत्या की जिन्हें इसबात का पूरा मौका उपलब्ध कराया गया था .ब्रिगेडियर सुधीर सावंत मजीद बताया के  बिहार के भुतपूर्व MLA राम बाला ने 26/11 हमलों के सिलसिले में  हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में PETITION दाखिल की लेकिन सरकार के तरफ से आज तक जवाब नहीं दिया गया .ब्रिगेडियर सुधीर सावंत ने  मजीद ये भी कहा के कामा हॉस्पिटल में जो आतंकवादी फंस गए थे उसको भागने का मौका एक पुलिस अफसर सदानंद दाते ने उपलब्ध कराइ जो उसवक्त कामा हॉस्पिटल में मौजूद थे और अभी जॉइंट पुलिस COMMISSIONER  लॉ एंड ऑर्डर हैं .सुधीर सावंत ने माजिद ये भी कहा के शहीद हेमंत करकरे ने हिंदुत्ववादी दहशतगर्दों के कब्जे से जो दस्तावेज बरामद की थी जो वीडियो क्लिप्स वगैरा जमा की थी वह कहाँ है ? आखिर उनकी जाँच क्यों नहीं हो रही ?सुधीर  सावंत ने मजीद ये भी कहा है के उन्हों ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट PETITION दायर कर के इल्जाम लगाया है के आठ आतंकी वारदातों की IB ने गलत जाँच की है .इसकी सही तरीके से जाँच कराइ जाये .उन्हों ने दावा किया के ताज, ओब्राए, और नरीमन हाउस पर हमला करने वालों की संख्या 10 नहीं 25 थी .उन्हों ने मांग कि है के सरकार 26/11के आतंकी हमलों  से सम्बंधित असल हकीक़त मंजरे आम पर लाये और इस मामले में जो अस्थानिये लोग शामिल थे उसकी जाँच कराइ जाये .उन्हों ने कहा के लोकल माफिया के शामिल हुए बगैर आतंकी वारदात की कोई घटना नहीं हो सकती . 26/11 वारदात के COSPIRATOR DAVID HEADLY  को मुंबई  का दौरा कराने वाला चाँद मदार नामी एक सख्श था जिसे बाद में मार दिया गया .सावंत ने कहा के साबिक पुलिस अधिकारी SM मुसर्रफ ने अपनी किताब  WHO KILLED KARKARE यानि करकरे को किसने मारा में जी सवाल उठाये थे सरकार ने उसका जवाब अभी तक नहीं दिया है .उन्हों ने कहा के वह 26 जनवरी 2013 को मुंबई में एक महा पंचायत करेंगे और 26/11 हमलों की जाँच अपने तौर पर खुद करेंगे .

बदले बदले से सरकार नजर आते हैं

मालूम नहीं किस फिल्म का गाना है : बदले बदले से सरकार नजर आते हैं,हम को बर्बादी के आसार नजर आते हैं ,आज के परिद्रिश्य में ये गाना नरेंदर मोदी , और भाजपा ,और RSS के रवैए पर पूरी तरह फिट और हीट मालूम परते हैं,3 अक्टूबर के दैनिक पिन्दार के पहले पेज पर गुजरात के मुख्यमंत्री से सम्बंधित दो प्रमुख खबरें प्रकाशित हुई थी जिस में पहली खबर थी  मोदी ने सोनिया गाँधी से माफी मांगी और दूसरी खबर थी के इसी गाँधी के कातिल के गिरोह का सरगना ये कहता है के गान्धियाई  नजरिये से फ़ायदा उठाना जरुरी है .कहीं ऐसा तो नहीं के 2 अक्तूबर को सूरज पशचिम से उगा था।कयोंके मोदी जैसे मगरूर और गंधियाई नजरियात का विरोधी इन्सान कहता है के गंधियाई आइडियोलोजी के जरिये आज भी संसार दहशतगर्दी ,और ग्लोबलवार्मिंग  का मुकाबला किया जा सकता है .फिर वह सख्स  कहता है के आलमी दहशतगर्दी से बचाने  के लिए   आज भी गंधियाई राह हमवार हैं .नरेंदर मोदी जैसे सफाक कुरुर जालिम सम्प्रदाईक ,भाईचारा  और अमन के दुश्मन की जुबान से ऐसे शब्दों का निकलना न सिर्फ हैरत अंगेज है बल्कि अपनी अजुबियत में सातों अजूबे कमतर नजर आते हैं .पहली खबर के मोदी ने सोनिया से माफ़ी मांगी पढने और सुनने में अजूबा लगा .ये माफ़ी किसलिए मांगी कयोंके उसने सोनिया गाँधी पर इल्जाम लगाया था के वह अपने इलाज के लिए अमेरिका गईं थी तो उनके इलाज पर  सरकारी खजाने से अठारा सौ अठासी करोर रूपये खर्च हुए  थे जो कहीं से भी न इखलाकी और न सवैंधानिक तौर पर दुरुस्त था।  उस  सख्स  ने 

 उसका जवाज  ये   पेश  किया  tha  ke ek shaksh ne RTI se ye malum kiya tha.lekin jab us sakhs se jab media ne malum kiya to usne wajeh taur kah diya ke ye sab narendar modi ke dimag ki upaj hai .hum ne jo RTI ke jariye jo malum karne ki koshish ki narendar modi ke beyan dene tak uska jawab he nahi mila tha .uske baad jo jawab mila esme saaf taur pe kaha geya hai ke sarkar ka ek dhela bhi kharch na hua .uske beyan se narendar modi tilmila uthe .aur ruswaiyon ke khauf se usne soniya gandhi se mafi mangli.ye mafi usne itni assani se nahi mangi hai .
usay bakhubi malum hai sidhe taur pe sonia gandhi se takrane ka anjaam keya ho sakta hai?
gujraat me tarkki ka dhidhora pitne wale narendar modi ke chehre par jitne naqaab chadhe the wah sab dhire dhire sarak rahe hain .wah jis bekhaufi wa ferakhdili se bharashtachar ka jor hai ab wah chupi hui nahi aur na he gujrat qatleaam ki tahqiqaat khatm hui hai,iske alawa abhi unpar muqadma baqi hai aur wah bhi gujrat se bahar maharashtra me.narendar modi ko ye yaqin hia ke ATS ko to kharida ja sakta hai lekin suprim court ko nahi.fir CBI ki specail team ko apna kaam anjaam de rahi .jo barahe rast PM ke daftar se sambandh hai aur suprim court ke parti jawab de hai .in tamam sachchaiyon ne jumla taur pe narendar modi
ke sar se hat dharmi aur garur ke aaseb ko thori der ke liye dur kardiya.
warna koi soch bhi nahi sakta tha ke narendar modi jaisa jaisa tanashah apne kiye par sharminda hokar kisi se mafi bhi mang sakta hai .agar mamla sonia gandhi ke alawa aur kisi ka hota to ye mamla tul pakar kar kahan jata kuch kaha nahi ja sakta tha.keyon ke  narendar modi  ki pust panahi ke liye  RSS iski puri bhagwa toli maidan ne jang me he kud jati  jisme tor for ke liye sansar bhar mein mashur bjrang dal bhi hai
BJP ke karjkarta ka to kuch kahna he nahi.keyonke filhal narendar modi RSS ke chahete hain.saath he bhjpa aur RSS ko ye yaqin hai ke BJP bagair modi ke 2014 ke aam election me kamyaab nahi ho saki. isliye    
RSS ki puri koshish hai ke narendar modi ko PM ke post ke liye dawedar banakar pesh kiya jaye.
lekin bhajpa ke kuch durandesh logon ki nigahein dekh rahi hian ke agar wakai aisa hua to fir jo kasar baki hai wah puri hojayegi.
                                                                                                         (बेनाम गिलानी )
   पिन्दार दिनांक 15.11.2012 पटना में प्रकाशित शेष भाग फिर कभी



जाँच हुई तो फंसे गे कई वरिये अधिकारी?

क्या बिहार सरकार के इस दावे में दम है?के वह नक्सल प्रभावित जिलों में गरीबों को सरकारी योजनाओ लाभ आसानी से मिले सरकार हर संभव प्रयास किये हुए,बिचौलिए 

पर  विशेष नजर rakhkhi जा रही है ,मगर बिहार के नक्सल प्रभावित एक जिला से जो खबर मिल रही है वह सरकारी दावे की पोल खोलने के साथ ही कई वरिये पदाधिकारियों को जाँच के दाएरे में ला दिया है

    पूरबी चंपारण के फेन्हारा   पर्खंड के बार परसौनी पंचायत के रहने वाली 

1.जैलस देवी, पति  राजेन्दर पासवान 2 .रम्भा देवी ,पति सुनील दोनों 

का घर पंचायत के गबन्धी  गाँव से है वित्तिय वर्ष 2005-2006 में सरकार ने बेघर होने के कारण एक एक  अदद  घर बनाने के लिए पैसे 

दिए ,लाभार्थियों ने बताया है के एक  एक  टेलर ईंट देकर ठग दिया गया 

जब इस संबध में तत्कालीन पर्खंड विकास पदाधिकारी से लिखित शिकायत 

करने उनके दफ्तर  करने  गई तो रिसीविंग नहीं दिया गया,रिसीविंग देने के 

नाम पर तत्कालीन BDO बिगर गए जैसा के लाभार्थियों का कहना है,डांट 

डपट करते हुए कहा के करवाई चाहये या रिसीविंग?कारवाई  और आशवासन के बिच 7साल   बीत गए पर आज तक इन्साफ न मिला 

किस अधिकारी ने क्या कहा ?

जब इस संबध में वर्तामान BDO से उनके सरकारी मोबाइल पे दिनांक 

7.11.12 को उनका मंतव जानने की कोशिस की गई तो उनका कहना था के जब तक आज 

की तारीख में लाभार्थी लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराएगा तब तक मै 

करवाई नहीं करूँगा .

डीएम पूर्बी     चंपारण और आयुक्त तिरहुत का भी कुछ इसी प्रकार का बयान था 

जब प्रधान सचिव  से बात की तो उन्होंने एक अधिकारी का मोबाइल नंबर और नाम बताते हुए कहा 

के आप आदित दास नाम के अधिकारी से बात कर लीजिये वे सिर्फ इंद्रा आवास का मामला ही देखते हैं,जब उनसे बात की गई तो कहा  SMS के जरिये मामले के बारे में बताइए कारवाई अवश होगी,sms  कर ने के बाद संपर्क किया तो उन्होंने कहा  के उपविकास आयुक्त को  SMS को forward  करते हुए कारवाई करने को कह दिया है,सूचना है के अबतक किसी पदाधिकारियों ने इन गरीबो का हाल पूछने नहीं गए हैं।

               

पुरबी चंपारण में PDS के लाखों कूपन जाली ?

बिहार के पुरबी चम्पारण के कल्यानपुर ब्लॉक के सिर्फ  manichapra पंचायत में 185 से अधिक PDS कूपन लावारिस अर्थात मिर्तकों ,फर्जी लोगों

 के नाम पर मौजूद होने के बावजूद दोषियों पर करवाई हेतु अबतक कोई प्रयास नहीं की गई है,जबके इस सम्बन्ध में बिहार के खाध  एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री श्री शेयाम रजक सहित विभाग के प्रधान सचिव सहित तमाम वरिए पदाधिकारियों को उनके सरकारी मोबाइल पे SMS भेज सूचित भी कर दी गई है,इसके बावजूद करवाई न होने से जनता में तरह तरह की  बातें  की जाने लगी हैं,और ये सवाल सुरु हो गया है के आखिर विभाग के आला अघिकारी फर्जी कूपनो पर सरकारी अनाजो का उठाओ वर्षो से करने वालों पर कारवाई करने से क्यों कतरा रही ?इन सवालों का जवाब जनता जानने  को बेताब है।

पुरबी चंपारण का DEO office ने नितीश कुमार के सुशासन को किया दागदार ?

मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार का सुशासन एक बार फिर कटघेरे में खरा होता मालुम दिखाई पर रहा,वजह बना    है,    इस     बार बिहार का education department ,बतायाजाताहै के पूर्बी चंपारणके फेन्हारा पर्खंड के श्री सुनील कुमार पासवान जो एक  गरीब और अनुसूचित जाती से सम्बन्ध रखते हैं,इनसे सरकार ने 6   सालो से भी जेयदा समय तक पंचायत शिक्चक   (shikchak )   के रूप में काम कराया  जब बात वेतन  भुगतान  की आई     तो       उन्हें अवैध करार दिया जा रहा श्री सुनील कुमार उपरोक्त जिला एवं पर्खंड के बारा परसौनी में 2003 से ही लगातार काम करते आ रहे,इनके वेतन पे रोक साल 2006 में  लगा दी      गई ये   कहते हु के  इनका तीसरा पुनर्नियोजन नहीं हुआ इसलिए इनकी बहाली अवैध है 

यहाँ बताते चले के जो भी शिक्चक (shikchak )para teacher  के रूप में कार्ज कर रहे थे सरकार ने अपने एक आदेश

 के जरिये उन्हें पंचायत shikchak मान चुकी ऐसी हालत में श्री सुनील कुमार पासवान और बाकी पंचायत shikchak      अवैध किस कानून के तेहत हुए?एजुकेशन डिपार्टमेंट के अधिकारीयों को इसबात का जवाब देना होगा अगर कोई कहे के इन सभी को बहुत पहले ही हटा दिया गया था उन्हें  ये साबित करना होगा के किस बुनियाद पर और हटाने का आधार क्या     था? यहाँ बताते चले की पूर्व  एवं वर्तमान BEO      के      रिपोर्ट    ने  साबित  कर दिया है के   साल 2003से 2012तक इनका  काम   संतोष 

जनक रहा है इसकी पूष्टि स्कूल adhyakch ने भी की है ,यही रिपोर्ट  त्रिअस्तरिये जाँच टीम जिसे तत्कालीन जिला पदाधिकारी ने गठित 

की  थी      टीम    के   रिपोर्ट    पर  सवलिया    निशान  लगाने    के  साथ ही team के लोगों को भी जाँच के दाएरे में लाती है   और    अगर

 मामले की निगरानी जाँच हुई तो टीम के  लोगों को कई  कारणों   से 

जेल जाने की नौबत तक आ सकती है ,पहली वजह तो  ये  है  के  जब  DM ने जाँच टीम गठित की   तो  रिपोर्ट   DM  को   ही    आगे की करवाई हेतु सोंपा जाना था,मगर बताया जाता है के इस मामले में  ऐसा नहीं किया गया,क्यों नहीं  किया  गया? मामले की जाँच कर रहे  BIHAR HUMAN RIGHTS COMMISSION    में उठने वाला है,जानकारों की माने तो रिपोर्ट इसलिए नहीं   सोंपी  गई  क्योंके के जाँच team को इस बात का  दर था के जाँच  में   ऐसा    कुछ भी ठोस सबूत  नहींमिल पारही थी  जिससे की श्री सुनील कुमार पासवान और बाकी 

पंचायतshikchako को हटाया जा सके,मगर मुखिया चुनाव 2006 की घोसना हो जाने के कारन आचार संहिता औधि में मुखिया पुत्र 

और उनकी भतीजी की बहाली रद्द होने की पूरी खतरा थी ,जानकारों  का मानना है के त्रिअस्तारिये जाँच टीम मिली भगत पहले से थी इसी वजह कर मुखिया और उसके रिश्तेदारों को बचाने के लिए रिपोर्ट को दबा  दिया  गया,अब जबके के मामले की जाँच बिहार मानवाधिकार आयोग कर रहा त्रिअस्तारिये 

जाँच रिपोर्ट का  समाप्त हो चूका , बिहार मानवाधिकार आयोग के 

आदेश के आलोक में होरहे जाँच के बाद अपना गला फंसता देख वरिये पदाधिकारियों ने  मुखिया के   रिश्तेदारों की  बहालियों को  रद्द   कर दिया है,सवाल यहाँ ये पैदा होता है के जब पूर्व BEO ने बहाली को गलत

साबित  कर चुकी थी  उस  समय  बहाली  क्यों  नहीं रद्द की गई ?जिस अवैध बहाली को 2007और उससे पहले रद्द होनी चाहिए  थी  वह 

2012में क्यों हो रही ? अब जबके बहाली  रद्द हो चुकी ऐसी  हालत  में मुखिया  पर FIR  दर्ज क्यों  नहीं  हो  रही    यहाँ    बताते    चले    की 

त्रिअस्तारिये जाँच टीम को और कुछ न मिला तो श्री सुनील कुमार 

पासवान  को  मुखिया के जरिये  स्कूल  के  प्रधानाचार्ज   के   जाली 

hastakchar को आधार बनाकर हटाने सही साबित करना भी मुखिया 

और जाँच टीम की मिली भगत को दरसा रहा,चुके संबधित  HM   ने 

अपने      hastakchar          को      जाली       करार       देते         हुए

कानूनी करवाई की मांग भी की है  इसके   बावजूद       जालसाजों   पे 

कारवाई का नहोना  DEO ऑफिस के कारनामों को उजागर करती है 

के पुरबी चम्पारण के deo ऑफिस गरीब और इमानदारों के लिए किस तरह दुश्मन की भुमिका निभाती तो दूसरी तरफ अमीर और पैसा वालों 

के लिए किस तरह  दोस्त की भूमिका में खरी रहती है?

बरमेश्वर मुखिया का कत्ल और सीबीआई जाँच

ranweer sena के चीफ बरमेश्वर मुखिया के क़त्ल को मुद्दा बनाकर इसपर सियासत तेज़ करदी गई है वह लीडर जो बर्मेस्वर मुखिया को कभी अच्छी निगाह से नहीं देखते थे इस कत्ल के बाद अब तो वह भी इसके गम में आंसू बहाने में लगे हैं और यज साबित करना चाहते हैं के इस मुखिया ने अपनी जिंदगी में सैकरों हरिजनों और दलितों का जो सामूहिक कत्लेआम किया और अपनी रणवीर सेना के जरिये उनकी बस्तियों को घेरकर उन में आग लगा दी वह बिलकुल जाएज थी वह रणवीर  सेना जो हरिजनों और दलितों की दुश्मनी में बनायीं गई थी उस के संस्थापक के क़त्ल पे आज खुद उन ही हरिजनों और दलितों के लीडरान आंसू बहा रहे हैं और इसपर अपनी सियासत कररहे हैं .इन सियासी लीडरों की करतब बाजी से ये साबित होता है के यहाँ की सियासत में दोगलापन भरा हुआ है और सियासत दानो की कोई स्थाई सीधी रह नहीं है .सवाल ये पैदा होता  है के बरमेश्वर मुखिया क्या था?उसके जिन्दा रहने से राष्ट्र को क्या फायेदा था?और उसके क़त्ल से राष्ट्र को क्या नुकसान हो गया ?इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं इभी बरमेश्वर मुखिया के क़त्ल के बाद जो उनके हम्दर्स सामने आये हैं वह उनके हमदर्द हरगिज नहीं हैं वह तो उस क़त्ल  पर अपनी सियासत कररहे हैं .बर्मेस्वर मुखिया के बारे में आम खेयाल यही है के इस से बरा कातिल बिहार की तारीख में आज तक नहीं गुजरा है जिसने सौ से जेयादा इंसानों को बे रहमी से क़त्ल किया फिर इतने बरे कातिल से इतनी हमदर्दी क्यों की जा रही है ?इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता के बरमेश्वर मुखिया किसी खास पार्टी खास सदस्य था .लेकिन इस बात को रहस्य रखा गया और किसी भी पार्टी ने उसे अपना नहीं कहा .उसके क़त्ल के बाद इस राज पर से पर्दा नहीं हटा के वह किस पार्टी के लिए काम करता था और रणवीर सेना के बनाने का मकसद क्या था?बरमेश्वर मुखिया का संबध किस पार्टी से था अगर इस राज पर से पर्दा हट जाता तो सी .बी .आई .की जाँच में बहुत जेयदा आसानी ही जाती और इस कटीले आज़म का रिश्ता किन किन लोगों से था और ये के इस इस क़त्ल में कोण ग्रुप सरगरम रहा ये तमाम बातें सामने आजतीं  और बर्मेस्वर मुखिया के हामियों का सुराग मिल जाता .लेकिन अब जबके सी बी आई की जाँच शुरू हो चुकी है तो इसकी उमीद जरूर है के कुछ ऐसी बातें सामने आएँगी जिन्हें लोग अबतक नहीं जानते थे और इसका भी जरुर खुलासा ही जाएगा के उसका किस सियासी पार्टी से संबध था.और वह किन लोगों की सियासत का मोहरा था और आज जो लोग उसके नाम पर मातम कर रहे हैं वह कौन लोग हैं .बमेश्वर मुखिया का क़त्ल तो होना ही था उसे कोई रोक नहीं सकता था .ये तो तै है के हर किर्या की प्र्तीकिर्या होता है जिन सैकरों अफराद का मुखिया ने क़त्ल किया था उसके रद्दे अमल में उसका भी क़त्ल होना था .लेकिन अहम् सवाल ये नहीं है के उसने दूसरों का क़त्ल किया इसलिए उसका भी क़त्ल होगेया सबसे अहम् सवाल ये है के बर्मेस्वर मुखिया किस सियासी ग्रुप  के इशारे पर हरिजनों और दलितों के गाँव के गाँव  जला देता था और बेदर्दी से उनका क़त्ल करता था .सी बी आई पर दोहरी जिम्मेदारी लागु हो गई है के बर्मेस्वर मुखिया के क़त्ल की तहकीकात के साथ साथ ये भी मालुम करे के बर्मेस्वर मुखिया ने जिन तीन सौ लोगो का क़त्ल किया वह किसके हुक्म से और उसका हुक्म देने वाला कौन था अगर ये बात भी खुल कर सामने आ गई तो मुखिया के क़त्ल पर घर्याली आंसू बहाने वालो की साडी सियासत   सामने आजायेगी और किसी भी मामले के बाद ये सियासत करना भूल जायेंगे
note.उर्दू आखबार पिन्दार के सम्पद्किये पेज पे पर्काशित दिनांक।10.06.12 से ली गई है .


KARNATAK POLICE KI SAHJORI SE BIHAR MEIN SANSANI

mai julm tawatar kiye jaunga lekin,ilzam tujhe koi meray sar na milega.
haliya dergh saal ke andar jis teji se muslim,honhaar,qabil.aur sarif nujawano ko gair qanuni dhang se giraftar kiya geya hai ussay karnatak   wa mumbai police ki dabagai parkash mein aayi hai.aur ab tak bela sabut unki tamam operatoin unke khatarnaak natije aur mansubaband sajish ki dalil hai.jisay dushmanane islam ke ishare pe anzaam diya jara hai.unki es jalil harkaton se ye baat to saaf hai ke iske pichey islam dushman taqtein apna sari taqtein harch kiye huye hai.chahe wa yahudi lobi ho ya fir eshai mishniryan.keyon ke muslim tanzeemo ke lakh protest ke bawajud hukumat-e-hind ki laparwai jale par namak chirakne ka kaam karrhi hai.ek taraf amriki esai padri ke jariye holy quraan ko nazar e aatish karne ki khabar se musalmano ke jajbaat ko thes pahucha hai jis ke baad muslim tanzeemein us gustakh ke khilaf karwaiyon ka mang karti najar aa rahi hain.jis par ANISUR RAHMAN AAQIB general secretary madarsa faijun nesha ne is ki shakht ninda ki.aur amriki hukumat se mutalba kiya ke usay charch se barkhasht kiya jaye.aur dusri taraf musalmano ki giraftari ka mamla darde sar bana hua hai.iske khelaf nitish sarkaar ne delhi huqumat se giraftari ko rokne ki apeal ki magar iska koi asar nahi hua.jila parishad member habibullah hashmi ne es giraftari ka jimmedar congress hukumat ko thahraya hai.nej karwane urdu ke kanwenar aur qanunsaj cauncil mein partipakch ke neta professor gulam gaus ne darbhanga basamela gaon se 25 sala naujawan kafil akhtar ko intellgence ke jariye aatankwadi ke naam par giraftaar kiye jane par sakht partikirya jahir karte huye kah ke bihar aur musalman ko badnaam karne ki sajish ka hissa hai.isliye ke 15 saalon mein lalu rabri hukumat mein dahsat gard ke naam par ek bhi giraftariyan nahi hui.aur mahaj 7-8 mahine mein14-15 logon ki giraftari hairat mein dalti hai.mr gaus ne ilzaam lagaya ke kendr sarkar aur raaj sarkar darbhnga.madhubani ki shikchit mahaul bha nahi rahi.isliye markaji hukumat israil ke khfiya agency mosad ke ishare par kaam kar rahi .yad rahe ke 6 may 2012 ki subah thik namaj e fajir karnatak police ke adhikari ghar ki pahli manjil se daboch kar farar ho gai thi.uske father ke mutabik unhe be bunyaad fasaya geya hai.elake ke logo ke mutabik kafil sarif milansar mijaj ka larka hai,uske father abdussalm ne media ko bataya ke jab wah dudh lane jarahe the ke 3 aadmi motarbike pe sawar mujhe dekhkar rok kar naam pata puchna shuru kiya mai ne jab wajah janne ki koshish ki to unlogon ne bataya ke humlog mobile tower ke liye sarwe karrahe hain,wah hamari taak mein ghar tak pahucha aur dakuon ki tarah ghar mein jabardasti dakhil hua aur kafil akhtar ko lungi aur ganji mein he jabran pakar liya aur uski biwi ne bataya ke unlogon ko itni jaldi thi ke saath mein kuch kapre to keya kafil akhtar ko toilet bhi jane ka mauka nahi diya.mokami thana ne es bare mein puche jane par apne ko mamle se anjaan bataya .kafil akhtar ki giraftari se ek baat samne aayi hai ke asthaniye police yam jila parsasan ko bagair bataye bahar ki police ne jis tarah gair ekhlaqi tariqay se baad namaj fajir soyi hui halat mein kadfil akhtar ko kamre se jabardasti nikal kar le gai,ye dabangai nahi to aur keya hai?aapne dekha karnatak police ka natak.
ye amanwiye harkat hukumat ke mohafejin ki hai?ke jiske pas log apni parishani aur bachao ke waqt yaad kartye hain. bela shuba ye (dhoka)police ke naam par kalank hai,bagair kisi warunt ke puray ghar ki talashi lena aisi hai jispar jitni aalochna ki jaye kam hai,sarkari tukron par palne wale hukumat ke gaddaron ne jin muslim naujawano ko pahle se giraftaar kar rakhkha hai uske khilaaf abhi tak koi sabut ekaththa nahi kar payi aur ab wah giraftaar ka rahi hai usay kis tarah fasayegi ,dahshatgardi or aatanki wardaat  kon   karaha ?janta se ab dhaki aur chupi nahi rahi.ab koi aur naya wisay chuna jaye taake logon ko pata bhi na chale aur tumhara kaam ban jaye .hindustan ki qanunu dafaat IPC ke mutabik giraftaar suda muljim ko najdik ke kisi magistrate ke samne 24 ghante ke andar pesh karna lajmi hai.magar aisa nahi hua .in jaise logo ke khilaaf karwai honi chahiye qanun ka sahara lekar hindustani act ki khilafwarji karrahe hain.kul mila kar kafil akhtar aur un jaise kai masum aur be gunah lof gayur jamali,naqib,danis kafil ahmad aur kafil akhtar wagaira ko ek sajish ke tahat fasaya geya hai.taftish karne par ye baat samne aayi hai ke ye tamam log majhabi dindar aur dusron ki madad kaene wale log the.jin mein se jeyadatar ne BIHAR se bahar ka safar bhi nahi kiya hai fir unhe kis buniyaad par bangalore ,mumbai aur delhi ke wardaton se jor diya jarah hai?aur agarche mujrim hote to bhala koi mujrim khuleaam logon ke bich rahta hai?aur fir keya bihar ki police ne churi pahan rakhkhi hai. ke karnatak ki police ko ye natak karna parraha hai?kendra sarkar se apeal kartein hain ke wah in giraftar shda logon ki jald se jald rihayi karaye aur karnatak police ke liye ye hukm jari kare ke wah aisi harkaton se baaz aaye warna markaji hukumat aane waale chunao meinsarmindagi u5thani paregi.jaisa ke gulam gaus ne press confrence se khetab karte huye congress aur nda sarkar ko chetaoni detey huye kaha ke UP ke natije se sabak le warna bihar mei bhi unka wahi anzaam hoga.
isliye jaruri hai ke giraftar logo ke tamam mamle ki janch jald se jald karke unhe riha kiya jaye.hum nitish sarkar ke jariye janch ke hukm se mutmain hain aur sahi faisle ki umid karte hain .urdu dainik pindar dinak 15.5.2012 mein parkashit. osama salfi ki report. 

kisan ganj mp ne bhi karnatka police pe uthai anguli

pindar urdu daily dinank.17.5.12 page 10 pe chapi thi khabar ke anusar.
Aatankwas ke naam par adhadhundh  giraftarion ka silsila band ho( maulana asrarul haque quasmi. MP kisanganj,bihar)
bihar ke yuwakon ki giraftari par hairat aur dukh jatate huye eminent social worker and MP kisanganj asrarul haque qasmi ne kaha ke bihar raaj se pichle dino karnatak police ke jariye dahsatgardi ke  iljaam mein kafi ahmad ki giraftari ka jo samne aata wah hairat karne wala hai. unhon ne tazub ka izhar karte huye kaha ke desre reyasat police bihar mein dakhil hokar wahan ek  ke naujawan ko giraftaar karke lejati hai aur bihar police ko kanokan khabar tak nahi hoti unhone sawal kiya ke BIHAR POLICE
wastaw mein anjaan rahi ya usnay jaan bujhkar aakhein band  karli thi?
dahshat gardi ke ilzaam mein bina sabuton ke musalmano ko giraftar kiye jane par shakht patikirya jahir karte huye
kishanganj ke MP maulana asrarul haque qashmi kaha ke ye intahai dukh ki baat hai ke musalmano ko dahsat grdi
ki aar mein parishan karne ka silsila abhi bhi jari hai.
halake bahut se muslim naujawan adalat ke jariye reha kiye jachuke hain aur ye sabit ho chuka hai ke wah beqasur
they,jabke police aur jach agenciyan barabar unke qasurwaar hone ka dawa karti rahi hain.aur jhut sabut pesh karti rahin
hairani ki  baat ye hai ke  haqiqat samne aane ke bawajud police aur janch agenciyon ne  abhi tak hosh ke nakhun nahi liye hain aur wah apni purani dagar pe chalte huye musalmano he ko taftish ka
wisay banaye huye hai. aur unhein giraftar karti firrahi hai.
maulana ne kaha ke jabtak asal dahsatgardon ke irdgird shikanja nahi kasa jayega us waqt tak dahshatgrdi  ko khatam nahi kiya jasakega. aur dukh ki baat hai ke dahshargard  police aur janch agenciyon ki giraft se bahar hain aur be qasuron par police pura jor kharch kar rahi ,unhon ne kaha ke  dahsatgardi ek khatarnak kaam hai aur uska koi majhab nahi hita,isliye usko majhab se
jorkar ke upar uthkar dekhna chahiye taake beqasuron ki giraftari ka silsila band ho
unhone huqumat   bihar se mang ki hai ke wah es baat ko yaqini banaye ke aanewale dino mein dusre raaj
ki police ke jariye gair qanuni dhang se  bihar se kisi aadmi ki giraftari ka mamla samne na aaye.   

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1 – 2 of 2
Anonymous Anonymous said...
samastipu
निरीक्षण में बंद पाया गया मध्याह्न भोजन
May 07, 09:57 pm
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सरायरंजन, जाप्र : प्रखंड के विश्वंभरपुर एलौथ स्थित राजकीय अल्फा मध्य विद्यालय में सोमवार को स्थानीय पंचायत के मुखिया राजेश्वर शर्मा की निगरानी में विद्यालय का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान विद्यालय में मध्याह्न भोजन बंद पाया गया। इस संबंध में प्रधानाध्यापक सच्चिदानंद प्रसाद ने बताया कि चावल के अभाव में मध्याह्न भोजन बंद है। जबकि स्टोर रूम के खोलने पर पाया गया कि उसमें 7 बोरा चावल मौजूद था। इस निरीक्षण में विद्यालय तदर्थ शिक्षा समिति की सचिव शांति देवी एवं निगरानी समिति सदस्य मो. रेयासत उर्फ गब्बर भी मौजूद थे।
May 7, 2012 11:07 PM
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